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                <title>military cooperation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फिर दोहराई ईरान के साथ करीबी संबंधों की बात, कहा-इस कठिन दौर में एक वफ़ादार दोस्त और भरोसेमंद साथी है रूस</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नवरोज़ पर ईरान को रूस का सबसे भरोसेमंद साथी बताया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच दोनों देशों में ड्रोन तकनीक और सैटेलाइट इंटेलिजेंस पर रणनीतिक सहयोग गहरा रहा है। पुतिन का यह संदेश पश्चिमी प्रतिबंधों के खिलाफ रूस-ईरान की मजबूत सैन्य और कूटनीतिक साझेदारी का एक शक्तिशाली संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-president-vladimir-putin-once-again-reiterated-the-need-for/article-147422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/russia2.png" alt=""></a><br /><p>माॅस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान और रूस के करीबी संबंधों की फिर से पुष्टि की है। पुतिन ने नवरोज़ (फ़ारसी नव वर्ष) के अवसर पर रूस को इस कठिन दौर में ईरान का एक वफ़ादार दोस्त और भरोसेमंद साथी बताया। उन्होंने ईरानी लोगों के लिए कामना की कि उन्हें इन कठिन परीक्षाओं का गरिमा के साथ सामना करने की शक्ति मिले।</p>
<p>पुतिन का यह संदेश ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को संबोधित था। क्रेमलिन ने बताया कि ईरानी नेतृत्व को ये बधाई संदेश नवरोज़ समारोहों के हिस्से के तौर पर भेजे गए थे, जो ईरानी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह बयान ऐसे समय में पुतिन का यह बतान रूस और तेहरान के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है। हाल की रिपोर्टों से पता चला है कि दोनों देशों के बीच सैन्य और खुफिया सहयोग बढ़ रहा है। बदलते भू-राजनीतिक तनावों के बीच पुतिन के इस संदेश को दोनों देशों के बीच निरंतर राजनीतिक और रणनीतिक तालमेल के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, रूस ईरान को ड्रोन से जुड़ी आधुनिक रणनीतियों में मदद कर रहा है और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना के ठिकानों और उनकी गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है। कहा जा रहा है कि इस खुफिया जानकारी में रूस के निगरानी तंत्रों से मिली सैटेलाइट तस्वीरें भी शामिल हैं, जो दोनों देशों के बीच सहयोग के स्तर में विस्तार का संकेत है। हाल के वर्षों में रूस और ईरान के संबंध और मज़बूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को ड्रोन की आपूर्ति की थी। वहीं रूस ने ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 11:56:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान के साथ बैठक: जंग का नाजुक दौर, पाक-सऊदी समझौते की रोशनी में युद्ध का नया आयाम निकलने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान द्वारा सऊदी तेल क्षेत्रों पर हमलों के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री की बैठक ने हलचल मचा दी है। द्विपक्षीय रक्षा समझौते के सक्रिय होने से युद्ध के भारतीय उपमहाद्वीप तक फैलने का खतरा है। पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका और ईरान के साथ उसकी सीमा इस संघर्ष को और अधिक जटिल बना रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-army-chief-asim-munirs-meeting-with-saudi-defense-minister/article-145681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pakistan1.png" alt=""></a><br /><p>रावलपिंडी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब सीधे निशाने पर है। खाड़ी के इस देश के ऑयल फील्ड और एयरपोर्ट पर लगातार हमले हो रहे हैं। इसी बीच रियाद में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान की अहम बैठक हुई। इस बैठक को जंग के इस नाजुक मोड़ पर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे युद्ध के भारतीय उपमहाद्वीप तक फैलने की आशंका उत्पन्न हो गई है। क्योंकि पाक्स्तिान का सऊदी अरब से रक्षा समझौता है और पाकिस्तान सऊदी का पक्ष लेकर कोई कदम उठा सकता है। </p>
<p>मुनीर और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान की अहम बैठक में ईरान के हालिया हमलों और उन्हें रोकने के उपायों पर चर्चा हुई। सऊदी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बैठक संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत हुई और इस दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने पर जोर दिया। हाल के दिनों में ईरान ने सऊदी अरब के शायबा आॅयल फील्ड को निशाना बनाया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि छह ड्रोनों को मार गिराया गया, जबकि दो बैलिस्टिक मिसाइलें प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास नष्ट की गईं। यह क्षेत्र यूएई की सीमा के पास स्थित है और पिछले हमलों के बाद अब ईरान सीधे इसमें शामिल हो रहा है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम </strong></p>
<p>ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अहम हो गई है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने संसद में खुलासा करते हुए कहा कि हाल के दिनों में ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमलों में कमी या प्रतिक्रिया न देने के पीछे पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल रही है। यह खुलासा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना देता है। इशाक डार ने बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ एक रणनीतिक रक्षा समझौता है। जब ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ा, तो पाकिस्तान ने तत्काल ईरान से संपर्क किया। पाकिस्तान ने ईरान को इस रक्षा समझौते के बारे में आगाह किया और आश्वासन मांगा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान ने ईरान को यह आश्वासन भी प्रदान किया। इस कूटनीतिक प्रयास ने तत्काल टकराव को टालने में मदद की।</p>
<p><strong>सऊदी अरब-पाक रक्षा समझौता हो सकता है सक्रिय</strong></p>
<p>अब तक चल रहे संघर्ष में खाड़ी देशों ने सीधे टकराव से खुद को दूर रखा था और अमेरिका ने भी इन देशों की जमीन का इस्तेमाल अपने हमलों के लिए नहीं किया था। हालांकि, अगर ईरान द्वारा सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं और सऊदी अरब-पाकिस्तान रक्षा समझौता सक्रिय हो जाता है, तो स्थिति पूरी तरह से बदल सकती है। यदि पाकिस्तान सऊदी अरब की ओर से ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो यह संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। यह सीधे तौर पर दक्षिण एशिया में भी फैल जाएगा, क्योंकि पाकिस्तान और ईरान के बीच एक लंबी सीमा लगती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:59:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने की आस्ट्रेलिया में शीर्ष सैन्य अ​धिकारियों से मुलाकात, सैन्य सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान सैन्य सहयोग और बहुराष्ट्रीय तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने 'ऑस्ट्राहिंद' अभ्यास और उभरती प्रौद्योगिकियों पर चर्चा कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/indian-army-chief-general-dwivedi-met-top-military-officers-in/article-143964"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)20.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने चार दिन की आस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान वहां शीर्ष सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए  समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मजबूत नेतृत्व, सेनाओं के बीच संयुक्तता और बहुराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया। सेना ने शुक्रवार को यहां बताया कि जनरल द्विवेदी 16 से 19 फरवरी तक ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक यात्रा पर थे। उनकी यात्रा से भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग को नई गति मिली और दोनों देशों के बीच सामरिक समन्वय और गहरा हुआ।</p>
<p>यात्रा के दौरान जनरल द्विवेदी ने ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बलों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ व्यापक बातचीत की। इन चर्चाओं में द्विपक्षीय सैन्य सहयोग की समीक्षा की के साथ सेना-से-सेना सहयोग का दायरा बढाने के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी। संयुक्त अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाने, व्यावसायिक सैन्य शिक्षा आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने तथा दोनों सेनाओं के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया।</p>
<p>सिडनी में सेना प्रमुख ने फोर्सेज कमांड, स्पेशल ऑपरेशंस कमांड और ऑस्ट्रेलियाई सेना की दूसरी डिवीजन के नेतृत्व से मुलाकात की। इन बातचीत में बल की तत्परता, परिचालन सिद्धांतों और प्रशिक्षण पद्धतियों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। द्विपक्षीय सेना अभ्यास आस्ट्राहिन्द पर विशेष चर्चा हुई और दोनों पक्षों ने इस वर्ष भारत में होने वाले इसके आगामी संस्करण को और समृद्ध बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।</p>
<p>कैनबरा में जनरल द्विवेदी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल साइमन स्टुअर्ट के साथ विस्तृत चर्चा की। वर्ष 2015 में अमेरिकी आर्मी वॉर कॉलेज के सहपाठी होने के अपने साझा अनुभव के आधार पर दोनों सेना प्रमुखों ने संस्थागत संबंधों को और मजबूत करने तथा सहयोग के नए आयाम विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल मुख्यालय में आयोजित व्यापक गोलमेज चर्चा में सैन्य आधुनिकीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य के परिचालन परिवेश से संबंधित विषयों पर विचार किया गया।</p>
<p>सेना प्रमुख ने ऑस्ट्रेलियन कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में अधिकारियों को संबोधित किया और ऑस्ट्रेलियन डिफेंस कॉलेज के नेतृत्व से भी मुलाकात की। उन्होंने समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मजबूत नेतृत्व, संयुक्तता और बहुराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया।</p>
<p>अपनी उच्चस्तरीय बैठकों के अंतर्गत जनरल द्विवेदी ने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज और रक्षा विभाग के सचिव से भी भेंट की। मुख्यालय जॉइंट ऑपरेशंस कमांड में उन्होंने कमांडर जॉइंट ऑपरेशंस के साथ ऑस्ट्रेलिया की एकीकृत और बहु-क्षेत्रीय परिचालन संरचना की समीक्षा की तथा संयुक्त योजना और क्रियान्वयन तंत्र की जानकारी प्राप्त की।</p>
<p>यात्रा के दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलियन वॉर मेमोरियल में पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच साझा बलिदान और सेवा की विरासत को नमन किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारत के पूर्व सैनिकों से भी भेंट की जिससे भारतीय सशस्त्र बलों और वैश्विक पूर्व सैनिक समुदाय के बीच संबंध और सुदृढ़ हुए। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंधों को नई गति प्रदान करने, उच्चतम सैन्य नेतृत्व स्तर पर पेशेवर संबंधों को मजबूत करने तथा हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करने में महत्वपूर्ण है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 16:52:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका का कड़ा रूख, ईरान-वेनेजुएला हथियार व्यापार को लेकर लगाए नए प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[ अमेरिका ने ईरान और वेनेजुएला के बीच कथित तौर पर हो रहे हथियारों के व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों देशों की 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-tough-stance-new-sanctions-imposed-on-iran-venezuela-arms-trade/article-137938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगटन। अमेरिका ने ईरान और वेनेजुएला के बीच कथित तौर पर हो रहे हथियारों के व्यापार को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों देशों की 10 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिका का आरोप है कि तेहरान, वेनेजुएला को पारंपरिक हथियारों की आपूर्ति कर रहा है, जिससे अमेरिकी सुरक्षा हितों को खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>अमेरिकी विदेश विभाग और वित्त विभाग के मंगलवार को जारी अलग-अलग बयानों में कहा गया कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान और वेनेजुएला के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को रोकना है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, प्रतिबंधों के दायरे में आई एक वेनेजुएला की कंपनी कथित तौर पर ईरानी डिजाइन वाले 'कॉम्बैट अनमैन्ड एरियल व्हीकल' या हमलावर ड्रोन की खरीद-बिक्री में शामिल रही है। अमेरिकी दावों के मुताबिक, यह व्यापार लाखों डॉलर का है और इसमें शामिल ड्रोन युद्धक अभियानों में सक्षम हैं।</p>
<p>इसके आगे बयान में कहा गया है कि ईरान के वेनेजुएला को हथियारों की आपूर्ति करना न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि यह अमेरिकी मातृभूमि की सुरक्षा के लिए भी चुनौती है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसे किसी भी सैन्य गठबंधन को बर्दाश्त नहीं करेगा जो उसके हितों को प्रभावित करता हो।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, ईरान और वेनेजुएला दोनों ही लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सैन्य संबंध और भी प्रगाढ़ हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 17:23:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से पहले 'ड्यूमा' ने सैन्य रसद समझौते को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी ड्यूमा ने भारत-रूस रसद समर्थन समझौते को मंजूरी दी, जिससे सैन्य कर्मियों, जहाज़ों और विमानों की तैनाती एवं पारस्परिक उपयोग आसान होगा। फरवरी 2025 में हस्ताक्षरित यह समझौता संयुक्त अभ्यास, मानवीय मिशन और आपदा राहत को सुचारू करेगा। पुतिन की भारत यात्रा से पहले यह बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/duma-approves-military-logistics-agreement-before-russian-president-putins-visit/article-134556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/putin-india-visit.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। रूसी संसद के निचले सदन 'ड्यूमा' ने मंगलवार को भारत के साथ एक प्रमुख अंतर-सरकारी समझौते को मंजूरी प्रदान की जिसमें एक-दूसरे के क्षेत्र में सैन्य कर्मियों के साथ-साथ सैन्य जहाजों एवं विमानों को भेजने की प्रक्रिया शामिल है। यह रसद समझौता 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चार दिसंबर से शुरू हो रही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नयी दिल्ली की राजकीय यात्रा से पहले रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p>फरवरी 2025 में भारतीय राजदूत विनय कुमार और तत्कालीन रूसी उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन द्वारा हस्ताक्षरित रसद समर्थन के पारस्परिक समझौते के माध्यम से दोनों देशों के बीच संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, मानवीय मिशन एवं आपदा राहत कार्यों के लिए सैन्य सुविधाओं, हवाई क्षेत्र एवं बंदरगाहों के पारस्परिक उपयोग की सुविधा प्राप्त होगी है। इससे आर्कटिक जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी परिचालन सुचारू हो सकेगा।</p>
<p>एजेंसी ने कहा कि, समझौते में, रूस की सैन्य इकाइयों, नौसैनिक जहाजों एवं सैन्य विमानों को भारतीय क्षेत्र में भेजने की प्रक्रियाओं पर रूसी सरकार एवं भारत सरकार के बीच समझौता और भारत की सैन्य इकाइयों, नौसैनिक जहाजों और सैन्य विमानों को रूसी क्षेत्र में भेजने और उनके पारस्परिक सैन्य समर्थन पर 18 फरवरी, 2025 को मास्को में हस्ताक्षरित समझौते की पुष्टि की जाएगी। एक विस्तृत नोट में इस बात पर बल दिया गया है कि, यह समझौता सैनिकों की तैनाती, नौसेना के जहाजों द्वारा बंदरगाहों पर आने-जाने तथा रूसी एवं भारतीय सैन्य विमानों द्वारा हवाई क्षेत्र और हवाई क्षेत्र अवसंरचना के उपयोग को सुविधाजनक बनाएगा।</p>
<p>दस्तावेजों में अभ्यास, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता, आपदा राहत और अन्य संयुक्त गतिविधियों में दोनों देशों की सैन्य संरचनाओं, नौसैनिक जहाजों और सैन्य विमानों के लिए रसद सहायता की व्यवस्था की रूपरेखा भी तैयार की गई है। कैबिनेट ने इस बात पर बल दिया कि इस समझौते के माध्यम से हवाई क्षेत्र का पारस्परिक उपयोग आसान होगा और रूसी तथा भारतीय युद्धपोतों को एक-दूसरे के बंदरगाहों तक पहुंचने में आसानी होगी। कुल मिलाकर यह समझौता दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को काफ़ी मजबूत करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 15:31:38 +0530</pubDate>
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