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                <title>Geopolitics - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Geopolitics RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता पर संशय : बुधवार को समाप्त हो रहा संघर्ष विराम, नए कूटनीतिक दौर की उम्मीदें अब भी अनिश्चित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का संघर्ष विराम बुधवार को समाप्त हो रहा है, लेकिन इस्लामाबाद वार्ता पर अब भी अनिश्चितता बरकरार है। जहाज जब्ती और तीखी बयानबाजी ने तनाव बढ़ा दिया है। जहां जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी दल की संभावना है, वहीं ईरान ने नाकेबंदी के बीच झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/doubt-over-us-iran-talks-ceasefire-ending-on-wednesday-hopes-for/article-151188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम की समय सीमा बुधवार को समाप्त होने वाली है, लेकिन इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने की पुष्टि अभी तक दोनों पक्षों ने नहीं की है। इससे संकेत मिलता है कि नये कूटनीतिक दौर की उम्मीदें अब भी अनिश्चित बनी हुई हैं। समुद्र में बढ़ते तनाव और नेताओं की तीखी बयानबाजी के बीच पैदा हुई इस अस्पष्टता ने उन आशंकाओं को बढ़ा दिया है कि शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता बंद हो सकता है।</p>
<p>ईरानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को अमेरिकी नौसेना के जब्त ईरानी मालवाहक जहाज के साथ-साथ 'उसके नाविकों, चालक दल और उनके परिवारों' को रिहा करने की मांग की है। ईरान ने इस जब्ती का बदला लेने का संकल्प लिया है। दोनों पक्षों के अधिकारियों की ओर से हालांकि मिले-जुले संदेश आये हैं जिससे वार्ता की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी समझौते पर पहुंचने के दबाव का खंडन किया है, हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पाकिस्तान की यात्रा कर सकता है।</p>
<p>ईरानी पक्ष की ओर से अधिकारियों ने अधिक सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वार्ता के अगले दौर की 'कोई योजना नहीं' है, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने तनाव कम करने के लिए कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्री वेंस और शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के आज पाकिस्तान के लिए रवाना होने की उम्मीद है, ताकि ईरान के साथ युद्ध को लेकर संभावित दूसरे दौर की वार्ता की जा सके।</p>
<p>यह कूटनीतिक अनिश्चितता वैश्विक तेल मार्ग के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के बीच उत्पन्न हुई है। अमेरिका लगातार नौसैनिक नाकेबंदी कर रहा है और हाल ही में ईरान के ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज की जब्ती की घटना ने तनाव को और अधिक भड़का दिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दो सप्ताह के संघर्ष विराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जो जल्द ही समाप्त होने वाला है। ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी आक्रामकता में बढ़ोतरी के रूप में वर्णित करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर कालीबाफ ने 'धमकी के साये में' बातचीत खारिज कर दिया है और चेतावनी दी कि दबाव की रणनीति उन्हें झुकने पर मजबूर नहीं कर पायेगी। इसी तरह प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने संकेत दिया कि ईरान के तेल निर्यात पर निरंतर प्रतिबंधों के वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए व्यापक परिणाम हो सकते हैं।</p>
<p>इस बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पाकिस्तान के मोहम्मद इशाक डार ने पिछले कुछ दिनों में कई दौर की चर्चा की है। इसमें संघर्ष विराम और नये सिरे से बातचीत की संभावना पर ध्यान केंद्रित किया गया है।<br />तनाव के बावजूद संवाद जारी रखने की इच्छा के कुछ धुंधले संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि संभावित समझौता पहुंच के भीतर है, हालांकि इसका विवरण अभी अस्पष्ट है। वहीं दूसरी ओर ईरानी नेताओं ने अमेरिका के दिये सार्वजनिक बयानों के प्रति संदेह व्यक्त किया है, विशेष रूप से उन दावों के बाद जिनमें कहा गया था कि प्रमुख प्रावधानों पर पहले ही सहमति बन चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 16:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया, तो उसे 'अभूतपूर्व समस्याओं' का करना पड़ेगा सामना : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह शांति वार्ता से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। नाकेबंदी और तनाव के बीच ट्रंप ने समझौते की उम्मीद जताई है, जबकि ईरान ने धमकियों के दबाव में झुकने से साफ मना कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-iran-refuses-to-negotiate-with-america-it-will-face/article-151149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को पत्रकार जॉन फ्रेडरिक्स के साथ साक्षात्कार में कहा, “ वे बातचीत करेंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होंगी।” अमेरिका के राष्ट्रपति ने यह उम्मीद भी जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो जाएगा। उधर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने इससे पहले कहा था कि ईरान धमकियों के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कुछ ठिकानों पर हमले करके युद्ध की शुरुआत की थी, जिससे काफी नुकसान हुआ और आम नागरिकों की भी जानें गयी। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो हफ़्ते के लिए संघर्ष-विराम की घोषणा की। इसके बाद पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। फिर युद्ध शुरू होने की कोई घोषणा नहीं की गयी, लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी। मध्यस्थ अब बातचीत का एक नया दौर शुरू करवाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:41:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका के साथ कोई भी बातचीत तभी सफल होगी जब ईरान के राष्ट्रीय हित सुरक्षित हों : इब्राहिम अजीजी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका के साथ बातचीत को सैन्य संघर्ष का विस्तार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। अजीजी ने मांग की है कि अमेरिका संपत्ति बहाल करे और क्षेत्रीय सहयोगियों का सम्मान करे; अन्यथा 'अत्यधिक मांगों' के कारण वार्ता विफल हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/any-talks-with-america-will-be-successful-only-when-irans/article-151120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ibrahim.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के वरिष्ठ सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोमवार को अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत को सैन्य संघर्ष का ही एक विस्तार बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी बातचीत तभी होगी जब वह पूरी तरह से ईरान के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के पक्ष में हो। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख श्री अजीजी ने अल जजीरा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि बातचीत को लेकर ईरान का रुख रणनीतिक गणना पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया, "ईरान अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर काम करता है।" उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।</p>
<p>सांसद ने कहा कि इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ताओं सहित मौजूदा बातचीत को 'युद्ध के मैदान के विस्तार' के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर बातचीत से ऐसे नतीजे निकलते हैं जो युद्ध के मैदान की उपलब्धियों को सुरक्षित रखते हैं, तो यह एक अवसर है। लेकिन अगर अमेरिकी इसे अपनी दादागिरी और अत्यधिक मांगों का मंच बनाना चाहते हैं, तो यह कतई स्वीकार्य नहीं है।" अजीजी ने पुष्टि की कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने का फैसला तो किया है, लेकिन यह 'किसी भी कीमत पर' नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की 'लक्ष्मण रेखा' पर कोई समझौता नहीं होगा और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।</p>
<p>सांसद ने कहा कि इस्लामाबाद में प्रतिनिधिमंडल भेजना इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका, ईरान के रुख पर कोई 'सकारात्मक संकेत' देता है या नहीं। उन्होंने कहा कि ईरान सैद्धांतिक रूप से बातचीत का विरोधी नहीं है, लेकिन इसके नतीजे आपसी सम्मान और ठोस लाभ वाले होने चाहिए। अजीजी ने कुछ प्रमुख शर्तें भी सामने रखीं, जिनमें ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना और लेबनान जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान देना शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों के हितों को नुकसान पहुँचाया गया या पिछले वादों को अनदेखा किया गया, तो इसे तेहरान की शर्तों को खारिज करना माना जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:25:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-hosting-peace-talks-change-in-indian-diplomacy-necessary-congress/article-151104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:13:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता टूटने की संभावना के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बलों ने ईरानी ज़हाज की किया जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान वार्ता टूटने और ओमान की खाड़ी में जहाज जब्त होने से वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है। ब्रेंट क्रूड 6.3% बढ़कर $96 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि यूरोपीय गैस कीमतें 10% उछलकर $515 के ऊपर हैं। कूटनीतिक अस्थिरता और नाकाबंदी ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/brent-crude-oil-prices-rise-amid-possibility-of-iran-us-talks/article-151109"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/crude-oil.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत टूटने की संभावना के संकेतों की वजह से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और वह 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं, जबकि यूरोपीय गैस की कीमतें लगभग 10 प्रतिशत उछलकर 515 डॉलर प्रति हजार घन मीटर से ऊपर पहुंच गयी हैं। यह जानकारी व्यापारिक आकड़ों में दी गयी। ग्रीनविच मानक समय के अनुसार रात 10:15 बजे तक ब्रेंट कच्चे तेल के वायदा भाव में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 96 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गया। लंदन स्थित आईसीई एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय गैस की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है वह अब 515 डॉलर प्रति हजार घन मीटर से अधिक हो चुकी हैं।</p>
<p>टीटीएफ (नीदरलैंड में स्थित यूरोप का सबसे बड़ा केंद्र) सूचकांक पर मई के वायदा सौदे रात 09:59 बजे 518 डॉलर प्रति हजार घन मीटर पर कारोबार कर रहे थे, जो पिछले कारोबारी दिन की 472.7 डॉलर की कीमत से 9.6 प्रतिशत अधिक है। रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि उनके प्रतिनिधि ईरान पर बातचीत के लिये इस्लामाबाद जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने दावा किया कि अगले 24 घंटों के भीतर अमेरिका-ईरान वार्ता फिर से शुरू होगी। हालांकि, बाद में आईआरएनए ने सूचना दी कि ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसके अतिरिक्त, सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहे एक ईरानी व्यापारिक जहाज को जब्त करने की पुष्टि की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:34:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तानी पीएम शरीफ ने की पेजेश्कियान से फोन पर बात : शांति प्रयासों को जारी रखने का लिया संकल्प, क्षेत्रीय हालातों पर हुई पर विस्तृत चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने फोन पर पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर चर्चा की। शरीफ ने वार्ता और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति बनाने का संकल्प जताया। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 22 अप्रैल को युद्धविराम समाप्त होने से पहले नई वार्ता की घोषणा के बीच, पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-pm-sharif-spoke-to-pejeshkian-over-phone-resolved-to/article-151083"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan-pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बातचीत में पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने का संकल्प जताया है। पीएम शरीफ और पेजेश्कियान के बीच रविवार को करीब 45 मिनट चली बातचीत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ वार्ता में ईरानी नेतृत्व की रचनात्मक भूमिका की सराहना की।</p>
<p>पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत चर्चा की। शरीफ ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद भेजा था।श्री शरीफ ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ अपनी हालिया बैठकों की जानकारी देते हुए कहा कि इन संपर्कों से संवाद और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति के लिए सहमति बनाने में मदद मिली है।</p>
<p>पेजेश्कियान ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया। इससे पहले, अराघची और पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने भी फोन पर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने आठ अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की थी, जब अमेरिका ने ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार किया था।इस्लामाबाद में 11 अप्रैल को लगभग 21 घंटे चली, अमेरिका-ईरान वार्ता हालांकि किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी थी, जिसमें ईरान ने अमेरिकी ‘अत्यधिक मांगों’ और बदलते रुख को जिम्मेदार ठहराया। ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में श्री शरीफ ने शांति प्रयास जारी रखने का भरोसा जताया।</p>
<p>इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले दो सप्ताह के युद्धविराम से पहले नये दौर की वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की है। उन्होंने समझौता न होने पर हमलों की चेतावनी भी दी है। ईरान ने अभी तक दूसरे दौर की वार्ता में भागीदारी की पुष्टि नहीं की है। सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी और लगातार धमकियों ने वार्ता की प्रगति को प्रभावित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-pm-sharif-spoke-to-pejeshkian-over-phone-resolved-to/article-151083</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:02:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने किया दूसरी दौर की वार्ता से इनकार : अमेरिकी बलों ने ईरानी ज़हाज जब्त किया, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज 'तौस्का' को जब्त किए जाने के बाद ईरान ने दूसरे दौर की शांति वार्ता ठुकरा दी है। तेहरान ने इसे 'समुद्री डकैती' और युद्धविराम का उल्लंघन बताया। ओमान की खाड़ी में बढ़ते तनाव और ड्रोन हमलों की खबरों के बीच, 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा युद्धविराम अब खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-refuses-second-round-of-talks-us-forces-seize-iranian/article-151049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया है, जिसका मुख्य कारण ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकेबंदी बताया गया है।इस बीच, अमेरिकी सेना ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया, जिससे पश्चिम एशिया में नाजुक दौर से गुजर रही शांति पर और अनिश्चितता व्याप्त हो गयी है। ईरान ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज ‘टौस्का’ को ‘हमला कर जब्त’ किया, जिसे उसने युद्धविराम का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।</p>
<p>ईरान के खत्म उल-अंबिया मुख्यालय ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरानी वाणिज्यिक जहाजों पर हमला है और इसे ‘सशस्त्र समुद्री डकैती’ करार दिया। ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन हमले भी किये, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी शर्तें ‘अवास्तविक और अनुचित" हैं और जब तक नाकेबंदी नहीं हटायी जाती, वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर शर्तें बदलने का आरोप भी लगाया।</p>
<p>ईरानी मीडिया के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में वार्ता के सफल होने की ‘कोई स्पष्ट संभावना नहीं’ है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में फिर वार्ता की घोषणा की है।दोनों देशों के बीच जारी दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इस बीच, अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने रविवार को अरब सागर में ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को रोका।</p>
<p>सेंटकॉम के अनुसार, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअन्स ने ‘टौस्का’ को रोका, जो ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहा था। कई चेतावनियों के बावजूद जहाज के चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया।इसके बाद अमेरिकी जहाज ने अपनी पांच इंच की तोप से इंजन कक्ष को निशाना बनाकर उसकी गति निष्क्रिय कर दी, जिसके बाद अमेरिकी मरीन बलों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। सेंटकॉम ने कहा कि कार्रवाई ‘संतुलित और पेशेवर तरीके’ से की गयी। उसने यह भी बताया कि नाकेबंदी लागू होने के बाद से 25 वाणिज्यिक जहाजों को वापस लौटने या दिशा बदलने के निर्देश दिये गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:02:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज में भड़का तनाव: अमेरिकी सेना द्वारा जहाज को रोके जाने के बाद ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेंटकॉम ने ओमान की खाड़ी में नाकाबंदी का उल्लंघन करने पर ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को गोले दागकर निष्क्रिय कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना ने जहाज पर नियंत्रण कर लिया है। ईरान ने इस कार्रवाई को 'सशस्त्र डकैती' करार देते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-warns-of-retaliation-after-us-military-intercepts-ship-attempt/article-151044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने द्वारा इस बात की पुष्टि किये जाने के बाद की उसने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी व्यापारिक जहाज को रोका है, त्वरित प्रतिक्रिया देने का वादा किया है। यह जहाज कथित तौर पर क्षेत्र में अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास कर रहा था। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी कि अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को रोका है , जिससे उसके इंजन कक्ष को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>कमान ने एक बयान में कहा, "अरब सागर में तैनात अमेरिकी बलों ने 19 अप्रैल को एक ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास कर रहे एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू की।" सेंटकॉम के अनुसार, ईरानी पोत को नाकाबंदी उल्लंघन के बारे में कई चेतावनियाँ दी गई थीं। बयान में कहा गया है, "छह घंटे की अवधि में बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद, जब तौस्का के चालक दल ने पालन नहीं किया, तो स्पूरांस ने पोत को अपने इंजन कक्ष को खाली करने का निर्देश दिया। स्पूरांस ने विध्वंसक पोत की 5-इंच एमके 45 तोप से तौस्का के इंजन कक्ष में कई गोले दागकर तौस्का के प्रणोदन तंत्र को निष्क्रिय कर दिया।"</p>
<p>इसके बाद, अमेरिकी मरीन मालवाहक पोत पर सवार हो गए। कमांड के अनुसार, पोत वर्तमान में अमेरिकी नियंत्रण में है। कमान ने कहा, "नाकाबंदी शुरू होने के बाद से, अमेरिकी सेना ने 25 वाणिज्यिक पोतों को वापस मुड़ने या किसी ईरानी बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।" अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, ईरान के खातम अल-अनबिया सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी पोत को जब्त करने पर ईरान तुरंत जवाब देगा।</p>
<p>एक समाचार एजेन्सी के अनुसार, ईरानी सैन्य कमान के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि अमेरिकी सेना द्वारा की जा रही इस सशस्त्र डकैती का जवाब ईरान के सशस्त्र बल जल्द ही देंगे।” 13 अप्रैल को, अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है। वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 12:27:31 +0530</pubDate>
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                <title>Donald Trump का बयान : इजरायल को बताया अमेरिका का ‘महान सहयोगी’, कहा-वह जीतना जानता है</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की प्रशंसा करते हुए उसे एक ऐसा सहयोगी बताया जो जीतना जानता है। ट्रूथ सोशल पर उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी काबिलियत साबित की है। हालांकि, यह बयान उनके उस निर्देश के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने इजरायल को लेबनान पर बमबारी तुरंत बंद करने को कहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-statement-called-israel-a-great-ally-of-america/article-150998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायल ने खुद को अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है जो जीतना जानता है। ट्रंप ने ट्रूथसोशल पर कहा, "चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या न करें, उसने अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है।" उन्होंने कहा कि इजरायल जीतना जानता है, "कुछ लोगों के विपरीत" जिन्होंने संघर्ष और तनाव के दौरान अपना असली रंग दिखाया है। राष्ट्रपति ने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। यह टिप्पणी उनके उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने इजरायल से कहा था कि लेबनान पर बमबारी करना "निषिद्ध" है और "बहुत हो गया"।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की अपील को किया खारिज, होर्मुज़ जलड़मरूमध्य से ज़हाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए पाखंड बताया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर यूरोपीय संघ की 'टोल-फ्री' आवागमन की मांग को "पाखंड" बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ईरान को सैन्य आक्रामकता रोकने से नहीं रोकता। अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में आईआरजीसी ने शनिवार से होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-ministry-rejects-eus-appeal-to-comply-with-international/article-150997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन की स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन के लिए यूरोपीय संघ की अपील को खारिज करते हुए इसे "चरम पाखंड" बताया। बगाई यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के 17 अप्रैल के पोस्ट पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के लिए बिना शुल्क और टोल मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। कल्लास ने अपने पोस्ट में कहा था कि "अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार," होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन बिना शुल्क और टोल मुक्त होना चाहिए।</p>
<p>बगाई ने कल्लास की पोस्ट के जवाब में ‘एक्स’ पर कहा, “अरे, वो ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’?! वही कानून जिसका हवाला देकर यूरोपीय संघ दूसरों को उपदेश देता है, जबकि चुपचाप अमेरिका-इजरायल के आक्रामक युद्ध को हरी झंडी देता है और ईरानियों पर हो रहे अत्याचारों को अनदेखा करता है?! उपदेश देना बंद करो; यूरोप की अपने उपदेशों पर अमल न करने की आदत ने उसके ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून’ के वादों को पाखंड की पराकाष्ठा में बदल दिया है।” राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का कोई भी प्रावधान ईरान को, एक तटीय राज्य होने के नाते, “होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रमण के लिए होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने” से नहीं रोकता है।</p>
<p>ईरानी आईआरजीसी नौसेना ने घोषणा की कि उसने शनिवार शाम से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, और यह तब तक लागू रहेगा जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह से हटा नहीं ली जाती। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी समुद्री यातायात की नाकाबंदी शुरू कर दी। यह जलडमरूमध्य विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलएनजी आपूर्ति का स्रोत है।</p>
<p>वाशिंगटन का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से तब तक स्वतंत्र रूप से गुजर सकते हैं जब तक वे तेहरान को कोई शुल्क नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:34:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बातचीत के बावजूद ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार : संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के साथ शांति वार्ता के बावजूद, ईरान ने अपने सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आदेश दिया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद ग़ालिबफ़ ने 'दुश्मन' पर अविश्वास जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत प्रस्तावित है, लेकिन बंदरगाहों की नाकाबंदी से संघर्ष का खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-talks-iranian-armed-forces-are-fully-prepared-for-war/article-150996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/मोहम्मद-बगेर-ग़ालिबफ़.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत के बावजूद, ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं। प्रेस टीवी ने ग़ालिबफ़ के हवाले से कहा, "हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है। अभी भी, जब हम यहां बैठे हैं, युद्ध छिड़ सकता है। सशस्त्र बल ज़मीन पर पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।"</p>
<p>प्रसारक के अनुसार, संसद अध्यक्ष ने इस बात से इनकार किया कि जारी बातचीत से राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही हो सकती है।  ग़ालिबफ़ ने कहा, "हमारा मानना है कि बातचीत के कारण सशस्त्र बल तैयार नहीं हैं। इसके विपरीत, सड़कों पर आम लोगों की तरह, हमारे सशस्त्र बल भी तैयार हैं।"</p>
<p>इससे पहले, पाकिस्तानी प्रसारक जियो टीवी ने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में अगले सप्ताह के अंत में होने की संभावना है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता फिर से शुरू करने की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। मध्यस्थ बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 15:39:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सर्गेई लावरोव ने की कूटनीतिक रवैये की आलोचना, बोले- वादाखिलाफी की आदत छोड़ बातचीत को प्राथमिकता दे अमेरिका, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वह टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता दे। रूस ने आरोप लगाया कि अमेरिका समझौतों से पीछे हटकर सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका वार्ता जारी है, जबकि रूस ने ईरान की सैन्य शक्ति का समर्थन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sergei-lavrov-criticized-the-diplomatic-attitude-said-give-up/article-150753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sergei-lavrov.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका के कूटनीतिक रवैये की आलोचना करते हुए गुरुवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन को विरोधी सरकारों के साथ टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देनी चाहिए। लावरोव ने कहा कि जब भी अमेरिका को कोई सरकार पसंद न आए तो उसे 'बातचीत के ज़रिए' शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देश अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार रहते हैं और अब तक किसी देश ने अमेरिका के साथ बैठकर बात करने से इनकार नहीं किया है।</p>
<p>सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने कई बार वादों से पांव वापस खींचे हैं। उन्होंने कहा, "वह अमेरिका ही था जिसने पहले समझौते किए और फिर उनसे पलट गया।" लावरोव की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। रूस की सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इजरायल वर्तमान बातचीत के प्रयासों के पीछे ईरान में सेना उतारने की तैयारी कर रहे हो सकते हैं।</p>
<p>रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, परिषद ने पाया है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति में इजाफा हुआ है। रूस ने ईरान की रक्षा क्षमताओं पर भी ज़ोर दिया और कहा कि ईरान के पास इतनी सैन्य ताक़त है कि वह अमेरिका या इज़रायल की किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब दे सके। इन चेतावनियों के बावजूद, कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष बातचीत अभी भी चल रही है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>सेना प्रमुख आसिम मुनीर के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के संदेश पहुंचाने और आगे की बातचीत को आसान बनाने के लिए ईरान में है। उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बातचीत की। यह बातचीत इस्लामाबाद में हुए पिछले दौर के बाद रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशों का हिस्सा थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:17:43 +0530</pubDate>
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