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                <title>humanitarian aid - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ईरान वॉर पर एंटोनियो गुटेरेस का साफ संदेश : मौत और विनाश का यह सिलसिला अब रुकना चाहिए; युद्ध जितना खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी बढ़ेगी</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आगाह किया है कि पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुका ईरान युद्ध पूरी दुनिया को तबाही की ओर धकेल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से खाद्य और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। गुटेरेस ने तत्काल युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद के जरिए शांति बहाली की अपील की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-clear-message-on-iran-war-this-cycle-of/article-148999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/un-general-secretary-antonio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका ईरान युद्ध पूरे क्षेत्र को एक व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रहा है, जिससे वैश्विक आर्थिक और मानवीय संकट पैदा हो सकता है। गुटेरेस ने गुरुवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "यह युद्ध जितने दिन खिंचेगा, मानवीय पीड़ा उतनी ही बढ़ेगी। तबाही का दायरा, अंधाधुंध हमले और नागरिकों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हम एक व्यापक युद्ध के मुहाने पर हैं जो पूरे पश्चिमी एशिया को अपनी चपेट में ले लेगा और इसका दुनिया भर में नाटकीय असर होगा।"</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसके वैश्विक आर्थिक और मानवीय परिणामों पर जोर देते हुए फिलीपींस से लेकर श्रीलंका और मोजाम्बिक तक के कमजोर समुदायों पर खाद्य और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभाव का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी कि जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता में बाधा आने से दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>गुटेरेस ने तत्काल कूटनीतिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा, "विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। मौत और विनाश का यह सिलसिला रुकना चाहिए। शांतिपूर्ण रास्ता निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। उन्हें सफल होने के लिए पर्याप्त जगह और समर्थन मिलना चाहिए, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून में मजबूती से निहित हो।" महासचिव ने सभी पक्षों के सामने स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने अमेरिका और इजरायल से युद्ध को तुरंत रोकने का आग्रह किया, जो भारी मानवीय पीड़ा और आर्थिक संकट का कारण बन रहा है। वहीं ईरान से उन्होंने पड़ोसी देशों पर हमले बंद करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी देशों को संप्रभुता, नागरिक सुरक्षा, परमाणु केंद्रों और नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।</p>
<p>गुटेरेस ने चल रहे शांति प्रयासों में मदद के लिए अपने व्यक्तिगत दूत ज्यां अरनॉल्ट को क्षेत्र में भेजने की घोषणा की। उन्होंने कहा, "संघर्ष अपने आप खत्म नहीं होते। वे तब खत्म होते हैं जब नेता विनाश के बजाय संवाद को चुनते हैं। वह विकल्प अभी भी मौजूद है और उसे अभी चुना जाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 16:36:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पाकिस्तानी शिकायत पर कुछ देर में पोस्ट डिलीट, कश्मीर से मदद पर ईरान की धन्यवाद पोस्ट का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कश्मीरी महिला द्वारा पति की आखिरी निशानी (सोना) दान करने पर आभार जताया, लेकिन पाकिस्तानी दबाव के आगे झुकते हुए पोस्ट डिलीट कर दी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का यह कदम भारत के प्रति उसके दोगलेपन को दर्शाता है। भारतीय नागरिकों की सहानुभूति और मदद के बावजूद, कश्मीर मुद्दे पर ईरान का यह रवैया कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/post-deleted-after-some-time-due-to-pakistani-complaint-case/article-147788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)45.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान/नई दिल्ली। ईरान को भारत के लोग सहानुभूति दिखाते हुए भारी भरकम पैसे मदद के नाम पर भेज रहे हैं। लेकिन कश्मीर को लेकर ईरान दोगलापन कर रहा है। ईरान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कश्मीर के लोगों को शुक्रिया अदा किया था लेकिन कुछ पाकिस्तानियों की शिकायत पर भारत स्थिति ईरानी दूतावास पोस्ट डिलीट कर <br />देता है।</p>
<p>दरअसल ईरानी दूतावास ने एक पोस्ट किया था जिसमें भारत के प्रति आभार जताया गया था। इसमें कहा गया था कश्मीर की एक सम्मानित बहन ने अपने पति की याद में सहेजकर रखा हुआ सोना, जिनका 28 साल पहले निधन हो गया था, ईरान के लोगों के प्रति प्रेम और एकजुटता से भरे दिल के साथ दान कर दिया। आपके आंसू और आपकी पवित्र भावनाएं ईरान के लोगों के लिए सांत्वना का सबसे बड़ा स्रोत हैं और इन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। धन्यवाद #कश्मीर। धन्यवाद #भारत। </p>
<p>ईरानी दूतावास ने इस पोस्ट के साथ हैशटैग में भारत का भी नाम लिया था। इसपर कुछ पाकिस्तानियों ने शिकायत करनी शुरू कर दी। वजाहत काजमी नाम के पाकिस्तानी पत्रकार ने ईरान दूतावास के पोस्ट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि हे ईरान, कश्मीर भारत का नहीं है। इसपर भारत की तरफ से अवैध तरीके से कब्जा किया गया है और ये पाकिस्तान का है। अपने फैक्ट को सही करो। जिसके बाद दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पोस्ट को डिलीट कर फरार हो गया। यानि कश्मीर की जिस महिला ने अपने पति की आखिरी निशानी तक ईरान को दान में दे दिया उस महिला के साथ भी ईरान खड़ा नहीं रह सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:38:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ऑस्ट्रेलिया-ईयू के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, सामानों के सस्ते होने की उम्मीद  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कश्मीरी महिला द्वारा पति की आखिरी निशानी (सोना) दान करने पर आभार जताया, लेकिन पाकिस्तानी दबाव के आगे झुकते हुए पोस्ट डिलीट कर दी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का यह कदम भारत के प्रति उसके दोगलेपन को दर्शाता है। भारतीय नागरिकों की सहानुभूति और मदद के बावजूद, कश्मीर मुद्दे पर ईरान का यह रवैया कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/historic-free-trade-agreement-between-australia-and-eu-expected-to/article-147790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/कैनबरा/ब्रसेल्स। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) ने लगभग आठ वर्षों की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच को बढ़ावा मिलेगा, आयात शुल्क में कटौती होगी और आर्थिक संबंध गहरे होंगे। इस समझौते की घोषणा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और  यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की। लेयेन ने इस समझौते को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और खुले एवं नियम-आधारित व्यापार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। समझौते के तहत, ईयू को किया जाने वाला लगभग 98 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई निर्यात शुल्क मुक्त प्रवेश पा सकेगा। इससे ऑस्ट्रेलियाई कृषि, विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों को काफी बढ़ावा मिलेगा। ऑस्ट्रेलियाई किसानों को वाइन, डेयरी, सीफूड, अनाज, फल और नट्स जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क हटने से लाभ होगा, जिसमें अकेले वाइन निर्यातकों को सालाना लगभग 3.7 करोड़ डॉलर का लाभ होने की उम्मीद है। यह समझौता बीफ, भेड़ के मांस, चीनी और डेयरी जैसे प्रमुख उत्पादों के लिए विस्तारित कोटा के माध्यम से सार्थक पहुंच सुनिश्चित करेगा। </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया में अधिकांश आयात शुल्क हटने से यूरोपीय सामान जैसे वाइन, स्पिरिट, बिस्कुट, चॉकलेट, पास्ता आदि सामानों के ऑस्ट्रेलियाई बाजारों में सस्ते होने की उम्मीद है। साथ ही मशीनरी और वाहनों की कीमत भी कम होगी। इस समझौते के महत्व का उल्लेख करते हुए अल्बनीज ने कहा, लगभग आठ वर्षों की बातचीत के बाद, हमने एक ऐतिहासिक समझौता किया है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभ पहुंचाएगा। यह समझौता यूरोपीय संघ की विशाल 30 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर की अर्थव्यवस्था में ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा करता है और ऑस्ट्रेलियाई उपभोक्ताओं के लिए लागत कम करेगा। </p>
<p>व्यापार में विविधता लाने का अवसर </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फैरेल ने इसे कड़ी मेहनत से किया गया सौदा बताया जो निर्यातकों और उत्पादकों के लिए वास्तविक व्यावसायिक लाभ प्रदान करता है। उन्होंने कहा, यूरोपीय संघ के आयात शुल्क हटने से ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों को 27 देशों और 45 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ व्यापार में विविधता लाने का अवसर मिलता है। फैरेल ने कहा, अधिक व्यापारिक भागीदारों के साथ अधिक व्यापार का अर्थ है अधिक आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, अधिक अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां, सस्ती कीमतें और अधिक राष्ट्रीय आय। यह समझौता ऑस्ट्रेलियाई फर्मों के लिए सालाना लगभग 845 अरब डॉलर मूल्य के यूरोपीय संघ के सार्वजनिक खरीद अनुबंधों तक पहुंच भी प्रदान करता है। इसके साथ ही पेशेवरों की आवाजाही में सुधार करता है और वित्त, शिक्षा, पर्यटन और संचार जैसी सेवाओं में अवसर बढ़ाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:37:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान के समर्थन में कश्मीरियों की मानवीय पहल: राहत के लिए बड़े पैमाने पर दान-अभियान शुरू, ईरानी दूतावास से आभार व्यक्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच कश्मीर के लोगों ने मानवता की मिसाल पेश की है। घाटी के गांवों से लेकर शहरों तक, लोग नकदी, सोना और तांबे के बर्तन दान कर रहे हैं। ईरानी दूतावास ने इस एकजुटता के लिए आभार जताया, जबकि इमरान अंसारी और मुन्तजीर मेहदी जैसे नेताओं ने इसे धार्मिक और मानवीय कर्तव्य बताते हुए अपना वेतन दान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/large-scale-donation-campaign-started-for-humanitarian-relief-relief-of/article-147539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-help.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में लोगों ने अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच ईरान के प्रभावित नागरिकों के लिए बड़े पैमाने पर दान-अभियान शुरू किया है, जिसमें नकदी, आभूषण और बचत राशि तक का योगदान दिया जा रहा है। भारत में ईरान के दूतावास ने इस मानवीय सहयोग के लिए कश्मीर के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, कश्मीर के भलेमानस लोगों का हम दिल से धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस कठिन समय में ईरान के लोगों के साथ एकजुटता दिखाई। यह सछ्वावना कभी भुलाई नहीं जाएगी। </p>
<p>दूतावास द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक महिला को अपने दिवंगत पति की याद में संभालकर रखा गया सोना दान करते हुए और बच्चों को अपनी गुल्लक सौंपते हुए देखा गया। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो और तस्वीरों में, विशेषकर शिया बहुल क्षेत्रों से लोग नकद, आभूषण और तांबे के बर्तन तक दान करते नजर आ रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने इस पहल को मानवता की मिसाल बताते हुए कहा कि गांवों से लेकर शहरों तक लोगों का आगे आना सामूहिक संवेदनशीलता और करुणा को दर्शाता है। उन्होंने अपील की कि दान करें, लेकिन उसका प्रदर्शन न करें।</p>
<p>पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायक मुन्तजीर मेहदी ने राहत प्रयासों के लिए अपना एक माह का वेतन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में ईरान के लोगों के साथ खड़ा होना जरूरी है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता और ऑल जम्मू-कश्मीर शिया एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान अंसारी ने कहा कि विशेष रूप से शिया समुदाय ने बड़ी संख्या में भागीदारी की है और इसे नैतिक व धार्मिक कर्तव्य के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दान संग्रह में शामिल कुछ लोगों को विभिन्न एजेंसियों से जानकारी मांगने के लिए कॉल आ रहे हैं, जिस पर उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशीलता और समझदारी बरतने की अपील की।</p>
<p>अंसारी ने कहा कि यह दान पूरी तरह मानवीय और धार्मिक उद्देश्य से किया जा रहा है और इसमें लोगों की भावनाएं गहराई से जुड़ी हैं, इसलिए अनावश्यक दबाव से बचना चाहिए। यह अभियान युद्धग्रस्त लोगों के प्रति कश्मीर के लोगों की एकजुटता और सहानुभूति का प्रतीक बनकर उभरा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:32:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्यूबा ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार राष्ट्रव्यापी विद्युत ठप होने की घोषणा की, ट्रंप ने की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी</title>
                                    <description><![CDATA[ईंधन संकट और ग्रिड फेल होने से क्यूबा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और अमेरिकी प्रतिबंधों ने तनाव बढ़ा दिया है। द्वीप पर पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। क्यूबा सरकार ने मानवीय सहायता के बीच संभावित हमले की आशंका जताते हुए हाई अलर्ट जारी किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cuba-announces-second-nationwide-blackout-in-a-week-trump-predicts/article-147421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cuba.png" alt=""></a><br /><p>हवाना। क्यूबा के ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार शाम को घोषणा किया कि पूरे द्वीप में एक बार फिर विद्युत ठप हो गई है जिससे एक करोड़ से अधिक लोग बिजली के बिना रह गए हैं। यह जानकारी सीएनएन ने रविवार को दी। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली पूरी तरह से ठप हो गई है। बिजली बहाल करने के लिए प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।"</p>
<p>सोमवार को हुए भीषण विद्युत ग्रिड के ठप होने से क्यूबा अभी उबर ही रहा था। यह इस साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला से ईंधन की आपूर्ति पर रोक लगाने के बाद पहली घटना थी। शनिवार को विद्युत ठप होने से ठीक पहले, देश की सरकारी बिजली कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि शनिवार रात को सबसे व्यस्त समय के दौरान उसे 1.704 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल के दिनों में क्यूबा के बारे में अक्सर बातें की है और वहां की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी की है। सोमवार को उन्होंने खुलेआम यह सवाल उठाया था कि क्या उन्हें इस द्वीप पर कब्जा करने का सम्मान प्राप्त होगा।</p>
<p>हालांकि, जब राष्ट्रपति ट्रम्प से पूछा गया कि क्या क्यूबा को अपने कब्जे में लेने के अभियान में उसी तरह का बल का प्रयोग किया जाएगा जैसा कि जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के दौरान किया था, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>शनिवार को क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने द्वीप पर मानवीय सहायता पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि क्यूबा पर हमला हो सकता है और तदनुसार वह तैयारी कर रही है। पिछले सप्ताह, राष्ट्रपति डियाज़-कैनेल ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि क्यूबा ईंधन प्रतिबंध समाप्त करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, क्यूबा सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका अपनी राजनीतिक व्यवस्था पर बातचीत करने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p>क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्रांतिकारियों द्वारा 1959 में फुल्गेन्सियो बतिस्ता की सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से, देश अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। क्यूबा ने पहले भी गंभीर आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना किया है, जैसे कि "विशेष काल", जब 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ तब इसका प्रभाव उस समय के कम्युनिस्ट सरकार के मुख्य बाहरी सहायता स्रोत पर पड़ा।</p>
<p>यह ताजा संकट भी उतना ही निराशाजनक है। मेक्सिको और वेनेजुएला से ईंधन की कमी के कारण द्वीप का पर्यटन लगभग ठप हो गया है, शिक्षा व्यवस्था बाधित हुई है, अस्पतालों में सेवाएं कम हो गई हैं और किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/cuba-announces-second-nationwide-blackout-in-a-week-trump-predicts/article-147421</link>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 16:05:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट: ईरानी हमले के डर से यूएई से भागे विदेशी, कुत्ते-बिल्ली लावारिस छोड़े</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी मिसाइल हमलों से दुबई में मानवीय संकट गहरा गया है। लोग पालतू पशुओं को लावारिस छोड़कर भाग रहे हैं, जबकि लेबनान में एक दिन में एक लाख लोग विस्थापित हुए। इजरायली हमलों से ईरान के ऐतिहासिक स्थलों को भारी नुकसान पहुँचा है और तेल डिपो में लगी आग से पाकिस्तान में जहरीले प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/fearing-iranian-attack-foreigners-flee-uae-leave-dogs-and-cats/article-146053"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>दुबई। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से पश्चिम एशिया में नया मानवीय संकट खड़ा हो गया है। हमलों के डर से हजारों विदेशी दुबई छोड़कर जा रहे हैं तो कुत्ते-बिल्ली जैसे पालतू पशु लावारिस छोड़ दे रहे हैं। रेस्क्यू से जुड़ी कई संस्थाओं को ऐसे सैकड़ों पालतू पशु मिले हैं। कुछ को लैंप पोस्ट से बांधकर छोड़ दिया गया, तो कई खाली अपार्टमेंट में बंद मिले। कई पेट्स तो पहले से भरे शेल्टर होम के बाहर छोड़ दिए गए हैं। जानवरों को बचाने वाले संगठनों ने बताया कि एक एक वॉलंटियर को एक ही दिन में 27 संदेश मिले हैं। इन वॉलंटियर्स का कहना है कि पहले से भरे शेल्टर होम में अब और पेट्स को रखना मुश्किल हो रहा है। रेस्क्यू संगठनों को दुबई में कई पालतू कुत्ते सड़क किनारे लैंप पोस्ट पर बंधे मिल रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया में इन विदेशों अमीरों की कड़ी आलोचना हो रही है। वहीं यूएई के लिए जंग के बीच नया मानवीय संकट खड़ा हो गया है। इस बीच मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।</p>
<p><strong>यूएई ने नष्ट किए ईरानी ड्रोन</strong></p>
<p>मंत्रालय के मुताबिक सोमवार को किए गए हमले में कुल 15 बैलिस्टिक मिसाइलों का पता चला, जिनमें से 12 को इंटरसेप्ट कर मार गिराया गया, जबकि तीन मिसाइलें समुद्र में गिर गईं और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन के जरिए भी हमला किया गया था। अधिकारियों के अनुसार कुल 18 ड्रोन देखे गए, जिनमें से 17 को वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया, जबकि एक ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात के क्षेत्र में गिर गया। हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है। यूएई का कहना है कि देश की वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह सतर्क है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि सुरक्षा एजेंसियां हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। </p>
<p><strong>यूएई में किन देशों के नागरिकों की गई जान?</strong></p>
<p>बयान के अनुसार, इन हमलों में 4 पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी नागरिकों की मौत हो गई है। वहीं 117 लोग मामूली रूप से घायल हो गए। इस बीच, इजरायल ने एक बार फिर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं। इजरायली सेना के मुताबिक, राजधानी तेहरान, मध्य ईरान के इस्फहान और दक्षिणी इलाकों में ईरानी शासन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर हवाई हमले किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>तेहरान में कई ऐतिहासिक स्थलों को हुआ नुकसान</strong></p>
<p>इजरायली हवाई हमलों में ईरान के इस्फ़ाहान में चहेल सोतून पैलेस सहित विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है। उल्लेखनीय है कि सफाविद काल का यह महल इस्फÞाहान के गवर्नर कार्यालय के पास स्थित है। रिपोर्टों के अनुसार, पास ही हुए बम धमाके के कारण महल परिसर के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। यह महल अपने भित्ति चित्रों, तालाबों और 17वीं शताब्दी के ऐतिहासिक हॉल के लिए जाना जाता है। इस्फÞाहान के एक निवासी ने बताया, चहेल सोतून इमारत और गवर्नर कार्यालय के बीच केवल कुछ ही पेड़ हैं, और स्पष्ट रूप से उन्हें भी नुकसान पहुँचा है। </p>
<p>यूनेस्को की सूची में शामिल सफÞाविद काल के नक्श-ए-जहाँ स्क्वायर के आसपास भी नुकसान की खबरें हैं, जिसमें अली कापू पैलेस और कई ऐतिहासिक मस्जिदें शामिल हैं। ये रिपोर्टें यूनेस्को द्वारा तेहरान में पहले हुए हमलों के बाद ईरान में विरासत स्थलों के जोखिमों के बारे में चेतावनी देने के कुछ दिनों बाद आई हैं। एजेंसी ने कहा कि वह ईरान और पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक विरासत की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है।</p>
<p><strong>ईधन बचाने के लिए वियतनाम में वर्क फ्रॉम होम</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अस्थिरता को देखते हुए वियतनाम सरकार ने देश में ईंधन की खपत कम करने के लिए कड़े कदम उाने शुरू कर दिए हैं। वियतनाम के उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने मंगलवार को नागरिकों से जहां संभव हो वहां रिमोट वर्क (घर से काम) करने का आग्रह किया है ताकि यात्रा और परिवहन की मांग को कम किया जा सके। वियतनाम समाचार एजेंसी के अनुसार, मंत्रालय ने एक आधिकारिक अपील जारी कर नागरिकों से ईंधन बचाने के विभिन्न उपाय अपनाने को कहा है। </p>
<p>इसमें अनावश्यक होने पर निजी वाहनों के उपयोग को सीमित करने, कारपूलिंग (साझा सवारी) करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और कम दूरी के लिए साइकिल को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है। सरकार ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए नागरिकों को इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों पर विचार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। मंत्रालय का मानना है कि इन उपायों से न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के प्रभाव को कम किया जा सकेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे कई आयात निर्भर देशों के लिए ईंधन की आपूर्ति एक बड़ी चुनौती बन गई है।</p>
<p><strong>लेबनान में एक दिन में एक लाख लोग विस्थापित </strong></p>
<p>लेबनान पर इजरायल के लगातार बढ़ते हमलों के कारण पिछले  24 घंटों में यहां एक लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हुए हैं। इससे एक गंभीर मानवीय त्रासदी का संकेत मिलता है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की प्रतिनिधि कैरोलिना लिंडहोम बिलिंग ने जिनेवा में पत्रकारों को बताया कि अब तक लेबनान सरकार के आॅनलाइन पोर्टल पर कुल 6,67,000 से अधिक विस्थापित लोग पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, पंजीकृत विस्थापितों की संख्या में मात्र एक दिन में एक लाख का इजाफा हुआ है, जो बेहद डरावना है। यूएन प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि वर्तमान में विस्थापन की गति 2024 में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुए पिछले युद्ध की तुलना में कहीं अधिक तेज है। इजरायली बमबारी के डर से दक्षिण लेबनान और बेरुत के उपनगरीय इलाकों से लोग सुरक्षित किानों की तलाश में उत्तर की ओर पलायन कर रहे हैं।</p>
<p>विस्थापितों की भारी संख्या के कारण राहत शिविरों और आश्रय स्थलों पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। लेबनान सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां भोजन, दवा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रही हैं। मानवीय संगठनों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है ताकि विस्थापितों को आवश्यक सहायता पहुँचाई जा सके। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी जानकारी दी है कि लेबनान में रहने वाले सीरियाई शरणार्थी अब वापस अपने देश लौटने को मजबूर हैं। गत दो मार्च से अब तक 80,000 से अधिक सीरियाई नागरिक इजरायली हमलों से बचने के लिए लेबनान की सीमा पार कर सीरिया जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विस्थापन की स्थिति इतनी आपातकालीन है कि कई परिवार बिना अपना सामान लिए ही जल्दबाजी में लेबनान छोड़कर निकल गए। </p>
<p><strong>ईरान के तेल ठिकानों पर हमले से पाकिस्तान में प्रदूषण का खतरा</strong></p>
<p>ईरान में तेल रिफाइनरियों और डिपो पर हुए हालिया अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों का असर अब पड़ोसी देश पाकिस्तान के पर्यावरण पर भी पड़ने की आशंका है। पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग ने  एक विशेष बुलेटिन जारी कर चेतावनी दी है कि ईरान से आने वाली हवाएं जहरीले प्रदूषक तत्वों को लेकर पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सों में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट आ सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, ईरान की वर्तमान स्थिति के कारण हवाएं प्रदूषकों को देश के पश्चिमी क्षेत्रों तक ले जा सकती हैं। विभाग ने 12 मार्च तक पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान की सीमा से सटे बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के इलाकों में यह हवाएं पहुँचती हैं, तो वहाँ स्मॉग और जहरीले कणों का स्तर बढ़ सकता है। उल्लेखनीय है कि तेहरान में तेल केंद्रों पर बमबारी के बाद पूरी राजधानी काले धुएं की मोटी चादर में लिपटी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों और पत्रकारों ने तेहरान की हवा को बेहद जहरीला बताया है। ईरानी रेड क्रेसेंट सोसाइटी ने भी चेतावनी दी है कि इन हमलों से भारी मात्रा में जहरीले हाइड्रोकार्बन, सल्फर और नाइट्रोजन आॅक्साइड का उत्सर्जन हुआ है, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। पाकिस्तान ईरान के साथ लगभग 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। मौसम विभाग ने सीमावर्ती इलाकों के निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 11:43:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत ने किया स्पष्ट: ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में रुकने की अनुमति देना मानवीय फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने देने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने इसे कानूनी बारीकियों के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया निर्णय बताया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि जहाज कठिनाई में था और रायसीना डायलॉग में उन्होंने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और भारत की स्वतंत्र नीति पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-clarifies-that-allowing-iranian-warship-to-stop-in-kochi/article-145677"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन को कोच्चि बंदरगाह पर रूकने की अनुमति देने के भारत के फैसले पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि यह विशुद्ध कानूनी जटिलताओं से परे मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय है जो उनकी समझ से सही है।</p>
<p>जयशंकर ने शनिवार को यहां प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग के तीसरे और अंतिम दिन ‘हिन्द महासागर का भविष्य’ विषय पर पैनल चर्चा में हिस्सा लेते हुए सवालों के जवाब में कहा कि ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने का निर्णय विशेष परिस्थितियों और मानवीय आधार पर लिया गया है और इसे कानूनी बारीकियों में नहीं तोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान के तीन युद्धपोत आईआरआईएस डेना, आईआरआईएस लावन और आईआरआईएस बुशहर पिछले महीने विशाखापत्तनम में नौसेना के अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा समारोह तथा मिलन अभ्यास में शामिल होने आए थे और बाद में हिन्द महासागर में थे। </p>
<p><strong>हिन्द महासागर कुछ देशों तक सीमित नहीं </strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने कहा कि हिन्द महासागर केवल हिन्द महासागर से लगे देशों तक ही सीमित है ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, हिन्द महासागर की वास्तविकता को समझें। डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिन्द महासागर में मौजूद है। जिबूती में विदेशी सैन्य बलों की तैनाती इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में हुई थी। इसी अवधि के दौरान हम्बनटोटा भी बना।</p>
<p><strong>वे कठिनाइयों में थे</strong></p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि जहां तक जहाज़ के अंदर आने की इच्छा का सवाल है, वे कठिनाइयों में थे। मुझे लगता है कि मानवीय दृष्टिकोण से उनकी मदद करना सही था। हमने इस मामले को सरल रूप में और मानवता के नज़रिए से देखा न कि केवल कानूनी मुद्दों के दृष्टिकोण से। भारत की तरह श्रीलंका ने भी ईरान के युद्धपोत को डॉक करने की अनुमति दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 11:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा: गाजा में शांति, पुनर्निर्माण के लिए पांच अरब डॉलर देगा शांति बोर्ड, 19 फरवरी को दिया जाएगा अंतिम रूप</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा पुनर्निर्माण हेतु अंतरराष्ट्रीय देशों द्वारा 5 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता की घोषणा की। 19 फरवरी को वॉशिंगटन में शांति बोर्ड की बैठक में इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-announces-that-the-peace-board-will-give/article-143375"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा शांति योजना में अंतरराष्ट्रीय योगदान की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा कि शांति बोर्ड के सदस्य देशों ने क्षेत्र में मानवीय एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिए पांच अरब डॉलर से ज्यादा देने का वादा किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, इस पहल को 19 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन डीसी में डोनाल्ड जे ट्रंप शांति संस्थान में अंतिम रूप दिया जाएगा। यहां शांति बोर्ड के सदस्य बैठक करेंगे। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, शांति बोर्ड में असीम संभावनाएं हैं। वॉशिंगटन डीसी के डोनाल्ड जे ट्रंप शांति संस्थान में 19 फरवरी 2026 को शांति बोर्ड के सदस्य मेरे साथ होंगे जहां हम घोषणा करेंगे कि सदस्य देशों ने गाजा के मानवीय और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए पांच अरब डॉलर से ज्यादा देने का वादा किया है। साथ ही गाजा के लोगों के लिए सुरक्षा और शांति बरकरार रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थायीकरण बल एवं स्थानीय पुलिस बल में हजारों कर्मी उतारने का भी वादा किया है। </p>
<p>इसके आगे ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि उन्होंने अक्टूबर 2025 में गाजा संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने की एक योजना बनायी थी, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एकमत से स्वीकार कर लिया था। उन्होंने कहा कि उनकी पहल ने मानवीय राहत को रिकॉर्ड रफ्तार से जरूरतमंदों तक पहुंचाया। साथ ही जीवित एवं मृत बंधकों को इजरायल वापस पहुंचाया था। </p>
<p>ट्रंप ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में हुई शांति बोर्ड की बैठक ओर इशारा करते हुए कहा कि यह बोर्ड न सिर्फ गाजा के लिए, बल्कि विश्व शांति के लिए है। ट्रंप के अनुसार, यह पहल न सिर्फ गाजा का पुनर्निर्माण करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा सहयोग के लिए एक विस्तृत नक्शा भी तैयार करेगी। </p>
<p>उन्होंने कहा कि स्थायी शांति के लिए हमास का विसैन्यीकरण जरूरी होगा। उन्होंने लिखा, सबसे जरूरी, हमास को पूर्ण एवं तत्काल विसैन्यीकरण के अपने वादे को पूरा करना होगा। हमास ने अब तक इस नयी टिप्पणी का कोई जवाब नहीं दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:34:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने की शांति बोर्ड की घोषणा, गाजा योजना के दूसरे चरण की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण और विसैन्यीकरण हेतु 'पीस बोर्ड' का गठन किया, जो नई तकनीकी फिलिस्तीनी सरकार की निगरानी करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-announces-peace-board-launch-of-second-phase/article-139779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गाजा की निगरानी के लिए शांति बोर्ड के गठन की घोषणा की है। यह घोषणा इजरायल और हमास के बीच दो साल के संघर्ष के पश्चात हुए संघर्ष विराम के कुछ महीने बाद की गई है। गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपनी 20 सूत्री शांति योजना के दूसरे चरण के रूप में राष्ट्रपति ने संघर्ष विराम से अपना ध्यान हटाकर विसैन्यीकरण, तकनीकी शासन एवं पुनर्निर्माण पर केंद्रित किया है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका ने आधिकारिक रूप से गाजा शांति योजना के अगले चरण में प्रवेश कर लिया है जिसका मुख्य कारण संघर्ष विराम के दौरान वितरित की गई मानवीय सहायता का रिकॉर्ड स्तर है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, संघर्ष विराम के बाद से लगातार मेरी टीम ने गाजा में रिकॉर्ड स्तर की मानवीय सहायता पहुंचाने में मदद की है जिससे ऐतिहासिक गति से बड़ी संख्या में नागरिकों तक सहायता पहुंची है। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे अभूतपूर्व उपलब्धि बताया है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, मुझे घोषणा करते हुए अत्यंत गर्व महसूस हो रहा है कि शांति बोर्ड का गठन हो चुका है। बोर्ड के सदस्यों की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी, लेकिन मैं विश्वासपूर्वक कह सकता हूं कि यह अब तक किसी भी समय, किसी भी स्थान पर गठित किया गया सबसे महान एवं प्रतिष्ठित बोर्ड है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ का हवाला देते हुए घोषणा किया कि हमने आधिकारिक रूप से गाजा की 20 सूत्री शांति योजना के अगले चरण में प्रवेश कर लिया है। राष्ट्रपति ने अपने पोस्ट में लिखा, शांति बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में, मैं बोर्ड के उच्च प्रतिनिधि द्वारा समर्थित नवगठित फिलस्तीनी तकनीकी सरकार, नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा का समर्थन करता हूं ताकि गाजा में संत्ता हस्तांतरण काल के दौरान उसका शासन संभाला जा सके। फिलिस्तीनी नेता शांतिपूर्ण भविष्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। </p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिस्र, तुर्की और कतर के समर्थन से अमेरिका हमास के साथ एक व्यापक विसैन्यीकरण समझौता सुरक्षित करेगा जिसमें सभी हथियारों का आत्मसमर्पण और सभी सुरंगों को नष्ट करना शामिल है। उन्होंने आगे कहा, हमास को तुरंत अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए जिसमें इजरायल को अंतिम शव लौटाना भी शामिल है और बिना किसी देरी के पूर्ण रूप से सैन्य निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है वे इसे आसान या कठिन तरीके से कर सकते हैं। गाजा के लोग बहुत लंबे समय से पीड़ा झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि शक्ति के बल पर शांति की स्थापना हो।</p>
<p>अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प की योजना के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की और पुष्टि की है कि क्षेत्र में एक तकनीकी-प्रधान फिलिस्तीनी सरकार की स्थापना की जा रही है। विटकॉफ ने कहा कि पहले चरण के अंतर्गत, हमास और इजरायल अक्टूबर में युद्धविराम, बंधकों की अदला-बदली, इजरायल की आंशिक वापसी और मानवीय सहायता में वृद्धि पर सहमत हुए। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में गाजा का पुनर्निर्माण एवं पूर्ण विसैन्यीकरण शामिल है जिसमें हमास और अन्य फिलिस्तीनी समूहों का निरस्त्रीकरण भी शामिल है।</p>
<p>विटकॉफ ने कहा कि अमेरिका हमास से अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वहन करने की उम्मीद करता है। उन्होंने आगे कहा कि इनमें अंतिम मृत इजरायली बंधक के शव की वापसी भी शामिल है और ऐसा करने में विफल रहने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद, जेरेड कुशनर ने इस घोषणा की सराहना की, जो मध्य पूर्व पर विशेष सलाहकार के रूप में विटकॉफ के साथ काम कर चुके हैं। दूसरे चरण के दो प्रमुख तत्व हालांकि समस्या उत्पन्न करने वाला साबित हो सकते हैं। हमास ने पहले एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण के बिना अपने हथियार छोडऩे से इनकार कर दिया था जबकि इजरायल ने गाजा से पूर्ण रूप से पीछे हटने की कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 13:10:30 +0530</pubDate>
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                <title>''इंसानियत हुई शर्मसार'' पाकिस्तान ने श्रीलंका को भेजा एक्सपायरी खाना, भड़का कोलंबो</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान सरकार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा हुई है। चक्रवात से प्रभावित श्रीलंका को मानवीय सहायता के नाम पर भेजी गई राहत सामग्री—पानी, दूध और बिस्कुट—एक्सपायरी निकली। श्रीलंका के उच्चायोग द्वारा जारी तस्वीरों से यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/humanity-ashamed-pakistan-sent-expired-food-to-sri-lanka-colombo/article-134497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)9.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सरकार ने दोस्त तुर्की के बाद अब श्रीलंका के साथ धोखा किया है जिससे सोशल मीडिया पर उसकी किरकिरी हो रही है। पाकिस्तान ने मानवीय सहायता के नाम पर चक्रवात से प्रभावित श्रीलंका को एक्सपायरी फूड आइटम भेज दिया है। श्रीलंका में पाकिस्तान के उच्चायोग ने जो तस्वीरें जारी हैं, उससे ही इस फर्जीवाड़े की पोल खुल गई है। पाकिस्तान ने राहत सामग्री के नाम पर पानी, दूध और बिस्कुट भेजा है।</p>
<p> माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट एक्स पर इसकी तस्वीरें देखकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तान की इस घटिया हरकत को पकड़ लिया। अब वे तस्वीरें शेयर करके कंगाल पाकिस्तान को बेनकाब कर रहे हैं। इससे जहां श्रीलंका की सरकार भड़क उठी है, वहीं पाकिस्तान को राजनयिक शर्मिंदगी उठानी पड़ी है।</p>
<p>सोशल मीडिया यूजर्स ने तस्वीर देखकर बताया कि पाकिस्तान ने जो राहत सामग्री भेजी है, उसकी एक्सपायरी डेट अक्टूबर 2024 है। इससे पहले साल 2023 में भी तुर्की में भूकंप के दौरान पाकिस्तान ने वही राहत सामग्री वापस तुर्की को भेज दी थी जो उसने कराची में बाढ़ के दौरान उसने भेजा था।</p>
<p><strong>श्रीलंका ने पाक को जमकर सुना दिया</strong></p>
<p>पाकिस्तान के तुर्की के साथ किए धोखे से उसकी जमकर किरकिरी हुई थी। इसके बाद कंगाल पाकिस्तान की सरकार नहीं सुधरी और अब श्रीलंका को एक्सपायरी खाना भेज दिया। रिपोर्ट के मुताबिक एक्सपायरी और बेकार खाना देखकर अधिकारियों को श्रीलंका के आपदा प्रबंधन और विदेश मंत्रालय से इसको लेकर गंभीर चिंता जतानी पड़ी। इसके बाद श्रीलंका सरकार ने पाकिस्तान से औपचारिक और अनौपचारिक तरीके से इस पर घटनाक्रम पर आपत्ति जताई है।</p>
<p><strong>भारत ने बताया पाकिस्तानी झूठ का सच</strong></p>
<p>भारतीय अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान ने सोमवार को दोपहर लगभग एक बजे भारतीय हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरने की अनुमति मांगते हुए आधिकारिक अनुरोध किया था। अधिकारियों के मुताबिक, चूंकि अनुरोध श्रीलंका को मानवीय सहायता भेजने के लिए किया गया था, इसलिए भारत ने इसे शीघ्रता से मंजूरी दे दी और सोमवार को शाम साढ़े पांच बजे (भारतीय समयानुसार) आधिकारिक माध्यम से पाकिस्तान को इसकी सूचना दे दी। उन्होंने बताया कि इस पर बेहद कम यानी मात्र चार घंटे की नोटिस अवधि में कार्रवाई की गई। </p>
<p>एक अधिकारी ने कहा, पाकिस्तानी मीडिया हमेशा की तरह दुष्प्रचार और फर्जी खबरें फैलाने में लगा हुआ है। ये आरोप बेबुनियाद और भ्रामक हैं। हवाई क्षेत्र से गुजरने के सभी अनुरोधों पर स्थापित प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार सख्ती से कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति पर भारत के निर्णय मानक परिचालन, तकनीकी और सुरक्षा आकलनों से संचालित होते हैं, न कि राजनीतिक विचारों से। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मीडिया में प्रसारित खबरें गलत और गैर-जिम्मेदाराना हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 11:47:18 +0530</pubDate>
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