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                <title>Military Tension - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Military Tension RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम एशिया संघर्ष: डोनाल्ड ट्रंप ने खर्ग द्वीप समेत तेल भंडारों पर कब्जा करने की ईरान को दी धमकी, सऊदी अरब में अमेरिकी हवाई अड्डे पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच खर्ग द्वीप और ईरानी तेल संसाधनों पर नियंत्रण करने की धमकी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी रक्षा प्रणाली ध्वस्त हो चुकी है और समझौता न होने पर सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इस तनाव से ब्रेंट क्रूड की कीमतें $116 के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-israel-conflict-donald-trump-threatens-iran-to-capture-oil/article-148439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष में तनाव बढ़ने के साथ ही अमेरिका ईरान के तेल भंडारों पर कब्जा कर सकता है, जिसमें प्रमुख निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि समझौते और युद्ध का उनका इरादा ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करना होगा, जिसकी तुलना उन्होंने इस साल की शुरुआत में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई से की।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, "सच कहूँ तो, मेरी सबसे पसंदीदा योजना ईरान से तेल छीनना है, लेकिन अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग कहते हैं: 'आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?' लेकिन वे बेवकूफ ही हैं।" उन्होंने सुझाव दिया कि वाशिंगटन खर्ग द्वीप पर नियंत्रण कर सकता है, जिससे होकर ईरान के कच्चे तेल का अधिकांश निर्यात होता है और कहा कि यह विकल्प अभी भी विचाराधीन है। उन्होंने कहा, "हो सकता है हम खर्ग द्वीप पर कब्जा कर लें हो सकता है न करें। हमारे पास कई विकल्प हैं... इसका मतलब यह भी होगा कि हमें कुछ समय के लिए खर्ग द्वीप पर रहना होगा।"</p>
<p>जब ट्रंप से द्वीप पर ईरानी रक्षा व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि उन्होंने ईरान की सेना और नौसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया है और कहा, "मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई रक्षा व्यवस्था है। हम इसे बहुत आसानी से अपने कब्जे में ले सकते हैं।" लेकिन ट्रंप ने हालिया टिप्पणी कि वह "तेल पर कब्जा करना चाहते हैं" से बाजारों में कोई हलचल नहीं मची है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से बढ़ गई हैं।</p>
<p>ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पेंटागन इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की इकाइयों सहित हजारों अमेरिकी सैनिकों को इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल की कीमतों को भी तेजी से बढ़ा दिया है और आगे तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। सऊदी अरब में अमेरिकी हवाई अड्डे पर हुए हमले सहित सैन्य तनाव बढ़ गया है, जिसमें अमेरिकी सैनिक घायल हुए और सैन्य उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। इस बीच, यमन में हाउथी विद्रोहियों ने युद्ध में प्रवेश कर लिया है, जिससे मौजूदा संघर्ष में एक नया चरण शुरू हो गया है और उन्होंने इज़राइल की ओर मिसाइलें दागी हैं, जिससे एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>आक्रामक बयानबाजी के बावजूद ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान सहित मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों के गुजरने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "उन्होंने हमें 10 की अनुमति दी थी। अब वे 20 की अनुमति दे रहे हैं और 20 टैंकर पहले ही अपना काम शुरू कर चुके हैं और जलडमरूमध्य के ठीक बीच से गुजर रहे हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि कई वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु के बाद ईरान में प्रभावी रूप से "सत्ता परिवर्तन" हो गया है, हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि ईरान की राजनीतिक संरचना अभी भी बरकरार और मजबूत है।</p>
<p>उन्होंने ईरान के नेतृत्व के साथ संभावित समझौते को लेकर भी विश्वास जताया: "मुझे लगता है कि हम उनके साथ समझौता कर लेंगे, मुझे पूरा यकीन है... लेकिन सत्ता परिवर्तन हो चुका है।" ट्रंप ने आगे कहा कि सैन्य अभियान जारी हैं, "हमारे पास लगभग 3,000 लक्ष्य बचे हैं, हमने 13,000 लक्ष्यों पर बमबारी की है, और कुछ हजार लक्ष्य अभी बाकी हैं... समझौता काफी जल्दी हो सकता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 15:23:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान युद्ध में रुकावट? ट्रंप ने कहा अमेरिका और ईरान के बीच 'प्रोडक्टिव' बातचीत शुरू, 5 दिनों के लिए मिलिट्री ऑपरेशनों पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी पावर प्लांट्स को नष्ट करने की 48 घंटे की चेतावनी दी थी, जिसे वार्ता के बाद 5 दिनों के लिए टाल दिया गया है। 2,000 से अधिक मौतों और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, दुनिया की नजरें अब इस कूटनीतिक समाधान पर टिकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/interruption-in-iran-war-trump-said-start-productive-talks-between/article-147588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>अमेरिका। अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट "बेहद गंभीर" है और यह 1970 के दशक केनु तेल संकट से भी बदतर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने सोमवार को यह चेतावनी दी, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को खतरा बना हुआ है।उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण पैदा हुआ वैश्विक ऊर्जा संकट 1970 के दशक के तेल संकटों से भी अधिक गंभीर हो सकता है।</p>
<p>मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को हिला दिया है। खाड़ी क्षेत्र में एनर्जी और फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों और जवाबी चेतावनियों के चलते हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से नहीं खोला गया तो ईरानी पावर प्लांट्स को निशाना बनाया जाएगा।</p>
<p>ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका के ऊर्जा और तकनीकी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस बीच, अमेरिका और इज़राइल के सैन्य अभियान के बाद अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, लगभग बंद होने से यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट गहराने लगा है।</p>
<p>हालांकि, हालिया घटनाक्रम में ट्रंप ने बातचीत को “सकारात्मक” बताते हुए ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच जारी वार्ता से तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अभी भी जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।</p>
<p>इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात फोन पर हुई बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य संकट पर चर्चा की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के कार्यालय डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "वे इस बात पर सहमत हुए कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना आवश्यक है।" बयान में यह भी कहा गया कि वे 'जल्द ही फिर से बात करेंगे।'</p>
<p>यह बातचीत स्टार्मर द्वार ईरान के साथ चल रहे युद्ध में ब्रिटेन के शामिल होने से इनकार के बाद श्री ट्रंप और अन्य यूरोपीय सहयोगियों की तीखी आलोचना के बाद हुई है। ब्रिटेन उन 22 देशों में शामिल है, जिन्होंने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के प्रयासों में योगदान देने की इच्छा व्यक्त की है। दुनिया के सबसे व्यस्त नौवहन मार्गों में से एक इस जलमार्ग से यातायात 28 फरवरी को युद्ध छिड़ने के बाद से लगभग 95 प्रतिशत तक गिर गया है।</p>
<p>रविवार को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्क रूट ने कहा कि वह 'पूरी तरह से आश्वस्त' हैं कि नाटो इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन की संवेदनशील प्रकृति के कारण सदस्य देशों को थोड़ा समय चाहिए। डाउनिंग स्ट्रीट के एक प्रवक्ता ने दोहराया कि नेताओं ने अपनी बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए इसे खोलना अनिवार्य है।</p>
<p>यह चर्चा सोमवार को स्टार्मर की अध्यक्षता में होने वाली 'कोबरा' बैठक से पहले हुई है, जिसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली भी शामिल होंगे। इस बैठक में ऊर्जा की कीमतों, जीवन यापन की लागत और व्यापक आर्थिक स्थितियों पर इस संकट के प्रभाव का आकलन किया जाएगा। प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और ऊर्जा मंत्री सहित वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा व्यवसायों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर इसके प्रभावों की समीक्षा करने की भी उम्मीद है।</p>
<p>नाकेबंदी के बाद से कच्चे तेल की कीमतें लगभग 45 प्रतिशत बढ़कर 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने धमकी दी थी कि यदि 48 घंटों के भीतर जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो वे ईरानी बिजली संयंत्रों को 'मिटा' देंगे। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने भी बदले में चेतावनी दी है। यदि अमेरिका अपनी धमकी पर अमल करता है, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।</p>
<p>अलग से, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर ने कहा कि उन्होंने मौजूदा संकट के बीच डीजल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) सहित प्रमुख ऊर्जा आपूर्ति हासिल करने पर समन्वय मजबूत करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा, "हम ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करना, नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को तेज करना और खुले व्यापार को बनाए रखना शामिल है।"</p>
<p>यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर के देश होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बाद ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जहां से आमतौर पर वैश्विक तेल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:50:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका को आईआरजीसी की कड़ी चेतावनी: कहा-ईरान के खिलाफ हर हमले का मिलेगा करारा जवाब; अमेरिका हमारी क्षमताओं को नहीं जानता, युद्धक्षेत्र में इसका होगा अनुभव </title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चेतावनी दी है। ईरान ने स्पष्ट किया कि यदि उसके बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और आर्थिक केंद्रों पर बराबर और घातक पलटवार होगा। 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4' के तहत ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता और प्रतिरोधक शक्ति का प्रदर्शन करने का संकल्प दोहराया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irgcs-stern-warning-to-america-every-attack-against-iran/article-147552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ig.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान के खिलाफ किसी भी खतरे का बराबर और प्रतिरोधक जवाब दिया जाएगा। आईआरजीसी ने सोमवार को जारी बयान में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन आरोपों का जवाब दिया, जिनमें कहा गया था कि ईरानी बल क्षेत्रीय जल विलवणीकरण संयंत्रों को निशाना बना सकते हैं।</p>
<p>आईआरजीसी ने आरोप लगाया कि युद्ध की शुरुआत अमेरिकी सेना ने की और अब तक बच्चों सहित कई नागरिकों को निशाना बनाया है। बयान में कहा गया कि अमेरिकी हमलों में जल अवसंरचना को भी नुकसान पहुंचाया गया, जिसमें क़ेश्म द्वीप का विलवणीकरण संयंत्र शामिल है। कोर ने स्पष्ट किया कि उसने ऐसे किसी हमले को अंजाम नहीं दिया है और इन आरोपों को खारिज किया। बयान में कहा गया कि अमेरिकी और सहयोगी बलों द्वारा अस्पतालों, राहत केंद्रों और स्कूलों को निशाना बनाए जाने के बावजूद आईआरजीसी ने अब तक संयम बरता है।</p>
<p>आईआरजीसी ने राष्ट्रपति ट्रंप की उस चेतावनी पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की बात कही गयी थी। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा, यदि आप हमारी बिजली आपूर्ति को निशाना बनाते हैं, तो हम भी आपकी बिजली आपूर्ति को निशाना बनाएंगे। आईआरजीसी ने कहा कि यदि कोई हमला होता है तो जवाब में अमेरिकी ठिकानों को बिजली आपूर्ति करने वाले संयंत्रों के साथ-साथ अमेरिकी हितों से जुड़े आर्थिक, औद्योगिक और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाएगा।</p>
<p>बयान के अंत में आईआरजीसी ने कहा कि वह हर खतरे का उसी स्तर पर जवाब देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे संतुलन और प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। कोर ने चेतावनी दी, संयुक्त राज्य अमेरिका हमारी क्षमताओं को नहीं जानता, लेकिन उसे युद्धक्षेत्र में इसका अनुभव होगा।उल्लेखनीय है कि, आईआरजीसी ने अपने जारी अभियान ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 के तहत क्षेत्र में कई अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर हमले करने का दावा किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:16:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज़ पार करने वाले चुनिंदा ज़हाज़ों को ईरान ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम, 18 करोड़ की करेगा वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने घोषणा की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को अब $20 लाख (₹18.76 करोड़) शुल्क देना होगा। डोनाल्ड ट्रंप की 48 घंटे की चेतावनी और बिजली संयंत्रों को "मिटाने" की धमकी के बावजूद ईरान ने अपना नियंत्रण सख्त कर लिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में तनाव बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-gives-48-hour-ultimatum-to-selected-ships-crossing-hormuz-will/article-147476"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran7.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। मीडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान ने बड़ा फैसला करते हुए श्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण और भी सख्त कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा है कि इस जलमार्ग से जो भी ज़हाज़ गुजरेगा अब ईरान उससे 20 लाख डॉलर ट्रांजिट शुल्क लेगा और यदि कोई भी देश ऐसा नहीं करेगा तो वो इस मार्ग से नहीं जा सकता है।</p>
<p>गौरतलब है कि, ईरान ने ये सख्त कदम ऐसे समय में उठाया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य मार्ग को खोलने के लिए 48 घंटों का समय दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि अब से वो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ चुनिंदा जहाहों पर 18,76,00,300 रुपये का शुल्क लेगा। इस बात की पुष्टि राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अपने सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के माध्यम से की है।</p>
<p>इससे पहले ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के चौथे सप्ताह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह अगले 48 घंटों के भीतर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों को "मिटा" देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:57:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर जवाबी हमला: कई शहरों में घुसे अफगान ड्रोन, कंधार में फ्यूल डिपो को भी बनाया निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया के नागरिक ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। अफगान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद के अनुसार, इन हमलों में रिहायशी घरों और कंधार हवाई अड्डे के ईंधन डिपो को निशाना बनाया गया। महिलाओं और बच्चों की मौत के साथ बुनियादी ढांचे को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghanistans-counter-attack-on-pakistan-afghan-drones-entered-many-cities/article-146398"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pakistan2.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर ङ्क्षहसक मोड़ ले चुका है। अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने शुक्रवार तड़के जानकारी दी कि पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में नागरिक ठिकानों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है। </p>
<p>सरकारी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद  के अनुसार, पाकिस्तानी बलों ने अफगानिस्तान के कई प्रमुख प्रांतों और शहरों को निशाना बनाया, जिनमें  राजधानी काबुल, कंधार और पक्तिया शामिल हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कुछ स्थानों पर पाकिस्तानी बमवर्षकों ने सीधे तौर पर रिहायशी घरों को निशाना बनाया। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों के मारे जाने की भी सूचना है। हालांकि, कुछ हमले खाली रेगिस्तानी और निर्जन क्षेत्रों में भी हुए हैं।</p>
<p>इस सैन्य कार्रवाई में एक बड़ा आर्थिक नुकसान कंधार में हुआ है। मुजाहिद के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना ने कंधार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन कम एयर के एक ईंधन डिपो पर हमला किया, जिससे हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। यह ताजा हमला पिछले कुछ दिनों से जारी सीमा विवाद और हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 17:44:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी जवाबी कार्रवाई: अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर सटीक मिसाइल हमला,  दुश्मन के रडार सिस्टम पहले ही हो चुके हैं नष्ट </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान की आईआरजीसी ने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना मुख्यालय पर मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह हमला क़ेश्म द्वीप के जल शोधन संयंत्र पर हुए कथित अमेरिकी हमले का सीधा जवाब है। प्रवक्ता इब्राहिम जोलफक़ारी के अनुसार, दुश्मन के रडार सिस्टम पहले ही नष्ट हो चुके हैं, जिससे सटीक निशाना लगाना आसान हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-attacks-us-military-base-after-attack-on-water-treatment/article-145721"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने दक्षिणी क्षेत्र में स्थित एक समुद्री जल शोधन संयंत्र पर हमले के बाद अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है। ईरान के सरकारी समाचार प्रसारक प्रेस टीवी ने रविवार को यह जानकारी दी।  </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च परिचालन कमान खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोलफक़ारी ने शनिवार को कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के बहरीन स्थित नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन अड्डे से कथित हमले के बाद की गयी। यह अड्डा अमेरिकी नौसैनिक बलों की केन्द्रीय कमान और पांचवें बेड़े का मुख्यालय है। </p>
<p>जोलफक़ारी ने कहा कि जुफैर स्थित अमेरिकी अड्डे से क़ेश्म द्वीप के क़ेश्म डिसेलिनेशन प्लांट पर हमले के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने सटीक ठोस ईंधन वाली मिसाइलों से उस अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि यह हमला क़ेश्म द्वीप स्थित जल शोधन संयंत्र पर हुए हमले के सीधे जवाब के रूप में किया गया। प्रवक्ता ने ईरान द्वारा पहले किए गए जवाबी हमलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन कार्रवाइयों में विरोधी पक्ष की निगरानी प्रणालियों को काफी नुकसान पहुंचाया गया था। उनके अनुसार दुश्मन के रडार सिस्टम पहले की कार्रवाई में नष्ट हो जाने के कारण अब लक्ष्यों को निशाना बनाना अपेक्षाकृत आसान हो गया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 16:16:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर किया ड्रोन अटैक, कहा-जमीन पर तैनात सैनिकों की जरूरत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास और रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाकर ड्रोन हमले किए गए। रक्षा मंत्रालय ने 7 ड्रोन मार गिराए, हालांकि मलबे से मामूली आग लग गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि दूतावास ने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-carried-out-drone-attack-on-us-embassy-in-saudi/article-145184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us.png" alt=""></a><br /><p>रियाद। सऊदी अरब के रियाद स्थिति अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार सुबह ड्रोन से हमला किया गया, जिसके कारण हल्की आग लगी गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ है। सऊदी गैजेट की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा, "शुरुआती अनुमान के मुताबिक, रियाद में अमेरिकी दूतावास को ड्रोन से लक्षित किया गया है। इस घटना में हल्की आग लगी और इमारत को मामूली नुकसान हुआ।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि रियाद के साउथ में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास पांच ड्रोन को मार गिराया गया । इसके अलावा दो ड्रोन के जरिये पूर्वी प्रांत में रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी पर हमला करने की कोशिश की गयी लेकिन मार गिराये गये ड्रोन का मलबा गिरने से रिफाइनरी में हल्की आग लग गई। किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका जल्द ही ड्रोन हमले का जवाब देगा। रियाद में अमेरिकी दूतावास ने रियाद और जेद्दा में अमेरिकी नागरिकों के लिए एक परामर्श जारी किया है कि वे दूतावास परिसर से दूर रहें और घर के अंदर ही रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:05:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका जंग भारतीय डिप्लोमैसी के लिए चुनौती: इजरायल बेहद करीबी मित्र तो ईरान से भी ऐतिहासिक रिश्ते</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने भारत के लिए रणनीतिक चुनौती। दोनों पक्षों से गहरे रिश्तों के कारण भारत सतर्क। सरकार ने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर तेहरान में फंसे भारतीयों को घरों में रहने की दी सलाह। वैश्विक भू-राजनीति में रूस और चीन की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-america-war-is-a-challenge-for-indian-diplomacy-israel-is/article-145012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/khamnoi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका की ओर से युद्ध शुरू होने के बाद भारत के सामने बहुत ही कठिन राजनयिक चुनौती खड़ी हो चुकी है। भारत और इजरायल बेहद करीबी मित्र हैं, तो ईरान के साथ भी भारत के पुराने ऐतिहासिक रिश्ते हैं और वह भारत के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से भी बहुत ज्यादा अहमियत रखता है। इस लड़ाई में अमेरिका का इजरायल का साथ देने की वजह से भारत के सामने और भी अग्निपरीक्षा की स्थिति पैदा हो चुकी है। ईरान पर शनिवार को जिस तरह से अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला बोला है, उसकी आशंका बीते कई महीनों से थी। पिछले कुछ सप्ताह से तो अमेरिका ने इसके लिए अपना पूरा सैन्य बंदोबस्त भी कर लिया था। लेकिन, अब जंग की शुरूआत हो चुकी है और जिस तरह से कुछ देश ईरान के समर्थन में भी खुलकर सामने आने शुरू हुए हैं, इससे आने वाले अगले कुछ दिन जियोपॉलिटिक्स के लिए बहुत अहम होने वाले हैं।</p>
<p><strong>रूस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर उंगली भी उठा दी </strong></p>
<p>रूस ने तो खुलकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर उंगली भी उठा दी है। हालांकि, वह सीधे इस जंग में ईरान की ओर से कूदेगा, फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं। लेकिन, पहले से ही आफत में अवसर की तलाश में बैठा चीन इसका किस तरह से फायदा उठाना चाहेगा, यह देखने वाली बात है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध पर भारत ने शुरूआती प्रतिक्रिया में दोनों देशों में रह रहे अपने नागरिकों को पूर्ण एहतियात बरतने की एडवाइजरी जारी की है। तेहरान में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों को सलाह दी है, पैदा हो रहे हालातों को देखते हुए, ईरान में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि पूरी सावधानी बरतें, गैर-जरूरी मूवमेंट से बचें और जितना संभव हो घरों के अंदर ही रहें। भारतीय समाचार पर नजर रख सकते हैं, जागरूकता बनाए रखें और भारतीय दूतावास से अगले दिशा-निदेर्शों का इंतजार करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:37:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>आखिर क्यों ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को उड़ानों के लिए किया बंद? सामने आई चौकाने वाली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने बुधवार रात तनावपूर्ण स्थिति के बीच अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इस बीच अमेरिकी वर्चुअल दूतावास ने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने का आग्रह किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/why-did-iran-close-its-airspace-for-flights-surprising-reason/article-139673"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/iran-flight.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने बुधवार रात को हवाई सफर को लेकर अलर्ट जारी किया, जिसमें देश की पहले से अनुमति वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को छोड़कर सभी उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया गया है।</p>
<p>नोटिस में कहा गया है कि यह रोक स्थानीय समय अनुसार सुबह 4:00 बजे तक दो घंटे से ज्यादा समय तक लागू रहेगी, लेकिन इसे बढ़ाया भी जा सकता है। ईरान में अमेरिकी वर्चुअल दूतावास ने मंगलवार को अमेरिकी नागरिकों से देश छोडऩे का आग्रह किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 15:15:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>इजरायली हवाई हमले में हिजबुल्लाह सदस्य की मौत, जांच एजेंसियां अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी लेबनान के मजदल सेल्म में गुरुवार को एक इजरायली ड्रोन हमले में हिजबुल्लाह सदस्य मोहम्मद अला अल-दीन मारा गया। इजरायली सेना ने कहा कि वह सैन्य ढांचे को बहाल करने की कोशिश कर रहा था। नवंबर 2024 के युद्धविराम के बावजूद सीमा पर तनाव जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/hezbollah-member-killed-in-israeli-airstrike-investigative-agencies-alert/article-137269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/labnan.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। दोपहर दक्षिणी लेबनान में गुरुवार को इजरायली हवाई हमले में हिजबुल्लाह का एक सदस्य मारा गया। लेबनानी सूत्रों और इजरायली सेना ने यह जानकारी दी। लेबनान की आधिकारिक राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएए) ने बताया कि गुरुवार दोपहर सीमावर्ती गांव मजदल सेल्म के प्रवेश द्वार पर एक इजरायली ड्रोन ने एक पिकअप ट्रक को निशाना बनाया।</p>
<p>लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय के आपातकालीन संचालन केंद्र ने पुष्टि की कि हमले में एक नागरिक मारा गया। एक सुरक्षा सूत्र ने मृतक की पहचान मोहम्मद अला अल-दीन नामक हिजबुल्लाह सदस्य के रूप में की। इजरायल रक्षा बलों ने एक बयान में कहा, हमले में एक आतंकवादी मारा गया जो क्षेत्र में सैन्य बुनियादी ढांचे को बहाल करने के हिजबुल्लाह के प्रयासों में मिल था।</p>
<p>एनएनए ने इजरायली हवाई गतिविधियों में वृद्धि की भी सूचना दी, जिसमें आठ युद्धक विमान बालबेक शहर के ऊपर ऊँची उड़ान भरते हुए दक्षिण-पूर्व की ओर पूर्वी पर्वत श्रृंखला की ओर बढ़े और एक ड्रोन ने शाम को सीमावर्ती गांवों के पास बम गिराए।</p>
<p>अमेरिका और फ्रांस की मध्यस्थता से नवंबर 2024 में हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच हुए युद्धविराम के बावजूद, इजरायली सेना कभी-कभी लेबनान पर हमले करती है, जिसका दावा है कि उनका उद्देश्य हिजबुल्लाह के खतरों को खत्म करना है, और उसने लेबनानी सीमा क्षेत्र में पांच स्थानों पर अपनी सेना तैनात कर रखी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 19:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>&quot;हजारों बेघर, चारों तरफ मातम ही मातम....&quot; थाईलैंड-कंबोडिया सीमा संघर्ष गुरूवार को भी जारी, ट्रंप ने करवाया था सीजफायर </title>
                                    <description><![CDATA[थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर जारी संघर्ष में दोनों देशों को भारी नुकसान हुआ है। थाईलैंड ने नौ सैनिकों की मौत और दो लाख नागरिकों के विस्थापन की जानकारी दी, जबकि कंबोडिया ने दस नागरिकों की मौत की पुष्टि की है। झड़पें लगातार जारी हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/thousands-of-homeless-mourning-everywhere-thailand-cambodia-border-conflict-continued-on/article-135578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/thailand-and-cambodiya1.png" alt=""></a><br /><p>बैंकॉक। थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर चल रहे संघर्ष में दोनों देशों को भारी नुक़सान हुआ है। थाईलैंड ने नौ सैनिकों की मौत और लगभग दो लाख नागरिकों के विस्थापित होने की सूचना दी है, जबकि कंबोडिया ने दस नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की है।</p>
<p>थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने गुरुवार को कहा कि जारी सीमा झड़पों में नौ थाई सैनिक मारे गए हैं और एक सौ बीस से अधिक लोग घायल हुए हैं। उन्होंने प्रेस ब्रीफींग में बताया कि संघर्ष के कारण तकऱीबन दो लाख थाई नागरिक विस्थापित हुए हैं, जिन्होंने शरणार्थी शिविरों में पनाह ली है। अब तक तीन शरणार्थियों की मौत की सूचना है और कुल 849 शरणार्थी शिविर स्थापित किए गए हैं।</p>
<p>प्रवक्ता के अनुसार, इस संघर्ष से लगभग 200 अस्पताल और क्लिनिक भी विभिन्न स्तरों पर प्रभावित हुए हैं। थाईलैंड सेना क्षेत्र कमान ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि झड़पें अभी भी जारी हैं, जिसमें कंबोडियाई सेना थाईलैंड के उबोन रत्चाथानी और सिसकेट प्रांतों में कई ठिकानों पर गोलीबारी कर रही है।</p>
<p>इस बीच कंबोडिया की ओर से भी हताहतों की संख्या की पुष्टि की गई है। कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय की अवर सचिव और प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल माले सोचेता ने गुरुवार को बताया कि थाईलैंड के साथ सीमा संघर्ष के दौर में कम से कम 10 कंबोडियाई नागरिक मारे गए हैं और 60 अन्य घायल हुए हैं। सोचेता ने प्रेस ब्रीफींग में कहा, मारे गए 10 नागरिकों में एक बच्चा भी है, और 60 नागरिक घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि कंबोडिया-थाईलैंड सीमा संघर्ष रविवार दोपहर से फिर से भड़क उठा और गुरुवार सुबह तक जारी बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि थाई सेना कंबोडियाई क्षेत्र में कई स्थानों पर तोप के गोले दाग़ रही है। </p>
<p>कंबोडिया के गृह मंत्रालय ने बुधवार रात जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 56,000 से अधिक परिवारों के करीब 1,90,000 नागरिकों को  सुरक्षित शरण के लिए अपने घरों को छोडऩा पड़ा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 12:35:55 +0530</pubDate>
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