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                <title>Diplomacy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Diplomacy RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान पाकिस्तान दौरे पर: पीएम शहबाज शरीफ से करेंगे मुलाकात ; भारत की बढ़ सकती है मुश्किलें, जानें कैसे ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने पाक पीएम शहबाज शरीफ के आमंत्रण पर इस्लामाबाद का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता के लिए आभार जताना है। दोनों देश अंतिम समझौते के लिए 60 दिवसीय रोडमैप पर सहमत हुए हैं, जिससे कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-pezeshkian-will-meet-pm-shahbaz-sharif-during-pakistan/article-157858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष आमंत्रण पर इस्लामाबाद का एक दिवसीय दौरा कर रहे हैं। यह दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों की दिशा में एक और बड़ा कदम है। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय के जनसंपर्क प्रमुख हबीबुल्लाह अब्बासी ने पुष्टि की, कि वार्ता को सुगम बनाने में पाकिस्तान के नेतृत्व की भूमिका के लिए उनका आभार व्यक्त करना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य होगा।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अब्बासी ने कहा कि इस यात्रा के उद्देश्यों में 'ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता' के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रति आभार व्यक्त करना शामिल है। पेज़ेशकियान की यह यात्रा मुख्य रूप से शरीफ को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद देने के लिए है, क्योंकि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका को बातचीत की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। पेज़ेशकियान पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ-साथ शरीफ, पाकिस्तान के विदेश मंत्री और 'नेशनल असेंबली' के अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका उच्च स्तरीय वार्ता के पहले दौर के संपन्न होने के तुरंत बाद हो रही है, जहां दोनों पक्षों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त 'प्रगति' की है। पेज़ेशकियान ने यात्रा से पहले कहा, "वार्ता की प्रभावशीलता जिम्मेदारियों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता और उनके सटीक कार्यान्वयन पर निर्भर करती है। इस रास्ते पर प्रगति को जिम्मेदारियों के प्रति व्यावहारिक पालन से मापा जाएगा। </p>
<p>इस वार्ता में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभायी, जो आखिरकार दोनों पक्षों को स्विट्जरलैंड में एक साथ लाये। यह वार्ता ब्युर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई, जहां वरिष्ठ ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों ने मुलाकात की, जिसे पिछले कई वर्षों में दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर राजनयिक आदान-प्रदान में से एक बताया जा रहा है। वार्ता के बाद पाकिस्तान और कतर दोनों ने घोषणा की, कि ईरान और अमेरिका एक अंतिम समझौते की दिशा में रोडमैप पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। अन्य मसलों को तय करने के लिए इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में तकनीकी चर्चाएं जारी हैं।</p>
<p>पाकिस्तान यात्रा के अलावा, ईरान एक और राजनयिक रास्ते पर भी आगे बढ़ रहा है। मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन और जहाजरानी के ईरानी प्रबंधन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए ओमान की यात्रा कर रहे हैं। उनके कार्यालय ने सोमवार को अपने टेलीग्राम चैनल के माध्यम से इस यात्रा की घोषणा की। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के भी इस व्यापक राजनयिक प्रयास में शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि उनके विशिष्ट कार्यक्रमों का विवरण अभी सामने नहीं आया है।</p>
<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति के रूप में पेज़ेशकियन की यह दूसरी इस्लामाबाद यात्रा होगी। जून 2025 में 12 दिनों तक चले ईरान-इजरायल युद्ध के बाद, उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए पाकिस्तान को चुना था और लाहौर तथा इस्लामाबाद का दौरा किया था। उस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे और द्विपक्षीय व्यापार को लगभग तीन अरब डॉलर से बढ़ाकर सालाना 10 अरब डॉलर करने का संकल्प लिया था। इससे पहले जनवरी 2024 में दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी, जब ईरान ने सशस्त्र समूह जैश अल-अदल के खिलाफ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल हमले किए थे। पाकिस्तान ने भी 48 घंटों के भीतर ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जवाबी हमले किए थे, जिसके बाद दोनों देशों को अपने राजदूतों को वापस बुलाना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता में बड़ी प्रगति: 60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप, होर्मुज पर तनाव कम करने की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई पहले दौर की बातचीत सकारात्मक रही। मध्यस्थ देश कतर और पाकिस्तान के अनुसार, 60 दिनों में अंतिम समझौते के लिए उच्च-स्तरीय समिति और होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए संचार व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी है। ईरान के प्रतिबंध हटने और लेबनान में संघर्ष-निवारण सेल स्थापित करने से शांति की उम्मीदें बढ़ी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/major-progress-in-us-iran-talks-roadmap-for-final-agreement-in/article-157771"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>बर्गेनस्टॉक। अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते तक पहुँचने के मकसद से हुई बातचीत का पहला दौर "सकारात्मक" रहा है और मध्यस्थ देशों कतर और पाकिस्तान ने कहा है कि बातचीत में "उत्साहजनक प्रगति" हुई है। पिछले सप्ताह वाशिंगटन और तेहरान के बीच शुरुआती समझौते के बाद रविवार को स्विट्जरलैंड में बातचीत शुरू हुई। तकनीकी स्तर की बातचीत पूरे सप्ताह जारी रहेगी। कतर और पाकिस्तान ने सोमवार सुबह जारी एक संयुक्त बयान में घोषणा की "उच्च-स्तरीय समिति" बनाने पर सहमति बनी है, जो 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी। मध्यस्थों ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए "संचार व्यवस्था" और मध्यस्थता प्रयासों की देखरेख के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई जा रही है।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि इस बातचीत से लेबनान में संघर्ष को खत्म करने की दिशा में "बड़ी प्रगति" हुई है। बयान के अनुसार ईरान फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक और इसके विपरीत दिशा में वाणिज्यिक जहाजों की "बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवाजाही" सुनिश्चित करने के लिए "पूरी कोशिश" करेगा। बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के लिए दबाव बनाने का एक अहम जरिया रहा है। शनिवार को ईरान की मिलिट्री कमांड ने घोषणा की कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद कर देगी। यह कदम लेबनान में इज़रायल के लगातार हमलों और अमेरिका द्वारा युद्ध खत्म करने के समझौते को "लागू न कर पाने" के जवाब में उठाया गया।</p>
<p>मध्यस्थों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के उद्देश्य से "घटनाओं और गलतफहमियों से बचने" के लिए एक "संचार लाइन" स्थापित की गई है। दोनों पक्षों ने लेबनान में सैन्य अभियानों को समाप्त करने में सहायता के लिए कतर और पाकिस्तान की सहायता से अमेरिका, ईरान और लेबनान को शामिल करते हुए एक "संघर्ष-निवारण सेल" स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की।</p>
<p>स्विट्जरलैंड में वार्ता के समापन के बाद अराघची ने कहा कि ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं और विदेशों में फ्रीज हुई कुछ ईरानी परिसंपत्तियों को जारी कर दिया गया है। उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह भी कहा कि "ईरान के लिए एक बड़ी पुनर्निर्माण और विकास योजना शुरू की गई है"। इस पोस्ट में फ्रीज हुई परिसंपत्तियों या पुनर्निर्माण कार्यक्रम के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करने वाली मीडिया समिति ने एक अलग बयान में कहा कि ईरान और कतर ने तेहरान की फ्रीज हुइ्र परिसंपत्तियों को छोड़ने से संबंधित एक नए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद से दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह और इज़रायल सेना के बीच लड़ाई तेज़ हो गई है और इज़रायली हवाई हमलों में दर्जनों लेबनानी नागरिक मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:38:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयशंकर की कूटनीतिक दौड़ शुरू: मंगोलिया-दक्षिण कोरिया दौरे पर करेंगे अहम वार्ता, जेजू फोरम में देंगे संबोधन</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार से मंगोलिया और दक्षिण कोरिया के चार दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वह मंगोलियाई नेतृत्व और समकक्ष बी. बटसेत्सेग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद, वह दक्षिण कोरिया में विदेश मंत्री चो ह्यून से वार्ता करेंगे और गुरुवार को प्रतिष्ठित 'जेजू फोरम' को संबोधित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-minister-jaishankar-leaves-on-four-day-visit-to-mongolia-and/article-157703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/s-jaishankar11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार से मंगोलिया और दक्षिण कोरिया की चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री मंगलवार तक मंगोलिया की यात्रा करेंगे। यात्रा के दौरान विदेश मंत्री मंगोलिया के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे तथा अपने समकक्ष विदेश मंत्री बी. बटसेत्सेग के साथ चर्चा करेंगे।</p>
<p>इसके बाद वह बुधवार को दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। दी दिन की यात्रा यात्रा के दौरान विदेश मंत्री कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ चर्चा करेंगे। वह गुरुवार को जेजू में शांति और समृद्धि के लिए जेजू फोरम में मुख्य वक्तव्य भी देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:38:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय विदेश मंत्रालय की पाकिस्तान को दो टूक: खुद का रिकॉर्ड खराब, भारत के आंतरिक मामलों में बोलने का नहीं है अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के खराब ट्रैक रिकॉर्ड वाले देश को दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। यह बयान कट्टरता से प्रेरित एक सुनियोजित राजनीतिक हमला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indian-foreign-ministry-bluntly-spoils-its-own-record-on-pakistan/article-157631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/india2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार देते हुए कहा है कि जिस देश का खुद का मानव अधिकार का रिकॉर्ड खराब है उसे दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को लेकर की गयी पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी पर शनिवार देर रात सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया।</p>
<p>जायसवाल ने कहा , “भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गयी अनावश्यक टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है। किसी भी स्थिति में भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।“ उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियाँ विशेष रूप से हास्यास्पद हैं, क्योंकि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड अत्यंत खराब रहा है, जो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय है। विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस वास्तविकता को देखते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणियों को केवल एक सुनियोजित राजनीतिक हमले के रूप में ही देखा जा सकता है, जो पाकिस्तान की कट्टरता और घृणा पर आधारित राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 14:23:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने होर्मुज फिर बंद किया; चेतावनी भी दी हमले जारी रहे तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका द्वारा समझौते के उल्लंघन और इजरायली हमलों के विरोध में होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की घोषणा की। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस दावे को खारिज किया है। लेबनान में नए हमलों से शांति समझौते पर संकट गहरा गया है, जिसे सुलझाने के लिए अमेरिकी दूत स्विट्जरलैंड रवाना हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-closed-hormuz-again-and-warned-that-if-the-attacks/article-157620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगंटन। लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की घोषणा की है। ईरान की संयुक्त मिलिट्री कमांड ने इसके पीछे युद्ध खत्म करने वाले समझौते का अमेरिका द्वारा उल्लंघन, दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटाने और इजरायल की ओर से लगातार युद्धविराम का उल्लंघन करने का कारण बताया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उल्लंघन जारी रहा, तो और भी कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p><strong>उधर अमेरिका का दावा, होर्मुज बंद नहीं हुआ: वेंस</strong></p>
<p>दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि तेहरान के साथ वॉशिंगटन के 14-सूत्रीय समझौते में तय किया गया संघर्ष विराम बना रहेगा। अमेरिका को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि होर्मुज समुद्री यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।</p>
<p><strong>हमने वादों का पालन किया: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि हमने अपने वादों का पालन किया है और अमेरिका की यह जिम्मेदारी है कि वह इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने के लिए मजबूर करे।</p>
<p><strong>इजरायल ने फिर किए हमले</strong></p>
<p>उधर, अमेरिका और ईरान के समझौते की खबरों के कुछ ही घंटों बाद शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गईए जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>डील पर मंडराया खतरा</strong></p>
<p>अब ईरानी सेना द्वारा दोबारा होर्मुज स्ट्रेट पर प्रतिबंध लगाने से समझौते पर संकट गहरा गया है। इस बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को ईरान पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि मोहसिन नकवी ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत पर नजर रखेंगे। </p>
<p><strong>ईरान से वार्ता के लिए अमेरिकी दूत विटकॉफ रवाना</strong></p>
<p>अमेरिका-ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता बहाल करने के उद्देश्य से अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरानी अधिकारियों से बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। दक्षिणी लेबनान में हालांकि नए इजरायली हमलों ने उस नाजुक संघर्ष विराम के लिए खतरा पैदा कर दिया है, जिसे व्यापक कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान समझौता: 60 दिनों में अंतिम डील पर सहमति, पीएम शरीफ ने बतौर मध्यस्थ 'इस्लामाबाद एमओयू' पर किए दस्तख़त</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन की सहमति वाले इस समझौते के तहत दोनों देश दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर राजी हुए हैं। इसके तहत ईरान को $300 बिलियन का पुनर्निर्माण कोष मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agreement-final-deal-agreed-in-60-days-pm-sharif/article-157379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बतौर मध्यस्थ ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए। पाकिस्तानी मीडिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान की तरफ से मध्यस्थता के अंतिम समर्थन दस्तावेज पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के दस्तखत पहले से ही मौजूद थे। बयान के मुताबिक शांति समझौते को तय समय से पहले पूरा हुआ बताया गया, जिसमें दोनों पक्ष दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर राजी हुए। इसमें आगे दावा किया गया कि समझौता पहले ही लागू हो चुका था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में पैलेस ऑफ वर्सेल्स में अमेरिका-ईरान समझौता की एक कॉपी पर दस्तखत करके अपनी जी-7 यात्रा पूरी की।</p>
<p>एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इसके बाद अमेरिका ने दस्तखत किए गए समझौते की एक फोटो ईरानियों को भेजी। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दस्तावेज पर दस्तखत किए। यह समझौता अमेरिका और ईरान को 60 दिनों के अंदर एक अंतिम समझौता करने का वायदा करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिका छूट देगा ताकि ईरान तेल निर्यात कर सके और इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रावधान बताए गए हैं। यह अमेरिका और क्षेत्रीय साझेदारों को ईरान के लिए 300 बिलियन डॉलर का पुनर्निर्माण कोष बनाने का भी वायदा करता है। अधिकारियों ने समझौते को दुश्मनी खत्म करने और क्षेत्रीय स्थिरता वापस लाने के मकसद से एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया।</p>
<p>बयान में कहा गया कि समझौता में खास समुद्री रास्तों को फिर से खोलने के प्रावधान शामिल हैं और इसमें बड़े आर्थिक पुनर्निर्माण और प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबद्धता की रूपरेखा है। विवरण हालांकि अभी साफ नहीं हैं और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कहा गया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत 60 दिनों के लिए जारी रहेगी, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:32:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का बड़ा ऐलान: यूरेनियम रहेगा देश में, अमेरिका से समझौते के बीच बधाई बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी सांद्रता कम (डाउन-ब्लेंडिंग) करेगा। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत, वाशिंगटन 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटाने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-announcement-uranium-will-remain-in-the-country-amidst/article-157369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/024.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपनी इस बात पर कायम है कि देश से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाया जाएगा। बघाई ने कहा, "हमने शुरू से ही कहा है कि संवर्धित सामग्री देश से बाहर नहीं ले जाई जाएगी। एक विकल्प ईरान के भीतर ही इसकी सांद्रता कम करना (डाउन-ब्लेंडिंग) है। यह कोई नया विकल्प नहीं है।" उनका यह बयान संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा के बाद दिया। उम्मीद है कि इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटा लेगा और तब तक अतिरिक्त बल तैनात नहीं करेगा। समझौते के चौथे पैराग्राफ में लिखा है, "अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से सैनिक हटाने का भी वादा करता है।" साथ ही, दस्तावेज़ के नौवें पैराग्राफ के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल नहीं भेजेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:14:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी : AI के लिए प्रस्तुत किया 'मानव' विजन, सुरक्षा और समावेशिता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन में एआई के लिए भारत का 'मानव' विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास सुरक्षा, गति और जनहित पर आधारित होना चाहिए। पीएम ने डीपफेक और साइबर खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और 'ग्लोबल साउथ' तक तकनीक पहुंचाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/development-of-artificial-intelligence-should-be-based-on-the-basic/article-157305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के सामने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में भारत के 'मानव' विजन का उल्लेख करते हुए कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। जी-7 देशों के 52 वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस यात्रा पर गये पीएम मोदी ने बुधवार रात फ्रांस के एवियन में "इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के 'मानव' विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है और लोकतांत्रिक देशों की ऐसी एआई मॉडल तक पहुंच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए।</p>
<p>इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को 'सेफ-बाय-डिजाइन' (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए। एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए। डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ 'ग्लोबल साउथ' के देशों तक पहुँचना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:08:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान की इजरायल को दोटूक, लेबनान में संघर्ष विराम उल्लंघन पर दी कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी 'शरारत' बंद नहीं की, तो उसे कड़े परिणाम भुगतने होंगे। ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बीच, तेहरान ने इजरायल पर 84 बार संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कब्जे वाले क्षेत्रों से पूरी तरह पीछे हटने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cant-tolerate-it-anymore-iran-accuses-israel-of-ceasefire-violations/article-157251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iran-israel.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी ‘शरारत’ बंद नहीं की, तो उसे ईरानी सशस्त्र बलों की ‘कड़ी’ प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना होगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स’ ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्ति की घोषणा की है, तब से इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 84 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है और वह अब भी ‘पीड़ित लेबनानी लोगों के खिलाफ अपराध और उनकी हत्या’ जारी रखे हुए है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान ने सोमवार तड़के लेबनान सहित पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। ईरान और अमेरिका शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करने वाले हैं। मंगलवार को तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ एक बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने लेबनान में युद्ध की समाप्ति को ईरान-अमेरिका शांति समझौते का एक 'अटूट' हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के दृष्टिकोण से, इस समझौते के दो पक्ष हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और हिजबुल्लाह है।</p>
<p>अराघची ने कहा, “युद्ध की समाप्ति का मतलब इजरायली कब्जे का खत्म होना भी है। जब तक इजरायली सेना इस युद्ध में कब्जाये गये लेबनानी क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध की समाप्ति पूरी नहीं मानी जाएगी।” अराघची ने यह टिप्पणी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान के बाद की है, जिसमें नेतन्याहू ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इजरायली सेना लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में अपने नियंत्रण वाले ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में तब तक बनी रहेगी, जब तक आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:32:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरानी राष्ट्रपति का दावा, बोले- अमेरिका के साथ समझौते के बावजूद ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार, अंतिम समझौता बाकी </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते को युद्ध रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता होना अभी बाकी है और ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है। इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-claims-despite-agreement-with-america-iran-is/article-157113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान-अमेरिका समझौता युद्ध खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम है लेकिन ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। पेज़ेशकियन ने एक्स पर कहा, "जिस बात पर सहमति बनी है वह युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन अभी अंतिम समझौता होना बाकी है। ईरान का इस्लामिक गणराज्य सभी विकल्पों के लिए तैयार है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार अमेरिका के साथ अंतिम समझौते के बिना भी या उसके साथ लोगों की सेवा करेगी। पेज़ेशकियन ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन तैयार करने में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अहम भूमिका निभाई। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली धाराओं को शामिल करने में सम्मानित सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है और हम इसके लिए उनके आभारी हैं।"</p>
<p>15 जून को, ईरान और अमेरिका ने उस ज्ञापन के पूरा होने की पुष्टि की, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। ईरानी पक्ष ने बताया कि इस ज्ञापन में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई खत्म करने की बात कही गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पुष्टि किया कि ईरान के साथ ज्ञापन पर वास्तव में हस्ताक्षर हो चुके हैं। ईरान ने कहा कि ज्ञापन के बाद, दोनों पक्ष एक अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे, जिससे ईरान के परमाणु मुद्दे और तेहरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का समाधान हो सकेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का बड़ा बयान : अमेरिका-ईरान सहमति से क्षेत्र में स्थिरता और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा, युद्धविराम का भारत ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 107 दिनों से जारी इस संघर्ष की समाप्ति से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से क्षेत्र में स्थिरता आएगी और मुक्त व्यापार सुनिश्चित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-big-statement-america-iran-agreement-will-boost-stability-and/article-157032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम होगी। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के संबंध में अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझ का स्वागत करता हूँ, जिसने विश्व भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न किया है और अनेक देशों में जनहानि का कारण बना है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति से क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और नौवहन तथा व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।<br /> <br />प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत को आशा है कि इस समझ के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की पुनर्स्थापना में सहायता मिलेगी तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। हम आशा करते हैं कि शेष मुद्दों पर विचार-विमर्श एक टिकाऊ अंतिम समझौते तक पहुँचेगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में पिछले 107 दिनों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात कही है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का स्लोवाकिया दौरा: ब्रातिस्लावा में हुआ पारंपरिक स्वागत, अलग अंदाज में सुनाया वंदे मातरम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचे, जहां ब्रेड और नमक भेंट कर उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। पीएम मोदी यहां राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और पीएम रॉबर्ट फिको के साथ व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-visit-to-slovakia-prime-minister-fico-welcomed-him/article-157034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को स्लोवाकिया की यात्रा पर पहुंचने पर कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे और बढ़ती साझेदारी और गहरी होगी। पीएम मोदी ने स्लोवाकिया की राजधानी में उतरने के तुरंत बाद कहा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ होने वाली बैठकों को लेकर भी उत्सुकता जताई।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "ब्रातिस्लावा पहुंच गया हूं। यह यात्रा भारत-स्लोवाकिया संबंधों को गहरा करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने का अवसर देती है। राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री फिको के साथ फलदायी बैठकों की उम्मीद है।" वहां पहुंचने पर प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत किया गया, जिसमें स्लोवाकिया की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार उन्हें ब्रेड और नमक भेंट किया गया। यह अनूठी परंपरा मेहमाननवाजी, सद्भावना और दोस्ती का प्रतीक मानी जाती है।</p>
<p>पीएम मोदी ने इस स्वागत के लिए आभार जताया और कहा, "ब्रातिस्लावा में स्वागत के दौरान ब्रेड और नमक भेंट करने की पारंपरिक प्रथा देखने को मिली। यह स्लोवाकिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वहाँ के लोगों की सद्भावना व दोस्ती की भावना को दर्शाता है।" इस यात्रा के दौरान स्लोवाकिया की लोक परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने मियावा क्षेत्र के लोक दल 'कोपानिसियारिक' की एक मनमोहक प्रस्तुति देखी। उन्होंने किसी देश के इतिहास और पहचान को बचाए रखने में पारंपरिक कलाओं की भूमिका की सराहना की।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "स्लोवाकिया के मियावा क्षेत्र के कोपानिसियारिक दल की एक बेहतरीन प्रस्तुति देखी। इस तरह की लोक परंपराएं अपनी संस्कृति और इतिहास को संजोकर रखने में मदद करती हैं।" ब्रातिस्लावा में पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए भारतीय समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में जुटे, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते आपसी रिश्तों को दर्शाता है। उन्होंने इस गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए प्रवासी भारतीयों का आभार व्यक्त किया और कहा कि समुदाय का यह स्नेह भारत और स्लोवाकिया को जोड़ने वाले मजबूत रिश्तों को उजागर करता है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, "मैं भारतीय समुदाय के लोगों के इस स्नेह और गर्मजोशी के लिए उनका आभारी हूँ। ऐसे भाव हमारे लोगों को जोड़ने वाले मजबूत रिश्तों को दर्शाते हैं और भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को और मजबूत करते हैं।" प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत बदलते वैश्विक और आर्थिक हालातों के बीच मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को बढ़ाना चाहता है। यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य स्लोवाकिया, व्यापार, निवेश, विनिर्माण, रक्षा सहयोग, नवाचार, सूचना प्रौद्योगिकी और आवाजाही जैसे क्षेत्रों में भारत का एक महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरा है।</p>
<p>राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री फिको के साथ पीएम मोदी की बैठकों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने, औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने, तकनीकी सहयोग में सुधार लाने और सांस्कृतिक व शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत और स्लोवाकिया के बीच दशकों से दोस्ताना राजनयिक संबंध रहे हैं और हाल के वर्षों में दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है, जबकि भारतीय कंपनियों ने स्लोवाकिया में अपनी उपस्थिति मजबूत की है, खासकर ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में। वहीं स्लोवाकिया की कंपनियों ने भी भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में रुचि दिखाई है।</p>
<p>ब्रातिस्लावा की यह यात्रा पीएम मोदी के व्यापक यूरोपीय राजनयिक संपर्क का हिस्सा है। उम्मीद है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक बातचीत, आर्थिक सहयोग और जनसंपर्क को मजबूत करके भारत-स्लोवाकिया संबंधों को एक नई गति देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 15:12:01 +0530</pubDate>
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