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                <title>religious freedom - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पाकिस्तान में 100 साल पुराना मंदिर तोड़े जाने पर भारत में आक्रोश, हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन कर पाक सरकार के खिलाफ जताया विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान में करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की घटना से भारत में गहरा आक्रोश व्याप्त है। विरोध में हिंदू संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/anger-in-india-over-the-demolition-of-a-100-year/article-164553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/pak.png" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान। पाकिस्तान में करीब 100 साल पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की घटना को लेकर भारत में आक्रोश है। मंदिर तोड़े जाने के विरोध में हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन कर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मंदिर तोड़े जाने की घटना की निंदा की। संगठनों ने कहा कि पाकिस्तान में हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। </p>
<p>उन्होंने भारत सरकार से भी इस मामले को पाकिस्तान के समक्ष मजबूती से उठाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान ‘100 साल पुराना मंदिर तोड़ा... ना पाक हथौड़ा’ जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 14:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>धार्मिक स्थलों को तोड़ना सभ्य व्यवस्था के खिलाफ, पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाए सरकार: शंकराचार्य</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचाने पर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की अपील की ताकि अल्पसंख्यकों के धर्मस्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और वैश्विक स्तर पर मानवीय सौहार्द बना रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/government-should-put-diplomatic-pressure-on-pakistan-against-civilized-system/article-164562"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/शंकराचार्य-स्वामी-अधोक्षजानंद.png" alt=""></a><br /><p>मथुरा। पाकिस्तान में प्राचीन हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचाये जाने की घटनाओं पर रोष जताते हुये शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज ने कहा कि मंदिर चाहे 100 साल पुराना हो या हाल ही में बना हो, वह ईश्वर का घर होता है और दुनिया के किसी भी कोने में किसी भी धर्मस्थल का अनादर अत्यंत निंदनीय है। मथुरा में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि भारत सरकार इस मामले का संज्ञान ले रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह पाकिस्तान सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाए ताकि ऐसी घटनाओं पर तुरंत रोक लग सके और अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>स्वामी अधोक्षजानंद ने वैश्विक सौहार्द और मानवीय व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा, "यदि पाकिस्तान में मंदिर तोड़े जाएंगे, फिर प्रतिक्रियास्वरूप हिंदुस्तान में मस्जिदें तोड़ी जायें या किसी अन्य देश में चर्च तोड़े जायें, तो यह किसी भी सभ्य और मानवीय व्यवस्था का आधार नहीं हो सकता।" उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों और वैश्विक व्यवस्था का पालन करने का आह्वान किया। शंकराचार्य जी ने कहा कि हर देश को अपने यहाँ मौजूद सभी धर्मस्थलों का सम्मान और उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। उन्होंने बल दिया कि दुनिया भर में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों की धार्मिक भावनाओं का आदर और संरक्षण करना ही सच्ची मानवीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून-कायदों का मूल आधार है, जिसका पालन सभी राष्ट्रों को अनिवार्य रूप से करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 12:35:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान में गुरुद्वारा तोड़े जाने पर भाजपा का हमला, AAP की चुप्पी को बताया 'सिख विरोधी मानसिकता'</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पाकिस्तान में फरूखाबाद स्थित गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने की निंदा करते हुए आम आदमी पार्टी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjps-attack-on-demolition-of-gurudwara-in-pakistan-calls-aaps/article-158702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/harsh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पाकिस्तान में फरूखाबाद में गुरू सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने की कड़ी निंदा करते हुए इस मामले पर आम आदमी पार्टी के नेताओं की चुप्पी को सिख विरोधी मानसिकता बताया है। मल्होत्रा ने गुरुवार कहा है कि केंद्र सरकार लगातार सिखों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा देने के लिए काम कर रही है। वहीं पाकिस्तान की सरकार ने अल्पसंख्यकों को अतिवादियों के भरोसे छोड़े दिया है और उसी के साथ पाकिस्तान लगातार आतंकवाद की शरणस्थली बनी हुई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में सिंह सभा गुरुद्वारे को तोड़े जाने के एक सप्ताह बाद भी पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार की उस पर चुप्पी देशवासियों को स्तब्ध करती है और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद सिख मर्यादाओं के हनन के दोषी हैं और श्री अकाल तख्त साहब ने उन्हें सिख पंथ विरोधी घोषित किया हुआ और ऐसे में सीएम मान और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पाकिस्तान में गुरुद्वारा तोड़े जाने पर चुप्पी उनके सिख विरोधी होने का एक और सबूत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 18:55:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सबरीमाला मंदिर : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने किया महिलाओं के प्रवेश प्रतिबंध का समर्थन, मुस्लिम-पारसियों से भी सामने आया कनेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकारों पर सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का समर्थन किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे धार्मिक स्वायत्तता का विषय बताते हुए कहा कि लैंगिक भेदभाव की विदेशी अवधारणाएं भारतीय परंपराओं पर थोपी नहीं जानी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-supported-womens-entry-ban-in-sabarimala-temple-supreme/article-149492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sabrimala-mandir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच ने मंगलवार से धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकार और सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के मामले पर सुनवाई शुरु कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान बेंच के समक्ष चल रही सुनवाई के समक्ष केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सबरीमाला मंदिर में माहवारी से जुड़े आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक धार्मिक आस्था और स्वायतता का मामला है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने कोर्ट से इस प्रतिबंध को बरकरार रखने की मांग की है और कहा है कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमा सीमित होनी चाहिए। आज सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ बराबरी दी है, बल्कि कई बार उन्हें ऊंचा स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ हालिया फैसलों में पितृसत्ता और जेंडर स्टीरियोटाइप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन ये अवधारणाएं भारतीय सभ्यता के मूल में नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार बाहर से आए हैं और भारत की सांस्कृतिक परंपरा से मेल नहीं खाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:55:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अखिलेश यादव ने लगाया केंद्र सरकार पर सनातन परंपराओं का अपमान का आरोप, शंकराचार्य मुद्दे पर साधा निशाना </title>
                                    <description><![CDATA[सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम पर पाबंदियों को लेकर यूपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं का अपमान और अनावश्यक शर्तें सरकार की 'कमजोर सत्ता' की पहचान हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार कोविड नियमों का बहाना बनाकर विशिष्ट संतों का अपमान कर रही है, जो अत्यंत निंदनीय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadav-accused-the-central-government-of-insulting-sanatan-traditions/article-146089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/akhilesh-yadav.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सनातन परंपराओं को अपमान करने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव ने बुधवार को उत्तरप्रदेश सरकार की तरफ से लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम की अनुमति को लेकर लगायी गयी शर्त के मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा और कहा कि किसी कार्यक्रम पर अनावश्यक शर्तें और प्रतिबंध लगाना कमजोर सत्ता की पहचान है। यदि राज्य सरकार सनातन परंपराओं का सम्मान नहीं कर सकती तो कम से कम उसका अपमान भी न करे।</p>
<p>उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिये आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकार एक विशेष समाज के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है। इस समाज के लोग राज्य सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि के रूप में शामिल हैं, लेकिन इस मुद्दे पर वे अपने ही समाज के सामने जवाब देने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधि अपने स्वार्थ के लिए राज्य सरकार के साथ बने हुए हैं और अपने समाज में सम्मान खो चुके हैं।</p>
<p>सपा प्रमुख ने कहा कि जनता अगले चुनाव में ऐसे नेताओं को सबक सिखाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ जनप्रतिनिधि, जो वास्तव में अपने समाज के हितैषी हैं, वे उन दलों के संपर्क में हैं जो सनातन परंपराओं और समाज का सम्मान करते रहे हैं। उन्होंने कोविड-19 को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि महामारी अभी भी प्रभावी है तो सरकार बताए कि आखिरी बार किस सरकारी बैठक के आयोजन में इसका पालन किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राज्य सरकार नेताओं की बैठकों में क्या ये नियम लागू होते हैं या नहीं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की बंदिशें निंदनीय और आपत्तिजनक हैं तथा यह सरकार की गलत सोच को दर्शाती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 15:27:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मर जाना स्वीकार है, किसी अन्य की बंदगी नहीं : अरशद मदनी</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में वंदे मातरम पर चल रही बहस के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को इसे गाने पर आपत्ति इसलिए है क्योंकि इसके कुछ अंश पूजा से जुड़े हैं, जो उनकी आस्था के खिलाफ है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dying-is-acceptable-not-worshiping-anyone-else-arshad-madani/article-135436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/madni.png" alt=""></a><br /><p>सहारनपुर। संसद में इस समय वंदे मातरम पर चर्चा चल रही है। ऐसे में जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी का भी इस पर बयान आया है। उन्होंने कहा है कि हमें किसी के वंदे मातरम पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता।</p>
<p>मदनी ने कहा, हम एक खुदा (अल्लाह) को मानने वाले हैं, अल्लाह के सिवा न किसी को पूजनीय मानते हैं और न किसी के आगे सजदा करते हैं। हमें मर जाना स्वीकार है, लेकिन शिर्क (खुदा के साथ किसी को शामिल करना) कभी स्वीकार नहीं! मदनी ने इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने कहा है, हमें किसी के वंदे मातरम पढ़ने या गाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन मुसलमान केवल एक अल्लाह की इबादत करता है और अपनी इबादत में अल्लाह के सिवा किसी दूसरे को शामिल नहीं कर सकता। और वंदे मातरम का अनुवाद शिर्क से संबंधित मान्यताओं पर आधारित है। </p>
<p>इसके चार श्लोकों में देश को देवता मानकर दुर्गा माता से तुलना की गई है और पूजा के शब्दों का प्रयोग हुआ है। साथ ही मां, मैं तेरी पूजा करता हूं यही वंदे मातरम का अर्थ है। यह किसी भी मुसलमान की धार्मिक आस्था के खिलाफ है। इसलिए किसी को उसकी आस्था के खिलाफ कोई नारा या गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। क्योंकि भारत का संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) देता है।</p>
<p><strong>वतन से मोहब्बत अलग बात, इबादत अलग</strong></p>
<p>वतन से प्रेम करना अलग बात है, उसकी पूजा करना अलग बात है। मुसलमानों की देशभक्ति के लिए किसी के प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी कुर्बानियां इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हैं। हाल ही में राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर आरोप प्रत्यारोप हुए हैं। बीजेपी की ओर से कहा गया कि कांग्रेस ने 1937 में सांप्रदायिक एजेंडे के तहत इसके संक्षिप्त संस्करण को देश के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया, जिससे न सिर्फ इस गीत का बल्कि पूरे देश का अपमान हुआ। वहीं कांग्रेस ने पलटवार के तौर पर कहा कि बीजेपी और आरएसएस इस गीत से बचते रहे हैं। उन्होंने कभी वंदे मातरम नहीं गाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 12:05:39 +0530</pubDate>
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