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                <title>tribunal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राम मंदिर चंदा विवाद गरमाया: अयोध्या में कथित घोटालों पर कांग्रेस का केंद्र पर निशाना, SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर निर्माण और चंदे में संगठित लूट का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए एसआईटी (SIT) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गायब हुई 1200 राम शिलाओं सहित पूरे मामले की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से समयबद्ध जांच की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ram-temple-donation-controversy-heated-up-misuse-of-money-raised/article-157174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ram-mandir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर में चंदे में कथित घोटाले की उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में समयबद्ध जांच कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि अयोध्या में जमीन, निर्माण और चंदे से जुड़े सभी कथित घोटालों के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और पार्टी नेता आराधना मिश्रा ने मंगलवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि अयोध्या में शुरू से ही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जमीन के सौदों को लेकर विवाद हुए, फिर मंदिर निर्माण को लेकर सवाल उठे और अब चंदे में कथित घोटाले का मामला सामने आया है, जिससे लोगों की आस्था को गहरा आघात पहुंचा है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लोगों की आस्था के साथ छल किया है तथा धर्म के नाम पर सौदा किया जा रहा है। उनका कहना था कि श्रीराम जन्मभूमि को लेकर सामने आ रही जानकारियां दर्शाती हैं कि एक संगठित लूट हुई है, जिसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं और इसकी ओर इशारा भाजपा के पूर्व सांसद भी कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष पूर्व नौकरशाह नृपेंद्र मिश्रा को बनाया गया। ट्रस्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को प्रमुख जिम्मेदारियां दी गईं, जिनमें चंपत राय और अनिल मिश्रा भी शामिल हैं। ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग पहले भी विवादों में रहे हैं और इस पूरे मामले की जवाबदेही केंद्र सरकार पर बनती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन यह स्वीकार करने जैसा है कि मामले में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि पहले शिलापूजन के नाम पर बड़े पैमाने पर धन एकत्र किया गया, जिसका कोई लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि 1400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के दुरुपयोग के आरोप हैं और विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल के समय एकत्र की गई धनराशि का भी हिसाब सामने आना चाहिए।</p>
<p>उनका कहना था कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों ने लोगों की आस्था और भगवान को चढ़ाये गए धन का दुरुपयोग किया है। उनका कहना था कि अयोध्या में संगठित तरीके से लूट हुई है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने एसआईटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी निगरानी ऐसे अधिकारी को सौंपी गई है, जिनके खिलाफ महाकुंभ में हुई भगदड़ से जुड़े मामले में जांच चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल खानापूर्ति कर रही है। उनका कहना था कि एसआईटी की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक की जानी चाहिए और पूरे मामले की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की देखरेख में करायी जानी चाहिये।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में शंकराचार्यों तथा अन्य प्रमुख धार्मिक नेताओं को भी स्थान दिया जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राम जन्मभूमि परिसर के आसपास भूमि आवंटन और निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं, लेकिन उनकी जांच का परिणाम सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पहली बरसात में ही मंदिर परिसर में पानी टपकने और जमीन धंसने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने दावा किया इधर 1200 राम शिलाओं के गायब होने की बात सामने आ रही है और इन सभी मामलों की समग्र जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा ने हमेशा प्रभु राम के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल किया है और अयोध्या में सामने आए सभी कथित घोटालों की निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच कर सच्चाई देश के सामने लायी जानी चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 18:34:03 +0530</pubDate>
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                <title>जुलाई 2016 से नियुक्ति नहीं, कैसे हो वीरांगनाओं की सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  जयपुर। सैन्य विधवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के मामलों की सुनवाई के लिए भले ही अलग से सशस्त्र सेना अधिकरण बना हुआ है, लेकिन इसमें पिछले करीब साढ़े पांच साल से न्यायिक सदस्य की नियुक्ति नहीं होने के चलते इनके मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। न्यायिक सदस्य के रूप में यहां तैनात रही हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मीना वी. गोम्बर के जाने के बाद से जुलाई 2016 से यह पद खाली चल रहा है। वहीं प्रशासनिक सदस्य के तौर पर बीच-बीच में कई अधिकारियों को नियुक्त किया गया, लेकिन उन्हें अकेले मुकदमों की सुनवाई का अधिकार ही<br /><strong><br />अन्य</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/no-appointment-since-july-2016--how-to-listen-to-veterans--no-appointment-of-judicial-member-in-armed-forces-tribunal-for-five-and-a-half-years/article-4670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/amar-jawan-jayoti_new.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। सैन्य विधवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के मामलों की सुनवाई के लिए भले ही अलग से सशस्त्र सेना अधिकरण बना हुआ है, लेकिन इसमें पिछले करीब साढ़े पांच साल से न्यायिक सदस्य की नियुक्ति नहीं होने के चलते इनके मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। न्यायिक सदस्य के रूप में यहां तैनात रही हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मीना वी. गोम्बर के जाने के बाद से जुलाई 2016 से यह पद खाली चल रहा है। वहीं प्रशासनिक सदस्य के तौर पर बीच-बीच में कई अधिकारियों को नियुक्त किया गया, लेकिन उन्हें अकेले मुकदमों की सुनवाई का अधिकार ही नहीं है। जानकारी के अनुसार यहां करीब पांच हजार मुकदमों को सुनवाई का इंतजार है। <br /><strong><br />अन्य अदालतों में सुनवाई नहीं</strong><br />जयपुर एएफटी का गठन 22 जून, 2009 को हुआ था। वहीं 29 जुलाई, 2016 को इसमें न्यायिक सदस्य का पद खाली हो गया। वहीं कुछ माह बाद ही प्रशासनिक अधिकारी का पद भी रिक्त हो गया। हालांकि बीच में कई अधिकारी यहां आए, लेकिन वे मुकदमों की सुनवाई नहीं कर सके। एएफटी को तीनों सेनाओं से जुड़े सैनिकों के प्रकरणों को सुनवाई का अधिकार है। अलग से अधिकरण होने के चलते अन्य अदालतों को सैन्यकर्मियों के मामले की सुनवाई का अधिकार भी नहीं है।<br /><br /><strong>हाईकोर्ट के पूर्व जज और कर्नल रैंक का होता है सदस्य</strong><br />एएफटी में न्यायिक सदस्य के तौर पर हाईकोर्ट के पूर्व जज को नियुक्त किया जाता है। इसी तरह प्रशासनिक सदस्य के तौर पर कर्नल रैंक के पूर्व सैन्य अधिकारी को लगाया जाता है। जानकारी के अनुसार इन पदों पर नियुक्ति करने का कार्य केन्द्रीय विधि मंत्रालय को है। <br /><br /><strong>जंग में गोली खाली, पेंशन की आस में मौत</strong><br />एक सैन्यकर्मी होशियार सिंह वर्ष 1971 की लड़ाई में गोली लगने से अपंग हो गए। इसके कई सालों बाद उन्हें बिना पेंशन सेवा से हटा दिया गया। इस पर उन्होंने सितंबर 2011 में एएफटी में केस दायर किया, लेकिन सुनवाई पूरी होने से पहले की सितंबर 2017 में उनकी मौत हो गई। इस संबंध में एएफटी एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव ओमप्रकाश श्योराण ने बताया कि इस संबंध में हमने सीजेआई को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से सैन्यकर्मी, पूर्व सैन्यकर्मी और उनके आश्रितों के मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 16:33:44 +0530</pubDate>
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                <title>तबादलों से जुड़ी बड़ी खबर : उच्च पद पर किए तबादले पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण ने नर्स ग्रेड द्वितीय का तबादला उच्च पद पर करने के आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A4%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0---%E0%A4%89%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A-%E0%A4%AA%E0%A4%A6-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%A4%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95/article-2196"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/sesion-court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण ने नर्स ग्रेड द्वितीय का तबादला उच्च पद पर करने के आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अधिकरण ने प्रमुख चिकित्सा सचिव और स्वास्थ्य निदेशक सहित अन्य से जवाब मांगा है। अधिकरण ने यह आदेश रामकेश मीना की अपील पर दिए।</p>
<p><br /> अपील में अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया की अपीलार्थी करौली के राजकीय अस्पताल में नर्स ग्रेड द्वितीय के पद पर कार्यरत है। विभाग ने गत 15 सितंबर को उसका तबादला सपोटरा के हाड़ौती स्थित स्वास्थ्य केंद्र में नर्स ग्रेड प्रथम के पद पर कर दिया। अपील में कहा गया की अपीलार्थी ग्रेड द्वितीय के पद पर कार्यरत है। ऐसे में बिना पदोन्नति उसका तबादला ग्रेड प्रथम के पद पर नहीं किया जा सकता। विभाग ने मशीनी अंदाज में उसका तबादला ऐसे पद पर कर दिया, जिसे वह धारित ही नहीं करता है। ऐसे में तबादला आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगाई जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने तबादला आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 09 Nov 2021 10:47:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त को आजीनव कारावास</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने अभियुक्त पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-draft--add-your-title/article-2046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/pocso_jail.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण ने शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक की ओर से नियमों के विपरीत जाकर किए गए करीब एक दर्जन द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला आदेशों को रद्द कर दिया है। अधिकरण के चैयरमेन रविशंकर श्रीवास्तव और सदस्य मातादीन शर्मा की खण्डपीठ ने प्रेमलता शर्मा व अन्य की अपीलों पर दिए। अधिकरण ने अपने आदेश में कहा है की तबादला आदेशों को देखने से लगता है कि इनको जारी करते समय टीए नियमों की पालना नहीं की गई है।<br /> <br /> अपीलों में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने अधिकरण को बताया की शिक्षा विभाग के अजमेर मंडल के निदेशक ने गत 30 सितंबर को प्रशासनिक हित का हवाला देते हुए संभाग के करीब एक दर्जन द्वितीय श्रेणी शिक्षकों का अलग-अलग जगह तबादला कर दिया। नियमों के तहत प्रशासनिक हित में तबादला करने पर संबंधित कर्मचारियों को टीए, डीए का भुगतान किया जाता है। कर्मचारी की इच्छा पर तबादला होने पर ही इसका भुगतान नहीं किया जाता। इसके बावजूद तबादले के लिए ना तो अपीलार्थियों से उनकी इच्छा पूछी गई और ना ही उन्हें टीए, डीए का भुगतान किया गया। ऐसे में तबादला आदेशों को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने तबादला आदेशों को निरस्त कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 01 Nov 2021 13:50:59 +0530</pubDate>
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                <title>वेतन नहीं देने पर प्रमुख शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक सहित अन्य से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[प्रिंसिपल को बीते दस माह से वेतन नहीं देने का मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/6166adc690e5b/article-1647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/sesion-court.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण ने ट्रांसफर आदेश पर रोक के बाद कार्य कर रहे प्रिंसिपल को बीते दस माह से वेतन नहीं देने पर प्रमुख शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक सहित अन्य से जवाब मांगा है। अधिकरण ने यह आदेश महेन्द्र शर्मा की अपील पर दिए। अपील में अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया की जिले के रामनगर स्थित स्कूल में तैनात अपीलार्थी का तबादला गत 4 जनवरी को महात्मा गांधी स्कूल, नागौर किया गया था। जिस पर अधिकरण ने अंतरिम रोक लगाते हुए विभाग के समक्ष अभ्यावेदन देने को कहा था। वहीं विभाग ने 4 मार्च को अपीलार्थी का अभ्यावेदन खारिज कर वापस नागौर तबादला कर दिया और वहाँ उसे एपीओ कर दिया गया। दूसरी ओर इस आदेश पर भी अधिकरण ने रोक लगा दी। जिसके चलते अपीलार्थी पूर्ववर्ती स्कूल में ही तैनात रहा। अपील में कहा गया की गत जनवरी माह से उसे अब तक वेतन नहीं मिला है। जिसके चलते उसे परेशानी हो रही है। जिस पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Oct 2021 17:34:35 +0530</pubDate>
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