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                <title> RBI - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> RBI RSS Feed</description>
                
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                <title>सहकारी बैंकों पर RBI सख्त : नए लाइसेंस के लिए कड़े नियम, बीमा सेवाओं में उतरने की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिज़र्व बैंक ने सहकारी बैंक खोलने के नियम सख्त किए। अब न्यूनतम पूंजी, कम NPA और नियमित ऑडिट अनिवार्य। नाबार्ड आकलन करेगा। बैंक बीमा सेवाएं भी दे सकेंगे, जिसके लिए आईआरडीएआई लाइसेंस जरूरी।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rbi-strict-on-co-operative-banks-strict-rules-for-new-license/article-148823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/nehru-sahakar-bhawann.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और वित्तीय मजबूती सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने नए सहकारी बैंक खोलने के नियमों को सख्त कर दिया है। अब लाइसेंस प्राप्त करने के लिए न्यूनतम पूंजी, मजबूत वित्तीय स्थिति और बेहतर संचालन प्रणाली अनिवार्य होगी। लाइसेंस के लिए कड़े मानदंड RBI के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सहकारी बैंकों को गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) का स्तर कम रखना होगा और नियमित ऑडिट कराना अनिवार्य किया गया है। साथ ही National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) बैंक की कार्यक्षमता, प्रबंधन और संचालन मॉडल का आकलन करेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर जिलों में नए बैंक खोलना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए सरकार चरणबद्ध तरीके से विस्तार की रणनीति अपनाने पर विचार कर रही है।</p>
<p>बीमा व्यवसाय में उतरने की तैयारी वहीं, सहकारी बैंक अब बीमा सेवाएं देने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। नियमों में बदलाव के बाद बैंकों को बीमा एजेंट के रूप में काम करने की अनुमति दी गई है, जिससे वे फसल, जीवन और सामान्य बीमा योजनाएं ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगे। तकनीकी और अनुपालन चुनौतियां बीमा क्षेत्र में प्रवेश के लिए बैंकों को Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) से कॉर्पोरेट एजेंसी लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा, प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति, डिजिटल सिस्टम का विकास और ग्राहक डेटा सुरक्षा को मजबूत करना भी जरूरी होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 12:52:48 +0530</pubDate>
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                <title>आरबीआई ने संजय अग्रवाल को एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी एवं सीईओ पद पर तीन वर्ष के लिए पुनर्नियुक्ति की दी मंजूरी, नियुक्ति19 अप्रैल 2026 से होगी प्रभावी </title>
                                    <description><![CDATA[एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ संजय अग्रवाल को आरबीआई ने तीन वर्ष के लिए पुनर्नियुक्त किया है। नियुक्ति 19 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है। आरबीआई की स्वीकृति से उनके नेतृत्व में बैंक में स्थिरता और सुशासन पर भरोसा दिखता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rbi-approves-reappointment-of-sanjay-aggarwal-to-the-post-of/article-143052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (एयू एसएफबी), जो भारत का सबसे बड़ा स्मॉल फाइनेंस बैंक है और जिसे एक दशक बाद पहली बार रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से यूनिवर्सल बैंक में परिवर्तन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी मिली है, घोषणा की कि आरबीआई ने 12 फरवरी 2026 के अपने पत्र के माध्यम से संजय अग्रवाल (डीआईएन: 00009526) को प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में तीन वर्ष की अतिरिक्त अवधि के लिए पुनर्नियुक्त करने की मंजूरी दी है। यह नियुक्ति 19 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।</p>
<p>इससे पहले बैंक के निदेशक मंडल ने 17 अक्टूबर 2025 को तथा शेयरधारकों ने 26 दिसंबर 2025 को उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी थी, जो आरबीआई की स्वीकृति के अधीन थी।</p>
<p>संजय अग्रवाल 14 फरवरी 2008 को एयू फाइनेंसियर्स के प्रबंध निदेशक बने थे। 19 अप्रैल 2017 को संस्था के बैंक में परिवर्तन के बाद वे एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी एवं सीईओ बने। इसके बाद 19 अप्रैल 2023 से 18 अप्रैल 2026 तक के वर्तमान कार्यकाल सहित उनके प्रत्येक कार्यकाल को आरबीआई की मंजूरी मिली है। यह बैंक में परिवर्तन के बाद उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है, जो उनके नेतृत्व में स्थिरता और सुशासन पर नियामक के विश्वास को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 17:20:57 +0530</pubDate>
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                <title>आरबीआई एमपीसी बैठक होगी अगले सप्ताह, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद </title>
                                    <description><![CDATA[आरबीआई की एमपीसी की 3-5 दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों में 0.25% कटौती की प्रबल संभावना है। रिकॉर्ड न्यूनतम 0.25% मुद्रास्फीति, 8.2% जीडीपी वृद्धि, जीएसटी कटौती और आयकर छूट बढ़ने से आर्थिक संकेत सकारात्मक हैं। सरकार और रेटिंग एजेंसियाँ भी दरों में कमी के संकेत दे चुकी हैं, जिससे निवेश और खर्च बढ़ने की उम्मीद है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rbi-mpc-meeting-to-be-held-next-week-interest-rate/article-134223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(14).png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगले सप्ताह होने वाली बैठक में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद है। रेपो दर वह दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। एमपीसी की बैठक 03 से 05 दिसंबर को होने वाली है। इससे पहले अक्टूबर को हुई बैठक में रेपो तथा अन्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछली बार आरबीआई गर्वनर ने कहा था कि मुद्रास्फीति की कम दरों को देखते हुए रेपो दरों में कटौती की गुंजाइश है, लेकिन केंद्रीय बैंक और आंकड़ों का इंतजार करेगा। वह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में की गयी कटौती तथा अमेरिका में भारतीय वस्तुओं पर उच्च आयात के प्रभाव को देखना चाहेगा। इन दोनों ही मोर्चों पर आंकड़े काफी अच्छे आए हैं। अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 8.2 प्रतिशत रही है जिसने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। साथ ही खुदरा मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत पर रही जो 13 साल में सबसे कम है। इस प्रकार सभी कारक ब्याज दरों में कटौती का समर्थन कर रहे हैं। स्वयं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री भी हाल ही में उद्योग मंडल फिक्की की बैठक में संकेत दे चुके हैं कि आरबीआई ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इसके अलावा, लगभग सभी प्रमुख रेटिंग एजेंसियों की राय है कि मौजूदा वित्त वर्ष में कम से कम एक बार और रेपो दर घटाए जाएंगे।</p>
<p>कम मुद्रास्फीति के कारण लोगों के पास व्यय योग्य आय अधिक हो गई है। दूसरी तरफ, व्यक्तिगत आयकर में छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख रुपए करने और जीएसटी की दरों में कटौती से सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए यह जरूरी है कि लोग अधिक खर्च करें। इसलिए ब्याज दरों में कटौती जरूरी है। इससे निजी पूंजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा जो पिछले लंबे समय से सुस्त पड़ा है। मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था के सभी कारकों को देखते हुए संभावना है कि इस सप्ताह रेपो दर में कम से कम 0.25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Dec 2025 11:47:41 +0530</pubDate>
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