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                <title>Court Verdict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Court Verdict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पंकज चौधरी का सपा पर हमला: बोले-आतंकवादियों, गुंडों और माफियाओं के प्रति पार्टी की पुरानी हमदर्दी फिर हुई उजागर, सपा की न तो नीति बदली है और न ही नीयत</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा की हमदर्दी हमेशा अपराधियों और आतंकियों के साथ रही है। उन्होंने मुकदमों की वापसी को न्यायपालिका का अपमान बताया। चौधरी ने तंज कसा कि लोकतंत्र में कोई 'जिल्ले-इलाही' नहीं है और सपा की तुष्टीकरण की नीति अब नहीं चलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pankaj-choudhary-attacked-samajwadi-party-said-that-the-partys-old/article-148471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pankaj-choudhary.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में आतंकवादियों, गुंडों और माफियाओं के प्रति समाजवादी पार्टी (सपा) की पुरानी हमदर्दी एक बार फिर सामने आ गई है। पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा कि सपा सरकार बनने पर मुकदमे वापस लेने की बात करना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। चौधरी ने कहा कि सपा के पिछले कार्यकाल में भी आतंकवाद से जुड़े मामलों में मुकदमे वापस लेने के प्रयास किए गए थे, जिसे लेकर अदालतों ने भी आपत्ति जताई थी।</p>
<p>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इससे साफ है कि सपा की न तो नीति बदली है और न ही नीयत। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सपा सुप्रीमो खुद को संविधान और न्यायपालिका से ऊपर मानते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को दोषी या निर्दोष ठहराने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, न कि किसी राजनीतिक दल या सरकार के पास। “देश और प्रदेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, यहां कोई ‘जिल्ले-इलाही’ नहीं है।</p>
<p>पंकज चौधरी ने आरोप लगाया कि सपा की कार्यशैली हमेशा से पक्षपातपूर्ण रही है, जहां पसंद के आधार पर अपराधियों को राहत दी जाती थी और विरोधियों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियों में भी सपा की नीतियों पर सवाल उठ चुके हैं, जिनमें आतंकवादियों के प्रति नरमी का जिक्र किया गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने की संभावना नहीं है और न ही अपराधियों को किसी प्रकार की राहत मिलने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:26:44 +0530</pubDate>
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                <title>गंगा में इफ्तार पार्टी करने वाले 14 युवकों की बढ़ी मुश्किलें: जमानत याचिका खारिज, 23 मार्च होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[वाराणसी में चलती नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान गंगा नदी में जूठन फेंकने और नाविकों को धमकाने के मामले में 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने BNS की सख्त धाराओं के तहत उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। शिकायतकर्ताओं को मिल रही धमकियों के बाद पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/difficulties-increased-for-14-youths-who-had-iftar-party-in/article-147135"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ganga.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। धार्मिक नगरी काशी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान बिरयानी खाकर उसके अवशेष नदी में फेंकने के मामले में 14 आरोपियों को गुरुवार देर शाम कड़ी सुरक्षा के बीच अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) नवम अमित यादव की अदालत में पेश किया गया।</p>
<p>अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई की और उसे खारिज कर दिया। सभी 14 आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। अभियोजन पक्ष तथा वादी पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों से सहमत होते हुए अदालत ने आरोपियों का आपराधिक इतिहास संबंधित थाने से तलब किया है। अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तिथि नियत की गई है।</p>
<p>अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने बताया कि अदालत ने सभी आरोपियों के आपराधिक इतिहास को मंगवाया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने न केवल मां गंगा को अपवित्र करने का कार्य किया, बल्कि नाविक भाइयों को जबरदस्ती धमकाकर साथ ले गए। मना करने पर वे नहीं माने और जान से मारने की धमकी देकर नाव पर कब्जा कर लिया। अब अदालत में रो रहे हैं और पश्चाताप जता रहे हैं, लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है।</p>
<p>अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि मामले का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ नाविक रंजन साहनी और अनिल साहनी के बयान रहे, जो विवेचक द्वारा दर्ज किए गए थे। कोर्ट को बताया गया कि नाविकों की इच्छा के विपरीत नाव को जबरदस्ती ले जाया गया। इन बयानों के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 305(5) को बढ़ाया है।</p>
<p>अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि आरोपियों के परिजनों की ओर से धमकियां दी जा रही हैं कि वे छोड़ेंगे नहीं। मीडिया से बात करने पर भी धमकियां मिल रही हैं। जल्द ही अधिवक्ता इसकी लिखित शिकायत पुलिस को देंगे। वहीं, मामले के प्रमुख शिकायतकर्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल को सोशल मीडिया पर तथा अज्ञात नंबर से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने इसकी शिकायत सिगरा थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रजत जायसवाल ने बताया कि उन्हें लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से धमकियां दी जा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:03:58 +0530</pubDate>
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                <title>कुदरा थाना मामला: दो दोषियों को तीन-तीन वर्षों का सश्रम कारावास, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के कैमूर की अदालत ने अवैध हथियार रखने के मामले में अनूप तिवारी और अभय सिंह को दोषी पाया। दोनों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kudra-police-station-case-three-years-rigorous-imprisonment-to-two/article-143250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>कैमूर। बिहार में भभुआ जिले के कुदरा थाना कांड में नामजद अभियुक्त अनुप तिवारी और अभय कुमार सिंह को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों को आमर्स एक्ट के तहत दोषी पाया है।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, 31 मार्च, 2019 को खुरामाबाद बॉर्डर के पास सुखचैन होटल के समीप पुलिस ने कार्रवाई करते हुये अभय कुमार सिंह को एक देशी कट्टा और तीन कारतूस के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान अभय कुमार सिंह ने पुलिस को बताया कि अवैध हथियार उसे अनुप कुमार तिवारी ने छुपाकर रखने के लिये दिया था।</p>
<p>पुलिस ने तत्परता से अनुसंधान कर मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपों को सिद्ध किया।</p>
<p>मामले में अपर लोक अभियोजन पदाधिकारी सतीश कुमार सिंह ने सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी को न्यायालय ने पर्याप्त और विश्वसनीय माना। इसके आधार पर अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुये तीन-तीन वर्षों के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:56:21 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रीय सुरक्षा मामला: हांगकांग के पूर्व मीडिया दिग्गज जिम्मी लाई को 20 साल की सजा, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[हांगकांग के मीडिया उद्यमी जिम्मी लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून उल्लंघन में 20 साल जेल की सजा मिली, जो अब तक की सबसे कठोर सजा मानी जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/national-security-case-former-hong-kong-media-baron-jimmy-lai/article-142438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)6.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। हांगकांग के पूर्व मीडिया दिग्गज जिम्मी लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने के आरोप में 20 साल जेल की सजा सुनायी गयी है। यह जानकारी स्थानीय प्रसारक आरटीएचके ने सोमवार को दी।</p>
<p>दिसंबर 2025 में, हांगकांग उच्च न्यायालय ने लाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन के तीनों मामलों में दोषी करार दिया था। प्रसारक ने कहा कि लाई को दी गई सजा 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उल्लंघन के लिए अब तक की सबसे कठोर सजा है।</p>
<p>लाई को अगस्त 2020 में विदेशी ताकतों के साथ मिलीभगत एवं धोखाधड़ी करने के आरोपों में हिरासत में लिया गया था। हांगकांग में 2019 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान रैलियां आयोजित करने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें 2021 में 20 महीने की जेल की सजा सुनाई गई। सजा पूरी करने के बावजूद, लाई अधिक गंभीर आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक हिरासत में रहे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 14:17:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तोशाखाना केस: इमरान-बुशरा को मिली 17-17 साल की सजा, कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और बुशरा बीबी को तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार केस में 17-17 साल की सजा और करोड़ों रुपए जुर्माना लगाया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/toshakhana-case-imran-bushra-got-17-years-imprisonment-court-also-imposed/article-142399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को अदालत ने तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराते हुए 17-17 साल की सजा सुनाई है। यह मामला विदेशी सरकार से मिले महंगे तोहफों को नियमों के खिलाफ बेचने से जुड़ा है। दोनों पर करोड़ों रुपए का जुमार्ना भी लगाया गया है।</p>
<p><strong>क्या है मामला?</strong></p>
<p>रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में स्थित विशेष अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। जज शाहरुख अरजुमंद ने इमरान खान और बुशरा बीबी को कुल 17 साल की सजा दी। अदालत ने उन्हें पाकिस्तानी दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत 10 साल और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की अलग-अलग धाराओं में 7 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों पर 1 करोड़ 64 लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने उम्र और महिला होने को देखते हुए सजा में कुछ नरमी बरतने की बात कही। यह मामला 2021 में सऊदी अरब सरकार से मिले महंगे तोहफों से जुड़ा है। आरोप है कि इनमें महंगी घड़ियां, हीरे और सोने के गहनों के सेट शामिल थे, जिन्हें नियमों के अनुसार तोशाखाना में जमा नहीं किया गया। </p>
<p>सरकार का कहना है कि इन तोहफों की असली कीमत करीब 7 करोड़ रुपए थी, लेकिन उनका मूल्यांकन सिर्फ 58-59 लाख रुपए दिखाया गया। आरोप है कि इमरान खान और बुशरा बीबी ने इन्हें बेहद कम कीमत पर खरीदने की कोशिश की। तोशाखाना कैबिनेट डिवीजन के तहत आने वाला विभाग है, जहां विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों से मिले तोहफे जमा किए जाते हैं। तय नियमों के तहत इन्हें बाद में खरीदा जा सकता है।</p>
<p><strong>कोर्ट की कार्यवाही</strong></p>
<p>इस केस में कुल 21 गवाहों ने अदालत में बयान दिए। फैसले के समय इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों अदालत में मौजूद थे। इमरान खान ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज किया। इससे पहले अक्टूबर 2024 में बुशरा बीबी और नवंबर में इमरान खान को इस केस में जमानत मिली थी। हालांकि, दोनों पहले से ही अल-कादिर ट्रस्ट केस में सजा काट रहे हैं। दोनों दोषी हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनसे मुलाकात पर पिछले एक महीने से रोक लगी हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी उनकी जेल में हालत को लेकर चिंता जताई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:37:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इजरायली दूतावास के पास ग्रेनेड विस्फोट के आरोपियों को 14 साल की सजा: राजनयिक मिशन भवन पर फेंके थे हथगोले, एक आवासीय भवन पर गिरे</title>
                                    <description><![CDATA[कोपेनहेगन में इजरायली दूतावास के पास ग्रेनेड विस्फोट मामले में डेनमार्क की अदालत ने दो स्वीडिश नागरिकों को साजिश दोषी मानते हुए 12 और 14 साल कैद की सजा सुनाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/those-accused-of-grenade-explosion-near-israeli-embassy-were-sentenced/article-141910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। डेनमार्क की एक अदालत ने कोपेनहेगन में इजरायली दूतावास के समीप ग्रेनेड विस्फोट करने के आरोप में दो स्वीडिश नागरिकों को क्रमश: 12 और 14 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह जानकारी डेनिश मीडिया से प्राप्त हुई। अक्टूबर 2025 में, डेनिश अभियोजक कार्यालय ने दो स्वीडिश नागरिकों पर अक्टूबर 2024 में कोपेनहेगन में इजरायली दूतावास के पास ग्रेनेड विस्फोट करके आतंकवादी हमला करने का आरोप लगाया।</p>
<p>अभियोजकों ने कहा कि 18 और 20 वर्ष के युवकों ने एक पूर्व-नियोजित साजिश के अंतर्गत अज्ञात सहयोगियों की मदद से दूतावास परिसर में पांच हथगोले लाए, उनमें से दो को राजनयिक मिशन भवन पर फेंका लेकिन वे पास के एक आवासीय भवन में जा गिरे। युवकों पर राजनयिक मिशन के सुरक्षा गार्डों की जान खतरे में डालने और हत्या की कोशिश करने का आरोप लगाया गया क्योंकि विस्फोट से पास के एक घर में रहने वाले लोग भी प्रभावित हो सकते थे।</p>
<p>अक्टूबर 2024 की शुरुआत में, स्टॉकहोम और कोपेनहेगन में इजरायली दूतावासों के पास गोलीबारी और विस्फोट की घटनाएं हुईं। स्टॉकहोम पुलिस और डेनमार्क स्थित इजरायली दूतावास ने बताया कि दूतावास के कर्मचारियों को कोई चोट नहीं आई। कोपेनहेगन में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और उनकी पहचान 15 से 20 वर्ष की आयु के स्वीडिश नागरिकों के रूप में हुई। कोपेनहेगन पुलिस ने बताया कि दूतावास के पास दो हथगोले के कारण विस्फोट हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 14:25:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल की पत्नी यून को 20 महीने जेल की सजा, रिश्वतखोरी का है आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी किम कोन-ही को रिश्वत मामले में 20 महीने जेल की सजा सुनाई गई। अदालत ने प्रभाव के दुरुपयोग को दोषी माना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/yoon-wife-of-former-south-korean-president-yoon-suk-yeol-sentenced/article-141058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>सोल। दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल की पत्नी किम कोन-ही को रिश्वत लेने के आरोप में 20 महीने जेल की सजा सुनायी गयी है। सोल की केंद्रीय जिला अदालत ने बुधवार को 1.28 करोड़ वॉन (लगभग 9,010 अमेरिकी डॉलर) की जब्ती के साथ जेल की सजा सुनायी। अदालत ने कहा कि किम ने प्रथम महिला के तौर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया। अदालत ने हालांकि उन्हें 'कैपिटल मार्केट्स एक्ट' और 'पॉलिटिकल फंड्स एक्ट' के उल्लंघन के आरोपों से बरी कर दिया। </p>
<p>किम पर 2022 में यूनिफिकेशन चर्च को फायदा पहुंचाने के बदले में इस धार्मिक समूह के अधिकारियों से कीमती सामान लेने का आरोप था। अदालत ने स्टॉक हेरफेर में किम की संलिप्तता के विशेष अधिवक्ता के दावे को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अगर वह स्टॉक की कीमतों में हेरफेर के बारे में जानती भी थीं, तो भी उनकी मिलीभगत की पुष्टि करना मुश्किल था। </p>
<p>किम पर पिछले साल अगस्त में हिरासत में रहते हुए अक्टूबर 2010 और दिसंबर 2012 के बीच स्टॉक की कीमतों में हेरफेर में शामिल होने के आरोप में मुकदमा चलाया गया था। उन पर राष्ट्रपति चुनाव से पहले अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक 58 मौकों पर एक राजनीतिक दलाल से लगभग 27 करोड़ वॉन के अवैध जनमत सर्वेक्षण परिणाम मुफ्त में प्राप्त करने के लिए यून के साथ साजिश रचने का भी आरोप था। </p>
<p>अदालत ने फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति दंपति द्वारा जनमत सर्वेक्षणों का आदेश देने का कोई सबूत नहीं था। इस फैसले के अलावा, किम पर पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में एक विशिष्ट उम्मीदवार को पार्टी नेता के रूप में समर्थन देने के लिए पीपल्स पावर पार्टी में यूनिफिकेशन चर्च के सदस्यों के बड़े पैमाने पर नामांकन का अनुरोध करने का भी आरोप था। उन पर व्यापारिक फायदे देने और सरकारी पद बेचने के बदले में कीमती सामान स्वीकार करने का भी आरोप था। उल्लेखनीय है कि, किम पहली ऐसी महिला हैं, जिन पर दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी रहते हुए हिरासत में मुकदमा चलाया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 14:22:00 +0530</pubDate>
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                <title>एक और मुसीबत में फंसे आजम खान के बेटे अब्दुल्ला: पासपोर्ट मामले में कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा, 50 ​हजार का लगाया जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[रामपुर कोर्ट ने दो पासपोर्ट मामले में आज़म खान के बेटे अब्दुल्ला आज़म को 7 साल की सज़ा और 50,000 रुपये जुर्माना लगाया है। दो पैन कार्ड मामले में पहले से जेल में बंद अब्दुल्ला के राजनीतिक भविष्य पर यह बड़ा झटका माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/a-mountain-of-sorrow-fell-on-azam-khan-rampur-court/article-134856"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/azam-abdullah.png" alt=""></a><br /><p>रामपुर। आजम खान के परिवार की मुसिबतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को रामपुर कोर्ट ने दो पासपोर्ट मामले में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला खान को 7 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने अब्दुल्ला को करीब 50 हजार रूपए का भी जुर्माना लगाया है। बता दें कि दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला केवल अकेले आरोपित है। इससे पहले आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला को कोर्ट ने दो पेनकार्ड मामले में सजा सुनाई हैं जिसके बाद वो जेल में बंद है।</p>
<p>बता दें कि, कोर्ट के इस फैसले के कारण अब्दुल्ला आजम खान के राजनीतिक करियर पर ओर बढ़ा ग्रहण लग गया है, क्यों कि इससे पहले अब्दुल्ला आजम खान जन्म प्रमाण पत्र फर्जीवाडे में विधायकी गवां चुके हैं और पद से बर्खास्त भी हो चुके हैं। बता दें कि अब्दुल्ला आजम के लिए ये अब तक की सबसे बड़ी सजा है। समाजवार्दी पार्टी के लिए ये बहुत ही बुरा संदेश है क्योंकि आजम खान और अब्दुल्ला खान को पार्टी का सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा माना जाता है।</p>
<p><strong>क्या था पूरा मामला?</strong></p>
<p>दरअसल, साल 2019 में आकश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम को लेकर सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी कि अब्दुल्ला ने दो अलग अलग जन्मतिथि वाले जन्म प्रमाण पत्र वाले दो अलग अलग पासपोर्ट बनवाए हैं और अपनी गंदी नियत के हिसाब से उनका इस्तेमाल किया है। बता दें कि, एक पासपोर्ट में जन्मतिथि 30 दिसंबर 1990 और दूसरे में 1 जनवरी 1993 दिखाई गई है। इसके बाद शिकायत दर्ज होने के बाद चार्जशीट दाखिल की और मामला विशेष MP-MLA कोर्ट में चला गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 15:40:46 +0530</pubDate>
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