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                <title>challenge - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोलंबिया राष्ट्रपति चुनाव: दक्षिणपंथी उम्मीदवार एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला की जीत, प्रतिद्वंद्वी सेपेदा देंगे नतीजों को चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव के कड़े मुकाबले में दक्षिणपंथी उम्मीदवार एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला ने 49.65% वोट पाकर जीत दर्ज की है। उनके प्रतिद्वंद्वी वामपंथी उम्मीदवार इवान सेपेदा (48.7%) ने नतीजों को चुनौती देने की बात कही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सहित कई वैश्विक नेताओं ने एस्प्रिएला को बधाई दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/espriellas-landslide-victory-in-colombias-presidential-election-rival-cepeda-will/article-157705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>बोगोटा। दक्षिणपंथी रूढ़िवादी आंदोलन 'डिफेंडर्स ऑफ द होमलैंड' के उम्मीदवार एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला ने कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव का निर्णायक दूसरा दौर जीत लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 99.7 फीसदी वोटों की गिनती हो चुकी है। एस्प्रिएला को 49.65 प्रतिशत यानी एक करोड़ 29 लाख 31 हजार 544 वोट मिले हैं। वहीं, सत्तारूढ़ वामपंथी गठबंधन 'हिस्टोरिक पैक्ट' के उम्मीदवार और एस्प्रिएला के प्रतिद्वंद्वी इवान सेपेदा को 48.7 प्रतिशत यानी एक करोड़ 26 लाख 84 हजार 994 वोट मिले।</p>
<p>सेपेदा ने शुरुआती गिनती को 'अंतिम या बाध्यकारी नहीं' बताया और अपने समर्थकों से जांच पूरी होने तक 'सतर्क रहने' की अपील की। इसके बाद ही वह आधिकारिक नतीजों को स्वीकार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके अधिवक्ता देश भर के 33,000 मतदान केंद्रों के नतीजों को चुनौती देंगे। अर्जेंटीना, इक्वाडोर और चिली के नेताओं ने कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव के इस दूसरे दौर में जीत दर्ज करने पर विपक्षी उम्मीदवार को बधाई दी है।</p>
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी 'एक्स' पर बधाई संदेश भेजकर आने वाले प्रशासन के साथ 'मिलकर काम करने' की उम्मीद जताई। एस्प्रिएला को ट्रम्प समर्थक माना जाता है। कोलंबिया के मौजूदा राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो संवैधानिक नियमों के कारण दूसरा कार्यकाल नहीं संभाल सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 12:52:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ममता बनर्जी का केंद्र पर तीखा हमला : तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने का लगाया आरोप, विधायकों, पार्षदों और पार्टी उम्मीदवारों को धमकाया जा रहा</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता की विरोध रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर TMC को अस्थिर करने और विधायकों को धमकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी को तोड़ने की हर कोशिश नाकाम होगी। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब कालीघाट बैठक से TMC के 80 में से 60 विधायक नदारद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/mamta-banerjees-sharp-attack-on-the-center-accused-of-breaking/article-155766"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mamta.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर उनकी पार्टी को तोड़ने और चुने हुए प्रतिनिधियों को डराने-धमकाने की साजिश रचने का आरोप लगाया। बनर्जी ने कोलकाता के वाई-चैनल मार्ग पर एक विरोध रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार दबाव की रणनीति के जरिए तृणमूल कांग्रेस को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारे विधायकों, पार्षदों और पार्टी उम्मीदवारों को अवैध रूप से धमकाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को तोड़ने की किसी भी कोशिश को नाकाम कर दिया जाएगा और उनका विरोध आंदोलन जारी रहेगा।</p>
<p>इससे पहले दिन में ममता बनर्जी अपने कालीघाट आवास से निकलीं और सबसे पहले रेड रोड गईं, जहां उन्होंने बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उनके साथ वरिष्ठ नेता मदन मित्रा, कुणाल घोष, कल्याण बनर्जी, डोला सेन और आशिमा पात्रा मौजूद थे। वहां से वह सीधे वाई-चैनल विरोध स्थल के लिए रवाना हुईं। कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक प्रदर्शन की अनुमति दी थी। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं, जबकि पुलिस ने सुरक्षा बनाए रखने के लिए आयोजन स्थल के आसपास बड़ी संख्या में महिला पुलिस कर्मियों सहित भारी बल तैनात किया था।</p>
<p>यह विरोध प्रदर्शन शुरू में रानी रासमणि एवेन्यू में करने की योजना थी, जहां ममता बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा के खिलाफ धरने का आह्वान किया था। हालांकि, उस जगह के लिए अनुमति नहीं दी गई। पुलिस ने सोमवार को पार्टी को सूचित किया था कि नयी अर्जी के आधार पर वाई-चैनल पर कार्यक्रम के लिए अनुमति दी जा सकती है। इस स्थल में बदलाव के कारण एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। तृणमूल नेताओं ने सवाल उठाया कि उनसे नयी अर्जी जमा करने के लिए क्यों कहा जा रहा है। पार्टी विधायक कुणाल घोष और सांसद कल्याण बनर्जी ने प्रशासन पर प्रक्रियात्मक बाधाएं खड़ी करके विपक्षी आवाजों को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।</p>
<p>तमाम अनिश्चितताओं के बावजूद शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नयना बंद्योपाध्याय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, फिरहाद हकीम और अशोक देब सहित वरिष्ठ तृणमूल नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए। पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भी बड़ी संख्या में एकत्र हुए और सुश्री बनर्जी के समर्थन में नारेबाज़ी की। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस आंतरिक उथल-पुथल का सामना कर रही है। पार्टी के भीतर मतभेदों की चिंताएं तब और बढ़ गईं जब रविवार को कालीघाट में सुश्री बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में उसके 80 में से लगभग 60 विधायक शामिल नहीं हुए। इसके अलावा पार्टी जाली हस्ताक्षरों के आरोपों से जुड़े विवाद से भी जूझ रही है, जिससे पूर्व सत्ताधारी दल के सामने चुनौतियां और बढ़ गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:52:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाबूलाल मरांडी की चेतावनी, बोले- कैग रिपोर्ट पर कारवाई की बजाय राज्य सरकार मुझे दे रही गिरफ्तार करने की गीदड़ भभकी, भ्रष्टाचार खिलाफ हर संघर्ष के लिए तैयार </title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये की कमीशनखोरी और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि वह गिरफ्तारी की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/babulal-marandis-warning-said-instead-of-taking-action-on/article-155349"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/babulai-marandi.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग में अनियमितताओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्री और राज्य सरकार को चुनौती दी है। मरांडी ने कहा कि कैग की रिपोर्ट में झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये के अनियमितताओं की जानकारी उजागर हुई है। मेडिकल उपकरणों, दवाओं आदि की खरीद और अस्पतालों के निर्माण में स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल हुआ है।</p>
<p>मरांडी ने कहा कि कैग रिपोर्ट पर कारवाई की बजाय राज्य सरकार द्वारा मुझे गिरफ्तार करने की गीदड़ भभकी दी जा रही है। राज्य सरकार कान खोलकर सुन ले कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरह मैं गिरफ्तारी से डर कर भागने वाला नहीं हूं। मरांडी ने कहा कि भ्रष्टाचारी स्वास्थ्य मंत्री और राज्य सरकार को चुनौती देता हूं कि यदि हिम्मत है तो मुझे गिरफ्तार कर के दिखाएं। झारखंड की जनता के हित, राज्य के सम्मान और भ्रष्टाचार खिलाफ मैं हर संघर्ष के लिए तैयार हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 18:37:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस वोट मांगने से पहले 20 लाख इंदिराम्मा आवासों का निर्माण करके दिखाए, श्वेत पत्र की मांग : केटीआर</title>
                                    <description><![CDATA[बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने तेलंगाना के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को चुनौती देते हुए 20 लाख इंदिराम्मा आवास बनाने की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस पर गरीबों के घर ढहाने और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी छह चुनावी गारंटियों की विफलता से जनता का ध्यान भटका रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-should-show-construction-of-20-lakh-indiramma-houses-before/article-155303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/kt-ramarao.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव ने गुरुवार को आवास निर्माण के वादों को लेकर तेलंगाना के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर तीखा हमला बोला और कांग्रेस सरकार को चुनौती दी कि वे लोगों से वोट मांगने से पहले 20 लाख इंदिराम्मा आवासों का निर्माण करके दिखाएं। पोंगुलेटी के उस पुराने बयान का जिक्र करते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस 20 लाख घर देने के बाद ही वोट मांगेगी, रामाराव ने सवाल किया कि क्या मंत्री में अपने वादे पर कायम रहने का साहस है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं को नाटकीय बयान देने और बाद में अपनी जवाबदेही से भागने की आदत हो गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को 'खोखली घोषणाएं' करने के बजाय अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए गए हर वादे को लागू करके अपनी ईमानदारी साबित करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बीआरएस सरकार ने अपनी डबल-बेडरुम आवास योजना के माध्यम से गरीबों को सम्मानजनक आवास प्रदान किए और लाखों परिवारों के लिए घर के स्वामित्व के सपने को हकीकत में बदला। पिछली बीआरएस सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए रामाराव ने कहा कि अकेले हैदराबाद में लगभग एक लाख डबल-बेडरुम घरों का निर्माण किया गया था। उन्होंने दावा किया कि बीआरएस द्वारा बनाया गया प्रत्येक घर प्रस्तावित इंदिराम्मा घरों की तुलना में गुणवत्ता और आकार में कहीं बेहतर था।<br />बीआरएस नेता ने कहा, "हमारी पार्टी ने गरीबों के लिए सम्मान और आत्म-सम्मान के साथ घरों का निर्माण किया। हमने खराब स्तर के माचिस की डिब्बी जैसे घरों का निर्माण नहीं किया।"</p>
<p>कांग्रेस सरकार को खुली चुनौती देते हुए रामाराव ने कहा कि अगर उसमें सचमुच प्रशासनिक क्षमता है, तो वह पिछली सरकार की आलोचना करने के बजाय हैदराबाद में उससे भी बेहतर आवास परियोजनाओं का निर्माण करके दिखाए। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर शासन के नाम पर घरों को ढहाने का भी आरोप लगाया, जबकि वह गरीबों के लिए नए घरों का निर्माण करने में पूरी तरह विफल रही है। बीआरएस नेता ने मांग की कि सरकार पिछले ढाई वर्षों के दौरान हैदराबाद में बनाए गए और ढहाए गए घरों की संख्या का विवरण देते हुए एक श्वेत पत्र जारी करे।</p>
<p>एक तीखे राजनीतिक हमले में रामाराव ने श्री रेड्डी के पुराने बयानों पर उनका मजाक उड़ाया और कांग्रेस नेताओं पर भ्रष्टाचार, जमीन से जुड़े ब्लैकमेल, राजस्व प्रणाली के दुरुपयोग और जबरन वसूली की राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार तेलंगाना के लोगों से किए गए 'छह गारंटियों' और अन्य चुनावी वादों को पूरा करने में अपनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। रामाराव ने स्पष्ट किया कि बीआरएस कांग्रेस सरकार से सवाल पूछना जारी रखेगी और उसके '420 चुनावी वादों की धोखाधड़ी' का पर्दाफाश करेगी। उन्होंने कहा, "तेलंगाना के लोगों से किए गए वादों के साथ हुए धोखे पर हम सवाल उठाना बंद नहीं करेंगे। ध्यान भटकाने वाली कोई भी राजनीति जनता की आवाज को दबा नहीं सकती।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत की चेतावनी : पाकिस्तान को स्वीकार करना होगा, सीमापार आतंकवाद प्रायोजित करने के होते हैं गंभीर परिणाम </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद प्रायोजित करने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उन्होंने यूएनएससी के वर्तमान ढांचे को '1940 के दशक का पुराना ढांचा' बताते हुए इसमें सुधार और भारत के लिए स्थायी सदस्यता की मांग पुरजोर तरीके से उठाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-warns-pakistan-that-sponsoring-cross-border-terrorism-has-serious-consequences/article-155237"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/harish.jpg" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान पर दशकों से आतंकवाद, धार्मिक उग्रवाद और हिंसक कट्टरवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसे 'यह स्वीकार करना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के गंभीर परिणाम होते हैं।' न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद की खुली बहस में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहा, "मैं आज पाकिस्तान द्वारा की गई आधारहीन और अनुचित टिप्पणियों का जवाब देने के लिए बाध्य हूँ। भारत तथ्यों को स्पष्ट करना चाहता है।"</p>
<p>राजदूत ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से पाकिस्तान का इतिहास भारत के खिलाफ आक्रामकता और सीमा पार आतंकवाद को लगातार प्रायोजित करने से भरा रहा है। उन्होंने कहा, "स्वतंत्र भारत ने अपनी शुरुआत पाकिस्तान द्वारा किए गए सीमा पार आक्रमण का मुकाबला करते हुए की थी।" हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कई 'हमले' किये हैं और 'बिना उकसावे के आक्रामकता' दिखाई है, जबकि वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना भी जारी रखे हुए है।</p>
<p>हरीश ने 'भारत को हजार घाव देकर लहूलुहान करने के पाकिस्तान के सिद्धांत' का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के पास अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और 'पाकिस्तान को यह स्वीकार करना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करने के परिणाम होते हैं।'<br />राजदूत ने पाकिस्तान पर उसके गठन के समय से ही 'आतंकवाद, धार्मिक उग्रवाद और हिंसक कट्टरवाद की ताकतों' को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये तथ्य अच्छी तरह से दर्ज हैं। उन्होंने मांग की कि पाकिस्तान आतंकवाद के लिए हर तरह के समर्थन को 'विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से' समाप्त करे।</p>
<p>इस बहस से अलग, भारत ने इस मंच का उपयोग सुरक्षा परिषद के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए अपने अब तक के सबसे मजबूत तर्कों को पेश करने के लिए किया। भारत ने इसके वर्तमान ढांचे को '1940 के दशक के पूराने' ढांचे के रूप में वर्णित किया। हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद की व्यवस्था अब पुरानी हो चुकी है। इसे समझाने के लिए उन्होंने 1945 के पुराने कंप्यूटर का उदाहरण दिया और कहा कि आज की आधुनिक एआई तकनीक को इतने पुराने सिस्टम पर चलाने जैसी स्थिति सुरक्षा परिषद की है।</p>
<p>राजदूत ने कहा कि केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं है, जबकि पांच स्थायी सदस्यों (पी5) को वैसे ही रखा जाए। स्थायी सदस्यता में भी बदलाव और विस्तार होना चाहिए। इसी संदर्भ में भारत ने अपनी स्थायी सीट की मांग भी दोहराई। हरीश ने संयुक्त राष्ट्र में 'दोहरे मापदंड' अपनाने की भी आलोचना की। उन्होंने रेखांकित किया कि अलग-अलग मामलों में नियमों को अलग तरीके से लागू किया जाता है और बातों व कामों में फर्क दिखाई देता है। उन्होंने जोर दिया कि केवल ताकत और दबाव से मजबूत वैश्विक व्यवस्था या दुनिया का भला नहीं हो सकता। राजदूत ने कहा कि सुरक्षा परिषद को एक सक्रिय और समय के साथ बदलने वाली संस्था होना चाहिए, कोई 'जीवाश्म' यानी जड़ और पुरानी संस्था नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/india-warns-pakistan-that-sponsoring-cross-border-terrorism-has-serious-consequences/article-155237</link>
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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:20:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, छात्रों-अभिभावकों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीएसई की नई भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अभिभावकों और छात्रों का तर्क है कि इस अचानक बदलाव के बजाय उन्हें विदेशी भाषाएं चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-over-cbses-three-language-policy-students-parents-knocked-at-the/article-154638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सीबीएसई की नई भाषा नीति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां छात्रों और अभिभावकों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य बनाने के फैसले को चुनौती दी गई है।</p>
<p>सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अनुसार छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक अन्य भाषा पढ़नी होगी। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि शुरुआत में यह व्यवस्था कक्षा 6 से लागू होने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक बड़े छात्रों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।</p>
<p>कई छात्रों ने तर्क दिया है कि वे तीसरी भाषा के रूप में जर्मन, फ्रेंच या चाइनीज जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ना चाहते हैं। मामले पर अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'क्या आप इंटरव्यू के लिए उपलब्ध हैं?' पीएम मोदी से सवाल पूछने वाली नॉर्वे की पत्रकार ने राहुल गांधी से मांगा इंटरव्यू</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान प्रेस स्वतंत्रता को लेकर शुरू हुई बहस अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। राहुल गांधी द्वारा पीएम मोदी पर सवालों से बचने का आरोप लगाने के बाद, नॉर्वेजियन पत्रकार हेली लिंग ने राहुल गांधी को सीधे फोन इंटरव्यू का चैलेंज दे दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/are-you-available-for-an-interview-the-norwegian-journalist-who/article-154384"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi9.png" alt=""></a><br /><p>नार्वे। राहुल गांधी और नॉर्वे की पत्रकार हेली लिंग के बीच सोशल मीडिया पर हुई बातचीत चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान हेली लिंग ने उनसे सवाल पूछने की कोशिश की थी। इस घटना का वीडियो उन्होंने एक्स पर साझा करते हुए भारत में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर टिप्पणी की थी।</p>
<p>इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सवालों से बचने का आरोप लगाया। इसके बाद हेली लिंग ने राहुल गांधी की पोस्ट पर जवाब देते हुए पूछा कि क्या वे मंगलवार को फोन इंटरव्यू के लिए उपलब्ध होंगे। पत्रकार ने कहा कि वह नॉर्वे यात्रा को लेकर राहुल गांधी का नजरिया जानना चाहती हैं। हेली लिंग ने अपनी पोस्ट में नॉर्वे और भारत की प्रेस फ्रीडम रैंकिंग का भी जिक्र किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 18:32:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम : सरकार हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार,  राजनाथ सिंह ने कहा- टीम स्थिति पर रख रही नजर</title>
                                    <description><![CDATA[सिंह ने भरोसा जताया कि भारत पश्चिम एशिया संकट समेत हर चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर बातचीत जारी है, लेकिन हालात अभी सामान्य नहीं माने जा सकते। उन्होंने कहा, पीएम मोदी की निगरानी में टीम सक्रिय है और देश में पेट्रोल, डीजल व गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-is-capable-of-facing-any-challenge-government-is-fully/article-150083"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy46.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारत पश्चिम एशिया संकट सहित किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है और सरकार हर संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर औपचारिक बातचीत जरूर हो रही है, लेकिन धरातल के हालात को देखते हुए यह मान लेना उचित नहीं होगा कि पश्चिम एशिया का संकट पूरी तरह समाप्त हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्थानीय सांसद राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है, जो लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने आश्वस्त किया कि देश के पास किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस सहित आवश्यक <span> </span>वस्तुओं का पर्याप्त भंडार है और आपूर्ति श्रृंखला सुचारु रूप से चल रही है।<span>   </span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 11:58:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन की घटती आबादी और बढ़ती तकनीकी ताकत: भारत के लिए चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[चीन की सरकार ने टेक्नोलॉजी और शिक्षा को एक साथ जोड़ा वहां कई कंपनियों में रोबोट 24 घंटे काम करते है ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/china%E2%80%99s-declining-population-and-rising-technological-prowess--a-challenge-for-india/article-149954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चीन की जनसंख्या में लगातार गिरावट आ रही है, लेकिन यह उसके लिए कमजोरी नहीं बल्कि एक नई ताकत बनती जा रही है। पहले बड़ी आबादी को आर्थिक शक्ति माना जाता था, वहीं अब चीन तकनीक और ऑटोमेशन के जरिए इस कमी को पूरा कर रहा है। चीन ने समय रहते समझ लिया कि भविष्य मशीनों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, इसलिए वह तेजी से रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीकों में निवेश कर रहा है। चीन को आबादी कम होने से काम देने की कोई दिक्कत नहीं है। चीन की कई बड़ी कंपनियों में रोबोट 24 घंटे, सातों दिन काम कर रहे हैं जब कि एक इंसान 8 घंटे ही काम करता है। शियोमी कंपनी में 50% रोबोट काम कर रहे हैंं। इससे उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और लागत भी कम होती है। जनसंख्या कम होने के बावजूद चीन को श्रमिकों की कमी महसूस नहीं हो रही ।</p>
<p><strong>तकनीक के दम पर अमेरिका को चुनौती</strong><br />चीन की सरकार ने टेक्नोलॉजी और शिक्षा को एक साथ जोड़ा है। “Made in China 2025” जैसी नीतियों के तहत AI, 5G, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर में भारी निवेश किया गया है, कंपनियों को सब्सिडी, जमीन और टैक्स में राहत दी जाती है। फैसले तेजी से लागू किए जाते हैं। इसी रणनीति का हिस्सा है कि बच्चों को स्कूल से ही STEM, कोडिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि भविष्य के इंजीनियर और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट तैयार हों और देश की तकनीकी ताकत और मजबूत हो।</p>
<p><strong>भारत के सामने बढ़ती जनसंख्या एक चुनौती</strong><br />भारत की जनसंख्या अभी अगले 20 वर्षों तक बढ़ती रहेगी। इससे रोजगार, संसाधन और विकास को लेकर दबाव बना रहेगा। एक बड़ी चुनौती यह भी होगी कि सरकार रोजगार दे या तकनीक में निवेश करे, क्योंकि एआई और रोबोटिक्स के बढ़ने से पारंपरिक नौकरियां कम हो सकती हैं। ऐसे में भारत के सामने दोहरी चुनौती है—जनसंख्या का प्रबंधन और तकनीकी विकास में तेजी। यदि सही संतुलन नहीं बनाया गया, तो चीन से मुकाबला करना भविष्य में और भी कठिन हो सकता है। ऐसे में क्या भारत रोजगार, संसाधनों , टेक्नोलॉजी और विकास के बीच सही संतुलन बना पाएगा, या भविष्य में चीन से मुकाबला करना मुश्किल हो जाएगा? इस विषय पर शहर के प्रबुद्ध लोगों की राय ली गई।</p>
<p>चीन के लोग “नेशन फर्स्ट” को रख कर काम करते हैं, इसलिए वे तकनीक और जनसंख्या नियंत्रण में आगे हैं। युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के प्रति जागरूक करना होगा। नई तकनीकों से तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हम जिम्मेदारी, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना अपनाएँ तभी हम आगे बढ़ सकते हैं।<br /><strong>- प्रदीप दाधीच, निदेशक पार्श्वनाथ ग्रुप</strong></p>
<p>चीन से मुकाबला चुनौतीपूर्ण होगा वहां लोग बहुत मेहनती हैं। भारतीय भी मेहनती है, लेकिन नई पीढ़ी मोबाइल की लत में फंसी हुई है । भारत में भी चीन जैसी योजनाबद्ध और प्रगतिशील व्यवस्था हो, तो हम चीन को पीछे छोड़ सकते हैं। हमें अपनी नई पीढ़ी को सही दिशा में लगाना और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा।<br /><strong>-महेश गुप्ता, निदेशक, शिवज्योति स्कूल</strong></p>
<p>भारत का तकनीकी और आर्थिक विकास पहले भी चुनौतीपूर्ण रहा है ,भविष्य में भी रहेगा। सुधार की सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा व्यवस्था में है। चीन की तरह वोकेशनल प्रशिक्षण पर जोर दिया जाए, तो लोगों को कौशल आधारित बनाया जा सकता है। भारत में प्रतिभाशाली छात्र विदेश चले जाते हैं, जबकि चीन में उच्च शिक्षा लेकर लोग देश के विकास में योगदान देते हैं।<br /><strong>-डॉ. अजीत धाकड़, डायरेक्टर धाकड़ हॉस्पिटल, कुन्हाड़ी</strong></p>
<p>भारत में जनसंख्या के लिहाज से मुकाबला कठिन है। सख्त जनसंख्या नियंत्रण और मजबूत शिक्षा आवश्यक हैं। इससे तकनीक और विकास में सुधार होगा। युवाओं में जिम्मेदारी की भावना जागृत करनी होगी। मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यस्त युवा सही कौशल नहीं सीख पाते। उच्च शिक्षा के बाद कई छात्र विदेश चले जाते हैं, जो देश के लिए चिंता का विषय है।<br /><strong>-प्रसन्न माहेश्वरी, ओनर, फूड टाउन बाय माहेश्वरी</strong></p>
<p>भारत में भी एआई और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है, और हमारा युवा निश्चित रूप से आगे बढ़ने की क्षमता रखता है। चुनौतियां बहुत हैं। भारत में भी एडवांस लर्निंग कोर्सेज और ऐसे इंस्टीट्यूट खुलने चाहिए जिससे नई तकनीकों का ज्ञान मिल सके और युवा भविष्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।<br /><strong>-देवेंद्र कौर नरूला, प्रिंसिपल, किड्स कैसल स्कूल</strong></p>
<p>हमारे यहाँ नीतियों में अधिक लचीलापन होने के कारण उनका सही पालन नहीं हो पाता, निष्पक्षता प्रभावित होती है। सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध हों, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। हमारे आईआईटी जैसे संस्थानों के छात्र प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त संसाधन और सुविधाएँ नहीं मिल पातीं। निरंतर प्रयासों से ही हम भविष्य में चीन की बराबरी कर सकते हैं।<br /><strong>-डॉ. प्रियदर्शना जैन, प्राचार्य जैन दिवाकर कमला महाविद्यालय</strong></p>
<p>भारत की जनसंख्या बोझ नहीं, बल्कि सबसे बड़ा संसाधन बन सकती है। सही दिशा, शिक्षा और प्रशिक्षण से इसे ताकत में बदला जा सकता है। भारतीयों की प्रतिभा दुनिया भर में साबित है, “मेक इन इंडिया” जैसे प्रयासों के साथ इनक्यूबेशन नवाचार और कौशल विकास बढ़ाने से देश आत्मनिर्भर बन सकता है। सबसे बड़ी चुनौती मानसिकता की है,हमें खुद पर और देश पर भरोसा करना होगा।<br /><strong>- सीए ख्याति भंडारी,सीआईसीएएसए अध्यक्ष, आईसीएआई की कोटा शाखा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 11:40:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरण संकट के बीच संतुलन बनाना चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[भारत आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां तेज आर्थिक विकास और बिगड़ते पर्यावरण के संकट के बीच संतुलन बनाना अत्यंत कठिन चुनौती बन गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-challenge-of-balancing-the-environmental-crisis/article-133162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/vgvghhj.png" alt=""></a><br /><p>भारत आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां तेज आर्थिक विकास और बिगड़ते पर्यावरण के संकट के बीच संतुलन बनाना अत्यंत कठिन चुनौती बन गया है। शहरों की हवा दिन-प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है, नदियां औद्योगिक कचरे से भर रही हैं, भूमिगत जल स्तर घट रहा है, ठोस कचरे के पहाड़ महानगरों की पहचान बनते जा रहे हैं, वहीं जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या अब भारत को प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रत्यक्ष आर्थिक दंड लगाने आवश्यकता है। प्रदूषण कर का विचार नया नहीं, परन्तु इसकी आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है। अर्थशास्त्र में यह माना जाता है कि जब कोई उद्योग, वाहन या गतिविधि प्रदूषण फैलाती है, तो उसका दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ता है, न कि केवल उसे जो प्रदूषण फैला रहा है। यह बाजार व्यवस्था की वह गंभीर विफलता है, जिससे नुकसान तो समाज को होता है, पर उसका मूल्य न तो वस्तु की कीमत में जुड़ता है, न ही प्रदूषण फैलाने वाला उसे भरता है।</p>
<p><strong>विकल्पों को बढ़ावा :</strong></p>
<p>भारत में कोयले पर लगाया गया स्वच्छ ऊर्जा उपकर,इसका एक प्रारंभिक स्वरूप था, परंतु आज देश में वायु, जल, ध्वनि, ठोस कचरा और औद्योगिक उत्सर्जन का ऐसा मिश्रित संकट है कि केवल किसी एक क्षेत्र पर कर लगाना पर्याप्त नहीं। आवश्यकता एक सर्वसमावेशी और वैज्ञानिक पद्धति से तैयार प्रदूषण कर की है, जो प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देने में सहायक हो। प्रदूषण कर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह प्रदूषण को महंगा बनाता है और स्वच्छता को सस्ता। जब किसी उद्योग को प्रति इकाई उत्सर्जन पर कर देना पड़ेगा, तो वह स्वाभाविक रूप से ऐसी तकनीक अपनाने की ओर अग्रसर होगा जो कम प्रदूषण करे। यूरोप जैसे क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है जहां कार्बन-आधारित दंड के बाद ऊर्जा-संरक्षण और हरित तकनीक का उपयोग अत्यधिक बढ़ा। भारत में भी यह परिवर्तन संभव है, बशर्ते नीति दीर्घकालिक, पारदर्शी और लक्ष्य-उन्मुख हो।</p>
<p><strong>प्रदूषण नियंत्रण उपकरण :</strong></p>
<p>दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत को आने वाले वर्षों में पर्यावरण रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा पर बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी। नदियों की सफाई, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन तथा हरित भवनों के विकास पर अत्यधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। ऐसे में प्रदूषण कर एक स्थायी और अनुमानित राजस्व स्रोत बन सकता हैए जिसे एक स्वतंत्र श्हरित निधिश् के माध्यम से केवल पर्यावरण संरक्षण पर व्यय किया जा सकता है। वैश्विक स्तर पर भी प्रदूषण कर का महत्व बढ़ रहा है। कई विकसित देश अब उन आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगा रहे हैं, जो अधिक प्रदूषणकारी स्रोतों से बनती हैं। यदि भारत घरेलू स्तर पर प्रदूषण पर उचित कर लागू करता है, तो भारतीय निर्यातकों को विदेशी बाजारों में अतिरिक्त शुल्क से राहत मिल सकती है। इस प्रकार प्रदूषण कर केवल पर्यावरण हित में नहीं, बल्कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा की रक्षा में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।</p>
<p><strong>ईंधन और बिजली :</strong></p>
<p>इन सबके बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रदूषण कर गरीबों पर भारी पड़ सकता है,यह चिंता बिल्कुल वास्तविक है। यदि ईंधन और बिजली की लागत बढ़ेगी, तो उसके साथ ही परिवहन, खाद्य पदार्थ और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इसका सीधा प्रभाव निम्न आय वर्ग पर पड़ता है, जिनके पास विकल्प सीमित होते हैं। इसलिए प्रदूषण कर को न्यायपूर्ण बनाने के लिए यह अनिवार्य होगा कि निम्न आय वाले परिवारों को प्रत्यक्ष नकद सहायता, ऊर्जा सब्सिडी और रसोई गैस जैसी आवश्यकताओं पर राहत दी जाए। उद्योग जगत की चिंताएं भी कम नहीं। विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग ऊर्जा प्रधान होते हैं और किसी भी अतिरिक्त कर का प्रभाव उनकी लागत पर पड़ता है। अत: प्रदूषण कर को चरणबद्ध ढंग से लागू करना होगा,पहले बड़े उद्योगों पर, धीरे-धीरे छोटे उद्योगों को तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ इस दायरे में लाना होगा।</p>
<p><strong>ब्याज रहित ऋण :</strong></p>
<p>हरित मशीनरी पर अनुदान, ब्याज रहित ऋण, और तकनीकी उन्नयन के लिए मार्गदर्शन इस परिवर्तन को सुगम बना सकते हैं।भारत की प्रशासनिक क्षमता भी एक महत्वपूर्ण कारक है। प्रदूषण का सटीक मापन, डेटा की विश्वसनीयता और निगरानी तंत्र की पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक होगी। छोटे उद्योगों और गैर-प्रमाणित स्रोतों की निगरानी आज भी चुनौतीपूर्ण है। यदि उत्सर्जन मापन ही विश्वसनीय न हो, तो कर प्रणाली पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसलिए भारत को आधुनिक सेंसर तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी, डिजिटल उत्सर्जन पंजीकरण तथा रियल टाइम निगरानी प्रणाली को मजबूत करना होगा। अंतत: यह कहा जा सकता है कि प्रदूषण कर भारत के लिए केवल राजस्व संग्रह का साधन नहीं, बल्कि एक व्यापक हरित परिवर्तन की दिशा में आवश्यक कदम है। इसे न्यायपूर्ण, पारदर्शी, चरणबद्ध और वैज्ञानिक आधार पर लागू करने से भारत न केवल प्रदूषण कम कर पाएगा, बल्कि अपने विकास मॉडल को भी टिकाऊ, स्वस्थ और पर्यावरण सम्मत बना सकेगा।</p>
<p><strong>-डॉ.सत्यवान सौरभ</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 12:48:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>चीन को चुनौती : भारतीय नौसैनिक जहाज मनीला बंदरगाह पहुंचे, दक्षिण चीन सागर में भारत-फिलीपिंस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास आज से</title>
                                    <description><![CDATA[ फिलीपींस और भारत की नेवी दक्षिण चीन सागर में संयुक्त समुद्री अभ्यास करने जा रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/challenge-to-china-indian-naval-ship-manila-port-reached-south/article-122454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/photo-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>मनीला। फिलीपींस और भारत की नेवी दक्षिण चीन सागर में संयुक्त समुद्री अभ्यास करने जा रही है। मैरीटाइम कॉपोर्रेशन एक्टिविटी नाम से यह संयुक्त अभ्यास 3 अगस्त से शुरू होगा। इस अभ्यास के लिए भारतीय नौसैनिक जहाज मनीला बंदरगाह पहुंच चुके हैं। फिलीपींस और भारत के युद्धपोत चीन की नाक के नीचे समुद्र में अपनी ताकत दिखाएंगे। भारत और फिलीपींस का यह अभ्यास इसलिए खास है क्योकि इस क्षेत्र में चीन की आक्रामकता ने पड़ोसियों के लिए चिंता पैदा की है।</p>
<p>फिलीपींस में भारतीय राजदूत हर्ष कुमार जैन ने बताया कि संयुक्त अभ्यास के तहत 3 अगस्त को भारतीय नौसैनिक जहाज मनीला बंदरगाह से रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर की अगले सप्ताह होने वाली भारत की राजकीय यात्रा के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करती है। साथ ही दोनों देशों के बीच गहरी होती साझेदारी को दिखाती है। भारत के फिलीपींस पहुंचे बेड़े में निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आइएनएस दिल्ली, पनडुब्बी रोधी कोरवेट किल्टन और आइएनएस शक्ति शामिल हैं। फिलीपींस पहुंचे भारतीय नौसेना जहाज आईएनएस दिल्ली, शक्ति और किल्टन की कमान पूर्वी बेड़े के फ्लैग आॅफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल सुशील मेनन के हाथों में रही।</p>
<p>फिलीपींस और भारत की नौसेनाओं के बीच इस द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास में संयुक्त युद्धाभ्यास और संचार प्रोटोकॉल पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस दौरान तैयारियों में सुधार, आपसी विश्वास का निर्माण और समुद्री क्षेत्र में परिचालन तालमेल को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। भारतीय युद्धपोत पहले भी फिलीपींस का दौरा कर चुके हैं लेकिन इस बार कई चीजें पहली बार हो रही हैं।</p>
<p><strong>चीन की दखलंदाजी को लेकर चिंता</strong><br />यह पहली बार होगा जब भारत और फिलीपींस की नेवी किसी समुद्री सहयोगात्मक गतिविधि में भाग लेंगी। संयुक्त नौवहन, पासिंग अभ्यास और समुद्री साझेदारी अभ्यास जैसे पिछले प्रयासों की तुलना में यह समुद्री सहयोगात्मक गतिविधि सैन्य बलों की अंतर-संचालन क्षमता पर है। अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा और फ्रांस के बाद भारत ने भी दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के साथ समुद्री सहयोग बढ़ाया है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दखलंदाजी को लेकर कई देश चिंतित हैं। खासतौर से फिलीपींस और चीन के बीच समुद्री सीमा विवाद रहा है। वहीं भारत की भी कई मुद्दों पर चीन से तनातनी रही है। यह अभ्सास भारत की ओर से चीन को संदेश देने की कोशिश है कि वह भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 11:51:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वार्ड 5 : ग्रामीणों के सामने नदी पार गुजरने की चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[ किशनगंज तहसील क्षेत्र के छिनोद ग्राम पंचायत के सोड़ाना गांव से सोड़ाना के डांडे सहरिया बस्ती पर जाने के लिए लोगो को बरसात के 4 महीने इस नदी की पुलिया को पार करके जाना मजबूरी बनी हुई है। सोड़ाना डांडे पर लगभग 300 सहरिया परिवार की आबादी है। उन सहरिया परिवारों को रोज हर मौसम इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-challenge-of-crossing-the-river-in-front-of-the-villagers/article-17395"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/gopal-ki-bhoomi-par-chin-raha-......shahabaad-news-baran-2.8.20221.jpg" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। किशनगंज तहसील क्षेत्र के छिनोद ग्राम पंचायत के सोड़ाना गांव से सोड़ाना के डांडे सहरिया बस्ती पर जाने के लिए लोगो को बरसात के 4 महीने इस नदी की पुलिया को पार करके जाना मजबूरी बनी हुई है। ग्रामीणों के लिए हर दिन चुनौती से कम नही है। जिससे आए दिन दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। मुख्य पुलिया जो कम ऊंचाई की बनी होने के कारण बारिश होने के बाद लंबे समय तक पुलिया की रपट डूबी रहती है। एक चुनौती पार करने के बाद एक ओर नाले को पार करने के बाद एक ओर  क्षतिग्रस्त हो चुकी पुलिया को पार करना होता है। जिसमें हर समय दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। सोड़ाना डांडे पर लगभग 300 सहरिया परिवार की आबादी है। उन सहरिया परिवारों को रोज हर मौसम इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। जिसको लेकर ग्राम पंचायत एवं प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।  किशनगंज पंचायत समिति के वार्ड 5 में आने वाले गांव रानीबडौद मेहरावता ,इकलेरा ,मिसाई, सोडाणा,राधापुरा छिनोद आंशिक  आदि शामिल है तथा कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 8350 है। <br /><br /><strong> बारिश के समय मरीजों की नहीं मिलती सुविधाएं</strong><br />सोड़ाना के डांडे पर रहने वाले लगभग 300 सहरिया परिवारों को तेज बारिश के समय नदी नालो के उफान पर आ जाने के कारण सभी रास्ते बंद हो जाते है। ऐसे में सोड़ाना डांडे पर रहने वाले लोगो को बारिश के समय बीमार हो जाने पर चिकित्सा सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ता है। कई बार उपचार के अभाव में दम तोड़ देते है। <br /><br /><strong>रेबारपुर की कच्ची ग्रेवल सड़क से गुजरने की मजबूरी</strong><br />रेबारपुरा गांव के ग्रेवल सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढें होने से राहगीरों को परेशान होना पड़ रहा है। कच्ची सड़क से वाहनों को भी गुजरने में परेशानियो का सामना करना पड़ता है। मुख्य सड़क का रास्ता पक्का होने व लंबा होने से रेबारपुरा के ग्रामीण इसी ग्रेवल सड़क से गुजरते है। गत वर्ष ही  गांव रेबारपुरा बाढ़ग्रस्त हो गया था। जिसकी वजह से पहले भी ग्रामवासियो के द्वारा बहुत नुकसान उठा चुका है। रेबारपुरा से रामस्वरूपजी खेत तक पूरी कच्ची सड़क खराब हो चुकी है। आमजन पैदल निकलने में भी भारी मुश्किलो का सामना करना पड़ता है। बाढ़ आने के बाद निकलने के लिए यही एक मात्र रस्ता बचता है। सब रास्ते बाढ़ के पानी से लबालब रहते है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। चुनाव के दौरान जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया ने इस ग्रेवल सड़क को पक्की सड़क बनाने का वादा किया था, लेकिन बाद में कोई ध्यान नही दिया गया। जिससे बारिश के समय कच्ची सड़क से कम दूरी तय कर निकलने की मजबूरी है। <br /><br />मुख्य सड़क से रेबारपुरा तक खस्ताहाल कच्ची सड़क का निर्माण शीघ्र किया जाए। जिससे ग्रामीणों को लंबी दूरी तय नही करना पड़े। साथ ही सोड़ाना जाने के लिए उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जाए। <br /><strong>- प्रेम मीणा, ग्रामीण, सोडाना।</strong> <br /><br />रेबारपुरा के ग्रामीणो के लिए मुख्य सड़क का रास्ता पक्का बना हुआ है। यह वैकल्पिक मार्ग है। जिस पर बारिश कम होने के बाद ग्रेवल डलवाकर मार्ग दुरुस्त करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- रचना कंवर, सरपंच, ग्राम पंचायत छिनोद।</strong> <br /><br />पंचायत समिति क्षेत्र के गांव से सोड़ाना डांडे तक जाने वाले  रास्ता के बीच आने वाली पुलिया के लिए 7 लाख रुपये की राशि स्वीकृत है। बारिश के बाद कार्य शुरू करवाया जाएगा। <br /><strong>- प्रहलाद राम डूडी, विकास अधिकारी, किशनगंज।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 15:42:02 +0530</pubDate>
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