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                <title>fertilizer crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>fertilizer crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई वैश्विक खाद्य सुरक्षा की चिंता: कृषि व्यापार नियमों को बदलने की कवायद तेज, विश्वजीत धर ने कहा-होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ती लागत को देखते हुए विशेषज्ञ अब WTO के पुराने नियमों को बदलने की वकालत कर रहे हैं। भारत सब्सिडी और नए विदेशी स्रोतों के जरिए यूरिया व डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित कर खाद्य सुरक्षा बचाने में जुटा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/america-iran-war-increased-the-concern-about-global-food-security-efforts/article-147996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका -इजरायल और ईरान के बीच हाल ही के युद्ध ने न केवल तेल बाजारों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक खाद्य और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधाएं उत्पन्न कर भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है। इस संकट को देखते हुए अर्थशास्त्री और विभिन्न सरकारें अब वैश्विक कृषि व्यापार नियमों को फिर से लिखने का प्रस्ताव तैयार कर रही हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के झटकों से निपटा जा सके।</p>
<p>भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के पूर्व डब्ल्यूटीओ चेयरमैन प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात संचालन में आई बाधा ने यह उजागर कर दिया है कि ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य प्रणालियां एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई हैं। एलएनजी के प्रवाह में रुकावट और बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण भारत जैसे देशों में उर्वरक उत्पादन और कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रस्तावित 'मॉडल ट्रीटी ऑन एग्रीकल्चरल ट्रेड' में तर्क दिया गया है कि विश्व व्यापार संगठन का मौजूदा ढांचा जलवायु परिवर्तन, महामारी और युद्ध जैसे झटकों से निपटने में अक्षम साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ढांचा शुरू से ही दोषपूर्ण था और अब इसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के तनाव परीक्षण में विफल पाया गया है।</p>
<p>भारत अपनी जरूरत का लगभग पांचवां हिस्सा यूरिया, आधा हिस्सा डीएपी और लगभग पूरी पोटाश मात्रा आयात करता है। खाड़ी देशों से होने वाली आपूर्ति और समुद्री मार्गों में बढ़ते जोखिमों के कारण बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उर्वरकों की कीमतों में उछाल आया है। अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार ने फिलहाल इस झटके को किसानों तक पहुँचने से रोकने के लिए उच्च सब्सिडी के माध्यम से अवशोषित करने का निर्णय लिया है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो कृषि उत्पादन घटने और खाद्य कीमतों के बढ़ने का गंभीर जोखिम पैदा हो सकता था, जो एक बड़ा वित्तीय संकट बन सकता है।</p>
<p>प्रस्तावित नई संधि का उद्देश्य व्यापार के बजाय खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और समानता को प्राथमिकता देना है। प्रोफेसर धर के अनुसार, यह संधि सरकारों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और आवश्यकता पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार देने की वकालत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्षविराम होने के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में युद्ध जोखिम प्रीमियम स्थायी रूप से जुड़ सकता है। इसका मतलब है कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा और उर्वरक की लागत संरचनात्मक रूप से हमेशा के लिए ऊंची बनी रह सकती है।</p>
<p>बदलते हालातों को देखते हुए भारत अब पोटाश और फॉस्फेट के लिए नए स्रोतों की तलाश कर रहा है और विदेशी खनिज संपत्तियों में निवेश बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, घरेलू यूरिया उत्पादन विस्तार और खाड़ी क्षेत्र के बाहर से लंबी अवधि के एलएनजी अनुबंधों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि बाहरी झटकों को कम किया जा सके। वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब आपूर्ति श्रृंखलाएं अत्यधिक केंद्रित होती हैं, तो झटके केवल स्थानीय नहीं रहते बल्कि वैश्विक स्तर पर फैल जाते हैं। नई संधि इन संरचनात्मक कमजोरियों को दूर करने और बड़े कृषि व्यवसायों पर लगाम लगाने का आह्वान करती है ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।</p>
<p>प्रस्ताव में खाद्य सुरक्षा को "मानवता की साझा चिंता" के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके तहत राज्यों को यह अधिकार और दायित्व होगा कि वे व्यापार को प्रतिबंधित करके भी अपने नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें, जो मौजूदा उदारीकरण समर्थक डब्ल्यूटीओ नियमों से एक बड़ा बदलाव होगा। अमेरिका-ईरान युद्ध ने साबित कर दिया है कि वैश्विक व्यापार की वर्तमान संरचना अब पुरानी पड़ चुकी मान्यताओं पर टिकी है। बर्लिन और बर्न विश्वविद्यालय जैसे वैश्विक संस्थानों के शोधकर्ताओं द्वारा समर्थित यह पहल आने वाली डब्ल्यूटीओ मंत्रीस्तरीय वार्ता में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>असर खबर का - खाद संकट से राहत, रफ्तार पकड़ने लगी आपूर्ति</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों खाद की कमी के चलते किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---relief-from-fertilizer-crisis--supply-picking-up-pace/article-136215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कोटा जिले में खाद की आपूर्ति अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगी है। हाल ही में जिले में 1300 मीट्रिक टन खाद की एक रैक पहुंच चुकी है, जिससे सहकारी समितियों और डीलरों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, कृषि विभाग के अनुसार आगामी दिनों में 2600 मीट्रिक टन खाद की एक और रैक जिले में आने वाली है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वर्तमान में जिले में करीब 8000 मीट्रिक टन खाद का स्टॉक मौजूद है। यह स्टॉक रबी फसलों के लिए किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे वितरित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में वितरण</strong><br />पिछले दिनों खाद की कमी के चलते किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा था और कई जगहों पर असंतोष की स्थिति भी बन गई थी। अब लगातार रैक आने से हालात में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि आगामी रैक के पहुंचते ही जिले में खाद की उपलब्धता और बेहतर हो जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पीओएस मशीन के माध्यम से ही खाद दी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की कालाबाजारी और अनियमितता पर रोक लगाई जा सके। इसके अलावा कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में खाद का वितरण करवाया जा रहा है, ताकि सभी किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद की आपूर्ति हो सके।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />रबी सीजन में अचानक से मांग बढ़ने के कारण कोटा जिले हाड़ौती में खाद का संकट उत्पन्न हो गया था। इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 6 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि हाड़ौती में रबी सीजन के दौरान किसानों के सामने खाद पाने की जद्दोजहद एक बार फिर बढ़ गई है। स्थिति यह है कि सुबह तड़के से शुरू होने वाली खाद वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें दोपहर तक लगी रहती हैं। धरतीपुत्र कहलाने वाले किसान आवश्यक कृषि संसाधन के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। कई बार तो किसानों को खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। कोटा जिले सहित हाड़ौती के अन्य जिलों में सरकारी एवं सहकारी वितरण केंद्रों पर यूरिया की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन सीमित स्टॉक और आधार कार्ड आधारित वितरण प्रणाली के कारण प्रक्रिया में देरी हो रही है। सर्दी का असर बढ़ने के कारण अब गेहूं का यूरिया की जरूरत है। ऐसे में किसानों की खाद के लिए भीड़ बढ़ती ही जा रही है।</p>
<p>यदि इसी तरह नियमित आपूर्ति बनी रही तो बुवाई और फसल प्रबंधन में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। कृषि विभाग को जिले में खाद की वितरण व्यवस्था पर सख्ती से निगरानी रखनी चाहिए ताकि सभी किसानों को समय पर खाद मिल सके।<br /><strong>- लक्ष्मीचंद नागर, किसान नेता</strong></p>
<p>खाद की आपूर्ति सुचारू करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक रैक पहले ही पहुंच चुकी है और जल्द ही 2600 मीट्रिक टन की रैक और आएगी। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, जिले में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।<br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 13:05:54 +0530</pubDate>
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