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                <title>Election Reforms - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Election Reforms RSS Feed</description>
                
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                <title>केंद्र सरकार का विपक्ष पर हमला, चुनाव सुधार मुद्दों पर लगाया गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में चुनाव सुधारों पर गुरुवार को सत्ता और विपक्ष में तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दुरुपयोग और संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने कांग्रेस को सुधारों की अनदेखी और हार पर आयोग को कठघरे में खड़ा करने के लिए जिम्मेदार बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-attacks-opposition-and-makes-serious-allegations-on-election/article-135664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sudansu.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला जिसमें केंद्र सरकार ने जहां कांग्रेस पर चुनाव सुधारों पर कभी ध्यान नहीं देने तथा चुनाव आयोग को सुविधानुसार अच्छा बुरा बताने का आरोप लगाया वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं के दुरूपयोग तथा उन्हें कमजोर करने का आरोप लगाया। </p>
<p>कांग्रेस के अजय माकन ने राज्यसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा की शुरूआत करते हुए जीवंत लोकतंत्र के लिए समान अवसर, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि 2004 में केंद्र सरकार के बैंक खाते में 88 करोड़ रुपए थे और कांग्रेस के खाते में 38 करोड़ रुपए थे। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार के खाते में 150 तो कांग्रेस के खाते में 221 करोड़ रुपये थे। वर्ष 2024 में केंद्र सरकार के खाते में 10 हजार 107 करोड़ रुपये हो गये तो कांग्रेस के खाते सीज कर दिये गये। </p>
<p>इसके आगे माकन ने कहा, पारदर्शिता की बात करें तो हरियाणा में चुनाव में वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े बदलते रहे। जब सीसीटीवी फुटेज की मांग की गयी, तो सरकार ने दस दिन के अंदर नियम बदल दिया और कहा कि 45 दिन के बाद फुटेज नहीं दिया जा सकता।    विश्वसनीयता के मामले में उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे अपनी विश्वसनीयता बहाल करनी होगी। उन्होंने कहा, अगर अंपायर ही एक टीम की जर्सी पहन लेगा तो दूसरी टीम क्या करेगी? अंपायर ही अगर मैच फिक्स कर लेगा तो खिलाड़ी क्या करेगा? </p>
<p>अजय माकन ने कहा कि सरकार ने कानून बदलकर चुनाव आयुक्तों को पूरी तरह से संरक्षण दे दिया है और वे कितना भी पक्षपात करें, कोई उनके ऊपर उंगली नहीं उठा सकता। उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। अजय माकन ने आरोप लगाया कि चुनाव आचार संहिता केवल विपक्ष पर लागू की जाती है सत्ता पक्ष पर नहीं। इस मामले में उन्होंने हिमाचल प्रदेश और विधानसभा चुनावों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, विपक्ष करे तो 'रेवड़ी' और आचार संहिता का उल्लंघन, मगर पक्ष करे तो 'जनकल्याण' ये दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।</p>
<p>केंद्र सरकार के सुधांशु त्रिवेदी ने भारत को लोकतंत्र की जननी करार देते हुए कहा कि समूचे पूर्वी गोलाद्र्ध में अकेला भारत ही लोकतंत्र का मजबूत आधार स्तंभ है। उन्होंने कांग्रेस पर अपने शासनकाल में चुनाव सुधारों की ओर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस देश में चुनावी धांधली की सबसे पहली याचिका 21 अप्रैल 1952 में स्वयं बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने दायर की थी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की चुनावी जीत का मामला भी अदालत में पहुंच गया लेकिन कांग्रेस ने कभी चुनाव सुधारों पर बात नहीं की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब जब चुनाव जीतती है तो वह चुनाव आयोग पर कोई सवाल नहीं करती लेकिन चुनाव हारने पर चुनाव आयोग को सवालों के घेरे में खड़ा कर देती है। </p>
<p>उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि देश में कम्यूटर युग की शुरूआत करने का दावा करने वाली कांग्रेस अब क्वांटम युग में आते आते पर्ची से चुनाव कराने पर जोर दे रही है। कांग्रेस द्वारा मतदान केन्द्रों की सीसीटीवी फुटेज मांगे जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सीसीटीवी का इस्तेमाल वर्ष 2005 में शुरू हुआ था और इसके बाद से राजद और कांग्रेस को बिहार में अकेले बहुमत नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का काम केवल बवाल खड़ा करना है और उसे कानूनी प्रक्रिया से कुछ लेना देना नहीं। प्रक्रिया के अनुसार उसे 45 दिन में शिकायत कर फुटेज मांगनी चाहिए। कांग्रेस के वोट चोरी के आरोप पर साल दर साल चुनावों में कांग्रेस के वोट कम होने के आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास वोट ही नहीं है तो चोरी किस चीज की होगी। </p>
<p>सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वोट कम होने के बाद अब कांग्रेस ने ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा छोड़ दिया है और वोट चोरी का मुद्दा उठा लिया है। उन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष पद के आतंरिक चुनावों में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए उसे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि वोट चोरी की बात करने वाली कांग्रेस इस बात को भूल जाती है कि 1946 में पार्टी के आंतरिक चुनाव में पंडित जवाहर लाल नेहरू जीरो वोट पाने के बावजूद जीत गये। </p>
<p>इसके आगे सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 1916 में पृथक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए समझौता करने वाली कांग्रेस अब घुसपैठियों के लिए प्रथक निर्वाचन क्षेत्र बनाने की कोशिश में लगी है। सुधांशु त्रिवेदी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अगस्त 2005 में घुसपैठियों के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष की ओर फाइल फेंक दी थी और आज उनका रूख एकदम अलग है। उन्होंने कहा कि विपक्ष हमेशा गलत काम करने वालों के साथ ही खड़ा दिखाई देता है। </p>
<p>कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढते दुरूपयोग का हवाला देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने सुझाव दिया कि भविष्य में चुनावों से पहले सरकार को एआई सिग्नेचर को प्रमाणित करने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में गंभीर प्रत्याशी ही हिस्सा लें इसके लिए उम्मीदवार के प्रस्तावकों की संख्या बढानी होगी। उन्होंने कहा कि चुनावी भाषणों में अनाप शनाप बयानबाजी और चुनावी वादों से भ्रम फैलाने पर भी रोक लगाई जानी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 18:56:58 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का लोकसभा में चुनाव सुधारों पर बड़ा बयान, आरएसएस और ‘समानता’ के मुद्दे पर संसद में हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण से जुड़ी टिप्पणियों पर हंगामा हो गया। उन्होंने आरएसएस, गांधी और संवैधानिक संस्थाओं का उल्लेख किया, जिस पर सत्तापक्ष ने आपत्ति जताई। मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें विषय पर रहने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhis-big-statement-on-election-reforms-in-lok-sabha/article-135377"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi--in-parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान लोकसभा में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में विषय से हटकर आरएसएस, महात्मा गांधी, नाथूराम गोडसे और संवैधानिक संस्थाओं का उल्लेख करना शुरू किया। इस पर सत्तापक्ष ने आपत्ति जताई और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें विषय पर केंद्रित रहने की सलाह दी।</p>
<p>चर्चा की शुरुआत चुनाव आयोग द्वारा कई राज्यों में किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास को लेकर हुई थी। विपक्षी दल लंबे समय से वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए इस मुद्दे पर संसद में बहस की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी तरह की त्रुटि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर सकती है।</p>
<p>अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने देश को “ताना-बाना” बताते हुए कहा कि भारत 1.4 अरब लोगों से बना एक सामाजिक कपड़े की तरह है, जो वोट के धागों से बुना गया है। उन्होंने कहा, “अगर वोट सुरक्षित नहीं रहेगा, तो लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाएं भी सुरक्षित नहीं रहेंगी।” इसके आगे राहुल गांधी ने कहा, देश की संस्थाएं वोट की शक्ति से ही अस्तित्व में आई हैं, और इसीलिए चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा बेहद जरूरी है।</p>
<p>राहुल गांधी ने अपने भाषण में आरएसएस का हवाला देते हुए कहा कि संगठन समानता के विचार से असहज महसूस करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस पदानुक्रम में विश्वास रखता है और खुद को सबसे ऊपर मानता है। उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस संवैधानिक संस्थाओं पर प्रभाव बढ़ाना चाहता है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन कमजोर हो सकता है। अपने वक्तव्य में राहुल गांधी ने महात्मा गांधी और नाथूराम गोडसे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या एक ऐतिहासिक सच्चाई है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। साथ ही उन्होंने दावा किया कि देश की संस्थाएं और लोकतांत्रिक ढांचा वोट की नींव पर खड़ा है, इसलिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है।</p>
<p>उन्होंने खादी का उदाहरण देते हुए कहा कि खादी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत के लोगों की भावना और अभिव्यक्ति है। उनके अनुसार, गांधीजी द्वारा खादी को अपनाना एक सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश था, जो देश की आत्मा से जुड़ा हुआ था। इस दौरान सत्ता पक्ष की ओर से लगातार हंगामा होता रहा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार चुनाव सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष के नेता विषय से भटक रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे अपनी बात चुनाव सुधारों तक सीमित रखें।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम के बाद सदन में भारी शोर-शराबा देखने को मिला। हालांकि, चुनाव सुधारों और मतदाता सूची की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा जारी रहने की संभावना है, क्योंकि यह विषय सभी दलों के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 19:26:17 +0530</pubDate>
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                <title>विपक्ष के आरोपों पर जे.पी. नड्डा का पलटवार, बोलें-सरकार कभी चर्चा से नहीं भागी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में विपक्ष द्वारा नियम 267 के तहत नोटिस खारिज किए जाने पर मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्काल मुद्दों पर चर्चा की मांग उठाई। जे.पी. नड्डा ने कहा कि सरकार कभी चर्चा से नहीं भागती और चुनाव सुधारों व ‘वंदे मातरम्’ पर विस्तृत चर्चा के लिए पहले ही सहमति बन चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nadda-countered-on-oppositions-allegations-and-said-the-government-never/article-134737"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/j-p-nadda-in-parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने गुरुवार को कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से कभी नहीं भागी है और इसलिए विपक्ष की मांग पर उसने चुनाव सुधारों पर चर्चा की की बात मान ली है। इससे पहले, राज्यसभा की नियमावली के नियम 267 के तहत चर्चा के लिए दिये गये नोटिस को सभापति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा तकनीकी कारणों से खारिज किये जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकसभा की तरह राज्यसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए विपक्ष के पास नियम 267 के नोटिस का ही चारा रह जाता है। </p>
<p>नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, हमें महत्वपूर्ण मुद्दों को तत्काल उठाने का मौका नहीं मिलता। जब भी कोई महत्वपूर्ण मुद्दा आता है, हम नियम 267 के तहत नोटिस देते हैं। इसके आगे उन्होंने अनुरोध किया कि इन नोटिसों को सीधे खारिज न कर दिया जाये, सभापति चाहें तो नियमों से इतर भी चर्चा की अनुमति दे सकते हैं। इस पर नड्डा ने कहा कि सरकार कभी भी चर्चा से नहीं भागी है। वह हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। पिछले सत्र में भी सरकार ने सभी मुद्दों पर चर्चा की है और मंगलवार को ही कार्य मंत्रणा समिति में 'वंदे मातरम्' और 'चुनाव सुधारों' पर चर्चा पर सहमति बनी है। </p>
<p>गुरूवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जरूरी कागजात सदन के पटल पर रखे जाने के बाद श्री राधाकृष्णन ने नियम 267 के तहत दिये गये नोटिसों को स्वीकार नहीं करने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि राज्यसभा की नियमावली के अंतर्गत नियम 267 में उन्हीं विषयों पर चर्चा हो सकती है, जो उस दिन की कार्यसूची में शामिल हो। उन्होंने बताया कि साल 1988 से सिर्फ तीन मौकों पर इस नियम के तहत सदन में चर्चा हुई है, हालांकि आठ अवसरों पर सर्वसम्मति से सदन में उन विषयों पर चर्चा हुई है जिसके लिए नोटिस दिये गये थे। इसलिए, नियम 267 के तहत सदन में चर्चा के उदाहरण विरले हैं। </p>
<p>उन्होंने सदन को यह भी बताया कि कार्य मंत्रणा समिति में 'चुनाव सुधारों' और 'वंदे मातरम' पर 10-10 घंटे तथा पान मसाला से संबंधित विधेयक पर चार घंटे चर्चा पर सहमति बनी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 16:37:11 +0530</pubDate>
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