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                <title>Diplomacy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Diplomacy RSS Feed</description>
                
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                <title>'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-hosting-peace-talks-change-in-indian-diplomacy-necessary-congress/article-151104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:13:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पाकिस्तानी पीएम शरीफ ने की पेजेश्कियान से फोन पर बात : शांति प्रयासों को जारी रखने का लिया संकल्प, क्षेत्रीय हालातों पर हुई पर विस्तृत चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने फोन पर पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर चर्चा की। शरीफ ने वार्ता और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति बनाने का संकल्प जताया। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 22 अप्रैल को युद्धविराम समाप्त होने से पहले नई वार्ता की घोषणा के बीच, पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-pm-sharif-spoke-to-pejeshkian-over-phone-resolved-to/article-151083"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan-pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बातचीत में पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने का संकल्प जताया है। पीएम शरीफ और पेजेश्कियान के बीच रविवार को करीब 45 मिनट चली बातचीत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ वार्ता में ईरानी नेतृत्व की रचनात्मक भूमिका की सराहना की।</p>
<p>पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत चर्चा की। शरीफ ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद भेजा था।श्री शरीफ ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ अपनी हालिया बैठकों की जानकारी देते हुए कहा कि इन संपर्कों से संवाद और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति के लिए सहमति बनाने में मदद मिली है।</p>
<p>पेजेश्कियान ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया। इससे पहले, अराघची और पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने भी फोन पर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने आठ अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की थी, जब अमेरिका ने ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार किया था।इस्लामाबाद में 11 अप्रैल को लगभग 21 घंटे चली, अमेरिका-ईरान वार्ता हालांकि किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी थी, जिसमें ईरान ने अमेरिकी ‘अत्यधिक मांगों’ और बदलते रुख को जिम्मेदार ठहराया। ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में श्री शरीफ ने शांति प्रयास जारी रखने का भरोसा जताया।</p>
<p>इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले दो सप्ताह के युद्धविराम से पहले नये दौर की वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की है। उन्होंने समझौता न होने पर हमलों की चेतावनी भी दी है। ईरान ने अभी तक दूसरे दौर की वार्ता में भागीदारी की पुष्टि नहीं की है। सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी और लगातार धमकियों ने वार्ता की प्रगति को प्रभावित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:02:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टिबोर गास्पर का दावा : रूस से ऊर्जा आपूर्ति बंद होने से यूरोप छोड़ रहे हैं उद्योग; रूसी तेल की वापसी पीछे जाने का कदम नहीं, ऊर्जा नीति की दिशा में अहम कदम होगा</title>
                                    <description><![CDATA[स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने चेतावनी दी है कि सस्ती रूसी ऊर्जा के बिना यूरोपीय उद्योग ईयू से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिरता के लिए रूसी ऊर्जा की वापसी को 'यथार्थवादी नीति' बताया। गास्पर के अनुसार, केवल अमेरिकी एलएनजी पर निर्भरता के बजाय रूस को एक विकल्प के रूप में रखना अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tibor-gaspar-claims-that-industries-are-leaving-europe-due-to/article-151035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tibor.png" alt=""></a><br /><p>ब्रातिस्लावा। स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने कहा है कि पूर्व से मिलने वाली स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर आधारित यूरोपीय उद्योग अब उसके अभाव में यूरोपीय संघ से बाहर स्थानांतरित हो रहे हैं। टिबोर गास्पर ने कहा कि रूस के ऊर्जा संसाधन लंबे समय तक अन्य विकल्पों की तुलना में सस्ते रहे हैं और उनकी वापसी से उद्योग, महंगाई और आम उपभोक्ताओं पर दबाव कम होगा। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जर्मनी और मध्य यूरोप का औद्योगिक ढांचा पूर्व से मिलने वाली ऊर्जा पर टिका रहा है। उन्होंने कहा कि सस्ती ऊर्जा के बिना कोई भी अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी नहीं रह सकती और इसी कारण उत्पादन अब यूरोपीय संघ से बाहर जा रहा है।</p>
<p>टिबोर गास्पर के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति का विविधीकरण किसी एक आपूर्तिकर्ता को स्थायी रूप से बाहर करना नहीं है, बल्कि विकल्पों को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि रूस एक विकल्प हो सकता है, न कि एकमात्र, लेकिन उसे पूरी तरह प्रतिबंधित करना भी उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल एलएनजी, विशेषकर अमेरिका से, पर निर्भरता के बजाय अधिक आपूर्तिकर्ता होने से बेहतर कीमतें और अधिक स्वतंत्रता मिलती है।</p>
<p>टिबोर गास्पर ने कहा कि रूसी तेल की वापसी ‘पीछे जाने का कदम नहीं, बल्कि यथार्थवादी ऊर्जा नीति की दिशा में कदम’ होगा और विचारधारा को आर्थिक स्थिरता व नागरिकों के जीवन स्तर पर हावी नहीं होना चाहिए। इस बीच, यूरोपीय संघ परिषद ने पहले ही एक जनवरी 2027 से रूसी एलएनजी आयात और 30 सितंबर 2027 से रूसी पाइपलाइन गैस पर प्रतिबंध को अंतिम मंजूरी दे दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की अपील को किया खारिज, होर्मुज़ जलड़मरूमध्य से ज़हाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए पाखंड बताया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर यूरोपीय संघ की 'टोल-फ्री' आवागमन की मांग को "पाखंड" बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ईरान को सैन्य आक्रामकता रोकने से नहीं रोकता। अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में आईआरजीसी ने शनिवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-ministry-rejects-eus-appeal-to-comply-with-international/article-150997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए यूरोपीय संघ की अपील को खारिज करते हुए इसे "चरम पाखंड" बताया। बगाई यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के 17 अप्रैल के पोस्ट पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के लिए बिना शुल्क और टोल मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। कल्लास ने अपने पोस्ट में कहा था कि "अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार," होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन बिना शुल्क और टोल मुक्त होना चाहिए।</p>
<p>बगाई ने कल्लास की पोस्ट के जवाब में ‘एक्स’ पर कहा, “अरे, वो ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’?! वही कानून जिसका हवाला देकर यूरोपीय संघ दूसरों को उपदेश देता है, जबकि चुपचाप अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्ध को हरी झंडी देता है और ईरानियों पर हो रहे अत्याचारों को अनदेखा करता है?! उपदेश देना बंद करो; यूरोप की अपने उपदेशों पर अमल न करने की आदत ने उसके ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’ के वादों को पाखंड की पराकाष्ठा में बदल दिया है।” राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई भी प्रावधान ईरान को, एक तटीय राज्य होने के नाते, “होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रमण के लिए होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने” से नहीं रोकता है।</p>
<p>ईरानी आईआरजीसी नौसेना ने घोषणा की कि उसने शनिवार शाम से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, और यह तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह से हटा नहीं ली जाती। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है।</p>
<p>वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:34:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बातचीत के बावजूद ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार : संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के साथ शांति वार्ता के बावजूद, ईरान ने अपने सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आदेश दिया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद ग़ालिबफ़ ने 'दुश्मन' पर अविश्वास जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत प्रस्तावित है, लेकिन बंदरगाहों की नाकाबंदी से संघर्ष का खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-talks-iranian-armed-forces-are-fully-prepared-for-war/article-150996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/मोहम्मद-बगेर-ग़ालिबफ़.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत के बावजूद, ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं। प्रेस टीवी ने ग़ालिबफ़ के हवाले से कहा, "हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है। अभी भी, जब हम यहां बैठे हैं, युद्ध छिड़ सकता है। सशस्त्र बल ज़मीन पर पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।"</p>
<p>प्रसारक के अनुसार, संसद अध्यक्ष ने इस बात से इनकार किया कि जारी बातचीत से राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही हो सकती है।  ग़ालिबफ़ ने कहा, "हमारा मानना है कि बातचीत के कारण सशस्त्र बल तैयार नहीं हैं। इसके विपरीत, सड़कों पर आम लोगों की तरह, हमारे सशस्त्र बल भी तैयार हैं।"</p>
<p>इससे पहले, पाकिस्तानी प्रसारक जियो टीवी ने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में अगले सप्ताह के अंत में होने की संभावना है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता फिर से शुरू करने की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। मध्यस्थ बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 15:39:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस का तुर्की से आग्रह : यूक्रेन से गैस पाइपलाइनों पर हमला नहीं करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने तुर्की से 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' पाइपलाइनों पर यूक्रेनी हमलों को रोकने की गारंटी मांगी है। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने इन ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। मॉस्को ने अंकारा से आग्रह किया है कि वह यूक्रेन को सख्त चेतावनी दे ताकि क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-urges-turkey-not-to-attack-ukraines-gas-pipelines/article-150995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को । रूस ने तुर्की से बार-बार यह अपील की है कि वह यूक्रेन से इस बात की गारंटी ले कि 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' गैस पाइपलाइन बुनियादी ढांचे पर कोई हमला नहीं किया जाएगा। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, "काला सागर के नीचे तुर्की को गैस आपूर्ति करने वाली पाइपलाइनों पर यूक्रेन द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों को देखते हुए, हमने अपने तुर्की भागीदारों से बार-बार आग्रह किया है। हमने उनसे कहा है कि वे यूक्रेनी पक्ष को स्पष्ट और कड़े संकेत भेजें और मांग करें कि वे इस तरह के आक्रामक कृत्यों को तुरंत रोकें तथा भविष्य में भी ऐसा न होने की गारंटी दें।"</p>
<p>इससे पहले, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी स्पष्ट किया था कि रूस इन गैस पाइपलाइनों पर बढ़ते खतरे को लेकर तुर्की के साथ लगातार अपनी चिंताएं साझा कर रहा है। वहीं, तुर्की सरकार के सूत्रों के अनुसार, तुर्की इन पाइपलाइनों पर होने वाले हमलों और खतरों की खबरों पर बारीकी से नजर रख रहा है और इस मामले में रूस के साथ निरंतर समन्वय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 13:33:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इजरायल-लेबनान युद्धविराम का किया समर्थन, इजरायल को लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए युद्ध रोकना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिवसीय युद्धविराम का समर्थन करते हुए नागरिक सुरक्षा की अपील की है। उन्होंने हिजबुल्लाह से हथियार छोड़ने और इजरायल से संप्रभुता का सम्मान करने को कहा। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे शांति का अवसर बताया, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिकी मध्यस्थता की सराहना की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/french-president-emmanuel-macron-supports-israel-lebanon-ceasefire-israel-must-stop/article-150840"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/macro1.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इजरायल और लेबनान के बीच दस दिनों के युद्धविराम का 'पूर्ण समर्थन' किया है। मैक्रों ने हालांकि इस समझौते को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैं इस बात को लेकर चिंतित हूँ कि सैन्य अभियानों के जारी रहने से यह युद्धविराम कमजोर पड़ सकता है। मैं सीमा के दोनों ओर नागरिक आबादी की सुरक्षा की अपील करता हूँ। हिजबुल्लाह को अपने हथियारों का त्याग करना चाहिए और इजरायल को लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए युद्ध रोकना चाहिए।"</p>
<p>इजरायल और लेबनान दोनों ने इस युद्धविराम का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे 'ऐतिहासिक शांति समझौता करने का अवसर' बताया है। यह समझौता फिलहाल दस दिनों के लिए है, जिसे बातचीत में प्रगति होने पर आगे बढ़ाया जा सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी मुख्य प्रावधानों के अनुसार, इजरायल के पास किसी भी संभावित हमले के खिलाफ 'आत्मरक्षा में सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार' सुरक्षित रहेगा। वहीं, लेबनान को हिजबुल्लाह और अन्य सशस्त्र समूहों द्वारा हमलों को रोकना होगा। साथ ही देश की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल लेबनानी सुरक्षा बलों की होगी।</p>
<p>दोनों पक्षों ने बाकी मुद्दों को सुलझाने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है। इजरायल ने इस युद्धविराम को स्थायी शांति की दिशा में एक 'सद्भावना संकेत' बताया है। हिजबुल्लाह ने भी इसमें शामिल होने के संकेत दिए हैं, लेकिन उसने हमलों को पूरी तरह रोकने और इजरायली सैनिकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस संघर्षविराम का स्वागत करते हुए अमेरिका की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे विवाद का दीर्घकालिक समाधान निकलेगा और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आग्रह किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:29:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सर्गेई लावरोव ने की कूटनीतिक रवैये की आलोचना, बोले- वादाखिलाफी की आदत छोड़ बातचीत को प्राथमिकता दे अमेरिका, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता दे। रूस ने आरोप लगाया कि अमेरिका समझौतों से पीछे हटकर सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका वार्ता जारी है, जबकि रूस ने ईरान की सैन्य शक्ति का समर्थन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sergei-lavrov-criticized-the-diplomatic-attitude-said-give-up/article-150753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sergei-lavrov.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका के कूटनीतिक रवैये की आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन को विरोधी सरकारों के साथ टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए। लावरोव ने कहा कि जब भी अमेरिका को कोई सरकार पसंद न आए तो उसे 'बातचीत के ज़रिए' शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देश अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार रहते हैं और अब तक किसी देश ने अमेरिका के साथ बैठकर बात करने से इनकार नहीं किया है।</p>
<p>सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने कई बार वादों से पांव वापस खींचे हैं। उन्होंने कहा, "वह अमेरिका ही था जिसने पहले समझौते किए और फिर उनसे पलट गया।" लावरोव की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। रूस की सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इजरायल वर्तमान बातचीत के प्रयासों के पीछे ईरान में सेना उतारने की तैयारी कर रहे हो सकते हैं।</p>
<p>रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, परिषद ने पाया है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति में इजाफा हुआ है। रूस ने ईरान की रक्षा क्षमताओं पर भी ज़ोर दिया और कहा कि ईरान के पास इतनी सैन्य ताक़त है कि वह अमेरिका या इज़रायल की किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब दे सके। इन चेतावनियों के बावजूद, कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष बातचीत अभी भी चल रही है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के संदेश पहुंचाने और आगे की बातचीत को आसान बनाने के लिए ईरान में है। उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बातचीत की। यह बातचीत इस्लामाबाद में हुए पिछले दौर के बाद रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशों का हिस्सा थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:17:43 +0530</pubDate>
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                <title>इज़रायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू : ट्रंप का दावा-सैन्य अभियानों को रोकने पर दोनों देश सहमत, जानें सीजफ़ायर पर कितने दिनों की बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान 10 दिनों के संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं। इसका उद्देश्य स्थायी शांति वार्ता के लिए मार्ग प्रशस्त करना है। हालांकि, आईडीएफ ने पिछले 24 घंटों में 380 हमले किए हैं। ट्रंप ने इसे एक शानदार मौका बताते हुए दोनों नेताओं को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ceasefire-between-israel-and-lebanon-is-in-force-trumps-claim/article-150769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-17,-2026,-12_18_30-pm.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल और लेबनान 10 दिनों के लिए संघर्षविराम पर सहमत हो गए हैं, जो पूर्वी समय अनुसार 16 अप्रैल शाम पांच बजे (भारतीय समयानुसार 17 अप्रैल तड़के 3.30 बजे) से प्रभावी हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा, "लेबनान के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन हो सकता है। अच्छी चीजें हो रही हैं।" डोनाल्ट ट्रंप ने फिर से दावा किया कि उन्होंने दुनिया भर में नौ युद्धों को सुलझाया है और यह दसवां होगा। उन्होंने कहा, "तो चलिए इसे पूरा करते हैं।"</p>
<p>इस अस्थायी युद्धविराम का उद्देश्य स्थायी शांति समझौते की दिशा में बातचीत के लिए अवसर प्रदान करना है। यह समझौता ट्रंप द्वारा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन के साथ चर्चा के बाद कराया गया था। समझौते के अनुसार, इजरायल और लेबनान आक्रामक सैन्य अभियानों को रोकने पर सहमत हुए हैं। लेबनान ने हिजबुल्लाह को हमले करने से रोकने के लिए सार्थक कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है। इस अवधि के दौरान इजरायली बल दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर के 'सुरक्षा क्षेत्र' में बने रहेंगे।</p>
<p>भले ही युद्धविराम आधिकारिक तौर पर प्रभावी है लेकिन लेबनानी सेना ने आज सुबह दक्षिणी गांवों में इजरायल द्वारा कई हमलों की सूचना दी। इस बीच, इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने दावा किया कि उन्होंने पिछले 24 घंटों के दौरान लेबनान में हिजबुल्लाह के 380 से अधिक ठिकानों पर हमला किया। हिजबुल्लाह ने कहा कि वे तभी तक संघर्षविराम का 'पालन' करेंगे जब तक इजरायली हमले बंद रहेंगे।<br />यह संघर्षविराम एक व्यापक क्षेत्रीय राजनयिक प्रयास का हिस्सा है जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच अलग से चल रहा दो सप्ताह का युद्धविराम भी शामिल है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि हिजबुल्लाह इस महत्वपूर्ण समय के दौरान 'शालीनता और अच्छे से' व्यवहार करेगा। उन्होंने कहा, "अगर वे ऐसा करते हैं तो यह उनके लिए एक शानदार पल होगा। अब और हत्याएं नहीं। अंततः शांति होनी चाहिए!" अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बीबी नेतन्याहू के साथ 'बेहतरीन बातचीत' हुई। उन्होंने कहा कि मंगलवार को दोनों देशों के नेताओं ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ वाशिंगटन में 34 वर्षों में पहली बार मुलाकात की।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्री रुबियो को ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन रातिन केन के साथ मिलकर इजरायल और लेबनान के साथ स्थायी शांति प्राप्त करने के लिए काम करने का निर्देश दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इजरायली प्रधानमंत्री और लेबनान के राष्ट्रपति को व्हाइट हाउस में 1983 के बाद पहली 'सार्थक बातचीत' के लिए आमंत्रित करेंगे। उन्होंने कहा, "दोनों पक्ष शांति चाहते हैं और मेरा मानना है कि यह जल्द ही होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:17:29 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज़ जलड़मरूमध्य को खोलना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत मांग : चीनी विदेश मंत्री ने दिया ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और अधिकारों पर ज़ोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने का आग्रह किया है। अमेरिकी नाकेबंदी और ऊर्जा संकट के बीच चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय मांग बताया। तेहरान इस जलमार्ग को 'विशेष संपत्ति' मान रहा है, जबकि तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/opening-of-the-strait-of-hormuz-is-unanimous-demand-of/article-150713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत मांग है। वांग ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि एक ओर जहां ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और एक तटीय राज्य के रूप में उसके वैध अधिकारों के सम्मान की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर इस जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा की गारंटी भी दी जानी चाहिए वांग ने कहा, "इस जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन फिर से बहाल करने के प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से एक सर्वसम्मत आह्वान का प्रतिनिधित्व करते हैं।"</p>
<p>वांग ने कहा कि वर्तमान स्थिति युद्ध और शांति के बीच एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक समाधान के लिए अवसर का एक दरवाजा भी खुल रहा है। ईरानी सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक 'विशेष व्यवस्था' परिभाषित करने का आह्वान करते हुए यह तर्क दिया कि यह जलमार्ग तेहरान के लिए एक 'विशेष संपत्ति' है। गौरतलब है कि यह जानकारी राज्य समाचार एजेंसी आईआरएनए ने दी।</p>
<p>सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने रूस की आरआईए नोवोस्ती को बताया, "उन सभी संपत्तियों की तरह जो अन्य देशों के साथ बातचीत के प्रकार और उसके नियमन के लिए एक साधन के रूप में काम करती हैं, उसी तरह से इस जलमार्ग के लिए भी एक विशेष व्यवस्था परिभाषित की जानी चाहिए।" गौरतलब है कि इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद वाशिंगटन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगाए जाने के कारण होर्मुज के रास्ते होने वाला नौवहन बाधित है।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्यतः वैश्विक समुद्री तेल प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा संभालता है लेकिन 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध से उत्पन्न नवीनतम ऊर्जा संकट के केंद्र में वह बना हुआ है। तेहरान ने इसके जवाबी कार्रवाई में इजरायल और उन अन्य क्षेत्रीय देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने या संपत्तियां मौजूद हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने जैसा कि कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरान से और ईरान को होने वाले समुद्री व्यापार को पूरी तरह से रोक दिया है। नाकेबंदी के पहले 48 घंटों के दौरान इस क्षेत्र से कोई भी जहाज नहीं गुजरा है।</p>
<p>कमांड ने बताया कि 10 जहाजों ने ईरानी बंदरगाहों या तटीय जलक्षेत्रों की ओर वापस लौटने के आदेशों का पालन किया है। यह नाकेबंदी ईरान के तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने वाले सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होती है, जबकि ईरानी बंदरगाहों से दूर रहने वाले जहाजों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। यह उम्मीद की जा रही है कि इस नाकेबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव पड़ेगा। इस बीच इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर तेहरान द्वारा पहले से लगाई गई पाबंदियों के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:39:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हिज़बुल्ला युद्धविराम पर सहमत : इज़रायल को उल्लंघन के खिलाफ दी चेतावनी, युद्धविराम के लिए रखी शर्ते</title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान के सैन्य संगठन हिज्बुल्लाह ने इजरायल के साथ युद्धविराम पर सहमति जताई है। हिज्बुल्लाह नेता महमूद कोमाती ने स्पष्ट किया कि संगठन तभी पालन करेगा जब इजरायल भी अपनी शर्तों पर टिका रहे। उन्होंने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए 'इजरायली विश्वासघात' के प्रति आगाह किया और फिलहाल दक्षिणी लेबनान में यात्रा न करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hezbollah-agrees-to-ceasefire-warns-israel-against-violating-conditions-laid/article-150647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। लेबनान स्थित प्रमुश शिया मुस्लिम राजनीतिक अर्ध सैन्य संगठन हिजबुल्लाह ने युद्धविराम के लिए सहमति व्यक्त की है लेकिन शर्त रखी है कि इजरायल भी इसका पालन करेगा। हिजबुल्लाह की राजनीतिक परिषद के उप प्रमुख महमूद कोमाती ने यह जानकारी दी है हिजबुल्लाह ने इस शर्त पर इजरायल के साथ युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है कि दोनों पक्ष इसका पालन करेंगे। उप प्रमुख महमूद कोमाती ने कहा, "हम युद्धविराम पर सहमत हुए, लेकिन हम 2024 के समझौते के अनुभव को दोहराने की अनुमति नहीं देंगे, जहां हमने इसका पालन किया जबकि इजरायली पक्ष अपने दायित्वों से मुकर गया।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि हम इजरायली विश्वासघात को लेकर सतर्क हैं और उन्होंने इस समय दक्षिणी लेबनान की यात्रा न करने की सलाह दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:26:11 +0530</pubDate>
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                <title>ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में भी व्यापार की इजाजत नहीं, अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो हम लाल सागर में रास्ते रोक देंगे: ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटी, तो वह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। इससे दुनिया का 30% तेल पारगमन रुक सकता है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक सफलता का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trade-is-not-allowed-even-in-the-gulf-of-oman/article-150598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trujp.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ‘खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय’ के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीआबादी ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखता है और ईरान के वाणिज्यिक जहाजों एवं तेल टैंकरों के लिए असुरक्षा पैदा करता है, तो ईरान लाल सागर के महत्वपूर्ण ‘बाब-अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देगा। ईरानी सरकारी मीडिया में जारी संदेश में अलीआबादी ने स्पष्ट किया कि ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में किसी भी प्रकार के आयात या निर्यात को जारी रखने की अनुमति नहीं देंगी। </p>
<p><strong>ईरान का बाब-अल-मंडेब पर काफी प्रभाव </strong></p>
<p>ईरान का बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर काफी प्रभाव है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों का लाल सागर की सीमा से लगे एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी एशिया से निर्यात होने वाले प्राकृतिक गैस और तेल उत्पादों के लिए एक अनिवार्य मार्ग है, जो कुल वैश्विक ऊर्जा पारगमन का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालता है। </p>
<p><strong>...तो दुनिया में और बिगड़ सकते हैं हालात </strong></p>
<p>सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब-अल-मंडेब को भी बाधित करने में सफल होता है, तो इससे दुनिया के कुल तेल पारगमन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रुक जाएगा। यह कदम पहले से ही अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>ईरान को झुकाने की कोशिश नाकाम होगी : पेजेशकियान</strong></p>
<p>इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने घोषणा की है कि ईरान को ‘आत्मसमर्पण’ के लिए मजबूर करने की अमेरिका या इजरायल की किसी भी कोशिश का ‘विफल होना तय’ है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग किसी हाल में इसे स्वीकार नहीं करेंगे। ईरान ने कभी युद्ध या अस्थिरता नहीं चाही है। वह अन्य देशों के साथ निरंतर संवाद और रचनात्मक जुड़ाव का पक्षधर रहा है। अमेरिका का नाम लिये बिना राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यवहार में ‘दोहरे मानदंडों’ की आलोचना की और संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा की। </p>
<p><strong>ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब: ट्रंप </strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष ‘समाप्त होने के करीब’ है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से प हो गई है। इज़रायल-लेबनान वार्ता के बाद हिज्बुल्लाह पर सहमति के संकेत</p>
<p>इजरायल और लेबनान के बीच हुई प्रत्यक्ष वार्ता के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हिज्बुल्लाह के मुद्दे पर समान सोच उभरने के संकेत दिए हैं और दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के समाधान की इच्छा जताई है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचियल लेइटर ने कहा कि वार्ता में हिज्बुल्लाह के प्रभाव को समाप्त करने को लेकर रुख में समानता देखने को मिली। लेबनान सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह हिज्बुल्लाह के प्रभुत्व से बाहर निकलना चाहती है। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:08:11 +0530</pubDate>
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