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                <title>Diplomacy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Diplomacy RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष: अमेरिका का रूस के साथ संबंध बनाए रखना जरूरी, बोले- मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ राजनयिक संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई द्विपक्षीय मुद्दों का यूक्रेन से संबंध नहीं है। रुबियो ने ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता में वापसी की इच्छा जताते हुए कहा कि अमेरिका पूरी तरह यूक्रेन के पक्ष में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-ukraine-conflict-america-needs-to-maintain-relations-with-russia-says/article-155969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/macro.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन में जारी संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। रुबियो ने संसद की विदेश मामलों की समिति की सुनवाई में कहा, “कम से कम, हमें रूसियों के साथ संबंध और बातचीत जारी रखनी ही होगी। हमारे द्विपक्षीय संबंधों में ऐसे मुद्दे हैं, जिनका यूक्रेन से कोई लेना-देना नहीं है।” अमेरिकी विदेश मंत्री ने विश्वास जताया कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान होने के बाद अमेरिका-रूस संबंध अधिक दोस्ताना और संभालने में आसान हो जाएंगे। उन्होंने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष पर मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।</p>
<p>मार्को रुबियो से जब पूछा गया कि क्या मध्यस्थता में ट्रंप प्रशासन फिर से शामिल होने के लिए तैयार है, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के अब तक के प्रयास ‘कम फलदायी’ रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन में संघर्ष को सुलझाने की बातचीत में अमेरिका ‘साफ तौर पर’ यूक्रेन के पक्ष में है।</p>
<p>उन्होंने समिति से कहा, “हम उस युद्ध में निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हैं। हम रूस को हथियार नहीं देते, हम केवल यूक्रेन को हथियार देते हैं। हम यूक्रेन पर प्रतिबंध नहीं लगाते, हम केवल रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं, इसलिए हमने स्पष्ट रूप से एक पक्ष लिया है।” मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को आवश्यकता सूची (पर्ल) कार्यक्रम के माध्यम से हथियार बेचना जारी रखे हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>युद्वविराम का उल्लघंन : लेबनान में झड़पें जारी, इजरायल और हिजबुल्ला के शांति समझौते पर खड़े हुए गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका की आंशिक युद्धविराम योजना को दोनों पक्षों द्वारा स्वीकारने के बाद भी लेबनान में जमीनी संघर्ष जारी है। दक्षिणी लेबनान और सीमावर्ती क्षेत्रों में इजरायली सेना और हिज्बुल्ला लड़ाके आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जिससे शांति प्रयासों को झटका लगा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/violation-of-ceasefire-clashes-continue-in-lebanon-serious-questions-raised/article-155733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/lebnan.png" alt=""></a><br /><p>बेरूत। अमेरिका की तैयार की गयी आंशिक युद्धविराम योजना को इजरायल और हिजबुल्ला दोनों पक्षों की ओर से स्वीकार किये जाने के बाद भी लेबनान में जमीनी स्तर पर संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। समझौते की घोषणा के बावजूद आज भी अलग-अलग इलाकों में दोनों पक्षों के बीच भीषण झड़पें जारी रहीं। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट है कि दक्षिणी लेबनान और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां लगातार देखी जा रही हैं। इजरायली सेना और हिजबुल्ला के लड़ाके कई मोर्चों पर आमने-सामने हैं। इस कारण इस शांति समझौते के टिके रहने पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।</p>
<p>इस आंशिक युद्धविराम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी मानवीय संकट को कम करना और पूर्ण शांति के लिए रास्ता तैयार करना था। हालांकि जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है, जहां दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। राजनयिक हलकों में चिंता जताई जा रही है कि यदि इन झड़पों को तुरंत नहीं रोका गया तो स्थिति एक बार फिर पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:36:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाली प्रतिनिधिमंडल ने की भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात: नवीन ने किया लामिछाने का गर्मजोशी से स्वागत, शासन मॉडल और जनसम्पर्क जैसे मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल की सत्तारूढ़ आरएसपी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने भाजपा मुख्यालय में नितिन नवीन से मुलाकात की। पांच दिवसीय भारत यात्रा पर आए लामिछाने दोनों दलों के बीच संगठनात्मक कार्यप्रणाली और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं। वे पीएम मोदी और विदेश मंत्री से भी मुलाकात कर सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nepalese-delegation-met-bjp-president-naveen-warmly-welcomed-lamichhane-issues/article-155754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nepal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने मंगलवार को यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। यहां के दीनदयाल मार्ग पर स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचने पर श्री नवीन ने श्री लामिछाने का गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया। उनके सम्मान में वहां नृत्य और वाद्य संगीत आयोजित किया गया था। आरएसपी के नेता श्री लामीछाने के सम्मन में राजधानी में रह रहे नेपाली समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।</p>
<p>लामिछाने पांच दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं। उनके साथ नेपाली संसद के कई अन्य नेता और प्रतिनिधि भी मौजूद हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भाजपा और आरएसपी के बीच संवाद स्थापित करना, संगठनात्मक कार्यप्रणाली और जन-केंद्रित राजनीतिक पहुंच पर विचारों का आदान-प्रदान करना है। इसके साथ ही नेपाली प्रतिनिधिमंडल लोकतांत्रिक व्यवस्था, शासन मॉडल और जनसम्पर्क जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करेगा।</p>
<p>लामीछाने ने इस मुलाकात में भाजपा अध्यक्ष को कुछ सांस्कृतिक उपहार भेट किये। इन औपचारिकताओं के बाद दोनों पक्षों की बैठक हुई। भाजपा के पदाधिकारियों के अनुसार दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए परस्पर सहयोग बढ़ाने के बारे में बातचीत की। भाजपा ने उम्मीद जतायी है कि इस मुलाकात से दोनों राजनीतिक दलों के बीच सार्थक संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लामिछान के नेतृत्व में आया प्रतिनिधनमंडल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर सकता है। उल्लेखनीय है कि नवीन ने 26 मई को भाजपा को जानिए पहल के तहत 12 देशों के राजनयिक मिशनों के प्रमुखों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात का उदेश्य विदेशी मिशनों के साथ संवाद तंत्र को मजबूत करना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:53:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जयराम रमेश का बड़ा हमला: पश्चिम एशिया संकट और तेल कीमतों पर केंद्र की खामोशी अनुचित, कहा- भारत का बहुत कुछ दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान वार्ता और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर पड़ेगा, इसलिए सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jairam-rameshs-big-attack-centres-silence-on-west-asia-crisis/article-155704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jairamm-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका वार्ता का भारत पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें भारत का बहुत कुछ दाव पर लगा हुआ है और ऐसे में केंद्र सरकार की चुप्पी को उचित नहीं कहा जा सकता है। पार्टी का कहना है कि यदि वार्ता सफल होती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है और वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव कम होगा, जिसका सीधा लाभ भारत को मिलेगा।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए बातचीत चल रही है लेकिन इस बीच इज़रायल की लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के कारण किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर नाराजगी जता चुके हैं और दुनिया के कई अन्य देश भी लेबनान में इज़रायली अभियान की आलोचना कर रहे हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि ऐसे समय में जब इज़रायल की कार्रवाई संभावित अमेरिका-ईरान समझौते को प्रभावित कर सकती है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:31:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अराघची की ट्रंप को चेतावनी, कहा- लेबनान समेत किसी भी मोर्चे पर उल्लंघन माना जाएगा पूरे युद्धविराम का खात्मा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि लेबनान समेत किसी भी मोर्चे पर युद्धविराम का उल्लंघन पूरे समझौते का उल्लंघन होगा। इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में किए गए हालिया हमलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विफलता की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल की होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/araghchis-warning-to-trump-violation-of-ceasefire-on-even-one/article-155725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम का किसी भी एक मोर्चे पर उल्लंघन पूरे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन माना जाएगा, जिसमें लेबनान भी शामिल है। अराघची ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह युद्धविराम "बिना किसी अस्पष्टता के सभी मोर्चों पर लागू एक व्यापक युद्धविराम है, जिसमें लेबनान भी शामिल है।" उन्होंने लिखा, "इस युद्धविराम का किसी एक मोर्चे पर किया गया कोई भी उल्लंघन सभी मोर्चों पर युद्धविराम के उल्लंघन के रूप में माना जाएगा।"</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि युद्धविराम के किसी भी उल्लंघन के परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल पर होगी। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब लेबनान में युद्धविराम लागू होने के बावजूद इजरायल की ओर से हमले जारी हैं। ईरानी समाचार एजेंसी इरना की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल रक्षा बलों ने दक्षिणी लेबनान के कस्बों और गांवों पर हमले जारी रखे हैं, जिनमें घरों और नागरिकों को निशाना बनाया गया। इसे युद्धविराम का बार-बार उल्लंघन बताया गया है। रविवार रात से सोमवार तक दक्षिणी लेबनान में 36 से अधिक स्थानों पर हमले किये गये, जिनमें 12 लोगों की मौत हो गई और 35 अन्य लोग घायल हुये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:13:40 +0530</pubDate>
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                <title>डोनाल्ड ट्रंप का दावा : नेतन्याहू, हिज्बुल्ला से बातचीत के बाद युद्धविराम पर सहमति, सैनिकों को वापस बुलाने के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू और हिज्बुल्ला प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद दोनों पक्ष हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। समझौते के तहत बेरूत में नया सैन्य अभियान नहीं होगा, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम करने में बड़ी सफलता मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-claims-netanyahu-agreed-to-ceasefire-after-talks-with/article-155697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हिज्बुल्ला के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने हमले रोकने पर सहमति जतायी है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जारी बयान में कहा कि उनकी नेतन्याहू के साथ बेहद सकारात्मक और उपयोगी बातचीत हुई, जिसके बाद बेरूत में किसी भी नये सैन्य अभियान के लिए सैनिक नहीं भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो सैनिक वहां जाने की तैयारी में थे, उन्हें भी वापस बुला लिया गया है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि हिज्बुल्ला के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उनकी अच्छी बातचीत हुई और संगठन ने भी गोलीबारी रोकने पर सहमति व्यक्त की है। ट्रंप के अनुसार, समझौते के तहत इजरायल हिज्बुल्ला पर हमला नहीं करेगा और हिज्बुल्ला भी इजरायल के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। उन्होंने इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति बताते हुए उम्मीद जतायी कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:34:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्रेमलिन का यूरोपीय संघ पर तीखा पलटवार: बोले प्रवक्ता पेस्कोव- 'रूस-यूरोप विवाद की असली जड़ यूक्रेन'</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने यूरोप के साथ तनाव के लिए यूक्रेन प्रशासन को मुख्य जिम्मेदार ठहराया है। रोमानिया में ड्रोन हमले के आरोपों को खारिज करते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भटकने वाले हर ड्रोन के लिए रूस को दोषी माना जाता है। क्रेमलिन ने ईयू पर संघर्ष बढ़ाने का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/kremlin-claims-ukraine-is-the-root-of-all-problems-between/article-155604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/putin.png-3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने कहा है कि रूस और यूरोप के बीच सभी समस्याओं की जड़ यूक्रेन है। क्रेमलिन प्रवक्ता डिमित्री पेस्कोव ने रविवार को पत्रकार पावेल ज़रुबिन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "जो भी हो, सभी समस्याओं की जड़ यूक्रेन और यूक्रेनी प्रशासन की हरकतें हैं। इसके अलावा सब कुछ उसका परिणाम है।" उन्होंने यूरोपीय संघ (ईयू) पर यूक्रेन-रूस संघर्ष को जारी रखने के लिए 'हर संभव रेखा लांघने' का आरोप लगाया। उन्होंने यह बयान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयन के उस बयान के जवाब में दिया, जिसमें उन्होंने रोमानिया में ड्रोन घुसपैठ के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि रूसी प्रशासन ने सभी लाल रेखाएं पार कर दी हैं। रोमानियाई रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि गलाती में एक ड्रोन ने एक घर की छत पर हमला किया, जिससे दो लोग घायल हो गये। सेना ने रडार पर ड्रोन को ट्रैक किया, लेकिन उसे रोका नहीं।</p>
<p>रोमानिया ने रूस पर ड्रोन हमले के पीछे होने का आरोप लगाया, लेकिन कोई सबूत पेश नहीं किया। राष्ट्रपति निकुसोर डैन ने कहा कि कॉन्स्टांटा में रूसी महावाणिज्य दूत को 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित कर दिया जाएगा और महावाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया जाएगा। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि ईयू में भटककर आने वाले किसी भी ड्रोन को तुरंत रूस का बता दिया जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह एक यूक्रेनी ड्रोन था जो इलेक्ट्रॉनिक जवाबी उपायों या किसी तकनीकी खराबी के कारण अपने रास्ते से भटक गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:07:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का अमेरिका दौरा: मार्को रूबियो से करेंगे मुलाकात, अमेरिका- ईरान के बीच शांति समझौते पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मिलने अमेरिका रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौता कराना है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के समर्थन से पाकिस्तान खुद को कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में पेश कर क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना चाहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ishaq-dar-visits-america-will-meet-marco-rubio-a-permanent/article-155378"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ishaq-dar-pakistan-foreign-minister.jpg" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार शुक्रवार को अमेरिका के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ बातचीत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच एक स्थायी शांति समझौते के लिए बातचीत को सुविधाजनक बनाना है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह मुलाक़ात पहले गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन बाद में इसका समय बदल दिया गया। मंत्रालय के अनुसार डार और रूबियो "द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।"</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने बताया, "चर्चाओं का मुख्य केंद्र प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करना होगा, साथ ही बातचीत और कूटनीति के ज़रिए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के पाकिस्तान के प्रयासों पर भी ध्यान दिया जाएगा।" मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह दौरा "अमेरिका के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही व्यापक साझेदारी को और गहरा करने के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है," पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क स्थापित करने के प्रयासों में खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है। हाल के हफ़्तों में, वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी अमेरिका और ईरान दोनों जगहों के सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क बनाए हुए हैं।</p>
<p>इससे पहले गुरुवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद, अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर नए हमले किए। बैठक के दौरान, रूबियो ने कहा कि प्रशासन को उम्मीद है कि "अगले कुछ घंटों या दिनों में" कोई प्रगति देखने को मिलेगी, साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर कूटनीति विफल रहती है तो अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पहल को प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का भी सार्वजनिक समर्थन मिला है। उन्होंने ईद के अवसर पर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से बात की और उम्मीद जताई कि जल्द ही एक ऐसा शांति समझौता हो सकता है जो ईरान के "सम्मान और गरिमा" को बनाए रखेगा। शरीफ़ ने कहा कि ऐसा समझौता ईरान की आर्थिक क्षमता को उजागर करने में मदद कर सकता है और पूरे क्षेत्र को व्यापक लाभ पहुँचा सकता है। डार के शुक्रवार देर शाम तक इस्लामाबाद लौटने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:43:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत दौरे पर मार्को रुबियो: पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात, बोले-ईरान के साथ समझौता अब भी संभव, 'काफी मज़बूत' प्रस्ताव मेज़ पर </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में कहा कि ईरान के सामने एक "काफी मजबूत" शांति प्रस्ताव रखा गया है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु वार्ता शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई खराब समझौता नहीं करेंगे और कूटनीति को सफल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/marco-rubio-will-meet-pm-modi-during-his-visit-to/article-154916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/marco-robio.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के साथ समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है और इस दिशा में एक "काफी मजबूत" प्रस्ताव वार्ता मेज पर रखा गया है। रुबियो ने भारत यात्रा के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रस्ताव में ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने तथा परमाणु मुद्दों पर वास्तविक, महत्वपूर्ण और समयबद्ध वार्ता में शामिल होने की बात शामिल है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि हम इसे सफल बना लेंगे। इसे खाड़ी देशों और वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन प्राप्त है। जिन भी देशों से हमने इस पर चर्चा की, उनका मानना है कि यह न केवल बेहद उचित बल्कि दुनिया के हित में भी है।" रुबियो ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर जल्दबाजी में समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति कोई गलत समझौता नहीं करेंगे। हम देखेंगे कि आगे क्या होता है। कूटनीति को सफल होने का पूरा अवसर दिया जाएगा, उसके बाद ही अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।"</p>
<p>समझौते में देरी के संबंध में पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि अब सब कुछ ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर है। उन्होंने कहा, "ईरानी व्यवस्था को जवाब देने में थोड़ा अधिक समय लगता है। उन्होंने दोहराया, "राष्ट्रपति खराब समझौता नहीं करेंगे। या तो अच्छा समझौता होगा, या फिर हमें इस मुद्दे से किसी अन्य तरीके से निपटना पड़ेगा। हालांकि हमारी प्राथमिकता अच्छा समझौता ही है।" लेबनान के मुद्दे पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका उस विषय पर अलग से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या इजरायल या लेबनान सरकार नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह है, जो लेबनान की जनता को नुकसान पहुंचा रहा है। रुबियो ने कहा कि इज़रायल को अपनी सुरक्षा का अधिकार हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा, "यदि हिजबुल्ला मिसाइल दागता है या ऐसा करने की तैयारी करता है, तो इजरायल को जवाब देने और इसे रोकने का पूरा अधिकार है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की ओर : अमेरिका-ईरान में बनी सहमति; वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत मिलने के संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक ढांचागत समझौता 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने और 30 दिनों के भीतर रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमत हुए हैं। फिलहाल परमाणु वार्ता को स्थगित रखा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/strait-of-hormuz-will-open-soon-america-and-iran-agreed/article-154910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका और ईरान ने एक प्रारंभिक समझौते के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमति जताई है। ‘वाशिंगटन’ पोस्ट ने एक अज्ञात राजनयिक के हवाले से यह जानकारी दी। मीडिया ने एक अज्ञात ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान के प्रारंभिक शांति समझौते में परमाणु वार्ता को बाद की तारीख तक स्थगित करने का भी प्रावधान है। अखबार ने एक अज्ञात राजनयिक के हवाले से बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच प्रारंभिक ढांचागत समझौते को अभी तक ईरानी पक्ष द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान ढांचागत समझौता "95 प्रतिशत पूरा हो चुका है", हालांकि वार्ताकार अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य और तेहरान के परमाणु भंडार से संबंधित शब्दों पर बहस कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान के साथ समझौते पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है और अंतिम पहलुओं और विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिनकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने चैनल को पुष्टि की, कि ईरान ने सैद्धांतिक रूप से समझौते के ढांचे पर सहमति दे दी है।</p>
<p>एक अधिकारी ने ब्रॉडकास्टर को बताया, "हम 95 प्रतिशत तक पहुँच चुके हैं। परमाणु भंडार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा समझौता हो चुका है, लेकिन हम भाषा पर बातचीत कर रहे हैं।" 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता की पुनः शुरुआत की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 12:14:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका के साथ जटिल समय में हो रही बातचीत के सार्थक रहने की उम्मीद: विदेश मंत्री जयशंकर </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो के साथ द्विपक्षीय बैठक की। उन्होंने कहा कि जटिल समय में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी बेहद मजबूत है और यह दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। रूबियो नई दिल्ली में आयोजित क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-minister-jaishankar-is-hopeful-that-the-talks-with-america/article-154849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को बेहद मजबूत बताते हुए उम्मीद जताई है कि इस जटिल समय में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ उनकी बातचीत काफी सार्थक रहेगी। जयशंकर ने रूबियो के साथ रविवार को यहां विपक्षीय वार्ता से पहले अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे और व्यापक संबंध है जो दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस जटिल समय में हो रही दोनों नेताओं की बातचीत काफी सार्थक होगी।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा, "हमारी एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है और मेरा मानना है कि इसका सरल भाषा में अर्थ यह है कि हमारे बीच बहुत गहरा, बहुत व्यापक सहयोग और ऐसा संबंध है, जो अन्य क्षेत्रों और दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अनेक मुद्दों पर और दुनिया के कई हिस्सों में हमारे हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं। मैं आज हमारी बातचीत की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। ये समय जटिल हैं, लेकिन मज़बूत साझेदारों के रूप में मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी चर्चाएँ बहुत खुली और परिणामदायक होंगी"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि रूबियो क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए यहां आए हुए हैं। मंगलवार को होने वाली इस बैठक से पहले दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय वार्ता की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नई दिल्ली में क्वाड देशों की महाबैठक: 26 मई को जुटेंगे 4 देशों के विदेश मंत्री, हिंद-प्रशांत सुरक्षा पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की मेजबानी में 26 मई को नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की पेनी वोंग और जापान के तोशिमित्सु मोतेगी भारत आएंगे। बैठक में मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र और मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर रणनीतिक चर्चा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/important-meeting-of-quad-will-be-held-on-26th-may/article-154642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/quad.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बहुप्रतीक्षित बैठक आगामी 26 मई को यहां होगी, जिसमें शामिल होने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि बैठक में मुक्त और खुले हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य पारस्परिक महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचार करेंगे।</p>
<p>वक्तव्य में कहा गया है कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के निमंत्रण पर पेनी वोंग, मोतेगी तथा रुबियो क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नयी दिल्ली की आधिकारिक यात्रा करेंगे। मंत्रालय ने कहा है कि सभी सदस्य देश मुक्त और खुले हिन्द-प्रशांत के लिए क्वाड की परिकल्पना के अनुरूप पिछले वर्ष एक जुलाई को वॉशिंगटन में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाएंगे। वे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।</p>
<p>इसके अलावा सदस्य मौजूदा क्वाड पहलों की प्रगति की समीक्षा करेंगे, तथा हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और अन्य पारस्परिक महत्व के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचार करेंगे। यात्रा के दौरान, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों तथा अमेरिका के विदेश मंत्री के विदेश मंत्री डॉ जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट करने की भी संभावना है। इस बीच, भारत में अमेरिका के दूतावास ने कहां है कि अमेरिका स्वतंत्र और खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के लिए एकजुटता के साथ खड़ा है। दूतावास ने कहा है कि रबियो की भारत यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।</p>
<p>दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए साथ खड़े हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा को समर्थन देने से लेकर महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने तक विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत की आगामी यात्रा क्वाड साझेदारी के महत्व को रेखांकित करती है।" उल्लेखनीय है कि क्वॉड की बैठक पिछले काफी समय से टलती आ रही थी। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इस बैठक का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:27:42 +0530</pubDate>
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