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                <title>कोटपूतली में होगी हरियाली, वन विभाग ने तैयार किए 85 हजार पौधे, एक जुलाई से होगा वितरण</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने पौधारोपण के लिए इन दिनों अभियान चला रखा है। हर वर्ष की तुलना में इस बार सबसे अधिक 85 हजार पौधारोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी के तहत स्थानीय वन विभाग की नर्सरी से पहली बार सबसे अधिक 85 हजार पौधे वितरण का लक्ष्य तय किया गया है, ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-there-will-be-greenery-in-kotputli--the-forest-department-has-prepared-85-thousand-plants--will-be-distributed-from-july-1/article-13230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/qqqq2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोटपूतली।</strong> पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने पौधारोपण के लिए इन दिनों अभियान चला रखा है। हर वर्ष की तुलना में इस बार सबसे अधिक 85 हजार पौधारोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी के तहत स्थानीय वन विभाग की नर्सरी से पहली बार सबसे अधिक 85 हजार पौधे वितरण का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि यह आंकड़ा हर वर्ष 55 से 60 हजार के आसपास ही रहता था। इस साल खास बात यह रहेगी कि विभाग की ओर से आॅक्जीजन की अधिकता वाले पीपल-बड़ के 5 हजार से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। इसको लेकर विभाग की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई है। विभाग की ओर से आगामी 1 जुलाई से अभियान के तहत पौधरोपण और पौध वितरण कार्यक्रम का आगाज किया जाएगा।</p>
<p><strong>दो योजनाओं के 35 हजार पौधे:</strong> क्षेत्रीय वन अधिकारी सीताराम यादव ने बताया कि इस बार राजस्थान जैव विविधता परियोजना के तहत 20 हजार व कृषि वानिकी के तहत विभिन्न प्रजातियों के 15 हजार पौधे तैयार किए गए हैं। इनमें गुलाब, अशोक, करंस, गुलमोहर, नीम, मीठी नीम, चंपा, सैतूत, आंवला, नींबू, केसिया  श्यामा, गूलर जैसे पौधे शामिल हैं। इसके लिए इस बार आक्सीजन वाले पौधे पीपल व बड़ पर विशेष जोर दिया जाएगा। इनके लगभग 5 हजार पौधे तैयार किए गए हैं।</p>
<p><strong>घर-घर बटेंगे औषधीय पौधे :</strong> वन विभाग ने घर-घर औषधीय पौधे बांटने के लिए योजना के तहत कुल 50 हजार पौधे तैयार किए हैं। अश्वगंधा, नीम गिलोय, कालमेघ व तुलसी के दो-दो पौधे नि:शुल्क बांटे जाएंगे। क्षेत्र में पेड़-पौधों की कई प्रजातिया लुप्त होने के कगार पर है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार कई किस्मों के पौधों को बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इसके चलते नीम, करंज, गुलमोहर, गूलर आदि के पौधों का ज्यादा वितरण किया जाएगा। वहीं विद्यालयों व मनरेगा में सबसे ज्यादा नीम के पौधों का रोपण किया जाएगा।</p>
<p><strong>5 व 8 रुपए होगी दर </strong>वन विभाग ने पौधों की दर भी निर्धारित कर दी है। कोई भी व्यक्ति वन विभाग की नर्सरी से पौधे प्राप्त कर सकता है। विभाग ने कुछ पौधों की दर 5 रुपए तो कुछ प्रजातियों के पौधों की दर 8 रुपए निर्धारित की है। इसके अलावा सरकारी विभागों सहित ट्रस्टों व सामाजिक संस्थाओं को एक हजार पौधे तक 1 रुपया प्रति पौधा तथा उससे अधिक पौधे लेने पर 5 रुपए प्रति पौधा की दर से भुगतान करना होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong> <br />कुल 85 हजार पौधे विभिन्न प्रजातियों के तैयार किए गए है। ज्यादा पौधों का रोपण होने से हरियाली को बढ़ावा मिलेगा। एक जुलाई से वितरण प्रारंभ कर दिया जाएगा। <br /><strong>-सीताराम यादव, क्षेत्रीय वन अधिकारी, कोटपूतली।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 15:42:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देशभर में ‘प्रताप धन मुर्गी’ की डिमांड लाखों में, सप्लाई हजारों में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई प्रतापधन मुर्गी की देशभर में इतनी डिमांड है कि एमपीयूएटी द्वारा इसकी सप्लाई में ही पसीने छूट रहे हैं। जानकारी के अनुसार कश्मीर, मध्यप्रदेश और गुजरात से ही लाखों मुर्गियों की डिमांड है, लेकिन एमपीयूएटी हजारों में ही सप्लाई कर पा रहा है। चिकन और अंडा उत्पादन में अब तक की सबसे अव्वल रही इस नस्ल को जो व्यक्ति एक बार लेता है, उसे अन्य कोई प्रजाति रास नहीं आती है। कारण यह है कि इस नस्ल की मुर्गियां एक साल में 150 से अधिक<br /><strong><br />1.25</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/demand-for-pratap-dhan-chicken-in-lakhs--supply-in-thousands-across-the-country---this-breed-prepared-by-the-scientists-of-mewar-lays-more-than-150-eggs-annually/article-4566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/7_new.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई प्रतापधन मुर्गी की देशभर में इतनी डिमांड है कि एमपीयूएटी द्वारा इसकी सप्लाई में ही पसीने छूट रहे हैं। जानकारी के अनुसार कश्मीर, मध्यप्रदेश और गुजरात से ही लाखों मुर्गियों की डिमांड है, लेकिन एमपीयूएटी हजारों में ही सप्लाई कर पा रहा है। चिकन और अंडा उत्पादन में अब तक की सबसे अव्वल रही इस नस्ल को जो व्यक्ति एक बार लेता है, उसे अन्य कोई प्रजाति रास नहीं आती है। कारण यह है कि इस नस्ल की मुर्गियां एक साल में 150 से अधिक अंडे दे देती हैं तो इस नस्ले के मुर्गे पांच माह में ही तीन से साढ़े तीन किलो वजनी भी हो जाते हैं। एमपीयूएटी के वैज्ञानिकों ने इस नस्ल को करीब चार साल पहले तैयार किया था। प्रतापधन को लेकर देश के कई राज्यों से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं, तो कई फर्म एडवांस राशि देकर भी बुकिंग करवाने को तैयार है, लेकिन इस प्रजाति की सप्लाई तैयार करने में लगने वाला अत्यधिक समय इसकी डिमांड में रोड़ा बना हुआ है। बता दें, यह ऐसी प्रजाति है जिसे किसी तरह की बीमारी भी नहीं लगती और इसका सेवन करने वालों को भी कोई परेशानी नहीं होती है। <br /><strong><br />1.25 से 1.50 लाख पहुंची सालाना डिमांड</strong><br />एमपीयूएटी से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में प्रतापधन मुर्गी की डिमांड बीते साल की तुलना में बढ़ी है। बताया गया कि बीते साल करीब 1.25 लाख चूजों की सालाना डिमांड थी, जो इस वर्ष बढ़कर 1.50 तक जा पहुंची है। इसकी तुलना में पूर्ति करीब 85 हजार चूजों की ही हो पा रही है। बताया गया कि देशभर में सर्वाधिक मांग कश्मीर, गुजरात व मध्यप्रदेश से आ रही है। कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ ने बताया कि रोड आइलैंड रेड (आरआईआर) जो सालाना दो सौ अंडे देती है, कलर ब्राइलर, जो पांच माह में ढाई किलो हो जाती है और मेवाड़ी मुर्गी जिसमें बीमारी बेहद कम लगती है। इन तीनों नस्लों को मिलाकर उन्नत मूर्गी प्रताप धन तैयार की गई। नस्ल को नेशनल ब्यूरो आॅफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्स करनाल से रजिस्टर्ड करवाया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 14:58:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>CM गहलोत के हाथों सचिवालय में हाईटेक रिसेप्शन का शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे हाईटेक बनाने के लिए 2019-20 बजट में घोषणा की थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AD/article-1613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/cm1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिवालय में हाईटेक स्वागत कक्ष का फीता काटकर मंगलवार को उद्घाटन किया। प्रदेशभर से सचिवालय में कामकाज के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जहां कई बार उन्हें रिसेप्सन पर लंबा इंतजार करना पड़ता था। इस दौरान बैठने और टॉयलेट जैसी सुविधा नहीं होने से उन्हें परेशान होना पड़ता था। लोगों को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे हाईटेक बनाने के लिए 2019-20 बजट में घोषणा की थी। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से इसका 3 करोड़ 14 लाख की लागत से काम पूरा किया गया है। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#800000;"><span style="font-size:larger;"><strong><br /> इस तरह का सचिवालय स्वागत कक्ष</strong></span></span></span><br /> - 16 काउंटर लगेगी पर्ची बनाने के लिए<br /> - 2 काउंटर दिव्यांगों के लिए अलग से<br /> - एंट्री और एग्जिट गेट अलग अलग होगा<br /> - सचिवालय सुरक्षा अधिकारी फर्स्ट फ्लोर पर बैठेंगे<br /> - 2560 स्क्वायर फीट एरिया ग्राउंड फ्लोर पर बढ़ाया गया<br /> - 1340 स्क्वायर फीट एरिया फर्स्ट फ्लोर पर बढ़ाया गया<br /> - बेबी फीडिंग रूम की सुविधा मिलेगी<br /> - महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट होंगे<br /> - 125- 150 व्यक्तियों के बैठने की सुविधा मिलेगी<br /> - वाई- फाई की सुविधा मिलेगी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Oct 2021 16:30:45 +0530</pubDate>
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