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                <title>sir process - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले में मुर्शिदाबाद सबसे अधिक प्रभावित, साढ़े चार लाख से अधिक मतदाताओं के कटे नाम </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद मुर्शिदाबाद सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। चुनाव आयोग ने राज्य भर में कुल 90.8 लाख नाम हटाए हैं, जिनमें से अकेले मुर्शिदाबाद के 4.5 लाख मतदाता शामिल हैं। इस बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई ने राज्य की सियासत और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/murshidabad-is-the-most-affected-in-the-case-of-removal/article-149822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मतदाताओं का नाम हटाए जाने के मामले में मुर्शिदाबाद जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां साढ़े चार लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से जारी जिलावार आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 74,775 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी यही स्थिति है, जहां लालगोला में 55,420, रघुनाथगंज में 46,100 से अधिक, फक्का में 38,222 और सूती में 37,965 नाम हटाए गए हैं। मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में मुर्शिदाबाद राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां कुल 4,55,137 नाम हटाए गए हैं। डोमकल, जंगीपुर, खरग्राम और भगवानगोला में भी 30 से 50 हजार के बीच नाम हटाए गए हैं।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, लगभग 60 लाख नामों को 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया था, जिसकी जांच करीब 700 न्यायिक अधिकारियों ने की। इनमें से 27,16,393 नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राज्य में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या 90,83,345 हो गई है। इसके अलावा, मालदा जिले के सुजापुर में 26,829 नाम हटाए गए हैं। उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा में 27,898 और इस्लामपुर में 15 हजार से अधिक नाम सूची से बाहर हुए हैं। दक्षिण 24 परगना के मटियाबुर्ज में 39,579 नाम हटाए गए, जबकि कैनिंग पूर्व, बसंती और गोसाबा में भी हजारों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके विपरीत, भांगड़ में यह संख्या अपेक्षाकृत कम 2,183 रही।</p>
<p>कोलकाता में भी इस प्रक्रिया का व्यापक असर दिखा है। कोलकाता पोर्ट में 13,395, चौरंगी में 10,424, बेलेघाटा में 9,532 और एंयली में 9,092 नाम हटाए गए। भवानीपुर में 3,893 और बालीगंज में 6,174 नाम हटाए गए, जबकि मानिकतला में सबसे कम 733 नाम हटाए गए। पश्चिम वर्धमान के आसनसोल उत्तर, कुल्टी और बाराबनी में 10,000 से 14,000 के बीच नाम हटाए गए हैं। कुल मिलाकर चुनाव आयोग के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों में 30,000 से 70,000 तक नाम हटाए गए हैं। विशेष रूप से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों और मुर्शिदाबाद एवं मालदा जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई ने एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: शुक्रवार को जारी हो सकती है Updated Voter List, मतदाता सूची को लेकर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की आज अहम बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक 'विचाराधीन' नामों की जांच के बाद शुक्रवार को संशोधित मतदाता सूची जारी होने की संभावना है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा हेतु शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। प्रशासन सूची प्रकाशन के बाद संभावित कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को लेकर पूरी तरह सतर्क है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-may-be-released-on-friday-updated/article-147049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद  मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से तैयार की गई अतिरिक्त मतदाता सूची से नामों का पहला सेट प्रकाशित किए जाने की संभावना है और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अद्यतन मतदाता सूची शुक्रवार तक जारी की जा सकती है। यह घटनाक्रम संशोधित नामों के सार्वजनिक होने के बाद संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं को लेकर बढ़ी हुई प्रशासनिक तैयारियों और चिंताओं के बीच सामने आया है।</p>
<p>स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने गृह सचिव संघमित्रा घोष, पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता और कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंदा के साथ राज्य में मौजूदा सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के लिए बैठक की। गुरुवार को सुबह 10 बजे बैठक शुरू हुई और लगभग आधे घंटे तक चली।  इस समीक्षा का समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह एसआईआर प्रक्रिया के बाद अतिरिक्त मतदाता सूची के प्रकाशन से ठीक पहले हो रही है। चुनाव आयोग ने इससे पहले 28 फरवरी को एक संशोधित मतदाता सूची जारी की थी, हालांकि इसे अपूर्ण माना गया था।</p>
<p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उस सूची में 6,44,52,609 मतदाताओं को 'पात्र' के रूप में चिह्नित किया गया था, जबकि 60,06,675 नाम 'विचाराधीन' श्रेणी में रखे गए थे। इन लंबित नामों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में हाल के दिनों में तेजी आई है। बुधवार तक लगभग 23.3 लाख ऐसे मामलों पर निर्णय लिए जा चुके थे।</p>
<p>उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त 700 से अधिक न्यायिक अधिकारी वर्तमान में इन प्रविष्टियों की जांच में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि यदि वर्तमान गति बनी रही, तो चुनाव से पहले सभी लंबित नामों का निपटारा पूरा हो सकता है। कुछ हलकों में आशंका बनी हुई है कि जब मतदाताओं की पहली सूची प्रकाशित होगी, तो कई नाम छूट सकते हैं। इससे राज्य के कुछ हिस्सों में सूची जारी होने के बाद संभावित कानून-व्यवस्था की गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>इस पृष्ठभूमि में, उच्च न्यायालय द्वारा सुरक्षा स्थिति की सक्रिय समीक्षा प्रशासन की सतर्कता को रेखांकित करती है। अधिकारी घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहे हैं ताकि संशोधित मतदाता सूचियों के प्रकाशन से उत्पन्न होने वाले किसी भी दुष्प्रभाव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:49:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मतदाता सूची बदलाव को लेकर कोलकाता में टीएमसी और चुनाव आयोग में तीखी नोकझोंक, अपनी बात नहीं रखने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में चुनाव आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) पर टकराव बढ़ गया है। मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अमर्यादित व्यवहार का आरोप लगाया, वहीं फिरहाद हकीम ने इस प्रक्रिया को नागरिकों का उत्पीड़न बताया। TMC ने आरोप लगाया कि केंद्र के प्रभाव में आकर असली मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/heated-dispute-between-tmc-and-election-commission-in-kolkata-regarding/article-145867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सोमवार को चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच हुई बैठक के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आयोग और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच तीखी बहस हुई। बैठक के बाद तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बर्ताव पर गहरी नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि उन्होंने उन्हें अपनी बात पूरी तरह से रखने की इजाजत नहीं दी। </p>
<p>तृणमूल की वरिष्ठ नेता एवं राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दावा किया कि उनसे चर्चा के दौरान अपनी आवाज ऊंची न करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा, मैं एक महिला हूँ और उन्होंने मुझसे कहा,'चिल्लाओ मत'। असल में उनके मन में महिलाओं के लिए कोई सम्मान नहीं है। इसीलिए महिलाओं के नाम भी मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। अगर मेरा नाम नहीं है, तो इसे साबित करना आपकी जिम्मेदारी है। मुझे कतार में क्यों खड़ा होना चाहिए? महिलाओं पर चिल्लाना आपका काम नहीं है। </p>
<p>तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त उनकी बातें सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया, वह किसी की बात नहीं सुनना चाहते। वह खुद बोलते रहे और जब हमने बोलने की कोशिश की,तो उन्होंने अपनी आवाज ऊंची कर ली। ऐसा लगता है कि आयोग इसलिए नाराज है क्योंकि हमने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p>आयोग के साथ ही बैठक में तृणमूल की ओर से फिरहाद हकीम, श्रीमती भट्टाचार्य और राज्यसभा उम्मीदवार राजीव कुमार शामिल थे। हकीम ने एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना की और आयोग पर घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार की कहानी से प्रभावित होकर गलत तरीका अपनाने का आरोप लगाया। </p>
<p>हकीम ने कहा, केंद्र सरकार ने यह प्रभाव बनाया है कि यह राज्य रोहिंग्या और घुसपैठियों से भरा है,और आयोग ने अपनी नीति उसी हिसाब से बनाई है। लेकिन इस प्रक्रिया के दो महीनों में आपको इसका कोई सबूत नहीं मिला है। इसके बजाय भारतीय नागरिकों को परेशान किया गया है। इस प्रक्रिया से आम लोगों को काफी मुश्किल हुई है। सैकड़ों मौतें हुई हैं और बहुत सारे लोग बीमारियों की चपेट में आए। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? लोग अपना काम छोड़कर सिर्फ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लंबी लाइनों में खड़े हो रहे हैं। केंद्र सरकार की बात मानकर बनाई गई यह नीति बनायी गयी। है। </p>
<p>हकीम ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यह पक्का करना है कि असली वोटर अपने अधिकारों से वंचित न रहें। उन्होंने कहा, हमारा बस यही आग्रह है कि किसी भी भारतीय नागरिक को वंचित न किया जाए। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पार्टी के उच्चतम न्यायालय जाने के सवाल पर भट्टाचार्य ने इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा, जब भी हमने एसआईआर का मुद्दा उठाया, तो उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में है। फिर हमें बैठक के लिए क्यों बुलाया? अगर आप हमें बुलाते हैं, तो आपको हमारी बात सुननी चाहिए। क्या हमारा उच्चतम न्यायालय जाना गलत था? हमने सही किया। लोगों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।</p>
<p>इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल चुनाव को कितने चरण में कराना चाहती है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि बैठक का मकसद मतदान के चरण की संख्या पर चर्चा करना नहीं था। हालांकि, हकीम ने इस मौके का इस्तेमाल केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला करने के लिए किया और कहा, केंद्र सरकार राज्य में अपनी जमीन खो चुकी है। वे मासूम लोगों को एसआईआर कतारों में खड़ा करके बंगाल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस वजह से कई मौतें हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 17:54:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सीएम ममता ने लगाया एसआईआर प्रक्रिया में 10 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कम होने का आरोप, 28 फरवरी को प्रकाशित होगी अंतिम सूची</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में विशेष पुनरीक्षण के दौरान 4 लाख से अधिक दस्तावेज अपात्र पाए गए हैं। सुनवाई में अनुपस्थित 7 लाख लोगों सहित कुल 10 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cm-mamata-alleges-that-names-of-more-than-10-lakh/article-143987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चार लाख से ज्यादा मतदाताओं के दस्तावेजों को अपात्र बताने से अंतिम सूची में 10 लाख से ज्यादा नाम के कम होने की संभावना है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने 444970 मतदाताओं द्वारा जमा किये गये दस्तावेजों को अपात्र के तौर पर चिह्नित किया है। आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी आयोग को भेज दी गयी हैं। इसके अलावा, 466323 मतदाताओं द्वारा जमा किये गये दस्तावेज जिला मजिस्ट्रेट के पास सत्यापन के लिए लंबित हैं।</p>
<p>इससे पहले, पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत हुई सुनवाई में लगभग सात लाख मतदाता शामिल नहीं हुए थे। जिन लोगों के दस्तावेज अपात्र घोषित किये गये हैं, उन्हें मिलाकर 10 लाख से ज्यादा मतदाता अंतिम सूची से हटाये जा सकते हैं। आयोग ने पहले करीब 58 लाख मतदाताओं की पहचान की थी, जिनका देहांत हो चुका है, मौजूद नहीं हैं, या लापता हैं, जिसकी वजह से उन्हें मसौदा सूची से बाहर कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान और 10 लाख मतदाताओं की पहचान की गयी। इनमें से करीब सात लाख मतदाता सुनवायी में शामिल नहीं हुए, जबकि बाकी मामले अयोग्य पाये गये दस्तावेजों से जुड़े हैं। </p>
<p>आयोग ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद कहा है कि पश्चिम बंगाल के लिए अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। हालांकि, अधिकारियों ने कहा कि अभी काफी काम बाकी है। दस्तावेज सत्यापन की समय सीमा 21 फरवरी है, और अगर तब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो अंतिम सूची के प्रकाशन में देरी हो सकती है। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि यदि लंबित मामलों का निपटारा समय पर पूरा नहीं हुआ, तो आयोग विस्तार की मांग कर सकता है। सुनवाई के दौरान मतदाताओं ने कई दस्तावेज जमा किये, जिनकी पर्यवेक्षक जांच कर रहे हैं।</p>
<p>आयोग के सूत्रों के मुताबिक, पर्यवेक्षक ने करीब 30 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों को दोबारा सत्यापन के लिए मतदाता पंजीकरण अधिकारी  (ईआरओ) और सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) को वापस भेज दिया है। करीब 20 लाख मतदाताओं के दस्तावेज अभी भी लंबित पड़े हैं, जिन पर अभी तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है। </p>
<p>आयोग ने पहले एसआईआर प्रक्रिया के लिए मंजूर किये जाने वाले 13 दस्तावेजों की एक सूची प्रकाशित की थी और कहा था कि सूची के बाहर के दस्तावेज मंजूर नहीं किये जाएंगे, इसे बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी मंजूरी दी। सूत्रों ने हालांकि कहा कि कुछ मामलों में भ्रम हुआ, जहां सूची में शामिल नहीं किये गये दस्तावेज जमा किये गये और अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें मंजूर कर लिया। सूत्रों ने बताया कि संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। अधिकारियों के साथ आगे बातचीत के बाद इन मामलों के सुलझने की उम्मीद है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:45:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बंगाल वोटर लिस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल SIR को ज्यूडिशियल निगरानी में रखा, माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई</title>
                                    <description><![CDATA[ममता बनर्जी सरकार ने आयोग को पर्याप्त संख्या में ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध कराए हैं। सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bengal-voter-list-controversy-supreme-court-puts-bengal-sir-under/article-143962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/sc.png" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल। एसआईआर को लेकर पूरे देश में विवाद खड़ा हुआ है जिसको लेकर अलग अलग जगहों पर अलग अलग पार्टियों ने मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। इसी बीच पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी गतिरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार 20 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्देश देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मौजूदा या सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (ADJs) को नियुक्त करें।</p>
<p><strong>संवैधानिक संस्थाओं के बीच 'भरोसे की कमी'</strong></p>
<p>अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, राज्य सरकार और भारत निर्वाचन आयोग के बीच "दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप" और भरोसे की भारी कमी के कारण उसके पास न्यायिक हस्तक्षेप के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह विवाद मुख्य रूप से इस बात पर था कि क्या ममता बनर्जी सरकार ने आयोग को पर्याप्त संख्या में ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध कराए हैं। सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई थी।</p>
<p><strong>निष्पक्षता के लिए न्यायिक हस्तक्षेप</strong></p>
<p>इसके आगे सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के दावों पर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारी Logical Error की श्रेणी में लंबित मामलों का निपटारा करेंगे। पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के सीजे से अनुरोध किया कि वे ईमानदार अधिकारियों का चयन करें, जिन्हें राज्य सरकार और माइक्रो-ऑब्जर्वर सहयोग देंगे। साथ ही, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को इन टीमों को पूर्ण लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया गया है।</p>
<p><strong>समयसीमा और सुरक्षा</strong></p>
<p>अदालत ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है, जबकि शेष दावों के लिए सप्लीमेंट्री लिस्ट बाद में जारी की जा सकती है। इसके अलावा, राज्य के डीजीपी को उन शिकायतों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है जिनमें पुनरीक्षण अधिकारियों को धमकियां मिलने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले कोर्ट में पेश होकर आरोप लगाया था कि चुनाव से पहले राज्य को निशाना बनाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 16:56:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>राजस्थान में महिला अत्याचार के बढ़ते मामलों में लड़ेंगे सड़कों पर लड़ाई: खान</title>
                                    <description><![CDATA[नूरी खान ने भाजपा सरकार पर महिला अत्याचार और मनरेगा कमजोर करने का आरोप लगाते हुए प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/khan-will-fight-on-the-streets-due-to-increasing-cases/article-139973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/noori-khan.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: महिला कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी नूरी खान ने महिला अत्याचार के मामलों को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राजस्थान में भाजपा की सरकार में महिला अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हम इसके खिलाफ सड़कों पर लड़ाई लड़ेंगे। </p>
<p>महिला कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक से पहले रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राजस्थान सहित देश भर में महिला अत्याचार और बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं,उन्नाव पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए जब हमारी राजस्थान की महिला कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरी तो पुलिस ने उन्हें घसीटा, हमारी कई महिला कार्यकर्ताओं को चोटे आई हैं।</p>
<p>आगामी दिनों में हम महिला अत्याचार,मनरेगा और एसआईआर जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। खान ने कहा कि चाहे महिला सुरक्षा का मुद्दा हो, महंगाई का मुद्दा हो,इन सब मुद्दों पर हम संघर्ष करेंगे। मनरेगा का नाम बदलकर जी राम जी किया गया है और 125 दिन के रोजगार के बाद कही है, लेकिन जिस तरह से हमारी सरकार ने 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी थी, महिला मजदूरों को समान वेतन दिया था और गर्भवती महिलाओं और शिशु स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए शेल्टर बनाए थे, उन सब को इस सरकार ने खत्म करने का काम किया है। 125 दिन के रोजगार की बात की जा रही है, लेकिन गारंटी नहीं दी जा रही है।</p>
<p>ग्राम पंचायत के भी अधिकार छीन लिए गए हैं। इन सब मुद्दों को लेकर संघर्ष करेंगे। मनरेगा संग्राम की लड़ाई को हमने शहरों से शुरू किया था और इसे हम ग्राम पंचायत तक लेकर पहुंचे हैं। राजस्थान में प्रदेश कार्यकारिणी और शेष बचे जिलाध्यक्षों को लेकर कहा कि लगातार इसकी घोषणा हो रही और जो शेष बचे जिलाध्यक्ष हैं उनकी भी जल्द घोषणा कर दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 17:35:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसआईआर प्रक्रिया : राजस्थान में 41.85 लाख वोटर्स के नाम कटे, 11 लाख वोटर्स को जारी होंगे नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) के तहत मंगलवार को राजस्थान में जारी की गई ड्राफ्ट लिस्ट में 41.85 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। जारी ड्राफ्ट लिस्ट में एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और ऑलरेडी एनरोल्ड सूची दी गई है। यह लिस्ट निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवा दी गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sir-process-names-of-4185-lakh-voters-in-rajasthan-deleted/article-136190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) के तहत मंगलवार को राजस्थान में जारी की गई ड्राफ्ट लिस्ट में 41.85 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। जारी ड्राफ्ट लिस्ट में एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और ऑलरेडी एनरोल्ड सूची दी गई है। यह लिस्ट निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवा दी गई है। जारी ड्राफ्ट सूची के अनुसार 41.85 लाख कुल नाम हटाए गए हैं, इनमें परमानेंट शिफ्टेड, एब्सेंट और अन्य 29.6 लाख और 8.75 लाख डेड मतदाता हैं। इसके अलावा 3.44 लाख ऐसे डुप्लीकेट मतदाता हैं, जिनके दो जगह नाम हैं।</p>
<p>मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने जारी ड्राफ्ट सूचना को लेकर कहा है कि ड्राफ्ट सूची में जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अब कोई नोटिस नहीं दिया जाएगा। इन मतदाताओं को यदि आपत्ति है तो वे दस्तावेज देकर अपना दावा पेश कर सकते हैं। ड्राफ्ट सूची में परमानेंट शिफ्ट मतदाता, मृतक मतदाता, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। सूची में शामिल 11 लाख उन वोटर्स को नोटिस जारी किए जाएंगे, जिनकी मैपिंग नहीं हुई है। ऐसे मतदाता दस्तावेज जमा करवाकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। ये 11 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनका नाम पिछली एसआईआर में नहीं थे और दस्तावेज नहीं दे पाए थे। इन्हें अब एसडीएम स्तर से नोटिस जारी किए जाएंगे। महाजन ने बताया कि सभी कलकटर्स को निर्देश दिए गए हैं कि सभी मतदाताओं को मतदाता सूची में अपना नाम जांचने के लिए प्रेरित किया जाए। यदि उनका नाम नहीं है तो नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र भरकर जमा कराने के बारे में जानकारी दी जाए। युवा मतदाता जो एक अप्रैल 2026, एक जुलाई 2026 और एक अक्टूबर 2026 तक 18 साल के होंगे, वे सभी भी एडवांस फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। </p>
<p><strong>सुनवाई का मौका मिलने से पहले नहीं हटेंगे नाम</strong><br />एसआईआर के अनुसार ड्राफ्ट सूची से कोई भी नाम हटाने से पहले संबंधित एसडीएम, तहसीलदार को सुनवाई का मौका देकर लिखित आदेश जारी करने होंगे, जिनके ऊपर कलक्टर और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के यहां भी अपील कर सकेंगे। वहीं महाजन ने बताया कि प्रदेश में पोलिंग बूथ पुनर्गठन के बाद 8,935 नए बूथ बनाए गए हैं। पहले प्रदेश में 52, 201 पोलिंग बूथ थे और अब 61, 136 बूथ हो गए हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 09:39:13 +0530</pubDate>
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