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                <title>पर्यावरण संकट के बीच संतुलन बनाना चुनौती</title>
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                        <![CDATA[भारत आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां तेज आर्थिक विकास और बिगड़ते पर्यावरण के संकट के बीच संतुलन बनाना अत्यंत कठिन चुनौती बन गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-challenge-of-balancing-the-environmental-crisis/article-133162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/vgvghhj.png" alt=""></a><br /><p>भारत आज उस मोड़ पर खड़ा है, जहां तेज आर्थिक विकास और बिगड़ते पर्यावरण के संकट के बीच संतुलन बनाना अत्यंत कठिन चुनौती बन गया है। शहरों की हवा दिन-प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है, नदियां औद्योगिक कचरे से भर रही हैं, भूमिगत जल स्तर घट रहा है, ठोस कचरे के पहाड़ महानगरों की पहचान बनते जा रहे हैं, वहीं जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या अब भारत को प्रदूषण फैलाने वालों पर प्रत्यक्ष आर्थिक दंड लगाने आवश्यकता है। प्रदूषण कर का विचार नया नहीं, परन्तु इसकी आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है। अर्थशास्त्र में यह माना जाता है कि जब कोई उद्योग, वाहन या गतिविधि प्रदूषण फैलाती है, तो उसका दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ता है, न कि केवल उसे जो प्रदूषण फैला रहा है। यह बाजार व्यवस्था की वह गंभीर विफलता है, जिससे नुकसान तो समाज को होता है, पर उसका मूल्य न तो वस्तु की कीमत में जुड़ता है, न ही प्रदूषण फैलाने वाला उसे भरता है।</p>
<p><strong>विकल्पों को बढ़ावा :</strong></p>
<p>भारत में कोयले पर लगाया गया स्वच्छ ऊर्जा उपकर,इसका एक प्रारंभिक स्वरूप था, परंतु आज देश में वायु, जल, ध्वनि, ठोस कचरा और औद्योगिक उत्सर्जन का ऐसा मिश्रित संकट है कि केवल किसी एक क्षेत्र पर कर लगाना पर्याप्त नहीं। आवश्यकता एक सर्वसमावेशी और वैज्ञानिक पद्धति से तैयार प्रदूषण कर की है, जो प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ विकल्पों को बढ़ावा देने में सहायक हो। प्रदूषण कर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह प्रदूषण को महंगा बनाता है और स्वच्छता को सस्ता। जब किसी उद्योग को प्रति इकाई उत्सर्जन पर कर देना पड़ेगा, तो वह स्वाभाविक रूप से ऐसी तकनीक अपनाने की ओर अग्रसर होगा जो कम प्रदूषण करे। यूरोप जैसे क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है जहां कार्बन-आधारित दंड के बाद ऊर्जा-संरक्षण और हरित तकनीक का उपयोग अत्यधिक बढ़ा। भारत में भी यह परिवर्तन संभव है, बशर्ते नीति दीर्घकालिक, पारदर्शी और लक्ष्य-उन्मुख हो।</p>
<p><strong>प्रदूषण नियंत्रण उपकरण :</strong></p>
<p>दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत को आने वाले वर्षों में पर्यावरण रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा पर बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी। नदियों की सफाई, स्वच्छ परिवहन व्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन तथा हरित भवनों के विकास पर अत्यधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। ऐसे में प्रदूषण कर एक स्थायी और अनुमानित राजस्व स्रोत बन सकता हैए जिसे एक स्वतंत्र श्हरित निधिश् के माध्यम से केवल पर्यावरण संरक्षण पर व्यय किया जा सकता है। वैश्विक स्तर पर भी प्रदूषण कर का महत्व बढ़ रहा है। कई विकसित देश अब उन आयातित वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगा रहे हैं, जो अधिक प्रदूषणकारी स्रोतों से बनती हैं। यदि भारत घरेलू स्तर पर प्रदूषण पर उचित कर लागू करता है, तो भारतीय निर्यातकों को विदेशी बाजारों में अतिरिक्त शुल्क से राहत मिल सकती है। इस प्रकार प्रदूषण कर केवल पर्यावरण हित में नहीं, बल्कि भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा की रक्षा में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।</p>
<p><strong>ईंधन और बिजली :</strong></p>
<p>इन सबके बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रदूषण कर गरीबों पर भारी पड़ सकता है,यह चिंता बिल्कुल वास्तविक है। यदि ईंधन और बिजली की लागत बढ़ेगी, तो उसके साथ ही परिवहन, खाद्य पदार्थ और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। इसका सीधा प्रभाव निम्न आय वर्ग पर पड़ता है, जिनके पास विकल्प सीमित होते हैं। इसलिए प्रदूषण कर को न्यायपूर्ण बनाने के लिए यह अनिवार्य होगा कि निम्न आय वाले परिवारों को प्रत्यक्ष नकद सहायता, ऊर्जा सब्सिडी और रसोई गैस जैसी आवश्यकताओं पर राहत दी जाए। उद्योग जगत की चिंताएं भी कम नहीं। विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग ऊर्जा प्रधान होते हैं और किसी भी अतिरिक्त कर का प्रभाव उनकी लागत पर पड़ता है। अत: प्रदूषण कर को चरणबद्ध ढंग से लागू करना होगा,पहले बड़े उद्योगों पर, धीरे-धीरे छोटे उद्योगों को तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ इस दायरे में लाना होगा।</p>
<p><strong>ब्याज रहित ऋण :</strong></p>
<p>हरित मशीनरी पर अनुदान, ब्याज रहित ऋण, और तकनीकी उन्नयन के लिए मार्गदर्शन इस परिवर्तन को सुगम बना सकते हैं।भारत की प्रशासनिक क्षमता भी एक महत्वपूर्ण कारक है। प्रदूषण का सटीक मापन, डेटा की विश्वसनीयता और निगरानी तंत्र की पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक होगी। छोटे उद्योगों और गैर-प्रमाणित स्रोतों की निगरानी आज भी चुनौतीपूर्ण है। यदि उत्सर्जन मापन ही विश्वसनीय न हो, तो कर प्रणाली पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसलिए भारत को आधुनिक सेंसर तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी, डिजिटल उत्सर्जन पंजीकरण तथा रियल टाइम निगरानी प्रणाली को मजबूत करना होगा। अंतत: यह कहा जा सकता है कि प्रदूषण कर भारत के लिए केवल राजस्व संग्रह का साधन नहीं, बल्कि एक व्यापक हरित परिवर्तन की दिशा में आवश्यक कदम है। इसे न्यायपूर्ण, पारदर्शी, चरणबद्ध और वैज्ञानिक आधार पर लागू करने से भारत न केवल प्रदूषण कम कर पाएगा, बल्कि अपने विकास मॉडल को भी टिकाऊ, स्वस्थ और पर्यावरण सम्मत बना सकेगा।</p>
<p><strong>-डॉ.सत्यवान सौरभ</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 12:48:15 +0530</pubDate>
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                <title>चीन को चुनौती : भारतीय नौसैनिक जहाज मनीला बंदरगाह पहुंचे, दक्षिण चीन सागर में भारत-फिलीपिंस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास आज से</title>
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                        <![CDATA[ फिलीपींस और भारत की नेवी दक्षिण चीन सागर में संयुक्त समुद्री अभ्यास करने जा रही है]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/challenge-to-china-indian-naval-ship-manila-port-reached-south/article-122454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/photo-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>मनीला। फिलीपींस और भारत की नेवी दक्षिण चीन सागर में संयुक्त समुद्री अभ्यास करने जा रही है। मैरीटाइम कॉपोर्रेशन एक्टिविटी नाम से यह संयुक्त अभ्यास 3 अगस्त से शुरू होगा। इस अभ्यास के लिए भारतीय नौसैनिक जहाज मनीला बंदरगाह पहुंच चुके हैं। फिलीपींस और भारत के युद्धपोत चीन की नाक के नीचे समुद्र में अपनी ताकत दिखाएंगे। भारत और फिलीपींस का यह अभ्यास इसलिए खास है क्योकि इस क्षेत्र में चीन की आक्रामकता ने पड़ोसियों के लिए चिंता पैदा की है।</p>
<p>फिलीपींस में भारतीय राजदूत हर्ष कुमार जैन ने बताया कि संयुक्त अभ्यास के तहत 3 अगस्त को भारतीय नौसैनिक जहाज मनीला बंदरगाह से रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर की अगले सप्ताह होने वाली भारत की राजकीय यात्रा के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करती है। साथ ही दोनों देशों के बीच गहरी होती साझेदारी को दिखाती है। भारत के फिलीपींस पहुंचे बेड़े में निर्देशित मिसाइल विध्वंसक आइएनएस दिल्ली, पनडुब्बी रोधी कोरवेट किल्टन और आइएनएस शक्ति शामिल हैं। फिलीपींस पहुंचे भारतीय नौसेना जहाज आईएनएस दिल्ली, शक्ति और किल्टन की कमान पूर्वी बेड़े के फ्लैग आॅफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल सुशील मेनन के हाथों में रही।</p>
<p>फिलीपींस और भारत की नौसेनाओं के बीच इस द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास में संयुक्त युद्धाभ्यास और संचार प्रोटोकॉल पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस दौरान तैयारियों में सुधार, आपसी विश्वास का निर्माण और समुद्री क्षेत्र में परिचालन तालमेल को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। भारतीय युद्धपोत पहले भी फिलीपींस का दौरा कर चुके हैं लेकिन इस बार कई चीजें पहली बार हो रही हैं।</p>
<p><strong>चीन की दखलंदाजी को लेकर चिंता</strong><br />यह पहली बार होगा जब भारत और फिलीपींस की नेवी किसी समुद्री सहयोगात्मक गतिविधि में भाग लेंगी। संयुक्त नौवहन, पासिंग अभ्यास और समुद्री साझेदारी अभ्यास जैसे पिछले प्रयासों की तुलना में यह समुद्री सहयोगात्मक गतिविधि सैन्य बलों की अंतर-संचालन क्षमता पर है। अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा और फ्रांस के बाद भारत ने भी दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के साथ समुद्री सहयोग बढ़ाया है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दखलंदाजी को लेकर कई देश चिंतित हैं। खासतौर से फिलीपींस और चीन के बीच समुद्री सीमा विवाद रहा है। वहीं भारत की भी कई मुद्दों पर चीन से तनातनी रही है। यह अभ्सास भारत की ओर से चीन को संदेश देने की कोशिश है कि वह भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Aug 2025 11:51:34 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
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                <title>वार्ड 5 : ग्रामीणों के सामने नदी पार गुजरने की चुनौती</title>
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                        <![CDATA[ किशनगंज तहसील क्षेत्र के छिनोद ग्राम पंचायत के सोड़ाना गांव से सोड़ाना के डांडे सहरिया बस्ती पर जाने के लिए लोगो को बरसात के 4 महीने इस नदी की पुलिया को पार करके जाना मजबूरी बनी हुई है। सोड़ाना डांडे पर लगभग 300 सहरिया परिवार की आबादी है। उन सहरिया परिवारों को रोज हर मौसम इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/the-challenge-of-crossing-the-river-in-front-of-the-villagers/article-17395"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/gopal-ki-bhoomi-par-chin-raha-......shahabaad-news-baran-2.8.20221.jpg" alt=""></a><br /><p>किशनगंज। किशनगंज तहसील क्षेत्र के छिनोद ग्राम पंचायत के सोड़ाना गांव से सोड़ाना के डांडे सहरिया बस्ती पर जाने के लिए लोगो को बरसात के 4 महीने इस नदी की पुलिया को पार करके जाना मजबूरी बनी हुई है। ग्रामीणों के लिए हर दिन चुनौती से कम नही है। जिससे आए दिन दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। मुख्य पुलिया जो कम ऊंचाई की बनी होने के कारण बारिश होने के बाद लंबे समय तक पुलिया की रपट डूबी रहती है। एक चुनौती पार करने के बाद एक ओर नाले को पार करने के बाद एक ओर  क्षतिग्रस्त हो चुकी पुलिया को पार करना होता है। जिसमें हर समय दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। सोड़ाना डांडे पर लगभग 300 सहरिया परिवार की आबादी है। उन सहरिया परिवारों को रोज हर मौसम इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। जिसको लेकर ग्राम पंचायत एवं प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।  किशनगंज पंचायत समिति के वार्ड 5 में आने वाले गांव रानीबडौद मेहरावता ,इकलेरा ,मिसाई, सोडाणा,राधापुरा छिनोद आंशिक  आदि शामिल है तथा कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 8350 है। <br /><br /><strong> बारिश के समय मरीजों की नहीं मिलती सुविधाएं</strong><br />सोड़ाना के डांडे पर रहने वाले लगभग 300 सहरिया परिवारों को तेज बारिश के समय नदी नालो के उफान पर आ जाने के कारण सभी रास्ते बंद हो जाते है। ऐसे में सोड़ाना डांडे पर रहने वाले लोगो को बारिश के समय बीमार हो जाने पर चिकित्सा सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ता है। कई बार उपचार के अभाव में दम तोड़ देते है। <br /><br /><strong>रेबारपुर की कच्ची ग्रेवल सड़क से गुजरने की मजबूरी</strong><br />रेबारपुरा गांव के ग्रेवल सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढें होने से राहगीरों को परेशान होना पड़ रहा है। कच्ची सड़क से वाहनों को भी गुजरने में परेशानियो का सामना करना पड़ता है। मुख्य सड़क का रास्ता पक्का होने व लंबा होने से रेबारपुरा के ग्रामीण इसी ग्रेवल सड़क से गुजरते है। गत वर्ष ही  गांव रेबारपुरा बाढ़ग्रस्त हो गया था। जिसकी वजह से पहले भी ग्रामवासियो के द्वारा बहुत नुकसान उठा चुका है। रेबारपुरा से रामस्वरूपजी खेत तक पूरी कच्ची सड़क खराब हो चुकी है। आमजन पैदल निकलने में भी भारी मुश्किलो का सामना करना पड़ता है। बाढ़ आने के बाद निकलने के लिए यही एक मात्र रस्ता बचता है। सब रास्ते बाढ़ के पानी से लबालब रहते है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। चुनाव के दौरान जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया ने इस ग्रेवल सड़क को पक्की सड़क बनाने का वादा किया था, लेकिन बाद में कोई ध्यान नही दिया गया। जिससे बारिश के समय कच्ची सड़क से कम दूरी तय कर निकलने की मजबूरी है। <br /><br />मुख्य सड़क से रेबारपुरा तक खस्ताहाल कच्ची सड़क का निर्माण शीघ्र किया जाए। जिससे ग्रामीणों को लंबी दूरी तय नही करना पड़े। साथ ही सोड़ाना जाने के लिए उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जाए। <br /><strong>- प्रेम मीणा, ग्रामीण, सोडाना।</strong> <br /><br />रेबारपुरा के ग्रामीणो के लिए मुख्य सड़क का रास्ता पक्का बना हुआ है। यह वैकल्पिक मार्ग है। जिस पर बारिश कम होने के बाद ग्रेवल डलवाकर मार्ग दुरुस्त करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- रचना कंवर, सरपंच, ग्राम पंचायत छिनोद।</strong> <br /><br />पंचायत समिति क्षेत्र के गांव से सोड़ाना डांडे तक जाने वाले  रास्ता के बीच आने वाली पुलिया के लिए 7 लाख रुपये की राशि स्वीकृत है। बारिश के बाद कार्य शुरू करवाया जाएगा। <br /><strong>- प्रहलाद राम डूडी, विकास अधिकारी, किशनगंज।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 15:42:02 +0530</pubDate>
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                <title>पीजी में सेमेस्टर सिस्टम: परीक्षा करवाना ही कॉलेजों के लिए चुनौती</title>
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                        <![CDATA[  कोटा विश्वविद्यालय संभाग के सभी राजकीय महाविद्यालयों  में नई शिक्षा पॉलीसी के तहत सेमेस्टर सिस्टम लागू करने जा रहा है। एमए और एमकॉम पाठ्यक्रम में पहली बार सेमेस्टर प्रणाली अपनाई जाएगी। यह पॉलिसी महाविद्यालयों के नियमित विद्यार्थियों पर ही लागू होगी। इससे कॉलेजों की शिक्षण व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन होगा।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/semester-system-in-pg--the-challenge-for-colleges-is-to-get-the-exam-done/article-13456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/pg-mei-semester-system--exam-karwana-colleges-ke-liye-chunauti..kota-news-2.7.2022-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विश्वविद्यालय संभाग के सभी राजकीय महाविद्यालयों  में नई शिक्षा पॉलीसी के तहत सेमेस्टर सिस्टम लागू करने जा रहा है। एमए और एमकॉम पाठ्यक्रम में पहली बार सेमेस्टर प्रणाली अपनाई जाएगी। यह पॉलिसी महाविद्यालयों के नियमित विद्यार्थियों पर ही लागू होगी। विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों में साधन-संसाधनों को परखे बिना ही नई शिक्षा पॉलसी थोपी जा रही है। इससे कॉलेजों की शिक्षण व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन होगा। साथ ही लाखों विद्यार्थियों को हर 6-6 महीनों में दो बार परीक्षा देनी होगी। इस व्यवस्था से जहां परीक्षाएं सम्पन्न करवाने में डेढ़ माह का अतिरिक्त समय लगेगा। वहीं, प्रिवियस व फाइनल ईयर को मिलाकर 4 बार परीक्षा फीस देनी होगी जो ढाई हजार प्रति सेमेस्टर के हिसाब से 10 हजार हो जाएगी। जबकि, अभी तक दो साल में दो बार ही ढाई-ढाई हजार रुपए के हिसाब से कुल 5 हजार रुपए ही एग्जाम फीस लगती है। ऐसे में विद्यार्थियों को 5 हजार रुपए का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ेगा। <br /><br /><strong>ऐसे होगा स्टूडेंट्स को करोड़ों का नुकसान</strong> <br />एमए, एमकॉम दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। प्रिवियस व फाइनल ईयर की परीक्षा एक-एक साल में होती है। एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए भी एक-एक बार ही देनी होती है। यानी, दो साल की डिग्री के लिए 2 बार परीक्षा और ढाई हजार रुपए के हिसाब से एग्जाम फीस 5 हजार रुपए हो जाती है। लेकिन, सेमेस्टर सिस्टम से इस डिग्री के लिए 4 बार परीक्षा और 4 बार ही एग्जाम फीस देनी होगी, जो ढाई हजार के हिसाब से 10 हजार रुपए हो जाएगी।  हर वर्ष संभाग के महाविद्यालयों में लाखों विद्यार्थी एमए व एमकॉम करते हैं। ऐसे में प्रत्येक स्टूडेंट्स पर परीक्षा फीस के रूप में 5 हजार रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा, जो तीनों संकाय के कुल विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार यह राशि करोड़ों में पहुंच जाएगी।<br /><br /><strong>एक साल में करवाते हैं 40 विषयों की परीक्षा</strong><br />एआईएफयूसीपीओ के जोनल सचिव डॉ. रघुराज सिंह परिहार ने बताया कि अभी महाविद्यालयों में 40 तरह के विषयों की परीक्षाएं साल में एक बार ही सम्पन्न करवाई जाती है। जिसमें 3 माह का  समय लगता है। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के साथ हर 6 महीने में परीक्षाएं करवाने में एक से डेढ़ माह का समय अतिरिक्त लगेगा। ऐसे में कॉलेजों में परीक्षाएं करवाने में ही पांच माह बीत जाएंगे। वहीं, परीक्षा में प्रोफेसरों की ड्यूटी लगने से बीए, बीकॉम व अन्य संकाय के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इस व्यवस्था से न तो समय पर परीक्षाएं होंगी और न ही सिलेबस पूरा होगा। जिसका दुष्प्रभाव परीक्षा परिणाम के रूप में सामने आएगा। <br /><br /><strong>शहर को छोड़कर अन्य कॉलेजों में नहीं पर्याप्त संसाधन</strong><br />सूत्रों के अनुसार शहर के राजकीय कॉलेज संसाधनों की दृष्टि से बेहतर स्थिति में है। लेकिन ग्रामीण सहित संभाग के अन्य जिलों के महाविद्यालयों में संसाधनों की कमी ज्यादा है। हायर एज्युकेशन में सरकार का स्टैंडर्ड रिक्वायरमेंट कहीं भी पूरा नहीं होता। वहीं, प्रैक्टिकल सब्जेक्ट हो तो लैब में संसाधनों की कमी रहेगी। वहीं, ग्रीष्मावकाश में पढ़ाई करवाने में दिक्कत होगी।<br /><br /> <strong>8 हजार स्टूडेंट्स पर 80 शिक्षक, सिलेबस पूरा करवाना चैलेंज</strong> <br />गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय भार्गव के मुताबिक, जिन महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है, वहां विश्वविद्यालय द्वारा लागू की जा रही नई शिक्षा निति के हिसाब से हर 6-6 माह में परीक्षाएं करवाना चुनौतीपूर्ण होगा। क्योंकि, पढ़ाई का अधिकतर समय परीक्षाएं करवाने में ही बीत जाएगा। यूजीसी नियमों के अनुसार 40 स्टूडेंट्स पर एक प्रोफेसर होना चाहिए, जो प्रदेश के किसी भी महाविद्यालय में संभवत: नहीं है। कोटा गवर्नमेंट महाविद्यालय में वर्तमान में कुल 8 हजार 800  विद्यार्थी हैं। जबकि, शिक्षकों की संख्या 78 से 80 है। ऐसे में सेमेस्टर परीक्षाओं में शिक्षकों की ड्यूटी लगने से अन्य संकाय के स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित होगी। साथ ही समय पर सिलेबस पूरा करवाना चैलेंज होगा। <br /><br /><strong>ये होंगे नुकसान</strong><br />-2 साल की डिग्री करने के लिए अब विद्यार्थियों को 4 बार परीक्षा फॉर्म भरने होंगे। जबकि, पहले 2 बार ही फॉर्म भरने होते थे। <br />-अभी तक प्रिवियस व फाइनल इयर में दो बार ढाई-ढाई हजार रुपए परीक्षा फीस देनी होती है। लेकिन, सेमेस्टर सिस्टम लागू होते ही दो साल में चार सेमेस्टर के 10 हजार रुपए एग्जाम फीस देनी होगी। ऐसे में डिग्री पूरी करने में विद्यार्थियों को 5 हजार रुपए का अतिरिक्त नुकसान भुगतना पड़ेगा। <br />- महाविद्यालयों में दो-दो बार एग्जाम होंगे तो शेष अन्य विषयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होना निश्चित है।<br />- कॉलेजों में एक साल में 2 माह का समय समर वेकेशन का होता है। ऐसे में सिलेबस पूरा करवाना चुनौतीपूर्ण होगा। <br /><br /><strong>फायदे : कॉलेजों में स्टूडेंट्स की उपस्थिति भी बढ़ेगी</strong> <br />जेडीबी कॉलेज में समाजशास्त्र की प्रोफेसर ज्योति सिड़ाना ने बताया कि सेमेस्टर सिस्टम से फीस के रूप में विद्यार्थियों को भले ही नुकसान हो सकता हो लेकिन इसके फायदे भी हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की नई शिक्षा निति से महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ेगी। सेमेस्टर के रूप में पेपर बढ़ने से स्टूडेंट्स को क्वालिटी कंटेंट मिलेगा। परीक्षा में पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत भी बढ़ जाएगा। साथ ही कम्पीटिशन की भावना भी बढ़ेगी और स्कील भी डवलप होगी। <br /><br />विश्वविद्यालय संभाग के राजकीय महाविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई है। विद्या परिषद से स्वीकृति मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। <br /><strong>- राजकुमार उपाध्याय, रजिस्ट्रार कोटा विश्वविद्यालय</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 15:06:56 +0530</pubDate>
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                <title>सिंधु-प्रणय की चुनौती क्वार्टरफाइनल में समाप्त</title>
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                        <![CDATA[पूर्व विश्व चैंपियन भारत की पीवी सिंधु और एच एस प्रणय का मलेशिया ओपन सुपर 750 सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट में अभियान शुक्रवार को क्वार्टर फाइनल में हार के साथ समाप्त हो गया। सिंधु को दूसरी सीड चीनी ताइपे की ताई जू यिंग के हाथों तीन गेमों में हार का सामना करना पड़ा जबकि प्रणय को सातवीं सीड इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी ने लगातार गेमों में हराया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sindhu-pranays-challenge-ends-in-quarterfinals/article-13419"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/sidhu.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कुआलालम्पुर।</strong> पूर्व विश्व चैंपियन भारत की पीवी सिंधु और एच एस प्रणय का मलेशिया ओपन सुपर 750 सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट में अभियान शुक्रवार को क्वार्टर फाइनल में हार के साथ समाप्त हो गया। सिंधु को दूसरी सीड चीनी ताइपे की ताई जू यिंग के हाथों तीन गेमों में हार का सामना करना पड़ा जबकि प्रणय को सातवीं सीड इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी ने लगातार गेमों में हराया।  सिंधु ने यह मुकाबला 53 मिनट में 21-13, 15-21, 13-21 से गंवाया। ताई जू यिंग ने इस जीत से भारतीय खिलाड़ी के खिलाफ अपना करियर रिकॉर्ड 16-5 कर लिया है। प्रणय को क्रिस्टी ने 44 मिनट में 21-18, 21-16 से पराजित किया। भारतीय खिलाड़ी पहला गेम जीतने के बाद इस लय को बरकरार नहीं रख पाईं और अगले दो गेम हार गईं। सिंधु को जू यिंग से इस तरह लगातार छठी हार का सामना करना पड़ा।</p>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 11:13:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>कब सुधरेंगे हालात: टारगेट किलिंग कश्मीर में सेना के लिए नई चुनौती</title>
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                        <![CDATA[कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से अल्पसंख्यकों और गैर स्थानीय लोगों पर आतंकवादियों के लक्षित हमले सुरक्षा बलों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस साल लक्षित हमलों की एक श्रृंखला में 12 नागरिकों, ज्यादातर अल्पसंख्यक, गैर स्थानीय और पंचायती राज संस्थानों के सदस्यों को गोली मार दी गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/target-killing--new--challenge--for--kashmiri-military--terrorist-attack/article-11341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/army.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">श्रीनगर</span></strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">।</span></strong> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से अल्पसंख्यकों और गैर स्थानीय लोगों पर आतंकवादियों के लक्षित हमले सुरक्षा बलों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">इस साल लक्षित हमलों की एक श्रृंखला में </span>12<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> नागरिकों</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">ज्यादातर अल्पसंख्यक</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">गैर स्थानीय और पंचायती राज संस्थानों के सदस्यों को गोली मार दी गई है। इन हमलों में लगभग एक दर्जन से अधिक गैर स्थानीय कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">मई से अब तक छह नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। लक्षित हमलों का नवीनतम सिलसिला ऐसे समय में हो रहा है जब सुरक्षा बलों ने पूरे कश्मीर में आतंकवादियों और उनके हमदर्दों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ा<span>  </span>है। इस साल</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">कश्मीर में कुछ शीर्ष कमांडरों सहित </span>90<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि अगस्त </span>2019<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के तुरंत बाद लक्षित हत्याएं शुरू हुईं। कई पर्यवेक्षक इन हमलों को अनुच्छेद </span>370<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> के निरस्तीकरण से जुड़े हुए देखते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">पहली लक्षित हत्या अनुच्छेद </span>370<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> के निरस्त होने के लगभग तीन महीने बाद हुई थी। गत </span>29<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> अक्टूबर</span>, 2019<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में पश्चिम बंगाल के पांच मुस्लिम मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जनवरी </span>2021<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> में श्रीनगर में एक ज्वैलर सतपाल निश्चल की उनकी दुकान के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दो महीने बाद श्रीनगर में एक लोकप्रिय भोजनालय के मालिक आकाश मेहरा के बेटे को गोली मार दी गई। अक्टूबर </span>2021<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> में</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">आतंकवादियों ने लक्षित हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">एक प्रमुख फार्मासिस्ट एमएल बिंदू की अक्टूबर में उनकी दुकान पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसी शाम बिहार के एक गैर-स्थानीय पानीपुरी विक्रेता की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अगले दिन श्रीनगर के संगम के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और उनके सहयोगी दीपक चंद की स्कूल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसी महीने में और अधिक हमले हुए</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जिसमें चार अन्य गैर-स्थानीय कार्यकर्ता मारे गए। इस साल आतंकवादियों ने पंचायत संस्थाओं के प्रतिनिधियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। मार्च में लक्षित हमलों में तीन पंचायत सदस्य मारे गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमलों की शुरूआत अप्रैल से हुई। गत </span>13<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> अप्रैल को दक्षिण कश्मीर में एक राजपूत नागरिक सतीश कुमार की हत्या कर दी गई थी। लगभग एक महीने बाद कश्मीरी पंडित राहुल भट की चदूरा बडगाम स्थित उनके कार्यालय के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई। चूंकि एक वाइन शॉप में एक हिंदू कर्मचारी</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">एक मुस्लिम टीवी कलाकार</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">एक हिंदू स्कूल शिक्षक</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">एक गैर स्थानीय बैंक प्रबंधक और एक गैर स्थानीय मजदूर सहित पांच लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जिससे कश्मीरी पंडितों और गैर-मूल निवासियों में बड़ी चिंता पैदा हो गई है। घाटी में कई पंडित पहले ही ट्रांजिट कैंप छोड़ चुके हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि लक्षित हत्याओं का उद्देश्य लोगों में </span>'<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">भय फैलाना'</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा</span>, ''<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">आतंकवादी निराश हैं और इसलिए वे अल्पसंख्यक समुदायों और महिलाओं सहित निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।"</span><span><br /></span></p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 16:50:52 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया के लिए एक चुनौती है मंकीपॉक्स : डब्ल्यूएचओ</title>
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                        <![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कोविड-19 महामारी और यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अब मंकीपॉक्स बीमारी को दुनिया के लोगों के लिए एक चुनौती बताया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/monkeypox-challenge-for-world--says-who/article-10302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46546546546531.jpg" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने कोविड-19 महामारी और यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अब मंकीपॉक्स बीमारी को दुनिया के लोगों के लिए एक चुनौती बताया। कोविड महामारी दुनिया की एकमात्र समस्या नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीति से उपजी बीमारी भी मानव जाति के लिए एक बड़ा संकट है, जिनसे वह अन्य प्राकृतिक आपदाओं अकाल, सूखा और तमाम बीमारियों को सामना करते हैं।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने कहा कि अब तक सामने आए 92 प्रयोगशाला पुष्ट मामले और मंकीपॉक्स के 28 संदिग्ध मामलों की जांच चल रही है। डब्ल्यूएचओ को 12 सदस्य देशों की रिपोर्ट मिली है और इसे महामारी नहीं बताया गया है। अभी तक मंकीपॉक्स के संक्रमण से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 16:48:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur ]]>
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                <title>महिला चैलेंज टी-20 में खेलेंगी तीन टीमें, मिताली और झूलन बाहर</title>
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                        <![CDATA[बीसीसीआई ने आईपीएल प्लेऑफ मैचों के दौरान होने वाले महिला चैलेंज टी-20 मैचों के कार्यक्रम और दल की घोषणा कर दी है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sports-news--three-teams-will-play-in-women-s-challenge-t20--mithali-and-jhulan-out/article-9907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/mandhana.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बीसीसीआई ने आईपीएल प्लेऑफ मैचों के दौरान होने वाले महिला चैलेंज टी-20 मैचों के कार्यक्रम और दल की घोषणा कर दी है। दीप्ति शर्मा को मिताली राज की जगह वेलॉसिटी टीम का कप्तान बनाया गया है, जबकि हरमनप्रीत कौर और  स्मृति मंधाना क्रमश: सुपरनोवाज और ट्रेलब्लेजर्स की कप्तान बनी रहेंगी। यह टूर्नामेंट 23 से 28 मई के बीच पुणे में होगा, जिसमें फाइनल सहित कुल चार मैच होंगे। सीनियर खिलाड़ी मिताली राज और झूलन गोस्वामी इस टूर्नामेंट में खेलती हुई नहीं दिखाई देंगी।<br /><br /><strong>12 विदेशी खिलाड़ी खेलेंगी</strong><br />टूर्नामेंट में 12 विदेशी खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगी। इनमें अलाना किंग (आॅस्ट्रेलिया), सोफी एकलस्टन (इंग्लैंड), सोफिया डंकली (इंग्लैंड), केट क्रॉस (इंग्लैंड), अयाबोंगा खाका (साउथ अफ्रीका), सुने लूस (साउथ अफ्रीका), लॉरा वूलवार्ट (साउथ अफ्रीका), डिएंड्रा डॉटिन (वेस्टइंडीज), हेली मैथ्यूज (वेस्टइंडीज), सलमा खातून (बांग्लादेश) और शरमिन अख्तर (बांग्लादेश) का नाम शामिल है।<br /><br /><strong>वेदा और अनुजा भी नहीं खेलेंगी</strong><br />इस दौरान श्रीलंका की महिला टीम पाकिस्तान का दौरा करेगी, इसका मतलब यह है कि श्रीलंकाई सुपरस्टार चामरी अट्टापट्टू इस टूर्नामेंट में खेलती हुई नहीं दिखाई देंगी। वेदा कृष्णमूर्ति और अनुजा पाटिल कुछ ऐसे बड़े नाम हैं, जो पिछले साल इस टूर्नामेंट का हिस्सा तो थे लेकिन इस बार नहीं रहेंगे। पहले मैच में सुपरनोवाज का सामना ट्रेलब्लेजर्स से होगा।</p>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 10:49:38 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे को दी चुनाव लड़ने की चुनौती</title>
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                        <![CDATA[महाराष्ट्र के अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को प्रदेश में कहीं से भी चुनाव लड़ने की खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह उनके खिलाफ लडऩे के लिए तैयार हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/navneet-rana-give-challenge-of-uddhav-thackeray-of-election/article-9333"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/untitled-1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र के अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को प्रदेश में कहीं से भी चुनाव लड़ने की खुली चुनौती देते हुए कहा कि वह उनके खिलाफ लडऩे के लिए तैयार हैं। गर्दन की समस्या से जूझ रही राणा को अदालत से जमानत मिलने के बाद लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राणा ने अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कहा कि आगामी निगम चुनाव में मैं पूरी ताकत से जनता के बीच जाऊंगी। आने वाले समय में महाराष्ट्र की जनता मुख्यमंत्री ठाकरे को बताएगी कि हनुमान और भगवान राम का नाम लेने वालों को परेशान करने का क्या नतीजा होता है। मेरी लड़ाई जारी रहेगी। मैं अदालत के आदेश का सम्मान करूंगी लेकिन सरकार द्वारा उनके और उनके पति पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाऊंगी।</p>
<p>राणा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ठाकरे हम पर दबाव बनाकर कार्रवाई कर रहे हैं। ठाकरे किसी से नहीं मिलते और राज्य का दौरा भी नहीं करते। यह कभी पता नहीं चलता कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री हैं या नहीं। हम एक-दो दिन में समस्या की रिपोर्ट दिल्ली को देंगे। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 May 2022 13:16:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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            <item>
                <title>प्रदेश में कानून व्यवस्था चुनौती बनी है, कांग्रेस सरकार आते ही आखिर दंगे क्यों होते हैं: पूनिया</title>
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                        <![CDATA[ देश में कांग्रेस समाप्ति की ओर है और इस तरह का तुष्टिकरण इसका मूल कारण बनेगा: पूनिया]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--law-and-order-has-become-a-challenge-in-the-state--why-do-riots-happen-as-soon-as-congress-government-comes--satish-poonia/article-9078"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/rajendra-rathore.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  सतीश पूनिया ने जोधपुर में हुए तनाव को लेकर कहा है कि राजस्थान में कानून व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आखिर कांग्रेस की सरकारें आने के बाद ही इस तरह की घटनाएं क्यों होते हैं। जोधपुर में बिस्सा की मूर्ति से भगवा ध्वज हटाकर दूसरा इस्लाम का ध्वज लगाया गया। जिसके बाद वहां पर तनाव व्याप्त हुआ है। यही नहीं आज दोबारा से वहां पर तोड़फोड़ की गई, गाड़ियां तोड़ी गई। कानून व्यवस्था केवल चुनौती ही नहीं चिंता का विषय भी बनी हुई है। सरकार एक वर्ग विशेष को गलत संरक्षण दे रही है और तुष्टिकरण की राजनीति करती है। करौली की घटना से साफ हो जाता है कि सरकार दंगाइयों को संरक्षण दे रही है। पीएफआई जैसे संगठनों को प्रदेश में खुली छूट दे रखी है। राजस्थान में बहू संख्यक वर्ग पर लगातार हमले हो रहे हैं। बहुसंख्यक वर्ग के रामनवमी जैसे कार्यक्रमों की शोभायात्रा पर रोक लगाई जाती है और लोगों को 107 में पकड़ा जाता है। कांग्रेस के किसी तुष्टिकरण के कारण अराजक तत्वों ने प्रदेश को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। समय रहते सरकार को सोचना चाहिए। देश में कांग्रेस समाप्ति की ओर है और इस तरह का तुष्टिकरण इसका मूल कारण बनेगा। लेकिन कम से कम प्रदेश की शांति सद्भाव के लिए सरकार वोट बैंक की राजनीति छोड़े और प्रदेश की सोचे।</p>
<p><strong>गहलोत सरकार के तुष्टिकरण की वजह से राजस्थान का माहौल बिगड़ रहा है : राठौड़</strong><br />राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने ट्वीट कर कहा कि हिन्दू नववर्ष के दिन करौली में दंगे के बाद अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहजिले जोधपुर के जालोरी गेट में हिंसक झड़प की घटना गहलोत सरकार के माथे पर कलंक है। गहलोत सरकार की तुष्टिकरण की नीति के कारण शांतिप्रिय राजस्थान में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की दर्जनों भर घटनाएं हो गई है। राठौड़ ने कहा कि जोधपुर में हुई यह घटना पुलिस इंटेलीजेंस पर सवालिया निशान है। मुख्यमंत्री जी स्वयं के गृह जिले में कारित हुई इस घटना का दोषारोपण अब किसको देंगे ? क्या अब मुख्यमंत्री भी अपनी आदत के अनुसार खुद की नाकामी का ठीकरा प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर फोड़ेंगे ?<br /><br />राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , जो राज्य के गृहविभाग के मुखिया भी है, उनके राज में मृत प्राय कानून व्यवस्था का ही प्रमाण है कि अब उनके गृहजिले जोधपुर में बेखौफ दंगाई खुलेआम आपसी भाईचारा और सद्भाव बिगाड़ते है और पुलिस प्रशासन हर बार की तरह बेबस व लाचार नजर आता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 14:46:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुनिया के लिए नई चुनौती बन सकता है लासा फीवर</title>
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                        <![CDATA[अब तक 659 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/lassa-fever-can-become-a-new-challenge-for-the-world/article-7079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/corona3.jpg" alt=""></a><br /><p>कोरोना महामारी के बीच नाइजीरिया में तेजी से पांव पसार रहा लासा फीवर दुनिया के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है। नाइजीरिया सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल  के अनुसार नाइजीरिया में इस वर्ष 88 दिनों में लासा फीवर से 123 लोगों की मौत हो चुकी है। <br /><br />वहीं अब तक 659 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। ब्रिटेन में दो मरीज मिले हैं जबिक एक मौत हुई है। 25 फीसदी रोगी जो लासा फीवर को मात देते हैं उनमें बहरापन होता है। इसमें से आधे मरीजों की एक से तीन महीने में सुनने की क्षमता लौट जाती है।</p>
<p><br /><strong>लासा वायरस</strong> <br />विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लासा फीवर एक्यूट वायरल हैमोरेजिक फीवर होता है जो लासा वायरस के कारण होता है। लासा का संबंध वायरसों के परिवार एरिनावायरस से है। मनुष्य आमतौर पर इसकी चपेट में अफ्रीकी मल्टीमैमेट चूहों से आते हैं। घर का सामान या खाद्य पदार्थ जो चूहों के यूरिन और गंदगी से संक्रमित होता है उससे बीमारी फैलती है।</p>
<p><br /><strong> मरीजों में लक्षण नहीं</strong><br />डब्ल्यूएचओ के अनुसार लासा फीवर की चपेट में आने वाले 80 फीसदी में संक्रमण का कोई लक्षण नहीं दिखता है। पांच में से एक संक्रमित को गंभीर तकलीफ होती है। वायरस से शरीर के प्रमुख अंग लिवर, स्प्लीन और किडनी को बुरी तरह प्रभावित होने का साक्ष्य मिला है।</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 14:33:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विधायकों को राजनीतिक पदों पर नियुक्त करने का मुद्दा गरमाया : भाजपाइयों ने संविधान के खिलाफ बताते हुए कोर्ट में चुनौती देने का किया ऐलान</title>
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                        <![CDATA[ इस विवाद के बीच कांग्रेसियों ने इन नियुक्तियों को सही ठहराया है। उनका तर्क है कि किसी भी विधायक को मंत्री का दर्जा नहीं दिया गया।]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Feb 2022 13:09:45 +0530</pubDate>
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