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                <title>parliamentary debate - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राज्यसभा में उठा पैक्स सिलिका में शामिल होने से भारत के डेटा की निजता प्रभावित होने का मामला, दिग्विजय सिंह ने जताई नागरिकों की निजता के उल्लंघन की आशंका</title>
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                        <![CDATA[राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने 'पैक्स सिलिका' गठबंधन से डेटा निजता और 'डिजिटल उपनिवेशवाद' का खतरा उठाया। जया बच्चन ने वीआईपी कल्चर से जनता और सांसदों को होने वाली असुविधा पर नाराजगी जताई, जबकि राघव चड्ढा ने मोबाइल डेटा कैरी-फॉरवर्ड के उपभोक्ता अधिकार की मांग की। सदन में महिला सुरक्षा और नकली ऑर्गेनिक उत्पादों पर भी चर्चा हुई।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/issue-of-indias-data-privacy-being-affected-due-to-pax/article-147527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/digvijay-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के नेतृत्व में बनाये गये रणनीतिक गठबंधन पैक्स सिलिका में भारत के शामिल होने से भारत और उसके नागरिकों डेटा की निजता की सुरक्षा का मुद्दा सोमवार को राज्यसभा में उठाया गया। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने शून्यकाल में यह विषय उठाते हुए कहा कि भारत हाल ही में पैक्स सिलिका का सदस्य बना है। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन का सदस्य बनने से भारत के डेटा के लीक होने तथा नागरिकों की निजता के उल्लंघन की आशंका है।</p>
<p>कांग्रेस सदस्य ने कहा कि इससे भारत की क़त्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे क्षेत्रों में स्वायत्तता और संभावनाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को उन सेवा शर्तों का सदन में खुलासा करना चाहिए जिनके आधार पर भारत इसका सदस्य बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पैक्स सिलिका डिजिटल उपनिवेशवाद है और इससे भारत के हर नागरिक की निजता की सुरक्षा का सवाल पैदा हो गया है।</p>
<p>उन्होंने इससे अलग एक विषय उठाते हुए देश में अब तक की महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक उपलब्धियों के पड़ावों पर सदन में अल्पकालिक चर्चा कराये जाने की मांग की। भाजपा के डॉ. अजीत माधवराव गोपचड़े ने ऑर्गेनिक के नाम पर देश में बेचे जा रहे नकली खाद्य पदार्थ की ब्रिक्री पर रोक लगाये जाने का मुद्दा उठाया। उन्होने पूरे देश में ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों के लिए एक ही नियम और मानक स्थापित किये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि रसायन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और साथ ही भारतीय उत्पादों का नाम भी खराब हो रहा है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कानून बनाये जाने की मांग की । उन्होंने कहा कि इससे देश की प्रतिष्ठा को भी नुकसान हो रहा है।</p>
<p>भाजपा के नबाम रेबिया ने पूर्वोत्तर के छात्रों के साथ राजधानी दिल्ली में नस्लीय भेदभाव और उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई किये जाने की मांग की। सभापति ने कहा कि इस विषय पर सारा सदन सहानुभूतिपूर्ण विचार रखता है। कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह ने बिहार के औद्योगिकरण के मामले में पिछड़े होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार देश के सकल घरेलू उत्पाद में केवल तीन प्रतिशत का योगदान देता है क्योंकि वहां पर उद्योग और फैक्ट्री नहीं है। इससे लोगों को पलायन करना पड़ता है। उन्होंने राज्य में औद्योगिक टाउनशिप विकसित किये जाने की मांग की।</p>
<p>समाजवादी पार्टी की जया बच्चन ने देश विशेष रूप से राजधानी दिल्ली में वीआईपी संस्कृति के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि इस संस्कृति के कारण कर देने वाले आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी है।<br />उन्होंने अपने साथ हुए मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह और अन्य सांसद पिछले सप्ताह शार्दुल गेट से बाहर निकल रहे थे तो वीआईपी मूवमेंट के चलते को बंद कर दिया गया। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह संसद के इतिहास में पहली बार हुआ कि सांसद के लिए गेट बंद कर दिया गया। इससे सांसदों का अपमान हुआ है। दूसरे मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वीआईपी मूवमेंट के कारण उन्हें राज्यसभा से सेवानिवृत सांसदों की विदायी पार्टी में पहुंचने में एक घंटे से अधिक समय लगा। उन्होंने इस संस्कृति पर रोक लगाये जाने की मांग की। </p>
<p>कांग्रेस की रजनी पाटिल ने निजी स्कूलों में बढ़ती फीस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नागरिकों का मौलिक अधिकार है लेकिन भारी भरकम फीस के कारण वह इससे वंचित हैं। आम आदमी पार्टी के राघव चड्डा ने मोबाइल उपभोक्ताओं के फोन रिचार्ज पैकेज में बिना इस्तेमाल के बचे डेटा के समाप्त हो जाने का का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने डेटा की सीमा हर रोज के हिसाब से तय की है जबकि यह मासिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उपभोक्ता का अधिकार है और उसका बचा हुआ डेटा उपभोक्ता के खाते में जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने बचे हुए डेटा को किसी और को स्थानांतरित किये जाने की व्यवस्था शुरू किये जाने की भी मांग की।</p>
<p>आप पार्टी की स्वाति मालीवाल ने देश में महिला आयोगों को वास्तविक अधिकार दिये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अनेक राज्यों में अभी भी महिला आयोग में पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भी महिला आयोग में अध्यक्ष का पद खाली है।</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:27:51 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>राज्यसभा में उठी फसल बीमा की राशि के भुगतान की समय सीमा तय करने की मांग, राजीव शुक्ला बोले-बीमा के नाम पर किसानों का हो रहा शोषण</title>
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                        <![CDATA[राज्यसभा में राजीव शुक्ला ने फसल बीमा के नाम पर किसानों को मात्र ₹3 मिलने पर रोष जताया। डेरेक ओ ब्रायन ने गैस सिलेंडर की कीमतों और स्वाति मालीवाल ने स्वास्थ्य बीमा कंपनियों द्वारा उपभोक्ताओं के शोषण का मुद्दा उठाया। सदन में वीरता पदक भत्ता बढ़ाने और वाराणसी को यूनेस्को सूची में शामिल करने की भी मांग उठी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/demand-to-fix-time-limit-for-payment-of-crop-insurance/article-146348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajiv-sukla.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की बर्बाद फसलों की भरपाई के लिए दी जाने वाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि के समय पर भुगतान का मुद्दा शुक्रवार को राज्यसभा में उठाया गया। कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने शून्य काल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को फसल बीमा के नाम पर 10 रुपए से भी कम भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में तो यह राशि केवल तीन रुपए तक होती है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को भुगतान पाने के लिए जटिल प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है और कई मामलों में उन्हें कोई ना कोई कारण बता कर भुगतान से मना कर दिया जाता है।</p>
<p>राजीव शुक्ला ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मामूली राशि भी किसान को समय पर नहीं मिल पाती इसलिए उनकी मांग है कि फसल बीमा राशि के भुगतान के लिए एक समय सीमा निश्चित की जानी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के बृजलाल ने अर्धसैनिक बलों के जवानों और अधिकारियों को वीरता पदक के लिए दिए जाने वाले पदक भत्ते को बढ़ाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वीरता के लिये दिये जाने वाले राष्ट्रपति पदक की पुरस्कार राशि को 3000 से बढ़कर 6000 किया गया था लेकिन वीरता के लिए पुलिस पदक की पुरस्कार राशि लंबे समय से 2000 रुपए से बढ़ाई नहीं गई है उन्होंने कहा कि इस राशि को बढ़ाकर 4000 किया जाना चाहिए।</p>
<p>आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल और राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव ने निजी अस्पतालों तथा बीमा स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की मिली भगत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ये उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे हैं और उनके दावों की राशि का पूरा भुगतान नहीं कर रहे हैं। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त कानून बनाए जाने की मांग की।</p>
<p>बहुजन समाज पार्टी के रामजी ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और फलों पर रसायन के छिड़काव तथा उन्हें पकाने के लिए हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर रोक लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन रसायनों का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिसके कारण लोग बीमार हो रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के संजय सेठ ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पर्यटन स्थलों को यूनेस्को की धरोहर सूची में शामिल किए जाने के लिए नामांकन किए जाने की मांग की।</p>
<p>उन्हीं की पार्टी के बाबूभाई देसाई ने देश में बढ़ते त्वचा कैंसर के मामलों से निपटने के लिए एक व्यापक और दीर्घ कार्यक्रम नीति बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिला स्तर पर इसके लिए निदान केंद्र भी बनाए जाने चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के सुरेंद्रनगर ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो परियोजना का काम जल्द शुरू किए जाने की मांग की। शिवसेना उद्धव ठाकरे की प्रियंका चतुर्वेदी ने एनसीईआरटी की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय को लेकर न्यायपालिका की टिप्पणियों और पाठ्यक्रम टीम के संबंध में दिए गए आदेशों पर सवाल खड़ा किया।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2014 में जो सिलेंडर 420 रुपए का था वह अब 914 रुपए का हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि केंद्र सरकार केवल अच्छे-अच्छे स्लोगन बनाने में माहिर है लेकिन वास्तव में स्थिति कुछ और होती है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:42:39 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले को शशि थरूर ने ठहराया गलत, खामेनेई की मौत पर चुप्पी साधने पर केंद्र सरकार को घेरा</title>
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                        <![CDATA[सांसद शशि थरूर ने ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की निंदा करते हुए इसे "सैद्धांतिक रूप से गलत" बताया है। उन्होंने निर्दोष नागरिकों की मौत और भारतीय हितों पर खतरे पर चिंता जताई। थरूर ने कहा कि महात्मा गांधी की धरती होने के नाते भारत को इस वैश्विक अस्थिरता पर चुप रहने के बजाय अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shashi-tharoor-condemned-the-us-israeli-attack-on-iran-as-wrong/article-146365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/shashi-tharoor.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पार्टी के लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने कहा है कि अमेरिका तथा इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरना गलत था लेकिन ईरान ने भी उन देशों पर हमला कर गलत ही किया है जो युद्ध में शामिल ही नहीं हैं। शशि थरूर ने शुक्रवार को यहां संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान से खेलना ठीक नहीं है। उनका यह भी कहना था कि जो हालात अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और फिर ईरान के पड़ोसी देशों में किए जा रहे हमले से बन रहे हैं वह गंभीर है। उनका कहना था कि इन सब स्थितियों के बीच भारत का चुप रहना भी ठीक नहीं है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल के हमले को सैद्धांतिक रूप से गलत बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां आत्मरक्षा वाली बात को सही नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना कि जब बातचीत चल रही थी और ईरान बात मानने के लिए भी तैयार था तो इसमें आत्मरक्षा की बात कहां से आती है।</p>
<p>उन्होंने युद्ध में शामिल न होने वाले देशों पर ईरान के हमलों को भी गलत बताया और कहा कि निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है और इस कार्रवाई को कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता है। हमलों में कुछ निर्दोष भारतीय नागरिकों की भी मृत्यु हुई है। ये सभी नागरिक निर्दोष थे और किसी के पक्ष में युद्ध नहीं लड़ रहे थे।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि अब हालात यह हो गये हैं कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। यह भी खबर है कि एक टैंकर पर हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि यह टैंकर थाईलैंड के ध्वज वाला था। उनका कहना था कि इस तरह से हमले ठीक नहीं हैं। उन्होंने कहा "हम अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की धरती के लोग हैं। हम शांति चाहते हैं और हमारे विदेश मंत्री भी खाड़ी देशों के अपने समकक्षों से बात कर रहे हैं और मुझे लगता है कि भारत को और अधिक सक्रिय होना चाहिए। इस माहौल में हम चुप नहीं बैठ सकते हैं।"</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 16:40:05 +0530</pubDate>
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                <title>एलपीजी की कमी की आशंका पर कर्नाटक कांग्रेस ने केंद्र की विदेश नीति को ठहराया जिम्मेदार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण स्थिति हो सकती है और भी गंभीर</title>
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                        <![CDATA[कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कमर्शियल एलपीजी की किल्लत के लिए केंद्र की विदेश नीति को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार संसद में चर्चा से भाग रही है। मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने चेतावनी दी कि युद्ध के कारण गैस और ईंधन की कमी गहरा सकती है, जिससे छोटे व्यवसायी प्रभावित हो रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-the-fear-of-lpg-shortage-karnataka-congress-blamed-the/article-146006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dk-shivkumar.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की संभावित कमी को लेकर उभरती चिंताओं के बीच मंगलवार को केंद्र सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। नेताओं ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
<p>कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की अनुमति नहीं दे रही है, जिसके विरोध में विपक्षी गठबंधन इंडिया गठबंधन के सांसद प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, सरकार को इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करनी चाहिए। जब चर्चा के लिए समय नहीं दिया जा रहा है तो सभी सांसद विरोध कर रहे हैं। आखिर सरकार किस बात से डर रही है? </p>
<p>शिवकुमार ने हाल ही में एलपीजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की भी आलोचना की और कहा कि यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर की गई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा के किसी सांसद ने आवाज नहीं उठाई। कर्नाटक की मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरों के बाद राज्य सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होते ही यह आशंका हो गई थी कि भारत को डीजल, पेट्रोल और गैस की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भी केंद्र की विदेश और आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह समस्या घरेलू उपभोक्ताओं को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें संसद में कहा गया था कि देश के पास ऊर्जा का पर्याप्त भंडार है।</p>
<p>कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर तेल और ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहा है। वहीं कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को ईंधन और गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी की खबरों से रेस्तरां, छोटे खाद्य व्यवसायों और उन परिवारों में ङ्क्षचता बढ़ गई है जो इस ईंधन पर काफी हद तक निर्भर हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 17:08:36 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्र सरकार ने कहा-भारत के ऊर्जा हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता: विपक्ष का राज्ययसभा से बहिर्गमन</title>
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                        <![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपक्ष ने ऊर्जा सुरक्षा और गैस की बढ़ती कीमतों पर नियम 176 के तहत चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट किया। सरकार स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-said-protecting-indias-energy-interests-is-its/article-145805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि वह पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और इस क्षेत्र के देशों में भारतीयों की सुरक्षा, उनकी सकुशल वापसी तथा देश के ऊर्जा हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है जबकि विपक्ष ने इस स्थिति के कारण देश के समक्ष ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर नियम 176 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर के पश्चिम एशिया तथा खाड़ी देशों की स्थिति के भारत पर प्रभाव के बारे में स्वत: दिये जाने वाले वक्तव्य से पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस स्थिति के कारण देश में ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के मुद्दे पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराये जाने की मांग की। नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस के रवैये को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इनकी रूचि ने देश हित में है और न ही चर्चा में, बस इनकी रूचि केवल हुड़दंग मचाने में है। </p>
<p>नेता विपक्ष की मांग के तुरंत बाद डॉ. जयशंकर ने विपक्ष के भारी शोर शराबे के बीच अपने वक्तव्य में पश्चिम एशिया की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार अमरीका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद से स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और सभी संबंधित पक्षों के निरंतर संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण इस मामले में मुख्य रूप से तीन बिन्दुओं पर आधारित है पहला सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से हो, क्षेत्र में तनाव कम करने के कदम उठाये जायें, आम लोगों पर हमले न किये जायें। दूसरा क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और सकुशल वापसी सरकार की प्राथमिकता है और तीसरा देश के राष्ट्रीय और ऊर्जा हितों की रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। </p>
<p>इससे पहले खरगे ने ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए इस पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिति निरंतर बदल रही है और भारत भी इससे प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरत का 55 प्रतिशत इस क्षेत्र से पूरा होता है और यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर भारत की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर पहले ही 60 रुपये महंगा हो गया है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत के करीब एक करोड़ लोग हैं और उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के कुछ लोगों के मारे जाने तथा कुछ के लापता होने की घटनाएं सामने आयी हैं। नेता विपक्ष ने कहा कि सरकार को सदन में इन सभी मुद्दों पर चर्चा करानी चाहिए। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 13:57:04 +0530</pubDate>
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                <title>बजट 2026-27 : कांग्रेस की बजट पर प्रतिक्रिया-केंद्रीय बजट निराशाजनक और फीका,सरकार की वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस ने बजट 2026-27 को फीका और निराशाजनक बताया। जयराम रमेश ने कहा कि बजट न दिशा देता है, न बदलाव, आवंटन अस्पष्ट हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/budget-2026-congresss-reaction-to-the-budget-union-budget/article-141578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया करते हुए इसे पूरी तरह निराशाजनक और फीका करार दिया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बजट पर प्रतिक्रिया करते  हुए सोशल मीडिया पर रविवार को लिखा कि भले ही बजट दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन अभी किया जाना बाकी है, लेकिन बजट भाषण के 90 मिनट बाद ही यह साफ हो गया है कि बजट को लेकर जो माहौल और प्रचार बनाया गया था, उस पर यह पूरी तरह खरा नहीं उतरता। उन्होंने कहा कि यह बजट न तो नई दिशा दिखाता है और न ही किसी बड़े बदलाव का संकेत देता है।</p>
<p>जयराम रमेश ने बजट भाषण को अस्पष्ट और गैर-पारदर्शी बताते हुए कहा, इसमें प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनके अनुसार सरकार ने वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की है और आम जनता को निराशा हाथ लगी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 15:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>मर जाना स्वीकार है, किसी अन्य की बंदगी नहीं : अरशद मदनी</title>
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                        <![CDATA[संसद में वंदे मातरम पर चल रही बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को इसे गाने पर आपत्ति इसलिए है क्योंकि इसके कुछ अंश पूजा से जुड़े हैं, जो उनकी आस्था के खिलाफ है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dying-is-acceptable-not-worshiping-anyone-else-arshad-madani/article-135436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/madni.png" alt=""></a><br /><p>सहारनपुर। संसद में इस समय वंदे मातरम पर चर्चा चल रही है। ऐसे में जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी का भी इस पर बयान आया है। उन्होंने कहा है कि हमें किसी के वंदे मातरम पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता।</p>
<p>मदनी ने कहा, हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं! मदनी ने इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने कहा है, हमें किसी के वंदे मातरम पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और वंदे मातरम का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है। </p>
<p>इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर दुर्गा माता से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही मां, मैं तेरी पूजा करता हूं यही वंदे मातरम का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।</p>
<p><strong>वतन से मोहब्बत अलग बात, इबादत अलग</strong></p>
<p>वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियां इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हैं। हाल ही में राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर आरोप प्रत्यारोप हुए हैं। बीजेपी की ओर से कहा गया कि कांग्रेस ने 1937 में सांप्रदायिक एजेंडे के तहत इसके संक्षिप्त संस्करण को देश के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया, जिससे न सिर्फ इस गीत का बल्कि पूरे देश का अपमान हुआ। वहीं कांग्रेस ने पलटवार के तौर पर कहा कि बीजेपी और आरएसएस इस गीत से बचते रहे हैं। उन्होंने कभी वंदे मातरम नहीं गाया।</p>]]>
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                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 12:05:39 +0530</pubDate>
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