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                <title>human rights - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ट्रंप ने की 8 ईरानी महिलाओं की रिहाई की अपील : विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए मिली थी फांसी की सजा, बोले- उन्हें नहीं पहुंचाएं कोई नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में मृत्युदंड का सामना कर रही आठ महिलाओं को छोड़ने का आह्वान करते हुए इसे शांति वार्ता की 'शानदार शुरुआत' बताया। वहीं, ईरान ने जासूसी के आरोप में एक वरिष्ठ अधिकारी को फांसी दे दी है। बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप की यह अपील कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-appeals-for-the-release-of-eight-iranian-women-who/article-151298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए ईरान में मृत्युदंड की सजा का सामना कर रही आठ महिलाओं को रिहा करने का आह्वान किया है और कहा है कि उनकी रिहाई शांति वार्ताओं की एक 'शानदार शुरुआत' होगी। ट्रंप की यह अपील ईरान के साथ एकतरफा युद्धविराम के विस्तार की घोषणा करने से एक दिन पहले आई है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा, "मैं इन महिलाओं की रिहाई की बहुत सराहना करूँगा। कृपया उन्हें कोई नुकसान न पहुँचाएँ! यह हमारी बातचीत की एक शानदार शुरुआत होगी।"</p>
<p>एक संबंधित घटनाक्रम में, ईरानी न्यायपालिका के आधिकारिक मीडिया संस्थान मिजान न्यूज ने बुधवार को बताया कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद ईरान के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी को फांसी दे दी गई है। मिजान के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सजा बरकरार रखे जाने के बाद अधिकारी मेहदी फरीद को फांसी पर लटका दिया गया। इस अधिकारी ने रक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारी इजराइली खुफिया विभाग को देने की कोशिश करने की बात कबूल की थी।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने मृत्युदंड की सजा पाने वाली इन आठ महिलाओं की तस्वीरों का एक स्क्रीनशॉट साझा किया। हालांकि, इन महिलाओं के नाम और पहचान का खुलासा नहीं किया गया है। इस तरह की रिपोर्टें हैं कि इन महिलाओं को जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने या चल रहे संघर्ष के दौरान दुश्मन की मदद करने के संदेह में फांसी का सामना करना पड़ रहा है। ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर इन आठ महिलाओं के लिए विशिष्ट फांसी की योजनाओं की पुष्टि नहीं की है। सोमवार को तेहरान के बाहर एक जेल में मोहम्मद मासूम शाही (38) और हामिद वालिदी (45) को सुबह फांसी दे दी गई। अधिकारियों ने कहा कि इनके साथ 19 मार्च से अब तक कम से कम 15 राजनीतिक कैदियों को फांसी दी जा चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 16:29:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मणिपुर में पांच दिवसीय बंद : जनजीवन अस्त-व्यस्त, 7 अप्रैल को हुई गोलीबारी में पांच साल के एक लड़के और लड़की की हुई थी मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मणिपुर में मासूमों की हत्या के खिलाफ 5 दिवसीय बंद से जनजीवन ठप है। बिष्णुपुर गोलीबारी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं। जांच एनआईए (NIA) को सौंप दी गई है, जबकि हजारों महिलाएं सड़कों पर न्याय की मांग कर रही हैं। राज्य के कई जिलों में कर्फ्यू लागू है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/five-day-strike-in-manipur-disrupted-life-a-five-year-old-boy-and/article-151004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/manipur2.png" alt=""></a><br /><p>इम्फाल। मणिपुर में रविवार को पांच दिवसीय पूर्ण बंद के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा। गौरतलब है कि बिष्णुपुर जिले के त्रोंगलाओबी में सात अप्रैल को हुई गोलीबारी में पांच साल के एक लड़के और पांच साल की एक लड़की की मौत हो गई थी। इस मामले में सरकार की ओर से उचित कार्रवाई न होने के विरोध में यह बंद 25 अप्रैल तक लागू रहेगा। रॉकेट हमले में गंभीर रूप से घायल हुई इन बच्चों की माँ को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है, जबकि उनके पिताभी घर लौट आए हैं। उल्लेखनीय है कि पिता सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान हैं।</p>
<p>इस मामले में सुरक्षाबलों ने अब तक पांच उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है और जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई है। आज उरीपोक में वरिष्ठ नागरिकों ने धरना दिया और बच्चों की हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मणिपुर सरकार ने इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थोउबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में कुछ ढील के साथ कर्फ्यू लगा दिया है। कल ही सरकार ने इंटरनेट से प्रतिबंध हटाया था।</p>
<p>बच्चों की हत्या के खिलाफ बनी 'ज्वाइंट एक्शन कमेटी' (जेएसी) के अनुसार, सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई समझौता नहीं हो पाया है। कर्फ्यू के बावजूद हजारों लोग रोज सड़कों पर उतरकर नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा की गई फायरिंग में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और 80 से अधिक लोग, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, गंभीर रूप से घायल हुए हैं।</p>
<p>राज्य के महिला संगठनों ने न्याय की मांग को लेकर 25 अप्रैल तक आंदोलन की घोषणा की है। कल आधी रात को इम्फाल पश्चिम के सागोलबंद में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं घायल हुईं। सुरक्षाबलों की फायरिंग के कारण इलाके के एक चिल्ड्रेन अस्पताल से इलाज करा रहे बच्चों को बाहर निकालना पड़ा। इस बीच, घायलों और गंभीर मरीजों को लेने गई एंबुलेंस को भी रोका गया और जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के पास सुरक्षाबलों द्वारा स्वास्थ्य कर्मचारियों की कथित पिटाई का मामला भी सामने आया है। स्वास्थ्य कर्मियों और अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षाबलों से अपील की है कि वे उन पर हमला न करें। 'बबीना' अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उनकी एंबुलेंस एक डॉक्टर को आपातकालीन सर्जरी के लिए ले जा रही थी, लेकिन उसे भी जगह-जगह रोककर परेशान किया गया।</p>
<p>धरने में शामिल वरिष्ठ नागरिकों ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने सीसीटीवी, वाहन और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया है। एक बुजुर्ग ने कहा कि फायरिंग होने पर महिलाएं, बच्चे और बूढ़े भागने की स्थिति में नहीं होते, इसलिए सुरक्षाबलों को केवल प्रदर्शनकारियों से निपटना चाहिए और बुजुर्गों को परेशान नहीं करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:02:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नितिन राज मौत मामला : के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला ने की राज्य सरकार से एसआईटी जांच की मांग, जातिगत भेदभाव का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेताओं के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला ने कन्नूर डेंटल कॉलेज के छात्र नितिन राज की मौत पर SIT जांच की मांग की है। परिवार ने शिक्षकों पर जाति और रंग के आधार पर प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है; दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/nitin-raj-death-case-kc-venugopal-and-ramesh-chennithala-demand/article-150157"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/k-c-venugopal-ramesh-chennithala.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सदस्य के.सी. वेणुगोपाल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने केरल सरकार से कन्नूर डेंटल कॉलेज के पहले साल के बीडीएस छात्र आर.एल. नितिन राज की मौत की पूरी जांच शुरू करने और उसे एक विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने की मांग की है। के सी वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा कि नितिन के माता-पिता और सहपाठियों ने एक फैकल्टी सदस्य के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, और जोर दिया कि एक पूरी जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए। परिवार ने आरोप लगाया है कि नितिन को कॉलेज में जाति, रंग और उसके माता-पिता के पेशे के आधार पर लगातार परेशान किया जाता था। उन्होंने आगे दावा किया कि इस संबंध में की गई शिकायतों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया।</p>
<p>उन्होंने इस घटना को बेहद परेशान करने वाला बताते हुए कहा कि कुछ ऐसे लोगों के कथित आपराधिक कृत्यों के कारण एक परिवार की उम्मीदें टूट गईं, जिनकी मानसिकता निंदनीय है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक समुदाय के भीतर ऐसी सोच का होना गंभीर चिंता का विषय है और कहा कि केवल दो शिक्षकों को निलंबित करना ही पर्याप्त कदम नहीं है। के सी वेणुगोपाल ने आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से केवल दिखावटी जांच करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि कांग्रेस ऐसे कदमों का कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने नितिन के परिवार को न्याय दिलाने की लड़ाई में हर संभव कानूनी सहायता का भी आश्वासन दिया।</p>
<p>उन्होंने छात्रों द्वारा किए गए खुलासों का जिक्र करते हुए कहा कि कॉलेज में स्थिति चिंताजनक लग रही है; छात्रों का दावा है कि जो लोग शिकायत करते हैं, उन्हें अलग-थलग कर दिया जाता है, निशाना बनाया जाता है, और शैक्षणिक रूप से परेशान किया जाता है—जिसमें प्रैक्टिकल परीक्षाओं में फेल करना और इंटरनल मार्क्स कम करना शामिल है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन ने एक ऐसे शिक्षक को सेवा में बने रहने दिया, जिसके खिलाफ पहले भी इसी तरह की शिकायत पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई थी। के सी वेणुगोपाल ने कड़े हस्तक्षेप की मांग करते हुए सरकार और पुलिस से ठोस कदम उठाने का आग्रह किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।</p>
<p>रमेश चेन्निथला ने इस घटना के पीछे जाति आधारित भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। चेन्निथला ने सरकार से आग्रह किया कि छात्र के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया जाए। परिवार का दावा है कि लगातार जाति और रंग के आधार पर किए गए दुर्व्यवहार के कारण उसकी मृत्यु हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बिना किसी देरी के न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए। अधिकारियों की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि केवल दो शिक्षकों का निलंबन पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, परिवार लगातार यह कह रहा है कि छात्र को परिसर में गंभीर जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था।</p>
<p>रमेश चेन्निथला ने इन आरोपों की ओर भी इशारा किया कि नितिन राज को जाति और रंग आधारित उत्पीड़न के साथ-साथ रैगिंग का भी सामना करना पड़ा था। फैकल्टी सदस्यों और विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया। कांग्रेस नेता ने एक व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई को उजागर करने के लिए मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केरल की छवि एक प्रगतिशील समाज की होने के बावजूद, शैक्षणिक संस्थानों सहित विभिन्न रूपों में जातिगत भेदभाव जारी है। रमेश चेन्निथला ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शासन के दौरान अनुसूचित जाति समुदायों को निशाना बनाने वाली घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 12:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बहरीन ने ईरान के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को लिया हिरासत में, अब तक 250 लोग गिरफ़्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बहरीन पुलिस ने IRGC और ईरानी खुफिया एजेंसियों के लिए जासूसी करने के आरोप में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन पर देश के संवेदनशील ठिकानों की निगरानी और जानकारी साझा करने का आरोप है। हाल ही में एक हिरासत में हुई मौत के बाद बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच बहरीन अब तक 250 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/bahrain-detained-two-people-on-charges-of-spying-for-iran/article-149369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bahreen.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। बहरीन के लोक अभियोजक कार्यालय ने कहा कि ईरान के लिए जासूसी करने की कथित योजना में दो संदिग्धों को बहरीन के कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने हिरासत में लिया है। बहरीन में अभियोजक कार्यालय ने सोमवार को एक बयान में कहा, "जासूसी करने और खुफिया सेवाओं तथा आतंकवादी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के लिए काम करने के आरोप में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।" बयान में आगे कहा गया कि आरोपियों पर देश में संवेदनशील ठिकानों की निगरानी करने, उनके बारे में जानकारी एकत्रित करने और उसे ईरान को हस्तांतरित करने का संदेह है।</p>
<p>पिछले सप्ताह बहरीन में ईरान के लिए जासूसी के आरोप में हिरासत में लिए गए 32 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हुए। उनके परिवार ने पुलिस पर जांच के दौरान यातना देने का आरोप लगाया लेकिन बहरीन के अधिकारियों ने इससे इनकार कर दिया। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, ईरान में संघर्ष शुरू होने के बाद से बहरीन के अधिकारियों ने कम से कम 250 लोगों को हिरासत में लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 13:24:45 +0530</pubDate>
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                <title>प्रधानमंत्री बालेन शाह का बड़ा फ़ैसला : दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार के लिए मांगेंगे माफ़ी, सामाजिक संगठनों ने की भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने दलित समुदाय पर सदियों से हुए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी का ऐलान किया है। सरकार की 100-सूत्रीय कार्ययोजना के तहत 15 दिनों में विशेष सुधार कार्यक्रम शुरू होंगे। सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है, हालांकि जाति-आधारित भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए अभी सख्त कानूनी क्रियान्वयन की चुनौती बरकरार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prime-minister-balen-shahs-big-decision-will-apologize-for-centuries/article-149015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/balen-shah.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के देश के दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार को लेकर माफी मांगने के ऐलान का आम लोगों, सामाजिक संगठनों ने दिल खोल कर स्वागत किया है। गौरतलब है कि नेपाल में दलित समुदाय को दशकों से देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा गया है। उनको पीढ़ियों से, सामाजिक जगहों और सरकारी तंत्र, दोनों में ही गंभीर अन्याय और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है।</p>
<p>सदियों से चले आ रहे इस उत्पीड़न को स्वीकार करते हुए, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने अपने 100-सूत्रीय कार्ययोजना के हिस्से के तौर पर, दलितों और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों से औपचारिक रूप से माफी मांगने और 15 दिनों के भीतर उनके उत्थान के लिए विशेष सुधार कार्यक्रमों की घोषणा करने का फैसला किया। उनके इस ऐलान का दलित समुदाय के नेताओं, समाज सुधार के लिए काम करने वाले संगठनों ने खुशी का इजहार किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>स्थानीय मीडिया काठमांडू पोस्ट ने लिखा है कि यह एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण क्षण है। फिर भी, वास्तविक बदलाव लाकर इस माफी को सार्थक बनाना, कहने में जितना आसान है, करने में उतना ही मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि नेपाल ने 1963 में एक नए राष्ट्रीय कानून के ज़रिए छुआछूत को खत्म कर दिया था, लेकिन इसके कमज़ोर क्रियान्वयन के कारण हाशिए पर पड़े समूहों के साथ भेदभाव जारी रहा। बाद में, 1990 के संविधान ने छुआछूत को फिर से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित किया। साल 2006 की अंतरिम संसद ने भी नेपाल को छुआछूत-मुक्त देश घोषित किया।</p>
<p>इसके अलावा, 2011 में, सरकार ने 'जाति-आधारित भेदभाव और छुआछूत अधिनियम' पेश किया। 2015 के संविधान ने अनुच्छेद 40 के तहत उनके अधिकारों की गारंटी दी, जिसमें सभी सरकारी निकायों में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा के प्रावधान भी शामिल थे। ये कानून महत्वपूर्ण और आवश्यक थे। फिर भी, इन कानूनी सुधारों के बावजूद, दलितों की स्थिति में बड़े पैमाने पर कोई बदलाव नहीं आया।</p>
<p>अखबार ने यह भी लिखा है कि यह बेहद खराब स्थिति सरकार से सिर्फ़ एक दिखावटी कदम से कहीं ज़्यादा की मांग करती है—खासकर उस सरकार से जिसे हाल के चुनावों में सुधारों के लिए लोगों का ज़बरदस्त समर्थन मिला है। सरकार के पास हाशिए पर पड़े समूहों का जीवन बेहतर बनाने की बहुत बड़ी ताकत है। इसलिए, भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना, हाशिए पर पड़े समूहों की शिक्षा और रोज़गार के बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाना, और जाति-आधारित हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बहुत ज़रूरी है। इसका मतलब यह भी है कि राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए। लेकिन, बदकिस्मती से, मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल में भी सिर्फ़ एक दलित सदस्य है और संसद में सिर्फ़ 17 दलित सांसद हैं, जबकि 134 सांसद 'खास' समुदाय से हैं, जो ऐतिहासिक रूप से एक दबदबा रखने वाला समूह रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिमी एशिया संकट: इराक में अमेरिकी महिला पत्रकार अगवा, आईडब्ल्यूएमएफ ने किया तुरंत ​रिहा करने का आह्वान </title>
                                    <description><![CDATA[इराक में संघर्ष के बीच अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शेली किटल्सन को अगवा कर लिया गया है। IWMF ने उनकी सुरक्षा पर गहरी चिंता जताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की है। मध्य पूर्व में प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाली किटल्सन का सुराग अभी तक नहीं मिल पाया है, जिससे वैश्विक मीडिया जगत में हड़कंप है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/west-asia-crisis-american-female-journalist-kidnapped-in-iraq-no/article-148704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kidnep.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच एक अमेरिकी महिला पत्रकार को इराक में अगवा कर लिया गया है। फिलहाल, उनकी स्थिति और ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। इंटरनेशनल विमेन मीडिया फाउंडेशन (आईडब्ल्यूएमएफ) ने बुधवार को एक बयान जारी कर जानकारी दी है कि अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शेली किटल्सन को मंगलवार को अगवा कर लिया गया। फिलहाल उनकी हालत और ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।</p>
<p>आईडब्ल्यूएमएफ ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए किटल्सन को तुरंत खोजने और रिहा करने का आह्वान किया है। संगठन ने कहा कि किटल्सन एक ऐसी पत्रकार हैं जिनकी रिपोर्टिंग मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (एमईएनए) क्षेत्र और उससे परे प्रेस की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। संगठन ने आह्वान किया है कि जल्द से जल्द उन्हें खोजा जाना चाहिए और सुरक्षित वापस लाया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 16:59:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान पर शिकंजा: यूरोपीय संघ परिषद ने मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर ईरान पर लगे प्रतिबंधों को बढ़ाया, दूरसंचार निगरानी उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के चलते प्रतिबंधों को 13 अप्रैल 2027 तक बढ़ा दिया है। इन उपायों में संपत्ति फ्रीज करना, यात्रा प्रतिबंध और दूरसंचार निगरानी उपकरणों के निर्यात पर रोक शामिल है। यह कार्रवाई 2011 से जारी प्रतिबंधात्मक नीति का हिस्सा है, जिसे हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद और सख्त किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-council-extends-sanctions-on-iran-over-human-rights-violations/article-148539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/eu.png" alt=""></a><br /><p>ब्रसेल्स। यूरोपीय संघ (ईयू) ने कथित मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनाें को लेकर ईरान पर लगे प्रतिबंधों को 13 अप्रैल, 2027 तक बढ़ा दिया है। यूरोपीय संघ परिषद ने यह जानकारी दी। परिषद ने सोमवार को एक बयान में कहा, "परिषद ने आज ईरान में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के जवाब में यूरोपीय संघ के प्रतिबंधात्मक उपायों को 13 अप्रैल 2027 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।"</p>
<p>बयान के अनुसार, इन उपायों में ईयू में प्रवेश पर प्रतिबंध और संपत्ति को फ्रीज करना, साथ ही ईरान को दूरसंचार निगरानी उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध शामिल है। इसमें ईयू के नागरिकों और कंपनियों को प्रतिबंध सूची में शामिल व्यक्तियों और संस्थाओं को धन उपलब्ध कराने से भी प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>ईयू ने 2011 में ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाना शुरू किया था और तब से हर साल प्रतिबंधों को बढाया जाता है। इस बार, प्रतिबंधों के विस्तार का कारण हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरान द्वारा कथित मानवाधिकार उल्लंघन बताया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:24:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में 90 लाख लोगों ने किया ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 'No Kings Protest', 'ताज उतार दो, जोकर' और 'सत्ता परिवर्तन की शुरुआत जैसे लगाए नारे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध, कड़ी अप्रवासन नीतियों और बढ़ती महंगाई के विरोध में अमेरिका के 50 राज्यों में 'नो किंग्स प्रोटेस्ट' तेज हो गया है। न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगाया। लॉस एंजेलिस में हिंसा के बाद पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी। व्हाइट हाउस ने इन आंदोलनों को 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताकर खारिज कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-iran-war-90-lakh-people-in-america-did/article-148317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump3.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। ईरान युद्व के बीच अमेरिका में एक बार फिर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बड़े पैमाने पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अमेरिका के कई बड़े शहरों में ‘नो किंग्स प्रोटेस्ट’ के नाम से यह आंदोलन तीसरे चरण तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिनमें ईरान के साथ संघर्ष, अप्रवासन से जुड़े कड़े कानून और बढ़ती महंगाई प्रमुख हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस सहित कई शहरों में शनिवार को दिनभर रैलियां और मार्च किया गया। वॉशिंगटन डीसी में Lincoln Memorial और National Mall के आसपास बड़ी संख्या में लोग जुटे। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां, पोस्टर और प्रतीकात्मक पुतले लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और सत्ता परिवर्तन की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है और इसी के कारण आज पूरा विश्व हिंसा की आग में जलने को मजबूर हो गया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने “कोई राजा नहीं” जैसे नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज कराते हुए इमिग्रेशन एजेंसी का मजाक उड़ाने के लिए विशेष पोशाकें भी पहनीं।</p>
<p>हालांकि, अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन Los Angeles के डाउनटाउन क्षेत्र में स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई। यहां प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किए जाने के बाद पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस बार देशभर में लाखों लोग इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे और 50 राज्यों में हजारों स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इससे पहले पिछले साल भी अमेरिका में दो चरणों में इसी तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए इन प्रदर्शनों को खारिज किया और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। प्रशासन का कहना है कि इन आंदोलनों को वास्तविक जनसमर्थन हासिल नहीं है और इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 11:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूएन रिपोर्ट में खौफनाक सच हुआ बेनकाब: इजरायली जेलें फिलीस्तीनियों के लिए सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला, अब तक 100 से ज्यादा कैदियों की हिरासत में मौत </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने इजरायली हिरासत केंद्रों को 'बर्बरता की प्रयोगशाला' करार दिया है। अक्टूबर 2023 से 1,500 बच्चों सहित 18,500 फिलिस्तीनियों को कैद किया गया है। रिपोर्ट में यौन शोषण, भुखमरी और अमानवीय यातनाओं का खुलासा करते हुए इसे 'राजकीय नीति' और नरसंहार का हथियार बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-dreadful-truth-has-been-exposed-in-the-un-report/article-147740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jail.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने इजरायली हिरासत केंद्रों के भीतर छिपे उस खौफनाक सच को बेनकाब कर दिया है, जिसे अब 'राज्य के सिद्धांत' के रूप में अपनाया जा चुका है। अक्टूबर 2023 से अब तक जुल्म की यह शृंखला 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को अपनी चपेट में ले चुकी है, जिनमें 1,500 से ज्यादा मासूम बच्चे शामिल हैं।</p>
<p>ये आंकड़े महज संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों जिंदगियों की दास्तान हैं, जिन्हें बिना किसी आरोप या मुकदमे के सलाखों के पीछे धकेल दिया गया है। करीब 100 कैदियों की हिरासत में हुई मौतें इस व्यवस्था की भयावहता की गवाही देती हैं। इजरायली जेलें अब सुधार गृह नहीं, बल्कि 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' बन चुकी हैं। जहां कैदियों के साथ ऐसी अमानवीय और घिनौनी हरकतें की जा रही हैं, जो इंसानियत को शर्मसार कर दें। लोहे की छड़ों और चाकुओं से यौन शोषण, हड्डियों और दांतों को बेरहमी से तोड़ना, भूखा रखना और कैदियों पर कुत्तों से हमला करवाकर उन पर पेशाब करना— ये वे अकल्पनीय प्रताड़नाएं हैं, जिनका उद्देश्य फिलिस्तीनियों को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक तौर पर भी पूरी तरह तोड़ देना है। यह संगठित बर्बरता अब अंधेरे में नहीं, बल्कि सत्ता के ऊंचे गलियारों की शह पर खुलेआम अंजाम दी जा रही है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि दशकों से मिल रही छूट और राजनीतिक संरक्षण के चलते, फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की व्यवस्थित प्रताड़ना अब कब्जे वाले फिलीस्तीनी क्षेत्र में जारी 'नरसंहार' का परिभाषित हथियार बन गयी है। 1967 से कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी नयी रिपोर्ट में कहा, "नरसंहार की शुरुआत के बाद से, इजरायली जेल प्रणाली 'सोची-समझी क्रूरता की प्रयोगशाला' में बदल गयी है।" </p>
<p>अल्बानीज के अनुसार, "जो कभी अंधेरे और साये में किया जाता था, वह अब खुलेआम हो रहा है। संगठित अपमान, पीड़ा और अधोगति का यह शासन अब उच्चतम राजनीतिक स्तरों से स्वीकृत है।" यानी, जो दर्द पहले छिपाया जाता था, अब उसे सत्ता की शह पर सरेआम अंजाम दिया जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर सहित वरिष्ठ अधिकारियों की लागू की गयी नीतियों ने प्रताड़ना, सामूहिक दंड और हिरासत की अमानवीय स्थितियों को एक संस्थानिक रूप दे दिया है। यह फिलिस्तीनियों को इंसान न समझने की एक सोची-समझी नीति है।</p>
<p>विशेष दूत ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों के इन जघन्य उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जांच और न्याय का सामना करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध के समय भी इन अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता और अपराधियों को 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय' (आईसीसी) के कटघरे में खड़ा होना होगा। अल्बानीज की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अक्टूबर 2023 से अब तक पूरे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में 18,500 से अधिक फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें कम से कम 1,500 बच्चे शामिल हैं। हजारों लोग बिना किसी आरोप या मुकदमे के कैद हैं, कई 'जबरन गायब' कर दिये गये हैं और लगभग 100 कैदियों की हिरासत में मौत हो चुकी है।</p>
<p>कैदियों के साथ ऐसी दरिंदगी की गयी है जो कल्पना से परे है। रिपोर्ट में बोतलों, लोहे की छड़ों और चाकुओं से बलात्कार, भुखमरी, हड्डियां और दांत तोड़ना, शरीर को जलाना, थूकना और कुत्तों से हमला करवाना व उन पर पेशाब करवाने जैसी भयानक प्रताड़नाओं का जिक्र है।<br />वर्ष 2025 में प्रताड़ना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र समिति ने भी 'संगठित और व्यापक प्रताड़ना की एक वास्तविक 'राज्य की नीति' की निंदा की थी, जो 7 अक्टूबर 2023 के बाद से बेहद गंभीर हो गयी है।</p>
<p>इस बर्बरता को दुनियाभर के राजनेताओं से बचाव मिल रहा है। कानूनी संस्थाएं इसे तर्कसंगत बता रही हैं। मीडिया इसे साफ-सुथरा कर पेश कर रहा है। दुनिया की वे सरकारें इसे सहन कर रही हैं, जो इजरायल को हथियार और सुरक्षा देना जारी रखे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रताड़ना केवल जेल की दीवारों तक सीमित नहीं है। निरंतर बमबारी, जबरन विस्थापन, भुखमरी, घरों-अस्पतालों की तबाही और सैन्य व बसने वाले आतंकी समूहों के खौफ ने पूरे फिलिस्तीनी क्षेत्र को एक 'प्रताड़नाकारी माहौल' में बदल दिया है।</p>
<p>अल्बानीज ने भावुक होकर कहा, "गाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुसलेम में फिलीस्तीनी पीड़ा की अटूट शृंखला से गुजर रहे हैं। वहां कोई शरण नहीं है, कोई सुरक्षित कोना नहीं है, जीने के लिए कोई महफूज जगह नहीं बची है।" अल्बानीज़ ने इजरायल से प्रताड़ना के सभी कृत्यों को तुरंत रोकने, अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को प्रवेश देने और कब्जे को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू होने तक दोषियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया और सदस्य देशों से नरसंहार और प्रताड़ना को रोकने के अपने कानूनी दायित्वों को निभाने की अपील की। इनमें इतामार बेन-ग्वीर, बेजालेल स्मोट्रिच और इजरायल काट्ज जैसे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी वारंट जारी करना शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 18:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रांसजेंडर विधेयक के खिलाफ ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं ने की राहुल गांधी से मुलाकात: समुदायों से जुड़े लोगों, की कानूनी पहचान और संरक्षण खतरे में पड़ने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात कर केंद्र के प्रस्तावित विधेयक का विरोध किया। उन्होंने आत्म-पहचान के अधिकार और अमानवीय मेडिकल जांच पर चिंता जताई। राहुल गांधी ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताते हुए संसद में विधेयक का कड़ा विरोध करने और ट्रांसजेंडर समुदाय की गरिमा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/transgender-rights-activists-met-rahul-gandhi-against-the-transgender-bill/article-147709"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul--gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देशभर से ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को संसद में नेता विपक्ष लोकसभा राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ सांसद और नेता भी मौजूद रहे।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के प्रस्तावित ट्रांसजेंडर पर्सन्स बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक उनकी आत्म-पहचान के अधिकार को कमजोर करता है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने मान्यता दी है। उनका कहना था कि इस बिल के लागू होने से लाखों ट्रांसजेंडर खासकर पारंपरिक समुदायों से जुड़े लोगों, की कानूनी पहचान और संरक्षण खतरे में पड़ सकते हैं। कार्यकर्ताओं ने बिल के कुछ प्रावधानों को अमानवीय और दंडात्मक बताते हुए अनिवार्य मेडिकल जांच, पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना दंडात्मक प्रावधानों और मौजूदा अधिकारों में कटौती पर भी चिंता जताई।</p>
<p>राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और गरिमा के साथ खड़ी है और इस विधेयक का संसद में विरोध करेगी। राहुल गांधी ने इसे खुला हमला करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का ट्रांसजेंडर व्यक्ति (संशोधन) विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर एक खुला हमला है। उन्होंने कहा ट्रांसजेंडर लोगों से अपनी पहचान स्वयं निर्धारित करने का अधिकार छीनता है, जो उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लंघन है। यह देशभर के विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक पहचान को खत्म करता है और ट्रांसजेंडर लोगों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष अमानवीय जांच के लिए मजबूर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 15:34:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष जारी: तेहरान में अब तक 600 लोगों की मौत, जान-माल का भारी नुकसान  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में जारी अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के कारण तेहरान में अब तक 636 लोग मारे गए हैं और हजारों घायल हैं। सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद देश में 40 दिनों का शोक घोषित है। संघर्ष में अब तक कुल 1,348 नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि ईरान ने जवाबी हमलों की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-with-america-israel-continues-600-people-have-died-so-far/article-147637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/war.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान की राजधानी तेहरान में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को तेहरान की आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख मोहम्मद इस्माइल तवक्कोली के हवाले से बताया, इस दौरान (संघर्ष शुरू होने के बाद से) राजधानी में 636 लोग मारे गए हैं और अब तक 6,848 लोग घायल हुए हैं। तेहरान में लगभग 430 जगहों पर हमले हुए हैं। </p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने 12 मार्च को कहा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान के परिणामस्वरूप ईरान में 1,348 नागरिक मारे गए और 17,000 से ज्यादा लोग घायल हुए। यह अभियान 28 फरवरी को ईरान के कई शहरों में शुरू किया गया था, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ। </p>
<p>ईरान ने इसके जवाब में इजरायली क्षेत्र और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका और इजरायल ने शुरू में दावा किया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से होने वाले कथित खतरे का मुकाबला करने के लिए उनका पूर्ववर्ती हमला जरूरी था, लेकिन जल्द ही उन्होंने यह साफ कर दिया कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन देखना चाहते हैं। </p>
<p>सैन्य अभियान के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई मारे गये। इस्लामिक गणराज्य ने 40 दिनों के शोक की घोषणा की। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:05:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने अमेरिका-इजरायल को गुप्त जानकारी देने के तीन दोषियों को दी फांसी: खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए ऐसे करते थे काम, अब तक 3000 हजार से ज्यादा लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने इजरायल और अमेरिका के लिए जासूसी व पुलिस अधिकारियों की हत्या के दोषी तीन व्यक्तियों को फांसी दे दी है। मोसाद को संवेदनशील जानकारी देने वाले कुरूश कीवानी को भी मृत्युदंड मिला। यह कार्रवाई ईरान-इजरायल संघर्ष के 20वें दिन हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूह मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-hanged-three-accused-of-giving-secret-information-to-america/article-147061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-hang-ti.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने पुलिस अधिकारियों की हत्या करने और इस साल की शुरुआत में हुई अशांति के दौरान अमेरिका और इजरायल के समर्थन में गतिविधियों को अंजाम देने के दोषी करार दिये गये तीन लोगों को गुरुवार को फांसी दे दी। ये सजाएं ऐसे समय में दी हैं, जब इजरायल-अमेरिका से ईरान का संघर्ष 20वें दिन में प्रवेश कर चुका है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों व्यक्तियों को जनवरी की अशांति में शामिल होने के लिए सजा सुनायी गयी थी। उन पर हत्या और जायोनी शासन तथा अमेरिका के पक्ष में काम करने का आरोप था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि ये लोग दो सुरक्षाकर्मियों की मौत के जिम्मेदार थे। अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर के अंत में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कुल 3,117 लोग मारे गये थे।</p>
<p>ईरानी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों के उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि खासकर आठ और नौ जनवरी के दौरान अधिकतर मौतों के लिए सरकारी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे। वहीं, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (एचआरएएनए) ने फरवरी में 6,872 मौतों की पुष्टि की थी और वह एजेंसी 11,000 से अधिक अतिरिक्त मामलों की समीक्षा कर रही थी। एक दिन पहले ईरानी अधिकारियों ने इजरायल के लिए जासूसी करने के दोषी एक व्यक्ति को फांसी देने की घोषणा की थी। वर्तमान संघर्ष शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किया गया यह ऐसा पहला मामला है। न्यायपालिका ने कहा कि कुरूश कीवानी के रूप में पहचाने गये इस व्यक्ति ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को संवेदनशील तस्वीरें और जानकारी मुहैया कराई थी।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि कीवानी ने मोसाद एजेंटों से मुलाकात की थी और कई यूरोपीय देशों के साथ-साथ तेल अवीव में प्रशिक्षण लिया था। कथित तौर पर उसे पिछले साल जून में ईरान और इजरायल के बीच हुए 12 दिवसीय संघर्ष के दौरान गिरफ्तार किया गया था, जिसमें अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 16:06:42 +0530</pubDate>
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