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                <title>India-US Trade Deal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भोपाल: आज किसान महाचौपाल को संबोधित करेंगे खड़गे-राहुल, किसानों को देंगे समझौते के नफा-नुकसान की जानकारी; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ हल्ला बोल</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी आज भोपाल के जवाहर चौक पर 'किसान महाचौपाल' को संबोधित करेंगे। वे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताते हुए राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आगाज़ करेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bhopal-kharge-rahul-will-address-kisan-mahachoupal-today-and-will-give/article-144372"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/bhopal-news.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मंगलवार को भोपाल में पार्टी की ओर से आयोजित किसान महाचौपाल को संबोधित करेंगे। खड़गे और राहुल गांधी करीब एक बजे भोपाल के जवाहर चौक पहुंचेंगे जहां महाचौपाल का आयोजन किया गया है।</p>
<p>कांग्रेस प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को देश के हितों के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध कर रही है। पार्टी का कहना है कि इससे देश के किसानों को भारी नुकसान होगा। पार्टी ने इस समझौते के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजन कर किसानों को इससे होने वाले कथित नुकसान के बारे में किसानों को जानकारी देने की योजना बनाई है।</p>
<p>इसके तहत सबसे पहले भोपाल में किसान महाचौपाल का आयोजन किया गया है। पार्टी ने घोषणा की है कि इस तरह के आयोजन कर किसानों को समझौते के नफा नुकसान के बारे में जानकारी दी जाएगी। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 13:01:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>भारत-अमेरिका समझौते को लेकर कांग्रेस ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, कहा-कपास किसानों को होगा बड़ा नुकसान </title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिकी कपास के सस्ते आयात से भारतीय कपड़ा उद्योग और करोड़ों कपास किसानों को खरबों का नुकसान होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacked-the-central-government-regarding-the-india-us-agreement-and/article-143364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत-अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने देश के किसानों के हितों को नजरअंदाज कर यह समझौता किया है और इससे खासकर कपास किसानों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते से देश के कपड़ा उद्योग पर गंभीर प्रभाव पडऩे की आशंका जताई है। उनका कहना था कि इस समझौते से वस्त्र क्षेत्र को खरबों रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है और इससे किसानों से लेकर निर्यातकों तक पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>सुरजेवाला के अनुसार यदि अमेरिकी कपास और संबंधित कृषि उत्पादों का आयात शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर बढ़ता है तो इसका भारतीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों पर दबाव पड़ेगा। अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वहां की कपास अपेक्षाकृत सस्ती होती है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में भारतीय कपास उत्पादकों की जिनिंग इकाइयों यानी कपास की पहली प्रोसेसिंग यानी कपास को रेशों को बीजों से अलग करने की प्रक्रिया वाली इकाइयाँ तथा स्पिनिंग मिलें यानी कताई मिलें जहां कपास के रेशों से कताई करके सूत तैयार करने वाली मिलों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>उन्होंने आशंका जताई है कि यदि अमेरिका के साथ बंगलादेश जैसे देशों के व्यापारिक प्रबंध और मजबूत होते हैं, तो भारतीय परिधान निर्यात को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ सकती है। भारत पहले से वैश्विक बाजार में तीखी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और निर्यात ऑर्डर में कमी आने से कपड़ा उद्योग के लिए नयी चुनौती बन सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का कपड़ा और परिधान उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है। यह क्षेत्र लाखों किसानों, बुनकरों, श्रमिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़ा हैऔर यदि सस्ते आयात के कारण घरेलू कीमतों में गिरावट आती है और मिलों का लाभांश घटेगा और इसका सीधा असर रोजगार और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में कपास उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था वस्त्र उद्योग से गहराई से जुड़ी है। पार्टी का कहना है कि किसी भी बड़े आयात झटके से इन राज्यों में किसानों और छोटे उद्योगों की आय पर व्यापक असर पड़ सकता है।</p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद आयात करने और इसके बढऩे से घरेलू कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है और इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है और इससे किसानों और मिल मालिकों को खरबों रुपये की आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। यह पूछने पर कि अमेरिका के साथ इस समझौते से किसानों को कितना नुकसान हो सकता है, सुरजेवाला ने कहा कि यह मामला आंकड़ों का नहीं, बल्कि देश के किसानों के हित का है जिसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार किसानों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है लेकिन देती नहीं है। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:23:16 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस महासचिव का हमला, बोलें-भारत कांग्रेस व्यापार समझौते के तहत हम जरूरत का 52 प्रतिशत तेल नहीं खरीद सकेंगे </title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत भारत अब रूस से सस्ता कच्चा तेल नहीं खरीद पाएगा। इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-general-secretarys-attack-india-congress-will-not-be-able/article-143383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते के तहत जो शर्त रखी गयी है कि उसके तहत भारत, रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और इस शर्त के बाद भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत कच्चा तेल अब नहीं खरीद सकेगा जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा। </p>
<p>कांग्रेस महासचिव तथा पार्टी के राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने छह फरवरी को एक आदेश में कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और अगर खरीदता है तो अमेरिका इस पर निगरानी रखेगा। निगरानी में यदि पाया जाता है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष से रूस से तेल खरीदा है तो भारत पर सारी टैरिफ पैनल्टी लागू कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, 14 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी यही बात दोहराई है। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इस शर्त के अनुसार भारत अब अमेरिका के कहने पर रूस से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकेगा। इससे पहले अमेरिका के कहने पर भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी।</p>
<p>रणदीप​ सिंह सुरजेवाला ने एक आंकड़ा देते हुए बताया, रूस तथा ईरान, दोनों देशों से भारत रुपए में तेल खरीदते था और इससे हमारा पैसा बचता था। भारत कच्चा तेल रूस से 40 प्रतिशत और 11 प्रतिशत ईरान से खरीदता था लेकिन ईरान से तेल खरीद पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है तो भारत ने उस प्रतिबंध को आसानी से मान लिया है। अब यह समझौता कर लिया गया है कि भारत रूस से भी तेल नहीं खरीद सकता है। इस तरह से भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत तेल का आयात नहीं कर सकेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत बराबर रूस तथा ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहा है और इन दोनों देशों से भारत को सस्ता कच्चा तेल मिलता था। इसी का परिणाम है कि पिछले चार साल में भारत ने 15 लाख 24 हजार करोड का कच्चा तेल खरीदा और इससे भारत को एक लाख 81 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है लेकिन अब अमेरिका के साथ समझौते के बाद भारत सस्ता तेल नहीं खरीद सकेगा और इस खरीद में बचत नहीं कर सकेगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:34:45 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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            <item>
                <title>अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर कांग्रेस हमलावर : पायलट ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- यह डील देश के किसान और व्यापारी वर्ग के भी समझ से बाहर </title>
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                        <![CDATA[सचिन पायलट ने पीसीसी में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव में हुआ समझौता बताते हुए कहा कि इससे भारतीय किसानों और व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुंचेगा।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-bomber-pilot-targets-us-india-trade-deal/article-143271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(25).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अमेरिका और भारत की ट्रेड डील पर कांग्रेस लगातार भाजपा के खिलाफ आवाज उठा रही है। कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने पीसीसी में मीडिया से बातचीत करते हुए इस डील को लेकर सवाल उठाए। पायलट ने कहा कि भारत और अमेरिका ट्रेड डील में बहुत सारे सवाल खड़े हो गए हैं। देश के किसान और व्यापारी वर्ग के भी यह डील समझ से बाहर है। राहुल गांधी भी इसी सिलसिले में लगातार आवाज उठा रहे हैं। आज से पहले भारत पर अमेरिका पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाता था, फिर 50 प्रतिशत और अब 18 प्रतिशत कर दिया। डील की शर्त किसी को मालूम नहीं है।</p>
<p>केवल सोशल मीडिया पर डील की जानकारी दी गई। ट्रेड यूनियन भी इस डील के खतरों को लेकर अलग-अलग आशंका जता रही हैं। भारत जैसे ताकतवर देश को अमेरिका कैसे कह सकता है कि वह किससे तेल खरीदे और किससे नहीं। यह डील अमेरिका के दबाव में हुई है, जिसमें देश के किसान, व्यापारी और यंहा के बाजार का नुकसान झलक रहा है। डील में कौनसा सामान किस डील के तहत लेन देन होगा, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बारे में पूछने पर मंत्री एक दूसरे पर जबाव टालते रहते हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 18:39:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद सस्ती होगी अमेरिकी दाल? कीमतों पर पड़ेगा बड़ा असर</title>
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                        <![CDATA[अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने "ऐतिहासिक" इंडिया-US ट्रेड डील की "मुख्य शर्तों" पर अपनी फैक्टशीट में बदलाव किया है, जिसमें यह दावा हटा दिया गया है कि नई दिल्ली "कुछ खास दालों" पर टैरिफ कम करेगी और $500 बिलियन की खरीद "कमिटमेंट" से जुड़े शब्दों में बदलाव किया गया है,]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-india-us-trade-deal-american-pulses-will-become-cheaper-there/article-142701"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)9.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तथाकथित “ऐतिहासिक” इंडिया-US ट्रेड डील से जुड़ी व्हाइट हाउस फैक्टशीट में अहम बदलाव किए हैं। अपडेटेड दस्तावेज़ में उन दावों को हटा दिया गया है जिनमें कहा गया था कि भारत “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कम करेगा। साथ ही $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी सामान खरीदने के “कमिटमेंट” शब्द को बदलकर “इरादा” कर दिया गया है।</p>
<p>पहले जारी फैक्टशीट में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स के साथ “कुछ खास दालों” पर टैरिफ कटौती का उल्लेख था। संशोधित संस्करण में दालों का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है। कृषि आयात भारत के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है, क्योंकि देश दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए इन श्रेणियों में ऊंचे टैरिफ लगाए जाते रहे हैं।</p>
<p>इसके अलावा, पहले के टेक्स्ट में भारत द्वारा $500 बिलियन से अधिक अमेरिकी ऊर्जा, ICT, कृषि और अन्य उत्पाद खरीदने का “वादा” बताया गया था। अब कृषि उत्पादों का उल्लेख हटाते हुए इसे केवल “इरादा” कहा गया है। डिजिटल सर्विसेज़ टैक्स हटाने संबंधी दावा भी संशोधित कर दिया गया है।</p>
<p>ये बदलाव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आलोचना के बाद सामने आए, जिन्होंने डील को “PR में लिपटा धोखा” बताया था। वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारतीय किसानों और संवेदनशील सेक्टरों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और डील “फेयर, बराबर और बैलेंस्ड” है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:17:39 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रेड डील पर फंसा बड़ा पेच : किसानों के लिए अमेरिका डाल रहा दबाव, वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं किसान</title>
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                        <![CDATA[वॉशिंगटन में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में अड़चन आ गई है। अमेरिका जीएम सोयाबीन और मक्का के आयात की मांग कर रहा है, जबकि भारत ने इसे अपनी ‘रेड लाइन’ बताते हुए साफ इनकार किया है। ट्रंप समर्थक किसान भारतीय बाजार खोलने का दबाव बना रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-is-putting-pressure-on-farmers-there-is-a-big/article-136089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-trade-america.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत में एक बड़ा पेच फंस गया है। अमेरिका ने दावा किया था कि उसे भारत की ओर से अब तक का सबसे अच्छा ऑफर मिला है। इसके बाद भी अब अमेरिका अपनी ऐसी शर्त मानने के लिए दबाव डाल रहा है जिसके लिए भारत किसी भी तरह से तैयार नहीं है। दरअसल, अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी किसानों के पैदा किए सोयाबीन और मक्का खरीदे। पिछले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने भारत के दौरे पर इसको लेकर काफी दबाव डाला था और द्विपक्षीय व्यापार में इसकी मंजूरी देने की मांग की थी। वह भी तब जब जेनेटिकली मोडिफाइड इन फसलों को भारत में गंभीर चिंता जताई गई है।</p>
<p><strong>भारतीय बाजार को खुलवाने के लिए भारी दबाव डाल रहे </strong></p>
<p>दरअसल, इस अमेरिकी दबाव के पीछे डोनाल्ड ट्रंप के एमएजीए समर्थक किसान हैं जो चुनाव में साथ देने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति पर भारतीय बाजार को खुलवाने के लिए भारी दबाव डाल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन को भी लगता है कि भारत एक विशाल बाजार है। साथ ही मेक अमेरिका ग्रेट अगेन समर्थक किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक खरीददार देश हो सकता है। अमेरिका में इन जीएम फसलों का रेकॉर्ड उत्पादन हुआ है लेकिन अमेरिकी किसान इसे बेच नहीं पा रहे हैं। इससे जहां सोयाबीन और मक्का अमेरिका में जमा हो रहा है, वहीं अमेरिकी किसानों का वित्तीय संकट बढ़ता रहा है।</p>
<p><strong>भारत अमेरिकी दबाव के आगे अड़ा</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में किसान बंपर पैदावार से परेशान हैं। चीन के साथ अमेरिका के तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में उथल पुथल चल रहा है। यही नहीं ब्राजील जैसे देशों से अमेरिकी किसानों को प्रतिस्पर्द्धा मिल रही है। यही वजह है कि अमेरिकी व्यापार वातार्कार सोयाबीन, मक्के और अन्य फसलों के लिए भारत पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। इस अमेरिकी दबाव पर भारत ने अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार से साफ कह दिया है कि वह सोयाबीन और मक्के के आयात को मंजूरी नहीं दे सकता है। इसकी वजह यह है कि भारत में जीएम फसलें बैन हैं। भारत ने कहा है कि जीएम फसलें उसके लिए हमेशा रेड लाइन बनी रहेंगी।</p>
<p><strong>हमारी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा </strong></p>
<p>इस बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने हाउस डेमोक्रेट्स कॉकेस के उपाध्यक्ष टेड ल्यू से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रक्षा और सुरक्षा सहयोग, व्यापार और निवेश तथा जनसंपर्क से से जुड़ी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद भारतीय राजनयिक क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, हाउस डेमोक्रेट्स कॉकस के वाइस चेयर, रिप्रेजेंटेटिव टेड लियू के साथ अच्छी बातचीत हुई। एआई, डिफेंस और सिक्योरिटी कोआॅपरेशन, व्यापार और निवेश, और लोगों के बीच संबंधों में नए विकास पर हमारी साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। आपसी हितों के मुद्दों पर लगातार सहयोग की उम्मीद है।</p>
<p><strong>भारतीय राजदूत ने अमेरिका संग दोस्ती पर दिया जोर</strong></p>
<p>12 दिसंबर को क्वात्रा ने कहा कि उन्होंने भारत-अमेरिका मजबूत संबंधों की दृढ़ समर्थक और ब्लैक कॉकेस की अध्यक्ष यवेट क्लार्क के साथ उपयोगी बैठक की। उन्होंने एआई क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने, जिसमें डाटा गोपनीयता और डाटा सुरक्षा शामिल हैं पर उनके दृष्टिकोण की सराहना की। विनय क्वात्रा ने बताया कि उन्होंने भारत के एआई लक्ष्य और एआई इम्पैक्ट समिट में उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ एक दिलचस्प बातचीत की और अमेरिकी उद्योग को भारत की एआई जर्नी में अहम साझेदार बनने के लिए आमंत्रित किया। इस समिट का आयोजन अलब्राइट स्टोनब्रिज समूह की तरफ से किया गया था।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 11:57:01 +0530</pubDate>
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