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                <title>Reservation Policy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Reservation Policy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: बोले-बड़े पदों पर कमजोर वर्ग की हिस्सेदारी हो सुनिश्चित, दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव करने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संस्थानों में बहुजन समाज की कम भागीदारी पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट और प्रदर्शन के बहाने दलित-आदिवासी कर्मचारियों की पदोन्नति रोकी जाती है। राहुल ने आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधारों की मांग की है ताकि उच्च पदों पर पिछड़े वर्गों को समान हक मिल सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-gandhi-attacked-the-centre-said-ensure-that-weaker/article-148426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/rahul.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश के संस्थानों में बहुजन समाज की बड़े पदों पर हिस्सेदारी कम है और उनकी उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधार किए जाने चाहिए। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीड़िया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनसे मिलने जब भी किसी संस्थान या संगठन के लोग आते हैं तो सबकी शिकायत यही रहती है कि उनके संस्थान में वरिष्ठ पदों पर कमजोर वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी नहीं के बराबर है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हाल ही में जनसंसद में ग्रामीण बैंक के एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी यह बात सामने आई कि प्रोन्नति में रोस्टर नियम होने के बावजूद दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जाता है। कभी प्रदर्शन तो कभी मेरिट के नाम पर उनकी तरक्की रोकी जाती है, जबकि आवाज उठाने पर दूरदराज क्षेत्रों में तबादले जैसी कार्रवाई भी की जाती है।"</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि आरक्षण के चलते इन समुदायों को प्रारंभिक स्तर पर नौकरियां तो मिल जाती हैं, लेकिन उच्च पदों तक पहुंचना नीतिगत भेदभाव के कारण लगभग असंभव बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा ताकि हर वर्ग को संस्थाओं में समान भागीदारी मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 15:55:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आरक्षण विवाद: जम्मू-कश्मीर में आगा रूहुल्लाह, वहीद-उर-रहमान पारा, इल्तिजा मुफ्ती नजरबंद</title>
                                    <description><![CDATA[आरक्षण नीति में बदलाव की मांग कर रहे छात्रों के प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सांसद आगा रूहुल्लाह, इल्तिजा मुफ्ती और वहीद पारा को नजरबंद कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 60% से अधिक आरक्षण सामान्य श्रेणी के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/reservation-dispute-aga-ruhullah-waheed-ur-rehman-para-iltija-mufti-detained-in/article-137511"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/jammu.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति को लेकर जारी विवाद के बीच प्रशासन ने रविवार को छात्रों और राजनीतिक दलों के नियोजित विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम के मद्देनजर सख्त कदम उठाते हुए शहर के संवेदनशील इलाकों को सील कर दिया और आगा रूहुल्लाह, वहीद-उर-रहमान एवं इल्तिजा मुफ्ती सहित कई नेताओं को नजरबंद कर दिया। </p>
<p>सामान्य श्रेणी या ओपन मेरिट के छात्रों ने आरक्षण नीति के बदलाव में हो रही देरी के विरोध में रविवार को श्रीनगर में धरने का ऐलान किया था। सूत्रों के अनुसार, नेशनल कांफ्रेंस के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी, वरिष्ठ पीडीपी नेता वहीद-उर-रहमान पारा और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती को सुबह नजरबंद कर दिया गया। प्रशासन ने न केवल इन नेताओं की आवाजाही पर रोक लगायी बल्कि उनके घरों के बाहर अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बल भी तैनात किये। </p>
<p>मेहदी के कार्यालय ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा, पुलिस ने आधिकारिक तौर पर सम्मानित सांसद को गिरफ्तार कर लिया है। हमें सूचना मिली है कि उन्हें नजरबंद कर दिया गया है और उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। देर रात हमें यह भी खबर मिली कि कई छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस उनके परिवारों को धमका रही है। यह सब सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वे एक निष्पक्ष, उचित और तर्कसंगत आरक्षण नीति की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>कार्यालय के अनुसार, छात्रों की सिलसिलेवार गिरफ्तारियां पूरी रात जारी रहीं और उन पर कथित दबाव बनाया गया जो विरोध के माहौल को दबाने का स्पष्ट प्रयास है। इस बीच, इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रशासन की कार्रवाई पर गुस्सा व्यक्त करते हुए लिखा, कई अन्य लोगों की तरह मैं भी आज श्रीनगर में नजरबंद हूं। सुरक्षा एजेंसियों की अनिश्चितता और भय की मानसिकता की कोई सीमा नहीं है। यही नये कश्मीर की 'सामान्य स्थिति' है। मुझे बाहर जाने से रोकने के लिये मेरे गेट पर महिला पुलिसकर्मियों का एक बड़ा दल तैनात है। क्या कोई मुझे बता सकता है कि यह सब किस कानून के तहत हो रहा है?</p>
<p>मोहम्मद मुफ्ती ने कहा कि ये उपाय लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और जनता की आवाज को दबाने का जानबूझकर किया गया प्रयास है। पीडीपी विधायक वहीद पारा ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि आरक्षण नीति का संकट एक 'अस्तित्वगत समस्या' बन गया है, जो युवा पीढ़ी के भविष्य की नींव को हिला रहा है। पारा को उनके श्रीनगर आवास से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गयी। </p>
<p>उन्होंने एक्स पर लिखा, आरक्षण नीति हमारे युवाओं के भविष्य के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है। हम पिछले एक साल से छात्रों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं। हम विद्यार्थियों के साथ उनके आवास के बाहर इकट्ठा होते रहे, लेकिन इस दौरान सरकार की ओर से इस मुद्दे को सुलझाने का कोई इरादा नहीं था। इस उपेक्षा ने युवाओं की ङ्क्षचता और अनिश्चितता को कई गुना बढ़ा दिया है।</p>
<p>इससे पूर्व, श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने कहा कि छात्रों के धरने में उनके शामिल होने से पहले उनके घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ तैनात की गयी थी। उन्होंने एक्स पर कहा, छात्रों के खिलाफ भेदभाव की नीति न्याय मांगने वाली आवाजों को दबाकर न तो सही हो सकती है और न ही स्थायी। मैं छात्रों के साथ खड़ा हूं। नेताओं को नजरबंद किये जाने पर पुलिस की ओर से कोई बयान नहीं आया है।</p>
<p>जम्मू-कश्मीर में सामान्य श्रेणी के छात्र आरक्षण नीति का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि 40 प्रतिशत से भी कम सीटें अनारक्षित हैं जबकि 60 प्रतिशत से ज्यादा सीटें आरक्षित हैं। छात्रों के लगातार दबाव के बाद उमर अब्दुल्ला सरकार ने एक कैबिनेट उप-समिति बनायी थी। इसकी सिफारिशों को अब कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है और अंतिम मंजूरी के लिये उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास भेजा गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 16:00:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एचपीएससी असिस्टेंट प्रोफेसर परिणाम पर हंगामा, सांसद सैलजा ने की पारदर्शी जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा HPSC असिस्टेंट प्रोफेसर (इंग्लिश) परीक्षा में 2200 में से सिर्फ 151 अभ्यर्थी पास हुए, जिससे 613 पदों में 75% खाली रह गए। उच्च योग्य उम्मीदवारों के फेल होने से पेपर कठिनाई व मूल्यांकन पर सवाल उठे। आरक्षण श्रेणी में चयन बेहद कम होने पर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विवाद बढ़ गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-over-hpsc-assistant-professor-result-mp-selja-demands-transparent/article-134789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/educatin-hspc.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन (एचपीएससी) द्वारा कॉलेज कैडर असिस्टेंट प्रोफेसर (इंग्लिश) भर्ती की सब्जेक्टिव नॉलेज परीक्षा के परिणामों ने पूरे राज्य में विवाद खड़ा कर दिया है। इस परीक्षा में 2200 अभ्यर्थियों में से केवल 151 उम्मीदवार ही न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पाए, जिसके कारण 613 स्वीकृत पदों में से लगभग 75 प्रतिशत पद खाली रह गए हैं। </p>
<p>इस स्थिति ने परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि इस मुद्दे को वह संसद में उाएंगी और तब तक प्रयास जारी रखेंगी, जब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायसंगत ढंग से समीक्षा के लिए न भेजी जाए। उन्होंने कहा कि असफल अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या यूजीसी-नेट-जेआरएफ योग्य युवाओं, पीएचडी धारकों और गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों की है। </p>
<p>इतने उच्च शिक्षित अभ्यर्थियों का असफल होना प्रश्नपत्र की कठिनाई, मूल्यांकन मानदंड और पारदर्शिता को लेकर गंभीर संदेह पैदा करता है। इसके साथ ही अनारक्षित श्रेणी में चयनित लगभग 130 उम्मीदवारों में से 100 से अधिक का अन्य राज्यों से होना तथा  एससी और ओबीसी के 300 से अधिक आरक्षित पदों के मुकाबले केवल 21 अभ्यर्थियों का चयन होना आरक्षण नीति के पालन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 11:43:07 +0530</pubDate>
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