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                <title>Online Safety - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>तेलंगाना पुलिस की बड़ी कामयाबी : ऑनलाइन धोख़ाधड़ी के 17 मामलों में कई राज्यों से 19 आरोपी गिरफ़्तार, पूछताछ जारी</title>
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                        <![CDATA[साइबराबाद पुलिस ने देशव्यापी छापेमारी कर 17 साइबर अपराधों का पर्दाफाश किया। गिरफ्तार 19 आरोपियों में ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट के जालसाज शामिल हैं। पुलिस ने पीड़ितों को 4.35 करोड़ रुपये वापस दिलाने के अदालती आदेश भी प्राप्त किए। व्हाट्सएप निवेश समूहों से सावधान रहने की चेतावनी देते हुए हेल्पलाइन 1930 जारी की गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-success-of-telangana-police-19-accused-arrested-from-many/article-148857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/arrestedd.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के साइबराबाद की साइबर अपराध पुलिस ने 25 से 31 मार्च के बीच कई राज्यों में छापेमारी की और 17 साइबर अपराध के मामलों का खुलासा कर 19 अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान के अनुसार, पकड़े गए मामलों में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी 'ट्रेडिंग' से जुड़ी थी। ट्रेडिंग धोख़ाधड़ी के 11 मामलों में 12 गिरफ्तारियां की गईं। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट के दो मामलों में तीन, पार्ट-टाइम जॉब धोख़ाधड़ी के दो मामलों में दो और नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के दो मामलों में दो आरोपियों को पकड़ा गया है।</p>
<p>पुलिस को एक बड़ी सफलता यह भी मिली है कि उन्होंने 125 मामलों में अदालतों से 884 'रिफंड' आदेश प्राप्त किए हैं। इसके जरिए पीड़ितों को 4.35 करोड़ रुपये वापस दिलाने की प्रक्रिया आसान हुई है। इस सप्ताह के दौरान एक बड़े मामले में पुलिस ने उस ट्रेडिंग धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया, जिसमें एक पीड़ित से व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए 2.93 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। जालसाजों ने निवेश सलाहकार बनकर और मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर पीड़ित को झांसे में लिया और भारी मुनाफे के नाम पर कई बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए। इस मामले में तेलंगाना के रहने वाले दो आरोपियों शेखर और तिनेश कुमार प्रजापति को गिरफ्तार किया गया है। इन पर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है।</p>
<p>पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि वे भारी मुनाफे का वादा करने वाले ऑनलाइन निवेश समूहों पर भरोसा न करें और निवेश करने से पहले प्लेटफॉर्म की अच्छी तरह जांच कर लें। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दें।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:12:59 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>LPG गैस की कमी के दौरान बढ़ते साइबर फ्रॉड पर एडवाइजरी जारी</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान पुलिस ने खाड़ी संकट के बीच LPG फ्रॉड को लेकर एडवाइजरी जारी की है। जालसाज फर्जी वेबसाइट, KYC अपडेट और क्यूआर कोड के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। सुरक्षित रहने के लिए केवल आधिकारिक ऐप का उपयोग करें और कभी भी अपना OTP या बैंक विवरण साझा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/advisory-issued-on-increasing-cyber-fraud-during-lpg-gas-shortage/article-147081"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/rajasthan-police.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को सतर्क करने के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण LPG गैस सिलेंडर की मांग बढ़ गई है, जिसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को ठग रहे हैं।</p>
<p><strong>साइबर अपराध के प्रमुख तरीके</strong></p>
<p><strong>फर्जी LPG बुकिंग वेबसाइट</strong><br />अपराधी Indane Gas, Bharat Gas, HP Gas जैसी असली कंपनियों के नाम से मिलती-जुलती नकली वेबसाइट बनाकर बैंक डिटेल चुरा लेते हैं।<br /><strong>फर्जी कस्टमर केयर कॉल</strong><br />खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं और KYC अपडेट या कनेक्शन बंद होने का डर दिखाकर OTP/बैंक जानकारी मांगते हैं।<br /><strong>LPG सब्सिडी फ्रॉड</strong><br />SMS या WhatsApp पर लिंक भेजकर “सब्सिडी बंद होने” का झांसा दिया जाता है और आपकी निजी जानकारी चुरा ली जाती है।<br /><strong>फर्जी मोबाइल ऐप</strong><br />सोशल मीडिया या मैसेज के जरिए नकली ऐप डाउनलोड करवाकर फोन से डेटा और बैंक डिटेल चोरी की जाती है।<br /><strong> QR Code / UPI फ्रॉड</strong><br />“पेमेंट के लिए QR कोड स्कैन करें” कहकर पैसे आपके खाते से निकाल लिए जाते हैं।</p>
<p><strong> साइबर फ्रॉड से बचने के उपाय</strong></p>
<p>सिर्फ आधिकारिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करें<br />गैस बुकिंग हमेशा कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट/ऐप या IVRS कॉल से करें।<br />फर्जी कॉल और मैसेज से सतर्क रहें<br />“कनेक्शन बंद हो जाएगा” या “KYC जरूरी है” जैसे संदेशों पर तुरंत विश्वास न करें।<br />स्क्रीन शेयरिंग ऐप से बचें<br />AnyDesk और TeamViewer जैसे ऐप डाउनलोड न करें।</p>
<p><strong>सुरक्षित पेमेंट करें</strong></p>
<p>भरोसेमंद ऐप जैसे Google Pay या PhonePe का ही उपयोग करें और QR स्कैन करते समय नाम जांचें।<br />OTP और निजी जानकारी साझा न करें<br />किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, बैंक डिटेल या आधार नंबर शेयर न करें।</p>
<p><strong>शिकायत कहां करें?</strong></p>
<p>अगर आप साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो तुरंत:<br />नजदीकी पुलिस स्टेशन / साइबर पुलिस स्टेशन में</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:15:32 +0530</pubDate>
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                <title>भारत के लिए पाकिस्तान ने फिर बंद किया एयरस्पेस: एक महीने और बढ़ाई पाबंदी, भारतीय एयरलाइंस को हो रहा बड़ा घाटा</title>
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                        <![CDATA[केंद्र सरकार ने एआई-जनित डीपफेक को नियंत्रित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक कंटेंट की शिकायत पर उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-again-closes-airspace-for-india-for-one-more-month/article-143865"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/india-and-pakistan.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने भारत में रजिस्टर्ड विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद करने की समय सीमा एक महीने बढ़ा दी है। अब यह पाबंदी 23 मार्च 2026 तक लागू रहेगी। इस दौरान भारत में रजिस्टर्ड कोई भी नागरिक या सैन्य विमान पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग नहीं कर सकेगा। पाकिस्तान ने यह ऐलान तब किया है, जब मई 2025 में दोनों देशों के बीच हुए सैन्य झड़प के बाद तनाव चरम पर है। भारत ने भी पाकिस्तान में रजिस्टर्ड विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने पर रोक लगाई हुई है। इन प्रतिबंधों के कारण दोनों देशों की एयरलाइनों को लंबी रूट से उड़ान भरना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>पाक ने नोटिस जारी कर क्या कहा?</strong></p>
<p>पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ने इस संबंध में एक नया नोटिस टू एयरमेन (नोटम) भी जारी किया है। इसके अनुसार, इस दौरान सभी भारतीय-रजिस्टर्ड सिविल और मिलिट्री विमानों के पाकिस्तान के एयरस्पेस से गुजरने पर रोक रहेगी। यह बैन, जो पहली बार 23 अप्रैल, 2025 को लगाया गया था, अब लगभग 10 महीने से लागू है। पाकिस्तान ने भारतीय एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिसके बाद नई दिल्ली ने 30 अप्रैल को पाकिस्तानी एयरलाइनों पर भी इसी तरह की पाबंदियां लगा दीं।</p>
<p><strong>हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध से किसे ज्यादा नुकसान?</strong></p>
<p>हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर पाबंदी लगने के कारण दोनों देशों की एयरलाइनों को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इस कारण उनकी ऑपरेशनल कॉस्ट और फ्लाइट रूट बढ़ गए हैं। हालांकि, इसका ज्यादा नुकसान भारत को हो रहा है। इसका प्रमुख कारण भारत में हवाई उड़ानों का बाजार पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा होना है। पाकिस्तान भारत के मुकाबले काफी गरीब है और वहां ज्यादातर लोग महंगे किराए के कारण हवाई सफर नहीं कर पाते हैं। भारत के प्रमुख हवाई गंतव्यों में मध्य पूर्व के देश शामिल हैं। ऐसे में पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर जाने में भारतीय एयरलाइंस को कम खर्च करना पड़ता है।</p>
<p><strong>एयर इंडिया को सबसे ज्यादा नुकसान</strong></p>
<p>एयर इंडिया ने पिछले साल भारत सरकार को एक चिट्ठी लिखकर आशंका जताई थी कि अगर पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध 1 साल तक जारी रहता है तो इससे लगभग 600 मिलियन डॉलर का घाटा हो सकता है। उसने भारतीय सरकार से इस नुकसान की भरपाई करने का अनुरोध किया था। एयरलाइन ने सरकार से आर्थिक नुकसान के अनुपात में सब्सिडी मॉडल की मांग की थी।</p>
<p><strong>भारत पाक तनाव अब भी जारी?</strong></p>
<p>भारत और पाकिस्तान आजादी के बाद से ही एक दूसरे के दुश्मन हैं। हालांकि, अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को तहस-नहस कर दिया, बल्कि उन्हें बचाने आई पाकिस्तानी सेना को भी जबरदस्त सबक सिखाया। भारत ने सिंधु जल संधि को भी निलंबित कर दिया है और बाघा-अटारी सीमा के जरिए लोगों की आवाजाही भी प्रतिबंधित की हुई है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:33:17 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>आज से एआई वीडियो पर सख्ती AI-Generated का लेबल अनिवार्य: नए आईटी एक्ट में एआई वीडियो, फर्जी और डीपफेक कंटेंट पर लगेगी लगाम, सरकार ने 10 फरवरी को जारी किए थे नए नियम</title>
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                        <![CDATA[केंद्र सरकार ने एआई-जनित डीपफेक को नियंत्रित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक कंटेंट की शिकायत पर उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/from-today-strictness-on-ai-videos-ai-generated-label-mandatory-new/article-143863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ai-video.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वीडियो, खासकर डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट, को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने नए आईटी नियमों के तहत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों और आईटी नियम 2021 में किए गए संशोधनों के आधार पर लागू किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य एआई तकनीक के दुरुपयोग, फर्जी खबरों और डीपफेक वीडियो के प्रसार पर रोक लगाना है। भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक और भ्रामक कंटेंट के बढ़ते खतरों को देखते हुए आईटी नियम 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। फरवरी 2026 में जारी नई गाइडलाइंस के तहत एआई से बने वीडियो को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। </p>
<p><strong>एआई डीपफेक को लेकर सरकार के नए नियम</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने AI-Generated कंटेंट को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए, जिनका पालन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को करना होगा। सरकार ने 10 फरवरी को नए नियम जारी किए हैं, जो 20 फरवरी से लागू होंगे। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन किया है। इन नियमों के तहत अब अक से बने या बदले गए कंटेंट को भारत के डिजिटल कानूनों के दायरे में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>3 घंटे में हटेगा फर्जी गलत अक कंटेंट</strong></p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक या भ्रामक अक कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा। अब 36 घंटे की जगह, सिर्फ 3 घंटे में एक्शन लेना होगा। इसके अलावा 15 दिन की विंडो घटाकर 7 दिन कर दी गई है और  24 घंटे की डेडलाइन को घटाकर 12 घंटे किया गया है।</p>
<p><strong>किन वीडियो पर यह नियम नहीं लागू होंगे? </strong></p>
<p>सभी एआई वीडियो पर लेबल लगाना जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में छूट दी गई है:<br />रूटीन एडिटिंग : वीडियो की क्वालिटी सुधारने, कलर एडजस्टमेंट, बैकग्राउंड नॉइज कम करने, या क्रॉप करने जैसे मामूली बदलावों पर यह नियम लागू नहीं होगा।<br />शैक्षिक/तकनीकी उद्देश्य : यदि एआई का उपयोग केवल सीखने-सिखाने के उद्देश्य, दस्तावेज बनाने या वीडियो के तकनीकी पहलुओं (जैसे सबटाइटल) को बेहतर बनाने के लिए किया गया है और उससे कोई गलतफहमी पैदा नहीं होती है।<br />गैर-भ्रामक सामान्य सुधार: जो बदलाव कंटेंट का अर्थ नहीं बदलते, उन्हें छूट है। <br />फिल्म, वेब सीरीज या मनोरंजन के लिए बनाए गए एआई इफेक्ट्स, यदि स्पष्ट रूप से काल्पनिक हों, तो उन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।<br />व्यंग्य, पैरोडी या कलात्मक प्रस्तुति, जिसमें किसी को भ्रमित करने का इरादा न हो, नियमों के दायरे से बाहर मानी जा सकती है।<br />हालांकि, यदि इन श्रेणियों के वीडियो भी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, निजता या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उन पर कार्रवाई संभव होगी।</p>
<p><strong>नियम न मानने पर क्या होगा?</strong></p>
<p>यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा (जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स पर यूजर के कंटेंट के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं होती) छीन ली जा सकती है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर प्लेटफॉर्म्स इन नए नियमों के तहत एआई कंटेंट पर कार्रवाई करते हैं, तो धारा 79 के तहत मिलने वाली सुरक्षा उन पर लागू रहेगी यानी वे केवल यूजर के पोस्ट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराए जाएंगे।</p>
<p><strong>यह क्यों किया जा रहा है? </strong></p>
<p>डीपफेक पर लगाम: मशहूर हस्तियों और सामान्य लोगों के चेहरे/आवाज का इस्तेमाल कर बनाए जा रहे फर्जी वीडियो से देश में अव्यवस्था और बदनामी फैल रही थी।<br />पारदर्शिता: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल दुनिया में यूजर को यह पता चले कि वह असली वीडियो देख रहा है या एआई से बना नकली। </p>
<p><strong>नए आईटी नियमों (एआई वीडियो के लिए गाइडलाइन) में क्या है? </strong></p>
<p>अनिवार्य लेबलिंग : एआई या किसी अन्य तकनीक से बने फोटो, वीडियो या आॅडियो (जिसे सिंथेटिक कंटेंट कहा गया है) पर अब स्पष्ट और प्रमुख रूप से AI-Generated का लेबल लगाना अनिवार्य है।<br />3 घंटे में हटाया जाएगा : कोई एआई-जनित वीडियो या डीपफेक किसी की मानहानि करता है, अश्लील या भ्रामक है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार या कोर्ट के आदेश के बाद 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।<br />यूजर की जवाबदेही: कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को खुद बताना होगा कि क्या सामग्री एआई-जनित है। प्लेटफॉर्म्स को भी इसे चेक करना होगा।<br />अनट्रेसेबल मेटा डेटा : प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई कंटेंट में ऐसी जानकारी हो जिससे यह पता चले कि यह असली नहीं है। <br />चुनाव, दंगा, सांप्रदायिक तनाव या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भ्रामक वीडियो को तुरंत ब्लॉक किया जाए।<br />शिकायत निवारण तंत्र: हर प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा।<br />डीपफेक पर सख्ती: किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी छवि या आवाज का एआई से उपयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी।<br />बच्चों से जुड़ा कंटेंट: नाबालिगों से संबंधित एआई वीडियो पर विशेष निगरानी और त्वरित हटाने की व्यवस्था लागू होगी। बच्चों के मामले में सरकार अधिक संवेदनशील और सख्त है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:25:35 +0530</pubDate>
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                <title>श्रीलंका सरकार का बड़ा फैसला, नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर लग सकता है बैन</title>
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                        <![CDATA[ऑनलाइन कंटेंट से बढ़ती चिंताओं के बीच श्रीलंका सरकार नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच सीमित करने पर विचार कर रही है। अंतिम निर्णय नीति तय होने के बाद होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-sri-lankan-government/article-141069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। श्रीलंका की सरकार ऑनलाइन कंटेंट के हानिकारक प्रभावों से जुड़ी चिंताओं में वृद्धि के बीच सोशल मीडिया तक नाबालिग बच्चों की पहुंच सीमित करने पर विचार कर रही है। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी दुर्घटनाओं में वृद्धि के बाद विद्यार्थियों और नाबालिगों के सोशल मीडिया के उपयोग पर संभावित सीमाओं का पता लगाने के लिए चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने का निर्णय जनसंचार मंत्रालय या शिक्षा मंत्रालय के तहत आएगा। एक बार नीति को अंतिम रूप देने के बाद, अधिकारी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। </p>
<p>डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि सरकार अभी तक किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है, लेकिन देश को सोशल मीडिया कंटेंट से नाबालिग बच्चों के दिमाग को होने वाले नुकसान को संज्ञान में लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां नियंत्रण लागू करने के लिए स्थानीय दूरसंचार प्रदाताओं के साथ काम कर सकती हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि इसी तरह के उपाय पहले ही कई देशों में अपनाये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यक तकनीकी क्षमता पहले से मौजूद है और इसे श्रीलंका में लागू किया जा सकता है। </p>
<p>मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रतिबंध के लिए लागू करने से पहले एक औपचारिक सरकारी नीति और एक व्यापक योजना की आवश्यकता होगी। विश्व स्तर पर सरकारें साइबरबुलिंग, नाबालिगों के हानिकारक कंटेंट के संपर्क में आने और बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के बारे में ङ्क्षचताओं के कारण बच्चों की सोशल मीडिया मौजूदगी पर निगरानी बढ़ा रही हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण ऑस्ट्रेलिया है, जहां दिसंबर 2025 में नाबालिगों के लिए दुनिया का पहला सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू हुआ। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 16:27:56 +0530</pubDate>
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                <title>स्पेन सरकार का बड़ा फैसला, 16 साल से कम उम्र के बच्चों का सोशल मीडिया अकाउंट होगा ब्लॉक</title>
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                        <![CDATA[स्पेन सरकार सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की न्यूनतम कानूनी उम्र 14 से बढ़ाकर 16 वर्ष करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित कानून के तहत किशोर बिना अभिभावक की अनुमति अकाउंट नहीं खोल सकेंगे। सरकार 2026 तक उम्र प्रमाणन तकनीक लागू करना चाहती है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/big-decision-of-spain-government-social-media-accounts-of-children/article-135751"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/children-social-media-account.png" alt=""></a><br /><p>मैड्रिड। स्पेन सरकार सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की न्यूनतम कानूनी उम्र 16 साल करने पर विचार कर रही है। इस कानून के तहत उन्हें माता-पिता की सहमति के बिना अकाउंट खोलने की अनुमति नहीं होगी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा प्रदान करना है। </p>
<p>यह जानकारी स्पेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और सिविल सर्विस मंत्रालय ने उपलब्ध कराई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, सरकार एक ऐसा विधेयक लाने पर विचार कर रही है, जो माता-पिता की सहमति के बिना सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए 'डिजिटल एज ऑफ मैजोरिटी' को 14 से बढ़ाकर 16 कर देगा।</p>
<p>इसके आगे बयान में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद की बैठक के बाद स्पेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री ऑस्कर लोपेज ने घोषणा की, कि स्पेन उम्र प्रमाणन तकनीक का इस्तेमाल शुरू करने वाले पहले यूरोपियन युनियन (ईयू) देशों में से एक बन गया है। देश के पायलट प्रोजेक्ट की यूरोपीय आयोग और तीन दूसरे देश जांच कर रहे हैं। कानून और टूल को मंजूरी मिलने के बाद योजना को 2026 में लागू करने की उम्मीद है।</p>
<p>गौरतलब है कि, आस्ट्रेलिया ने गत 9 दिसंबर को 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक (दोनों रूस में कट्टरपंथ के लिए बैन हैं), थ्रेड्स, स्नैपचैट, टिकटॉक, एक्स, यूट्यूब, रेडिट, किक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस संदर्भ में जो सोशल मीडिया कंपनियां 16 साल से कम उम्र के उपभोक्ताओं के अकाउंट ब्लॉक नहीं करतीं उन पर 49.5 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर (अमेरिकी डॉलर 32.9 मिलियन) तक का जुर्माना लग सकता है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 15:44:10 +0530</pubDate>
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