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                <title>Trade deal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>India-New Zealand FTA : PM Christopher Luxon ने बताया ऐतिहासिक समझौता, व्यापार में आएगा बड़ा बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते को "एक पीढ़ी का अवसर" बताया। इस डील का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। हालांकि, मंत्री शेन जोन्स की 'बटर चिकन' टिप्पणी पर विवाद हुआ, जिसे विपक्ष ने अपमानजनक बताया। यह समझौता आर्थिक संबंधों में नए युग की शुरुआत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-new-zealand-fta-pm-christopher-luxon-said-historic-agreement-will/article-151859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi16.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में बड़ा बदलाव लाएगा। उन्होंने इसे “एक पीढ़ी में एक बार होने वाला अवसर” करार देते हुए कहा कि इस समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारत जैसे विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। हालांकि इस डील को लेकर न्यूजीलैंड की राजनीति में विवाद भी देखने को मिला। मंत्री Shane Jones की ‘बटर चिकन सुनामी’ वाली टिप्पणी पर विपक्ष और प्रवासी समुदाय ने कड़ी आपत्ति जताई। कई नेताओं ने इसे अपमानजनक बताते हुए आलोचना की, जबकि प्रधानमंत्री लक्सन ने इसे अनावश्यक टिप्पणी कहा, लेकिन नस्लवादी मानने से इनकार किया।</p>
<p>वहीं, सांसद Carlos Cheung और अन्य नेताओं ने इस बयान को अनुचित बताया और प्रवासी समुदाय के सम्मान की बात उठाई। ACT पार्टी के नेता David Seymour ने भी ऐसे बयानों को गैरजरूरी करार दिया। इसी बीच India और New Zealand के बीच नई दिल्ली में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है। समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों पर शुल्क में बड़ी कटौती करेंगे, जिससे व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुक्त व्यापार समझौते के करीब ऑस्ट्रेलिया-ईयू: विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर कर सकते हैं हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। प्रधानमंत्री अल्बानीज और उर्सला वॉन डेर लेयन लाल मांस निर्यात से जुड़े शेष विवादों को सुलझाने के करीब हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australia-eu-close-to-free-trade-agreement-can-sign-agreement-after/article-143376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>कैनबेरा। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत अपने अंतिम दौर में है और आने वाले हफ्तों में इस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के समाचार चैनल एबीसी न्यूज ने ईयू और ऑस्ट्रेलियाई प्रशासन के हवाले से यह जानकारी दी <br />है। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन बचे हुए विवादास्पद मुद्दों को हल करने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, ये विवादास्पद मुद्दे लाल गोश्त के निर्यात से संबंधित हैं। वॉन डेर लेयन ऑस्ट्रेलिया का दौरा भी कर सकती हैं, जहां वह न सिर्फ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगी, बल्कि एक सुरक्षा साझेदारी पर भी मुहर लगाएंगी। उनके दौरे की अंतिम तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और ईयू के बीच बातचीत कई सालों तक चलने के बाद 2023 में रुक गयी थी। ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फरेल ने इससे पहले कहा था कि वह तब तक समझौता नहीं करेंगे, जब तक ईयू लाल गोश्त सहित ऑस्ट्रेलिया के अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ कम नहीं कर देता। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 14:59:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में विपक्ष का संसद भवन में विरोध प्रदर्शन, किसानों के हितों को नजरअंदाज करने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में कांग्रेस व इंडिया गठबंधन नेताओं ने अमेरिका संग व्यापार समझौते के विरोध में प्रदर्शन किया। किसानों के भारत बंद का समर्थन करते हुए समझौते को किसान-विरोधी बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/opposition-protests-in-parliament-house-against-india-us-trade-agreement-accused/article-142891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं ने गुरुवार को संसद भवन परिसर के मकर द्वार के बाहर अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के खिलाफ प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि इसमें किसानों के हितों को नजरअंदाज किया गया है।</p>
<p>गठबंधन के नेताओं ने हाथों में बैनर तथा तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। कांग्रेस अध्यक्ष तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे तथा क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी (आरएसपी) के नेता एन के प्रेमचंद्रन तथा अन्य नेताओं ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की और कहा कि यह समझौता किसान हितों के खिलाफ है।</p>
<p>संसद भवन में प्रदर्शन कर रहे सांसदों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रावधानों के खिलाफ किसानों के भारत बंद के आह्वान के साथ भी एकजुटता व्यक्त की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 14:26:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजारों में तेजी, इन कंपनियों में दिखेगा एक्शन रखें हर पल नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका संग अंतरिम व्यापार समझौते के संकेतों से सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी रही। बैंकिंग, आईटी, ऑटो शेयरों में खरीदारी दिखी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rise-in-domestic-stock-markets-in-early-trading-action-will/article-142404"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/share-market-01.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते और विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेजी देखी गई। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 597.11 अंक की तेजी के साथ  84,177.51 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह पिछले कारोबारी दिवस के मुकाबले 359.55 अंक (0.43 प्रतिशत) ऊपर 83,580.40 अंक पर पहुंच था।</p>
<p>इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 195 अंक की बढ़त के साथ 25,888.70 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह भी 111.65 अंक यानी 0.43 फीसदी की बढ़त के साथ 25,805.35 अंक पर रहा। सार्वजनिक बैंक, मीडिया, रियलटी,टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, आईटी, ऑटो, धातु, फार्मा और स्वास्थ्य सेक्टरों के शेयरों में ज्यादा तेजी रही। एफएमसीजी अकेला ऐसा क्षेत्र रहा जिसमें  फिलहाल गिरावट है।</p>
<p>सेंसेक्स की कंपनियों में भारतीय स्टेट बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक और टाइटन के शेयर ऊपर चल रहे थे जबकि आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और आईटीसी में गिरावट थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:53:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत से रूसी तेल की खरीद बंद करने का हमें कोई संदेश नहीं: क्रेमलिन</title>
                                    <description><![CDATA[क्रेमलिन ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते के बाद भी भारत से रूसी तेल आयात बंद करने या घटाने का कोई आधिकारिक संदेश नई दिल्ली से नहीं मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/we-have-no-message-from-kremlin-to-stop-buying-russian/article-141864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूसी सत्ता केन्द्र क्रेमलिन ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में साफ किया है कि अभी तक उसे भारत से तेल आयात खत्म करने या उसमें कटौती करने का कोई संदेश नहीं मिला है। उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते का एलान कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। इस मामले पर अब रूस का बयान भी सामने आ गया है। क्रेमलिन ने मंगलवार को कहा कि उसे भारत से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ व्यापार समझौते की घोषणा के बाद वह रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा। </p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने व्यापार समझौते के एलान के अवसर पर कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैरिफ में ढील देने के समझौते के तहत रूसी तेल खरीदना बंद करने का वादा किया है। हालांकि भारत की ओर से इसमें कुछ नहीं कहा गया था और अधिकतर भारतीयों ने इसे ट्रंप की पुरानी आदत के तहत नजरअंदाज कर दिया था। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने  कहा, अभी तक हमें इस मामले पर नई दिल्ली से कोई बयान नहीं मिला है। दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर रहा है। पेस्कोव ने कहा, हम अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान करते हैं। लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, यह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है और हम दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और विकसित करने का इरादा रखते हैं। गौरतलब है कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रियायती कीमत पर रूसी समुद्री मार्ग से आने वाले कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। </p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल की खरीदने की वजह से 25 फीसदी टैरिफ लगाया था। यह उस पारस्परिक शुल्क से अलग था, जिसे ट्रंप ने भारत के लिए 25 फीसदी कर दिया था। ट्रंप ने सोमवार को रूसी तेल खरीद बंद करने और व्यापार बाधाओं को कम करने के बदले में भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 11:27:11 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका के साथ व्यापर समझौते की घोषणा के बाद बाजार में लौटी रोनक, सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की घोषणा से बाजार में तेजी लौटी, सेंसेक्स 2072 अंक उछला, निफ्टी 639 अंक मजबूत, बैंकिंग और आईटी शेयरों में भारी खरीदारी दिखी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sensex-and-nifty-closed-strong-after-the-announcement-of-trade/article-141833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)1.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की घोषणा से शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी लौट आई है। बता दें कि आज सेंसेक्स 2,072.67 अंक उछलकर 83,739.13 अंक और निफ्टी-50 सूचकांक 639.15 अंक की मजबूती के साथ 25,727.55 अंक पर बंद हुए। इससे पहले मंगलवार को घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बीएसई का सेंसेक्स 3,656.74 अंक उछलकर 85,323.20 अंक पर खुला और देखते ही देखते 4,205.27 अंक चढ़कर 85,871.73 अंक पर पहुंच गया। खबर लिखे जाते समय यह 2,227.60 अंक (2.73 प्रतिशत) ऊपर 83,894.06 अंक पर था। </p>
<p>नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक भी 1,219.65 अंक की तेजी के साथ 26,308.05 अंक पर खुला। यह 1,252.80 अंक तक चढ़कर 26,341.20 अंक पर पहुंच गया। खबर लिखे जाते समय यह 677.70 अंक यानी 2.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,766.10 अंक पर था। बाजार में सभी सेक्टरों के सूचकांकों में बड़ी तेजी देखी गयी। सेंसेक्स में आईटीसी को छोड़कर सभी कंपनियों के शेयर फिलहाल हरे निशान में हैं।       </p>
<p>सूचकांक की तेजी में सबसे अधिक योगदान रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा का रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 17:50:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका व्यापार डील फिर फिसल रही, यूएस ट्रेड चीफ ने दिल्ली को चेताया</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने यूरोपीय यूनियन और भारत की आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ शुरू हुई वार्ता अब तक समझौते तक नहीं पहुंची है, जबकि ईयू के नियम अमेरिकी कंपनियों के लिए भेदभावपूर्ण हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-us-trade-deal-slipping-again-us-trade-chief-warns-delhi/article-136748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/us-trade-deal.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टॉप व्यापार अधिकारी ने अमेरिका के दो बड़े पार्टनर यूरोपीय यूनियन और भारत की आलोचना की है। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस साल अब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील नहीं हो पाएगी? अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि उन्होंने गुरुवार को यूरोपीयन यूनियन के ट्रेड कमिश्नर मारोस सेफकोविक के साथ अमेरिकी टेक कंपनियों पर ईयू के रेगुलेशन पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने इस बारे में गंभीर चिंताएं जताईं कि ये उपाय अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण हैं।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि इस साल की शुरूआत में भारत के साथ शुरू हुई बातचीत अभी तक किसी समझौते पर नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि इस बीच अमेरिका ने मलेशिया से लेकर स्विट्जरलैंड तक कई अन्य पार्टनर्स के साथ डील पूरी कर ली हैं। ग्रीर ने शुक्रवार को ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में कहा, मुझे इस बात पर हैरानी नहीं हुई कि यह कहां ज्यादा मुश्किल रहा है। ईयू के मामले में उन्होंने नॉन-टैरिफ बाधाओं पर जोर दिया जिसमें अमेरिकी खेती शामिल नहीं है। यूरोपीय यूनियन के नियम अमेरिका के इंडस्ट्रियल एक्सपोर्ट को सीमित करते हैं।</p>
<p><strong>भारत पर भड़के अमेरिका के ट्रेड अधिकारी</strong></p>
<p>यूरोपीय संघ को लेकर ग्रीर का आरोप है कि वह अमेरिकी कंपनियों, खासकर टेक कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियां अपना रहा है। उन्होंने ईयू के ट्रेड कमिश्नर मारोश शेफचोविच से बातचीत के बाद कहा कि यूरोप द्वारा बनाए गए डिजिटल नियम, अमेरिकी कंपनियों को ही निशाना बनाते हैं। ग्रीर का दावा है कि ईयू के नए डिजिटल टैक्स और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में ऐसे नियम हैं, जो सिर्फ अमेरिकी कंपनियों पर ही लागू होते दिखते हैं, जिनमें गूगल, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये नियम इनोवेशन को धीमा करते हैं और अमेरिकी कंपनियों से अतिरिक्त टैरिफ वसूलने का जरिया हैं। इसको लेकर अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी टेक कंपनियों पर टैक्स लगाने की कोशिशें जारी रहती हैं, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है।</p>
<p><strong>अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका</strong></p>
<p>ग्रीर की बातों से पता चलता है कि भारत को लेकर भी तस्वीर ज्यादा सकारात्मक नहीं हैं। ग्रीर ने कहा कि भारत के साथ बातचीत इस साल की शुरूआत में शुरू हुई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई थी। अगस्त में भारत पर 50% टैरिफ लगाने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत थी, जिसे रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 11:46:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-अमेरिका ट्रेड डील : ट्रंप ने रखी थी एफ-35 जेट खरीदने की शर्त, ट्रेड डील के ठंडे बस्ते में जाने के पीछे रूस का भी कनेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-अमेरिका व्यापार और रक्षा वार्ता एफ-35 लड़ाकू विमान को सौदे में जोड़ने की अमेरिकी शर्त के कारण ठंडे बस्ते में चली गई। अमेरिका सोर्स-कोड साझा करने को तैयार नहीं था, जबकि भारत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर चाहता था। इसी बीच रूस ने एसयू-57ई के सह-डिज़ाइन और तकनीक ट्रांसफर का प्रस्ताव दिया। हालांकि टैरिफ, डिजिटल व्यापार और सेवाओं पर बातचीत शांत रूप से जारी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-us-trade-deal-trump-had-put-a-condition-for-purchasing/article-134778"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/111-(1200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच कुछ समय पहले व्यापार समझौते पर बातचीत जोरशोर से चल रही थी। दोनों ओर से नेताओं के बयान आ रहे थे कि जल्दी ही ट्रेड डील कर ली जाएगी लेकिन हालिया वक्त में इस पर चुप्पी दिख रही है। दोनों देशों के व्यापार और रक्षा समझौते पर बातचीत ठंडे बस्ते में है। ऐसे में सवाल उठा है कि आखिर क्यों दोनों देशों में डील पर गर्माहट क्यों खत्म हुई। वहीं दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रस्ताव ने भी भारत को विकल्प दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ओर से शर्त रखी गई थी कि अगर भारत टैरिफ, एनर्जी और मार्केट तक पहुंच का हक चाहता है तो उसे एफ-35 लड़ाकू विमान खरीदना होगा। भारत को एफ-35 सिर्फ स्टैंडअलोन हथियार बिक्री के तौर पर नहीं बल्कि नए स्ट्रेटेजिक लॉकइन के सेंटरपीस के तौर पर लेना होगा। इसने भारत को निराश किया और पूरी डील की ठंडे बस्ते में चली गई।</p>
<p><strong>पुतिन का प्रस्ताव :</strong></p>
<p>भारत और अमेरिका में एफ-35 सर्कल की उलझी गुत्थी के बीच पुतिन एक ऐसे प्रस्ताव के साथ आए, जो भारत की मांगों के हिसाब से है। बताया गया है कि मॉस्को तकनीक ट्रांसफर के साथ एसयू-57ई पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर भारत से चर्चा के लिए तैयार है। यानी एक तरफ अमेरिका अपने सोर्स-कोड की रक्षा कर रहा है तो वहीं रूस यह संकेत दे रहा है कि वह भारत को सह-डिजाइनर बनने का मौका देगा।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम से भारत-अमेरिका व्यापार सौदे को झटका लगा है लेकिन इसे खत्म मान लेना ठीक नहीं है। दोनों पक्षों के वातार्कार अभी भी टैरिफ रोलबैक, डिजिटल व्यापार, फार्मा, कृषि और सेवाओं के बारे में चुपचाप बात कर रहे हैं। दोनों पक्ष संपर्क में हैं लेकिन व्यापक रक्षा इशारों के साथ घोषित होने वाले नाटकीय बिग बैंग पैकेज को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका-भारत व्यापार सौदा मरा नहीं है लेकिन ठंडे बस्ते में जरूर है।</p>
<p><strong>एफ-35 ने बिगाड़ा माहौल :</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के एफ-35 को डील में पॉइजन पिल (जहरीली गोली) की तरह शामिल करने ने वार्ता को पटरी से उतार दिया। अमेरिका की सोच थी कि एफ-35 लड़ाकू विमानों को व्यापार और रक्षा समझौते में शामिल करने से भारत दशकों के लिए अमेरिकी लॉजिस्टिक्स, सॉफ्टवेयर और अपग्रेड के ऐसे इकोसिस्टम से जुड़ जाएगा, जो हथियार प्रणाली से कहीं बढ़कर होगा। दूसरी ओर भारत को यह नेटवर्क नियंत्रण लगा। दिल्ली के वातार्कारों ने अमेरिका के साथ सख्त रुख अपनाते हुए साफ किया कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की खरीद बिना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के नहीं होगी। अमेरिकी अधिकारी एफ-35 के स्थापित शासन ढांचे के कारण भारत की मांगों को पूरा करने की स्थिति में नहीं थे। उन्होंने कहा कि हमने किसी को भी इन जेट का सोर्स-कोड नहीं दिया है। ऐसे में भारत भी इस तरह की उम्मीद ना करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 10:58:14 +0530</pubDate>
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