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                <title>Reliance Group - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर ED का शिकंजा: 581.65 करोड़ रुपये की 31 संपत्तियां जब्त, तलाशी के बाद कार्रवाई का आदेश</title>
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                        <![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस होम फाइनेंस मामले में ₹581.65 करोड़ की 31 संपत्तियां कुर्क । फेमा और पीएमएलए के तहत हुई इस कार्रवाई से समूह की कुल जब्त संपत्ति ₹16,310 करोड़ । जांच में बैंकों से जुटाए गए ₹11,000 करोड़ के सार्वजनिक धन के गबन और फर्जी संस्थाओं में हेराफेरी का खुलासा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/eds-noose-on-anil-ambanis-reliance-group-31-properties-worth/article-146350"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/anil-ambani-and-ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को कहा कि उसने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) से संबंधित मामलों में 581.65 करोड़ रुपये मूल्य की 31 अचल संपत्तियां जब्त की है। ईडी ने कहा कि जब्त की गई संपत्तियां गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्थित जमीन हैं। यह कुर्की विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में छह मार्च, 2026 को की गई तलाशी कार्रवाई के बाद की गई है।</p>
<p>गौरतलब है कि, ईडी ने इससे पहले आरसीएफएल/आरएचएफएल और रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में 15,729 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की थीं। नवीनतम कार्रवाई के साथ, रिलायंस अनिल अंबानी समूह से संबंधित कुल जब्त की गई संपत्तियां 16,310 करोड़ रुपये हो चुकी हैं। इसके अलावा, पीएमएलए और फेमा के तहत तलाशी अभियानों के दौरान, सावधि जमा, म्यूचुअल फंड और नकदी के रूप में 2.48 करोड़ रुपये की संपत्ति को संबंधित कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत फ्रीज या जब्त किया गया। ईडी ने फेमा की धारा 37ए के तहत रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 13 बैंक खातों में जमा 77.86 करोड़ रुपये की राशि भी जब्त की।</p>
<p>ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और धारा 13(1)(डी) के तहत आरसीएफएल और आरएचएफएल के विरुद्ध दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर पीएमएलए जांच शुरू की। ये एफआईआर यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा दायर शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थीं।<br />ईडी की जांच से पता चला कि आरएचएफएल और आरसीएफएल ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सार्वजनिक धन जुटाया था, जिसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल गई।</p>
<p>एजेंसी के अनुसार, आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए धन को कथित रूप से रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों जैसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल में स्थानांतरित किया गया था। ईडी ने आगे आरोप लगाया कि रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा नियंत्रित एवं प्रबंधित बड़ी संख्या में फर्जी या दिखावटी संस्थाओं के माध्यम से सार्वजनिक धन का गबन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति नगण्य थी और इनका कोई वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं था। जांच से समूह के प्रवर्तकों और प्रमुख व्यक्तियों की गलत मंशा का संकेत मिला।</p>
<p>एजेंसी ने कहा कि उसने सार्वजनिक धन की हेराफेरी के लिए विभिन्न संस्थाओं और समूह के सदस्यों के माध्यम से कथित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली कार्यप्रणाली की भी पहचान कर ली है। 11 मार्च, 2026 के अंतरिम कुर्की आदेश के माध्यम से जब्त की गई संपत्तियां अपराध से प्राप्त आय के मूल्य को दर्शाती हैं। ईडी के एक अधिकारी ने कहा, "ईडी वित्तीय अपराधों के अपराधियों के पीछे सक्रियता से लगी हुई है और अपराध की आय को उनके सही हकदारों को वापस दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।" मामले में आगे की जांच जारी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:23:43 +0530</pubDate>
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                <title>ईडी की बड़ी कार्रवाई, अनिल अंबानी समूह की कंपनियों की 1,120 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त की</title>
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                        <![CDATA[ईडी ने अनिल अंबानी की रिलायंस समूह की 1,120 करोड़ रुपये की 18 संपत्तियां, एफडी और असूचीबद्ध निवेश जब्त किए। यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस, कमर्शियल फाइनेंस और यस बैंक फ्रॉड केस से जुड़ी है। इससे पहले भी 8,997 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं, जिससे कुल मूल्य 10,117 करोड़ रुपये पहुंचा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/big-action-by-ed-assets-worth-rs-1120-crore-of/article-134900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/anil-ambani-and-ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रसिद्ध उद्योगपति अनिल अंबानी की रिलायंस समूह की 18 संपत्तियों, फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक में जमा राशि और असूचीबद्ध निवेश में उनकी शेयरधारिता को जब्त किया है, जिनकी कीमत 1,120 करोड़ रुपये है। ईडी ने शुक्रवार को यह जानकार देते हुए बताया कि यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और यस बैंक फ्रॉड केस के सिलसिले में की गयी है। </p>
<p>ईडी अधिकारी ने बताया कि कुर्क की गयीं संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की सात सम्पत्ति, रिलायंस पावर लिमिटेड की दो सम्पत्ति, रिलायंस वैल्यू सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की नौ सम्पत्ति, रिलायंस वैल्यू सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, फी मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, आधार प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड, गेम्स इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट और रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फी मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा असूचीबद्ध निवेश में किए गए निवेश भी शामिल हैं।</p>
<p>इससे पहले, ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरसीओएम), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े बैंक फ्रॉड मामलों में 8,997 करोड़ रुपये से ज्यादा की सम्पत्तियों को जब्त किया था। इससे ग्रुप की कुर्क की गयी संपत्तियों का कुल मूल्य 10,117 करोड़ रुपये हो गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, ईडी ने अनिल अंबानी समूह की रिलायंस की अलग-अलग कंपनियों, जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल), रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (आरआईएल) और रिलायंस पावर लिमिटेड (आरएचएफएल) शामिल हैं, द्वारा सार्वजनिक तौर पर धन का धोखाधड़ी से दुरुपयोग का पता लगाया है। 2017-2019 के दौरान यस बैंक ने आरएचएफएल में 2,965 करोड़ रुपये और आरसीएफएल में 2,045 करोड़ रुपये निवेश किये थे। दिसंबर 2019 तक, ये गैर-निष्पादित हो गये। आरसीएफएल पर बकाया 1,353.50 करोड़ रुपये था।</p>
<p>अधिकारी ने बताया कि यस बैंक द्वारा अनिल अंबानी समूह की रिलायंस की कंपनियों में यह पैसा निवेश करने से पहले, यस बैंक को पहले के रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड से भारी फंड मिला था। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों के अनुसार, रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड कॉन्फ्लिक्ट-ऑफ-इंटरेस्ट नियमों के कारण समूह ग्रुप की फाइनेंस कंपनियों में सीधे राशि निवेश /हस्तांतरित नहीं कर सकता था। इसलिए, म्यूचुअल फंड योजनाओं में सार्वजनिक धन को उनके द्वारा अप्रत्यक्ष तरीके से डाला गया।  </p>
<p>उन्होंने कहा, ईडी ने आरसीओएम , अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1989 की अलग-अलग धाराओं के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर भी जांच शुरू की है। आरसीओएम और उसकी ग्रुप कंपनियों ने 2010-2012 की अवधि से घरेलू और विदेशी कंपनियों से ऋण लिए थे, जिसमें से कुल 40,185 करोड़ रुपये बकाया हैं।</p>
<p>ईडी के अधिकारी ने कहा कि जांच में पता चला है कि, एक कंपनी द्वारा एक बैंक से ली गयी ऋण का इस्तेमाल दूसरी कंपियों द्वारा दूसरे बैंकों से लिए गए कर्ज को चुकाने, संबंधित पार्टियों को परिवर्तित करने और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए किया गया था, जो ऋण की मंजूरी के लिए जारी पत्र लेटर के नियमों और शर्तों के खिलाफ था।</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 19:11:10 +0530</pubDate>
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