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                <title>Cancer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Cancer RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कैंसर को लेकर जयपुर की रिपोर्ट : भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, सांगानेर में महिलाएं कैंसर की चपेट में ज्यादा</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल की ओर से वर्ष 2020 से 2024 के बीच राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से आए 14,512 कैंसर रोगियों का डेटा इंडियन कैंसर रजिस्ट्री को भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-report-on-cancer-was-revealed-in-the-report-of/article-126491"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के सांगानेर क्षेत्र से सामने आई एक चौंकाने वाली स्वास्थ्य रिपोर्ट ने चिकित्सा जगत को सतर्क कर दिया है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार सांगानेर में महिलाओं में कैंसर के मामले पुरुषों की तुलना में डेढ़ गुना अधिक पाए गए हैं। अस्पताल की ओर से वर्ष 2020 से 2024 के बीच राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से आए 14,512 कैंसर रोगियों का डेटा इंडियन कैंसर रजिस्ट्री को भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।</p>
<p><strong>जरूरत है.......</strong><br />साफ पेयजल सुनिश्चित करने की<br />सब्जियों की गुणवत्ता की नियमित जांच<br />महिलाओं में समय पर स्क्रीनिंग और जागरूकता बढ़ाने की</p>
<p><strong>मुख्य कारण: जल प्रदूषण और हामार्न बाधक रसायन</strong><br />सांगानेर में कपड़ा और अन्य उद्योगों से निकलने वाले जहरीले रसायन जल स्रोतों को कर रहे हैं प्रदूषित।<br />यही पानी सब्जियों की खेती में हो रहा है इस्तेमाल और भोजन श्रृंखला के जरिए शरीर में पहुंच रहे हैं कैंसरजन्य तत्व।</p>
<p><strong>महिलाएं क्यों ज्यादा संवेदनशील?</strong><br />स्तन, अंडाशय, गर्भाशय और थायरॉइड जैसे हामार्न-संवेदनशील अंगों पर असर।<br />हामार्नल असंतुलन के कारण कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि।<br />महिलाओं में वसा ऊतक अधिक, जिससे रसायन लंबे समय तक शरीर में टिके रहते हैं।</p>
<p><strong>राजस्थान में प्रमुख कैंसर: (प्रतिशत के अनुसार)</strong><br />होठ, मुखगुहा और गला-31.55 प्रतिशत<br />पाचन अंग-14.90 प्रतिशत<br />स्तन कैंसर-12.17 प्रतिशत<br />श्वसन अंग-11 प्रतिशत<br />महिला जननांग- 8.19 प्रतिशत</p>
<p><strong>विशेषज्ञों की चेतावनी</strong><br />प्रदूषित जल और खाद्य श्रृंखला में मिले रसायन महिलाओं के लिए गंभीर खतरा हैं। इसकी रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।<br />- डॉ. एसजी काबरा, क्लिनिकल डायरेक्टर।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 09:31:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आनुवांशिक कारणों और कमजोर इम्यूनिटी से बच्चों में बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले, लक्षणों की पहचान जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों में होने वाले कैंसर का कोई एक स्पष्ट कारक नहीं है, लेकिन कुछ संभावित कारणों पर शोध किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/genetic-causes-and-weak-immunity-are-increasing-in-children/article-104314"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(4).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भूख ना लगना, बार-बार इन्फेक्शन होना, वजन कम होना जैसे लक्षण बच्चों में कई बार देखे जाते हैं। यह लक्षण बच्चों में होने वाले संभावित कैंसर की वजह हो सकते हैं। बच्चों में होने वाले कैंसर का कोई एक स्पष्ट कारक नहीं है, लेकिन कुछ संभावित कारणों पर शोध किया गया है। इनमें आनुवंशिक कारक, पर्यावरणीय कारणों से रेडिएशन, प्रदूषण और जहरीले रसायनों के संपर्क में आने एवं कमजोर इम्यून सिस्टम एक बड़ी वजह हैं।  ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी-2022 के अनुसार भारत में 26016 कैंसर रोगियों की पहचान प्रतिवर्ष हो रही है। राजस्थान में भी हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में नए कैंसर रोगियों की पहचान हो रही है। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि समय पर जांच और उपचार की शुरुआत से बच्चों को कैंसर मुक्त किया जा सकता है।</p>
<p><strong>बच्चों में बड़ों की तुलना में कैंसर का इलाज है चुनौतीपूर्ण :</strong></p>
<p>भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि बच्चों में होने वाले कैंसर वयस्कों के कैंसर से अलग होते हैं। ये आमतौर पर तेजी से विकसित होते हैं और इनके इलाज के लिए विशेष प्रकार की चिकित्सा की जरूरत होती है। बच्चों में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसर में ल्यूकेमिया यानी रक्त कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, लिंफोमा, न्यूरोब्लास्टोमा, विल्म्स ट्यूमर यानी किडनी कैंसर, रेटिनोब्लास्टोमा, ऑस्टियो सारकोमा और इविंग सारकोमा यानी हड्डियों का कैंसर प्रमुख है। इन बच्चों में सर्जरी भी बहुत चुनौतीपूर्ण होती है। हालांकि समय पर उपचार की शुरुआत से 80 फीसदी से अधिक बाल कैंसर रोगी कैंसर को हराकर सामान्य जीवन यापन करते हैं। </p>
<p>सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया कि बच्चों में कैंसर के कई लक्षण हैं, जिनमें अत्यधिक थकान और कमजोरी, बुखार रहना, असामान्य वजन घटना, हड्डियों या जोड़ों में दर्द, बार-बार संक्रमण होना, शरीर पर असामान्य सूजन या गांठ, रोशनी में गिरावट या सफेद चमक दिखना। लक्षण लंबे समय तक रहते हैं तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Feb 2025 10:30:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>WHO की रिसर्च में खुलासा : मोबाइल के इस्तेमाल से नहीं होता किसी तरह का कैंसर, रेडियो तरंगों और कैंसर के संपर्क के बीच संबंध पर नहीं मिले साक्ष्य </title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया भर में आम तौर पर यह धारणा है कि मोबाइल फोन के अधिक उपयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/who-research-does-not-disclose-any-kind-of-cancer-on/article-103143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/untitled-design7.png" alt=""></a><br /><p>'कैनबरा। दुनिया भर में आम तौर पर यह धारणा है कि मोबाइल फोन के अधिक उपयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से कराए गए एक ताजा शोध में इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया की परमाणु एवं विकिरण सुरक्षा एजेंसी (एआरपीएएनएसए) द्वारा किए गए शोध में मोबाइल फोन के उपयोग और विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है। डब्ल्यूएचओ द्वारा कराए गए और मंगलवार को प्रकाशित शोध के मुताबिक मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगों के संपर्क में आने पर किसी भी प्रकार का कैंसर नहीं होता है। शोध में मोबाइल और ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और थायरॉयड तथा मुंह के कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।</p>
<p>गौरतलब है कि यह एआरपीएएनएसए द्वारा की गई दूसरी डब्ल्यूएचओ-कमीशन व्यवस्थित समीक्षा है। सितंबर 2024 में प्रकाशित पहली समीक्षा में मोबाइल फोन के उपयोग और मस्तिष्क तथा अन्य सिर के कैंसर के बीच संबंध की खोज की गई और कोई संबंध नहीं पाया गया था। दोनों अध्ययनों के मुख्य लेखक एवं एआरपीएएनएसए में स्वास्थ्य प्रभाव आकलन के सहायक निदेशक केन कारिपिडिस ने बताया कि नए शोध में मोबाइल फोन, मोबाइल फोन टावरों और कैंसर के बीच संबंध पर सभी उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन किया गया है। उन्होंने बताया कि शोधकर्ताओं को रेडियो तरंगों के संपर्क और विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं मिला, लेकिन टीम मस्तिष्क कैंसर पर समीक्षा की तुलना में परिणामों के बारे में उतनी निश्चित नहीं हो सकती। कारिपिडिस ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि इन कैंसर और वायरलेस तकनीक से रेडियो तरंगों के संपर्क के बीच संबंध पर उतने साक्ष्य नहीं हैं।</p>
<p>अध्ययन में योगदान देने वाले एआरपीएएनएसए के वैज्ञानिक रोहन मेट ने बताया कि निष्कर्ष वायरलेस तकनीक और कैंसर के बारे में जनता को सूचित करने के लिए ज्ञान के भंडार में वृद्धि करेंगे। दोनों व्यवस्थित समीक्षाएं रेडियो तरंगों के संपर्क से स्वास्थ्य प्रभावों पर एक अद्यतन आकलन को सूचित करेंगी जिसे डब्ल्यूएचओ तैयार कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 16:20:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जागरूकता से ही होगा कैंसर पर नियंत्रण</title>
                                    <description><![CDATA[कैंसर बीमारियों का एक जटिल समूह है, जिसकी विशेषता असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि और प्रसार है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/cancer-will-control-cancer-only-with-awareness/article-103066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/untitled-design-(19).png" alt=""></a><br /><p>कैंसर बीमारियों का एक जटिल समूह है, जिसकी विशेषता असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि और प्रसार है। इसमें 100 से अधिक विभिन्न रोग शामिल हैं, जो शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करते है। ये कोशिकाएं ट्यूमर नामक द्रव्यमान का निर्माण कर सकती हैं। जो शरीर के सामान्य कामकाज में हस्तक्षेप कर सकती हैं। जबकि कैंसर किसी को भी प्रभावित कर सकता है। इन्हें कार्सिनोमा, सारकोमा, ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। इसके कारणों में आनुवंशिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली कारक शामिल हैं, जिनमें अस्पष्टीकृत वजन घटाने से लेकर लगातार थकान तक के लक्षण शामिल हैं। कैंसर की रोकथाम में जीवनशैली में बदलाव जैसे कि तंबाकू से परहेज, स्वस्थ आहार और टीकाकरण शामिल हैं। प्रभावी प्रबंधन और शुरुआती पहचान के लिए जागरूकता और ज्ञान महत्वपूर्ण है। कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। विश्व कैंसर दिवस का प्राथमिक लक्ष्य कैंसर और बीमारी के कारण होने वाली मौतों को कम करना है। 1933 में अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ ने स्विट्जरलैंड में जिनेवा में पहली बार विश्व कैंसर दिवस मनाया था। कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही घबराहट होने लगती है। कैंसर से पीड़ित व्यक्ति बीमारी से अधिक तो कैंसर के नाम से डर जाता है। जिस व्यक्ति को कैंसर होता है वह तो गंभीर यातना से गुजरता ही है उसके साथ ही उसका परिवार को भी बहुत कष्टमय स्थिति में गुजरना पड़ता है। जानलेवा होने के साथ ही कैंसर की बीमारी में मरीज को बहुत अधिक शारीरिक पीड़ा भी झेलनी पड़ती है। कैंसर की बीमारी इतनी भयावह होती है जिसमें मरीज की मौत सुनिश्चित मानी जाती है।</p>
<p>इस दिन कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने, लोगों को शिक्षित करने, इस रोग के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दुनिया भर में सरकारों और व्यक्तियों को समझाने तथा हर साल लाखों लोगों को मरने से बचाने के लिए मनाया जाता है। नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने कहा है कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में कैंसर की सही निगरानी नहीं हो पा रही है। जिस कारण अधिकांश मामलों में बीमारी का देरी से पता चल रहा है। देश के सभी शोध केंद्रों को पत्र लिख आईसीएमआर ने कैंसर की जांच और निगरानी को आसान बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे हैं। देश के सभी जिलों में कैंसर निगरानी और जांच को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान के तहत नई नीति बनाने के लिए आईसीएमआर को जिम्मेदारी सौंपी है। दुनिया भर में हर साल एक करोड़ से अधिक लोग कैंसर की बीमारी से दम तोड़ते हैं। जिनमें से 40 लाख लोग समय से पहले मर जाते हैं। इसलिए समय की मांग है कि इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ कैंसर से निपटने की व्यावहारिक रणनीति विकसित करनी चाहिए। 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों के बढ़कर प्रति वर्ष एक करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में 25 प्रतिशत कमी के लक्ष्य को हासिल किया जाए तो हर साल 15 लाख जीवन बचाए जा सकते हैं। </p>
<p>अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा कैंसर मरीज भारत में है। 2020 में 1.93 करोड़ नए कैंसर मरीज सामने आए हैं। जिनमें 14 लाख से अधिक भारतीय हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार देश में कैंसर के मामलों की संख्या 2022 में 14.6 लाख से बढ़कर 2025 में 15.7 लाख होने का अनुमान है। जिसके लिए सरकार को चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। तभी समय पर कैंसर मरीजों की जांच से पहचान कर सही उपचार कर देकर उनकी जान बचाई जा सकती है। भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की नैशनल कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़ें बताते हैं कि देश में 2023 में कैंसर के मामले 15 लाख तक पहुंच गए हैं। कैंसर रोग का इलाज करने वाले डॉक्टरों का भी मानना है कि यह खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कैंसर रोग की शुरुआती पहचान, जोखिम में कमी और प्रबंधन जैसे उपाय जरूरी है। हर 9 में से से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर होने की संभावना है। पुरुषों में फेफड़े और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के काफी मामले सामने आ रहे हैं। कैंसर का पता लगाने, कैंसर के प्रकार और कारण, डायग्नोस और उपचार में काफी प्रगति हुई है। लेकिन अफसोस की बात है कि दुनिया की ज्यादातर आबादी के पास अभी भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंच पाई हैं। </p>
<p><strong>-रमेश सर्राफ धमोरा </strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 11:17:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौलिक की प्रेरक कहानी: कैंसर हुआ, 23 कीमोथैरेपी, 31 रेडिएशन फ्रेक्शन के बाद नीट में 715 अंक</title>
                                    <description><![CDATA[मौलिक कैंसर मरीजों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए आँकोलॉजिस्ट बनना चाहता है। मौलिक का परिवार मुम्बई में घाटकोपर निवासी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/motivational-story-of-maulik-he-got-cancer-715-marks-in/article-80706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer-(12)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जिंदगी में जो कुछ भी हो, मैं हार नहीं मानता... हौसला होना जरूरी है, जीत के लिए सोचेंगे तभी जीतेंगे। सन् 2022 में मेरे जीवन में एक तूफान आया, यह इतना भयानक था, कि शायद जिंदगीभर भूला नहीं सकूंगा। मैं परिवार का सिंगल चाइल्ड हूं। झटका बहुत बड़ा था। सिलसिला यूरीनेशन के समय दर्द से शुरू हुआ। सोनोग्राफी में ट्यूमर और बायोप्सी जांच में कैंसर सामने आया। तब कक्षा 11 में था, इसके बाद जो इलाज का सिलसिला शुरू हुआ तो इस वर्ष अप्रैल में खत्म हुआ। मैं पॉजिटिव था और मुझे आगे बढ़ना था। पहले कैंसर को हराया और फिर परीक्षाएं दी।</p>
<p>यह कहना है स्टूडेंट मौलिक पटेल का, जिसने बीमारी से जूझते हुए बोर्ड और नीट परीक्षा क्रेक की। हाल ही में नीट रिजल्ट में मौलिक ने 720 में से 715 अंक प्राप्त किए। वहीं, महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड में 94.67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। अब मौलिक कैंसर मरीजों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए आँकोलॉजिस्ट बनना चाहता है। मौलिक का परिवार मुम्बई में घाटकोपर निवासी है।</p>
<p><strong>सरकोमा एक तरह का कैंसर हुआ</strong> <br />मई 2022 में मौलिक के शरीर में बदलाव आने शुरू हो गए। कमजोरी महसूस करने लगा। यूरीनेशन के समय दर्द के अलावा बुखार भी रहने लगा। मैं इन सबको लक्षणों को सामान्य समझ रहा था। हॉस्टल में रहता था तो स्थिति के बारे में रूममेट ने परिजनों को सूचित किया। डॉक्टरों को दिखाया। सोनोग्राफी एवं अन्य जांचों के बाद सामने आया यूरीनेशन ब्लैडर के पास एक ट्यूमर है, जो कि 10 सेंटीमीटर का था। सीटी स्कैन एवं बायोप्सी के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसे सरकोमा है। जो कि एक तरह का कैंसर है। परिवार को झटका लगा। क्योंकि मैं सिंगल चाइल्ड हूं और इतनी कम उम्र में कोई कैसे इतनी भयंकर बीमारी से पीड़ित हो सकता है। </p>
<p><strong>दो बार सर्जरी हुई, 12वीं की परीक्षा नहीं दी</strong> <br />मौलिक ने बताया कि मेरी जून 2022 में सर्जरी हुई थी। मुझे कैंसर का पता था, लेकिन ये नहीं पता था कि इसका ऑपरेशन इतना बड़ा था। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि यूरीनेरी ब्लैडर निकालना पड़ सकता है। सिर्फ इसी बात की डर था कि कहीं ऐसा नहीं हो जाए लेकिन, ऑपरेशन में डॉक्टरों ने ब्लैडर नहीं निकाला। इसके बाद कीमोथैरेपी की शुरुआत हुई, जिसमें रोजाना 3-4 घंटे लगते थे। इसी दौरान 12वीं की परीक्षा में प्रैक्टिकल देने का समय आ गया, लेकिन स्थिति सही नहीं थी इसलिए मैंने 12वीं बोर्ड एवं नीट परीक्षा दोनों ही नहीं दी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jun 2024 11:31:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व तंबाकू निषेध दिवस - कैंसर को आमंत्रण:डेढ़ करोड का गुटखा रोज खा रहा कोटा</title>
                                    <description><![CDATA[30 से 50 आयु वर्ग में बढ़ रहा मुंह व गले का कैंसर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-no-tobacco-day---invitation-to-cancer--kota-is-consuming-gutkha-worth-1-5-crores-every-day/article-80005"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/vishv-tambakoo-nishedh-diwas---cancer-ko-amantran,-dedh-crore-ka-guthka-roz-kha-rha-kota...kota-news-31-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा में नशे का कारोबार तेजी से अपने पैर पसार रहा है। यहां युवाओं में गुटका, सिगरेट और तंबाकू जनित सामग्री सेवन करने का चलने तेजी बढ़ रहा है। युवा अपना तनाव कम करने के लिए सिगरेट, गुटका और खैनी का सहारा ले रहे है। कोटा के एमबीएस अस्पताल में 30 से 40 साल के युवा मुंह, गला के कैंसर से ग्रसित होकर अस्पताल में भर्ती हो रहे है। गुटका व्यापारी सौरभ जैन ने बताया कि कोटा में प्रतिदिन गुटका, सिगरेट और अन्य तंबाकू जनित पदार्थो के रोज करीब डेढ़ करोड़ रुपए का माल बिक रहा है। कोटा में कोंचिग नगरी है यहां बच्चे पढ़ाई के लिए आते लेकिन पढ़ाई के दबाव में सिगरेट  गुटके का सेवन करने लगते है। इसलिए यहां गुटका, सिगरेट की खपत ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि  अगर आप एक दिन में एक सिगरेट पीते हैं या पांच ग्राम गुटखा चबाते हैं तो समझ लीजिए आपकी निर्धारित जिंदगी के 11 मिनट कम हो गए। यह हम नहीं कह रहे बल्कि कैंसर रोग विशेषज्ञों और डब्ल्यूएचओ का आंकलन है, जो कैंसर और हार्ट संबंधी बीमारियों की वजह तलाशने में जुटे हैं। कोटा में हर माह कैंसर वार्ड में 60 से 70 नये मरीज मुंह, गले के कैंसर के रोगी आ रहे है। जिसमें युवाओं की संख्या ज्यादा है। गुटका  धूम्रपान या अन्य किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन करने वालों को 40 तरह के कैंसर और 25 अन्य गंभीर बीमारियां होने की संभावना रहती है। इनमें हृदय रोग प्रमुख है। तंबाकू का 70 फीसदी अंश खून के साथ नसों में दौड़ता है, जो मौत का बड़ा कारण बनता है। कोटा में तंबाकू से मुंह और गले के कैंसर की चपेट में आने वाले सबसे अधिक युवा है, जिन्हें जागरूक करने के लिए हर साल कई कार्यक्रम किए जा रहे उसके बावजूद युवाओं में गुटका तंबाकू सेवन की लत बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों कहना है कि युवा तनाव के चलते नशे की ओर अग्रसर हो जाता है फिर यह लत उससे छूटती नहीं है और कैंसर का कारण बनती है।बहुत सारी बीमारी तंबाकू खाने की वजह से होती है जिसमें कैंसर ,हृदय संबंधी बीमारियां ,श्वसन संबंधी बीमारियां, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाना ,गर्भवती महिलाओं में गर्भपात का हो जाना शामिल है।</p>
<p><strong>30 आयु वर्ग के युवाओं  में संक्रमण का बढ़ रहा खतरा </strong><br />एमबीएस अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ व एचओडी डॉ.आर के तंवर ने बताया कि कोटा में हर माह 60 से 70 मरीज मुंह, गले कैंसर के आ रहे है। अस्पताल में आने वाले चार मरीजों में एक मरीज तंबाकू के सेवन वाला होता है। अस्पताल में मुंह, गला के कैंसर मरीज युवा, महिला पुरुष शामिल है। युवाओं में खैनी गुटका की लत से मुंह का कैंसर ज्यादा फैल रहा है। </p>
<p><strong>तंबाकू सेवन की वर्तमान स्थिति</strong><br />- देश में 70 फीसदी युवा मुख कैंसर की चपेट में हैं।<br />- वर्तमान में 50 प्रतिशत मुख कैंसर रोगी हैं। <br />- तंबाकू में 4000 घातक केमिकल होते हैं। <br />- 69 रसायन कैंसर व हृदय रोग के लिए जिम्मेदार।</p>
<p><strong>मुख कैंसर से कैसे बचें</strong><br />- धूम्रपान, पान मसाला एवं नशे से तुरंत दूरी बनाना ही एकमात्र उपाय है।<br />- गुटखा खाते हैं तो दांतों और मुंह की प्रतिदिन अच्छी तरह सफाई करें।</p>
<p><strong>बच्चों को तंबाकू उत्पादों से बचना थीम पर होगा काम</strong><br />इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिवस की थीम है कि बच्चों को तंबाकू उत्पादों व तंबाकू उद्योग से बचाना। दिन प्रतिदिन बच्चों में तम्बाकू का चलन बढ़ता जा रहा है जो समाज के लिए एक चिंता का विषय है।भारत में करीब 26 करोड से ज्यादा लोग तंबाकू का सेवन करते हैं जिसमें से करीब हर साल 10 लाख लोगों की तंबाकू सेवन से मौत हो जाती है। पूरे विश्व में एक अरब से ज्यादा लोग तंबाकू का सेवन करते हैं जिसमें से करीब 80 लाख लोग तंबाकू की वजह से मौत को प्राप्त हो जाते हैं ।<br /><strong>- डॉ. हर्ष गोयल कैंसर रोग विशेषज्ञ कोटा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा में तंबाकू सेवन करने वालों की तादात में हर साल इजाफा हो रहा है। जिसके चलते मुंह व गले के कैंसर के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 100 कैंसर के रोगियों में 25 से 30 महिला पुरुष मुख कैंसर के रोगी होते है। एमबीएस अस्पताल में महीने में 60 से 70 रोगी नये आ जाते है।  तंबाकू किसी भी रूप में लेने से इंसान की जिंदगी कम होती है। युवाओं को इस खतरे को समझना चाहिए। क्योंकि उनकी लगभग 60 फीसदी आबादी इस नशे की गिरफ्त में जा रही है।<br /><strong>- डॉ. आर के तंवर, एचओडी कैंसर यूनिट एमबीएस अस्पताल  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 May 2024 14:55:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैंसर के सस्ते उपचार के लिए तैयार होगा रोडमैप : शुभ्रा सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[ दुनिया में 17.9 प्रतिशत में से भारत में 9.9 प्रतिशत तथा राजस्थान में 9.3 प्रतिशत मृत्यु कैंसर से होती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/shubhra-singh-will-prepare-a-roadmap-for-cheap-treatment-of/article-78418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/shubhra-singh.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चिकित्सा विभाग की एसीएस शुभ्रा सिंह ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में गैर संचारी रोगों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का तेजी से प्रसार हुआ है और यह मृत्यु के प्रमुख कारणों के रूप में उभरा है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश में इसका गुणवत्तापूर्ण उपचार सस्ता एवं सुलभ हो। इसके लिए विभाग सभी संबंधित एजेंसियों का सहयोग लेते हुए रोडमैप बनाएगा। वे फिक्की के रोड मैप फॉर मेकिंग कैंसर केयर अफोर्डेबल एण्ड एक्सीसिबल इन इंडिया, राजस्थान राउण्ड टेबल कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि दुनिया में 17.9 प्रतिशत में से भारत में 9.9 प्रतिशत तथा राजस्थान में 9.3 प्रतिशत मृत्यु कैंसर से होती है। लीवर कैंसर की रोकथाम के लिए हैपेटाइटिस बी, सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी के टीके को यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम में रखा गया है। जिला अस्पतालों से लेकर उपस्वास्थ्य केन्द्र तक तीन प्रकार के कॉमन कैंसर जैसे ऑरल, ब्रेस्ट एवं सर्विकल कैंसर की स्क्रीनिंग भी नियमित रूप से की जा रही है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान प्रदेश में एक करोड़ से अधिक लोगों की कैंसर स्क्रीनिंग की गई। अजमेर, बीकानेर, भतरपुर, कोटा, जोधपुर एवं उदयपुर जोन हैडक्वार्टर पर एक-एक कैंसर वैन तथा जयपुर में दो सहित कुल 8 कैंसर वैन संचालित हो रही हैं। इस वैन में मेमोग्राफ्री, एक्सरें मशीन, कोलको स्कोपी, एण्डोस्कोपी के उपकरण उपलब्ध हैं। सीएसआर के माध्यम से इन कैंसर वैन की संख्या को बढ़ाकर जोन स्तर तक उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 May 2024 11:16:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते मामले चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[गैर संचारी रोग यानी कि एनसीडीज के तहत आने वाले कैंसर को लेकर लैंसेट कमीशन की ओर से हालिया जारी नई रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और 2040 तक हर साल इससे 10 लाख महिलाओं की मौत होने का खतरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-increasing-cases-of-cancer-around-the-world-are-worrying/article-76632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/cancer.png" alt=""></a><br /><p>गैर संचारी रोग यानी कि एनसीडीज के तहत आने वाले कैंसर को लेकर लैंसेट कमीशन की ओर से हालिया जारी नई रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और 2040 तक हर साल इससे 10 लाख महिलाओं की मौत होने का खतरा है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि 2020 तक पिछले पांच वर्षों में लगभग 78 लाख महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का पता चला था, जबकि उसी साल इस बीमारी से करीब 6.85 लाख महिलाओं की मौत हो गई थी। रिपोर्ट कहती है कि दुनियाभर में औसतन हर 12 महिलाओं में से एक को 75 साल की उम्र से पहले ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2020 में दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के 23 लाख मामले सामने आए थे, जो 2040 तक बढ़कर 30 लाख से अधिक हो सकते हैं।</p>
<p>असल में कैंसर की बीमारी से दुनियाभर में होने वाली मौतें दूसरे स्थान पर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा कैंसर मरीज भारत में हैं। साल 2022 में दुनिया में 1.93 करोड़ नए कैंसर मरीज सामने आए हैं, जिनमें 14 लाख से अधिक भारतीय हैं। इतना ही नहीं, भारत में सालाना बढ़ते कैंसर के मामलों के चलते 2040 तक इनकी संख्या में 57.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी होने की आशंका है। कैंसर से भारत में साल 2020 में 7.70 लाख, 2021 में 7.89 लाख और 2022 में 8.08 लाख रोगियों की मौत हुई है। देश में कैंसर के मामलों की कुल संख्या साल 2022 में 14.61 लाख रही। वहीं 2021 में यह 14.26 लाख और 2020 में 13.92 लाख रही। भारत के हर 10 में से एक व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में कैंसर से जूझता है और 15 में एक की मृत्यु इस बीमारी से हो जाती है। भारत में हर साल करीब 15 लाख कैंसर से जुड़े मामले रिपोर्ट किए जाते हैं।</p>
<p><strong>आखिर कैंसर क्या है?</strong> असल में शरीर में होने वाली असामान्य और खतरनाक स्थिति, जिसमें कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है, उसे कैंसर कहते हैं। हमारे शरीर में कोशिकाओं का लगातार विभाजन होना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिस पर शरीर का पूरा नियंत्रण रहता है, लेकिन जब किसी विशेष अंग की कोशिकाओं पर शरीर का नियंत्रण नहीं रहता है, तो वे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। इसे ही कैंसर कहा जाता है। ज्यादातर कैंसर ट्यूमर के रूप में होते हैं, लेकिन ब्लड कैंसर के मामले में ट्यूमर नहीं होता है। एक बात यह भी ध्यान रखने योग्य है कि हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता है। भारत में कैंसर के प्रकार में छह तरह के कैंसर ज्यादा होते हैं, जिसमें फेफड़ों का कैंसर, मुंह का कैंसर, पेट का कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर शामिल है।</p>
<p>आसान शब्दों में कहें तो कैंसर शरीर में होने वाली असामान्य स्थिति है, जिसमें कोशिकाएं असाधारण रूप से बढ़ने लगती हैं और बढ़ी हुई चर्बी की एक गांठ बन जाती है, जिसे ट्यूमर कह सकते हैंं। यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। आमतौर पर कैंसर में होने वाले ट्यूमर दो तरह के होते हैं। पहला बिनाइन ट्यूमर और दूसरा मैलिग्नैंट ट्यूमर। मैलिग्नैंट ट्यूमर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलता है, जबकि बिनाइन नहीं फैलता है। सभी कैंसर के लक्षण उसके प्रकार और स्थान के अनुसार अलग-अलग होते हैं, लेकिन कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जो देखे जा सकते हैं जैसे शरीर का वजन अचानक कम होना या बढ़ना, ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना, त्वचा में गांठ बनना या रंग में बदलाव होना, पाचन संबंधी समस्या, कब्ज या दस्त होना, आवाज बदलना, जोड़ों-मांसपेशियों में दर्द, घाव ठीक होने में समय लगना, भूख कम लगना, लिम्फ नोड्स में सूजन आदि।</p>
<p>यूं तो कैंसर होने के पीछे कोई ज्ञात कारण नहीं है, लेकिन कुछ पदार्थ जिन्हें कार्सिनोजन कहा जाता है, वे प्रमुख कारणों में से एक हैं। ये कारक कैंसर होने की संभावना को बढ़ाते हैं। कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में तंबाकू या उससे बने उत्पाद जैसे सिगरेट, गुटखा या चुइंगम आदि का लंबे समय तक सेवन फेफड़े या मुंह के कैंसर का कारण बन सकता है। लंबे समय तक शराब पीना लिवर कैंसर को बढ़ावा देता है। साथ ही शरीर के अन्य कई हिस्सों में कैंसर के खतरे को बढ़ावा देता है। कैंसर के लिए जीन भी एक प्रमुख कारण है। यदि परिवार में किसी को कैंसर का इतिहास है, तो इस बीमारी के होने की संभावना ज्यादा होती है। वायरस जो कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं, उनमें हेपेटाइटिस बी और सी होते हैं, जो 50 प्रतिशत तक लिवर कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं। साथ ही ह्यूमन पैपिलोमा वायरस 99.9 प्रतिशत मामलों में सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं। अनहेल्दी फूड्स या रिफाइंड खाद्य पदार्थ, जिनमें फाइबर की मात्रा कम होती है, वे कोलन कैंसर की संभावना को बढ़ाते हैं। बार-बार एक्स-रे करवाने के कारण भी रेडिएशन के सम्पर्क में आने से कैंसर होने के खतरे को बढ़ावा मिलता है।<br /><strong>-अमित बैजनाथ गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 11:09:53 +0530</pubDate>
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                <title>बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कैंसर से है पीड़ित</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कैंसर से पीड़ित हैं और एम्स में उनका उपचार चल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/former-deputy-chief-minister-of-bihar-sushil-kumar-modi-is/article-74361"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/sushil-modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कैंसर से पीड़ित हैं और एम्स में उनका उपचार चल रहा है। पिछले छह महीने से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे सुशील ने सोशल मीडिया एक्स पर स्वयं यह जानकारी साझा की है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि अब वह लोगों को अपनी बीमारी के बारे में बताने का सही समय समझते हैं।</p>
<p>लोकसभा चुनाव में वह ज्यादा कुछ नहीं कर पाएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बारे में सब कुछ बता दिया है। उन्होंने आगे कहा कि वह देश, बिहार और पार्टी के प्रति समर्पित हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पूर्व उपमुख्यमंत्री गले के कैंसर से पीड़ित हैं तथा दिल्ली एम्स में उनका ईलाज चल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 18:01:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सिर्फ 100 रुपए की दवा से दोबारा नहीं होगा कैंसर</title>
                                    <description><![CDATA[फिलहाल चूहों पर हुआ परीक्षण, इंसानों पर परीक्षण पूरा करने में लगेंगे पांच साल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cancer-will-not-recur-with-just-rs-100-medicine/article-71430"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/cancer.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर के चिकित्सकों ने चूहों पर ट्रायल कर ऐसी दवा का कॉम्बिनेशन बनाने का दावा किया है, जो इंसान में कैंसर को दोबारा होने से रोकेगी। साथ ही रेडिएशन और कीमोथैरेपी के साइड इफेक्ट को भी 50 फीसदी तक कम किया जा सकेगा। सेंटर के चिकित्सकों का दावा है कि इस दवा पर 10 साल रिसर्च हुई है और इसे जादुई खुराक नाम दिया गया है। फिलहाल इस दवा का परीक्षण चूहों पर हुआ है और इंसानों पर परीक्षण पूरा करने में पांच साल और लगेंगे। यह दवा सिर्फ 100 रुपए में उपलब्ध होगी और इस साल जून-जुलाई माह तक इसके मिलने की आशा है। हालांकि जयपुर के सीनियर कैंसर एक्सपर्ट्स का मानना है कि दवा का इतना जल्दी आना संभव नहीं है। अभी इसके ट्रायल चूहों पर ही सफल हुए हैं और मानव ट्रायल के बाद ही तस्वीर पूरी तरह से साफ  हो सकेगी। </p>
<p><strong>रेस्पिट्रोल और कॉपर के कॉम्बिनेशन से तैयार हुई दवा</strong><br />भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के सीनियर मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. ताराचंद गुप्ता ने बताया कि टीएमसी के डॉक्टर्स ने जिस दवाई के कॉम्बिनेशन को बनाने का दावा किया है वह रेस्पिट्रोल और कॉपर को मिलाकर किया गया है। इंसानों पर इसका ट्रायल सफल होने पर ही इसकी गाइडलाइंस स्पष्ट होंगी। हम भी आशा करते हैं कि परिणाम सकारात्मक आए जिससे मरीजों को राहत मिले। </p>
<p><strong>राजस्थान में कैंसर पर एक नजर</strong><br />देश में कैंसर रोगियों के मामले में राजस्थान 7वें स्थान पर है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के तहत 2022 के आंकड़ों के अनुसार देश में 14.61 लाख कैंसर रोगी हैं। इनमें सबसे ज्यादा 2.10 लाख मरीज उत्तरप्रदेश के हैं। राजस्थान 74 हजार 725 रोगियों के साथ देश में 7वें स्थान पर है। कैंसर से मौतों में राजस्थान 41167 मौतों के साथ 8वें स्थान पर है। राजस्थान में वर्ष 2020 से 2022 के बीच रोगियों की संख्या 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है। वर्ष 2020 में 70 हजार 987 नए रोगी मिले जो 2022 में बढ़कर 74 हजार 725 हो गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Feb 2024 10:24:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेशी गायिका सबीना यास्मीन कैंसर से पीड़ित</title>
                                    <description><![CDATA[सबीना ने 2007 में गैर-हॉजकिन लिंफोमोरल कैंसर को हरा दिया था और सामान्य जीवन जीने लगी थीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/bangladeshi-singer-sabina-yasmin-suffering-from-cancer/article-71134"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(23)2.jpg" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश की प्रख्यात गायिका सबीना यास्मीन के मुंह के कैंसर ने दोबारा सिर उठा लिया है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें 17 वर्ष पहले कैंसर हुआ था, जो उपचार के बाद ठीक हो गया था।  </p>
<p>स्थानीय अखबार द डेली स्टार ने रविवार को परिवार के सदस्यों के हवाले से बताया कि सबीना (69) के मुंह की सर्जरी हुई है और अब उनका सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल के नेशनल कैंसर सेंटर में इलाज चल रहा है। सबीना ने 2007 में गैर-हॉजकिन लिंफोमोरल कैंसर को हरा दिया था और सामान्य जीवन जीने लगी थीं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 50 वर्षों से अधिक समय से संगीत से जुड़ी सबीना को बांग्लादेश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार स्वाधीनता पुरस्कार और दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, एकुशे पदक से सम्मानित किया गया है। उन्हें 2019 में कोलकाता में कोलकाता उत्सव के आयोजकों द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Feb 2024 16:35:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एसएमएस : रोबोट के जरिए अग्नाशय के कैंसर की डबल बायपास सर्जरी </title>
                                    <description><![CDATA[ जनरल सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुमिता ए. जैन ने बताया कि मरीज का कैंसर ऑपरेशन से निकालने की स्टेज से आगे बढ़ गया था और इसलिए इसके पहले कीमोथैरेपी दी गई और फिर डबल बायपास करके ट्यूमर कारण आंतों में हो रही रुकावट को बायपास किया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/double-bypass-surgery-of-pancreatic-cancer-through-sms-robot/article-64920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/dsc_9175.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सवाईमानसिंह अस्पताल में अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित 45 वर्षीय मरीज की डबल बायपास सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया गया है। मरीज पिछले एक साल से एडवांस पेनक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित था और इस कारण उसको खाना पचाने एवं पेट में खाना आगे जाने में रुकावट महसूस होती थी। जनरल सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुमिता ए. जैन ने बताया कि मरीज का कैंसर ऑपरेशन से निकालने की स्टेज से आगे बढ़ गया था और इसलिए इसके पहले कीमोथैरेपी दी गई और फिर डबल बायपास करके ट्यूमर कारण आंतों में हो रही रुकावट को बायपास किया गया। यह ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के जरिए किया गया। इसके बाद मरीज अब पूर्णतया स्वस्थ है और अब मरीज ट्यूमर के इलाज के लिए रेडिएशन थैरेपी ले रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Dec 2023 10:02:52 +0530</pubDate>
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