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                <description>sustainable development RSS Feed</description>
                
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                <title>पीएम मोदी ने की मछुआरा समुदाय की सराहना: बताया आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव, एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर जनभागीदारी की ताकत से बना विश्व रिकॉर्ड, जल संरक्षण के संकल्प को दोहराया</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मछुआरों को 'समुद्र का योद्धा' बताते हुए उनके आर्थिक योगदान को सराहा। उन्होंने वाराणसी में 2.51 लाख पौधे रोपने के विश्व रिकॉर्ड और 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान की प्रशंसा की। पीएम ने जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया और छत्तीसगढ़ व त्रिपुरा के सफल मॉडलों का उदाहरण साझा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-praised-the-fishermen-community-said-that-it-is/article-148334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के मछुआरा समुदाय की सराहना करते हुए कहा है कि मछुआरे केवल समुद्र के योद्धा ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में कहा कि मछुआरे सुबह होने से पहले समुद्र में उतरकर न सिर्फ अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बंदरगाहों के विकास, बीमा योजनाओं और तकनीकी सहायता के जरिए मछुआरों का जीवन आसान बनाया जा रहा है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि समुद्र में काम करने वाले मछुआरों के लिए मौसम की जानकारी बेहद अहम होती है, इसलिए तकनीक के माध्यम से उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन प्रयासों से देश का मत्स्य पालन क्षेत्र तेजी से समृद्ध हो रहा है और इसमें नवाचार भी बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल (सीवीड) के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं, जिससे मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भूयान का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू कर कुछ ही वर्षों में सफल व्यवसाय में बदल दिया। उनकी सफलता आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।</p>
<p>पीएम मोदी ने लक्षद्वीप के मिनीकॉय की हाव्वा गुलजार का भी जिक्र किया, जिन्होंने मत्स्य प्रसंस्करण इकाई (फिश प्रोसेसिंग यूनिट) के साथ कोल्ड स्टोरेज स्थापित कर अपने कारोबार को नई ऊंचाई दी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती छोड़कर फिश फार्मिंग अपनाई और अब बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि देशभर में ऐसे प्रयास प्रेरणादायक हैं और फिशरीज सेक्टर से जुड़े लोगों का योगदान भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम और नवाचार देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में जनभागीदारी से एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की सराहना करते हुये बदलाव के लिये समाज की भागीदारी को सबसे बड़ी ताकत बताया है। उन्होंने कहा कि जब लोग मिलकर काम करते हैं, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन की नींव बन जाते हैं। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132 वीं कड़ी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुए एक विशेष अभियान का जिक्र किया, जहां मात्र एक घंटे में 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए। इस उपलब्धि के साथ एक नया गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें हजारों लोगों ने एक साथ भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में भाग लेने वालों में छात्र, जवान , स्वयंसेवी संगठन और विभिन्न संस्थाओं ने अपना योगदान दिया। सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाया, जो जनभागीदारी की एक प्रेरक मिसाल है। पीएम मोदी ने 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत देशभर में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट कर सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संचय को आवश्यक बताते हुए कहा है कि देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है और जल संकट से बचने के लिए देशवासियों को जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की आवश्यकता है। पीएम मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की 132वीं कड़ी में कहा कि पिछले 11 वर्षों में 'जल संचय अभियान' ने लोगों को काफी जागरूक बनाया है। इस अभियान के तहत देश भर में करीब 50 लाख कृत्रिम जल संचय ढांचे बनाए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "मुझे यह देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गाँव-गाँव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, तो कहीं वर्षा जल को सहेजने के प्रयास किए जा रहे हैं। 'अमृत सरोवर' अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं। बारिश का मौसम आने से पहले इनकी साफ-सफाई भी शुरू हो गई है। मैं इस बारे में आपसे कुछ प्रेरक उदाहरण भी साझा करना चाहता हूँ। ये उदाहरण बताते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण का काम कितना व्यापक हो जाता है।"</p>
<p>उन्होंने त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गाँव, जो लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, कभी गंभीर जल संकट से जूझ रहा था। गर्मियों में लोगों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। बाद में ग्रामीणों ने वर्षा जल की हर बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। आज इस गाँव के लगभग हर घर में वर्षा जल संचयन के उपाय किए गए हैं और यह गाँव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा, "इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहाँ के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाए, जिससे वर्षा का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे जमीन में समाने लगा। आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं और भूजल स्तर में सुधार हुआ है। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गाँव में भी लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है। गाँव के 400 परिवारों ने अपने घरों में सोखता गड्ढे बनाए और जल संरक्षण को जन-आंदोलन बना दिया। इससे गाँव का भूजल स्तर बढ़ा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियाँ भी काफी कम हो गई हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 17:09:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में पुनर्चक्रण की भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिवर्ष 18 मार्च को विश्वभर में वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस, ग्लोबल रीसाइक्लिंग डे मनाया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/role-of-recycling-in-environmental-protection-and-sustainable-development/article-146908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>प्रतिवर्ष 18 मार्च को विश्वभर में वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस,ग्लोबल रीसाइक्लिंग डे मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को पुनर्चक्रण के महत्व के बारे में जागरूक करना है। वास्तव में पुनर्चक्रण हमारे ग्रह और मानवता के भविष्य को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हर वर्ष पृथ्वी अरबों टन प्राकृतिक संसाधनों का उत्पादन करती है, लेकिन एक समय ऐसा भी आएगा जब ये संसाधन या तो समाप्त हो जाएंगे या बहुत कम मात्रा में उपलब्ध रह जाएंगे। इसलिए यह आवश्यक है कि हम इस बात पर गंभीरता से विचार करें कि हम क्या फेंक रहे हैं और कैसे फेंक रहे हैं। हमें कचरे को केवल बेकार वस्तु नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक संभावित संसाधन और अवसर के रूप में देखना चाहिए। पिछला दशक अब तक का सबसे गर्म दशक रहा है और आज पूरी दुनिया अभूतपूर्व जलवायु आपातकाल का सामना कर रही है।</p>
<p><strong>ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ना : </strong></p>
<p>वास्तव में इस बढ़ती गर्मी का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ना और मानवीय गतिविधियां मानी जाती हैं, जिसके कारण दुनिया भर में हीटवेव और तापमान के नए रिकॉर्ड देखने को मिल रहे हैं। यदि हम समय रहते महत्वपूर्ण और त्वरित परिवर्तन नहीं करते,तो वैश्विक तापमान में निरंतर वृद्धि, हिमनदों और बर्फ की चोटियों का तेजी से पिघलना, महाद्वीपों में आग लगना,तेजी से वनों की कटाई, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाओं की घटनाएं बढ़ती जाएंगी। इन परिस्थितियों का सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप गरीबी बढ़ती है, विस्थापित समुदायों का पलायन होता है, नौकरियों में कमी आती है, कचरे के विशाल ढेर लगते हैं और प्राकृतिक आवास नष्ट होते जाते हैं। ऐसे में पुनर्चक्रण एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आता है।</p>
<p><strong>ग्लोबल रीसाइक्लिंग फाउंडेशन :</strong></p>
<p>वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस की स्थापना ग्लोबल रीसाइक्लिंग फाउंडेशन द्वारा की गई थी और इसे पहली बार 18 मार्च 2018 को मनाया गया था। हर वर्ष इस दिवस के लिए एक विशेष थीम निर्धारित की जाती है। वर्ष 2025 की थीम थी बाधाओं को तोड़ना कचरा प्रबंधन संकट के लिए एक क्रांतिकारी खाका। जबकि वर्ष 2026 की थीम है पुनर्चक्रण के नायक नवाचार और कार्रवाई इनोवेशन एंड एक्शन । वास्तव में, इस थीम का आशय यह है कि जो लोग जैसे वैज्ञानिक, संगठन या पर्यावरण कार्यकर्ता और जो संस्थाएं तथा नई तकनीकें कचरे को दोबारा उपयोगी संसाधन में बदलने के लिए नए तरीके खोज रही हैं और जमीन पर ठोस कार्य कर रही हैं। आज जब विश्व में पर्यावरण प्रदूषण और संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, तब कचरे को पुनः उपयोग में लाने की प्रक्रिया पृथ्वी को सुरक्षित रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होती है।</p>
<p><strong>संसाधनों की बचत :</strong></p>
<p>वास्तव में यह दिवस हमें यह सिखाता है कि जल, वायु, तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला और खनिज जैसे प्रकृति के संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना हमारा कर्तव्य है। यदि हम सरल शब्दों में समझें तो पुनर्चक्रण का अर्थ है बेकार वस्तु को पुनः संसाधित करके उसे दोबारा उपयोग के योग्य बनाना। संक्षेप में कहा जाए तो री साइक्लिंग वह प्रक्रिया है जिसमें बेकार या इस्तेमाल की हुई वस्तुओं को फिर से उपयोगी बनाया जाता है, ताकि संसाधनों की बचत हो और पर्यावरण सुरक्षित रहे।सच तो यह है कि वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन का आह्वान है। जब हम किसी वस्तु को कचरा कहने के बजाय संसाधन के रूप में देखना शुरू करते हैं, तब हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित पृथ्वी की नींव रखते हैं। जनसंख्या बढ़ने के साथ वस्तुओं और संसाधनों का उपयोग भी बढ़ता जा रहा है। जब संसाधनों का उपयोग और उपभोग बढ़ता है तो कचरे की मात्रा भी बढ़ती है, जिससे पर्यावरण पर गंभीर दबाव पड़ता है।</p>
<p><strong>पुनर्चक्रण के अनेक लाभ :</strong></p>
<p>पुनर्चक्रण के अनेक लाभ हैं। इससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है, कचरे की मात्रा कम होती है, भूमि, जल और वायु प्रदूषण में कमी आती है,पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है तथा ऊर्जा की बचत होती है, क्योंकि नई वस्तु बनाने की तुलना में पुरानी वस्तुओं के पुनर्चक्रण में कम ऊर्जा लगती है। पुनर्चक्रण से कार्बन उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैसों में कमी आती है, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त यह नए रोजगार के अवसर पैदा करता है, अर्थव्यवस्था को गति देता है और कच्चे माल की आवश्यकता को भी कम करता है। इसलिए आवश्यक है कि पुनर्चक्रण से संबंधित नीतियों और कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। अंततः कहा जा सकता है कि पुनर्चक्रण से कच्चे माल के निष्कर्षण, शोधन और प्रसंस्करण की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण संभव होता है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि हम पुनर्चक्रण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, ताकि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी पृथ्वी के संसाधन सुरक्षित रखे जा सकें।</p>
<p><strong>-सुनील कुमार महला</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 11:15:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व वन्यजीव दिवस: पीएम मोदी ने वन्यजीवों के संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई, पृथ्वी की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा के महत्व को किया रेखांकित</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व वन्यजीव दिवस पर भारत की समृद्ध विरासत और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई। 'प्रोजेक्ट टाइगर' और 'एलीफेंट' जैसी पहलों की सफलता को रेखांकित करते हुए उन्होंने सतत विकास और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया। पीएम ने स्पष्ट किया कि प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-world-wildlife-day-pm-modi-reiterated-his-commitment-to/article-145178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को पृथ्वी की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा के महत्व को रेखांकित किया और संरक्षण तथा सतत विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहरायी।</p>
<p>पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, "विश्व वन्यजीव दिवस हमारी पृथ्वी को समृद्ध करने और हमारे पारिस्थितिकी तंत्रों को बनाए रखने वाली अविश्वसनीय पशु विविधता का जश्न मनाने को दिन है। यह वन्यजीव संरक्षण की दिशा में काम करने वाले सभी को स्वीकार करने का दिन है। हम संरक्षण, टिकाऊ प्रथाओं और आवासों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं ताकि हमारा वन्यजीव फलता-फूलता रहे।"</p>
<p>गौरतलब है कि, विश्व वन्यजीव दिवस तीन मार्च को दुनिया के जंगली जानवरों और पौधों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और जैव विविधता की रक्षा के वैश्विक प्रयासों को मान्यता देने के लिए प्रतिवर्ष मनाया जाता है। भारत, एशियाई शेरों और बंगाल के बाघों से लेकर हाथियों और एक सींग वाले गैंडों तक कई प्रजातियों का घर है। भारत वन्यजीवों की रक्षा के लिए कई संरक्षण पहलों में सबसे आगे रहा है। पिछले दस सालों में सरकार ने प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसे बड़े कार्यक्रमों के साथ-साथ सुरक्षित इलाकों को बढ़ाने और वन्यजीव गलियारा को मज़बूत करने की कोशिशों पर ज़ोर दिया है। भारत ने सामुदायिक भागीदारी और शिकार रोकने के कड़े उपायों के ज़रिए बाघों की आबादी बढ़ाने और खतरे में पड़ी प्रजातियों को बचाने में भी अच्छी सफलताएँ हासिल की हैं।</p>
<p>पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षण, सतत विकास के लक्ष्यों से बहुत करीब से जुड़ा है, खासकर ऐसे देश में जहाँ पारिस्थितिक संतुलित खेती, रोज़ी-रोटी और जलवायु के लचीलापन को मदद करता है। प्रधानमंत्री का यह संदेश आवास हानि, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता में कमी को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच आया है। संरक्षणवादियों ने सरकारों, स्थानीय समुदायों और पर्यावरण संगठनों के बीच लगातार सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विकास प्रकृति की कीमत पर न हो। जैसे-जैसे दुनिया विश्व वन्यजीव दिवस मना रही है। भारत ने संरक्षण नीति को मज़बूत करने और टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देने का अपना वादा दोहराया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी अलग-अलग तरह की वन्यजीव विरासत फलती-फूलती रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 17:58:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार ग्रामीण कार्य विभाग की अनोखी पहल: प्लास्टिक कचरे से बनाई 7,214 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाते हुए 7,214 किमी से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण। वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग कर सड़कों को मजबूती। 6.40 लाख वृक्षारोपण से पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित। आईआईटी पटना में इंजीनियरों का प्रशिक्षण और हाई-टेक मॉनिटरिंग बिहार के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ले जाना सुनिश्चित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/unique-initiative-of-bihar-rural-works-department-7214-km-rural/article-144548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/road.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए 7,214 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण किया है। बिहार में ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा राज्य के सुदूर इलाकों में बारहमासी सड़क का निर्माण कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान किया जा रहा है। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य के साथ एक नया मानक भी स्थापित किया है। पर्यावरण संरक्षण के क्रम में ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आधुनिक ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए 7,214 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण किया गया है। यह पहल केवल तकनीकी नवाचार के दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण असंतुलन की चुनौती के दृष्टिकोण से भी एक दूरदर्शी कदम है।</p>
<p>ग्रामीण सड़कों के निर्माण में प्रयुक्त वेस्ट प्लास्टिक न केवल ठोस कचरे के पुनर्चक्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि इससे सड़कों की मजबूती और आयु भी बढ़ती है। प्लास्टिक अपशिष्ट जो पहले पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता था, अब बिहार में ग्रामीण सड़कों की आधारशिला बन रहा है। </p>
<p>सड़क निर्माण के साथ-साथ विभाग ने हरियाली को भी समान महत्व दिया है। ग्रामीण सड़क निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता दिखाते हुए विभाग ने लगभग पिछले एक वर्ष में सड़कों के किनारे 6,40,000 वृक्षारोपण का कार्य किया है। इस विशाल वृक्षारोपण अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और हरित आवरण का विस्तार हुआ है।</p>
<p>इसके साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों और आधुनिक निर्माण शैली को देखते हुए विभाग ने अपने नवनियुक्त 480 सहायक अभियंताओं को आईआईटी पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में विशेष प्रशिक्षण दिलाने का अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत अब तक 120 अभियंताओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है और जुलाई 2026 तक सभी अभियंताओं को दक्ष बनाने का लक्ष्य है, जिससे राज्य की ग्रामीण सड़कों और पुलों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>वहीं, विभाग अब भविष्य की तकनीक की ओर उन्मुख होते हुए आधुनिक तकनीकी प्रणाली लागू करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है, जिससे सड़कों के रखरखाव में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और तकनीक के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटिंरिग सुनिश्चित की जा सकेगी।</p>
<p>ग्रामीण कार्य विभाग का यह बदलता स्वरूप न केवल आवागमन को सुगम बना रहा है, बल्कि यह सतत विकास, नवाचार, तकनीकी उत्कृष्टता और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण की परंपरा की शुरुआत का नया मॉडल बनकर उभर रहा है। एक तरफ जहां वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने लगभग 1 लाख 20 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण सहित अन्य उपलब्धियों को हासिल किया है और कई मानक स्थापित किए हैं। </p>
<p>वहीं, आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने सड़कों के नए विस्तार, नए पुलों के निर्माण, हाई-टेक मॉनिटिंरिंग की व्यवस्था की सुनिश्चितता के साथ-साथ सात निश्चय-3 के तहत महत्वपूर्ण सड़कों के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। यह संपूर्ण प्रयास बिहार के ग्रामीण जनजीवन को आधुनिकता और समृद्धि के एक नए स्तर पर ले जाने के लिए किए जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 14:13:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पर्यावरण संघर्ष समिति का खेजड़ी बचाओ महापड़ाव शुरू, हजारों लोगों ने खेजड़ी वृक्ष बचाने के लिए मजबूत कानून बनाने की भरी हुंकार</title>
                                    <description><![CDATA[बीकानेर में पॉलिटेक्निक ग्राउंड पर खेजड़ी बचाओ महापड़ाव शुरू हुआ। अवैध कटाई रोकने और सख्त कानून की मांग को लेकर हजारों लोग जुटे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/khejri-bachao-mahapadav-of-environment-sangharsh-samiti-started-thousands-of/article-141760"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)2.png" alt=""></a><br /><p>बीकानेर। शहर के पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में खेजड़ी बचाओ महापड़ाव सोमवार से शुरू हो गया है। मुकाम पीठाधीश्वर रामानन्द आचार्य ने कहा यह आंदोलन एक दिन का नहीं है, महापड़ाव आगे भी जारी रहेगा। पर्यावरण संघर्ष समिति का यह आंदोलन सोलर प्लांट कंपनियों की ओर से खेजड़ी और अन्य हरे पेड़ों की अवैध कटाई को रोकने और पेड़ों के संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाने की मांग को लेकर किया जा रहा है। हजारों लोगों ने सोमवार को बीकानेर में एक स्वर में कहा कि खेजड़ी को बचाने के कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं। </p>
<p>महापड़ाव स्थल पर राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्टÑ और मध्य प्रदेश से आए लोग जुटे हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। राज्य वृक्ष खेजड़ी बचाने के लिए शुरू हुए महापड़ाव के समर्थन में स्थाीनीय व्यापारिक संगठनों ने भी सोमवार को बाजार बंद रखा। शहरी क्षेत्र के सरकारी और निजी स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की गई। शिव विधानसभा क्षेत्र से विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था, लेकिन मांगे मनवाने के लिये सरकार को झुकाने के लिए बड़े आंदोलन करने की जरूरत है। यदि बीकानेर से लोग विधानसभा घेराव करना की बात करते हैं तो मैं उस आंदोलन में सबसे आगे रहूंगा। संगरिया विधायक अभिमन्यु पूनिया, कांग्रेस के नेता व पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल, भंवर सिंह भाटी, पूर्व विधायक महेंद्र बिश्नोई सहित अनेक जनप्रतिनिधि महापड़ाव में समर्थन देने पहुंचे। </p>
<p><strong>बजट सत्र में कानून आए</strong></p>
<p>आंदोलन कारी खेजड़ी बचाने के लिए मजबूत कानून लाने की मांग कर रहे हैं। महापड़ाव स्थल पर हजारों की संख्या में लोग पहुंच चुके हैं और उनके आने का क्रम रात तक जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री से वार्ता हो चुकी है। हमारी मांग पर बजट सत्र में कानून आए इसका इंतजार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 12:56:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश: हस्तशिल्प कलाएं देश की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार समारोह में कहा कि हस्तशिल्प देश की सांस्कृतिक पहचान और आजीविका का प्रमुख माध्यम है। यह क्षेत्र 32 लाख लोगों को रोजगार देता है, जिनमें 68% महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने जीआई टैग, ओडीओपी और टिकाऊ विकास में हस्तशिल्प की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/president-draupadi-murmus-message-handicraft-arts-are-part-of-the/article-135441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/dropadi-murmu-on-factionccc.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि हस्तशिल्प कलाएं न केवल देश की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं बल्कि आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। उन्होंने कहा कि  हस्तशिल्प क्षेत्र युवा उद्यमियों और डिजाइनरों को उद्यम स्थापित करने के लिए उत्कृष्ट अवसर भी प्रदान करता है। मुर्मु ने मंगलवार को यहां वर्ष 2023 और 2024 के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान किए।   </p>
<p>इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कला अतीत की स्मृतियों, वर्तमान के अनुभवों और भविष्य की आकांक्षाओं को प्रतिबिम्बित करती है। प्राचीन काल से ही मनुष्य चित्रकला या मूर्तिकला के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करता रहा है। कला लोगों को संस्कृति से जोड़ती है। कला लोगों को एक-दूसरे से भी जोड़ती है। </p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा, हमारी सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा के जीवंत और संरक्षित रहने का श्रेय, पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे कारीगरों की प्रतिबद्धता को जाता है। हमारे कारीगरों ने अपनी कला और परंपरा को समय के साथ ढाला है और साथ ही मूल भावना को भी जीवित रखा है। उन्होंने अपनी प्रत्येक कलात्मक रचना में देश की मिट्टी की खुशबू को संजोकर रखा है। मुर्मू ने कहा कि हस्तशिल्प न केवल सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं, बल्कि आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। यह क्षेत्र देश में 32 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देता है। उल्लेखनीय है कि हस्तशिल्प से रोज़गार और आय प्राप्त करने वाले ज़्यादातर लोग ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में रहते हैं। यह क्षेत्र रोज़गार और आय का विकेंद्रीकरण करके समावेशी विकास को बढ़ावा देता है।</p>
<p><strong>कमजोर वर्ग को बढ़ावा देता है हस्तशिल्प</strong></p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक सशक्तिकरण के लिए हस्तशिल्प को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लोगों को सहायता प्रदान करता रहा है। हस्तशिल्प न केवल कारीगरों को आजीविका का साधन प्रदान करता है, बल्कि उनकी कला उन्हें समाज में पहचान और सम्मान भी दिलाती है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कार्यरत कार्यबल में 68 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी है और इस क्षेत्र के विकास से महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। </p>
<p>राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हस्तशिल्प उद्योग की सबसे बड़ी ताकत प्राकृतिक और स्थानीय संसाधनों पर इसकी निर्भरता है। यह उद्योग पर्यावरण के अनुकूल है और इसमें कार्बन उत्सर्जन कम होता है। आज, दुनिया भर में पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ जीवनशैली की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है। ऐसे में, यह क्षेत्र स्थायित्व में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। राष्ट्रपति ने जीआई टैग द्वारा दुनिया भर में भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की पहचान को मज़बूत करने की उपलब्धियों पर खुशी व्यक्त की। </p>
<p>उन्होंने सभी हितधारकों से अपने अनूे उत्पादों के लिए जीआई टैग प्राप्त करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग उनके उत्पादों को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी विश्वसनीयता को बढ़ाएगा। </p>
<p>उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक ज़लिा एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल हमारे क्षेत्रीय हस्तशिल्प उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय पहचान को भी मज़बूत कर रही है। मुर्मू ने कहा कि हमारे कारीगरों के पीढ़ी दर पीढ़ी संचित ज्ञान, समर्पण और कड़ी मेहनत के बल पर, भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय हस्तशिल्प की मांग में वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र युवा उद्यमियों और डिज़ाइनरों को उद्यम स्थापित करने के बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 12:16:21 +0530</pubDate>
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