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                <title>Diplomacy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Diplomacy RSS Feed</description>
                
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                <title>चीनी विदेश मंत्रालय का दावा: मतभेदों को दूर कर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार, वैश्विक शांति और विकास के मुद्दों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजing यात्रा से पहले चीन ने समानता और आपसी सम्मान के आधार पर सहयोग का हाथ बढ़ाया है। दोनों नेता दुर्लभ खनिज (Rare Earth) निर्यात और वैश्विक स्थिरता पर चर्चा करेंगे। हालांकि, चीन ने ताइवान हथियार बिक्री और जिमी लाई मामले को अपना आंतरिक मुद्दा बताते हुए कड़ा रुख बरकरार रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinese-foreign-ministry-claims-ready-to-overcome-differences-and-increase/article-153708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china3.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजकीय यात्रा से पहले बुधवार को कहा कि वह समानता, आपसी सम्मान और साझा लाभ के आधार पर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने और मतभेदों को दूर करने के लिए तैयार है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि चीन 'परिवर्तनशील और अस्थिर दुनिया' में अधिक स्थिरता और निश्चितता लाने के लिए अमेरिका के साथ काम करने का इच्छुक है। गुओ ने कहा, "चीन समानता, सम्मान और आपसी लाभ की भावना के साथ सहयोग का विस्तार करने और मतभेदों को प्रबंधित करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।" प्रवक्ता ने कहा कि चीन ट्रंप की यात्रा का स्वागत करता है, जिसके दौरान दोनों देशों के नेता चीन-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ वैश्विक शांति और विकास से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर 'गहन विचारों का आदान-प्रदान' करेंगे।</p>
<p>नेताओं के बीच आगामी बैठक के दौरान चीन और अमेरिका द्वारा दुर्लभ मृदा पदार्थ (रेयर अर्थ मैटेरियल) के चीनी निर्यात पर प्रतिबंधों को कम करने वाले एक अस्थायी समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। हालांकि, इस संभावित विस्तार के बावजूद, चीन अभी भी कुछ प्रमुख सामग्रियों के निर्यात को सीमित कर रहा है जो रक्षा और उच्च-तकनीकी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। गुओ ने ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध करते हुए दोहराया कि इस मुद्दे पर चीन का रुख 'स्थिर और स्पष्ट' बना हुआ है।</p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप द्वारा बातचीत के दौरान मुद्दा उठाए जाने पर चीन हांगकांग के मीडिया उद्यमी जिमी लाई की रिहाई पर विचार करेगा, गुओ ने इस सुझाव को खारिज कर दिया और मामले को चीन का आंतरिक मामला बताया। गुओ ने कहा, "लाई ची-यिंग हांगकांग को हिला देने वाले दंगों के पीछे मुख्य साजिशकर्ता और अपराधी हैं।" उन्होंने कहा कि चीनी सरकार कानून के अनुसार मामले को संभालने में हांगकांग के न्यायिक अधिकारियों का दृढ़ता से समर्थन करती है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप की चीन यात्रा बुधवार से शुरू होकर 15 मई तक जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 18:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या अब अमेरिका का हिस्सा बनेगा वेनेजुएला? ट्रंप ने 51वां राज्य बताते हुए मानचित्र किया शेयर, दुनियाभर में बढ़ी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मैप साझा कर वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बताया है। हालांकि इसे एक मजाक माना जा रहा है, लेकिन वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। ट्रंप पहले भी वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण की इच्छा जता चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/will-venezuela-become-a-part-of-america-now-trump-shared/article-153639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक मानचित्र साझा किया है जिसमें वेनेजुएला को अमेरिका के 51वें राज्य के रूप में दिखाया गया है। ट्रंप ने मजाक में वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की ओर संकेत तब दिया जब उन्होंने मार्च में विश्व बेसबॉल क्लासिक सेमीफाइनल में इटली को हराने पर वेनेजुएला की राष्ट्रीय बेसबॉल टीम को बधाई दी थी। उन्होंने इस जीत का श्रेय वेनेजुएला के अमेरिका के साथ सहयोग को दिया।</p>
<p>वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने सोमवार को इस दक्षिण अमेरिकी देश के अमेरिका का 51वां राज्य बनने की कभी भी संभावना को खारिज कर दिया। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए जनवरी की शुरुआत में वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के बाद अमेरिका और वेनेजुएला ने राजनयिक संबंधों को बहाल करना शुरू कर दिया था। ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण करने के अपने इरादे की भी घोषणा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 14:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: शी जिनपिंग से होगी खास मुलाकात; व्यापार, ईरान और ताइवान मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने बीजिंग पहुंच चुके हैं। इस शिखर सम्मेलन में ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और ताइवान जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी। वैश्विक तेल संकट और आर्थिक मंदी के खतरों के बीच दुनिया की नजरें इन दोनों दिग्गजों के बीच होने वाले रणनीतिक समझौतों पर टिकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-visits-china-special-meeting-with-xi-jinping-possible/article-153555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए बीजिंग रवाना हो गए हैं, जहां दोनों वैश्विक नेता व्यापार, युद्ध कूटनीति और ताइवान पर गंभीर चर्चा करेंगे। ट्रंप का 2017 के बाद यह पूर्वी एशियाई देश का पहला दौरा है। इस दौरान दशकों में सबसे अहम अमेरिका-चीन सम्मेलन होने की संभावना है। गुरुवार से शुरू होने वाला दो दिनों का यह सम्मेलन दुनिया की दो बड़ी ताकतों के बीच संबंधों को नया आकार दे सकता है। है। ट्रंप 14 मई को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे, जहां दोनों औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और उसके बाद शाम को एक राजकीय दावत का आयोजन किया जाएगा। ट्रंप की 15 मई को वाशिंगटन लौटने से पहले दोपहर के भोजन कार्यक्रम और 'ऐतिहासिक स्वर्ग का मंदिर' जाने की भी योजना है।</p>
<p>जब फरवरी में व्हाइट हाउस ने इस दौरे की पुष्टि की, तो चीनी सामान पर वाशिंगटन के आसमान छूते शुल्क एजेंडे पर छाए हुए थे। लेकिन 28 फरवरी के बाद दुनिया के राजनीतिक हालात बदल गए जब ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, जिससे एक युद्ध शुरू हो गया और जिसके कारण ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना पड़ा और इस स्थिति ने तेहरान को इस रणनीतिक जलमार्ग को नियंत्रित करने के लिए एक बोर्ड बनाने पर मजबूर कर दिया। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान एक तनावपूर्ण परमाणु गतिरोध में फंसे हुए हैं क्योंकि वाशिंगटन का तर्क है कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो सकती और तेहरान प्रतिबंधों में राहत, युद्ध खत्म करने, जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकने की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को 'पूरी तरह से नामंजूर' कर दिया है क्योंकि दोनों पक्ष किसी भी संभावित समझौते के लिए जरूरी शर्तों से बहुत दूर हैं।</p>
<p>इसलिए दोनों नेताओं को होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के तनाव पर चर्चा करनी अनिवार्य है। चीन अपना लगभग आधा कच्चा तेल जलमार्ग से आयात करता है। उसने बड़े स्टॉक और अलग-अलग तरह के ऊर्जा मिश्रण से खुद को सुरक्षित रखा है लेकिन इसका आर्थिक असर बहुत बड़ा है। तेल की कीमतों में उछाल ने पेट्रोकेमिकल पर निर्भर निर्माताओं के लिए लागत 20 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि वैश्विक मंदी की संभावना बनी हुई है क्योंकि चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग पांचवां हिस्सा निर्यात पर निर्भर करता है, इसलिए दुनिया जो आर्थिक रूप से इतनी परेशान है कि चीनी सामान नहीं खरीद सकती, उसके लिए अकेले आयात शुल्क युद्ध से भी बड़ा खतरा है।</p>
<p>बैठक में ताइवान का मुद्दा भी मुख्य रहेगा क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने पिछले दिसंबर में ताइपे को 11 बिलियन डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी थी, जिससे चीन नाराज हो गया था। फिर भी ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह भी सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करने के लिए बाध्य है और कहा है कि अमेरिका को उसकी सुरक्षा गारंटी के लिए पैसे देना काफी नहीं है। इस सप्ताह किसी बडे व्यापारिक समझौते की उम्मीदें कम हैं लेकिन अधिक उम्मीद अक्टूबर के संघर्ष विराम को बढ़ाने की है। इसके साथ ही एक संयुक्त बयान भी जारी किया जाएगा। दुनिया इस सम्मेलन को बड़ी दिलचस्पी से देख रही है और उम्मीद कर रही है कि यह सम्मेलन सफल हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से खबर, पश्चिमी एशिया में सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने पर विचार कर रहे राष्ट्रपति</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के अड़ियल रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया है। कूटनीति विफल होने पर अमेरिका अब लक्षित बमबारी और बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। ट्रंप की चीन यात्रा से पहले पश्चिमी एशिया में तनाव चरम पर है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल फिर मंडराने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/news-quoting-trumps-aides-president-considering-resuming-military-action-in/article-153541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पश्चिमी एशिया में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रम्प के सहयोगियों के हवाले से यह जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि संघर्ष को सुलझाने के लिए हो रही बातचीत में ईरान के रुख से लगातार निराशा हाथ लगी है और अब वह बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से अमेरिकी राष्ट्रपति का धैर्य जवाब दे रहा है और उनका यह भी मानना है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के भीतर अब कई समूह बन गए हैं, जिनमें से कुछ बल प्रयोग के पक्ष में हैं और ईरान की स्थिति को कमजोर करने के लिए उस पर लक्षित बमबारी जारी रखने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जबकि अन्य समूह संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीतिक साधनों पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए एक अलग मुद्दा बनी हुई है। अमेरिकी सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान कितनी स्पष्टता से अमेरिका का पक्ष ईरान तक पहुँचा रहा है और वह ईरान के दृष्टिकोण को कितनी निष्पक्षता से बता रहा है। पश्चिमी एशिया संघर्ष में अमेरिका क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है और राष्ट्रपति ट्रम्प की 13 से 15 मई तक प्रस्तावित चीन यात्रा से पहले किसी फैसले की संभावना कम है।</p>
<p>गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए थे। अमेरिका और ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:28:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>'अवास्तविक मांगों' पर अड़े इजरायल की सोच से प्रभावित अमेरिका: बघाई ने कहा- क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अपने शांति प्रस्ताव को "तार्किक" बताते हुए अमेरिकी रुख की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे केवल संपत्ति की मुक्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे वैध अधिकार मांग रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्ताव को "अस्वीकार्य" बताने के बाद ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब भी इजरायली दबाव में काम कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-is-adamant-on-unrealistic-demands-impressed-by-israels-thinking/article-153426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए  ईरान ने कहा है कि उसका प्रस्ताव "उदार और तार्किक" था, जबकि अमेरिका अब भी इजरायल की सोच से प्रभावित "अवास्तविक मांगों" पर अड़ा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में जो योजना भेजी गयी, वह "हद से ज्यादा" नहीं थी और उसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित करना था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने किसी प्रकार की रियायत की मांग नहीं की। हमने केवल ईरान के वैध अधिकारों की बात की है।" बघाई ने सवाल किया कि क्या क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने, ईरानी जहाजों के खिलाफ "समुद्री डकैती" रोकने तथा वर्षों से अवरुद्ध ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग अनुचित कही जा सकती है। उन्होंने कहा, "क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का हमारा प्रस्ताव अवास्तविक है? क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना है?"</p>
<p>इससे पूर्व, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा और उसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" पाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार पोर्टल एक्सियोस को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने ईरान के जवाब पर बेंजमिन नेतन्याहू से भी चर्चा की है। ईरान ने रविवार को अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मौजूदा चरण में वार्ता का केंद्र केवल क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/america-is-adamant-on-unrealistic-demands-impressed-by-israels-thinking/article-153426</link>
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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विदेश मंत्रालय का दावा: यूएई से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए किसी समझौते पर न​हीं हुई बात, फुजैरा के रास्ते भारतीय नागरिकों को निकालने की खबरों का किया खंड़न</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात से लाखों भारतीयों को निकालने की खबरों का खंडन किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 'फुजैरा मार्ग' वाले समझौते की रिपोर्ट पूरी तरह निराधार है और वर्तमान में ऐसी कोई योजना नहीं है। सरकार ने नागरिकों से भ्रामक सूचनाओं से बचने और आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-ministry-claims-no-agreement-has-been-reached-to-evacuate/article-153392"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/india-vs-uae.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने मीडिया में आई इन खबरों का खंडन किया है जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लाखों भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए एक समझौते पर विचार विमर्श का दावा किया गया है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अपने फैक्ट चैक हैंडल पर कहा है कि इस तरह की रिपोर्ट निराधार है और अभी भारतीय नागरिकों को यूएई से निकालने की कोई योजना नहीं है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत और यूएई फुजैरा के रास्ते लाखों भारतीय नागरिकों को निकालने के समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूरोप की अपनी चार देशों की यात्रा से पहले यूएई जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या फिर बढ़ेगा टकराव! अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर ईरान के जवाब को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया खारिज, बोले- हम दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के युद्ध समाप्ति प्रस्ताव को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया है। तेहरान ने नाकाबंदी हटाने और हमलों पर गारंटी मांगी थी, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया। वहीं, बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान के यूरेनियम भंडार नष्ट नहीं होते, युद्ध समाप्त नहीं माना जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-the-conflict-increase-again-president-donald-trump-rejected-irans/article-153377"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को "पूरी तरह अस्वीकार्य" करार दिया है। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया कि पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए तेहरान के प्रस्ताव में सभी मोर्चों पर युद्ध की तत्काल समाप्ति, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को रोकना और ईरान पर आगे कोई हमला न करने की गारंटी शामिल है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल द्वारा फरवरी में शुरू किए गए युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से किए गए युद्धविराम का, छिटपुट गोलीबारी के बावजूद, काफी हद तक पालन किया गया है। इस सप्ताह की शुरुआत में, ट्रम्प ने दोहराया कि ईरान में युद्ध "जल्द ही समाप्त हो जाएगा"। लेकिन इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध को समाप्त मानने से पहले ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को "नष्ट" किया जाना चाहिए।</p>
<p>सीबीएस के '60 मिनट्स' कार्यक्रम में दिए एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा, "अभी भी ऐसे संवर्धन स्थल हैं जिन्हें नष्ट करना बाकी है।"<br />रविवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने तेहरान के प्रस्ताव का सीधा जिक्र तो नहीं किया, लेकिन कहा, "हम दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएंगे, और अगर बातचीत या समझौता करने की बात उठती है, तो इसका मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है।" ट्रम्प ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया: "मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित 'प्रतिनिधियों' का जवाब पढ़ा है। मुझे यह पसंद नहीं आया - बिल्कुल अस्वीकार्य।"</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक पृष्ठ के 14 सूत्रीय अमेरिकी ज्ञापन में ईरानी परमाणु संवर्धन पर रोक, प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवागमन बहाल करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसमें दो अमेरिकी अधिकारियों और दो अन्य सूत्रों का हवाला दिया गया है - सभी के नाम गुप्त रखे गए हैं - जिन्हें मुद्दों की जानकारी दी गई थी। इन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ज्ञापन में बताई गई कई शर्तें अंतिम समझौते पर पहुंचने पर ही लागू होंगी। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करना जारी रखा है, जिससे विश्व स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।</p>
<p>अमेरिका ने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी लागू कर दी है, जिससे ईरान बेहद नाराज है। इजरायली और अमेरिकी सेनाओं ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। ईरान युद्ध में पिछले महीने युद्धविराम लागू हुआ। अपने साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा, "मैं इजरायल की सेना के लिए अमेरिकी वित्तीय सहायता को शून्य तक कम करना चाहता हूं।" उन्होंने कहा, "हमें प्रति वर्ष 3.8 अरब डॉलर मिलते हैं। और मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि हम शेष सैन्य सहायता से भी खुद को अलग कर लें।" उन्होंने आगे कहा, "आइए अभी से शुरुआत करें और इसे अगले दशक में पूरा करें।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:36:10 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राजनयिकों का दावा: प्रमुख ताकत बनकर उभरे मुजतबा खामेनेई, जंग की रणनीति और राजनयिक वार्ता दोनों का कर रहे नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[हमले में घायल होने के बावजूद मुजतबा खामेनेई ईरान की युद्ध रणनीति और राजनयिक वार्ताओं का गुप्त रूप से नेतृत्व कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक संचार से बचते हुए, वह हस्तलिखित नोटों के जरिए सरकार को निर्देशित कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य दबाव के बावजूद ईरान अब भी अपनी मिसाइल क्षमताओं को पुनः संगठित करने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-president-pejeshkyan-claims-that-mujtaba-khamenei-has-emerged-as/article-153244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/mojtaba-khamenei-iran-new-supreme-leader.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई संघर्ष के दौरान देश की युद्ध रणनीति को आकार देने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ राजनयिक बातचीत में शामिल अधिकारियों को निर्देशित करने वाले प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के पहले ही दिन उनके पिता और ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी सैन्य कमांडर मारे गये थे। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के आकलन के अनुसार, उसी हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मुजतबा कथित तौर पर ईरान की युद्धकालीन रणनीति बनाने, सैन्य अभियानों का निर्देशन करने और अमेरिका से समझौते के राजनयिक प्रयासों का मार्गदर्शन करने में गहराई से लगे हुए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मुजतबा के चेहरे, हाथ, धड़ और पैर काफी ज्यादा झुलस गये थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मानना है कि वह सार्वजनिक नजरों से दूर रहकर स्वस्थ होने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार से जानबूझकर बच रहे हैं और केवल व्यक्तिगत मुलाकातों या संदेशवाहकों के जरिये हस्तलिखित नोटों से ही संवाद कर रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने इस सप्ताह पुष्टि की कि उन्होंने मुजतबा के साथ ढाई घंटे तक आमने-सामने बैठक की। हमले के बाद नये सर्वोच्च नेता और ईरान के किसी वरिष्ठ अधिकारी के बीच यह पहली सार्वजनिक रूप से पुष्ट मुलाकात थी।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय में प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहिर हुसैनी ने शुक्रवार को कहा, "खामेनेई अपनी चोटों से उबर रहे हैं और अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, हुसैनी ने सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर चिंताओं को कम करने की कोशिश की और कहा कि खामेनेई के पैर और पीठ के निचले हिस्से में मामूली चोटें आयी थीं। उन्होंने यह भी बताया, "छर्रे का एक छोटा-सा टुकड़ा उनके कान के पीछे लगा था, लेकिन घाव अब भर रहे हैं।"</p>
<p>ईरान में एक जनसमूह को संबोधित करते हुए हुसैनी ने कहा, "खुदा का शुक्र है कि वह स्वस्थ हैं। दुश्मन हर तरह की अफवाहें फैला रहा है और झूठे दावे कर रहा है। वे उन्हें देखना और ढूंढ़ना चाहते हैं, लेकिन लोगों को धैर्य रखना चाहिए और जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सही समय आने पर वह आपसे बात करेंगे।" अमेरिकी विश्लेषक स्वीकार करते हैं कि वे मुजतबा की मौजूदगी की पुष्टि प्रत्यक्ष तौर पर नहीं कर सकते। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ईरान के सत्ता ढांचे के भीतर मौजूद अधिकारी अपने निजी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उन तक अपनी पहुंच को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं।</p>
<p>आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सहयोग से चलता प्रतीत होता है। गालिबाफ ने ही अमेरिका के साथ परमाणु और युद्धविराम वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई वह वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गयी थी और दूसरे दौर की प्रस्तावित बैठक कभी नहीं हो पायी। बाद में ट्रंप ने इस विफलता का कारण ईरान के नेतृत्व के भीतर गहरे आंतरिक मतभेदों को बताया।</p>
<p>अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अनिश्चितता के बावजूद युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम जरूर किया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान के लगभग दो-तिहाई मिसाइल लॉन्चर अब भी चालू माने जा रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले अनुमानों से कहीं अधिक है। इसका आंशिक कारण वर्तमान में जारी युद्धविराम है, जिसने ईरान को संभलने और उन लॉन्चरों को बाहर निकालने का समय दे दिया है, जो पिछले हमलों के दौरान दब गये थे।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, सीआईए के एक आकलन में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि ईरान भारी आर्थिक संकट का सामना करने से पहले अमेरिका के नेतृत्व वाली वर्तमान नाकेबंदी को अगले चार महीनों तक और झेल सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के शासन ढांचे को 'पूरी तरह से बिखरा' बताया है। वहीं ह्वाइट हाउस ने इस बात पर जोर दिया है कि सैन्य दबाव, आर्थिक अलगाव और आंतरिक कलह ने ईरानी शासन को काफी कमजोर कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे भी आगे बढ़कर तर्क दिया है कि ईरान में प्रभावी रूप से सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वर्तमान वार्ताकार पहले वालों की तुलना में अधिक 'समझदार' हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:30:25 +0530</pubDate>
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                <title>रूस-सऊदी अरब ने ईरान तथा अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का किया समर्थन, होर्मुज में जहाजों का आवागमन किया जाए बहाल : लावरोव</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के विदेश मंत्री लावरोव और सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान ने फोन पर वार्ता कर ईरान और अरब देशों के बीच संबंध सुधारने का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और क्षेत्रीय संकट के स्थायी राजनयिक समाधान पर जोर दिया, ताकि खाड़ी में शांति बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-saudi-arabia-support-normalization-of-relations-between-iran-and-arab/article-153245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/sergey.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच फोन पर बातचीत में दोनों पक्षों ने ईरान और अरब राजतंत्रों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों का समर्थन किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईरान और अरब देशों के बीच लंबे समय के लिए रिश्ते सुधारने और सामान्य बनाने की कोशिशें दोबारा शुरू करना सही माना गया है। "मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन संघर्ष-पूर्व की स्थितियों में बहाल किया जाना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के संकट के सभी पहलुओं के स्थायी और दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए जारी राजनयिक संपर्कों को बनाए रखा जाना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:33 +0530</pubDate>
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                <title>अगले हफ्ते इस्लामाबाद में बातचीत शुरू कर सकते हैं अमेरिका और ईरान : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते पर अगले सप्ताह इस्लामाबाद में वार्ता फिर शुरू हो सकती है। मसौदे में परमाणु कार्यक्रम, यूरिनियम स्थानांतरण और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप अब ईरान के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जो क्षेत्र में शांति का भविष्य तय करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-and-iran-may-start-talks-in-islamabad-next-week/article-153264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-casefire.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। व्हाइट हाउस द्वारा ईरान से संघर्ष समाप्ति संबंधी प्रस्ताव पर जवाब की प्रतीक्षा के बीच खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता अगले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में फिर शुरू हो सकती है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों पक्ष मध्यस्थों के साथ मिलकर एक पृष्ठ के 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन का मसौदा तैयार कर रहे हैं। प्रस्तावित रूपरेखा के तहत एक महीने की वार्ता प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसका उद्देश्य जारी संघर्ष को समाप्त करना है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम करने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी तीसरे देश में स्थानांतरित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। कई अहम मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन सकी है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत का मुद्दा सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है और माना जा रहा है कि यही वार्ता में देरी या विफलता का कारण बन सकता है। ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आए हैं जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किये गये हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया था। ईरान ने जवाबी हमले किए थे और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन प्रभावित हुआ था।</p>
<p>पाकिस्तान की मध्यस्थता में आठ अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई वार्ता का पहला दौर किसी स्थायी समझौते तक नहीं पहुंच सका था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को बिना किसी समय सीमा के आगे बढ़ा दिया था। ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से कहा कि प्रशासन को संघर्ष समाप्ति के प्रस्ताव पर ईरान के जवाब का इंतजार है। उन्होंने सीएनएन से कहा, "हमें आज रात तक जवाब मिलने की उम्मीद है", हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि तेहरान जानबूझकर जवाब में देरी कर रहा है या नहीं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि वॉशिंगटन को शुक्रवार तक ईरान के जवाब की उम्मीद है, हालांकि शनिवार सुबह तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि ईरान ने औपचारिक रूप से कोई जवाब दिया है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:32:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप का बड़ा फैसला : 1,000 कैदियों के अदला-बदली की घोषणा,  रूस-यूक्रेन के बीच 3 दिवसीय युद्धविराम</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'विजय दिवस' पर रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिवसीय युद्धविराम और 1,000 कैदियों की अदला-बदली की ऐतिहासिक घोषणा की। 9 से 11 मई तक प्रभावी इस समझौते का पुतिन और ज़ेलेंस्की दोनों ने समर्थन किया है। यह कदम चार साल से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-trump-government-3-day-ceasefire-between-russia-and/article-153217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों दौरान रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के युद्धविराम और 1,000 कैदियों की अदला-बदली की घोषणा की है। यह समारोह द्वितीय विश्व युद्ध में नाज़ी जर्मनी पर सोवियत संघ की विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से न केवल सैन्य अभियान रुकेंगे बल्कि युद्ध शुरू होने के बाद से कैदियों की सबसे बड़ी अदला-बदली भी होगी। रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने कहा कि रूस ने यूक्रेन के साथ नौ से 11 मई तक युद्धविराम करने और इस अवधि के दौरान यूक्रेन के साथ "हजार के बदले हजार" कैदियों की अदला-बदली करने की श्री ट्रम्प की पहल पर सहमति व्यक्त की है।</p>
<p>यह अस्थायी युद्धविराम नौ मई से 11 मई तक रहेगा और यह चार साल से अधिक समय से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में जारी राजनयिक प्रयासों के बीच हुआ है। ट्रंप की घोषणा के कुछ ही समय बाद, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने पुष्टि किया कि यूक्रेन युद्धविराम में शामिल होगा। रूसी सरकारी मीडिया ने भी कहा कि रूस ने प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की है। ज़ेलेंस्की ने एक्स पर पुष्टि किया कि युद्धविराम की व्यवस्था अमेरिका के नेतृत्व में युद्ध को समाप्त करने के लिए किए जा रहे वार्ता प्रयासों के अंतर्गत की गई है जो अब चार साल से अधिक समय से चल रहा है।</p>
<p>उशाकोव ने बाद में कहा कि "अमेरिकी प्रशासन के साथ हमारी टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान इस मामले पर एक समझौता हुआ। अमेरिकी प्रतिनिधि यूक्रेन के संपर्क में भी थे।" उशाकोव के अनुसार, यह समझौता रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ट्रंप के बीच हाल ही में हुई फोन कॉल के बाद हुआ, जिसके दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हमारे देश सहयोगी थे और विजय दिवस समारोह के दौरान युद्धविराम की संभावना पर भी चर्चा की। यह घोषणा कई दिनों से बढ़ते तनाव के बाद हुई है,जिसमें रूस और यूक्रेन दोनों एक-दूसरे पर रूस के विजय दिवस समारोह से जुड़े अलग-अलग युद्धविरामों के बावजूद हमले जारी रखने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p>रूस ने इससे पहले नौ मई के विजय दिवस समारोह से जुड़ा एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की थी, जबकि यूक्रेन ने कहा कि उसने पहले ही छह मई से व्यापक युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन दावा किया कि रूस ने इस प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया। लगभग दो दशकों में पहली बार, रूस में विजय दिवस परेड में सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन नहीं किया जाएगा क्योंकि यूक्रेन द्वारा समारोहों को बाधित करने के प्रयास की आशंकाओं के कारण अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं। अधिकारियों ने मास्को और सेंट पीटर्सबर्ग दोनों शहरों के निवासियों को चेतावनी दी है कि सुरक्षा कारणों से आयोजनों के दौरान मोबाइल इंटरनेट की सुविधा प्रतिबंधित हो सकती है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि रूस का वार्षिक रेड स्क्वायर सैन्य परेड, जो वैश्विक नेताओं और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को आकर्षित करने वाले अंतर्राष्ट्रीय जमावड़े के रूप में जाना जाता है, इस वर्ष बहुत छोटे पैमाने पर आयोजित होने की उम्मीद है। केवल बेलारूस, मलेशिया और लाओस के नेताओं के साथ-साथ कुछ अन्य गणमान्य व्यक्तियों के ही शामिल होने की उम्मीद है। इसी बीच, ट्रम्प ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान में सहायता के लिए रूस में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भेजने की इच्छा व्यक्त की है। यूक्रेन पर बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को रूस भेजने की तत्परता के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "अगर मुझे लगता है कि इससे मदद मिलेगी तो मैं ऐसा जरूर करूंगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 12:08:06 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप की बड़ी घोषणा: जल्द खत्म हो सकता है युद्ध, समझौते को लेकर ईरान के साथ बातचीत सफल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने पर सकारात्मक चर्चा हुई है। व्हाइट हाउस में उन्होंने कहा कि ईरान अब समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के अनुसार, पिछले दो महीनों से जारी तनाव के बाद अब एक स्थायी शांति संधि की प्रबल संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-may-end-soon-talks-with-iran-regarding/article-152967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध समाप्त करने को लेकर ईरान के साथ अच्छी बातचीत हुई है। ट्रंप ने बुधवार को कहा कि पिछले 24 घंटों में अमेरिका की ईरान के साथ उस युद्ध को खत्म करने को लेकर बहुत अच्छी बातचीत हुई है, जो दो महीने से ज़्यादा समय से चल रहा है। उन्होंने व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर समझौता करना चाहता है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं। पिछले 24 घंटों में हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई है और यह पूरी तरह मुमकिन है कि हम कोई समझौता कर लें।" ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका अभी ईरान को छोड़ देता है, तो देश को फिर से खड़ा होने में 20 साल लग जाएँगे, क्योंकि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के हमलों से उसे भारी नुकसान पहुँचा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:06:07 +0530</pubDate>
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