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                <title>असर खबर का - कोई नहीं ढूंढ पाया बैल तो हटानी पड़ी शर्त</title>
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                        <![CDATA[किसानों को तीस हजार की प्रोत्साहन राशि देने का मामला]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---no-one-could-find-the-bull-so-the-condition-had-to-be-removed/article-123914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  सरकार की ओर से बैलों से खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लघु एवं सीमांत कृषकों को प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रतिवर्ष 30 हजार रुपए देने की योजना शुरू की गई है। इसके लिए पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इस योजना की घोषणा को पांच माह हो चुके हैं, लेकिन अभी कोटा जिले में एक भी आवेदन नहीं आया है। इसका कारण योजना की एक शर्त है जो किसानों की राहत में बाधा बन रही थी। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को बैलों का बीमा करवाना होगा। जबकि कोई भी बीमा कम्पनी दुधारू पशु के अलावा अन्य पशुओं का बीमा नहीं करती है। ऐसे में कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में योजना का दम टूट रहा था। अब सरकार ने किसानों की परेशानी का समाधान करते हुए बैलों का बीमा करवाने की शर्त को हटा दिया है। अब पशु बीमा पॉलिसी के बिना भी किसान इस योजना में आवेदन कर सकेंगे।</p>
<p><strong>गांवों में घट रही बैलों की संख्या</strong><br />किसानों के अनुसार पहले हर गांव में बैलों की दर्जनों जोड़ियां देखने को मिलती थी। मगर अब समय बदल चुका है, और अधिकतर किसानों ने बैलों को त्याग दिया है। सिंचाई के साधनों से वंचित किसानों ने भी आधुनिक उपकरणों का सहारा लेकर बैलों की उपयोगिता को भुला दिया है। यही कारण है कि पशुधन की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। पहले कई स्थानों पर बड़े पशु मेले आयोजित किए जाते थे। इन मेलों में लाखों रुपए के बैल खरीदे और बेचे जाते थे, लेकिन जब से खेतों में बैलों का उपयोग कम हुआ, पशु मेलों का अस्तित्व भी संकट में आ गया। ऐसे में सरकार ने बैलों से खेती को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की है।</p>
<p><strong>इस शर्त के लिए काट रहे थे चक्कर</strong><br />राज्य सरकार की ओर से बैलों के सरंक्षण के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा में नई योजना की घोषणा की गई थी। इसके तहत लघु एवं सीमांत कृषकों को बैलों से खेती किए जाने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष उपलब्ध कराने का निर्णय किया गया था। यह योजना पूरे प्रदेश के लिए लागू की गई थी और इसके लिए कृषि आयुक्तालय की ओर से सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। बीमा योजना का लाभ लेने के लिए कई शर्ते रखी गई थी। इनमें बैलों की बीमा पॉलिसी वाली शर्त भी थी, लेकिन बैलों का बीमा कौन और कैसे करेगा इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं था। इस कारण कारण काश्तकार कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के चक्कर काट रहे थे। बीमा पॉलिसी की शर्त के कारण  कोटा जिले में अभी तक इस योजना के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जिले के किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिलने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 28 मई को गले की फांस बना बैलों का बीमा, एक भी नहीं आया आवेदन शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि इस योजना का लाभ लेने के लिए काश्तकारों को ई-मित्र पर जाकर अथवा स्वयं के स्तर पर राजकिसान साथी पोर्टल पर जनाधार के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसमें पशु बीमा पॉलिसी एवं स्वास्थ्य प्रमाण पत्र भी अपलोड करना आवश्यक होगा, लेकिन इसमें बैंलों का बीमा कौनसी एजेंसी करेगी इसका कोई भी उल्लेख नहीं है। प्राइवेट एजेंसी पशुओं का बीमा करती है, लेकिन वह सिर्फ दुधारू पशुओं का बीमा करती है। एजेसियां भी बैलों का बीमा करने से मना कर रही है। इसके चलते किसानों में असमंजस की स्थिति बन गई है। किसान कभी पशुपालन विभाग तो कभी कृषि विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें कहीं से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।</p>
<p>पशु बीमा पॉलिसी की शर्त के कारण किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसके लिए किसान सरकारी विभागों में चक्कर लगा रहे थे। अब सरकार की ओर पशु बीमा पॉलिसी  की शर्त को हटवाने से किसानों का इसक प्रति रूझान बढ़ेगा।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>सरकार की ओर से बैलों से खेती को प्रोत्साहन देने के लिए योजना में 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष दिए जाएंगे। इसमें बैलों का बीमा कराने में परेशानी की बात सामने आई थी। अब इस शर्त को हटा दिया गया है। केवल स्वास्थ्य प्रमाण पत्र देकर भी योजना का लाभ लिया जा सकता है।<br /><strong>-अतिश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 16:11:59 +0530</pubDate>
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                <title>विकास की आवश्यक शर्त है शांति : हमारी सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास के किए काम, मोदी ने कहा- आतंकवाद हिंसा अब बर्दाश्त नहीं</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शांति और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को विकास की आवश्यक शर्त बताया है ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/peace-is-the-essential-condition-of-development-our-government-has/article-115131"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शांति और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को विकास की आवश्यक शर्त बताया है और कहा कि उनकी सरकार ने पिछले 11 वर्ष  में पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवसंरचना-विकास और शांति के लिए जो काम किए हैं, उससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य आज निवेशकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ने यहां पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों के विकास के विषय पर केन्द्रित 2 दिवसीय निवेशक सम्मेलन- नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट का उद्घाटन करते शांति के महत्व को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद हो या अशांति फैलाने वाले माओवादी, (उनके प्रति) हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पूर्वोत्तर में विभिन्न संगठनों के साथ पिछले कुछ वर्षों में कई शांति समझौते किए हैं और 10 हजार से अधिक युवाओं ने हथियार छोड़ कर मुख्य धारा को अपनाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र  की उनकी योजना में क्षेत्र के युवाओं के लिए विकास के अवसरों का सृजन सबसे उच्च प्राथमिकता रखता है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्ष में हमने पूर्वोत्तर में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए जो कुछ किया है, वह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि वह क्षेत्र के विकास की एक बड़ी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधा, हर निवेश की पहली शर्त है। पूर्वोत्तर क्षेत्र बहुत समय तक अभाव में रहा था, लेकिन अब वहां भारी निवेश हुआ है। एक दशक में वहां 11 हजार किलोमीटर के नये राजमार्ग बने हैं, सैकड़ों किलोमीटर के नये रेल मार्ग विकसित हुए हैं, तथा हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गयी है।</p>
<p>उन्होंने निवेशकों से उस क्षेत्र में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए पहले पहुंचने की सलाह देते हुए कहा कि आने वाले समय में पूर्वोत्तर भारत दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में व्यापार का एक बड़ा केंद्र बनेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने पूर्वोतर क्षेत्र में विकास और व्यापर की संभावनाओं का लाभ उठाने के  लिए भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के विकास तथा कोलकाता और कालादान (म्यांमार) बंदरगाह सम्पर्क परियोजना पर काम कर रहा है।</p>
<p>मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों के सम्मिलित प्रयासों से पूर्वोत्तर में निवेश का शानदार माहौल बना है। पूर्वोत्तर क्षेत्र की विविधता उसकी बड़ी शक्ति है। सम्मेलन का आयोजन  केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) द्वारा किया गया है। मंत्रालय के प्रभारी मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री की दूर दृष्टि और उनके मार्गदर्शन से आज अवसरों से भरे एक नए पूर्वोत्तर क्षेत्र का उदय हुआ है।</p>
<p>उद्घाटन सत्र को उद्योगपति मुकेश अंबानी, अनिल अग्रवाल, गौतम अडाणी,  हर्षवर्धन नेवतिया और पूर्वोत्तर के कुछ प्रमुख उद्यमियों ने भी संबोधित किया और क्षेत्र में निवेश की अपनी अपनी योजनाओं का एक मोटा खाका प्रस्तुत किया। इन उद्यमियों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के संबंध में  मोदी के परिवर्तनकारी नेतृत्व की सराहना की। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 May 2025 15:51:59 +0530</pubDate>
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                <title>पार्क का ट्रेक उखड़ा हुआ और टूटे हैं झूले</title>
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                        <![CDATA[लाइटें गायब, फव्वारे में गंदगी का अम्बार।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-track-of-the-park-is-broken-and-the-swings-are-broken/article-110737"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer66.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कहने को तो यह पार्क है। लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि न तो उसका ट्रेक चलने लायक है। और न ही वहां बच्चों के लिए झूले सही है। रोशनी के लिए लगी लाइटें गायब हैं और फव्वारे में गंदगी का अम्बार है। यह हालत है केशवपुरा स्थित आल्हा उदल पार्क की। नगर निगम कोटा दक्षिण के वार्ड 79 में आने वाला यह पार्क वैसे तो मेन रोड पर है। साथ ही तलवंडी जैसे पॉश इलाके में आता है। लेकिन इस पार्क की हालत ऐसी है कि उसे देखने से यह पार्क कम और दुर्दशा का शिकार अधिक लगता है। </p>
<p><strong>शुरुआत से अंत तक बदहाल</strong><br />पार्क की हालत शुरुआत से अंत तक बदहाल है।  पार्क में प्रवेश के लिए लगे चकरी गेट का एक हिस्सा ही गायब है। जिससे इस चकरी गेट को बंद नहीं किया जा सकता। संभावना है कि इसे स्मैकची या चोर चोरी कर ले गए। अंदर जाने पर पूरे पार्क में पैदल चलने वाला ट्रैक जगह-जगिह से उखड़ा हुआ है। जिससे उस पर चलने पर ठोकर लगकर गिरने का खतरा बना हुआ है।  मेन रोड की तरफ की पार्क की चार दीवारी के सहारे अतिक्रमण तो बाहर की तरफ हो रहा है। जिससे उसकी चार दीवारी क्षतिग्रस्त हो गई है।  चार दीवारी का हिस्सा टूटकर अंदर की तरफ लटका व गिरा हुआ है। पार्क में लाइटों के लिए खम्बे तो लगे हुए हैं लेकिन उनमें से अधिकतर की लाइटें ही गायब है। लोगों का कहना है कि यहां से अधिकतर लाइटें चोरी हो चुकी है। या नशा करने वालों ने तोड़ दी है। जिससे अंधेरे में वे सुनसान जगह पर नशा कर सकें। </p>
<p><strong>बच्चों के लिए झूले ही नहीं</strong><br />कहने को तो पार्क में कई झूले लगे हुए हैं। लेकिन उनमें से छोटे बच्चों के काम के अधिकतर झूले टूटे हुए हैं। जिससे वे न तो उनमें झूल सकते है। यदि झूलने का प्रयास भी करेंगे तो उनके चोटिल होने का खतरा बना हुआ है। अधिकतर स्कूलों में परीक्षाएं समाप्त हो गई है। लोग बच्चों के साथ परिवार समेत पार्कों में घूमने के जाएंगे। लेकिन  पार्कों की ऐसी हालत देखकर किसी का भी मन वहां घूमने को नहीं करेगा।  </p>
<p><strong>पानी की टंकी है कूलर गायब</strong><br />पार्क में आने वालों के लिए पीने के पानी का इंतजाम वाटर कूलर लगाकर किया गया है। लेकिन वहां हालत यह है कि जाली से कवर होने के बावजूद वहां पानी की टंकी ऊंचाई पर होने से वह तो बची हुई है। जबकि  पानी को ठंडा करने वाली उसकी मशीन ही गायब है। जिससे वह कूलर वहां लगा होने के बाद भी लोगों को चिढ़ा रहा है और उसकी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। </p>
<p><strong>बीमारी का कारण बन रहा फव्वारा</strong><br />पार्क के बीच में एक बड़ा फव्वारा लगा हुआ है। यह फव्वारा चलतो तो कम है। लेकिन इसमें भरा पानी इतना अधिक गंदा हो रहा है कि उसमें मच्छर पनप रहे हैं। साथ ही इसके आस-पास भी गंदा पानी जमा है। इससे वहां  घूमने आने वालों के लिए यह बीमारी का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>सुबह के समय मजदूरों का जमावड़ा</strong><br />जिस जगह पर पार्क है वहां सुबह के समय मजदूर मंडी लगती है। ऐसे में सुबह के समय यहां बड़ी संख्या में मजदूर बैठे रहते है। जबकि रात के समय अंधेरा होने पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।  तलवंडी निवासी अमित शर्मा का कहना है कि पार्क है तो वहां सब कुछ सही होना चाहिए। झूले झृलने लायक व ट्रेक चलने लायक होने चाहिए। नगर नियम या केडीए जिसके भी अधीन आता है उन्हें इसे सही करवाना चाहिए।  केशवपुरा निवासी अशोक नागर का कहना है कि यह शहर का प्रसिद्ध पार्क है। जिसे सभी लोग जानते है। लेकिन उसके बाद भी इसकी दशा सुधारने पर किसी का ध्यान नहीं है। यहां आस-पास के लोग घूमने आना चाहते हैं लेकिन  इसकी हालत देखकर नहीं आते। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आल्हा उदल पार्क का ट्रेक उखड़ा हुआ व झूले टूटे हुए हैं। इन्हें सही करवाने के लिए केडीए में लिखित में पत्र दिया हुआ है। अधिकािरयों ने शीघ्र ही सही करवाने का आश्वासन दिया है। <br /><strong>- संजीव विजय, पार्षद, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>शहर के सभी पार्कों का सर्वे कराया गया है। जिसके आधार पर उनका एस्टीमेट भी तैयार किया गया है। केडीए की ओर से सभी 400 से अधिक पार्कों का जीर्णोद्धार व मरम्मत के काम 120 करोड़ रुपए की लागत से करवाए जाने है। यह काम शीघ्र ही शुरु किए जाएंगे।उसमें कोई एक या दो पार्क नहीं सभी पार्क सही करवाए जाएंगे। <br /><strong>- रिषभ मंडल, आयुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 15:40:52 +0530</pubDate>
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                <title>‘काल’ के स्थान पर हाल जस के तस, सड़क पर बजरी बढ़ा रही हादसों की संभावना</title>
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                        <![CDATA[सुरक्षा के नाम पर तीन-चार पुलिसकर्मी तैनात कर इतिश्री कर ली गई है। वहां सड़क पर पड़ी बजरी से हादसा और होने की सम्भावना बढ़ गई है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-place-of-kaal-the-condition-remains-as-it-is/article-98342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6622-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ट्रेलर, कन्टेनर टैंकर, ट्रोले समेत अन्य भारी वाहनों की लम्बी कतारें, सड़क पर बिखरी भारी रोड़ी के बीच डीपीएस कट के पास आकर यूटर्न और छोटे चौपहिया वाहन समेत बाइकों का इन वाहनों के बीच में फंसकर चलना और गलत दिशा में जाम की स्थिति उत्पन्न करना जस का तस बना हुआ है। भांकरोटा थाना इलाके में अजमेर हाईवे स्थित डीपीएस कट के पास कन्टेनर और टैंकर में हुई भीषण भिड़ंत के दूसरे दिन ही वाहनों की अनियमितता का यू-टर्न बदस्तूर जारी है। हादसास्थल पर देखा जाए तो हालात रुलाने और अफसोस करने वाले ही हैं। अभी शवों की पूरी तरह गिनती और पहचान नहीं हो सकी है। वहीं हादसा स्थल ने अपना पहले की तरह ही भयावह दृश्य बना दिया है। मौके से भीषण आग से खाक में तब्दील हो चुके वाहनों को हटाकर यातायात को सुचारू कर दिया है लेकिन सुरक्षा के नाम पर तीन-चार पुलिसकर्मी तैनात कर इतिश्री कर ली गई है। वहां सड़क पर पड़ी बजरी से हादसा और होने की सम्भावना बढ़ गई है।</p>
<p><strong>11 लोगों की हुई पहचान, तीन अब पहचान को मोहताज </strong><br />हादसे में राजपुरा निवासी हरलाल, कुचामन निवासी महेन्द्र, बालमुकुन्दपुरा निवासी राधेश्याम चौधरी, रायबरेली अमेठी निवासी शहाबुद्दीन, सूरजपोल उदयपुर निवासी शाहिद, रोशनपुरा बनेडिया निवासी अनिता मीणा, उदयपुर निवासी फैजान सीकर निवासी राजूराम, अजमेर निवासी गोविन्द, आईएस करणी सिंह और संजेश यादव हैं। अभी तक तीन जनों की पहचान नहीं हो पाई है। इस मामले में अब तक 14 जनों की मौत हो चुकी है जबकि तीन जनों की शिनाख्त नहीं हुई है। 11 जनों की पहचान हो चुकी है।</p>
<p><strong>एसआईटी गठित</strong><br />भांकरोटा में अजमेर रोड पर डीपीएस कट के पास हुए टैंकर ब्लास्ट मामले में पुलिस कमिश्नर बीजू जोसफ ने एक एसआईटी का गठन किया है। इस संबंध में भांकरोटा में मुकदमा संख्या 462/2024 धारा 281, 106(1), 125(ए), 125(बी) बीएनएस में दर्ज किया। मामले की जांच के लिए एडीसीपी वेस्ट आलोक सिंघल, एसीपी बगरू हेमेन्द्र शर्मा, एसीपी यातायात राजेन्द्र रावत, थानाप्रभारी भांकरोटा मनीष गुप्ता और सिंधी कैम्प किरण सिंह को शामिल किया है। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2024 10:33:44 +0530</pubDate>
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                <title>खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल </title>
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                        <![CDATA[संस्था प्रधान ने बताया विद्यालय की स्थिति बदहाल है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/children-forced-to-study-under-the-open-sky/article-93372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। एक और तो सरकार लाखों करोड़ों रुपए का बजट जारी कर शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए हर तरीके के प्रयास करने में जुटी हुई है ताकि सहरिया क्षेत्र में शिक्षा का स्तर सुधर सके तो वहीं दूसरी ओर सहरिया अंचल क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ारा के हाल बदहाल बने हुए हैं। कक्षा 1 से 5 वीं तक संचालित विद्यालय में करीब 97 बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। विद्यालय में मात्र दो ही कमरे हैं। ऐसे में एक में पोषाहार सामग्री और खाना पकाने का काम किया जाता है तो दूसरे कमरे में एक कक्षा को बिठाया जाता है बाकी क्लास  खुले आसमान के नीचे संचालित हो रही हैं। बारिश सर्दी के मौसम में अक्सर बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। अगर बात की जाए विद्यालय के टॉयलेट की तो यह गंदगी से सटे पड़े हैं। इससे बच्चों में संक्रमण जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। सफाई व्यवस्था के नाम पर विद्यालय प्रशासन कोई ध्यान नहीं देता है। जगह-जगह से बाउंड्री क्षतिग्रस्त है। विद्यालय की चार दिवारी का गेट गायब होने से जानवरों का जमावड़ा स्कूल परिसर में अक्सर बना रहता है। ऐसे में शिक्षण कार्य करते वक्त बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।  पोषाहार खाने के बाद बच्चों को बर्तन साफ करने के लिए भी घर जाना पड़ता है। संस्था प्रधान लव कुश मीना से बात की तो उन्होंने बताया विद्यालय की स्थिति बदहाल है। बारिश में ज्यादा परेशानी होती है। बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। रसोई घर क्षतिग्रस्त है। </p>
<p><strong>पेयजल की समस्या</strong><br />विद्यालय में पानी की समस्या के चलते छात्र-छात्राओं को अपने-अपने घर से पानी बोतलों में भरकर लाना पड़ता है क्योंकि विद्यालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने के स्कूली छात्र-छात्राओं को पेयजल संकट का सामना भी करना पड़ता है। विद्यालय में पोषाहार बनाने के लिए बाहर ट्यूबवेल से पानी लाना पड़ता है। अगर बिजली गुल होती है तो ट्यूबवेल भी नहीं चलती है। ऐसे में पोषाहार बनाने के लिए ग्रामीणों से पानी मांगना पड़ता है। स्कूल में छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। सर्दी, गर्मी, बरसात में स्कूली छात्र-छात्राओं को कक्षा कक्षों का अभाव होने के कारण खुले आसमान के नीचे ही अध्यापन कार्य करना पड़ रहा है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करा दिया है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसके चलते बच्चों के अभिभावकों में भी रोष बना हुआ है।</p>
<p><strong>शौचालय के हालात बदहाल</strong><br />स्थानीय विद्यालय में बने शौचालय क्षतिग्रस्त और गंदगी से सटे हुए हैं। ऐसे में हर वक्त स्कूली छात्र-छात्राओं को संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। वहीं स्कूल परिसर में कांटेदार झाड़ियां उगी हुई है। ऐसे में इन झाड़ियां में जहरीले जीव जंतुओं का डर बना रहता है। विद्यालय प्रशासन इस मामले को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। विद्यालय की चार दिवारी जगह से क्षतिग्रस्त है। मेन गेट नहीं होने के चलते स्कूल में मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। ऐसे में स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भी मवेशियों से खतरा बना रहता है। साफ-सफाई को लेकर विद्यालय प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। </p>
<p>विद्यालय में पर्याप्त कक्षा-कक्ष नहीं होने से विद्यार्थियों का बाहर खुले मैदान में पढ़ाया जाता है। जिससे छात्र-छात्राओं को सर्दी, गर्मी और बरसात हर मौसम में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- पन्नलाल, ग्रामीण। </strong></p>
<p>विद्यालय में 97 बच्चे अध्ययनरत है। केवल दो ही कमरे है। जिसमें से भी एक कमरे में पोषाहार व खाना बनाया जाता है। ऐसे में बच्चों को कहां बैठाकर पढाया जाए। ऐसी समस्या हर समय बनी रहती है। <br /><strong>- नरोत्तम, समाजसेवी। </strong><br />    <br />कक्षा कक्ष के निर्माण को लेकर कई बार शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे गए हैं लेकिन अभी तक कक्षा कक्ष का निर्माण नहीं हुआ है। ऐसे में अब बच्चों का भविष्य अंधकार में है। <br /><strong>- लवकुश मीना, प्रधानाध्यापक, राउप्रा विद्यालय बड़ारा।   </strong></p>
<p>बड़ारा विद्यालय में भवनों की कमी है। टॉयलेट बदहाल है और सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है तो विद्यालय प्रशासन को व्यवस्थाएं सुधारने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। खुले आसमान के नीचे बच्चे अपना अध्यापन कार्य करते हैं। भवन की कमी को लेकर शिक्षा विभाग की उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखा है। जैसे ही बजट आएगा तो भवन निर्माण कराए जाएंगे। <br /><strong>- केशवायांद शर्मा, सीबीओ, शाहाबाद। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 15:21:25 +0530</pubDate>
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                <title>स्मार्ट सिटी: सरकारी सम्पति पर जमाया अपना अधिकार</title>
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                        <![CDATA[निगम अधिकारियों का कहना है कि दशहरा मैदान में विजयश्री रंगमंच के सामने की कच्ची जगह को पक्का करने की योजना है।
]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/smart-city--established-their-right-on-government-property/article-87636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत एक तरफ तो करोड़ों रुपए खर्च कर दशहरा मैदान को  नया स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। वहीं मेले में आने वाले कई दुकानदारों ने उस सरकारी सम्पति  पर ही अपना अधिकार समझते हुए मैदान की दीवारों पर अपने नाम लिख दिए। जिससे मैदान की दुर्दशा झलक रही है। दशहरा मेले को भव्यता प्रदान करने व उसमें होने वाले कार्यक्रमों को तय करने के लिए मेला समिति का गठन किया गया है। समिति सभी के सहयोग से कार्यक्रमों को अंतिम रूप देती है। वहीं निगम के राजस्व अनुभाग की ओर से दुकानदारों को दुकानों का आवंटन किया जाता है। जिसके लिए मेला समिति द्वारा तय की गई राशि दुकानदारों व व्यापारियों से लीे जाती है। कई दुकानें बरसों से एक ही व्यापारी को आवंटत की जा रही है जिससे उसका कब्जा बना हुआ है। जबकि कई दुकानदारों व व्यापारियों की मौत हो चुकी है। उनके नाम से वे दुकानें लेकर अन्य लोगों को महंगे दामों पर बेच देते हैं। इससे निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं कई ऐसे दुकानदार हैं जिन्होंने मैदान की दीवार पर ही अपने नाम लिख दिए हैं। जिससे उस जगह पर उनका स्थायी कब्जा हो गया है। उस जगह पर हर बार वे ही दुकानें लगाते हैं। किसी अन्य को उस जगह पर दुकानें नहीं लगाने देते। </p>
<p><strong>जन सुविधाओं के पास अधिक खराब स्थिति</strong><br />दशहरा मैदान में दीवारों पर नाम लिखकर उसकी स्थिति बिगाड़ने वाले सबसे अधिक स्थान विजयश्री रंगमंच के सामने जन सुधिवाओं के पास की है। यहां जगह-जगह पर लोगों ने अपने नाम लिखे हैं। राजा गुर्जर, द्रोपदी,अब्दुल रहमान, मेनका व असलम समेत कई ऐसे नाम हैं जो दीवारों पर देखे जा सकते हैं। इसी तरह के कई अन्य नाम भी जगह - जगह पर लिखे हुए हैं। जिससे पूरी दीवारों की दशा ही खराब कर रखी है।</p>
<p><strong>कच्ची जगहों पर भी यही हाल</strong><br />जिस तरह से कई दुकानदारों ने दीवारों पर अपने नाम लिखकर कब्जा जमा रखा है। उसी तरह से कई दुकानदारों व ठेले वालों ने कच्ची जगह पर अपना स्थायी ठोर जमा लिया है। वे हर बार उसी जगह पर अपने ठेले लगाते हैं। किसी ओर के वहां आने पर उन्हें हटा देते हैं। कई ठेले वाले तो चलते-फिरते रहते हैं। जबकि कई ठेले वाले विशेष रूप से चाट-पकौड़ी वालों ने कच्ची जगह पर अपना कब्जा जमा रखा है। हालांकि निगम अधिकारियों का कहना है कि दशहरा मैदान में विजयश्री रंगमंच के सामने की कच्ची जगह को पक्का करने की योजना है। जिससे उस जगह पर किसी का कब्जा नहीं रहेगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दशहरा मैदान सरकारी सम्पति है। उसकी दीवारों पर इस तरह से कोई भी नाम नहीं लिख सकता। यदि किसी ने लिखा है तो गलत है। उन सभी नामों को मिटाया जाएगा। साथ ही यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं पूरे मैदान में दुकानों का नए सिरे से नक् शा तैयार किया जा रहा है। जिससे किसी की भी मोनोपोली नहीं चलने दी जाएगी। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, अध्यक्ष दशहरा मेला व अन्य उत्सव आयोजन समिति</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Aug 2024 17:08:29 +0530</pubDate>
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                <title>हाल-बेहाल: ड्रेनेज सिस्टम फेल लगा जाम, हांफ गए इंजन</title>
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                        <![CDATA[सरकारी कार्यालयों की छुट्टी होने पर निकले कर्मचारियों की गाड़ियां भी जाम में फंस गई। एमएमएस हॉस्पिटल के बाहर घुटनों-घुटनों तक पानी आने से कई दुपहिया वाहन बारिश में बंद हो गए। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-drainage-system-was-in-poor-condition-jammed-the-engine/article-84122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में दोपहर बाद हुई झमाझम बारिश से ड्रेनेज सिस्टम फेल हो गया, इससे शहर की चारों दिशाओं में लम्बा जाम लग गया। तेज बारिश से जगह-जगह पानी भर गया और गाड़ियों के इंजन हांफने लगे। महारानी कॉलेज, एसएमएस हॉस्पिटल, नारायण सिंह सर्किल, रामबाग सर्किल, अम्बेडकर सर्किल, सोड़ाला में भयंकर जाम होने से गाड़ियां रेंग-रेंग कर चलती रहीं। एसएमएस हॉस्पिटल से निकलती और जाती एम्बुलेंस के साइरन गूंजते रहे, लेकिन जाम ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया। शाम को बारिश के थमते ही वाहनों के एक साथ निकलने और जल्दी घर पहुंचने की जद्दोजहद में बेतरतीब ढंग से चले यातायात ने अधिक जाम लगाया। सरकारी कार्यालयों की छुट्टी होने पर निकले कर्मचारियों की गाड़ियां भी जाम में फंस गई। एमएमएस हॉस्पिटल के बाहर घुटनों-घुटनों तक पानी आने से कई दुपहिया वाहन बारिश में बंद हो गए। </p>
<p><strong>सीकर, अजमेर, आगरा और दिल्ली  रोड पर भी बदहाल स्थिति</strong><br />शहर के सीकर रोड पर बदहाल पानी की निकासी से पानी चौपहिया गाड़ियों के अन्दर तक चला गया। बारिश में भीगते पुलिसकर्मी यातायात को कंट्रोल करते रहे, लेकिन ड्रेनेस सिस्टम के खराब होने पानी सड़क पर दरिया बनकर बहता रहा। आलम यह रहा कि गाड़ी एक-एक फीट भी कई-कई मिनटों के बाद चल पाई। आगरा रोड के ट्रांसपोर्ट नगर की टनल में बारिश का पानी टपकने से टनल में पानी भर गया। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पं.नवलकिशोर शर्मा सर्किल के चारों ओर जाम के कारण वाहनों की लम्बी कतारें लग गईं। अजमेर रोड पर भी वाहन जाम के चलते रेंग-रेंग कर चलते रहे। मुख्य सड़क पर जाम लगने से लोगों ने वाहनों को लेकर गलियों से निकलने की कोशिश की, लेकिन कई जगह आगे जाकर गलियों के बंद होने से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jul 2024 10:48:10 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पतालों में लटके रहते हैं तालें, कैसे मिलेगा इलाज ?</title>
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                        <![CDATA[निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर ग्रामीणाके को नहीं मिल रहा समय पर उपचार। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/hospitals-are-always-locked--how-will-they-get-treatment/article-78682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/aspatalo-me-ltke-rhte-h-taale,-kese-milega-ilaaj...rajpur,-baran-news-20-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>राजपुर। सहरिया आदिवासी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति गंभीर बनी हुई है। स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर ताला लगा रहता है। इसके चलते यह स्वास्थ्य केंद्र शोपीस बने हुए हैं क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ नहीं मिलने के कारण लोग इधर-उधर झोलाछाप डॉक्टरों से मजबूरी में इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं। उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला लटका होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए शाहाबाद उपखंड मुख्यालय या कोटा बारां शिवपुरी जाना पड़ रहा है। इससे लोग परेशान हैं। अधिकांश गरीब मजलूम वर्ग के लोगों बड़ी आबादी गांवों में रहती है। ग्रामीणों को बीमारी की हालत में नजदीक में ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए गांवों और कस्बों में प्राथमिक केंद्रों के साथ उपस्वास्थ्य केंद्रों इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है लेकिन कर्मचारियों के नहीं पहुंचने के कारण अधिकांश उप स्वास्थ्य केंद्र ताले में बंद नजर आते हैं इसके चलते मौसमी बीमारियों का इलाज लोगों को समय पर नहीं मिल पा रहा है लेकिन अंचल में इन उप स्वास्थ्य केंद्रों में अकसर ताला लटका रहता है। जिससे ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज कराने निजी क्लिनिक या अन्य स्थानों पर जाकर करवाना पड़ता है।</p>
<p><strong>इन गांव में बंद नजर आए अस्पताल</strong><br />रविवार को  संवाददाता ने पड़ताल की तो मामोनी, मुंडियर, बेहटा, खांडा, सहरोल बिचि, गणेशपुरा, खटका  गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका हुआ हैं। यहां के मरीज दूर दराज बाजार में इलाज कराने के लिए जा रहे हैं। महेश चंद ने बताया है कि उप स्वास्थ्य केंद्र कभी-कभी खुलते हैं। मरीज को ज्यादातर इलाज दूसरे गांवों व कस्बों में जाकर ही करवाना पड़ता है। </p>
<p><strong>मरीजों को समय पर नहीं मिल रही दवाएं</strong><br />उप स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला लटका होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए शाहाबाद उपखंड मुख्यालय या कोटा बारां शिवपुरी जाना पड़ रहा है। ग्रामीण राहुल कुमार, शिवचरण मेहता  का कहना है कि नियमानुसार उप स्वास्थ्य केंद्रों को स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को तय समयानुसार खोलना चाहिए। एएनएम और  जीएनएम को मरीजों को इलाज की सुविधा मिलना चाहिए, लेकिन उप स्वास्थ्य केंद्रों का ताला नहीं खुलने से ग्रामीणों को इलाज कराने के लिए अन्य स्थानों पर जाना पड़ रहा है या फिर झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उपस्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ कर्मचारियों को जिला कलक्टर को पाबंद करना चाहिए और उप स्वास्थ्य केंद्र मुख्यालय पर उपस्थिति देकर मरीजों का उपचार करने के लिए पाबंद करना चाहिए और समय-समय पर उप स्वास्थ्य केंद्रों की मॉनीटरिंग भी करना चाहिए। भरत सिंह का कहना है कि ज्यादातर स्वास्थ्य केंद्र पर हमेशा ताला लटका रहता है। जबकि सरकार की गाइडलाइंस है के अनुसार इन स्वास्थ्य केंद्रों स्वास्थ्य कर्मचारियों को ग्राम पंचायत मुख्यालय पर तैनात रहना चाहिए।  अनार सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में उप स्वास्थ्य केंद्र खोलने का मकसद यह हैं कि गांव में रहकर ही ग्रामीणों का इलाज कर सकें। लेकिन इन गांवों में ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा हैं सभी केंद्रों में ताले लगे हुए मिले है। ग्रामीणों ने बताया कि केंद्रों पर नियुक्त कर्मचारी कभी कभार आकर यहां टीकाकरण आदि कार्य ही करते हैं। तो कुछ 7 दिन में एक बार ही उपस्थिति दर्ज कर चले जाते हैं बाकी दिनों में स्वास्थ्य केंद्रों ताला लटका रहता है। कारण पूछने पर अन्य स्थानों पर ड्यूटी का कहकर ग्रामीणों को टाल दिया जाता है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों का कहना है</strong> <br />ग्रामीण क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर कर्मचारियों के अभाव में ताला लटका रहता है। क्षेत्र के मरीजों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।<br /><strong>- कल्लाराम प्रजापति, ग्रामीण </strong></p>
<p>उप स्वास्थ्य केंद्रों पर समय से चिकित्सा कर्मचारी नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में समय पर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ नहीं मिलने के कारण क्षेत्र के मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेनी पड़ रही है।<br /><strong>- रवि सोनी, समाजसेवी </strong></p>
<p>उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के मरीजों को उठाना पड़ता है। समय पर उनका उपचार नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है।<br /><strong>- भगवत प्रसाद मेहता, ग्रामीण </strong></p>
<p>ग्रामीण क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्र भगवान भरोसे संचालित हो रहे हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों की संबंधित विभाग के आला अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मॉनिटरिंग नहीं की जाती है। इसके चलते क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्रों के हालात ऐसे बने हुए हैं जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए।<br /><strong>- कल्याण सिंह मेहता, ग्रामीण </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />संडे की सभी कर्मचारियों की छुट्टी रहती है। इसलिए स्वास्थ केंद्र पर कर्मचारी नहीं पहुंचते हैं और ताला लगा रहता है। अगर कोई कर्मचारी सात दिन के अंदर छुट्टी नहीं लेता है तो संडे की छुट्टी ही रखते हैं। इसलिए नहीं खुले गए। <br /><strong>- डॉ आरिफ शेख, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी शाहाबाद</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 17:12:42 +0530</pubDate>
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                <title>बदहाल सड़क के कारण तीन किलोमीटर का सफर एक घंटा में हो रहा पूरा  </title>
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                        <![CDATA[कुछ स्थानों पर तो सड़क का नामोनिशान तक नहीं रहा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-bad-condition-of-the-road--the-journey-of-three-kilometers-is-completed-in-one-hour/article-72579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/1111.png" alt=""></a><br /><p>कसार। कसार कस्बे से दो गांवों को जोड़ने वाली तीन किलोमीटर की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। जिस कारण रोजाना दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे है। जानकारी अनुसार कसार से रांक्याखेड़ी रामनगर गांव की और जाने वाली सड़क पूरी तरह उखड़ गई है और 3 किलोमीटर की दूरी किसी वाहन से तय करने में आधे घंटे से भी अधिक समय लगता है। कुछ स्थानों पर तो सड़क का नामोनिशान तक नहीं रहा। जगह-जगह गहरे गड्डे हो गए हैं। दुपहिया वाहन चालक आए दिन गिरकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। वही इस सड़क से गुजरते बड़े वाहनों से उड़ते धूल के गुब्बारों से दुपहिया चालकों की हालत खराब हो जाती है। इन सड़क का निर्माण कई साल पहले किया गया था मगर क्षेत्र में पत्थर एवं अवैध रूप से मिट्टी खनन के बाद माल लेकर जाने वाले ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क धीरे धीरे टूटती चली गई और अब ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। </p>
<p><strong>फैली गिट्टी भी दुर्घटना का कारण</strong><br />वही ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले चुनाव के समय सड़क निर्माण कार्य शुरू किया गया था और निर्माण कार्य करने वाली कंपनी ने बची सड़क को खोद कर पूरे मार्ग में गिट्टी डाल दी थीं लेकिन किसी वजह से निर्माण कार्य बंद कर दिया गया और अब मार्ग में फैली गिट्टी भी दुर्घटना का कारण बनी हुई है व रोजाना आवाजाही करने वाले दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे है। वहीं गावों में इसी कारण डिलेवरी के समय एम्बुलेंस आदि इमर्जेंसी सेवा भी समय पर नही पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाती है तो रास्ते मे ही प्रसव हो जाते है। क्योंकी रास्ते में इतना खराब है कि डिलेवरी के समय इतनी पीड़ा सहन नहीं कर पाती है और ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। जिस कारण ग्रामीणों ने विभाग से सड़क बनवाने की मांग की है। कसार कस्बे में बालकों को स्कूल भेजते है तो सड़क खराब होने के कारण उनका भी दुर्घटना होने का भय रहता है। जिस कारण आधे समय बच्चे भी स्कूल नही जाते। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस समस्या को लेकर हमने कई बार चुनाव के समय आने वाले जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत की है लेकिन चुनाव न होने तक तो आश्वासन देते रहते है और चुनाव जीत जानें के बाद हम लोगों को भूल जाते है और समस्या का समाधान भी नहीं करवाते। <br /><strong>- गोविंद मेघवाल, ग्रामीण।    </strong>    </p>
<p>गांव से रोजाना संैकडों लोग मजदूरी करने कसार कस्बे की और जाते है लेकिन सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाने के करण 10 मिनट के रास्ते में हमे पहुचने में करीब एक घंटा लग जाता है। <br /><strong>- गोलू मेघवाल, ग्रामीण।  </strong>  </p>
<p>गांव में आने वाली सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जानें के कारण रात को दुर्घटना के समय इमरजेंसी सेवा भी समय पर गांव में नही पहुंच पाती। जिस कारण हमारे सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।  <br /><strong>- दिलीप मेघवाल, ग्रामवासी।   </strong> </p>
<p>मैनें उच्च अधिकारियों से बात की है। सड़क का बजट रखा हुआ है और दस से पंद्रह दिन के अंदर डामर रोड निर्माण रोड कार्य शुरू हो जाएगा। <br /><strong>- नमोनारायण राय, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी विभाग, डिवीजन कोटा। </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 19:09:17 +0530</pubDate>
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                <title>गुना हादसा : 13 लोगों की मौत, 15 की हालत बेहद गंभीर</title>
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                        <![CDATA[मध्यप्रदेश के गुना जिले में डंपर से टकराने के बाद यात्री बस में लगी आग से हुए भीषण हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। बस में सवार 15 यात्रियों की जिला अस्पताल में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/guna-accident-13-people-died-condition-of-15-is-very/article-65316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/guna-accident.png" alt=""></a><br /><p>गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले में डंपर से टकराने के बाद यात्री बस में लगी आग से हुए भीषण हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। बस में सवार 15 यात्रियों की जिला अस्पताल में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है, ऐसे में मृतकों की संख्या अभी और बढ़ने की लगातार आशंका बनी हुई है।</p>
<p>बजरंगगढ़ पुलिस सूत्रों ने बताया कि कल रात लगभग साढ़े आठ बजे दुर्घटना का शिकार हुयी ये बस गुना से आरोन जा रही थी और सेमरी गांव के पास सामने से आ रहे डंपर से टकरा गयी। इस वजह से बस पलट गयी और उसमें आग लग गयी। हादसे में बस में सवार 12 यात्रियों और डंपर चालक की जिंदा जलने से मौत हो गई। बस में लगभग 30 यात्री सवार थे, उनमें से 15 की स्थिति अभी भी जिला अस्पताल में बेहद गंभीर बनी हुई है। </p>
<p>वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए घटना की जांच के आदेश दिए हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने मृत यात्रियों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश गुना जिला प्रशासन को दिए हैं। डॉ यादव ने कहा कि प्रत्येक मृत यात्री के आश्रितों को चार चार लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल यात्रियों को पचास पचास हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने परिवहन विभाग से कहा कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होना चाहिए।</p>
<p>बस में लगभग तीस यात्रियों के सवार होने की जानकारी सामने आयी है। कुछ यात्रियों ने हादसे के बाद बस से जैसे तैसे निकलकर स्वयं को बचाया। कुछ लोगों को वहां मौजूद लोगों ने पुलिस की मदद से बस से बाहर निकाला।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Dec 2023 12:53:14 +0530</pubDate>
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                <title>दोनों फ्लाई ओवर पर भी हादसों का खतरा</title>
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                        <![CDATA[फ्लाई ओवर पर इतने अधिक मोड़ और गड्ढ़े होने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, अक्सर यहां घटनाएं होते देखते हैं लेकिन कई तो रिपोर्ट भी नहीं हो पाती।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/danger-of-accidents-on-both-flyovers/article-64783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/dono-flyover-pr-bhi-hadso-ka-khtra...kota-news-22-12-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> दृश्य 1 -</strong> केशवपुरा फ्लाई ओवर पर दादाबाड़ी से रंगबाड़ी की तरफ जाने वाली सड़क पर जहां ढलान व उससे पहले सड़क का डामर उखड़ा हुआ है। जिससे वहां दो पहिया वाहनों के स्लिप होने की घटनाएं आए दिन हो रही है। गुरुवार को भी कई वाहन चालक इससे बचने के प्रयास में दुर्घटनाग्रस्त होते-होते बचे। यहां कई जगह पर  गड्ढ़े होने से उन पर पेचवर्क तो कर दिया लेकिन हादसों का खतरा कम नहीं हुआ है। </p>
<p><strong>दृश्य 2 - </strong>गुमानपुरा फ्लाई ओवर पर ’वाला तोप से वल्लभ नगर की तरफ आने वाली सड़क पर बीच में बड़ा गड्ढ़ा हो रहा है। साथ ही यहां फ्लाई ओवर की चार दीवारी भी क्षतिग्रस्त हो रही है। वल्लभ नगर से ’वाला तोप की तरफ जाने वाली सड़क  पर गड्ढ़ा होने से उसे तो पेचवर्क कर भर दिया गया।  लेकिन हादसों को रोक पाने में नाकाम रहे हैं। </p>
<p>यह हालत है शहर में करोड़ों रुपए की लागत से बने दो फ्लाई ओवरों की।  नगर विकास न्यास की ओर से शहर को ट्रैफिक लाइट सिग् नल फ्री बनाने के लिए जहां सड़कों को चौड़ा किया गया। वहीं फ्लाई ओवर व अंडरपास का निर्माण भी कराया गया। लेकिन कुछ समय बाद ही अंडरपास की तरह फ्लाई ओवरों पर भी कहीं गड्ढ़े हो गए तो कहीं डामर उखड़ गया है। जिससे हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में करोड़ों रुपए से अंडरपास व फ्लाई ओवर बनाए गए हैं। झालावाड़ रोड पर अनंतपुरा चौराहे पर फ्लाई ओवर, सिटी मॉल के सामने फ्लाई ओवर, गोबरिया बावड़ी में अंडरपास, एरोड्राम चौराहे पर अंडरपास, कोटड़ी चौराहे पर ग्रेट सेपरेटर, अंटाघर चौराहे पर अंडरपास, बोरखेड़ा में फ्लाई ओवर व गुमानपुरा में फ्लाई ओवर का निर्माण कराया गया। इनसे पहले दादाबाड़ी से केशवपुरा के आगे तक भी एक फ्लाई ओवर बनाया गया। शहर में एक साथ इतने अधिक फ्लाई ओवर व अंडरपास बनाने के बाद उनकी सही ढंग से न तो देखभाल की जा रही है और न ही रखरखाव किया जा रहा है। यही कारण है कि बनने के कुछ समय बाद ही अंडरपास दुर्दशा का शिकार होने लगे हैं। </p>
<p><strong>गुमानपुरा में एक दिन पहले भी हुआ हादसा</strong><br />न्यास की ओर से वल्लभ नगर चौराहे से ’वाला तोप तक इंदिरा गांधी सर्किल के ऊपर से होते हुए एस आकार में फ्लाई ओवर बनाया गया है। करीब 50 करोड़ से अधिक की लागत से बने इस फ्लाई ओवर को शुरू हुए अभी एक साल का भी समय नहीं हुआ है। उससे पहले ही इसकी सड़क पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। साथ ही कई जगह पर गिट्टी उखड़ी हुई है। जिससे अचानक आने वाले वाहन उन गड्ढ़ों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। इस फ्लाई ओवर पर मो खतरनाक हैं। जिससे भी हादसों का खतरा बना हुआ है। जानकारों के अनुसार बुधवार रात को ही इस फ्लाई ओवर पर आमने-सामने दो कारों की भिडंत हो चुकी है। गुरुवार को भी दिन के समय गड्ढ़े से बचने के प्रयास में कई दो पहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होते-होते बचे। </p>
<p><strong>लोगों की पीड़ा</strong><br />रंगबाड़ी निवासी नरोत्तम गोयल ने बताया कि वह रोजाना फ्लाई ओवर से स्कूटर से निकलते हैं। कई बार स्कूटर गिट्टी पर स्लिप हो चुका है। एक बार तो पीछे से आ रहे वाहन से कुचलने से ही बच गया। वरना जान भी जा सकती थी। तलवंडी निवासी कपिल सैनी ने बताया कि गुमानपुरा का ल्लाई ओवर काफी खतरनाक है। फ्लाई ओवर पर इतने अधिक मोड़ होने ही नहीं चाहिए। मोड के अलावा यहां गड्ढ़े होने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। अक्सर यहां घटनाएं होते देखते हैं लेकिन कई तो रिपोर्ट भी नहीं हो पाती।  </p>
<p><strong>यहां पेचवर्क व उखड़ा डामर</strong><br />न्यास द्वारा शहर का सबसे बड़ा फ्लाई ओवर दादाबाड़ी से केशवपुरा चौराहे को पार करते हुए राम जानकी मंदिर तक फ्लाई ओवर बनाया गया है। हालांकि इसे बने हुए करीब 4 साल हो गए हैं।  करीब 110 करोड़ की लागत से बने फ्लाई ओवर की सड़क पर भी कई जगह गड्ढ़े होने से उन्हें पेचवर्क कर ढका गया है। साथ ही दादाबाड़ी से रंगबाड़ी जाने वाली सड़क पर बीच-बीच में गड्ढ़े और डामर उखड़ा होने से वाहन स्लिप होने की घटनाएं हो रही हैं। इतना ही नहीं पूरे फ्लाई ओवर पर कचरे का ढेर लगा हुआ है। जिसे देख कर लगता है मानों कई दिन से सफाई ही नहीं हुई हो। लोगों का कहना है कि फ्लाई ओवर पर 20 कि.मी. का गति सूचक व संकेतक बोर्ड लगे हुए हैं। उसके बाद भी तेजी से आने वाले वाहन विशेष रूप से दो पहिया वाहन उखड़े डामर व गिट्टी पर स्लिप हो रहे हैं। जिससे आए दिन वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले हो रहे हैं।</p>
<p><strong>पहले युवक की गिरकर हो चुकी मौत</strong><br />हालांकि इस फ्लाई ओवर पर संकेतक व गति सूचक बोर्ड लगे हुए हैं। गति 30 कि.मी. और मोड पर 20 कि.मी. की निर्धारित की हुई है। लेकिन उसके बाद भी यहां मोड़ खतरनाक होने से हादसे हो रहे हैं। जानकारों के अनुसार कुछ समय पहले इस फ्लाई ओवर से गिरकर एक युवक की मौत भी हो चुकी है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />फ्लाई ओवर की सड़क पर कहीं गड्ढ़े हो रहे हैं या डामर उखड़ा हुआ है तो उसे समय-समय पर सही करवाते रहते हैं। फिर भी यदि कहीं अभी हुआ है तो उसे भी ठीक करवा दिया जाएगा। दिनभर सैकड़ों वाहन निकलने से बार-बार सडक खराब होने की संभावना रहती है लेकिन उसे ठीेक भी करवाते रहते हैं। <br /><strong>- मानसिंह मीणा, सचिव नगर विकास न्यास </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Dec 2023 16:37:24 +0530</pubDate>
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                <title>5 सालों में भी नहीं हुआ समस्या का समाधान </title>
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                        <![CDATA[आसपास के स्कूल हैं ऐसे में छात्र-छात्राओं को भी गड्ढे युक्त रोड होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/problem-not-solved-even-in-5-years/article-59771"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/5-saalo-me-bhi-nhi-hua-samsya-ka-smadhan...shahbad,-baran-news-17-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। शाहाबाद उपखंड मुख्यालय शाहाबाद क्षेत्र में कहीं सड़कें खराब है तो कहीं पुलिया टूटी हुई है। जिससे क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं  सड़कों में बड़े-बड़े खड्डे  हो चुके हैं। जिससे आए दिन दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। समरानिया से नाटई की दशा भी कुछ ऐसी बनी हुई है। जिस रोड पर कई गांव लगते हैं एवं ग्राम पंचायतें हैं वह रोड जर्जर अवस्था में हैं। ऐसे में सड़कें खराब होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समरानियां से नाटई रोड की भी हालत कुछ ऐसी ही बनी हुई है। नाटई  ग्राम पंचायत रेखा रानी सरपंच ने बताया कि 3 किलोमीटर का सफर करना मुश्किल हो जाता है सैंकड़ों लोग आए दिन अपने दैनिक कार्यों के लिए कृषि आदि से संबंधित कार्यों के लिए समरानिया आना जाना लगा रहता है। रोड खराब होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक साथ दो वाहन सामने से आ जाते हैं तो दूसरे वाहन को साइड लेने के लिए भी नीचे जगह नहीं रहती। जिसके चलते दुर्घटना अंदेशा बना रहता है शीघ्र ही लिंक रोड़ों को ठीक किया जाना चाहिए। जिससे लोग सुरक्षित पहुंच सके। </p>
<p>स्कूली बच्चों को आती है परेशानी:  इस रोड के आसपास के स्कूल हैं ऐसे में छात्र-छात्राओं को भी गड्ढे युक्त रोड होने से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल संचालक देवासी शर्मा द्वारा बताया गया की गर्मियों में भी बरसात जैसे हालात बने रहते हैं। रोड पर गड्ढे होने से आसपास का पानी गड्ढों में जमा हो जाता है। जिससे आए दिन वाहन चालक गिरते हैं उक्त समस्या बहुत बड़ी गंभीर समस्या है। इस समस्या का निदान किया जाना चाहिए। इस रोड को डबल लाइन बनाया जाए। जिससे लोगों को सुविधा मिल सके। </p>
<p><strong>नवरात्रों में लगता है मेला, श्रद्धालु परेशान</strong><br />वही नाटई में सर्दी नवरात्रों में पांच दिवसीय मिलेगा आयोजन किया जाता है जिसमें दूर-दूर से लोग मेला देखने आते हैं एवं दुर्गा पूजन आदि का आयोजन भी किया जाता है। ऐसे में खराब रोड होने के कारण लोगों को परेशानियों से गुजरना पड़ता लोगों ने बताया कि हम पिछले 5 सालों से इस रोड को बनाने की मांग करते आ रहे हैं परंतु हमारी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता जबकि सरकार जब सत्ता में आई थी उसे समय रोड को ठीक करने का वादा क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों द्वारा किया गया था जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों का गांव में आना ही बंद हो गया और बार-बार अवगत कराने के बाद भी इस रोड पर ध्यान नहीं दिया जाता। जिससे क्षेत्र के लोगों में रोज बना हुआ है।</p>
<p><strong>रोड के दोनों तरफ हो नालियों का निर्माण</strong><br />लोगों द्वारा मांग की गई है कि जिस तरह से अन्य जगह रोड का निर्माण करके दोनों तरफ नालियां बनाई गई हैं। इस तरह इस रोड का निर्माण भी किया जाए और दोनों तरफ नालियां बनाई जाए। जिससे रोड नालियों के माध्यम से पानी निकल सके और रोड पर पानी जमाना हो रोड पर पानी जमा होने से वाहन चालकों को एवं अन्य राहगीरों को पैदल चलने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>श्मशान घाट के रास्ते में भरता है पानी</strong><br />वही ग्राम फरेदुआ ग्राम पंचायत गदरेटा का मुक्ति धाम एक रोड पर स्थित है ऐसे में क्षतिग्रस्त रोड  में पानी भरता है वह मुक्ति धाम की तरफ जाता है। रास्ते पर पानी जाता है ऐसे में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है पानी की वजह से मुक्ति धाम का रास्ता भी खराब हो चुका है परंतु लापरवाही के चलते इस रोड की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा जिससे लोगों में रोष  बना हुआ है।</p>
<p>पिछले 5 सालों से उक्त सड़क को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया  परंतु कोई सुनवाई उक्त रोड को लेकर नहीं की गई जबकि अन्य गांव की सड़कों को नवीनीकरण किया गया दोहरीकरण किया परंतु इस रोड पर किसी का ध्यान नहीं। <br /><strong>- रेखा रानीबॉस, सरपंच ग्राम पंचायत नाटई, पंचायत समिति शाहाबाद।</strong></p>
<p>जर्जर सड़क होने से क्षेत्र के सैकड़ों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क खराब होने से रात्रि के समय सफर करना मुश्किल हो जाता है। दुर्घटना का अंदेशा लगा रहता है। शीघ्र ही सड़क की मरम्मत कराई जानी चाहिए।<br /><strong>- अवधेश जैन, निवासी फरेदुआ।    </strong></p>
<p>सड़क जर्जर और खराब होने की वजह से क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। जिला कलक्टर से मांग करते हैं शीघ्र ही ठीक किया जाए।<br /><strong>- प्रकाश मेहता, निवासी, अजरोंडा।</strong></p>
<p>उक्त रोड पर कई स्कूल हैं ऐसे में छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आए दिन वाहन चालक चोटिल होते हैं। रोड की स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं है। सामने से कोई वहां आता है तो साइड लेने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>-  देवासी शर्मा, स्कूल संचालक।    </strong><br />    <br />रोड की स्थिति को लेकर जानकारी ली जाएगी और शीघ्र समस्या का समाधान किया जाएगा। <br /><strong>- हरिप्रसाद मीणा, अधिशासी अभियंता, शाहाबाद।        </strong></p>]]>
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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 18:19:57 +0530</pubDate>
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