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                <title>Diplomacy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Diplomacy RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका-इजरायल के बीच भूमि आवंटन समझौता: यरुशलम में बनेगा अमेरिकी दूतावास का स्थायी परिसर, ट्रंप के फैसले को मिली नई रफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानने के अमेरिकी फैसले की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस निर्णय पर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद और विरोध देखने को मिला था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/land-allocation-agreement-between-america-and-israel-permanent-complex-of/article-158636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/02.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री गिदोन सार और इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने यरुशलम के मेयर मोशे लियोन की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई है, जिसे इजरायल अपनी शाश्वत राजधानी मानता है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सरकार के उस निर्णय के क्रियान्वयन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत दूतावास के लिए एलनबी परिसर आवंटित किया गया। यह उस कूटनीतिक प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण चरण है जिसकी शुरुआत दिसंबर 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने के साथ हुई थी। गौरतलब है कि, ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी और 14 मई 2018 को अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानांतरित कर दिया था। इस फैसले के बाद फ़िलीस्तीनी क्षेत्रों में अशांति फैल गई थी और अरब जगत के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।</p>
<p>इजरायल यरुशलम को अपनी एकीकृत और अविभाज्य राजधानी मानता है, जबकि अधिकांश देश पूर्वी यरुशलम के इजरायल में विलय को मान्यता नहीं देते। उनका मानना है कि यरुशलम की अंतिम स्थिति फ़िलीस्तीनियों और इजरायल के बीच आपसी सहमति से तय की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>&quot;शिमला समझौते&quot; पर भाजपा का बड़ा हमला : 'रणनीतिक चूक' का आरोप, कांग्रेस की नीति पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा ने 1972 के शिमला समझौते को कांग्रेस की कमजोर कूटनीति का उदाहरण बताते हुए आरोप लगाया कि 1971 युद्ध में मजबूत स्थिति के बावजूद कश्मीर जैसे अहम मुद्दों का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। पार्टी ने कहा कि यह समझौता आज भी भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक नीति पर बहस का विषय बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-made-a-big-attack-on-shimla-agreement-accused-of/article-158681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/011.gif" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते को कांग्रेस की कमजोर कूटनीतिक नीति का परिणाम करार देते हुए कहा है कि मजबूत स्थिति में होने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने कश्मीर जैसे मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने के बजाय द्विपक्षीय बातचीत को चुना था। भाजपा ने सोशल मीडिया एक्स पर गुरूवार को लिखा कि 1971 की लड़ाई में निर्णायक जीत के बाद, इसी दिन 1972 में भारत ने शिमला समझौता किया। 93000 से ज़्यादा पाकिस्तानी युद्ध-बंदियों और कब्ज़े में लिए गए इलाक़ों के साथ, भारत बातचीत में बहुत मज़बूत स्थिति में था। फिर भी, उस मज़बूत स्थिति का फ़ायदा उठाकर मुख्य मुद्दों, ख़ासकर कश्मीर का स्थायी समाधान निकालने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व ने सिर्फ़ द्विपक्षीय बातचीत पर आधारित रास्ता चुना।</p>
<p>भाजपा ने कहा कि शिमला समझौते के दौरान कांग्रेस की कमज़ोर कूटनीतिक नीति, आज़ाद भारत के सबसे बड़े रणनीतिक मौकों में से एक को गंवाने का मामला बनी हुई है। भारी फ़ायदे वाला वह पल दशकों तक बहस का विषय बना रहा कि क्या भारत ने बिना कोई स्थायी समाधान पाए ही बहुत कुछ छोड़ दिया। भाजपा ने कहा कि पाँच दशक से भी ज़्यादा समय बाद दो जुलाई और शिमला समझौता कूटनीति, बातचीत और पाकिस्तान की समस्या के समाधान को लेकर कांग्रेस की मंशा पर अहम सवाल खड़े करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:59:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कतर की मध्यस्थता रंग लाई: दोहा में अमेरिका-ईरान की अप्रत्यक्ष बातचीत बढ़ी आगे, जल्द होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[कतर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में समझौता ज्ञापन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। दोनों पक्ष निकट भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगली बैठक आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम जनाज़े के बाद आयोजित की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/qatars-mediation-bears-fruit-us-iran-indirect-talks-progress-in-doha/article-158641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। कतर ने कहा है कि दोहा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता में हाल में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से जुड़े मुद्दों पर "सकारात्मक प्रगति" हुई है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने दोहा में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई और यह लेक लुसर्न शिखर सम्मेलन के परिणामों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।"</p>
<p>उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने निकट भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है। अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा और रियासती जनाज़े के बाद यथाशीघ्र आयोजित की जायेगी। उल्लेखनीय है कि अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में मृत्यु हुई थी। उनके जनाज़े की अंतिम यात्रा शुक्रवार से शुरू होगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 14:14:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: आज दोहा में होगी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, तेहरान ने तुरंत किया खंडन</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहा में अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा किया, लेकिन ईरान ने ऐसी किसी निर्धारित बातचीत से इनकार कर दिया। दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों से कूटनीतिक तनाव और अविश्वास उजागर हुआ। इस बीच युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-america-iran-peace-talks-will-be-held/article-158494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>दोहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में वार्ता होगी, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में वाशिंगटन के साथ किसी भी स्तर की वार्ता निर्धारित नहीं है। ट्रंप ने कहा कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जैरेड कुशनर दोहा जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ तकनीकी स्तर की वार्ता भी जारी रहेगी।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया था और यह बैठक दोहा में होगी, हालांकि उन्होंने इसके बारे में कोई अन्य विवरण नहीं दिया। अमेरिका के दो अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि विटकॉफ और कुशनर दोहा जा रहे हैं। उनके अनुसार वाशिंगटन युद्धविराम को व्यापक समझौते में बदलने के उद्देश्य से वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा,"विशेष दूत विटकॉफ और जारेड कुशनर इस सप्ताह उच्चस्तरीय बैठकों के लिए दोहा जाएंगे। इन बैठकों के समानांतर तकनीकी स्तर की वार्ता भी होगी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी ओर से युद्धविराम का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। यदि हिंसा हुई तो उसका जवाब भी उसी प्रकार दिया जाएगा।" अमेरिका और ईरान ने 17 जून को 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य चार महीने से जारी संघर्ष समाप्त करना था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने शत्रुता समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की थी, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का समुद्री परिवहन होता है।</p>
<p>ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान की ओर से औपचारिक वार्ता से इनकार किये जाने के बावजूद अमेरिका कूटनीतिक प्रयास जारी रखना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने किसी भी आसन्न वार्ता की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत निर्धारित नहीं है। उन्होंने ईरान में संवाददाताओं से कहा, "अमेरिकी प्रतिनिधियों के कतर जाने का ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।"</p>
<p>दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों से उनके बीच गहरे अविश्वास का संकेत मिलता है। साथ ही हालिया सैन्य टकरावों के बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते तक पहुंचने की संभावना पर भी सवाल खड़े हो गये हैं। बघाई ने कहा कि ईरान और अमेरिका अभी अंतिम समझौते पर बातचीत के चरण में नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल तेहरान की प्राथमिकता हालिया मध्यस्थता के बाद हुए समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू कराना है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "समझौता ज्ञापन की धारा 13 के अनुसार अंतिम समझौते पर वार्ता तभी शुरू हो सकती है, जब धारा 1, 4, 5, 10 और 11 का क्रियान्वयन शुरू हो जाए।" बघाई के अनुसार अमेरिका ने धारा 10 के तहत ईरानी तेल की बिक्री से संबंधित लाइसेंस जारी किए हैं, जबकि तेहरान धारा 11 के तहत ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में इस सप्ताह के अंत में ईरान का एक विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल दोहा जाएगा, लेकिन इसका अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि यदि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा तो ईरान भी समझौते का सम्मान करेगा, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की धमकी का ईरान दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने कहा, "यदि अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां निभाता है तो ईरान भी समझौते के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा," लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि देश अपने हितों की रक्षा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं करेगा।</p>
<p>ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कतर में जमी ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से आधी राशि तेहरान को वापस मिलेगी। यह मुद्दा वर्तमान कूटनीतिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच ईरान ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि अन्य देश वहां बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में भाग लें। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने कहा कि जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान को अस्वीकार किया, जिसमें फ्रांस, ओमान और अन्य देशों की संभावित भूमिका का उल्लेख किया गया था।</p>
<p>ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "समझौता ज्ञापन के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। किसी अन्य देश को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कहा कि स्थिति अब भी संवेदनशील और जटिल बनी हुई है तथा फ्रांस को भड़काऊ बयान देकर इसे और जटिल नहीं बनाना चाहिए। उधर इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और लेबनान दोनों से जुड़े युद्धविराम समझौतों को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया, जबकि इजरायल दोनों मामलों को अलग-अलग रखना चाहता था। </p>
<p>काट्ज ने कहा कि अमेरिका ने इजरायल को तब तक लेबनान के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का समर्थन दिया है, जब तक हिजबुल्ला पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता। इजरायल और लेबनान के बीच समझौता हो चुका है, फिर भी लेबनान की संसद के अध्यक्ष और हिजबुल्ला के प्रमुख सहयोगी नबीह बेरी ने अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि "इसका क्रियान्वयन नहीं होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:12:36 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान पाकिस्तान दौरे पर: पीएम शहबाज शरीफ से करेंगे मुलाकात ; भारत की बढ़ सकती है मुश्किलें, जानें कैसे ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने पाक पीएम शहबाज शरीफ के आमंत्रण पर इस्लामाबाद का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थता के लिए आभार जताना है। दोनों देश अंतिम समझौते के लिए 60 दिवसीय रोडमैप पर सहमत हुए हैं, जिससे कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-pezeshkian-will-meet-pm-shahbaz-sharif-during-pakistan/article-157858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष आमंत्रण पर इस्लामाबाद का एक दिवसीय दौरा कर रहे हैं। यह दोनों देशों के बीच करीबी संबंधों की दिशा में एक और बड़ा कदम है। ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय के जनसंपर्क प्रमुख हबीबुल्लाह अब्बासी ने पुष्टि की, कि वार्ता को सुगम बनाने में पाकिस्तान के नेतृत्व की भूमिका के लिए उनका आभार व्यक्त करना इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य होगा।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अब्बासी ने कहा कि इस यात्रा के उद्देश्यों में 'ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता' के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रति आभार व्यक्त करना शामिल है। पेज़ेशकियान की यह यात्रा मुख्य रूप से शरीफ को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद देने के लिए है, क्योंकि पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका को बातचीत की मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। पेज़ेशकियान पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ-साथ शरीफ, पाकिस्तान के विदेश मंत्री और 'नेशनल असेंबली' के अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका उच्च स्तरीय वार्ता के पहले दौर के संपन्न होने के तुरंत बाद हो रही है, जहां दोनों पक्षों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त 'प्रगति' की है। पेज़ेशकियान ने यात्रा से पहले कहा, "वार्ता की प्रभावशीलता जिम्मेदारियों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता और उनके सटीक कार्यान्वयन पर निर्भर करती है। इस रास्ते पर प्रगति को जिम्मेदारियों के प्रति व्यावहारिक पालन से मापा जाएगा। </p>
<p>इस वार्ता में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभायी, जो आखिरकार दोनों पक्षों को स्विट्जरलैंड में एक साथ लाये। यह वार्ता ब्युर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई, जहां वरिष्ठ ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों ने मुलाकात की, जिसे पिछले कई वर्षों में दोनों देशों के बीच सबसे गंभीर राजनयिक आदान-प्रदान में से एक बताया जा रहा है। वार्ता के बाद पाकिस्तान और कतर दोनों ने घोषणा की, कि ईरान और अमेरिका एक अंतिम समझौते की दिशा में रोडमैप पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। अन्य मसलों को तय करने के लिए इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में तकनीकी चर्चाएं जारी हैं।</p>
<p>पाकिस्तान यात्रा के अलावा, ईरान एक और राजनयिक रास्ते पर भी आगे बढ़ रहा है। मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन और जहाजरानी के ईरानी प्रबंधन को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए ओमान की यात्रा कर रहे हैं। उनके कार्यालय ने सोमवार को अपने टेलीग्राम चैनल के माध्यम से इस यात्रा की घोषणा की। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के भी इस व्यापक राजनयिक प्रयास में शामिल होने की उम्मीद है, हालांकि उनके विशिष्ट कार्यक्रमों का विवरण अभी सामने नहीं आया है।</p>
<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति के रूप में पेज़ेशकियन की यह दूसरी इस्लामाबाद यात्रा होगी। जून 2025 में 12 दिनों तक चले ईरान-इजरायल युद्ध के बाद, उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए पाकिस्तान को चुना था और लाहौर तथा इस्लामाबाद का दौरा किया था। उस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने 12 समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे और द्विपक्षीय व्यापार को लगभग तीन अरब डॉलर से बढ़ाकर सालाना 10 अरब डॉलर करने का संकल्प लिया था। इससे पहले जनवरी 2024 में दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी, जब ईरान ने सशस्त्र समूह जैश अल-अदल के खिलाफ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल हमले किए थे। पाकिस्तान ने भी 48 घंटों के भीतर ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जवाबी हमले किए थे, जिसके बाद दोनों देशों को अपने राजदूतों को वापस बुलाना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 17:30:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता में बड़ी प्रगति: 60 दिन में अंतिम समझौते का रोडमैप, होर्मुज पर तनाव कम करने की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई पहले दौर की बातचीत सकारात्मक रही। मध्यस्थ देश कतर और पाकिस्तान के अनुसार, 60 दिनों में अंतिम समझौते के लिए उच्च-स्तरीय समिति और होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए संचार व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी है। ईरान के प्रतिबंध हटने और लेबनान में संघर्ष-निवारण सेल स्थापित करने से शांति की उम्मीदें बढ़ी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/major-progress-in-us-iran-talks-roadmap-for-final-agreement-in/article-157771"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>बर्गेनस्टॉक। अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते तक पहुँचने के मकसद से हुई बातचीत का पहला दौर "सकारात्मक" रहा है और मध्यस्थ देशों कतर और पाकिस्तान ने कहा है कि बातचीत में "उत्साहजनक प्रगति" हुई है। पिछले सप्ताह वाशिंगटन और तेहरान के बीच शुरुआती समझौते के बाद रविवार को स्विट्जरलैंड में बातचीत शुरू हुई। तकनीकी स्तर की बातचीत पूरे सप्ताह जारी रहेगी। कतर और पाकिस्तान ने सोमवार सुबह जारी एक संयुक्त बयान में घोषणा की "उच्च-स्तरीय समिति" बनाने पर सहमति बनी है, जो 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए एक रोडमैप तैयार करेगी। मध्यस्थों ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए "संचार व्यवस्था" और मध्यस्थता प्रयासों की देखरेख के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई जा रही है।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि इस बातचीत से लेबनान में संघर्ष को खत्म करने की दिशा में "बड़ी प्रगति" हुई है। बयान के अनुसार ईरान फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक और इसके विपरीत दिशा में वाणिज्यिक जहाजों की "बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवाजाही" सुनिश्चित करने के लिए "पूरी कोशिश" करेगा। बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के लिए दबाव बनाने का एक अहम जरिया रहा है। शनिवार को ईरान की मिलिट्री कमांड ने घोषणा की कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद कर देगी। यह कदम लेबनान में इज़रायल के लगातार हमलों और अमेरिका द्वारा युद्ध खत्म करने के समझौते को "लागू न कर पाने" के जवाब में उठाया गया।</p>
<p>मध्यस्थों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के उद्देश्य से "घटनाओं और गलतफहमियों से बचने" के लिए एक "संचार लाइन" स्थापित की गई है। दोनों पक्षों ने लेबनान में सैन्य अभियानों को समाप्त करने में सहायता के लिए कतर और पाकिस्तान की सहायता से अमेरिका, ईरान और लेबनान को शामिल करते हुए एक "संघर्ष-निवारण सेल" स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की।</p>
<p>स्विट्जरलैंड में वार्ता के समापन के बाद अराघची ने कहा कि ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं और विदेशों में फ्रीज हुई कुछ ईरानी परिसंपत्तियों को जारी कर दिया गया है। उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह भी कहा कि "ईरान के लिए एक बड़ी पुनर्निर्माण और विकास योजना शुरू की गई है"। इस पोस्ट में फ्रीज हुई परिसंपत्तियों या पुनर्निर्माण कार्यक्रम के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व करने वाली मीडिया समिति ने एक अलग बयान में कहा कि ईरान और कतर ने तेहरान की फ्रीज हुइ्र परिसंपत्तियों को छोड़ने से संबंधित एक नए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद से दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह और इज़रायल सेना के बीच लड़ाई तेज़ हो गई है और इज़रायली हवाई हमलों में दर्जनों लेबनानी नागरिक मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:38:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जयशंकर की कूटनीतिक दौड़ शुरू: मंगोलिया-दक्षिण कोरिया दौरे पर करेंगे अहम वार्ता, जेजू फोरम में देंगे संबोधन</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार से मंगोलिया और दक्षिण कोरिया के चार दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वह मंगोलियाई नेतृत्व और समकक्ष बी. बटसेत्सेग से मुलाकात करेंगे। इसके बाद, वह दक्षिण कोरिया में विदेश मंत्री चो ह्यून से वार्ता करेंगे और गुरुवार को प्रतिष्ठित 'जेजू फोरम' को संबोधित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-minister-jaishankar-leaves-on-four-day-visit-to-mongolia-and/article-157703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/s-jaishankar11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार से मंगोलिया और दक्षिण कोरिया की चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री मंगलवार तक मंगोलिया की यात्रा करेंगे। यात्रा के दौरान विदेश मंत्री मंगोलिया के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे तथा अपने समकक्ष विदेश मंत्री बी. बटसेत्सेग के साथ चर्चा करेंगे।</p>
<p>इसके बाद वह बुधवार को दक्षिण कोरिया की यात्रा करेंगे। दी दिन की यात्रा यात्रा के दौरान विदेश मंत्री कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ चर्चा करेंगे। वह गुरुवार को जेजू में शांति और समृद्धि के लिए जेजू फोरम में मुख्य वक्तव्य भी देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:38:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारतीय विदेश मंत्रालय की पाकिस्तान को दो टूक: खुद का रिकॉर्ड खराब, भारत के आंतरिक मामलों में बोलने का नहीं है अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के खराब ट्रैक रिकॉर्ड वाले देश को दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। यह बयान कट्टरता से प्रेरित एक सुनियोजित राजनीतिक हमला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indian-foreign-ministry-bluntly-spoils-its-own-record-on-pakistan/article-157631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/india2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार देते हुए कहा है कि जिस देश का खुद का मानव अधिकार का रिकॉर्ड खराब है उसे दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को लेकर की गयी पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी पर शनिवार देर रात सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया।</p>
<p>जायसवाल ने कहा , “भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गयी अनावश्यक टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है। किसी भी स्थिति में भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।“ उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियाँ विशेष रूप से हास्यास्पद हैं, क्योंकि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड अत्यंत खराब रहा है, जो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय है। विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस वास्तविकता को देखते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणियों को केवल एक सुनियोजित राजनीतिक हमले के रूप में ही देखा जा सकता है, जो पाकिस्तान की कट्टरता और घृणा पर आधारित राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 14:23:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने होर्मुज फिर बंद किया; चेतावनी भी दी हमले जारी रहे तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका द्वारा समझौते के उल्लंघन और इजरायली हमलों के विरोध में होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की घोषणा की। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस दावे को खारिज किया है। लेबनान में नए हमलों से शांति समझौते पर संकट गहरा गया है, जिसे सुलझाने के लिए अमेरिकी दूत स्विट्जरलैंड रवाना हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-closed-hormuz-again-and-warned-that-if-the-attacks/article-157620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगंटन। लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की घोषणा की है। ईरान की संयुक्त मिलिट्री कमांड ने इसके पीछे युद्ध खत्म करने वाले समझौते का अमेरिका द्वारा उल्लंघन, दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटाने और इजरायल की ओर से लगातार युद्धविराम का उल्लंघन करने का कारण बताया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उल्लंघन जारी रहा, तो और भी कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p><strong>उधर अमेरिका का दावा, होर्मुज बंद नहीं हुआ: वेंस</strong></p>
<p>दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि तेहरान के साथ वॉशिंगटन के 14-सूत्रीय समझौते में तय किया गया संघर्ष विराम बना रहेगा। अमेरिका को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि होर्मुज समुद्री यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।</p>
<p><strong>हमने वादों का पालन किया: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि हमने अपने वादों का पालन किया है और अमेरिका की यह जिम्मेदारी है कि वह इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने के लिए मजबूर करे।</p>
<p><strong>इजरायल ने फिर किए हमले</strong></p>
<p>उधर, अमेरिका और ईरान के समझौते की खबरों के कुछ ही घंटों बाद शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गईए जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>डील पर मंडराया खतरा</strong></p>
<p>अब ईरानी सेना द्वारा दोबारा होर्मुज स्ट्रेट पर प्रतिबंध लगाने से समझौते पर संकट गहरा गया है। इस बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को ईरान पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि मोहसिन नकवी ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत पर नजर रखेंगे। </p>
<p><strong>ईरान से वार्ता के लिए अमेरिकी दूत विटकॉफ रवाना</strong></p>
<p>अमेरिका-ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता बहाल करने के उद्देश्य से अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरानी अधिकारियों से बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। दक्षिणी लेबनान में हालांकि नए इजरायली हमलों ने उस नाजुक संघर्ष विराम के लिए खतरा पैदा कर दिया है, जिसे व्यापक कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान समझौता: 60 दिनों में अंतिम डील पर सहमति, पीएम शरीफ ने बतौर मध्यस्थ 'इस्लामाबाद एमओयू' पर किए दस्तख़त</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन की सहमति वाले इस समझौते के तहत दोनों देश दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर राजी हुए हैं। इसके तहत ईरान को $300 बिलियन का पुनर्निर्माण कोष मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agreement-final-deal-agreed-in-60-days-pm-sharif/article-157379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बतौर मध्यस्थ ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए। पाकिस्तानी मीडिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान की तरफ से मध्यस्थता के अंतिम समर्थन दस्तावेज पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के दस्तखत पहले से ही मौजूद थे। बयान के मुताबिक शांति समझौते को तय समय से पहले पूरा हुआ बताया गया, जिसमें दोनों पक्ष दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर राजी हुए। इसमें आगे दावा किया गया कि समझौता पहले ही लागू हो चुका था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में पैलेस ऑफ वर्सेल्स में अमेरिका-ईरान समझौता की एक कॉपी पर दस्तखत करके अपनी जी-7 यात्रा पूरी की।</p>
<p>एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इसके बाद अमेरिका ने दस्तखत किए गए समझौते की एक फोटो ईरानियों को भेजी। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दस्तावेज पर दस्तखत किए। यह समझौता अमेरिका और ईरान को 60 दिनों के अंदर एक अंतिम समझौता करने का वायदा करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिका छूट देगा ताकि ईरान तेल निर्यात कर सके और इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रावधान बताए गए हैं। यह अमेरिका और क्षेत्रीय साझेदारों को ईरान के लिए 300 बिलियन डॉलर का पुनर्निर्माण कोष बनाने का भी वायदा करता है। अधिकारियों ने समझौते को दुश्मनी खत्म करने और क्षेत्रीय स्थिरता वापस लाने के मकसद से एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया।</p>
<p>बयान में कहा गया कि समझौता में खास समुद्री रास्तों को फिर से खोलने के प्रावधान शामिल हैं और इसमें बड़े आर्थिक पुनर्निर्माण और प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबद्धता की रूपरेखा है। विवरण हालांकि अभी साफ नहीं हैं और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कहा गया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत 60 दिनों के लिए जारी रहेगी, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:32:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का बड़ा ऐलान: यूरेनियम रहेगा देश में, अमेरिका से समझौते के बीच बधाई बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी सांद्रता कम (डाउन-ब्लेंडिंग) करेगा। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत, वाशिंगटन 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटाने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-announcement-uranium-will-remain-in-the-country-amidst/article-157369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/024.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपनी इस बात पर कायम है कि देश से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाया जाएगा। बघाई ने कहा, "हमने शुरू से ही कहा है कि संवर्धित सामग्री देश से बाहर नहीं ले जाई जाएगी। एक विकल्प ईरान के भीतर ही इसकी सांद्रता कम करना (डाउन-ब्लेंडिंग) है। यह कोई नया विकल्प नहीं है।" उनका यह बयान संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा के बाद दिया। उम्मीद है कि इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटा लेगा और तब तक अतिरिक्त बल तैनात नहीं करेगा। समझौते के चौथे पैराग्राफ में लिखा है, "अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से सैनिक हटाने का भी वादा करता है।" साथ ही, दस्तावेज़ के नौवें पैराग्राफ के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल नहीं भेजेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:14:25 +0530</pubDate>
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                <title>जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी : AI के लिए प्रस्तुत किया 'मानव' विजन, सुरक्षा और समावेशिता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन में एआई के लिए भारत का 'मानव' विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास सुरक्षा, गति और जनहित पर आधारित होना चाहिए। पीएम ने डीपफेक और साइबर खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और 'ग्लोबल साउथ' तक तकनीक पहुंचाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/development-of-artificial-intelligence-should-be-based-on-the-basic/article-157305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के सामने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में भारत के 'मानव' विजन का उल्लेख करते हुए कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। जी-7 देशों के 52 वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस यात्रा पर गये पीएम मोदी ने बुधवार रात फ्रांस के एवियन में "इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के 'मानव' विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है और लोकतांत्रिक देशों की ऐसी एआई मॉडल तक पहुंच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए।</p>
<p>इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को 'सेफ-बाय-डिजाइन' (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए। एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए। डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ 'ग्लोबल साउथ' के देशों तक पहुँचना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:08:33 +0530</pubDate>
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