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                <title>Rajya Sabha Debate - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Rajya Sabha Debate RSS Feed</description>
                
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                <title>संसद में बजट संग्राम: राज्यसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने लगाया बजट में जरूरतमंदों का ध्यान न रखने का आरोप, सत्तापक्ष ने कहा-आम लोगों की चिंता कर रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में वित्त विधेयक 2026 पर तीखी बहस हुई। विपक्ष ने कॉरपोरेट टैक्स में कमी और आम जनता पर बढ़ते बोझ का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। वहीं, भाजपा ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कटौती को जनहितैषी बताया। तृणमूल और द्रमुक ने आर्थिक असमानता और चुनावी राजनीति पर सवाल उठाते हुए सब्सिडी में कटौती की आलोचना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/during-the-discussion-in-rajya-sabha-the-opposition-accused-the/article-148130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/delhi-parliament.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में शुक्रवार को वित्त विधेयक, 2026 ओर विनियोग (संख्या-2) विधेयक, 2026 पर एक साथ चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर बजट में जरूरतमंदों की अनदेखी करने का आरोप लगाया जबकि सत्तापक्ष ने कहा कि सरकार आम लोगों की चिंता कर रही है। गुजरात से कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि वित्त विधेयक में सरकार ने जरूरतमंदों, किसानों और महिलाओं का ध्यान नहीं रखा है। वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के हवाले से उन्होंने कहा कि जहां आयकर के प्राप्त राजस्व 26 प्रतिशत बढ़ा था वहीं सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में कॉरपोरेशन कर में कमी आयी है। इसका मतलब है कि कर का बोझ आम लोगों पर डाला जा रहा है और उद्योगों को राहत दी जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक में साल 2047 तक गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्टी सिटी को कर में छूट दी गयी है, जहां बड़े-बड़े लोग रहते हैं, लेकिन आम लोगों की, किसानों और महिलाओं को कोई राहत नहीं दी गयी है। कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए श्री गोहिल ने आरोप लगाया कि सरकार उपकर और अधिभार लगाकर घोषित उद्देश्य से इतर उसका इस्तेमाल कर रही है। भाजपा के संजय सेठ ने कहा कि भारत इस समय सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। आज पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिये गये हैं जबकि भारत में उत्पाद शुल्क कम करके इनके दाम नहीं बढ़ने दिये गये हैं। यह दिखाता है कि सरकार आम लोगों की चिंता कर रही है। उन्होंने कहा कि आयकर देने वालों की संख्या बढ़ रही है जो सरकार में लोगों के विश्वास को दिखाता है। सरकार ने "कर आतंकवाद" को समाप्त कर व्यवसायियों को कर मुक्त किया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि उत्पाद शुल्क में कटौती इसलिए की गयी है कि क्योंकि चार राज्यों में चुनाव हैं। यदि सरकार आम लोगों के बारे में सोचती तो पिछले चार साल से रूस से कम कीमत पर कच्चा तेल की खरीद का लाभ उन्हें देती जो नहीं किया गया। उन्होंने वित्त मंत्री से इस बात का आश्वासन मांगा कि चुनाव समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल की कीमत नहीं बढ़ायी जायेगी। उन्होंने संसद का सत्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री के बयान जारी करने के बाद संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा न करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को इतनी ही चिंता होती तो रसोई गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये नहीं बढ़ाये जाते।</p>
<p>तमिलनाडु से द्रमुक के पी. विल्सन ने कहा कि बजट में आर्थिक असमानता कम करने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। एक तरफ धनाढ्य लोगों की संपत्ति बढ़ रही है और दूसरी तरफ भुखमरी की रैंकिंग में भारत लगातार नीचे गिर रहा है। खाद्य सब्सिडी, ईंधन पर सब्सिडी और उर्वरक सब्सिडी कम की जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीब कल्याण पर खर्च कम करके और आम लोगों पर बोझ डालकर राजकोषीय घाटा कम करना गलत है। उन्होंंने कहा कि देश की आम गृहणी राजकोषीय घाटे का आंकड़ा नहीं देखती, वह चावल की कीमत  खती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र पर संसाधनों के आवंटन में तमिलनाडु के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि कई फंड सिर्फ कागज पर हैं, लेकिन राज्य सरकार को कोई पैसा नहीं मिला है। पिछले पांच साल में राज्य को कुछ भी नहीं दिया गया है जिसका जवाब विधानसभा चुनाव में जनता देगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 17:16:41 +0530</pubDate>
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                <title>केंद्र सरकार का विपक्ष पर हमला, चुनाव सुधार मुद्दों पर लगाया गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा में चुनाव सुधारों पर गुरुवार को सत्ता और विपक्ष में तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दुरुपयोग और संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने कांग्रेस को सुधारों की अनदेखी और हार पर आयोग को कठघरे में खड़ा करने के लिए जिम्मेदार बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-attacks-opposition-and-makes-serious-allegations-on-election/article-135664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sudansu.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला जिसमें केंद्र सरकार ने जहां कांग्रेस पर चुनाव सुधारों पर कभी ध्यान नहीं देने तथा चुनाव आयोग को सुविधानुसार अच्छा बुरा बताने का आरोप लगाया वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं के दुरूपयोग तथा उन्हें कमजोर करने का आरोप लगाया। </p>
<p>कांग्रेस के अजय माकन ने राज्यसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा की शुरूआत करते हुए जीवंत लोकतंत्र के लिए समान अवसर, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि 2004 में केंद्र सरकार के बैंक खाते में 88 करोड़ रुपए थे और कांग्रेस के खाते में 38 करोड़ रुपए थे। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार के खाते में 150 तो कांग्रेस के खाते में 221 करोड़ रुपये थे। वर्ष 2024 में केंद्र सरकार के खाते में 10 हजार 107 करोड़ रुपये हो गये तो कांग्रेस के खाते सीज कर दिये गये। </p>
<p>इसके आगे माकन ने कहा, पारदर्शिता की बात करें तो हरियाणा में चुनाव में वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े बदलते रहे। जब सीसीटीवी फुटेज की मांग की गयी, तो सरकार ने दस दिन के अंदर नियम बदल दिया और कहा कि 45 दिन के बाद फुटेज नहीं दिया जा सकता।    विश्वसनीयता के मामले में उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे अपनी विश्वसनीयता बहाल करनी होगी। उन्होंने कहा, अगर अंपायर ही एक टीम की जर्सी पहन लेगा तो दूसरी टीम क्या करेगी? अंपायर ही अगर मैच फिक्स कर लेगा तो खिलाड़ी क्या करेगा? </p>
<p>अजय माकन ने कहा कि सरकार ने कानून बदलकर चुनाव आयुक्तों को पूरी तरह से संरक्षण दे दिया है और वे कितना भी पक्षपात करें, कोई उनके ऊपर उंगली नहीं उठा सकता। उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। अजय माकन ने आरोप लगाया कि चुनाव आचार संहिता केवल विपक्ष पर लागू की जाती है सत्ता पक्ष पर नहीं। इस मामले में उन्होंने हिमाचल प्रदेश और विधानसभा चुनावों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, विपक्ष करे तो 'रेवड़ी' और आचार संहिता का उल्लंघन, मगर पक्ष करे तो 'जनकल्याण' ये दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।</p>
<p>केंद्र सरकार के सुधांशु त्रिवेदी ने भारत को लोकतंत्र की जननी करार देते हुए कहा कि समूचे पूर्वी गोलाद्र्ध में अकेला भारत ही लोकतंत्र का मजबूत आधार स्तंभ है। उन्होंने कांग्रेस पर अपने शासनकाल में चुनाव सुधारों की ओर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस देश में चुनावी धांधली की सबसे पहली याचिका 21 अप्रैल 1952 में स्वयं बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने दायर की थी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की चुनावी जीत का मामला भी अदालत में पहुंच गया लेकिन कांग्रेस ने कभी चुनाव सुधारों पर बात नहीं की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब जब चुनाव जीतती है तो वह चुनाव आयोग पर कोई सवाल नहीं करती लेकिन चुनाव हारने पर चुनाव आयोग को सवालों के घेरे में खड़ा कर देती है। </p>
<p>उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि देश में कम्यूटर युग की शुरूआत करने का दावा करने वाली कांग्रेस अब क्वांटम युग में आते आते पर्ची से चुनाव कराने पर जोर दे रही है। कांग्रेस द्वारा मतदान केन्द्रों की सीसीटीवी फुटेज मांगे जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सीसीटीवी का इस्तेमाल वर्ष 2005 में शुरू हुआ था और इसके बाद से राजद और कांग्रेस को बिहार में अकेले बहुमत नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का काम केवल बवाल खड़ा करना है और उसे कानूनी प्रक्रिया से कुछ लेना देना नहीं। प्रक्रिया के अनुसार उसे 45 दिन में शिकायत कर फुटेज मांगनी चाहिए। कांग्रेस के वोट चोरी के आरोप पर साल दर साल चुनावों में कांग्रेस के वोट कम होने के आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास वोट ही नहीं है तो चोरी किस चीज की होगी। </p>
<p>सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वोट कम होने के बाद अब कांग्रेस ने ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा छोड़ दिया है और वोट चोरी का मुद्दा उठा लिया है। उन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष पद के आतंरिक चुनावों में अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए उसे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि वोट चोरी की बात करने वाली कांग्रेस इस बात को भूल जाती है कि 1946 में पार्टी के आंतरिक चुनाव में पंडित जवाहर लाल नेहरू जीरो वोट पाने के बावजूद जीत गये। </p>
<p>इसके आगे सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 1916 में पृथक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए समझौता करने वाली कांग्रेस अब घुसपैठियों के लिए प्रथक निर्वाचन क्षेत्र बनाने की कोशिश में लगी है। सुधांशु त्रिवेदी ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अगस्त 2005 में घुसपैठियों के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष की ओर फाइल फेंक दी थी और आज उनका रूख एकदम अलग है। उन्होंने कहा कि विपक्ष हमेशा गलत काम करने वालों के साथ ही खड़ा दिखाई देता है। </p>
<p>कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढते दुरूपयोग का हवाला देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने सुझाव दिया कि भविष्य में चुनावों से पहले सरकार को एआई सिग्नेचर को प्रमाणित करने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव में गंभीर प्रत्याशी ही हिस्सा लें इसके लिए उम्मीदवार के प्रस्तावकों की संख्या बढानी होगी। उन्होंने कहा कि चुनावी भाषणों में अनाप शनाप बयानबाजी और चुनावी वादों से भ्रम फैलाने पर भी रोक लगाई जानी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 18:56:58 +0530</pubDate>
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