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                <title>प्रेस की आजादी पर टिकी तमाम तरह की स्वतंत्रता : इसके बिना मानवाधिकार और शांति संभव नहीं,  गुटेरेस ने कहा- एक ऐसी दुनिया बनाएं जहां सच बोलने वाले रहे सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पत्रकारों की सुरक्षा की अपील की। आरएसएफ 2026 रिपोर्ट में हालात चिंताजनक—52% देशों में स्थिति खराब। भारत 157वें, अमेरिका 64वें स्थान पर। 220 से ज्यादा पत्रकारों की मौत, 533 जेल में। गुटेरेस बोले—प्रेस आजादी के बिना मानवाधिकार और शांति संभव नहीं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/all-types-of-freedom-rest-on-the-freedom-of-the/article-152540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/6622-copy24.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दुनिया भर में पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करने और सच्चाई बताने वालों को सुरक्षित रखने का आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता के बिना मानवाधिकार, निरंतर विकास और शांति की कल्पना नहीं की जा सकती। गुटेरेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में कहा, तमाम तरह की स्वतंत्रता प्रेस की आजादी पर टिकी है। इसके बिना न तो मानवाधिकार संभव हैं, न ही शांति। आइए हम पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करें और एक ऐसी दुनिया बनाएं जहां सच बोलने वाले सुरक्षित रहें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महासचिव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में वैश्विक स्तर पर पत्रकारिता की स्थिति को लेकर बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की गई है। सूचकांक के 25 साल के इतिहास में पहली बार दुनिया के आधे से अधिक देशों (52.2 प्रतिशत) को प्रेस स्वतंत्रता के मामले में कठिन या गंभीर श्रेणी में रखा गया है। साल 2002 में यह आंकड़ा महज 13.7 प्रतिशत था। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आरएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के सूचकांक में दुनिया के 180 देशों और क्षेत्रों का औसत स्कोर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। रिपोर्ट में विशेष रूप से कानूनी संकेतक में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो इस बात का संकेत है कि दुनिया भर में पत्रकारिता का अपराधीकरण बढ़ रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कानूनों का दुरुपयोग कर पत्रकारों को चुप कराने की कोशिशें की जा रही हैं। सूचकांक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत इस सूची में 157वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका भी सात पायदान गिरकर 64वें स्थान पर आ गया है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नॉर्वे लगातार दसवें वर्ष शीर्ष पर बना हुआ है, जबकि इरिट्रिया 180वें स्थान के साथ सबसे निचले पायदान पर है। रिपोर्ट के अनुसार, आज दुनिया की एक प्रतिशत से भी कम आबादी उन देशों में रहती है जहाँ प्रेस की स्थिति अच्छी मानी गई है। 2002 में यह संख्या 20 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2025 में गाजा, सूडान और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में 220 से अधिक पत्रकारों की जान गई है, जबकि दुनिया भर में 533 पत्रकार फिलहाल सलाखों के पीछे हैं, जो प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर मंडराते बड़े खतरे को दर्शाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:44:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनिया, खड़गे और राहुल सहित विभिन्न नेताओं ने पंडित नेहरू को किया नमन : दूरदर्शी और निडर नेतृत्व से स्वतंत्र भारत में संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की रखी नींव, कहा- देश को प्रदान की एक नई दिशा  </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी 136वीं जयंती पर नमन किया। नेहरू की जयंती देशभर में बाल दिवस के रूप में मनाई जाती है। खड़गे ने कहा कि नेहरू की विरासत स्वतंत्रता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक सोच जैसे मूल्यों को प्रकाशित करने वाला एक शाश्वत प्रकाश स्तंभ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/various-leaders-including-kharge-and-rahul-paid-tribute-to-pandit/article-132386"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(4).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित विभिन्न नेताओं ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी 136वीं जयंती पर उन्हें नमन किया। पंडित नेहरू की जयंती को देश में बाल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।  खड़गे ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की विरासत एक शाश्वत प्रकाश स्तंभ की तरह है, जो भारत के विचार और उनके द्वारा पोषित मूल्यों  स्वतंत्रता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक सोच  को प्रकाशित करती है।</p>
<p>वहीं गांधी ने एक्स पर लिखा कि के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने दूरदर्शी और निडर नेतृत्व से स्वतंत्र भारत में संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव रखी और देश को एक नई दिशा प्रदान की। उनके आदर्श और मूल्य आज भी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं। हिंद के जवाहर को उनकी जयंती पर सादर नमन। </p>
<p><strong>मोदी  ने नेहरू की 136वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने  देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी 136वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स  पर अपनी  एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू  को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि। नेहरू भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। स्वतंत्रता के बाद  उन्होंने देश की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष नींव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी । उनकी दृष्टि शिक्षा, वैज्ञानिक विकास और बच्चों के कल्याण पर केंद्रित थी।</p>
<p><strong>सोनिया ने शांतिवन में नेहरू को  अर्पित की श्रद्धांजलि</strong></p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 136वीं जयंती पर शुक्रवार को उनकी समाधि शांति वन जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। खरगे तथा गांधी ने सुबह यहां पंडित नेहरू की समाज शांति वन गए तथा देश के प्रथम प्रधानमंत्री को उनकी 136वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कांग्रेस आलाकमान के साथ पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल तथा अन्य कई वरिष्ठ नेताओं ने पंडित नेहरू को जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>खड़गे ने प्रथम प्रधानमंत्री को जयंती पर नमन करते हुए कहा कि देश की आजादी से लेकर एक मजबूत, आधुनिक और प्रगतिशील राष्ट्र की नींव रखने में असाधारण योगदान देने वाले देश के जवाहरलाल नेहरू जी को उनकी जयंती पर विनम्र नमन। उंन्होने कहा कि पंडित नेहरू के विचार, मूल्य और दूर दृष्टि आज भी हमारे लिए निरंतर प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के जनक, संस्थानों के निर्माता, हिन्द के जवाहर के लोकतांत्रिक, समावेशी, निडर और प्रगतिशील भारत का सपना हर भारतीय जी रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंडित नेहरू को नमन करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक कहा, Þपंडित नेहरू ने अपने दूरदर्शी और निडर नेतृत्व से स्वतंत्र भारत में संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की नींव रखी और देश को एक नई दिशा प्रदान की। उनके आदर्श और मूल्य आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं ।</p>
<p><strong>हिंद के जवाहर को जयंती पर सादर नमन</strong></p>
<p>पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने पंडित नेहरू के एक उद्धरण को देते हुए लिखा,  भारत भूमि में फैले सारे भारतवासी ही सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। भारत माता यही करोड़ों-करोड़ जनता है और भारत माता की जय का मतलब इस भूमि पर रहने वाले इन सब लोगों की जय है। माता की असली जय तभी होगी जब देश के किसानों, जवानों, महिलाओं, मजदूरों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों समेत हर एक भारतीय की जय हो। भारत की जनता को एक समावेशी, सौहार्दपूर्ण एवं प्रगतिशील भारत का सपना दिखाने वाले  आधुनिक भारत के निर्माता पंडित  नेहरू को सादर नमन। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Nov 2025 12:19:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वतंत्रता और एकता की सिनेमाई कहानियों का प्रदर्शन : हर घर तिरंगा फिल्म महोत्सव का देशभर में शुभारंभ </title>
                                    <description><![CDATA[हर घर तिरंगा-देशभक्ति फिल्म महोत्सव की सोमवार को शुरूआत हुई। यह देश की स्वतंत्रता के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी सिनेमाई श्रद्धांजलि की शुरूआत है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/performance-of-cinematic-stories-of-freedom-and-unity-every-home/article-123328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। हर घर तिरंगा-देशभक्ति फिल्म महोत्सव की सोमवार को शुरूआत हुई। यह देश की स्वतंत्रता के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी सिनेमाई श्रद्धांजलि की शुरूआत है। सोमवार से बुधवार तक होने वाला यह महोत्सव सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) के सहयोग से किया है। महोत्सव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शुरू किए गए हर घर तिरंगा अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रत्येक नागरिक के भावनात्मक जुड़ाव को गहरा करना और एकता एवं देशभक्ति की नई भावना का संचार करना है। महोत्सव का उद्देश्य दर्शकों को स्वतंत्रता के सफर की याद दिलाना, अनगिनत वीरों के बलिदान का उत्सव मनाना और राष्ट्र की पहचान को आकार देने वाली कहानियों को प्रदर्शित करना है।</p>
<p><strong>भारत के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास और विरासत को प्रदर्शित करना</strong><br />दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि सिनेमा में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को अमर बनाने और पीढ़ियों को प्रेरित करने की शक्ति है। हर घर तिरंगा - देशभक्ति फिल्म महोत्सव सिनेमा का उत्सव ही नहीं, उस यात्रा की याद दिलाता है जिसने हमें स्वतंत्रता दिलाई। मुंबई में सूचना एवं प्रसारण सचिव संजय जाजू ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से भारत के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास और विरासत को प्रदर्शित करना है। सिनेमा एक दृश्य माध्यम होने के कारण दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और इसलिए इस महोत्सव का उद्देश्य सभी भारतीयों में देशभक्ति की भावना पैदा करना है। अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर ने भी मुंबई में इस कार्यक्रम में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि इस पहल का हिस्सा बनकर वह सम्मानित महसूस कर रही हैं। उये फिल्में हमें हमारे लोगों के लचीलेपन और साहस की याद दिलाती हैं और यह जरूरी है कि हम इन कहानियों को साझा करते रहें।</p>
<p><strong>चार शहरों में भव्य उद्घाटन</strong><br />महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन एनएफडीसी-सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कपिल मिश्रा ने किया। इस मौके पर प्रभात, अपर सचिव (सूचना एवं प्रसारण); भूपेंद्र कैंथोला, प्रधान महानिदेशक (डीपीडी); और धीरेंद्र ओझा, प्रधान महानिदेशक (मीडिया एवं संचार) भी शामिल थे।<br /> <br /><strong>मुंबई: </strong>महोत्सव का उद्घाटन एनएफडीसी-राष्ट्रीय भारतीय सिनेमा संग्रहालय (एनएमआईसी) परिसर में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू और प्रशंसित अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर की उपस्थिति में हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों, फिल्म निमार्ताओं और सिनेमा प्रेमियों ने इसमें भाग लिया। </p>
<p><strong> चेन्नई:</strong> टैगोर फिल्म सेंटर ने एक उद्घाटन समारोह किया, जिसमें निर्देशक वसंत ने सिनेमा के माध्यम से देशभक्ति पर गहन विचारों के लिए; कोरियोग्राफर कला मास्टर ने राष्ट्रीय गौरव में कला की भूमिका को सामने लाने के लिए; तमिल चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट चोझा नाचियार ने समर्थन और प्रोत्साहन के लिए; अभिनेत्री नमिता ने गरिमामयी उपस्थिति और देशभक्तिपूर्ण विचारों के लिए; तमिलनाडु संगीत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एवीएस शिवकुमार ने संस्कृति, परंपरा और युवा प्रतिभा को जोड़ने के लिए; और श्री वीरा ने अभिनेता, निर्देशक और निमार्ता के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।</p>
<p><strong> पुणे: </strong>हालांकि पुणे में फिल्मों की स्क्रीनिंग कुछ ही देर बाद शुरू हो गई, लेकिन एनएफडीसी-नेशनल फिल्म आर्काइव आॅफ इंडिया (एनएफएआई) के दर्शकों ने दिल्ली, मुंबई और चेन्नई से उद्घाटन समारोहों का सीधा प्रसारण देखा, जिससे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी में एकता और साझा उत्सव की भावना का संचार हुआ।</p>
<p><strong>पुनर्स्थापना में एनएफएआई की भूमिका</strong><br />एनएफडीसी का एक प्रभाग, भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार, फिल्म संरक्षण और पुनर्स्थापना में अग्रणी रहा है और यह सुनिश्चित करता है कि भारत की सिनेमाई विरासत समय के साथ लुप्त न हो। उन्नत डिजिटलीकरण तकनीकों, रंग-श्रेणीकरण और ध्वनि संवर्धन के माध्यम से, एनएफएआई सेल्युलाइड प्रिंटों को लगभग मूल गुणवत्ता में पुनर्स्थापित करता है, जिससे नए दर्शक इन क्लासिक फिल्मों का अनुभव उसी रूप में कर पाते हैं जैसा उन्हें देखा जाना चाहिए था। हर घर तिरंगा - देशभक्ति फिल्म महोत्सव में इन पुनर्स्थापित संस्करणों को शामिल करना फिल्म निमार्ताओं के प्रति एक श्रद्धांजलि और भारत की फिल्म विरासत की रक्षा के लिए एनएफएआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि दोनों है।</p>
<p><strong>एनएफडीसी की भूमिका और प्रतिबद्धता</strong><br />भारतीय राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने दशकों से भारतीय सिनेमा के विकास और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार की प्रमुख फिल्म एजेंसी के रूप में, एनएफडीसी न केवल गुणवत्तापूर्ण फिल्मों का निर्माण और प्रचार करता है, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार के माध्यम से राष्ट्र की सिनेमाई विरासत की रक्षा भी करता है। हर घर तिरंगा - देशभक्ति फिल्म महोत्सव के साथ, एनएफडीसी सिनेमा के माध्यम को एक एकीकृत शक्ति के रूप में उपयोग करता है-पीढ़ियों, भाषाओं और क्षेत्रों के बीच सेतु का काम करता है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नागरिकों और राष्ट्रीय ध्वज के बीच एक व्यक्तिगत जुड़ाव को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो उत्सव के इस कार्य को भारत के मूल्यों और इतिहास के साथ एक गहन जुड़ाव में बदल देता है।</p>
<p>एनएफडीसी का प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि देशभक्ति की कहानियां - चाहे वे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हों या कल्पना के माध्यम से पुनर्कल्पित हों - दर्शकों के साथ गूंजती रहें और अगली पीढ़ी को स्वतंत्रता और एकता के आदर्शों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करें।</p>
<p><strong>विविध और प्रेरक फिल्मों की सूची</strong><br />इस विविध फिल्म सूची में निम्नलिखित महान देशभक्ति फिल्में शामिल हैं:<br /><strong>शहीद (1965):</strong> शहीद भगत सिंह और उनके सर्वोच्च बलिदान की प्रेरक कहानी।<br /><strong>स्वातंत्र्य वीर सावरकर (2024):</strong>  स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन और विचारधारा का वृत्तांत।<br /><strong> उरी: </strong>द सर्जिकल स्ट्राइक (2019) : 2016 में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक का आधुनिक पुनर्कथन।<br /><strong> आरआरआर (2022):</strong> स्वतंत्रता सेनानियों के काल्पनिक वृत्तांतों से प्रेरित एक महाकाव्य एक्शन ड्रामा।<br /><strong> तानाजी (2020):</strong> मराठा योद्धा तान्हाजी मालुसरे की वीरतापूर्ण कहानी।<br />स्क्रीनिंग में शामिल <br /><strong>मेजर (2022): </strong>26/11 के मुंबई हमलों में मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की बहादुरी को श्रद्धांजलि।<br /><strong>नेताजी सुभाष चंद्र बोस :</strong> दूरदर्शी राष्ट्रवादी नेता की विरासत को दशार्ती एक लघु वृत्तचित्र।<br /><strong>वीरपांडिया कट्टाबोम्मन (1959) : </strong>दक्षिण भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी पर आधारित एक तमिल क्लासिक।<br /><strong>क्रांति (1981) :</strong> औपनिवेशिक शासन के खिलाफ विद्रोह की एक भव्य कहानी।<br /><strong> हकीकत (1964) :</strong> 1962 के भारत-चीन संघर्ष से प्रेरित एक मार्मिक युद्ध नाटक।<br /><strong> पराशक्ति (1952) :</strong> मजबूत सामाजिक और राष्ट्रवादी विषयों वाली एक ऐतिहासिक तमिल फिल्म।<br /><strong> सात हिंदुस्तानी (1969):</strong> गोवा की मुक्ति के लिए लड़ रहे सात भारतीयों की कहानी।<br />इसके अलावा, यह महोत्सव शैक्षिक वृत्तचित्र भी प्रस्तुत करता है जो ऐतिहासिक संदर्भ प्रदान करते हैं और दर्शकों की भागीदारी को गहरा करते हैं:<br /><strong> ऑवर फ्लैग:</strong> तिरंगे के प्रतीकवाद और इतिहास की खोज।<br /><strong> लोकमान्य तिलक: </strong>बाल गंगाधर तिलक के जीवन और राजनीतिक जागरण का वृत्तांत।<br /><strong> तिलक:</strong> तिलक के राष्ट्रवादी दृष्टिकोण का एक अंतरंग चित्रण।<br /><strong> शहादत:</strong> भारत की स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान के कार्यों पर प्रकाश।<br />एनएफएआई द्वारा पुनर्स्थापित क्लासिक्स (शास्त्रीय फिल्में) - अतीत को जीवंत करना। इस महोत्सव में चार ऐतिहासिक फिल्में - क्रांति (1981), हकीकत (1964), सात हिंदुस्तानी (1969) और शहीद (1965) - भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार के अथक संरक्षण प्रयासों के कारण उनके डिजिटल रूप से पुनर्स्थापित संस्करणों में प्रस्तुत की गई हैं।<br /><strong>क्रांति (1981): </strong>19वीं शताब्दी में ब्रिटिश उत्पीड़न के खिलाफ भारत के संघर्ष की एक व्यापक कहानी, जिसमें मनोज कुमार, दिलीप कुमार और हेमा मालिनी जैसे कलाकारों ने अभिनय किया है।<br /><strong>हकीकत (1964):</strong> चेतन आनंद द्वारा निर्देशित, यह युद्ध ड्रामा 1962 के भारत-चीन संघर्ष की भावनात्मक और रणनीतिक चुनौतियों को दर्शाता है।<br /><strong>सात हिंदुस्तानी (1969):</strong> विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए सात भारतीयों की एक कहानी, जो गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने के लिए एकजुट होते हैं - अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म।<br /><strong> शहीद (1965):</strong> मनोज कुमार द्वारा भगत सिंह के क्रांतिकारी संघर्ष और बलिदान का सशक्त चित्रण।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 15:10:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पिंजरे से निकल जंगल में लगाई आजादी की छलांग</title>
                                    <description><![CDATA[बाघिन 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में रहकर जंगल के तौर-तरीके सीखेंगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leaped-out-of-the-cage-and-entered-the-jungle-for-freedom/article-97416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(3)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रही बाघिन टी-114 की मादा शावक को आखिरकार 25 महीने बाद पिंजरे से आजादी मिल ही गई। नर शावक के रामगढ़ शिफ्ट होने के 8 दिन बाद बुधवार को मादा शावक को भी मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के दरा रेंज में सॉफ्ट रिलीज कर दिया गया। यहां बाघिन 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में रहकर जंगल के तौर-तरीके सीखेंगी। साथ ही घात लगाकर शिकार करने की कला व जंगल की चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में खुद को ढाल सकेगी। असल में रिवाइल्डिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। </p>
<p><strong>दोपहर 1 बजे लगाई खुले जंगल में छलांग</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में सुबह 8 बजे से ही शिफ्टिंग को लेकर हलचल तेज हो गई थी। सुबह 9 बजे वन अधिकारी व एनटीसीए द्वारा गठित टीम के सदस्य पिंजरे में पहुंच गए थे। 9 बजकर 15 मिनट पर डॉट लगाकर बाघिन को ट्रैंकुलाइज किया। स्वास्थ्य परीक्षण कर ब्लड व डीएनए सैंपल लिए। साथ ही वजन किया। बाघिन का वजन 160 किलो था। इसके बाद रेडियोकॉर्लर लगाकर 11 बजे मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के लिए रवाना कर दिया। दोपहर 1 बजे दरा रेंज पहुंचे और 1.12 मिनट पर बाघिन ने 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में आजादी की छलांग लगाई। </p>
<p><strong>रिवाइल्डिंग केंद्र बनकर उभरेगा मुकुंदरा</strong><br />उन्होंने बताया कि राजस्थान का यह पहला रिवाइल्डिंग का प्रयास है। सफल हुए तो प्रदेश में कोटा रिवाइल्डिंग केंद्र के रूप में उभरकर सामने आएगा।  प्रदेश के अन्य जंगलों में जहां कहीं भी अनाथ शावक होंगे तो भविष्य में उन्हें कोटा में लगाकर रिवाइल्ड किए जा सकेंगे। वनकर्मी व अधिकारी पूरी शिद्दत से सफल रिवाइल्डिंग में जुटे हैं। तत्कालीन सीसीएफ शारदा प्रताप सिंह का विजन शावकों की रिवाइल्डिंग में काफी अहम रहा। </p>
<p><strong>एनक्लोजर में छोड़े 16 चीतल</strong><br />वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. तेजेंद्र सिंह रियाड़ ने बताया कि बाघिन को मुकुंदरा में सॉफ्ट रिलीज कर दिया गया है। बाघिन के आने से पहले ही एनक्लोजर में 16 चीतल छोड़ दिए गए थे। जल्द ही यहां नीलगाय भी छोड़ने की योजना है। वैसे, यह अपने भाई नर बाघ के मुकाबले काफी एक्टिव है। बायोलॉजिकल पार्क में जब इनके सामने शिकार छोड़ते थे तो यही सबसे पहले शिकार तक पहुंचती थी। यदि, बाघिन 50 शिकार सफलतापूर्वक कर लेती है तो हार्ड रिलीज किया जा सकता है। मादा शावक चिकित्सकों की गहन निगरानी में रहेगी। इस दौरान उसके व्यवहार, गतिविधियां, भोजन लेने की मात्रा, घात लगाकर शिकार कर पा रही या नहीं सहित तमाम गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।  </p>
<p><strong>एनक्लोजर में लगे कैमरा ट्रैप </strong><br />दरा रेंज के पांच हैक्टेयर एनक्लोजर को ग्रीन नेट से पूरी तरह से कवर किया गया है। वहीं, जगह-जगह कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। रेडियोकॉर्लर के सिग्नल व तीन मंजिला वॉच टॉवर से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। साथ ही मानव दखल से बिलकुल दूर व जीरो मॉबिलिटी सुनिश्चित की गई है। बाघिन की निगरानी के लिए टीम तैनात कर दी गई है। शिफ्टिंग के दौरान  सीसीएफ रामकरण खैरवा, मुकुंदरा डिसीएफ मूथु एस, आरवीटीआर डीएफओ संजीव शर्मा, डब्ल्यू डब्ल्यूएफ से राजशेखर, वन्यजीव चिकित्सक डॉ, राजीव गर्ग, तेजेंद्र सिंह रियाड़ सहित बायोलॉजिकल पार्क के सहायक वनपाल मनोज शर्मा, सुरेंद्र सैनी, कमल प्रजापति, बुधराम जाट सहित अन्य वनकर्मी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एनटीसीए से मंजूरी मिलने के बाद मादा शावक को मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शिफ्ट कर दिया गया है। बाघिन टी-114 की मौत के बाद मादा शावक को फरवरी 2023 को रणथम्भौर से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क शिफ्ट किया गया था। जहां दो साल से रिवाइल्डिंग  की जा रही थी। अब यह सब एडल्ट की श्रेणी में है। एनटीसीए की गाइड लाइन की पालना करते हुए मुकुंदरा में शिफ्ट किया गया है।  <br /><strong>-मूथू एस, डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 15:43:36 +0530</pubDate>
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                <title>टाइगर के बच्चों की आजादी पर वन विभाग का मैनेजमेंट खामौश  </title>
                                    <description><![CDATA[रिवाइल्डिंग के नाम पर बायोलॉजिकल पार्क में शावकों को एक कमरेनुमा पिंजरा व इसी साइज की कराल में रखा जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/forest-department-management-silent-on-freedom-of-tiger-cubs/article-59522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/tiger-k-bachho-ki-azadi-pr-van-vibhag-ka-management--khamosh...kota-news-14-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पिछले 10 महीने से पिंजरे में कैद बाघिन टी-114 के दोनों शावक आजादी को तरस रहे हैं। रिवाइल्डिंग के लिए गठित विशेषज्ञों की टीम शावकों को दरा एनक्लोजर में शिफ्ट करने के लिए दो बार प्रस्ताव भेज चुकी है, इसके बावजूद वन विभाग का टॉप मैनेजमेंट खामौश है। जबकि, शावकों की उम्र 1 साल से ज्यादा की हो चुकी है। वहीं, वजन भी तेजी से बड़ रहा है। विशेषज्ञों का मत है, इस उम्र के शावक जंगल में करीब 20 से 25 किमी चलते हैं। ऐसे में जगह की तंगी से शावकों के चलने-फिरने के अंग प्रभावित होने का खतरा है। रिवाइल्डिंग अपने उद्देश्य से न भटके इसलिए विभाग के उच्चाधिकारियों को तुरंत दरा के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर  में शिफ्ट करने का निर्णय किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>चिड़ियाघर के जानवर न बनकर रह जाए शावक</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों का कहना है, एक साल बाद भी शावकों को दरा एनक्लोजर में शिफ्ट नहीं किया जाना तर्कसंगत नहीं है। यह शावकों की जिंदगी से खिलवाड़ करना जैसा है। वर्तमान में दोनों की उम्र एक साल से अधिक हो चुकी है, उम्र के साथ वजन भी 90 से ऊपर पहुंच चुका है। शारीरिक विकास के लिए उन्हें बड़े बाड़े में छोड़ा जाना अत्यंत आवश्यक है। शिफ्टिंग में देरी से न केवल रिवाइल्डिंग प्रोसेज प्रभावित हो रही है बल्कि चिड़ियाघर के जानवर बनकर रह जाने की संभावना भी प्रबल हो रही है। हैरत की बात है, विशेषज्ञों की कमेटी ने दो बार शिफ्टिंग के ा्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की ओर से इस संबंध में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। </p>
<p><strong>एक ही तरह का दिया जा रहा शिकार</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, रिवाइल्डिंग के नाम पर बायोलॉजिकल पार्क में शावकों को एक कमरेनुमा पिंजरा व इसी साइज की कराल में रखा जा रहा है। जिनके सामने 15 से 18 किलो का बकरा (लाइव शिकार) खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में शिकार को खुद की जान बचाने के लिए न तो दौड़ने की जगह मिल पाती है और न ही शिकार के पीछे भागने के लिए शावकों को मेहनत करनी पड़ती है। वहीं, घात लगाकर शिकार करने के लिए उन्हें छिपने की जगह तक नहीं मिलती। जबकि, जंगल में उन्हें बकरा नहीं मिलेगा। ऐसे में वे गांवों की ओर रुख कर पालतु पशुओं पर हमला कर सकते हैं। क्योंकि, इन्हें एक ही तरह का भोजन खाने की आदत हो चुकी होगी। </p>
<p><strong>कमेटी ने माना, शिफ्टिंग जरूरी </strong><br />शावकों की मॉनिटरिंग के लिए एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी की 13 जुलाई को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बैठक हुई थी। जिसमें कमेटी सदस्यों ने स्वीकार किया था कि दोनों शावक बड़े हो चुके हैं और वजन भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बायोलॉजिकल पार्क का पिंजरा व कराल छोटी पड़ रही है, उनके चलने फिरने के लिए जगह की तंगी बनी हुई है। ऐसे में कमेटी ने सर्वसहमति से शावकों को दरा के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने का निर्णय किया था। जिसके प्रस्ताव चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन अरविंदम तोमर को भेजे। इसके बाद 25 अगस्त को हुई बैठक में फिर से शिफ्टिंग प्रस्ताव का रिमाइंडर भेजा। इसके बावजूद इस संबंधित कोई निर्णय नहीं हुआ।  </p>
<p><strong>मेल शावक 90 तो फिमेल शावक का वजन 70 किलो से ज्यादा</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से मिली जानकारी के अनुसार दोनों शावकों का तेजी से वजन बढ़ रहा है। शरीर ग्रोथ कर रहा है। मेल शावक का करीब 90 तो फिमेल शावक का वजन करीब 75 किलो हो चुका है। वहीं, 12 महीने से ज्यादा की उम्र हो चुकी है। जबकि, उन्हें 25 गुणा 25 साइज के कमरे और कराल में रखा जा रहा है। ऐसे में उनके चलने फिरने के लिए जगल की तंगी बनी हुई है।  जिससे उनका शारीरिक विकास में बाधा व विकार उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी</strong><br />उम्र के साथ वेट बढ़ने से इन्हें चलने फिरने के लिए बड़ी जगह की जरूरत है। पिंजरानुमा कमरे में रहने से इनका लोको मोटर सिस्टम प्रभावित होगा। जिससे चलने फिरने के अंग विकसित नहीं हो पाएंगे। शिफ्टिंग में जितनी देरी से यह शावक चिड़ियाघर के ही बनकर रह जाएंगे। शिफ्टिंग में देरी करना इनके जीवन से खिलवाड़ करना जैसा है। बाद में यह न तो जंगल के लायक रह पाएंगे और न ही चिड़ियाघर के। ऐसे में इन्हें तुरंत दरा एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाना चाहिए। <br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट</strong></p>
<p>एक साल उम्र होने के बावजूद इन्हें चिड़ियाघर के दड़बे में रखा जा रहा है। जबकि, इस उम्र में शरीर तेजी से ग्रोथ करता है। जंगल में शावक चलना-फिरना, दौड़ना, घात लगाकर शिकार करना सहित शिकार की कई कला सीखते हैं लेकिन पिंजरे में जहां चलने की जगह नहीं वहां शिकार करना कैसे सिखेंगे। शिफ्टिंग में अधिक देरी से यह लंबे समय तक जंगल में सरवाइव नहीं कर पाएंगे। एक साल के शावक जंगल में 20-25 किमी प्रतिदिन मूवमेंट करते हंै, जो यहां बिलकुल भी नहीं हो रहा। जिससे मसल्स ग्रोथ, बॉडी स्टेमिना डवलप नहीं हो पाएगी। एक दिन के लिए टाइगर के एनक्लोजर में छोड़ने से रिवाइल्डिंग के उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पाएंगे। इन्हें यहां एक ही तरह का भोजन दिया जा रहा है, जबकि जंगल में इन्हें बकरा नहीं मिलेगा। ऐसे में यह गांवों की ओर रुख कर पालतु मवेशियों पर सकते हैं, जिससे अनावश्यक परेशानी हो सकती है। विभाग को तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है। <br /><strong>- डॉ. अखिलेश पांडेय, वरिष्ठ पशुचिकित्सक, कोटा</strong></p>
<p>लंबे समय तक पिंजरे में रख शावकों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। चिड़ियाघर में रहने से शावकों की प्रवृति प्रभावित होगी। वर्तमान में पिंजरे में ही उन्हें शिकार दिया जाता है, जिसे किल करने के लिए उन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती। ऐसे में वे आराम करने के  आदी हो जाएंगे। जबकि, यह व्यवस्था जंगल की परिस्थिति से बिलकुट उलट है। ऐसे में जंगल में अपने शिकार व संभावित खतरों को पहचानने में दिक्कत होगी। साथ ही रिवाइल्डिंग का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकेगा। यदि, इन्हें जल्द शिफ्ट नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।<br /><strong>- देवव्रत सिंह हाड़ा, संस्थापक, पगमार्क फाउंडेशन</strong></p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में गत दिनों पहले हुई कमेटी सदस्यों की बैठक में शावकों को दरा वनक्षेत्र के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने पर सहमति जताई थी। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भी भेजे गए हैं, वहां से जो भी निर्णय होगा उसके अनुरूप कार्य करेंगे। <br /><strong>- सुनील गुप्ता, उप वन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Oct 2023 17:54:17 +0530</pubDate>
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                <title>आजादी के लिए किसी ने अज्ञातवास भुगता तो कोई अविवाहित रहा </title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के स्वतंत्रता संग्राम में बारां क्षेत्र भी पीछे नहीं रहा। यहां के स्वतंत्रता सेनानी कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे। इनमें प्रमुख शख्सियतों में स्व. मोतीलाल जैन, पंडित अभिन्न हरि शर्मा ,गोपाललाल भंडारी,गणपतलाल शर्मा सहित अनेक लोगों ने आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/for-freedom--some-had-to-suffer-anonymity-and-some-remained-unmarried/article-19203"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/aazadi-ke-liye-kisi-nei-agyatwas-...nahargarh-news-baran-16.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>नाहरगढ़। आजादी के स्वतंत्रता संग्राम में बारां क्षेत्र भी पीछे नहीं रहा। यहां के स्वतंत्रता सेनानी कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे। इनमें प्रमुख शख्सियतों में स्व. मोतीलाल जैन, पंडित अभिन्न हरि शर्मा ,गोपाललाल भंडारी,गणपतलाल शर्मा सहित अनेक लोगों ने आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया। आजादी के लिए एक स्वतंत्रता सेनानी ने विवाह नहीं किया तो दूसरे ने अज्ञातवास भुगता। नाहरगढ़ निवासी इतिहासविद् हंसराज नागर बताते हैं कि पंडित नयनुराम शर्मा के सम्पर्क में आने से इस क्षेत्र के सेनानी प्रजामण्डल से जुड़े और किसान आन्दोलन सहित अनेक आंदोलनों में प्रजामण्डल के बैनर तले भाग लिया। इनमें से इनको कई बार जेल जाना पड़ा । जेल की परवाह नहीं करते हुए महात्मा गांधी के आह्वान पर सत्याग्रह आंदोलनों में भाग लिया । वहीं 1955 को गोवा को आजाद कराने के लिए 42 लोगों का जत्था हाड़ौती से गया था । गांधी टोपी उतारने से मना करने पर पंडित अभिन्न हरि शर्मा को जाना पड़ा गुगोर जेल पंडित अभिन्न हरि का जन्म मांगरोल के पास सीधन्या गांव में 27 सितंबर1905 को हुआ था । इनके बचपन का नाम बद्रीलाल था । अटरू निवासी पंडित मनुहरि शर्मा बताते हैं कि बचपन से ही उनके पिता में देशभक्ति का जज्बा था । 1934 से स्वाधीनता आन्दोलन में भाग लेना शुरू किया और पंडित नयनुराम शर्मा के साथ मिलकर हाड़ौती प्रजामंडल की स्थापना की । 1938 में कोटा राज्य प्रजामंडल के सदस्य बने और 1941 में कोटा राज्य प्रजामंडल के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया 1942 में राष्टÑव्यापी अगस्त क्रांति में कोटा मंडल से महत्वपूर्ण भुमिका अदा की । 1942 के ग्वालियर में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में भाग लेने वाले कोटा के एक मात्र प्रतिनिधि थे। छबड़ा स्टेशन पर गांधी टोपी को उतारने से मना करने पर इनको तीन दिनों तक गुगोर हवालात में रखा । इन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा गठित फ ारर्वड ब्लॉक संगठन में काम किया । 18अप्रेल 1948 को तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित नेहरू ने राजस्थान के मंत्रिमंडल में सूचना तथा वन विभाग का मंत्री बनाया था। आजादी के लिए गणपतलाल शर्मा ने विवाह नहीं किया गणपतलाल शर्मा का जन्म 1917 में बांरा में हुआ था । इनके परिवार के सदस्य रघुवीर प्रसाद नन्दवाना बताते हैं कि 1932 में अंता से मिडिल तक की शिक्षा प्राप्त की और कम उम्र में ही प्रजामंडल में भर्ती होने के लिए घर से निकल गए 1933 से 1936 तक प्रजामंडल में सक्रिय भुमिका निभाई । प्रजामंडल की गतिविधियों में भाग लेने के कारण मामा ने घर से निकाल दिया । विदेशी कपड़ों की दूकानें व शराब की दुकानों की पिकेंटिग करते समय अन्य नेताओं के साथ इनको भी मार खानी पड़ी और गिरफ्तारी में बहुत सारी यातनायें सहनी पड़ी। विवाह को आजादी की लड़ाई में बाधक माना और विवाह नहीं किया । और देश की आजादी के लिए आंदोलनों में भाग लेते रहे । अगस्त क्रांति आंदोलन में उड़ीसा में अज्ञातवास भुगता था गोपाललाल भंडारी ने गोपाललाल भंडारी के पौत्र सतीश गौतम बताते हैं कि उनके दादाजी का जन्म संवत् 1962 में अंता में हुआ था । इनको गुजराती,उर्दु,संस्कृत तथा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान था । यह कोटा प्रजामंडल के सक्रिय सदस्य थे और बाद में कांग्रेस से जुड़ गए। इन्होंने अभिन्न हरि,भैरूलाल काला बादल सहित अनेक सेनानियों के साथ काम किया। मांगरोल किसान सम्मेलन में भाग लिया तथा स्वाधिनता के खातिर अनेक यातनाएं सही अगस्त क्रांति आंदोलन में इन्होंने उड़ीसा में अज्ञातवास में समय बिताया । आजादी के बाद अंता के प्रथम सरपंच होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । कोटा कोतवाली के सामने प्रदर्शन करते जेल गए थे मोतीलाल जैन मोतीलाल जैन का जन्म 5 दिसंबर 1908 को जोधपुर में हुआ था। मांगरोल के सेठ धनराज के यहां मोतीलाल गोद आए थे । मांगरोल नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन अशोक जैन बताते हैं कि उनके पिता 1938 में कोटा राज्य प्रजामंडल का सदस्य मनोनित किया था । इसमें पंडित नयनुराम शर्मा का विशेष योगदान रहा। 1942 में इनको कोटा राज्य प्रजामंडल का अध्यक्ष चुना गया था ।1939 में हुए मांगरोल अधिवेशन में यह स्वयं स्वागत कर्ता थे। इनको सेठ साहब के उपनाम से पुकारा जाता था। अगस्त क्रांति के तहत 13 अगस्त तक जोरदार प्रदर्शनों का सिलसिला चलता रहा । 14 अगस्त का प्रदर्शन स्थगित करने का अधिकारियों ने अनुरोध किया लेकिन लोग नहीं माने कोटा में 14 से 16 अगस्त तिरंगा फ हराया गया और जनता का राज कायम रहा। 24अगस्त को कोटा कोतवाली के सामने प्रदर्शन कर कानुन तोड़ने का सत्याग्रह किया और प्रथम सत्याग्रही बने 1942 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Aug 2022 16:57:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के भारत सरकार के आदेश को ट्विटर ने दी कानूनी चुनौती, बताया अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। ट्विटर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने से जुड़े भारत सरकार के कुछ फैसलों को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी ने इस मामले से वाकिफ कुछ सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्विटर ने कुछ अधिकारियों की तरफ से अधिकार के कथित दुरुपयोग को कानूनी चुनौती दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/twitter-challenges-indian-government-s-order-to-remove-objectionable-content--says-it-violates-freedom-of-expression/article-13722"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/twitter.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ट्विटर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने से जुड़े भारत सरकार के कुछ फैसलों को अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी ने इस मामले से वाकिफ कुछ सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्विटर ने कुछ अधिकारियों की तरफ से अधिकार के कथित दुरुपयोग को कानूनी चुनौती दी है। आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के आदेश की न्यायिक समीक्षा की ये कोशिश इस अमेरिकी कंपनी और भारत सरकार के बीच टकराव में एक और कड़ी साबित होगी।<br /><br /><strong>खालिस्तान समर्थकों पर सरकार ने एक्शन को कहा</strong> <br />दरअसल भारत सरकार ने ट्विटर को उन अकाउंट्स के खिलाफ ऐक्शन लेने को कहा है जो खालिस्तान समर्थक हैं। सरकार ने उन पोस्ट्स पर भी कार्रवाई करने को कहा है जिन्होंने किसानों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी गुमराह करने वाली और झूठी सूचनाएं फैला रहे थे। इसके अलावा कोरोना वायरस महामारी से निपटने को लेकर सरकार की आलोचना करने वाले कुछ ट्वीट्स पर भी कार्रवाई करने को कहा गया है।<br /><br /><strong>सरकार के आदेश का पूरी तरह नहीं किया पालन</strong><br />भारत सरकार पहले ही कह चुकी है कि ट्विटर समेत बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों ने कंटेंट हटाने के अनुरोध पर कार्रवाई नहीं की है। पिछले महीने आईटी मिनिस्ट्री ने ट्विटर को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह कुछ आदेशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्विटर ने अपने खिलाफ कार्रवाई होने के डर से इस हफ्ते सरकार के आदेशों को पालन किया है।<br /><br /><strong>कानून सम्मत नहीं हैं सरकार के आदेश</strong><br />ट्विटर ने न्यायिक समीक्षा की मांग करते हुए दलील दी है कि कुछ रिमूवल आॅर्डर भारत के आईटी ऐक्ट के प्रावधानों पर खरे नहीं उतरते हैं। हालांकि, ट्विटर ने इसका स्पष्ट तौर पर जिक्र नहीं किया है कि वह किस या किन रिमूवल आॅर्डर की न्यायिक समीक्षा चाहता है। आईटी ऐक्ट के तहत सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा समेत कुछ अन्य वजहों से कुछ कंटेंट तक लोगों की पहुंच खत्म करने का अधिकार है।<br /><br /><strong>ट्विटर ने अभिव्यक्ति की आजादी का दिया हवाला</strong><br />भारत में करीब 2.4 करोड़ यूजर्स वाले ट्विटर ने ये भी दलील दी है कि कुछ आॅर्डर्स में कंटेंट के लेखक को नोटिस तक नहीं दिया गया। इसमें ये भी कहा गया है कि कुछ पोस्ट राजनीतिक दलों के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट किए गए हैं। इनको ब्लॉक करना एक तरह से अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है।<br /><br />पिछले साल की शुरूआत में शुरू हुआ टकराव<br />भारत सरकार और ट्विटर के बीच तब टकराव बढ़ा जब पिछले साल की शुरूआत में माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ने सरकार के एक आदेश पर पूरी तरह अमल से इनकार कर दिया था। सरकार ने कुछ अकाउंट्स के खिलाफ ऐक्शन लेने को कहा था जो सरकार-विरोधी किसान आंदोलन के बारे में कथित तौर पर झूठी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 14:10:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आजादी का अमृत महोत्सव : स्वतंत्रता सेनानी दुर्गा प्रसाद चौधरी को श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[चौधरी ने 1930 से 1947 बीच स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई थी अहम भूमिका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%86%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%B5---%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF/article-1762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/durga-sir-ji.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर।</strong> आजादी के अमृत महोत्सव की शृंखला में सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी और दैनिक नवज्योति के संस्थापक संपादक कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी को श्रद्धांजलि दी गई। महोत्सव में कप्तान साहब को श्रद्धांजलि देते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में जानकारी दी गई। जिसमें बताया कि स्वतंत्रता सेनानी दुर्गा प्रसाद चौधरी ने गांधीजी के आह्वान पर असहयोग आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने 1930 से 1947 के मध्य स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए जुलूस, गोष्ठियों और अन्य कई माध्यमों से ब्रिटिश शासन का विरोध किया। राजस्थान सेवा संघ के तत्वावधान में इन्होंने पिछड़े क्षेत्र में लोगों को खेती और चरखा कातने की शिक्षा देकर स्वावलम्बी बनाया। ये निर्भीक पत्रकार भी थे। इन्होंने नवज्योति समाचार पत्र के माध्यम से परतंत्रता, अन्याय व अत्याचार का विरोध किया। स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। याद रहे कि 12 मार्च, 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। 2020 में नमक सत्याग्रह के 91 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने साबरमती आश्रम से अमृत महोत्सव की शुरुआत पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर की थी। इस महोत्सव की रूपरेखा तय करने के लिए गृहमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय क्रियान्वयन समिति बनाई गई है। 15 अगस्त, 2022 को देश की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए 75वीं वर्षगांठ से एक साल पहले यानी 15 अगस्त 2021 से इन कार्यक्रमों को शुरुआत की थी। इन कार्यक्रमों में देश की अदम्य भावना के उत्सव दिखाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए जा रहे हैं। इनमें संगीत, नृत्य, प्रवचन, प्रस्तावना पठन शामिल हैं। इस आयोजन के माध्यम से वोकल फॉर लोकल अभियान को बढ़ावा भी दिया जा रहा है।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#339966;"><span style="font-size:larger;"><strong>महोत्सव स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणा का अमृत</strong></span></span></span><br /> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि आजादी का अमृत महोत्सव यानी आजादी की ऊर्जा का अमृत। आजादी का अमृत महोत्सव यानी स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणाओं का अमृत। आजादी का अमृत महोत्सव यानी नए विचारों का अमृत। नए संकल्पों का अमृत। आजादी का अमृत महोत्सव यानी आत्मनिर्भरता का अमृत।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 10:49:07 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों पर डाक विभाग जारी करेगा स्पेशल कवर</title>
                                    <description><![CDATA[डाक विभाग राजस्थान सर्किल द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव पर बुधवार को प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों पर छह स्पेशल कवर अलग-अलग डिविजन से जारी करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%B0/article-1638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/dsaas.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> डाक विभाग राजस्थान सर्किल द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव पर बुधवार को प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों पर छह स्पेशल कवर अलग-अलग डिविजन से जारी करेगा।  अर्जुन लाल सेठी (जयपुर) प्रदेश में क्रांतिकारी गतिविधियों के संचालक पंडित अर्जुनलाल सेठी ही थे। उनमें राष्ट्रभक्ति का अटूट जज्बा था। 1905 के बंगाल के स्वदेशी आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। प्रसिद्ध क्रांतिकारी रासबिहारी बोस, चन्द्रशेखर आजाद से उनके घनिष्ठ संबंध थे। सेठी कॉलोनी स्थित अर्जुन लाल सेठी पार्क में बुधवार सुबह 10:45 बजे अर्जुनलाल सेठी का कवर जारी किया जाएगा। वीरबाला कालीबाई (डूंगरपुर) मात्र 12 साल की उम्र में वीरबाला कालीबाई ने अपने गुरु सेंगाभाई के प्राणों की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए। पाल नामक गांव में चल रही पाठशाला को मजिस्ट्रेट द्वारा बंद करने का आदेश देने के बाद विरोध करने वाले सेंगाभाई को ट्रक से बांधकर पुलिस घसीटती हुई ले गई। वीरबाला ने ट्रक की रस्सी काटकर गुरु को पुलिस के चुंगल से छुड़ाया था। फिर पुलिस ने कालीबाई पर गोलियां चला दी थी।  केसरी सिंह बारहठ (भीलवाड़ा) प्रसिद्ध राजस्थानी कवि और स्वतंत्रता सेनानी केसरी सिंह बारहठ ने पिंगल-डिंगल भाषा में काव्य सृजन किया था। बारहठ ने रास बिहारी बोस के साथ लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय की सवारी पर बम फेंका था। कठोर यातना सहकर भी इन्होंने अपने क्रांतिकारी साथियों का भेद ब्रिटिश सरकार को नहीं दिया। मोतीलाल तेजावत (उदयपुर) आदिवासियों का मसीहा मोतीलाल तेजावत ने वनवासी संघ स्थापित किया था। भील, गरासिया और अन्य खेतीहर किसानों पर होने वाले सामन्ती अत्याचारों का विरोध किया और सबको एकजुट किया। उन्होंने किसानों से बेगार बंद कराकर कामगारों को उनकी उचित मजदूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वह ग्रादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे थे। बाल मुकुंद बिस्सा (नागौर) आदिवासियों का मसीहा मोतीलाल तेजावत ने वनवासी संघ स्थापित किया था। भील, गरासिया और अन्य खेतीहर किसानों पर होने वाले सामन्ती अत्याचारों का विरोध किया और सबको एकजुट किया। उन्होंने किसानों से बेगार बंद कराकर कामगारों को उनकी उचित मजदूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। वह ग्रादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे थे। बाल मुकुंद बिस्सा (नागौर) 1924 में चरखा एजेंसी व खादी भंडार की स्थापना की। 1942 में जयनारायण व्यास के नेतृत्व में शुरू हुए जन आंदोलन के दौरान बालमुकुन्द बिस्सा को भारत रक्षा कानून के तहत जोधपुर की जेल में डाल दिया गया। इन्हें राजस्थान का जतिन दास कहा जाता है। गणेशलाल व्यास उस्ताद साहित्य सूरमाओं की फेहरिस्त में कई नाम शामिल होेने के बावजूद सबसे अलग थे जनकवि उस्ताद गणेश लाल व्यास। मानव की परेशानियों व उनके दर्द को अपने स्वर देकर वे जनकवि कहलाए। लोकगीतों को काव्य रुप में संजोकर इन्होंने महान कार्य किया। वह राजस्थानी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी के भी ज्ञानी थे। राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृत अकादमी बीकानेर ने इनके नाम पर पुरस्कार भी घोषित कर रखा है जो राजस्थानी भाषा पद्य विद्या के लिए दिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Oct 2021 14:30:36 +0530</pubDate>
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