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                <title>Sriharikota - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Sriharikota RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>SSLV के पहले चरण के बेहतर संस्करण का सफल परीक्षण,  600 से अधिक अलग-अलग मानकों की जांच  : ISRO</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा में छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के पहले चरण (एसएस1) के उन्नत संस्करण का सफल जमीनी परीक्षण पूरा कर लिया है। इस सुधार से रॉकेट की क्षमता में लगभग 100 किलोग्राम अतिरिक्त पेलोड ले जाने की बढ़ोतरी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-improved-version-of-first-stage-of-sslv/article-162814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/isro2.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने वाले रॉकेट एसएसएलवी के पहले चरण के बेहतर संस्करण का जमीनी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसरो के अनुसार, यह परीक्षण 11 अगस्त को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में किया गया। परीक्षण के दौरान रॉकेट के पहले चरण में इस्तेमाल होने वाली ठोस मोटर को जमीन पर चलाकर उसके प्रदर्शन की जांच की गयी।</p>
<p>एसएसएलवी के पहले चरण एसएस1 में कई सुधार किए गए हैं। इनमें मोटर के दो हिस्सों में ईंधन के जलने की गति बढ़ाना, गर्मी से बचाने वाली सुरक्षा प्रणाली में सुधार और नोजल की निर्माण प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है। इसके साथ ही मोटर का वजन भी कम किया गया है। इसरो ने बताया कि परीक्षण के दौरान 600 से अधिक अलग-अलग मानकों की जांच की गयी। इनमें मोटर के शुरू होने, ईंधन के जलने, उसकी मजबूती, तापमान, कंपन और आवाज से जुड़े पहलू शामिल थे।</p>
<p>परीक्षण से मिले आंकड़ों के अनुसार मोटर का प्रदर्शन इसरो के अनुमान के काफी करीब रहा। इस परीक्षण के सफल होने के साथ एसएसएलवी के पहले चरण में किए गए सुधारों को मंजूरी मिल गयी है। इसरो के मुताबिक, बेहतर एसएस1 को एसएसएलवी में शामिल किए जाने के बाद यह रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा में करीब 100 किलोग्राम अधिक वजन के उपग्रह ले जा सकेगा। एसएसएलवी को इसरो ने छोटे उपग्रहों को कम समय में और जरूरत के मुताबिक अंतरिक्ष में भेजने के लिए विकसित किया है। यह रॉकेट दो सफल विकासात्मक उड़ानें पूरी कर चुका है।</p>
<p>इसरो ने एसएसएलवी की तकनीक भारतीय कंपनियों को देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके तहत भविष्य में एसएसएलवी का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा और छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने की सेवाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। इसरो इस वर्ष के अंत में तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम स्थित देश के दूसरे और नये अंतरिक्ष केंद्र से पहला एसएसएलवी मिशन प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है। यह अंतरिक्ष केंद्र मुख्य रूप से एसएसएलवी मिशनों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 14:20:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन की उल्टी गिनती शुरू, सोमवार सुबह 10:17 बजे पर होगा लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीहरिकोटा में पीएसएलवी-सी62 से ईओएस-एन1 सहित 15 उपग्रहों के प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू। यह इसरो का नए साल का पहला लॉन्च होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/countdown-for-pslv-c62eos-n1-mission-will-start-at-1017-am-on/article-139216"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/isro-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। आंध्रप्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र में पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1'पृथ्वी अवलोकन उपग्रह' अभियान और 15 अन्य उपग्रहों के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती रविवार सुबह शुरू हो गयी है। यह मिशन सोमवार सुबह 10:17 पर यह श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा।नये साल में इसरो का यह पहला लॉन्च होगा। ईओएस-एन1, जिसे अन्वेषा भी कहा जाता है, एक भारतीय हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट है, जिसे डीआरडीओ ने रणनीतिक रक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ कृषि, शहरी मानचित्रण और पर्यावरण मूल्यांकन में नागरिक निगरानी के लिए बनाया है।</p>
<p>इसरो ने कहा कि प्रक्षेपण प्राधिकरण बोर्ड (एलएबी) की मंजूरी मिलने और मिशन तैयारी समीक्षा (एमआरआर) से प्रक्षेपण की अनुमति मिलने के बाद, रविवार दोपहर 12:17 बजे 22 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो गयी। इस अवधि के दौरान चार चरणों वाले इस रॉकेट में प्रणोदक (ईंधन) भरा जायेगा। </p>
<p>इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर  कहा, मिलिए पीएसएलवी-सी62 से - यह क्कस्रुङ्क की 64वीं उड़ान और पीएसएलवी-डीएल संस्करण का 5वां मिशन है। रॉकेट की मुख्य विशेषताएं: ऊंचाई 44.4 मीटर, उड़ान द्रव्यमान 260 टन, 4 चरण। इसरो ने कहा कि वाहन और उपग्रहों के एकीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है और प्रक्षेपण-पूर्व जांच और अंतिम जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी रही हैं। पीएसएलवी-सी62 मिशन सोमवार  सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। </p>
<p>पीएसएलवी 44.4 मीटर ऊंचा और 260 टन उड़ान द्रव्यमान वाला चार चरणों वाला रॉकेट है, जो ठोस और तरल प्रणोदकों (ईंधन) से संचालित होता है। यह इसरो का बहुमुखी, सबसे भरोसेमंद और सबसे अधिक काम आने वाला प्रक्षेपण यान है। ईओएस-एन1 और 14 अन्य उपग्रहों को 505 किमी की ऊंचाई पर 97.5 डिग्री के झुकाव के साथ सूर्य तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जायेगा, जबकि केआईडी कैप्सूल को पुन: प्रवेश पथ पर भेजा जायेगा।</p>
<p>ईओएस-एन1 और 14 उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित करने के बाद पीएस4 चरण (चौथे चरण) को गति कम करने के लिए फिर से चालू किया जायेगा, ताकि वह पुन: प्रवेश पथ पर आ सके। इसके बाद केआईडी कैप्सूल को अलग किया जायेगा। पीएस4 चरण और केआईडी कैप्सूल दोनों ही पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश करेंगे और दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरेंगे।</p>
<p>पीएसएलवी-सी62 मिशन इसरो की चलाई जाने वाली सबसे लंबी उड़ानों में से एक है। रॉकेट की उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद इसके चौथे चरण का इंजन बंद कर दिया जायेगा और करीब एक मिनट तक जड़त्वीय गति से आगे बढ़ेगा और उड़ान भरने के करीब 17 मिनट बाद भारतीय उपग्रह 'अन्वेषा/ईओएस-एन1' और 14 अन्य उपग्रहों को अलग कर दिया जायेगा।</p>
<p>इस मिशन में छोड़े जाने वाले दिलचस्प उपग्रहों में से एक 'आयुलसैट' होगा, जिसे भारतीय कंपनी 'ऑर्बिटएड' ने विकसित किया है, जो अंतरिक्ष यानों के लिए एक प्रकार का 'अंतरिक्ष ईंधन टैंकर' है। पृथ्वी की कक्षा में ईंधन भरने की इस सुविधा से चक्कर लगा रहे उपग्रहों का जीवनकाल बढ़ जाएगा, जिससे कुल लागत और अंतरिक्ष कचरे दोनों में कमी आयेगी। इसरो ने कहा कि यह न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) संचालित 9वां समर्पित वाणिज्यिक मिशन है, जिसके तहत उपयोगकर्ता के लिए ईओएस-एन1 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का निर्माण और प्रक्षेपण किया जा रहा है। इसके साथ ही, इसके माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के 14 अन्य उपग्रहों को भी प्रक्षेपण सेवायें दी जा रही हैं।</p>
<p>पीएसएलवी-सी62 मिशन के दौरान एक स्पेनिश स्टार्टअप केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर का भी प्रदर्शन किया जायेगा, जो उस स्टार्टअप के विकसित किये जा रहे पुन: प्रवेश यान के एक छोटे पैमाने का प्रोटोटाइप है। केआईडी अलग होने वाला अंतिम  उपग्रह होगा, जिसके बाद इसे पृथ्वी के वायुमंडल में पुन: प्रवेश करने और दक्षिण प्रशांत महासागर में गिरने के लिए निर्धारित किया गया है। इस प्रक्षेपण में पीएसएलवी-डीएल संस्करण का उपयोग किया जायेगा, जिसमें ठोस ईंधन वाले दो 'स्ट्रैप-ऑन' मोटर लगे होंगे। यह पीएसएलवी-डीएल संस्करण का पांचवां मिशन होगा। यह मिशन पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी। पीएसएलवी प्रक्षेपण यान ने अब तक 63 उड़ानें पूरी की हैं। इनमें चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान), आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट मिशन जैसे उल्लेखनीय अभियान शामिल हैं।</p>
<p>वर्ष 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के कई महत्वपूर्ण मिशनों की तैयारी के बीच हाल के वर्षों में मिले कुछ झटकों के बाद इन आगामी प्रक्षेपणों का महत्व और भी बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 18:25:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एस. सोमनाथ ने कहा, इसरो का अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण वाहन 'सूर्या' को मिलेगी नई पहचान, जानें कैसे?</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो का नेक्स्ट जनरेशन लॉन्च व्हीकल 'सूर्या' (NGLV) पुन: उपयोग योग्य तकनीक से लैस होगा। ₹8,240 करोड़ की लागत से बनने वाला यह रॉकेट 30 टन भार ले जाने में सक्षम होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/s-somnath-said-isros-next-generation-launch-vehicle-surya-will/article-138466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/isro-surya.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अगले पीढ़ी के प्रक्षेपण वाहन (एनजीएलवी), जिसे अनौपचारिक रूप से 'सूर्या' नाम दिया गया है, को पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य और मॉड्यूलर डिजाइन वाला रॉकेट बनाया जा रहा है जो मौजूदा रॉकेट्स की तुलना में काफी अधिक पेलोड क्षमता वाला होगा। यह जानकारी पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने दी। एनजीएलवी को ठोस ईंधन मोटर्स की जगह पूर्ण रूप से तरल प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित बनाया जा रहा है। एस. सोमनाथ के अनुसार, नए इंजनों को बड़ा आकार, नई तकनीक और थ्रॉटलिंग क्षमता वाला बनाना पड़ रहा है, इसलिए मौजूदा वेंडरों का उपयोग नहीं किया जा सका।</p>
<p>यह तीन-चरण वाला रॉकेट अपनी पहली दो स्टेजों में क्लस्टर्ड एलओएक्स-मीथेन इंजनों का उपयोग करेगा, जबकि तीसरी स्टेज क्रायोजेनिक होगी। पूर्ण समन्वय में इसका लिफ्ट-ऑफ वजन करीब 1,000 टन होगा और यह निचली पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में 30 टन तक पेलोड ले जा सकेगा। एनजीएलवी का विकास 8,240 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से हो रहा है, जिसमें तीन विकासात्मक उड़ानें, बुनियादी ढांचा और लॉन्च अभियान शामिल हैं। </p>
<p>रॉकेट के बड़े आकार के कारण प्रमुख कंपोनेंट्स का निर्माण श्रीहरिकोटा लॉन्च साइट के पास ही किया जाएगा, क्योंकि इन्हें सड़क से लाना संभव नहीं होगा। इसरो ने उद्योग भागीदारी मॉडल अपनाया है, जिसमें साझेदार लंबे अनुबंध के तहत उत्पादन सुविधाएं स्थापित करेंगे। उन्होंने बताया कि सही साझेदार चुनना महत्वपूर्ण है, जो निवेश और जोखिम लेने में सक्षम हों। इस दिशा में कई संभावित साझेदारों से चर्चा चल रही है।</p>
<p>वर्तमान में इसरो की प्रक्षेपण क्षमता सीमित है, क्योंकि एलवीएम3 का उत्पादन सालाना सिर्फ 2-3 रॉकेट्स तक है। तरल इंजनों से उत्पादन तेज होगा। एनजीएलवी उपग्रह नक्षत्रों, संचार उपग्रहों, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और भविष्य के चंद्र मानव मिशनों के लिये लाभकारी साबित होगा। एस. सोमनाथ ने चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने के लिए मॉड्यूलर दृष्टिकोण को सबसे लागत-प्रभावी बताया, जिसमें पहले मानवरहित फिर मानवयुक्त मिशन शामिल होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 17:34:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इसरो ने एसएसएलवी के उन्नत तीसरे चरण का सफल स्थैतिक परीक्षण किया</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो ने SSLV के तीसरे चरण (SS3) के उन्नत संस्करण का स्थैतिक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इस नए डिजाइन से रॉकेट की पेलोड क्षमता 90 किलोग्राम बढ़ गई है, जिससे छोटे उपग्रह प्रक्षेपण और प्रभावी होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-conducts-static-test-of-advanced-third-stage-of/article-137907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/isro.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार को छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के तीसरे चरण (एसएस3) के उन्नत संस्करण का सफलतापूर्वक 'स्थैतिक परीक्षण' किया। यह परीक्षण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) में हुआ। एसएसएलवी इसरो का नया रॉकेट है। यह तीन चरणों वाला पूरी तरह ठोस ईंधन से चलने वाला उपग्रह प्रक्षेपण यान है, जो 500 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम है। इसका तीसरा (ऊपरी) चरण रॉकेट को लगभग चार किमी प्रति सेकंड की गति देता है। इसमें हल्का लेकिन मजबूत कंपोजिट मोटर केस और विशेष नोजल डिजाइन है, जिससे इसका वजन कम हो जाता है।</p>
<p>इस रॉकेट के तीसरे चरण में 'कार्बन-एपॉक्सी मोटर केस' इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसका वजन काफी कम हुआ है और यान की पेलोड क्षमता 90 किलोग्राम तक बढ़ गयी है। साथ ही, इग्नाइटर और नोजल सिस्टम में सुधार किया गया है, जिससे प्रणाली अधिक प्रभावी और मजबूत बनी है।</p>
<p>नोजल नियंत्रण के लिए कम बिजली खपत वाली 'इलेक्ट्रो-मैकेनिकल' प्रणाली का उपयोग किया गया है। उच्च मजबूती वाला कार्बन फाइबर से बना मोटर केस विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में तैयार किया गया, जबकि सॉलिड मोटर की ढलाई एसडीएससी में की गयी। परीक्षण के दौरान मोटर में 233 से अधिक मापक उपकरण लगाये गये थे, जिनसे दबाव, धक्का, तापमान, कंपन और नियंत्रण प्रणाली के मापदंड अंकित किये गये। 108 सेकंड के परीक्षण समय में सभी पैरामीटर अनुमान के बहुत करीब पाये गये।</p>
<p>इस सफल परीक्षण के बाद, एसएस3 मोटर का उन्नत संस्करण उड़ान में इस्तेमाल के लिए योग्य घोषित कर दिया गया है। इस वर्ष देश में सॉलिड मोटर निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए कई नयी सुविधाएं शुरू की गयीं। जुलाई 2025 में श्रीहरिकोटा में सॉलिड मोटर उत्पादन सुविधाएं शुरू की गयीं। इसके अलावा, सितंबर 2025 में केरल के अलुवा स्थित अमोनियम परक्लोरेट संयंत्र में दूसरी उत्पादन लाइन शुरू की गयी, जिससे सॉलिड मोटर के लिए जरूरी अमोनियम परक्लोरेट का उत्पादन दोगुना हो गया।</p>
<p>इस साल एसडीएससी में 10 टन क्षमता वाला स्वदेशी 'वर्टिकल मिक्सर' भी शुरू किया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा 'सॉलिड प्रोपेलेंट मिक्सिंग उपकरण है। एसडीएससी की सॉलिड मोटर उत्पादन और परीक्षण सुविधाओं में एक भारतीय स्पेस स्टार्ट-अप द्वारा विकसित प्रक्षेपण यान के पहले कक्षीय प्रक्षेपण के लिए सॉलिड मोटर भी बनायी और परखी गयी। इसरो ने उस कंपनी का नाम नहीं बताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 16:56:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ISRO के एलवीएम-3 प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू, बुधवार को होगा लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो का एलवीएम3-एम6 रॉकेट बुधवार सुबह श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होगा। यह 6.5 टन का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एलईओ में स्थापित करेगा, जो अब तक का सबसे भारी वाणिज्यिक पेलोड है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-lvm3-launch-countdown-begins-today-at-855-am-launch/article-136878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro-harikota.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। नैस्डैक में सूचीबद्ध एएसटी स्पेसमोबाइल इंक के 6.5 टन के ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह को ले जाने वाले भारत के एलवीएम3-एम6 रॉकेट के बुधवार सुबह होने वाले प्रक्षेपण की उलटी गिनती मंगलवार सुबह लगभग 8.55 बजे शुरू होने की उम्मीद है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह मिशन एलवीएम3 की छठी परिचालन उड़ान है।</p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ने बताया है कि एलवीएम3 बुधवार को सुबह 8:24 बजे श्रीहरिकोटा के दूसरे प्रक्षेपण पैड से उड़ान भरेगा। मिशन शुरू होने के लगभग 16 मिनट बाद, 43.5 मीटर ऊँचा और 640 टन वजनी यह प्रक्षेपण यान ब्लूबर्ड-6 उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित कर देगा। यह एलईओ में स्थापित किया गया अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह होगा और भारतीय धरती से एलवीएम3 द्वारा प्रक्षेपित किया गया सबसे भारी पेलोड होगा। उलटी गिनती के दौरान, रॉकेट के तरल और क्रायोजेनिक चरणों में प्रणोदक भरे जाएंगे और इसके सिस्टम की अंतिम जांच की जाएगी।</p>
<p>आईएसआरओ द्वारा विकसित एलवीएम3 एक तीन-चरण वाला भारी-भरकम वाहन है, जिसमें दो एस200 सॉलिड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर, एक एल 110 लिक्विड कोर स्टेज और एक सी25 क्रायोजेनिक अपर स्टेज शामिल हैं। इसका लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान 640 टन, ऊंचाई 43.5 मीटर और भूतुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में 4,200 किलोग्राम पेलोड ले जाने की क्षमता है। </p>
<p>अपने पिछले मिशनों में, एलवीएम3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और दो वनवेब मिशनों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है, जबकि सबसे हालिया एलवीएम3 मिशन, एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03, 2 नवंबर, 2025 को सफलतापूर्वक पूरा हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 11:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा ISRO का 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[15 दिसंबर सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो श्रीहरिकोटा से अपना सबसे भारी अमेरिकी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट, 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6 लॉन्च करने वाला है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-65-tonne-blue-bird-6-to-be-launched-from-sriharikota/article-135633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sri-harikota.png" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा। 15 दिसंबर सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो श्रीहरिकोटा से अपना सबसे भारी अमेरिकी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट, 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6 लॉन्च करने वाला है और इसके साथ ही शुरूआत होगी अतंरिक्ष सहयोग के नए अध्याय की। इस कमर्शियल सैटेलाइट के लॉन्च होने से भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मिशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि LVM3—जिसे इसकी क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ रॉकेट भी कहा जाता है, अमेरिका की टेक्सास-आधारित कंपनी AST SpaceMobile द्वारा निर्मित किया गया है और इस उपग्रह को कक्षा में पहुंचाएगा। AST का लक्ष्य अंतरिक्ष आधारित मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दुनिया के दूरदराज इलाकों में भी सीधे मोबाइल डिवाइस तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा।</p>
<p>इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इस मिशन के बारे में बताया कि यह सैटेलाइट अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल एंटीना लेकर जाएगा, जो वैश्विक संचार प्रणाली में क्रांति ला सकता है। उन्होंने कहा कि सफल प्रक्षेपण के बाद वहां भी नेटवर्क कवरेज मिलना शुरू हो जाएगा, जहां फिलहाल नेटवर्क कवरेज लगभग न के बराबर है। इसी बीच खबर समाने आ रही है कि अमेरिका द्वारा भारत पर कई उत्पादों पर उच्च टैरिफ लगाए जाने के बावजूद दोनों देशों का अंतरिक्ष सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। यह मिशन न केवल भारत की लॉन्चिंग क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा, बल्कि वैश्विक सैटेलाइट बाजार में इसरो की पकड़ को भी और सशक्त करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 16:25:18 +0530</pubDate>
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