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                <title>Bilateral Trade - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Bilateral Trade RSS Feed</description>
                
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                <title>प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दिल्ली दौरे से पहले आया बड़ा बयान: नहीं उठाएंगे ट्रूडो-हार्पर जैसा कदम, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर मुंबई पहुँच रहे हैं। पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात में एआई, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होगी। इस यात्रा का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $70 अरब तक पहुँचाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक साझेदारी को नया आयाम देना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-statement-made-before-prime-minister-mark-carneys-visit-to/article-144645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/canada-pm.png" alt=""></a><br /><p>ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी गुरुवार को भारत की आधिकारिक यात्रा पर मुंबई के लिए रवाना होंगे। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है। </p>
<p>मुंबई उनकी भारत यात्रा का पहला पड़ाव होगा, जिसके बाद वह नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच आर्थिक सहभागिता के विस्तार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में सहयोग, प्रतिभा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। </p>
<p>मार्क कार्नी की भारत यात्रा 26 फरवरी से सात मार्च तक के व्यापक हिन्द-प्रशांत दौरे का हिस्सा है, जिसमें वह ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जाएंगे। कनाडा सरकार का उद्देश्य व्यापार में विविधता लाना, कनाडाई श्रमिकों के लिए नए अवसर सृजित करना और ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, एआई तथा रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करना है।</p>
<p>भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और 2024 में कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30.8 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर (एजेंसी) कर रहे हैं, जिसके तहत 2030 तक व्यापार को दोगुना कर 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।</p>
<p>पीएम मार्क कार्नी ने कहा, एक अधिक विभाजित और अनिश्चित विश्व में, कनाडा की नयी सरकार उन बातों पर ध्यान केन्द्रित कर रही है जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं। हम एक मजबूत, अधिक स्वतंत्र और लचीली अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं, अपने व्यापार को विविध बना रहे हैं और बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित कर रहे हैं।</p>
<p>भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ भी कनाडा के मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। 2024 में कनाडा-ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6.1 अरब डॉलर रहा, जबकि जापान के साथ वार्षिक व्यापार 36.4 अरब डॉलर है। सिडनी और कैनबरा में पीएम कार्नी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज से मुलाकात करेंगे और रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, व्यापार और उन्नत प्रौद्योगिकी पर चर्चा करेंगे। वह ऑस्ट्रेलियाई संसद के दोनों सदनों को संबोधित भी करेंगे। </p>
<p>टोक्यो में वह जापान की प्रधानमंत्री तकाइची सानाए से स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज और खाद्य सुरक्षा पर साझेदारी बढ़ाने को लेकर बातचीत करेंगे। साथ ही मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त सुरक्षा और रक्षा प्रयासों पर भी चर्चा होगी। यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करते हुए घरेलू स्तर पर लचीली अर्थव्यवस्था निर्माण की कनाडा की रणनीति को रेखांकित करता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 12:45:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओमान ने दिया भारतीय निवेशकों को नये एल्युमिनियम जोन में निवेश का न्योता, द्विपक्षीय व्यापार में आएगी तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[ओमान ने नए एल्युमिनियम प्रोसेसिंग जोन में भारतीय निवेशकों को आमंत्रित किया। यह पहल सीईपीए के तहत मूल्य-वर्धित विनिर्माण और बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/oman-invites-indian-investors-to-invest-in-new-aluminum-zone/article-142766"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)9.png" alt=""></a><br /><p>ओमान। ओमान अपने प्लास्टिक क्लस्टर की सफलता को दोहराने की कोशिश के तहत भारतीय निवेशकों को नयी योजना वाले एल्युमीनियम प्रोसेसिंग जोन में हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित कर रहा है। इससे यह पहल तेजी से बढ़ रही भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी के तहत आयेगी।</p>
<p>लादायन कार्यक्रम के प्रमुख मुंधर अल-रवाहि ने यूनी(एजेंसी) से बातचीत में कहा कि ओमान एल्युमिनियम क्षेत्र के इर्द-गिर्द एक संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है। उनका कहना है कि यह नया औद्योगिक क्लस्टर कच्चे माल के निर्यात के बजाय मूल्य वर्धित प्रसंस्करण और विनिर्माण पर केंद्रित होगा।</p>
<p>तीन वर्ष पहले ओमान ने प्लास्टिक विकास जोन की शुरुआत की थी, जिसमें अब तक 28 परियोजनाओं पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इनमें से करीब 10 परियोजनाओं में उत्पादन शुरू कर चुका है या शुरू होने के करीब हैं, जबकि शेष विभिन्न चरणों में हैं। अल-रवाहि ने कहा, इसी मॉडल को अब एल्युमिनियम क्षेत्र में लागू करने की योजना है, जिसमें देश के स्मेल्टर्स को निचली श्रेणी के उद्योगों के लिए मुख्य आपूर्तिकर्ता बनाया जाएगा। </p>
<p>भारत-ओमान के बीच 2020 से अब तक निवेश प्रवाह तीन गुना बढ़कर पांच अरब डॉलर तक पहुंच गया है। धातु विनिर्माण, हरित इस्पात और अमोनिया जैसे क्षेत्र सहयोग के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं। रक्षा सहयोग के अलावा, दोनों देश अंतरिक्ष, रेयर अर्थ मिनरल्स और साइबर सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p>लादायन कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित एल्युमिनियम जोन इसी व्यापक औद्योगिक सहयोग का हिस्सा है। ओमान का मानना है कि भारतीय कंपनियां उसकी स्थापित एल्युमिनियम अवसंरचना और हरित उत्पादन की संभावनाओं का लाभ उठा सकती हैं। अल-रवाहि के अनुसार, ओमान की राजनीतिक स्थिरता, प्रतिस्पर्धी दरों पर औद्योगिक भूमि, कम बिजली लागत और यूरोप-एशिया के बीच रणनीतिक भौगोलिक स्थिति निवेशकों के लिए बड़े आकर्षण हैं। अरब सागर-खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स हब के रूप में ओमान भारतीय निर्माताओं को खाड़ी, यूरोप और अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है।</p>
<p>वर्ष 2024-25 में भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार 10.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें एल्युमिनियम वैल्यू चेन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत ओमान ने लगभग सभी उत्पादों पर शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान की है, जिससे पहले लागू 0-5 प्रतिशत के एमएफएन शुल्क समाप्त हो गए हैं। यह समझौता संयुक्त उपक्रमों और औद्योगिक सहयोग को और मजबूती देगा।</p>
<p>अल-रवाहि ने बताया कि नए एल्युमिनियम जोन में एक भारतीय साझेदार पहले ही जुड़ चुका है-मल्टी-बॉन्ड मेटल  समझौते पर आज हस्ताक्षर होंगे। जिंदल, इफको और कृभको जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां पहले से ही ओमान में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। ओमान की यह रणनीति संसाधन-आधारित उद्योगों-प्लास्टिक, एल्युमिनियम, इस्पात और अन्य क्षेत्रों में मूल्य वर्धन को बढ़ावा देने की व्यापक नीति का हिस्सा है, जिससे वह केवल कच्चे माल या हाइड्रोकार्बन निर्यात तक सीमित न रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 15:36:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद सस्ती होगी अमेरिकी दाल? कीमतों पर पड़ेगा बड़ा असर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने "ऐतिहासिक" इंडिया-US ट्रेड डील की "मुख्य शर्तों" पर अपनी फैक्टशीट में बदलाव किया है, जिसमें यह दावा हटा दिया गया है कि नई दिल्ली "कुछ खास दालों" पर टैरिफ कम करेगी और $500 बिलियन की खरीद "कमिटमेंट" से जुड़े शब्दों में बदलाव किया गया है,]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-india-us-trade-deal-american-pulses-will-become-cheaper-there/article-142701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)9.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तथाकथित “ऐतिहासिक” इंडिया-US ट्रेड डील से जुड़ी व्हाइट हाउस फैक्टशीट में अहम बदलाव किए हैं। अपडेटेड दस्तावेज़ में उन दावों को हटा दिया गया है जिनमें कहा गया था कि भारत “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कम करेगा। साथ ही $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी सामान खरीदने के “कमिटमेंट” शब्द को बदलकर “इरादा” कर दिया गया है।</p>
<p>पहले जारी फैक्टशीट में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स के साथ “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कटौती का उल्लेख था। संशोधित संस्करण में दालों का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है। कृषि आयात भारत के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि देश दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए इन श्रेणियों में ऊंचे टैरिफ लगाए जाते रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा, पहले के टेक्स्ट में भारत द्वारा $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, ICT, कृषि और अन्य उत्पाद खरीदने का “वादा” बताया गया था। अब कृषि उत्पादों का उल्लेख हटाते हुए इसे केवल “इरादा” कहा गया है। डिजिटल सर्विसेज़ टैक्स हटाने संबंधी दावा भी संशोधित कर दिया गया है।</p>
<p>ये बदलाव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आलोचना के बाद सामने आए, जिन्होंने डील को “PR में लिपटा धोखा” बताया था। वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारतीय किसानों और संवेदनशील सेक्टरों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और डील “फेयर, बराबर और बैलेंस्ड” है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम, व्यापार और रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने गुरुवार को गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर साइन किए, ताकि 2004 से रुके हुए ट्रेड पैक्ट के लिए बातचीत फिर से शुरू हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-step-towards-india-gcc-free-trade-agreement-trade-and-strategic/article-142071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किया, जिसके बाद अमेरिका ने अपने टेरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था और अब भारत ने एक और कदम बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में अहम प्रगति करते हुए गुरुवार को टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही वर्ष 2004 से रुकी हुई भारत-GCC व्यापार वार्ता को दोबारा औपचारिक रूप से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>भारत और जीसीसी के बीच FTA वार्ता की शुरुआत 2004 में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसके बाद 2006 और 2008 में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन 2011 में GCC ने वैश्विक स्तर पर सभी व्यापार वार्ताएं रोक दी थीं। नवंबर 2022 में GCC के सेक्रेटरी जनरल की भारत यात्रा के बाद इस प्रक्रिया में नई जान आई। अक्टूबर 2023 में GCC ने संशोधित टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस साझा किए, जिन पर अब दोनों पक्षों की सहमति बन गई है।</p>
<p>GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारत और GCC देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।</p>
<p>वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-GCC द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 15.4 प्रतिशत है। इसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.66 अरब डॉलर रहा। UAE के बाद सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा GCC व्यापार साझेदार है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी ढांचा, पेट्रोकेमिकल्स, आईसीटी, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन देगा। साथ ही, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को संतुलित करने तथा निर्यात विविधीकरण में भी मदद करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 17:47:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीयूष गोयल का संसद को आश्वासन, कहा भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता में खाद्य, कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का रखा ध्यान </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हित सुरक्षित रखे गए हैं, जिससे निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/piyush-goyals-assurance-to-the-parliament-said-that-india-took/article-141934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की जानकारी संसद के बाहर दिये जाने पर विपक्ष के कड़े विरोध के बाद बुधवार को सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि इस समझौते में देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है।     वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के दोनों सदनों में दिये गये वक्तव्यों में कहा कि भारत समझौते में अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह अमेरिका के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के मेक इन इंडिया फॉर द विश्व, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले वर्ष फरवरी की अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो फरवरी को द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। सरकार देश के लिए प्रधानमंत्री के इस ²ष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी। </p>
<p>गौरतलब है कि, विपक्ष इस बात को लेकर हमलावर है कि संसद सत्र के दौरान इस समझौते के बारे में जानकारी संसद से बाहर सार्वजनिक की गयी। गोयल ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते के बारे में जानकारी दी थी। इससे पहले विपक्ष के सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों में सरकार से समझौते के बारे में वक्तव्य देने की मांग की थी।  </p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को फिर कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता (एजेंसी) के दौरान भारत ने देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है। पीयूष गोयल ने लोक सभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संबंध में दोनों देशों की ओर से की गयी घोषणाओं पर अपने एक वक्तव्य में कहा कि भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं।  </p>
<p>गौरतलब है कि, पीयूष गोयल ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में भी कहा था कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में भारत कृषि क्षेत्र की संवदेनशीलता का ध्यान रखेगा। इस बारे में की गयी में यह स्पष्ट भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के'मेक इन इंडिया फॉर द वल्र्ड, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।     </p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन (एजेंसी)ओं के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों (एजेंसी)कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। दो फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>उन्होंने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। हम अपने देश के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 16:47:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का दावा: कहा भारत ने टैरिफ में कटौती पूरी तरह से हासिल की; मजबूत मूल्य निर्धारण शक्ति को समर्थन मिलने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में आयात शुल्क कटौती भारत के संतुलित रवैये का परिणाम है, इससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-senator-lindsey-graham-claims-india-has-fully-achieved-tariff/article-141769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोमवार को कहा कि भारत ने भारत-अमेरिका के नए व्यापार समझौते के तहत घोषित आयात शुल्क में कटौती पूरी तरह से हासिल की है। उन्होंने इस कटौती को यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर रूस से तेल खरीद को लेकर भारत द्वारा किए गए पुनर्संतुलन से जोड़ा। यूक्रेन युद्ध 24 फरवरी, 2026 को अपने पाँचवें वर्ष में प्रवेश करेगा।</p>
<p>लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति की तारीफ करते हुए कहा कि रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव काम करता दिख रहा है। उन्होंने भारत के साथ हालिया व्यापार समझौते की ओर इशारा किया, जिसके तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर आपसी आयात शुलक को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। </p>
<p>उन्होंने कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प, बहुत बढिय़ा। मुझे लगता है कि इस युद्ध को खत्म करने के बारे में आपका संदेश-पुतिन के उन ग्राहकों से जो उनकी युद्ध मशीन को मदद देने का काम कर रहे थे उन्हें सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।</p>
<p>सीनेटर ग्राहम ने दावा किया कि भारत के आचरण ने आयात शुल्क में कटौती को पूरी तरह जायज ठहराया है और उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य देश भी इसी राह पर चलेंगे। उन्होंने कहा, अपने व्यवहार के जरिए भारत ने इस कटौती का हक़ उससे कहीं ज्यादा साबित किया है। मुझे उम्मीद है कि रूसी तेल खरीदने वाले अन्य बड़े देश भी भारत की दिशा का अनुसरण करेंगे।</p>
<p>उन्होंने व्यापार निर्णय को व्यापक भू-राजनीतिक उद्देश्यों से जोड़ते हुए कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तभी बातचीत की मेज पर आएंगे जब दबाव बढ़ेगा। लिंडसे ग्राहम की यह टिप्पणी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा दिन में पहले यह घोषणा करने के बाद आई है कि अमेरिका और भारत एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति दोस्ती और सम्मान के कारण आपसी आयात शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।   </p>
<p>इस घोषणा ने लगभग 11 महीने की अनिश्चितता को खत्म कर दिया, जिसने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को दो दशकों से अधिक समय में सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। भारत और अमेरिका ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को तत्काल राहत प्रदान करेगा। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा, हमने अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापारिक समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत अमेरिका कम आयात शुल्क लगाएगा, इसे 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा। इसी तरह वे भी अमेरिका के खिलाफ अपने आयात शुल्क और नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करके शून्य करेंगे।</p>
<p>आयात शुल्क में कमी से होने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धात्मकता बेहतर होने, मांग बढऩे, मार्जिन का दबाव कम होने और निर्यात-उन्मुख क्षेत्र के लिए मजबूत मूल्य निर्धारण शक्ति को समर्थन मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 13:26:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार की सहायता न दें पोलैंड </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात कर आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' अपनाने और भारत के पड़ोस में आतंकी बुनियादी ढांचे को समर्थन न देने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/foreign-minister-jaishankar-said-that-poland-should-not-provide-any/article-140127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jai-shankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसे भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं देनी चाहिए। डा. जयशंकर ने भारत यात्रा पर आये पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ सोमवार को यहां के दौरान प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि पोलैंड इस क्षेत्र के लिए कोई अजनबी नहीं हैं और वह सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। विशेष रूप से अपने-अपने पड़ोस के संबंध में आकलनों का आदान-प्रदान उपयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर भारत के विचार पहले भी स्पष्ट रूप से साझा कर चुके हैं और उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनकर भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह आज एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड  अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं इसे देखते हुए विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी निरंतर प्रगति कर रहे हैं लेकिन इन पर निरंतर ध्यान दिये जाने की जरूरत है। </p>
<p>भारत और पोलैंड के बीच परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में ये संबंध उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा सशक्त आर्थिक और लोगों के बीच संपर्कों से आगे बढकर मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।</p>
<p>डा. जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बातचीत के दौरान 2024 से 28 तक कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। इसके अलावा व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर है जिसमें पिछले एक दशक में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे पोलैंड के नागरिकों के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़े बाजार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ वहां के व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:56:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली पहुंचे उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की, भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की जयपुर साहित्य उत्सव के बाद दिल्ली पहुंचे। वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर रणनीतिक चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/deputy-prime-minister-of-poland-radoslaw-sikorski-reached-delhi-possible/article-140066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/polamnd.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को नयी दिल्ली पहुंचे। जहां उनका स्वागत अतिरिक्त सचिव पूजा कपूर ने किया। उनके दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना और भारत और पोलैंड के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाना है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा, नयी दिल्ली में आपका हार्दिक स्वागत है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की आज नई दिल्ली पहुंचे। नयी दिल्ली में उनके कार्यक्रम भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। राजधानी पहुंचने से पहले सिकोरस्की ने 17 से 18 जनवरी तक जयपुर का दौरा किया, जहां उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव में भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:21:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज और ट्रंप ने की फोन पर बात, द्विपक्षीय 'अनसुलझे मुद्दों' पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ऐतिहासिक वार्ता हुई। ट्रंप ने $4.2 बिलियन मूल्य के 50 मिलियन बैरल तेल के अमेरिका आने की पुष्टि की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-delsey-rodriguez-and-trump-spoke-on-phone-discussed-bilateral/article-139704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump-and.png" alt=""></a><br /><p>मेक्सिको सिटी। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से तेल, खनिज, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर टेलीफोनिक संवाद करके अपनी सरकारों के बीच 'अनसुलझे मुद्दों' पर चर्चा की। रोड्रिग्ज ने कहा कि उनकी ट्रम्प के साथ लम्बी और सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि बातचीत में दोनों देशों के लिए एक सहयोगी एजेंडा के साथ-साथ बकाया द्विपक्षीय मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया। गौरतलब है कि रोड्रिग्ज के 5 जनवरी को वेनुजुएला के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद दोनों नेताओं का यह पहला संवाद है।</p>
<p>रोड्रिग्ज 3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को 'एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नामक अभियान में गिरफ्तार करने के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बनीं। राष्ट्रपति मादुरो और फ्लोर्स दोनों को मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों की आपूर्ति में संलिप्तता के आरोपों का सामना करने के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया। जबकि उन्होंने अदालत में पेशी के दौरान खुद को निर्दोष बताया।</p>
<p>रोड्रिग्ज ने सोशल मीडिया पर लिखा, आज मेरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक लंबी, उपयोगी और सौहार्दपूर्ण माहौल में टेलीफोनिक बातचीत हुई और हमने दोनों राष्ट्रों के हित में द्विपक्षीय कार्य एजेंडा के साथ-साथ सरकारों के बीच संबंधों में अनसुलझे मुद्दों पर चर्चा की। ट्रंप ने वेनेजुएला की राष्ट्रपति से हुई बातचीत को सकारात्मक बताया, जिसमें तेल, खनिज, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने वेनेजुएला के साथ एक मजबूत साझेदारी की उम्मीद जताई और देश की स्थिरता और विकास की आशा की।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, आज सुबह मेरी वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हम जबरदस्त प्रगति कर रहे हैं क्योंकि हम वेनेजुएला को स्थिर होने और ठीक होने में मदद कर रहे हैं। कई विषयों पर चर्चा हुई, जिसमें तेल, खनिज, व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा शामिल हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और वेनेजुएला के बीच यह साझेदारी सभी के लिए शानदार होगी। वेनेजुएला जल्द ही पहले से कहीं अधिक महान और समृद्ध होगा।</p>
<p>ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्होंने रोड्रिग्ज के साथ तेल निर्यात पर चर्चा की थी, जिसमें कहा गया था, वह बहुत अच्छी हैं। उन्होंने हमसे पूछा कि क्या हम 50 मिलियन बैरल तेल ले सकते हैं और मैंने 'हां' कहा। हम ले सकते हैं। इसकी कीमत 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। यह अभी संयुक्त राज्य अमेरिका के रास्ते में है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने मंगलवार को कहा कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान ने अंतरराष्ट्रीय कानून के एक प्रमुख सिद्धांत को कमजोर किया है जो किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल के उपयोग पर रोक लगाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 16:52:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत–न्यूजीलैंड FTA से आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, वीजा-व्यापार और निवेश में बड़े अवसर</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर औपचारिक रूप से सहमति बना ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात के बाद इस अहम समझौते का ऐलान किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-new-zealand-fta-gives-new-strength-to-economic-relations-huge/article-136924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/new-zealand-foreign-minister-opposes-fta-with-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर औपचारिक रूप से सहमति बना ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात के बाद इस अहम समझौते का ऐलान किया गया। इस डील से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक उपलब्धि बताया है।</p><p>इस FTA की सबसे खास बात कुशल भारतीय कारोबारियों और पेशेवरों के लिए वीजा सुविधा है। समझौते के तहत भारतीय नागरिकों को 5,000 अस्थायी वर्क वीजा दिए जाएंगे। इसके अलावा वर्किंग हॉलीडे वीजा और पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसरों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे भारतीय युवाओं को न्यूजीलैंड में करियर के बेहतर विकल्प मिल सकेंगे। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।</p><p><strong>क्या होगा फायदा?</strong></p><p>ब्रिटेन और ओमान के बाद यह भारत का इस साल तीसरा बड़ा FTA है। इसके तहत भारत से न्यूजीलैंड को होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। इससे कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा। भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल होगी।</p><p><strong>किसानों की बढ़ेगी आमदनी</strong></p><p>FTA में निवेश को लेकर भी बड़ा प्रस्ताव शामिल है। न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करेगा। इससे भारत के औद्योगिक और आर्थिक विस्तार को मजबूती मिलेगी। साथ ही, भारतीय किसानों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। भारत के फल, सब्जियां, अनाज और मसाले न्यूजीलैंड के बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 15:20:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-न्यूजीलैंड ने किया मुक्त व्यापार समझौता, अगले 15 वर्षाें में 18 अरब रुपये निवेश का भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि इससे व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग बढ़ेगा तथा किसानों, एमएसएमई और युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-new-zealand-sign-free-trade-agreement-promise-of-investment-of/article-136814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-new-zealand-fta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से टेलीफोन पर बातचीत के बाद संयुक्त रूप से इसकी घोषणा की गयी। बता दें कि प्रधानमंत्री लक्सन की मार्च 2025 में भारत यात्रा के दौरान इस समझौते पर बातचीत शुरू हुई थी। दोनों नेताओं ने कहा कि रिकॉर्ड नौ महीने में एफटीए पूरा होना दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा करने वाला है। यह साझा महत्वाकांक्षा और राजनीतिक इच्छाशक्ति को दिखाता है। </p>
<p>एफटीए द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा और बाजार पहुंच को बढ़ायेगा तथा निवेश बढ़ाने वाला होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगा। यह समझौता दोनों देशों के नवाचारियों, उद्यमियों, किसानों, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), छात्रों और युवाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों में नये मौके भी पैदा करेगा। </p>
<p>एफटीए के भरोसेमंद आधार के साथ दोनों नेताओं ने अगले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने और अगले 15 सालों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (17.91 अरब रुपये) के निवेश पर भरोसा जताया। पीएम मोदी और प्रधानमंत्री लक्सन ने द्विपक्षीय सहयोग के अन्य क्षेत्रों खेल, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों का आदान-प्रदान में हुई प्रगति का भी स्वागत किया। दोनों नेताओं ने भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 16:14:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत-ओमान बिजनेस समिट में पीएम मोदी ने कहा, भरोसे की नींव पर टिके हैं हमारे रिश्ते</title>
                                    <description><![CDATA[ओमान के मस्कट में भारत–ओमान बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों को भरोसे, विरासत और भविष्य की साझेदारी पर आधारित बताया। उन्होंने भारतीय डायस्पोरा की भूमिका और निवेश व व्यापार में बढ़ती संभावनाओं पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-said-in-india-oman-business-summit-that-our-relations/article-136381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/pm-modi-oman-visit.png" alt=""></a><br /><p>ओमान। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों की यात्रा के दौरान कल ओमान पहुंचे थे और आज इस यात्रा का दूसरा दिन है। भारत ओमान​ बिजनेस समिट के दौरान पीएम मोदी मस्कट पहुंचे, इस दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों की नींव केवल भरोसे पर टिकी हुई है और अब तक दोनों की दोस्ती केवल इसी बात निर्भर करती है और दोनों देशों के रिश्तें अब समय के साथ और भी गहरे होते जा रहे हैं।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, आज दोनों देशों के डिपलोमैटिक रिश्तें को करीब 70 साल का समय हो चुका है, जहां दोनों देशों को अपनी सदियों पुरानी विरासत को और भी आगे ले जाने का प्रयास करना चाहिए ताकि दोनों देशों का भविष्य खुशहाल हो सके। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय डायस्पोरा दोनों देशों रिश्तों को और भी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इससे दोनों देशों का बिजनेस और भी बढ़ेगा।</p>
<p>पीएम मोदी ने भारत और ओमान के रिश्तों को लेकर कहा कि दोनो देशों के बीच जो ट्रेड रिश्ता 70 साल पहले शुरू हुआ था, आज उसे एजुकेशन सशक्त कर रहा है। इसके अलावा ओमान में भारतीय शिक्षा को भी करीब 50 साल पूरे हो चुके है।</p>
<p><strong>आज हम सब भारत-ओमान मैत्री पर्व मना रहे हैं।</strong></p>
<p>M समुद्री विरासत<br />A आकांक्षाएं<br />I इनोवेशन<br />T विश्वास और टेक्नोलॉजी<br />R सम्मान<br />I समावेशी विकास</p>
<p>इसके आगे पीएम मोदी ने कहा, मुझे सात वर्ष बाद Oman आने का सौभाग्य मिला है और आज आप सभी के साथ बातचीत करने का अवसर मिल रहा है। इस बिजनेस समिट के लिए आपकी गर्मजोशी मेरा भी उत्साह बढ़ा रही है। आज की ये समिट भारत—ओमान पार्टनरशिप को नई दिशा देगी, नई गति देगी और नई बुलंदियों तक पहुंचने में मदद करेगी, और इसमें आप सभी का बहुत बड़ा रोल है। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत निवेश के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन है, ये तो दुनिया मानती है, साथ ही भारत एक भरोसेमंद फ्यूचर रेडी पार्टनर है और ओमान इसको बहुत अच्छे से समझता भी है और सराहता भी है। </p>
<p>पीएम मोदी ने कहा आज भारत और ओमान के बिजनेस हमारे ट्रेड को रिप्रेजेंट करते हैं। आप उस विरासत के वारिस हैं, जिसका सदियों का एक समृद्ध इतिहास रहा है। सभ्यता के आरंभ से ही हमारे पूर्वज एक-दूसरे के साथ मैरिटाइम ट्रेड कर रहे थे। अक्सर कहा जाता है कि समुद्र के दो किनारे बहुत दूर होते हैं, लेकिन मांडवी और मस्कट के बीच अरब सागर एक मजबूत ब्रिज बना है। एक ऐसा ब्रिज जिसने हमारे रिश्तों को मजबूत किया, कल्चर और इकोनॉमी को ताकत दी।  </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 14:05:11 +0530</pubDate>
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