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                <title>voter list revision - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>voter list revision RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले में मुर्शिदाबाद सबसे अधिक प्रभावित, साढ़े चार लाख से अधिक मतदाताओं के कटे नाम </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद मुर्शिदाबाद सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। चुनाव आयोग ने राज्य भर में कुल 90.8 लाख नाम हटाए हैं, जिनमें से अकेले मुर्शिदाबाद के 4.5 लाख मतदाता शामिल हैं। इस बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई ने राज्य की सियासत और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/murshidabad-is-the-most-affected-in-the-case-of-removal/article-149822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मतदाताओं का नाम हटाए जाने के मामले में मुर्शिदाबाद जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां साढ़े चार लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से जारी जिलावार आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 74,775 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी यही स्थिति है, जहां लालगोला में 55,420, रघुनाथगंज में 46,100 से अधिक, फक्का में 38,222 और सूती में 37,965 नाम हटाए गए हैं। मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में मुर्शिदाबाद राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां कुल 4,55,137 नाम हटाए गए हैं। डोमकल, जंगीपुर, खरग्राम और भगवानगोला में भी 30 से 50 हजार के बीच नाम हटाए गए हैं।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, लगभग 60 लाख नामों को 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया था, जिसकी जांच करीब 700 न्यायिक अधिकारियों ने की। इनमें से 27,16,393 नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राज्य में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या 90,83,345 हो गई है। इसके अलावा, मालदा जिले के सुजापुर में 26,829 नाम हटाए गए हैं। उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा में 27,898 और इस्लामपुर में 15 हजार से अधिक नाम सूची से बाहर हुए हैं। दक्षिण 24 परगना के मटियाबुर्ज में 39,579 नाम हटाए गए, जबकि कैनिंग पूर्व, बसंती और गोसाबा में भी हजारों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके विपरीत, भांगड़ में यह संख्या अपेक्षाकृत कम 2,183 रही।</p>
<p>कोलकाता में भी इस प्रक्रिया का व्यापक असर दिखा है। कोलकाता पोर्ट में 13,395, चौरंगी में 10,424, बेलेघाटा में 9,532 और एंयली में 9,092 नाम हटाए गए। भवानीपुर में 3,893 और बालीगंज में 6,174 नाम हटाए गए, जबकि मानिकतला में सबसे कम 733 नाम हटाए गए। पश्चिम वर्धमान के आसनसोल उत्तर, कुल्टी और बाराबनी में 10,000 से 14,000 के बीच नाम हटाए गए हैं। कुल मिलाकर चुनाव आयोग के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों में 30,000 से 70,000 तक नाम हटाए गए हैं। विशेष रूप से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों और मुर्शिदाबाद एवं मालदा जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई ने एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: न्यायिक अधिकारियों पर हमले को लेकर हाईकोर्ट ने लगाई अधिकारियों को फ़टकार, एसआईआर से जुड़ा है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[मालदा में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश ने इसे कोर्ट के अधिकार को चुनौती और मनोबल गिराने वाला 'दुस्साहसिक प्रयास' बताया। अदालत ने निर्वाचन आयोग को भविष्य में अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-election-high-court-reprimands-officials-for-attack/article-148835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले और घेराव की घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए गुरुवार को इसे ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित करने का एक 'दुस्साहसिक प्रयास' और न्यायालय के अधिकार को चुनौती करार दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक गाँव में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हमले के बाद इस मामले पर तत्काल सुनवाई की, हालांकि यह मामला आज की कार्यसूची में सूचीबद्ध नहीं था।</p>
<p>न्यायालय ने राज्य में कल हुई घटनाओं के संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मिले खत के आधार पर इस मामले को बेहद जरूरी बताते हुए संज्ञान में लिया। पत्र के अनुसार, तीन महिला अधिकारियों सहित 7 न्यायिक अधिकारी मालदा जिले के एक गाँव में एसआईआर न्यायिक-निर्णय संबंधी कार्यों को पूरा कर रहे थे, तभी ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। इन अधिकारियों को दोपहर 3:30 बजे से आधी रात तक बंधक बनाकर रखा गया और कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा राज्य प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील किए जाने के बाद ही उन्हें मुक्त कराया जा सका।</p>
<p>पीठ ने इस घटना पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का सभी पक्षों द्वारा स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि वे तटस्थ एजेंट के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन अब उन्हें भी हमलों से नहीं बख्शा जा रहा है। न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की मांग करे। मुख्य न्यायाधीश ने पूर्व में यह भी टिप्पणी की थी कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रूप से संपन्न हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 17:46:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मतदाता सूची विवाद: पश्चिम बंगाल में SIR के लिए 9 मार्च को 200 न्यायाधीश संभालेंगे कार्यभार, मतदाता सूची की विसंगतियों से जुड़े मामलों का करेंगे निपटारा</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में सुधार हेतु ओडिशा और झारखंड से 200 न्यायाधीश 7 मार्च को कोलकाता पहुंचेंगे। ये न्यायिक अधिकारी 60 लाख लंबित प्रविष्टियों और तथ्यात्मक विसंगतियों की जांच करेंगे। विधानसभा चुनाव से पूर्व पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कुल 732 जज इस विशेष अभियान की कमान संभालेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/200-judges-will-take-charge-for-sir-in-west-bengal/article-145482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/benbal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में विसंगतियों को दूर करने में सहायता के लिये ओडिशा और झारखंड के लगभग 200 न्यायाधीश इस सप्ताह यहां पहुंचेंगे। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि ओडिशा और झारखंड से 100-100 न्यायाधीशों के सात मार्च को पश्चिम बंगाल पहुंचने की उम्मीद है। ये न्यायिक अधिकारी एसआईआर के तहत तैयार की गयी मतदाता सूची में तथ्यात्मक विसंगतियों से संबंधित मामलों की जांच और उनका निपटारा करेंगे।</p>
<p>राज्य में पहुंचने के बाद न्यायाधीश दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेंगे और फिर नौ मार्च से अपना कार्यभार संभालेंगे। उनके काम शुरू करने के बाद, पूरे पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विसंगतियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए कुल 732 न्यायाधीश तैनात होंगे।</p>
<p>आयोग के सूत्रों के अनुसार, बाहर से आने वाले न्यायाधीशों के ठहरने की व्यवस्था कोलकाता के प्रमुख स्थानों जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, सियालदह रेलवे स्टेशन और हावड़ा रेलवे स्टेशन के पास की गई है। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मामलों के त्वरित निपटारे के लिए कुछ न्यायाधीशों को वर्धमान, आसनसोल, खडग़पुर और सिलीगुड़ी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में तैनात किया जाएगा।</p>
<p>मतदाता सूची की विसंगतियों को सुलझाने के मुद्दे पर राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद पर उच्चतम न्यायालय द्वारा असंतोष जताए जाने के बाद न्यायिक अधिकारियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। न्यायालय ने निर्देश दिया था कि इस मामले को न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से सुलझाया जाए।</p>
<p>न्यायालय के निर्देशानुसार, विसंगतियों के निपटारे का कार्य कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। न्यायालय ने इस कार्य के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की भी अनुमति दी है। इसी क्रम में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल ने न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति से पहले राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि यदि आवश्यकता हुई तो अन्य राज्यों से भी अतिरिक्त न्यायाधीश बुलाए जा सकते हैं। इसके बाद ही ओडिशा और झारखंड से न्यायिक अधिकारियों की मांग की गई। सूत्रों का कहना है कि काम का बोझ बढऩे पर इन राज्यों से और भी न्यायाधीश बुलाए जा सकते हैं। एसआईआर के तहत संशोधित मतदाता सूची का पहला चरण 28 फरवरी को प्रकाशित किया गया था। हालांकि, यह सूची अभी भी अधूरी है क्योंकि लगभग 60 लाख मतदाताओं की प्रविष्टियों को विचाराधीन रखा गया है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण अब यह अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या इन मामलों का समय पर समाधान हो पाएगा और क्या वे मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे। इस बीच, चुनाव की तैयारियों के हिस्से के रूप में केंद्रीय सशस्त्र बल पहले ही राज्य में पहुंच चुके हैं और कई जिलों में रूट मार्च कर रहे हैं। इसी क्रम में राजनीतिक हलचल को बढ़ाते हुए चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची संशोधन की प्रगति की समीक्षा करने के लिए आठ मार्च को पश्चिम बंगाल पहुंचने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 17:37:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का आर्टिकल 142 का उपयोग: बंगाल चुनाव से पहले 'पूर्ण न्याय' का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल किया ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रोसेस की टाइमलाइन की वजह से पश्चिम बंगाल में कोई भी योग्य वोटर वोटर रोल से छूट न जाए, और राज्य विधानसभा चुनावों से पहले यह एक बहुत बड़ा दखल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-use-of-article-142-to-order-complete-justice/article-144398"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सशक्त बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि समय सीमा की बाधाओं के कारण कोई भी पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।</p>
<p><strong>सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट और ज्यूडिशियल मैनपावर</strong></p>
<p>अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी सप्लीमेंट्री (पूरक) लिस्ट जारी रखी जाए। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में 'लॉजिकल डिसकम्पेन्सी' जैसे तकनीकी कारणों से लगभग 80 लाख मामलों का निपटारा होना अभी बाकी है। कोर्ट ने माना कि मौजूदा गति से इन दावों को निपटाने में 80 दिन लग सकते हैं, जो चुनाव की संभावित तारीखों के हिसाब से बहुत अधिक है।</p>
<p>काम में तेजी लाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को झारखंड और ओडिशा के मौजूदा व सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद लेने का अधिकार दिया गया है। कोर्ट ने इसे "युद्ध स्तर पर" पूरा करने का निर्देश दिया है।</p>
<p><strong>चुनावी शुद्धता और समावेशिता</strong></p>
<p>बेंच ने स्पष्ट किया कि पहचान के सबूत के तौर पर आधार, एडमिट कार्ड और सर्टिफिकेट मान्य रहेंगे। इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच "भरोसे की कमी" को पाटते हुए मतदाता सूची की पवित्रता बनाए रखना है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अनुच्छेद 142 के तहत दिए गए इन निर्देशों को भविष्य के लिए 'मिसाल' (Precedent) नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह केवल बंगाल की "असाधारण स्थिति" के लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:11:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में सुधार, आपत्तियों की समय सीमा आज पूरी: चुनाव आयोग</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की विस्तारित समय सीमा 19 जनवरी को समाप्त हो रही है। अब तक करीब 9.12 लाख नए आवेदन प्राप्त हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/deadline-for-objections-to-voter-list-correction-in-west-bengal/article-140097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/west-bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मसौदा मतदाता सूची पर आवेदन और आपत्तियां दाखिल करने की चुनाव आयोग की विस्तारित समय सीमा सोमवार को समाप्त हो जायेगी। इसी के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के शिकायत और दावा चरण का समाप्त हो जायेगा। </p>
<p>आयोग ने एसआईआर की घोषणा के समय ही स्पष्ट कर दिया था कि मतदाताओं के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति होगी। पश्चिम बंगाल में इस तरह के आवेदनों को जमा करने की अंतिम तिथि 19 जनवरी निर्धारित की गयी थी। आज समय सीमा समाप्ति के बाद अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन तक कोई ताजा आवेदन या आपत्तियां स्वीकार नहीं की जायेंगी।</p>
<p>प्रारंभिक मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित की गयी थी और आयोग ने 17 दिसंबर से दावे और आपत्तियां स्वीकार करना शुरू कर दिया था। इस दौरान मतदाताओं ने या तो मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया या फिर फॉर्म-7 जमा कर नाम हटाने की मांग की। राजनीतिक दलों ने भी अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के जरिये आवेदन किया।</p>
<p>पहले दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 जनवरी निर्धारित की गयी थी। चुनाव आयोग ने हालांकि बाद में समय सीमा चार दिनों के लिए बढ़ा दी थी। सुनवाई प्रक्रिया सात फरवरी तक जारी रहेगी। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया है, वे चाहें तो जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। यह सुविधा आवेदन विंडो बंद होने के बावजूद मतदाताओं के लिए सात फरवरी तक खुली रहेगी।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, रविवार रात तक के मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद मतदाता सूची में शामिल किये जाने के आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रारंभिक सूची के प्रकाशित होने से पहले नये नामों को शामिल कराने के लिए 3,31,075 आवेदन प्राप्त हुए थे। प्रारंभिक सूची के प्रकाशन के बाद के एक महीने में नाम शामिल कराने के लिए 5,59,053 और आवेदन जमा कराये गये। </p>
<p>मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए अब तक कुल 9,12,128 लोगों ने आवेदन दिया है। तय समय में नाम हटाने के लिए 56,867 आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रारंभिक सूची के प्रकाशन के बाद ऐसे 41,847 और आवेदन दायर किये गये। कुल मिलाकर नाम हटाने के लिए करीब एक लाख आवेदन आयोग के सामने आये हैं। राजनीतिक मोर्चे पर तृणमूल कांग्रेस ने 13 मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया है, जिन्हें मतदाता सूची के मसौदे में 'मृत' दिखाया गया था। पिछले कुछ दिनों में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक बैठकों में बार-बार यह मुद्दा उठाया और उन व्यक्तियों को पेश कर दावा किया कि मसौदा सूची में मृत के रूप में दर्ज होने के बावजूद वे जीवित हैं।</p>
<p>इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने कई मौकों पर जवाब दिया है। कुछ मामलों में गलतियां मानी हैं और कुछ में संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों से सफाई मांगी है। ऐसा माना जा रहा है कि तृणमूल की तरफ से जमा किये गये आवेदन इन 13 'मृत' मतदाताओं से जुड़ी हैं। इसकी तुलना में भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे सिर्फ एक को शामिल कराने के लिए आवेदन दी है। इसके विपरीत भाजपा की ओर से नाम हटाने की मांग करने वाले सबसे अधिक आवेदन आये हैं। आयोग के सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने 591 नामों को हटाने की मांग की है, जबकि तृणमूल ने केवल 13 नाम हटाने के लिए आवेदन किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 16:30:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, गोवा, लक्षद्वीप, राजस्थान, पुड्डुचेरी के लिए बढ़ाई एसआईआर की समय सीमा, अब इस तारिख तक दर्ज करवा सकते हैं आपत्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की अवधि 19 जनवरी तक बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/election-commission-extended-the-deadline-for-sir-for-west-bengal/article-139772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ec.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, गोवा, लक्षद्वीप, राजस्थान और पुड्डुचेरी के लिए मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समय सीमा 19 जनवरी तक बढ़ा दी है। आयोग ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि उसने समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लेने से पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के अनुरोधों और अन्य जरूरी कारकों पर विचार किया था।</p>
<p>यह विस्तार एक जनवरी को पात्रता तिथि मानते हुए दिया गया है, जिसके तहत अब 19 जनवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। अवर सचिव संदीप कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में एसआईआर के लिए मूल समय सारणी निर्धारित करने वाले पिछले साल के 27 अक्टूबर के आदेश का संदर्भ दिया गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस विस्तार का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि पात्र मतदाताओं को पर्याप्त रूप से सूचित किया जा सके। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को संशोधित समय सारणी का कड़ाई से पालन करने का निर्देश भी दिया है।</p>
<p>चुनाव आयोग ने कहा है कि विस्तार के संबंध में अधिसूचना संबंधित राज्य के गजट (राजपत्र) में तुरंत प्रकाशित की जाए, और आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए अधिसूचना की तीन प्रतियां आयोग को भी भेजी जाएं। गौरतलब है कि, एसआईआर एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो मतदाता सूचियों को अद्यतन करने और भविष्य के चुनावों से पहले सटीकता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर की जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 12:40:38 +0530</pubDate>
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                <title>मतदाता सूची के आंकड़ों पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के आंकड़ों पर सरकार को घेरा है। उन्होंने पूछा कि 15 दिनों में अचानक 1.11 करोड़ वोटर कैसे बढ़ गए? अखिलेश ने आंकड़ों में विसंगति का आरोप लगाते हुए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadav-raised-questions-on-voter-list-data-demanded-impartial/article-137507"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/akhilesh-yadav-blo.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सामने आए आंकड़ों ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता संख्या में आए उतार-चढ़ाव पर गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री की ओर से यह दावा किया गया था कि एसआईआर प्रक्रिया में प्रदेश में लगभग 4 करोड़ वोटर कम हुए हैं, लेकिन बाद में दो करोड़ 89 हजार का अलग आंकड़ा सामने आना जनता को भ्रमित करता है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल किया कि अगर वास्तव में चार करोड़ वोटरों की संख्या घटी थी, तो फिर कुछ ही समय में आंकड़े कैसे बदल गए। महज दो हफ्तों के भीतर एक करोड़ 11 लाख वोटरों की संख्या का अचानक बढ़ जाना स्वाभाविक नहीं लगता। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ये वोट वास्तव में जुड़े हैं या फिर कागजी तौर पर जोड़े गए हैं।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि अगर इतने बड़े पैमाने पर नए मतदाता पंजीकरण हुए हैं, तो इसका असर जमीनी स्तर पर क्यों नहीं दिखा। न कहीं लंबी कतारें दिखीं और न ही किसी व्यापक अभियान की जानकारी सामने आई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतने बड़े पंजीकरण से जुड़े कोई सीसीटीवी फुटेज या आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे।</p>
<p>अखिलेश यादव ने आशंका जताई कि कहीं ये आभासी या डिजिटल वोटर तो नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब भाजपा का मंत्रिमंडल और कार्यकर्ता हाल के दिनों में अन्य आयोजनों में व्यस्त थे, तब इतने बड़े स्तर पर मतदाता पंजीकरण कैसे संभव हो पाया। सपा ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी आंकड़े जनता के सामने रखे जाएं, ताकि लोकतंत्र की पारदर्शिता बनी रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 14:30:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एसआईआर को लेकर अखिलेश ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल, बोलें-चुनावी गणित होगा प्रभावित </title>
                                    <description><![CDATA[यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर में बाहर हुए ज्यादातर मतदाता सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थक थे, जिससे चुनावी गणित प्रभावित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-raised-questions-on-the-electoral-mathematics-of-the-central/article-135983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/akhilesh_yogi_priyanka.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी के एक बयान का हवाला देते हुए यूपी सरकार पर सीधा हमला बोला है। अखिलेश यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि एसआईआर के दौरान जो लगभग चार करोड़ मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए, उनमें से 85 से 90 प्रतिशत पार्टी के मतदाता थे।</p>
<p>अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस बयान के कई राजनीतिक और गणितीय निहितार्थ निकलते हैं। उनका कहना है कि पहला निष्कर्ष यह है कि पीडीए प्रहरी की सतर्कता के चलते एसआईआर प्रक्रिया में सत्तारूढ़ पार्टी अपनी मनमाफिक गड़बड़ी नहीं कर सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं को साक्ष्यों के अभाव में सूची से बाहर किया गया, उनमें भारी बहुमत भाजपा समर्थकों का था, जिससे यह संकेत मिलता है कि अनियमितताओं की जड़ भी सत्तारूढ़ पार्टी के वोट बैंक में थी।</p>
<p>उन्होंने आंकड़ों के आधार पर कहा कि यदि चार करोड़ मतदाताओं में से न्यूनतम 85 प्रतिशत भी सत्तारूढ़ पार्टी समर्थक मान लिए जाएं, तो लगभग तीन करोड़ 40 लाख मतदाता कम हो गए। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिहाज से यह प्रति सीट औसतन करीब 84 हजार वोटों की कमी को दर्शाता है। अखिलेश यादव का दावा है कि यह अंतर इतना बड़ा है कि इससे सत्तारूढ़ पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में निर्णायक रूप से कमजोर हो जाएगी।</p>
<p>अखिलेश यादव यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल को संभावित नुकसान को देखते हुए ही चुनाव आयोग ने एसआईआर की समय-सीमा दो सप्ताह के लिए बढ़ाई है। अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए प्रहरी अब पहले से अधिक सजग रहेंगे और मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी को नहीं होने देंगे।</p>
<p>अखिलेश यादव ने भरोसा जताया कि यह पूरा घटनाक्रम पीडीए की जीत के अंकगणित को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि पीडीए की एकजुटता को देखकर सत्तारूढ़ पार्टी ही नहीं, बल्कि उसके प्रत्यक्ष और परोक्ष सहयोगी दलों में भी बेचैनी बढ़ गई है। अखिलेश यादव के अनुसार आने वाले विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची की पारदर्शिता और पीडीए की एकजुटता ही निर्णायक भूमिका निभाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 12:43:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>BLO की मौतों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 'काम का दबाव कम करें, छुट्टी भी दीजिए'</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार चुनाव के बाद देशभर में चल रहे एसआईआर अभियान के दौरान बीएलओ पर बढ़ते दबाव और आत्महत्या की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन मौतों के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि कर्मचारियों की कमी दूर करना उनकी जिम्मेदारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taking-cognizance-of-the-deaths-of-blos-the-supreme-court/article-134698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sc-on-blo-death.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव के बाद अब पूरे देश में एसआईआर करवाने का फैसल किया है, जिसके बाद देश के करीब 12 राज्य/ केंद्रशासित राज्यों में एसआईआर का काम पूरे जोर शोर पर चल रहा है। बता दें कि, कई बीएलओ एसआईआर का तनाव सहन नहीं  कर पाएं और उन्होंने आत्महत्या कर ली। इसी बीच सु्प्रीम कोर्ट ने आज बीएलओं की मौत पर संजान लेते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है। दरअसल, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीएलओं की आत्महत्या, उनकी कार्य स्थितियों और मानसिक स्वास्थय के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<p>इसके आगे सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि, एसआईआर एक वैध प्रक्रिया हैं और इस पूरा भी होना होगा। यदि राज्यों में कर्मचारियों की कमी है तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ राज्य सरकार ही जिम्मेदार है। इसके आगे सुप्रीम कोर्ट ने  कहा कि एसआईआर के लिए चुनाव आयोग को उपलब्ध कराए गए कर्मचारियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है, तो इसके लिए राज्य सरकार को उनकी कठिनाइयों को दूर करना चाहिए।</p>
<p>इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को साफ निर्देश दिए है कि बीएलओ की मानसिक स्थिति को कम करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती जल्द से जल्द करें। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा है कि यदि कोई भी बीएलओ व्यक्तिगण कारणों से एसआईआर करने में सक्षम नहीं है तो उचित कारणों से उनको राहत देने की भी कृपा करें और उनके स्थान पर किसी और को काम पर लगाया जाए।</p>
<p>बीएलओ आत्महत्या मामले में सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने बताया कि हमारे पास करीब 35 से 40 बीएलओ की जानकारी है जिन्होंने दवाब के चलते आत्महत्या कर ली है। ये सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक आदि हैं। इस मामले में ​वरिष्ठ वकील कपिल सिब्ब्ल ने सु्प्रीम कोर्ट को बताया कि, बीएलओ पर दबाव वाकई मे चिंता की बात है और एसआईआर करवाने की सरकार को इतनी जल्दी क्या है। इसके लिए सबको पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।</p>
<p>दरअसल, तमिलनाडु और केरल में अगले साल विधानसभा चुनाव होंगे इसके साथ ही गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी चुनाव होंगे। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में भी 2026 में चुनाव होंगे जिसके लिए इन सभी राज्यों में एसआईआर का काम चल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 19:29:38 +0530</pubDate>
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