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                <title>Geopolitics - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान ने अमेरिकी मांगों पर जताई सहमति, पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म होने की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सैन्य संघर्ष समाप्त करने की वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति जता दी है। जून 2026 में हुए एक अहम समझौते के तहत हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन बहाल करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की समय सीमा तय की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump-(2).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने को लेकर हुई वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका के लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति जतायी थी। ट्रंप ने कहा, "हमने उन्हें सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित कर दिया है। उनके पास कुछ मिसाइलें बची हैं, जिन्हें भी हम नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने हमारी लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है।"</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून की रात ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। समझौते में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन बहाल करने की समय सीमा भी निर्धारित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:30:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-इजरायल के बीच भूमि आवंटन समझौता: यरुशलम में बनेगा अमेरिकी दूतावास का स्थायी परिसर, ट्रंप के फैसले को मिली नई रफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह कदम 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी मानने के अमेरिकी फैसले की दिशा में अहम माना जा रहा है। इस निर्णय पर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद और विरोध देखने को मिला था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/land-allocation-agreement-between-america-and-israel-permanent-complex-of/article-158636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/02.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। इजरायल और अमेरिका ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटन संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री गिदोन सार और इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने यरुशलम के मेयर मोशे लियोन की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत यरुशलम में अमेरिकी दूतावास के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए भूमि आवंटित की गई है, जिसे इजरायल अपनी शाश्वत राजधानी मानता है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सरकार के उस निर्णय के क्रियान्वयन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत दूतावास के लिए एलनबी परिसर आवंटित किया गया। यह उस कूटनीतिक प्रक्रिया का भी महत्वपूर्ण चरण है जिसकी शुरुआत दिसंबर 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दिए जाने के साथ हुई थी। गौरतलब है कि, ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर 2017 में यरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी और 14 मई 2018 को अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम स्थानांतरित कर दिया था। इस फैसले के बाद फ़िलीस्तीनी क्षेत्रों में अशांति फैल गई थी और अरब जगत के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।</p>
<p>इजरायल यरुशलम को अपनी एकीकृत और अविभाज्य राजधानी मानता है, जबकि अधिकांश देश पूर्वी यरुशलम के इजरायल में विलय को मान्यता नहीं देते। उनका मानना है कि यरुशलम की अंतिम स्थिति फ़िलीस्तीनियों और इजरायल के बीच आपसी सहमति से तय की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:25:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कतर की मध्यस्थता रंग लाई: दोहा में अमेरिका-ईरान की अप्रत्यक्ष बातचीत बढ़ी आगे, जल्द होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[कतर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में समझौता ज्ञापन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। दोनों पक्ष निकट भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगली बैठक आयतुल्ला अली खामेनेई के अंतिम जनाज़े के बाद आयोजित की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/qatars-mediation-bears-fruit-us-iran-indirect-talks-progress-in-doha/article-158641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। कतर ने कहा है कि दोहा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता में हाल में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से जुड़े मुद्दों पर "सकारात्मक प्रगति" हुई है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, "कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने दोहा में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई और यह लेक लुसर्न शिखर सम्मेलन के परिणामों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।"</p>
<p>उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने निकट भविष्य में वार्ता जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है। अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा और रियासती जनाज़े के बाद यथाशीघ्र आयोजित की जायेगी। उल्लेखनीय है कि अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में मृत्यु हुई थी। उनके जनाज़े की अंतिम यात्रा शुक्रवार से शुरू होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 14:14:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: आज दोहा में होगी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, तेहरान ने तुरंत किया खंडन</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहा में अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा किया, लेकिन ईरान ने ऐसी किसी निर्धारित बातचीत से इनकार कर दिया। दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों से कूटनीतिक तनाव और अविश्वास उजागर हुआ। इस बीच युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-america-iran-peace-talks-will-be-held/article-158494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>दोहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में वार्ता होगी, जबकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में वाशिंगटन के साथ किसी भी स्तर की वार्ता निर्धारित नहीं है। ट्रंप ने कहा कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जैरेड कुशनर दोहा जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चस्तरीय बैठकों के साथ-साथ तकनीकी स्तर की वार्ता भी जारी रहेगी।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया था और यह बैठक दोहा में होगी, हालांकि उन्होंने इसके बारे में कोई अन्य विवरण नहीं दिया। अमेरिका के दो अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि विटकॉफ और कुशनर दोहा जा रहे हैं। उनके अनुसार वाशिंगटन युद्धविराम को व्यापक समझौते में बदलने के उद्देश्य से वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा,"विशेष दूत विटकॉफ और जारेड कुशनर इस सप्ताह उच्चस्तरीय बैठकों के लिए दोहा जाएंगे। इन बैठकों के समानांतर तकनीकी स्तर की वार्ता भी होगी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी ओर से युद्धविराम का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। यदि हिंसा हुई तो उसका जवाब भी उसी प्रकार दिया जाएगा।" अमेरिका और ईरान ने 17 जून को 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य चार महीने से जारी संघर्ष समाप्त करना था। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने शत्रुता समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति व्यक्त की थी, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का समुद्री परिवहन होता है।</p>
<p>ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान की ओर से औपचारिक वार्ता से इनकार किये जाने के बावजूद अमेरिका कूटनीतिक प्रयास जारी रखना चाहता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने किसी भी आसन्न वार्ता की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत निर्धारित नहीं है। उन्होंने ईरान में संवाददाताओं से कहा, "अमेरिकी प्रतिनिधियों के कतर जाने का ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।"</p>
<p>दोनों पक्षों के विरोधाभासी बयानों से उनके बीच गहरे अविश्वास का संकेत मिलता है। साथ ही हालिया सैन्य टकरावों के बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते तक पहुंचने की संभावना पर भी सवाल खड़े हो गये हैं। बघाई ने कहा कि ईरान और अमेरिका अभी अंतिम समझौते पर बातचीत के चरण में नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल तेहरान की प्राथमिकता हालिया मध्यस्थता के बाद हुए समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू कराना है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "समझौता ज्ञापन की धारा 13 के अनुसार अंतिम समझौते पर वार्ता तभी शुरू हो सकती है, जब धारा 1, 4, 5, 10 और 11 का क्रियान्वयन शुरू हो जाए।" बघाई के अनुसार अमेरिका ने धारा 10 के तहत ईरानी तेल की बिक्री से संबंधित लाइसेंस जारी किए हैं, जबकि तेहरान धारा 11 के तहत ईरान की जब्त संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सिलसिले में इस सप्ताह के अंत में ईरान का एक विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल दोहा जाएगा, लेकिन इसका अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा से कोई संबंध नहीं है।</p>
<p>इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि यदि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा तो ईरान भी समझौते का सम्मान करेगा, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की धमकी का ईरान दृढ़ता से जवाब देगा। उन्होंने कहा, "यदि अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां निभाता है तो ईरान भी समझौते के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा," लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि देश अपने हितों की रक्षा करने में कोई हिचकिचाहट नहीं करेगा।</p>
<p>ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कतर में जमी ईरान की लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से आधी राशि तेहरान को वापस मिलेगी। यह मुद्दा वर्तमान कूटनीतिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच ईरान ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि अन्य देश वहां बारूदी सुरंग हटाने के अभियान में भाग लें। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम ग़रीबाबादी ने कहा कि जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान को अस्वीकार किया, जिसमें फ्रांस, ओमान और अन्य देशों की संभावित भूमिका का उल्लेख किया गया था।</p>
<p>ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "समझौता ज्ञापन के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरंग हटाने का कार्य केवल ईरान करेगा। किसी अन्य देश को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।" उन्होंने कहा कि स्थिति अब भी संवेदनशील और जटिल बनी हुई है तथा फ्रांस को भड़काऊ बयान देकर इसे और जटिल नहीं बनाना चाहिए। उधर इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान और लेबनान दोनों से जुड़े युद्धविराम समझौतों को एक-दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया, जबकि इजरायल दोनों मामलों को अलग-अलग रखना चाहता था। </p>
<p>काट्ज ने कहा कि अमेरिका ने इजरायल को तब तक लेबनान के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का समर्थन दिया है, जब तक हिजबुल्ला पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता। इजरायल और लेबनान के बीच समझौता हो चुका है, फिर भी लेबनान की संसद के अध्यक्ष और हिजबुल्ला के प्रमुख सहयोगी नबीह बेरी ने अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि "इसका क्रियान्वयन नहीं होगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:12:36 +0530</pubDate>
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                <title>चीन का अमेरिका पर बड़ा आर्थिक प्रहार, 46 अमेरिकी कंपनियों के उत्पादों की खरीद पर लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने सैन्य दिग्गज लॉकहीड मार्टिन सहित 46 अमेरिकी कंपनियों से उत्पाद खरीदने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। चीनी वित्त मंत्रालय के अनुसार, सरकारी खरीद में इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। यह कदम ताइवान को हथियारों की आपूर्ति और अमेरिकी हस्तक्षेप के जवाब में देखा जा रहा है, हालांकि चीन स्थित अमेरिकी उद्यमों को छूट मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-big-economic-attack-on-america-ban-on-purchase-of/article-157725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/chinese-president-xi-jinping.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने 46 अमेरिकी कंपनियों से कोई भी उत्पाद खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीनी वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इस आशय की सूची जारी की है। इन कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन कॉरपोरेशन भी शामिल है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लागू कानूनों और नियमों के अनुसार, सरकारी खरीद गतिविधियों के दायरे में 46 अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ प्रासंगिक कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>चीनी कंपनियों को इन 46 अमेरिकी कंपनियों में बने उत्पादों को खरीदने से रोक दिया गया है, हालांकि चीन में काम कर रहे अमेरिकी निवेश वाले उद्यमों को इससे छूट दी गयी है। चीन ने लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाकर एक तरह से अमेरिका को भी संकेत दिया है कि वह अपने मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगी।</p>
<p>गौरतलब है कि लॉकहीड मार्टिन सैन्य विमान और उन्नत तकनीकी हथियारों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है और यह कंपनी अमेरिकी सरकार के जरिए ताइवान को सबसे ज्यादा हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करती है, जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार आउटलुक: वैश्विक कारकों और मानसून की प्रगति से तय होगी अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा, इन कंपनियों में दिखेगा जोरदार उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह सेंसेक्स 1,274 और निफ्टी 390 अंक चढ़कर मजबूत स्थिति में बंद हुए, जिसमें मिडकैप-स्मॉलकैप का प्रदर्शन शानदार रहा। आगामी सप्ताह में बाजार की दिशा घरेलू मानसून की प्रगति, आठ कोर उद्योगों के आंकड़ों और ईरान-अमेरिका शांति समझौते से जुड़े वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/the-direction-of-the-stock-market-next-week-will-be/article-157632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market4.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। घरेलू शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह रही गिरावट के बाद आने वाले हप्ता में निवेशकों की नजर वैश्विक कारकों के साथ घरेलू स्तर पर मानसून की प्रगति और आठ महत्वपूर्ण उद्योगों के आंकड़ों पर रहेगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते को लागू करने में कितनी प्रगति होती है, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए खोलने की दिशा में, इसका असर सीधे शेयर बाजारों पर पड़ेगा। दूसरी तरफ, मानसून पिछले करीब एक सप्ताह से अटका हुआ है। इससे निवेशकों में चिंता हो सकती है। साथ ही, देश के आठ महत्वपूर्ण उद्योग क्षेत्रों के आंकड़े भी इसी सप्ताह जारी होने हैं। इन सभी कारकों का असर निवेश धारणा पर दिखेगा।</p>
<p>बीते सप्ताह पहले चार दिन बाजार में तेजी रही जबकि आखिरी दिन बिकवाली का जोर रहा। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सप्ताह के दौरान 1,274.95 अंक (1.69 प्रतिशत) चढ़कर शुक्रवार को 76,802.90 अंक पर रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 390.20 अंक यानी 1.65 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त में सप्ताहांत पर 24,013.10 अंक पर बंद हुआ। मझौली और छोटी कंपनियों में निवेशकों का विश्वास अधिक रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक में 2.72 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक में 3.23 प्रतिशत की साप्ताहिक तेजी दर्ज की गयी।</p>
<p>सप्ताह के दौरान सेंसेक्स की 30 में से 25 कंपनियों के शेयर हरे निशान में रहे। टाटा समूह की रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयर में 16.32 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। इटरनल में 8.37 फीसदी, इंडिगो में 6.69, टाइटन में 5.64 और बीईएल में 5.07 फीसदी की साप्ताहिक तेजी रही। भारती एयरटेल का शेयर 4.72 प्रतिशत बजाज फाइनेंस का 4.64, बजाज फिनसर्व का 4.56, एलएंडटी का 3.94, एनटीपीसी का 3.33, आईटीसी का 2.89, पावरग्रिड का 2.67 और अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर 2.37 प्रतिशत चढ़ा।</p>
<p>एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 1.86 प्रतिशत, भारतीय स्टेट बैंक का 1.78, सन फार्मा का 1.65, हिंदुस्तान यूनीलिवर का 1.31, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 1.28, अडानी पोर्ट्स का 1.20, महिंद्रा एंड महिंद्रा का 1.03 और एचडीएफसी बैंक का 0.98 प्रतिशत की बढ़त में रहा। टाटा स्टील और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर भी ऊपर बंद हुए। इंफोसिस का शेयर सप्ताह के दौरान 5.79 फीसदी टूट गया। टीसीएस में 1.62 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 1.30 और कोटक महिंद्रा बैंक में 1.10 प्रतिशत की गिरावट रही। एशियन पेंट्स का शेयर भी लाल निशान में रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 12:58:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने होर्मुज फिर बंद किया; चेतावनी भी दी हमले जारी रहे तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका द्वारा समझौते के उल्लंघन और इजरायली हमलों के विरोध में होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की घोषणा की। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस दावे को खारिज किया है। लेबनान में नए हमलों से शांति समझौते पर संकट गहरा गया है, जिसे सुलझाने के लिए अमेरिकी दूत स्विट्जरलैंड रवाना हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-closed-hormuz-again-and-warned-that-if-the-attacks/article-157620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगंटन। लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की घोषणा की है। ईरान की संयुक्त मिलिट्री कमांड ने इसके पीछे युद्ध खत्म करने वाले समझौते का अमेरिका द्वारा उल्लंघन, दक्षिणी लेबनान से सेना नहीं हटाने और इजरायल की ओर से लगातार युद्धविराम का उल्लंघन करने का कारण बताया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उल्लंघन जारी रहा, तो और भी कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p><strong>उधर अमेरिका का दावा, होर्मुज बंद नहीं हुआ: वेंस</strong></p>
<p>दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि तेहरान के साथ वॉशिंगटन के 14-सूत्रीय समझौते में तय किया गया संघर्ष विराम बना रहेगा। अमेरिका को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि होर्मुज समुद्री यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।</p>
<p><strong>हमने वादों का पालन किया: ईरान</strong></p>
<p>ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि हमने अपने वादों का पालन किया है और अमेरिका की यह जिम्मेदारी है कि वह इजरायल को लेबनान पर हमले रोकने के लिए मजबूर करे।</p>
<p><strong>इजरायल ने फिर किए हमले</strong></p>
<p>उधर, अमेरिका और ईरान के समझौते की खबरों के कुछ ही घंटों बाद शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गईए जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।</p>
<p><strong>डील पर मंडराया खतरा</strong></p>
<p>अब ईरानी सेना द्वारा दोबारा होर्मुज स्ट्रेट पर प्रतिबंध लगाने से समझौते पर संकट गहरा गया है। इस बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को ईरान पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि मोहसिन नकवी ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत पर नजर रखेंगे। </p>
<p><strong>ईरान से वार्ता के लिए अमेरिकी दूत विटकॉफ रवाना</strong></p>
<p>अमेरिका-ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता बहाल करने के उद्देश्य से अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरानी अधिकारियों से बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। दक्षिणी लेबनान में हालांकि नए इजरायली हमलों ने उस नाजुक संघर्ष विराम के लिए खतरा पैदा कर दिया है, जिसे व्यापक कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयराम रमेश का बड़ा बयान: हॉर्मुज खुलने से भारत को फायदा, लेकिन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को ऊर्जा और व्यापार में बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत की सुस्त निजी निवेश और रिकॉर्ड व्यापार घाटे जैसी ढांचागत समस्याएं हल नहीं होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-statement-of-jairam-ramesh-india-benefits-from-opening-of/article-157004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jairam-ramesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को जिनेवा में प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया में शत्रुता समाप्त करने की दिशा में यह एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। रमेश ने आशा व्यक्त की, कि अमेरिका, ईरान और इजराइल इस समझौते का पालन करेंगे तथा यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य संबंधों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरुमध्य के बिना किसी प्रतिबंध के पुनः खुलने से भारत को निश्चित रूप से राहत मिलेगी, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। उनके अनुसार रुपया लंबे समय से दबाव में है, डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है तथा निजी निवेश की दरें कई वर्षों से सुस्त बनी हुई हैं, जबकि यही निवेश आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है। कांग्रेस नेता ने मांग में कमजोरी के लिए तीन प्रमुख कारण बताए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में वास्तविक मजदूरी में ठहराव रहा है, चीन से आयात की डंपिंग पर रोक लगाने में केंद्र सरकार विफल रही है जिससे रिकॉर्ड व्यापार घाटा पैदा हुआ है और रोजगार सृजित करने वाले एमएसएमई क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि कर अधिकारियों और जांच एजेंसियों को दी गई अत्यधिक शक्तियों के कारण निवेश का समग्र वातावरण प्रभावित हुआ है।</p>
<p>विदेश नीति के मुद्दे पर रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद जिस पाकिस्तान को भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता प्राप्त की थी, वह अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नया प्रभाव हासिल करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के रणनीतिक ढांचे में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार की पश्चिम एशिया नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की मांग करते हैं। रमेश के अनुसार, मानवीय सरोकारों और भारत की पारंपरिक विदेश नीति प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को अधिक संतुलित रुख अपनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:50:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का बड़ा बयान, बोले- नेतन्याहू से हुईं गलतियां, हित हमेशा नहीं मिलते</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि इजरायली पीएम नेतन्याहू से कुछ चीजें गलत हुई हैं। लेबनान सैन्य कार्रवाई और ईरान तनाव के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतन्याहू अपने देश के हितों की पैरवी करते हैं, लेकिन जहां टकराव होगा, वहां अमेरिका अपने नागरिकों का हित चुनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-vice-president-jd-vances-big-statement-said-netanyahu/article-156671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ युद्ध में सहयोगी रहे अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले कुछ हफ्तों से रिश्तों में तल्खी साफ देखने को मिल रही है। इस बीच, अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ‘निश्चित रूप से कुछ चीजें गलत हुई हैं।’ वेंस ने हालांकि इसका कोई खास उदाहरण नहीं दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि नेतन्याहू ‘अपने देश के हितों की आक्रामक रूप से पैरवी करते हैं’, लेकिन उनके हित हमेशा अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं होते। उनका यह बयान दोनों सहयोगियों के बीच हाल के दिनों में उपजे तनाव को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने जैसा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली नेता के बीच लेबनान में सैन्य कार्रवाई को लेकर तीखी बहस हुई थी। इजरायल की इस कार्रवाई के कारण क्षेत्र में नए सिरे से हमले शुरू हो गए हैं, जिससे ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है। बीती रात अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन हवाई हमलों हुए जिससे अप्रैल महीने से दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम संकट में आ गया है। यह तनाव तब दोबारा भड़का जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने युद्ध को समाप्त करने का ‘सौदा करने में बहुत लंबा समय ले लिया।’ ताजा संघर्ष की मुख्य वजह लेबनान के घटनाक्रम हैं, जहां इजरायल ईरान-समर्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ अपना सैन्य अभियान लगातार जारी रखे हुए है।</p>
<p>इस साक्षात्कार का प्रसारण आगामी रविवार होगा। इसमें वेंस ने कहा कि नेतन्याहू एक ऐसे देश का शासन चला रहे हैं जो निश्चित रूप से अमेरिका का बहुत करीबी भागीदार रहा है। लेकिन, बेहद करीबी सहयोगी होने के बावजूद, कभी-कभी हमारे हित पूरी तरह एक जैसे होते हैं और कभी-कभी उनमें टकराव होता है। मैंने प्रधानमंत्री के रुख में यही देखा है कि वह अपने देश के हितों को बहुत आक्रामक तरीके से सामने रखते हैं, कभी इसका मतलब यह होता है कि हम दोनों एक ही राह पर हैं, और कभी इसका मतलब होता है कि हम अलग हैं।”अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने आगे स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन का मुख्य काम इस बात पर ध्यान केंद्रित करना है कि अमेरिका के सर्वोत्तम हित में क्या है। उन्होंने कहा, "जहां हमारे हितों में टकराव होगा, वहां इजरायलियों के लिए दुर्भाग्य से ही सही हमें अमेरिकी जनता का पक्ष चुनना होगा।” जब वेंस से उन उदाहरणों के बारे में पूछा गया, जहां नेतन्याहू से गलतियां हुईं, तो उन्होंने यह कहकर बात टाल दी कि ‘ऐसी बातचीत को निजी रखना ही बेहतर होता है।’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:29:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज संकट के बीच ओपेक देशों का बड़ा फैसला : चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने को दी मंजूरी, 5 जुलाई को होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष और यूएई के बाहर होने के बावजूद ओपेक के 7 प्रमुख देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब और रूस सहित सदस्य देश जुलाई 2026 से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाएंगे। बाजार स्थिरता के लिए दिसंबर 2026 तक का नया शेड्यूल तय किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-opec-countries-amid-hormuz-crisis-approval-to/article-156308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/opecc.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी तनाव और कई सदस्य देशों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बावजूद ओपेक के सात प्रमुख सदस्य देशों ने लगातार चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। ओपेक समूह के अनुसार सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने रविवार को आयोजित एक वर्चुअल बैठक में वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा की तथा उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>संयुक्त बयान में कहा गया कि अप्रैल 2023 में घोषित अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती के तहत 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि जुलाई 2026 से लागू की जाएगी। समूह ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इन स्वैच्छिक कटौतियों को आंशिक या पूर्ण रूप से वापस लिया जा सकता है। सदस्य देश वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे और आवश्यकतानुसार उत्पादन बढ़ाने, रोकने या वापस घटाने का निर्णय ले सकेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया कि नवंबर 2023 में लागू उत्पादन समायोजन सहित सभी व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। सदस्य देशों ने कहा कि यह कदम उन देशों को भी मदद करेगा जिन्होंने पहले निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन किया था और अब उसकी भरपाई करनी है। समूह ने 'डिक्लेरेशन ऑफ कोऑपरेशन' (सहयोग घोषणा) के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उत्पादन अनुपालन की निगरानी संयुक्त मंत्रिस्तरीय निगरानी समिति (जेएमएमसी) द्वारा जारी रहेगी।</p>
<p>सदस्य देशों ने यह भी पुष्टि की कि जनवरी 2024 से हुई अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई पूरी तरह की जाएगी और इसके लिए निर्धारित अवधि को बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है। ओपेक समूह ने बाजार की स्थिति, उत्पादन अनुपालन और भरपाई व्यवस्था की समीक्षा के लिए हर महीने बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। अगली बैठक 5 जुलाई 2026 को होगी। इस बीच, लगभग छह दशक तक सदस्य रहने के बाद संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने संगठन के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:04:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव: बहरीन-कुवैत ने की ईरानी आक्रामकता की निंदा, कहा- हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों के बाद बहरीन और कुवैत ने हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है। अमेरिकी सेना (सेंटकॉम) ने सात में से छह मिसाइलों को मार गिराया। दोनों देशों ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी कि यह तनाव क्षेत्रीय स्थिरता और नाजुक युद्धविराम के लिए गंभीर खतरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/bahrain-kuwait-condemned-iranian-aggression-said-attacks-threaten-regional-stability/article-156258"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kuwait.png" alt=""></a><br /><p>मनामा। बहरीन और कुवैत ने शनिवार को अपने क्षेत्रों पर हुए नए ईरानी हमलों की संयुक्त रूप से कड़े शब्दों में निंदा की है तथा चेतावनी भी दी है कि ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा युद्धविराम के बावजूद यह हालिया सैन्य तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर रूप से खतरा है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि ये हवाई हमले उनकी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन हैं और इससे इस व्यापक संघर्ष के पूरे क्षेत्र में फैलने का नया खतरा पैदा हो गया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये हमले एक "खतरनाक सैन्य तनाव" हैं, जिससे उनके नागरिकों और वहां रह रहे विदेशी प्रवासियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। मंत्रालय ने आगे कहा कि ये हमले कुवैत की संप्रभुता का खुला उल्लंघन हैं और उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की मांग की जो क्षेत्र को और अधिक अस्थिर कर सकती हैं।</p>
<p>अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय की मेजबानी करने वाले बहरीन ने भी अपने क्षेत्र पर ईरानी मिसाइल दागे जाने की पुष्टि की है। बहरीन ने अपने क्षेत्र पर हुए हमलों की निंदा करने के साथ-साथ पड़ोसी देश कुवैत को निशाना बनाए जाने पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। यह ताजा सैन्य टकराव अमेरिकी सेना के शुक्रवार के उस बयान के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इससे कुछ घंटे पहले ही ईरान के चार हमलावर ड्रोनों को उनके लक्ष्यों तक पहुँचने से पहले ही मार गिराया गया था। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, सात में से छह मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया गया, जबकि सातवीं मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुँचने में विफल रही।</p>
<p>सेंटकॉम ने स्पष्ट किया कि इस हमले में किसी भी अमेरिकी कर्मी को कोई चोट नहीं आई है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि इन हमलों में बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय को नुकसान पहुँचा है। दूसरी ओर, ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (आईआरजीसी) का कहना है कि उन्होंने हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में "दुश्मन के ठिकानों" को निशाना बनाया था। ईरान ने दावा किया कि ये हमले उन अमेरिकी अभियानों के जवाब में किए गए, जिनमें कथित तौर पर ईरान के भीतर रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया था और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी ड्रोनों को मार गिराया गया था। इस नए घटनाक्रम ने अप्रैल में हुए नाजुक युद्धविराम को और कमजोर कर दिया है, साथ ही युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रहे राजनयिक प्रयासों को भी बड़ा झटका लगा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 13:18:52 +0530</pubDate>
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                <title>जयराम रमेश का बड़ा हमला: पश्चिम एशिया संकट और तेल कीमतों पर केंद्र की खामोशी अनुचित, कहा- भारत का बहुत कुछ दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान वार्ता और लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई पर केंद्र सरकार की चुप्पी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल की कीमतों पर पड़ेगा, इसलिए सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jairam-rameshs-big-attack-centres-silence-on-west-asia-crisis/article-155704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/jairamm-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका वार्ता का भारत पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें भारत का बहुत कुछ दाव पर लगा हुआ है और ऐसे में केंद्र सरकार की चुप्पी को उचित नहीं कहा जा सकता है। पार्टी का कहना है कि यदि वार्ता सफल होती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है और वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव कम होगा, जिसका सीधा लाभ भारत को मिलेगा।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करने के लिए बातचीत चल रही है लेकिन इस बीच इज़रायल की लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई के कारण किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों पर नाराजगी जता चुके हैं और दुनिया के कई अन्य देश भी लेबनान में इज़रायली अभियान की आलोचना कर रहे हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि ऐसे समय में जब इज़रायल की कार्रवाई संभावित अमेरिका-ईरान समझौते को प्रभावित कर सकती है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है, जबकि इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/jairam-rameshs-big-attack-centres-silence-on-west-asia-crisis/article-155704</link>
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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:31:48 +0530</pubDate>
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