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                <title>Strategic Autonomy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Strategic Autonomy RSS Feed</description>
                
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                <title>हमसे खरीदें तेल या होर्मुज पर करें कब्जा: जिनके पास तेल की कमी है, वे होर्मुज जाकर खुद ले लें, ब्रिटेन को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दो टूक</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेट ईंधन की कमी से जूझ रहे देशों को 'बहादुरी' दिखाने और होर्मुज जलडमरूमध्य से खुद तेल लाने की चुनौती दी है। उन्होंने साफ किया कि ईरान के खिलाफ साथ न देने वाले देशों की अमेरिका मदद नहीं करेगा। ट्रंप ने देशों को अमेरिका से तेल खरीदने या खुद संघर्ष करने की दोटूक नसीहत दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/buy-oil-from-us-or-capture-hormuz-those-who-are/article-148624"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि जो देश जेट ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं उन्हें थोड़ी बहादुरी दिखाकर होर्मुज जलडमरुमध्य जाकर ईंधन ले लेना चाहिए। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर जारी एक संदेश में कहा कि ऐसे देशों को अव्वल तो अमेरिका से कच्चा तेल खरीदना चाहिए, क्योंकि उसके पास यह पर्याप्त मात्रा में है। इसके साथ ही इन देशों को थोड़ी बहादुरी दिखाकर होर्मुज़ का रुख करना चाहिए क्योंकि अमेरिका अब इनकी मदद नहीं करेगा।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, "ब्रिटेन जैसे देश जिन्होंने ईरान को हराने में शामिल होने से मना कर दिया और जो देश होर्मुज जलडमरुमध्य बंद होने के कारण जेट ईंधन हासिल नहीं कर पा रहे, उनके लिए मेरे पास एक सुझाव है। पहला, अमेरिका से खरीदें। हमारे पास खूब सारा कच्चा तेल है। दूसरा, थोड़ी हिम्मत दिखाएं और जलडमरुमध्य जाकर तेल ले लें।" उन्होंने कहा, "आपको अपने लिए लड़ना सीखना होगा। अब अमेरिका आपकी मदद नहीं करेगा, जैसे आपने हमारी मदद नहीं की। ईरान को तो हराया जा चुका है। मुश्किल काम हो चुका है। जाइए अपना तेल ले लीजिए।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आया। ब्रेंट क्रूड फिलहाल 112-115 डॉलर प्रति बैरेल है और इससे बनने वाले जेट ईंधन की कमी से भी कई देश जूझ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:29:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच राजनाथ ​सिंह का बड़ा बयान: बोले-ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता जरूरी, विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन' में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता के लिए MSMEs और स्टार्टअप्स को AI व रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीक अपनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर 'अदिति' और 'iDEX' चुनौतियों के नए संस्करण भी लॉन्च किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-west-asia-crisis-rajnath-singhs-big-statement-said/article-147099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत को मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने के मिशन मोड में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है। </p>
<p>राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा आयोजित दो दिन के राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में गुरुवार को 'उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियां' विषय पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों, रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार विजेताओं, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निजी रक्षा कंपनियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों को संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान और इजराइल के बीच तनाव तक चल रहे संघर्ष इस बात के प्रमाण हैं कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और प्रतिरोधी ड्रोन प्रौद्योगिकियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल उत्पाद स्तर पर ही नहीं बल्कि कलपुर्जे के स्तर पर भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, ड्रोन के ढांचों से लेकर उसके सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरियों तक, सब कुछ भारत में ही निर्मित होना चाहिए। यह कोई आसान कार्य नहीं है। अधिकांश देशों में जहां ड्रोन बनाए जाते हैं, वहां अनेक महत्वपूर्ण कलपुर्जे वर्तमान में चीन से आयात किए जाते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण बड़े उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों और नवोन्मेषकों के योगदान पर निर्भर करता है, साथ ही सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, जो देश की विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप हो। उन्होंने निजी क्षेत्र से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया और सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया ताकि भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के 14वें संस्करण और आईडेक्स ढांचे के अंतर्गत 'अदिति चुनौतियों' के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी से प्राप्त कुल 107 समस्या विवरण जारी किए गए, जिनमें 82 रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के अंतर्गत और 25 अदिति चुनौतियों के अंतर्गत शामिल हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से संबंधित 101 नवाचार चुनौतियों की एक नई पहल भी शुरू की गई, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों द्वारा डिजाइन-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करना है। इन चुनौतियों को रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा और विजेता नव-उद्यमों को मार्गदर्शन, परीक्षण सुविधाएँ तथा उनकी आपूर्ति श्रृंखला में संभावित एकीकरण के अवसर प्रदान किए जाएँगे।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने आईडेक्स और अदिति को परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से नव-उद्यमों, नवोन्मेषकों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को रक्षा बलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन समाधान विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक लगभग 676 नव-उद्यम, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा व्यक्तिगत नवोन्मेषक रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं। अब तक 548 अनुबंध किए जा चुके हैं और 566 चुनौतियाँ शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रतिरूपों को लगभग 3853 करोड़ रुपये के मूल्य पर खरीद के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त लगभग 2326 करोड़ रुपये के 45 खरीद अनुबंध पहले ही किए जा चुके हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि नवाचार धीरे-धीरे ठोस उत्पादों और प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित हो रहा है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, स्वचालन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन है। उन्होंने इन उद्यमों और नव-उद्यमों से इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने और समेकित करने का आह्वान किया ताकि संसाधनों और क्षमताओं का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी और संयोगात्मक विनिर्माण जैसी प्रौद्योगिकियां वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र को नया रूप दे रही हैं, जबकि डिजिटल ट्विजन और उन्नत अनुकरण उपकरण नई संभावनाओं को खोल रहे हैं। डिजिटल ट्विजन का अर्थ वास्तविक प्रणाली का आभासी मॉडल तैयार करना है, जिससे जटिल प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और अधिक सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सुदृढ़ करने के लिए कई पहलें की हैं। इस वर्ष के केंद्रीय बजट में इन्हें इक्विटी, तरलता और व्यावसायिक समर्थन प्रदान करने के लिए तीन स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे ये अग्रणी उद्यम बन सकें। इसका उद्देश्य इनके विकास को तेज करना और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से सरकार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। पंजीकरण और पहचान को सरल बनाने के लिए उद्यम पोर्टल और उद्यम सहायक पोर्टल जैसे डिजिटल मंच शुरू किए गए हैं, ताकि छोटे उद्योगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि उद्यमिता की बढ़ती भावना को दर्शाती है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि नव-उद्यम अपने अनूठे विचारों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बन रहे हैं और कई अल्प समय में ही यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त कर रहे हैं। निकट भविष्य में और भी ऐसे उद्यम सामने आएँगे। इसके लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और समर्पण आवश्यक है। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों से नवाचार करने, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।</p>
<p>रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना तथा डिजाइन, विकास और निर्माण से लेकर संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के एकीकरण को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि 200 समस्या विवरण इन उद्यमों, उद्योगों, नव-उद्यमों और युवा नवोन्मेषकों को आधुनिक उत्पाद विकसित करने और अपने कौशल को बढ़ाने का अवसर देंगे।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को सुधार वर्ष के रूप में मनाते हुए मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना, गुणवत्ता प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाना शामिल है। रक्षा क्षेत्र में कार्यरत उद्योगों का एक डिजिटल डाटाबेस 'सृजन दीप' भी बनाया गया है, जिसमें 40,000 से अधिक उद्योग सूचीबद्ध हैं, ताकि अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिल सके।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग के पाँच प्रकाशनों का विमोचन भी किया, जिनका उद्देश्य नीतिगत पहलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, रक्षा निर्यात को प्रोत्साहित करना और उद्योग हितधारकों के लिए व्यापार सुगमता सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्री ने एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया, जिसमें 20 बड़ी रक्षा कंपनियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भागीदार, आपूर्तिकर्ता और नवोन्मेषक के रूप में शामिल करने के लिए अपने कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही 24 भारतीय और विदेशी कंपनियां उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों जैसे स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, संयोगात्मक विनिर्माण और स्मार्ट सामग्री का प्रदर्शन कर रही हैं।</p>
<p>इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी कामत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:37:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा-अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में इंडिया का विशेष स्थान, आने वाला कल भारत का, हर पक्ष से कर सकता है बात</title>
                                    <description><![CDATA[फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत की संतुलित विदेश नीति की सराहना करते हुए उसे भविष्य की वैश्विक शक्ति बताया। उन्होंने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया और पीएम मोदी के साथ कूटनीतिक चर्चा की। स्टब ने भारत को एक व्यावहारिक देश बताया जो रूस, अमेरिका और यूक्रेन जैसे विरोधी पक्षों के बीच संवाद का सेतु है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/finnish-president-alexander-stubb-said-india-has-a-special/article-145683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/modi-and-finland.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने शनिवार को भारत की जमकर सराहना की है। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जो वैश्विक विवादों में हर पक्ष से बात कर सकता है। उन्होंने भारत की विदेश नीति को बहुत व्यावहारिक और वास्तविक बताया। उन्होंने कहा, आने वाला कल भारत का है। स्टब के अनुसार, भारत की यह खूबी उसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक विशेष स्थान दिलाती है। यह बात उन्होंने बढ़ती भू-राजनीतिक तनावों के बीच कही। स्टब ने भारत के भविष्य को लेकर बहुत उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि भारत की आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और गौरवशाली इतिहास यह बताते हैं कि आने वाला समय भारत का ही है। </p>
<p>उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को 1945 के बजाय आज की हकीकत के हिसाब से काम करना चाहिए। राष्ट्रपति स्टब ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। मुंबई में समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने इस मुलाकात का जिक्र किया। स्टब ने कहा, भारत के प्रधानमंत्री के साथ तीन घंटे बिताना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात थी। हमने विश्व भर के संघर्षों, चीन, अमेरिका, रूस और यूरोप के साथ संबंधों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों पर भी व्यापक और सार्थक बातचीत की। स्टब ने कहा कि आधुनिक संघर्ष स्थानीय युद्धों से आगे बढ़कर क्षेत्रीय संकट बन गए हैं। उन्होंने कहा स्थिति नाजुक है। स्टब ने क्षेत्र में तनाव कम करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही देश झगड़ों से दूर रहने की कोशिश करें, लेकिन कोई भी इसके ग्लोबल असर से बचा नहीं जा सकता, क्योंकि इससे तेल की कीमतें, व्यापार और समुद्री मार्ग हमेशा प्रभावित होते हैं।</p>
<p><strong>भारत की संतुलित विदेश नीति की तारीफ</strong></p>
<p>फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत की संतुलित विदेश नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को वैश्विक संघर्षों में कई पक्षों से संबंध बनाए रखने में मदद करती है। स्टब के अनुसार, भारत उन दुर्लभ देशों में से है जो लगभग सभी से बात कर सकता है। इसकी विदेश नीति व्यावहारिक और यथार्थवादी है। भारत के गहरे गठबंधन नहीं हैं, जो इसे काफी खुला बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत के रूस, यूक्रेन और अमेरिका के साथ संबंध उसे कूटनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में रखते हैं।</p>
<p><strong>रूस का मंसूबा नाकाम</strong></p>
<p>यूक्रेन में चल रहे युद्ध का जिक्र करते हुए स्टब ने कहा कि रूस का आक्रमण रणनीतिक रूप से विफल रहा है। रूस यूक्रेन को रूसी बनाना चाहता था, लेकिन यूक्रेन यूरोपीय बन गया। वह नाटो के विस्तार को रोकना चाहता था, पर फिनलैंड और स्वीडन इसमें शामिल हो गए। रूस यूरोप का सैन्यीकरण कम करना चाहता था, लेकिन अब रक्षा खर्च बढ़ रहा है। ईरान से जुड़े तनावों पर स्टब ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने क्षेत्र में जोखिम बढ़ा दिए हैं। उन्होंने ईरान के जवाबी हमलों को रणनीतिक गलती बताया।</p>
<p><strong>परमाणु शक्ति नहीं बनेगा फिनलैंड </strong></p>
<p>फिनलैंड के नाटो में शामिल होने पर उन्होंने साफ किया कि यह फैसला रूस के हमले के बाद अपनी सुरक्षा के लिए लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिनलैंड परमाणु शक्ति नहीं बनेगा और न ही अपनी जमीन पर परमाणु हथियार रखेगा, लेकिन वह नाटो की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा जरूर रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:05:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरानी जहाज पर हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उठाए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल, कहा-भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हिंद महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद मोदी सरकार की रणनीतिक चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे भारत की संप्रभुता और 'अतिथि देवो भव' के संस्कारों के खिलाफ बताया। गहलोत ने नेहरू और इंदिरा गांधी की निडर कूटनीति का हवाला देते हुए सरकार से स्वायत्तता बनाए रखने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-the-attack-on-the-iranian-ship-former-cm-ashok/article-145338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ashok-gehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: हिन्द महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में। नेहरू के गुट निरपेक्ष आंदोलन से लेकर इंदिरा की निडर कूटनीति तक, भारत कभी किसी महाशक्ति के दबाव में नहीं झुका।</p>
<p>हम सभी को 2013 का देवयानी खोबरागड़े मामला भी याद करना चाहिए जब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों की सुविधाएं छीनकर जैसे को तैसा जवाब दिया था। भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश के दबाव में आकर अपनी संप्रभुता एवं नीतियों से समझौता नहीं किया। परन्तु हमारे ही समुद्री पड़ोस में मिलान 2026 के मेहमान ईरानी जहाज का शिकार होना और हमारी रणनीतिक चुप्पी, भारत की साख पर सवाल उठाती है।</p>
<p>अमेरिका की इस मनमानी पर चुप रहना अतिथि देवो भव के हमारे संस्कारों और सैन्य गौरव के खिलाफ है। हिंद महासागर का असली रक्षक कहलाने वाले भारत की चुप्पी क्या कूटनीतिक दबाव का संकेत है। एक उभरती महाशक्ति को अपने क्षेत्र में होने वाली ऐसी हिंसक घटनाओं पर मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए। अगर हम हिंद महासागर के असली रक्षक हैं, तो हमें अपनी स्वायत्तता और मेहमान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 13:24:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किम जोंग उन का दावा: बोलें अमेरिका शत्रुतापूर्ण नीति छोड़ उत्तर कोरिया के परमाणु राष्ट्र संपन्न दर्जा स्वीकार कर ले, तो सुधर सकते हैं संबंध </title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के लिए परमाणु संपन्न राष्ट्र के संवैधानिक दर्जे को स्वीकारने की रखी शर्त। शत्रुतापूर्ण नीति त्यागने पर ही बातचीत संभव। दक्षिण कोरिया को सबसे बड़ा दुश्मन बताया। किम जोंग उन ने दोहराया परमाणु शस्त्रागार के विस्तार का संकल्प।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/kim-jong-un-claims-that-relations-can-improve-if-america/article-144736"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kim-jong-un.png" alt=""></a><br /><p>प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कहा है कि यदि अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीति छोड़कर उत्तर कोरिया के परमाणु संपन्न राष्ट्र के संवैधानिक दर्जे को स्वीकार करता है, तो उत्तरी कोरिया अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार होगा। रिपोर्ट के अनुसार, वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं कांग्रेस के अवसर पर आयोजित एक परमाणु सैन्य परेड में किम जोंग उन ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, यदि अमेरिका उत्तर कोरिया के संविधान में परिभाषित परमाणु राष्ट्र की वर्तमान स्थिति का सम्मान करता है और उत्तर कोरिया के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति वापस लेता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम अमेरिका के साथ अच्छे संबंध स्थापित न कर सकें।</p>
<p>किम जोंग उन ने कहा कि अमेरिका और उत्तर कोरिया साथ चल सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब अमेरिका यह स्वीकार कर ले कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार स्थायी रूप से रहेंगे। उत्तरी कोरिया के सुप्रीम लीडर की टिप्पणियों को अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खोलने के रूप में देखा गया। किम जोंग उन ने हालांकि दक्षिण कोरिया के साथ किसी भी राजनयिक सुधार की उम्मीदों को खारिज करते हुए उन्हें सबसे बड़ा शत्रु करार दिया।</p>
<p>इसके आगे किम जोंग उन ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया ने देश की पहचान एक परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थायी रूप से स्थापित कर दी है और विरोधियों को स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वैश्विक वातावरण में मौलिक बदलाव नहीं आता, उत्तरी कोरिया अपने परमाणु हथियारों का त्याग नहीं करेगा। सुप्रीम लीडर ने इस बात पर जोर दिया कि देश के परमाणु सशस्त्र बलों का और अधिक विस्तार और सुदृढ़ीकरण करना पार्टी के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा, हमारे पास वार्षिक आधार पर राष्ट्रीय परमाणु शक्ति को मजबूत करने की एक दीर्घकालिक योजना है और हम परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ परमाणु अभियानों के साधनों और दायरे के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करेंगे।</p>
<p>किम जोंग उन के अनुसार, उत्तर कोरिया का परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र का दर्जा संभावित विरोधियों को रोकने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाये रखने का काम करता है। उन्होंने परमाणु शक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा, हितों के लिए एक प्रमुख सुरक्षा कवच बताया। किम ने एशिया-प्रशांत में अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधनों पर स्वीकार्य सीमा से बाहर विस्तार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सैन्य गतिविधियां एक तनावपूर्ण और असामान्य स्थिति पैदा कर रही हैं, जो कोरियाई प्रायद्वीप और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 18:01:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने की देश की पहली रक्षा औद्योगिक रणनीति की घोषणा, आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देने पर जोर </title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ऐतिहासिक 'रक्षा औद्योगिक रणनीति' लॉन्च की है। इसका लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देकर 1.25 लाख नौकरियां पैदा करना और नाटो के 2% रक्षा व्यय लक्ष्य को हासिल करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/canadian-pm-mark-carney-announces-countrys-first-defense-industrial-strategy/article-143667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/canada.png" alt=""></a><br /><p>ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने देश की पहली रक्षा औद्योगिक रणनीति की घोषणा कर दी है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना, उच्च वेतन वाली नौकरियों का सृजन करना और तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में कनाडा की रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करना है। पीएम कार्नी ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था के कमजोर पडऩे और प्रौद्योगिकी के कारण संघर्षों के विस्तार ने कनाडा की रक्षा नीति में बदलाव को आवश्यक बना दिया है। उन्होंने कहा, कनाडा की नयी सरकार कनाडाई सशस्त्र बलों (सीएएफ) के पुनर्निर्माण, पुन:सज्जा और पुनर्निवेश पर केंद्रित है। कनाडा इस वित्त वर्ष में नाटो के दो प्रतिशत रक्षा व्यय लक्ष्य को हासिल करने की राह पर है और सीएएफ में शामिल होने के लिए आवेदनों में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। </p>
<p>यह घोषणा ऐसे समय में की गयी है, जब कनाडाई सरकार सीएएफ के आधुनिकीकरण, खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाने और घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दे रही है, ताकि सैनिकों को कनाडा और उसके सहयोगियों की रक्षा के लिए आवश्यक उपकरण समय पर उपलब्ध कराए जा सकें। पीएम कार्नी ने इस रणनीति को सुरक्षा और समृद्धि दोनों के लिए एक खाका बताया और कहा, कनाडा की रक्षा करना, कनाडा का निर्माण करना है। सुरक्षा और समृद्धि एक-दूसरे की पूरक आधारशिलाएं हैं। हमारी नयी रक्षा औद्योगिक रणनीति यह सुनिश्चित करती है कि कनाडा एक संप्रभु राष्ट्र बना रहे और अपने भविष्य का स्वयं निर्धारण करे। </p>
<p>नयी रणनीति के तहत, रक्षा खरीद में कनाडाई आपूर्तिकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, नवाचार में निवेश बढ़ाया जाएगा और खरीद प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया जाएगा। सरकारी अनुमानों के अनुसार, इससे अगले 10 वर्षों में 180 अरब कनाडाई डॉलर के रक्षा खरीद अवसर और 290 अरब डॉलर का रक्षा-संबंधी पूंजी निवेश सृजित होगा। वर्ष 2035 तक इससे लगभग 125 अरब डॉलर का आर्थिक लाभ, 1.25 लाख उच्च वेतन वाली नौकरियां, रक्षा निर्यात में 50 प्रतिशत वृद्धि और कनाडाई कंपनियों को दिये जाने वाले रक्षा अनुबंधों का हिस्सा 70 प्रतिशत तक बढऩे की संभावना है।</p>
<p>राष्ट्रीय रक्षा मंत्री डेविड जे. मैकगिन्टी ने कहा, सरकार की यह प्रतिबद्धता सुनिश्चित करती है कि कनाडा के पास अपने देश की रक्षा, संप्रभुता की सुरक्षा और वर्तमान एवं भविष्य के खतरों से निपटने के लिए आवश्यक क्षमताओं तक सुरक्षित, समयबद्ध और विश्वसनीय पहुंच हो। यह महत्वाकांक्षी होने का समय है। </p>
<p>रणनीति के पांच प्रमुख स्तंभ तय किये गये हैं। पहला, घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देकर कनाडा को रक्षा उत्पादन में अग्रणी बनाना। दूसरा, नयी रक्षा निवेश एजेंसी के माध्यम से खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना। तीसरा, नवाचार और निर्यात को बढ़ावा देना, जिसमें लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए चार अरब डॉलर का डिफेंस प्लेटफॉर्म, ड्रोन इनोवेशन हब के लिए तीन वर्षों में 10.5 करोड़ डॉलर और अनुसंधान एवं विकास के लिए 45.9 करोड़ डॉलर का विमान प्लेटफॉर्म शामिल है। </p>
<p>चौथा, श्रमिकों और आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा के लिए कनाडाई रक्षा उद्योग रेजिलिएंस कार्यक्रम शुरू करना और नाइट्रोसेलुलोज जैसे महत्वपूर्ण पदार्थों का घरेलू उत्पादन। पांचवां, प्रांतों, क्षेत्रों और स्वदेशी समुदायों के साथ समन्वय बढ़ाकर राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा अंतराल को कम करना। </p>
<p>रणनीति के तहत सीएएफ की तैयारियों के लिए भी लक्ष्य तय किये गये हैं, जिनमें अगले दशक में समुद्री बेड़े की सेवा-योग्यता 75 प्रतिशत, थल सेनाओं की 80 प्रतिशत और एयरोस्पेस की 85 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य शामिल है। रक्षा खरीद मामलों के राज्य सचिव स्टीफन फुहर ने कहा कि इस रणनीति और डिफेंस इन्वेस्टमेंट एजेंसी की स्थापना से सशस्त्र बलों को समय पर आवश्यक क्षमताएं मिलेंगी और साथ ही कनाडा की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 14:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद सस्ती होगी अमेरिकी दाल? कीमतों पर पड़ेगा बड़ा असर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने "ऐतिहासिक" इंडिया-US ट्रेड डील की "मुख्य शर्तों" पर अपनी फैक्टशीट में बदलाव किया है, जिसमें यह दावा हटा दिया गया है कि नई दिल्ली "कुछ खास दालों" पर टैरिफ कम करेगी और $500 बिलियन की खरीद "कमिटमेंट" से जुड़े शब्दों में बदलाव किया गया है,]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-india-us-trade-deal-american-pulses-will-become-cheaper-there/article-142701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)9.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तथाकथित “ऐतिहासिक” इंडिया-US ट्रेड डील से जुड़ी व्हाइट हाउस फैक्टशीट में अहम बदलाव किए हैं। अपडेटेड दस्तावेज़ में उन दावों को हटा दिया गया है जिनमें कहा गया था कि भारत “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कम करेगा। साथ ही $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी सामान खरीदने के “कमिटमेंट” शब्द को बदलकर “इरादा” कर दिया गया है।</p>
<p>पहले जारी फैक्टशीट में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स के साथ “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कटौती का उल्लेख था। संशोधित संस्करण में दालों का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है। कृषि आयात भारत के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि देश दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए इन श्रेणियों में ऊंचे टैरिफ लगाए जाते रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा, पहले के टेक्स्ट में भारत द्वारा $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, ICT, कृषि और अन्य उत्पाद खरीदने का “वादा” बताया गया था। अब कृषि उत्पादों का उल्लेख हटाते हुए इसे केवल “इरादा” कहा गया है। डिजिटल सर्विसेज़ टैक्स हटाने संबंधी दावा भी संशोधित कर दिया गया है।</p>
<p>ये बदलाव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आलोचना के बाद सामने आए, जिन्होंने डील को “PR में लिपटा धोखा” बताया था। वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारतीय किसानों और संवेदनशील सेक्टरों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और डील “फेयर, बराबर और बैलेंस्ड” है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हमारी विदेश नीति की बुनियाद है स्वतंत्र विकल्प और रणनीतिक स्वतंत्रता: विदेश मंत्री एस जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि शेख हसीना की भारत में मौजूदगी निजी निर्णय है। भारत बांग्लादेश से अच्छे संबंध चाहता है। पुतिन की यात्रा से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता प्रभावित नहीं होगी। भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-foundation-of-our-foreign-policy-is-free-choice-and/article-135112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा कि भारत में उनकी मौजूदगी उनकी निजी पसंद है और यह उसी स्थिति से जुड़ी है, जो पिछले साल बांग्लादेश में घटी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत, बांग्लादेश का अच्छा पड़ोसी और शुभचिंतक है। बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग के बावजूद भारत ने अभी तक इस पर कोई सहमति नहीं दी है।</p>
<p>पिछले महीने हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। एक कार्यक्रम में पूछा गया कि क्या हसीना भारत में जितनी चाहें उतनी देर रह सकती हैं? इस पर जयशंकर ने कहा कि यह फैसला उनका अपना है। उन्होंने कहा कि वह एक खास परिस्थिति में भारत आई थीं और वही परिस्थितियां तय करेंगी कि आगे क्या होगा। भारत-बांग्लादेश संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत हमेशा यह चाहेगा कि पड़ोसी देश में लोकतांत्रिक माहौल मजबूत रहे।</p>
<p><strong>पुतिन की यात्रा पर भारत का स्पष्ट संदेश</strong></p>
<p>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस संबंध पिछले 70-80 साल से सबसे स्थिर बड़े रिश्तों में रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुतिन की यात्रा से भारत-अमेरिका व्यापार समझौता प्रभावित नहीं होगा। जयशंकर ने स्पष्ट कहा, भारत सभी बड़े देशों से रिश्ते रखता है। किसी भी देश को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि उसे हमारे फैसलों पर वीटो जैसा असर मिलेगा।</p>
<p><strong>अमेरिका से व्यापार बातचीत पर भारत का रुख</strong></p>
<p>वर्तमान अमेरिकी प्रशासन के लिए व्यापार बड़ा मुद्दा है। जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों के अनुसार ही बातचीत करेगा। उन्होंने कहा, डिप्लोमेसी किसी को खुश करने के लिए नहीं होती, यह देश के हितों की रक्षा के लिए होती है। अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50% तक शुल्क लगाया है और रूसी तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त टैक्स लगाया था, जिसके कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है। भारत और अमेरिका अभी एक व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि इस समझौते में भारत के किसानों, मजदूरों, छोटे कारोबारियों और मध्यम वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ा जाएगा।</p>
<p><strong>भारत की रणनीतिक आजादी पर जोर</strong></p>
<p>पुतिन की यात्रा पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि एक बड़े और उभरते हुए देश के रूप में भारत सभी महत्वपूर्ण देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि हमारी विदेश नीति की बुनियाद है स्वतंत्र विकल्प और रणनीतिक स्वतंत्रता। यही आगे भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 11:42:46 +0530</pubDate>
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