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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 35 - संकरी नालियां, खाली प्लॉट, सफाई अव्यवस्था, पार्क का अभाव स्थानीय लोगों के लिए बना परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रांसफॉर्मर  के चारों ओर न दीवार न सुरक्षा व्यवस्था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-35---narrow-drains--vacant-plots--poor-sanitation--and-lack-of-parks-cause-problems-for-local-residents/article-130755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगम दक्षिण के वार्ड 35 में पार्षद द्वारा समय-समय पर विकास के कार्य करवाए गए हैं। वहीं विकास कार्य करवाने के लिए पार्षद ने अपनी आवाज बोर्ड बैठक में भी मुखर की है। वार्ड की कुछ गलियों में नालियां संकरी होने से वार्डवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वार्डवासियों ने बताया कि सोमवार को हुई बारिश के कारण नालियां ओवरफ्लो हो गईं। जिससे गंदा पानी सड़क पर बहता रहता है जो कि राहगीरों व बाइक सवारों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। वहीं वार्ड की राजपूत कॉलोनी में स्थित ट्रांसफॉर्मर के चारों तरफ दीवार व सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कभी भी हादसा हो सकता है। वहीं वार्ड की गलियों में कुछ लोगों ने मनमर्जी से रोड पर स्पीड ब्रेकर बना लिए जो कि अब हादसे का कारण बने हुए हैं।</p>
<p><strong>खाली प्लॉट बने परेशानी</strong><br />वार्ड में कुछ प्लॉट आबादी के बीच खाली पड़े हुए हैं, जो अब वार्डवासियों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। कुछ लोगों ने बताया कि सोमवार को हुई बारिश से इन प्लॉटों में पानी भर जाता है, साथ ही इनमें पहले से पड़ा कचरा बारिश से गीला हो जाता है। जिससे बदबू आती है और जलीय जानवर इनमें से बाहर निकलकर घर की दहलीज तक आ जाते हैं। जिससे डर का साया बना रहता है।</p>
<p><strong>पार्क का अभाव </strong><br />वार्ड में पार्क नहीं होने के कारण वार्ड में निवास करने वाले लोगों व बच्चों को खेलने व मनोरंजन के लिए अन्य जगहों पर जाना पड़ता है। बशीर अहमद ने बताया कि मेरे पोते को खिलाने के लिए रोड पार करके अन्य जगह पर ले जाना पड़ता है, जिससे परेशानी होती है।</p>
<p><strong>नालियों की कम गहराई बनी परेशानी </strong><br />वार्ड में रहने वाले बाबू बना, असलम सहित अन्य ने बताया कि हमारी गली सहित लगभग वार्ड की हर गली में नालियों की गहराई कम होने के चलते नालियां जल्दी भर जाती हैं। आज हुई थोड़ी सी बारिश के चलते नालियां ओवरफ्लो हो गईं और गंदा पानी रोड पर बहता रहा जो कि परेशानी का सबब बना हुआ है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br /> आमीर कॉलोनी, धोसी मोहल्ला, राजपूत कॉलोनी, देव कॉलोनी, अनन्तपुरा कच्ची बस्ती इत्यादि क्षेत्र।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />वार्ड में सुबह समय से कचरा गाड़ी आती है। पार्षद द्वारा समय-समय पर वार्ड का निरीक्षण किया जाता है। <br /><strong>- असलम, वार्डवासी </strong></p>
<p>हमारी कॉलोनी में प्रतिदिन रोड की साफ-सफाई होती है। साथ ही कचरा गाड़ी भी आती है।<br /><strong>- निर्भय गुर्जर</strong></p>
<p>हमारी तरफ काफी दिनों से हैंडपंप खराब हो रहा है, जिसके चलते परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्ड में नालियों की गहराई कम होने के चलते गंदा पानी सड़क पर बहता है।<br /><strong>- मुकेश विश्वकर्मा</strong></p>
<p>वार्ड में जगह नहीं होने के कारण पार्क का अभाव बना हुआ है। और सरकार द्वारा विकास के लिए बजट नहीं देने के कारण समस्याएं बनी हुई हैं। <br /><strong>- जरीना, वार्ड पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Oct 2025 14:31:38 +0530</pubDate>
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                <title>कॉलोनियों के बीच खाली प्लॉट बने क्रोकोडाइल प्वाइंट, वर्द्धमान कॉलोनी के प्लॉटों में भरा 4 से 7 फीट पानी </title>
                                    <description><![CDATA[शाम ढलते ही कॉलोनियों में सन्नाटा, दहशत में कट रही  क्षेत्र के बाशिंदों की रात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-between-colonies-have-become-crocodile-hotspots--and-vardhaman-colony-s-plots-are-filled-with-4-to-7-feet-of-water/article-127217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुन्हाड़ी व बोरखेड़ा क्षेत्र की कॉलोनियों के बाशिंदे इन दिनों मगरमच्छ के आतंक से दहशत में हैं।  इन इलाकों में बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं, जिनमें 4 से 6 फीट तक बरसात का पानी भरा हुआ है। निकासी नहीं होने से मगरमच्छों का अड्डा बन गए। बीच-बीच में पानी से बाहर निकल धूप सेंकते नजर आ रहे हैं। रात को शिकार की तलाश में कॉलोनियों की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। हालात यह हो गए, शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। बच्चों को खेलना व बुजुर्गों का टहलना बंद हो गया।  क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मगरमच्छों का रेस्क्यू करने की गुहार लगाई लेकिन साधन संसाधनों से वंचित वनकर्मियों ने पानी में मगर से बैर लेने में असमर्थता जताई। ऐसे में रहवासी  दहशत के बीच रहने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>दहशत में कट रही रात </strong><br />पार्षद बलविंदर सिंह बिल्लू ने बताया कि कुन्हाड़ी क्षेत्र की वर्द्धमान कॉलोनी के आसपास बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं। इनमें 4 से 6 फीट पानी भरा हुआ है, जो मगरमच्छ  छिपे हुए हैं। दोपहर को नजर आते हैं फिर वापस पानी में चले जाते हैं। रात में सड़कों पर दौड़ते हैं। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। रोड लाइटें खराब होने से कॉलोनी में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में मगरमच्छ के घरों में घुसने व राहगीरों पर हमले का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>सुबह से रात तक चलाया पम्पसेट, 2 फीट पानी निकाला</strong><br />पार्षद बिल्लू ने बताया कि खाली प्लॉटों में कमर तक पानी भरा हुआ है। जिसे निकालने के लिए एक बड़ा मड पम्प लगाया है।  सुबह 10 से रात 8 बजे तक लगातार चलाकर पानी बाहर निकाला गया। जब तक पूरा पानी नहीं निकलेगा तब तक मगरमच्छ का रेस्क्यू संभव नहीं होगा। हालांकि, क्षेत्रवासियों की सूचना पर  मंगलवार देर रात फोरेस्ट की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन मगरमच्छ के वापस पानी में चले जाने से रेस्क्यू नहीं हो सका। हालात यह हैं, पिछले 6 दिन से लोग दहशत में हैं। </p>
<p><strong>इधर, डीसीएम क्षेत्र में युवकों ने पकड़ा 5 फीट लंबा मगरमच्छ</strong><br />डीसीएम इलाके के सूर्य नगर की सड़क पर 5 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया, जिसे स्थानीय व्यक्तियों ने पकड़कर बोरखण्डी के नाले में छोड़ दिया। घटना तड़के 4 बजे की है। रेस्क्यू के बाद एक व्यक्ति ने मगरमच्छ को कंधे पर उठाकर वीडियो-फोटो खिंचवाया। फिर नाले में रिलीज किया। व्यक्ति का फोटो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मगरमच्छ सड़क पर दौड़ता हुआ कार के टायर के पास चला गया। मौके पर मौजूद व्यक्तियों ने मगरमच्छ की आंख पर बोरी फेंककर उसे काबू किया। लाडपुरा रेंजर इंद्रेश सिंह ने बताया कि टीम ने कैथून इलाके में मगरमच्छ पकड़ा है। सूर्य नगर में मगरमच्छ आने की जानकारी नहीं है। जिस व्यक्ति ने सूर्य नगर में मगरमच्छ पकड़ा उसने विभाग को सूचना नहीं दी। उसके बारे में पता किया जा रहा है।</p>
<p><strong>बोरखेड़ा : पार्वती कॉलोनी में भी दहशत </strong><br />पार्वती कॉलोनी निवासी अरबाज ने बताया कि कॉलोनी में  खाली प्लॉटों में 3 से 4 फीट पानी भरा हुआ है। जिनमें मगरमच्छ पनप रहे हैं। रात को घर की छत से टॉर्च लगाकर देखा तो भारी-भरकम मगरमच्छ पानी से बाहर निकल सड़क पर जाता नजर आया। हाल ही में सड़क पर दौड़ता नजर आया था। इसी तरह देवली अरब, काला तलाब, नम्रता आवास सहित अन्य कॉलोनियों में आए दिन मगरमच्छ आने की घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>अलग-अलग प्लॉटों में छिपे मगरमच्छ</strong><br />स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, उपेंद्र यादव, सार्थक नागर ने बताया कि वर्द्धमान कॉलोनी में ही सड़क के दोनों तरफ खाली पड़े प्लॉट पानी से लबालब हैं। यहां तीन से चार मगरमच्छ नजर आए हैं। रोड लाइटें भी खराब है, अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में घर से बाहर निकले के दौरान मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। जिसकी वजह से बच्चों का खेलना भी छूट गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 14:56:17 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा एक हजार सरकारी स्कूलों में दो हजार पद खाली</title>
                                    <description><![CDATA[खाली पड़े पदों के कारण एक ओर विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है साथ ही प्रशासनिक कामों में भी परेशानी होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota--two-thousand-posts-vacant-in-one-thousand-government-schools/article-74788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/kota-ek-hazaar-sarkari-schoolo-me-do-hazaar-pd-khali...kota-news-09-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजकीय विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार की ओर से अनेक प्रयास किए जाते हैं। एक विद्यालय के निर्माण में सबसे जरूरी शिक्षक और विद्यार्थी होते हैं, क्योंकि एक विद्यालय शिक्षक और विद्यार्थियों से मिलकर ही बनता है। लेकिन कोटा के 1 हजार 56 विद्यालयों में विद्यार्थी तो हैं लेकिन उनकी संख्या के मुकाबले शिक्षक कम हैं। सरकार की ओर से 4 अप्रैल को प्रस्तुत किए गए वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 के अनुसार कोटा के प्रारंभिक और माध्यमिक विद्यालयों में 1 हजार 420 शिक्षकों सहित विभिन्न वर्गों के 2 हजार 1 पद रिक्त हैं। विद्यालयों में रिक्त पदों में प्रथम श्रेणी के शिक्षकों से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के पद शामिल हैं। इसी तरह प्रदेश स्तर पर भी 1 लाख 43 हजार 166 पद खाली पड़े हैं। वहीं पदों के कारण एक ओर विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है साथ ही प्रशासनिक कामों में भी परेशानी होती है। इसके साथ ही इन पदों को भरने से जिले व राज्य के कई बेराजगारों को रोजगार दिया जा सकता है।</p>
<p><strong>जिले में इतने पद खाली</strong><br /><strong>पद                                     स्वीकृत    भरे    रिक्त</strong><br />प्रिंसिपल                                 333    251    82<br />ग्रेड 1 शिक्षक                         1145    870    275<br />ग्रेड 2 शिक्षक                         2114    1690    424<br />ग्रेड 3 शिक्षक                         5030    4466    564<br />पीटीआई                                 507    448    59<br />लेब असिस्टेंट                            89    73    16<br />सहायक प्रशासनिक अधिकारी      73    62    11<br />प्रशासनिक सहायक                  371    326    45<br />लाइब्रेरीयन                                82    41    41<br />चतुर्थ श्रेणी                              557    118    439</p>
<p><strong>व्यख्याता से लेकर चतुर्थ श्रेणी के पद खाली</strong><br />कोटा जिले में शिक्षा विभाग के अधीन करीब 1 हजार 56 विद्यालय संचालित हैं जिनमें से 716 विद्यालय प्रारंभिक और 340 माध्यमिक विद्यालय हैं इन सभी विद्यालयों में शिक्षकों के कुल 1 हजार 420 और प्रशानिक कार्यों के लिए 581 पद खाली पड़ हैं। इन विद्यालयों में खाली पड़े पद में कई विद्यालयों में गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत और अंग्रेजी के व्यख्याताओं और शिक्षकों के पद खली पड़ हैं। कोटा शहर के दादाबाड़ी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के व्याख्याता स्वीकृत मात्र एक पद, लाइब्रेरीयन, हिंदी, उर्दू और चतुर्थ श्रेणी के दोनों पद सहित कुल 6 पद खाली हैं, कंसुआ स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत, सामाजिक विज्ञान के व्याख्याता और चतुर्थ श्रेणी के दोनों पद सहित कुल 5 पद खाली हैं, रामपुरा स्थित छोटी महारानी राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में अंग्रेजी विषय के व्यख्याता व लेवल 1 के शिक्षक सहित कुल 4 पद खाली हैं, गुमानपुरा स्थित महात्मा गांधी मल्टीपरपज विद्यालय में भी सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी, लेवल 1 शिक्षक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद खाली है। इसी तरह कोटा के कई बड़े राजकीय विद्यालयों में व्याख्याताओं सहित विभिन्न वर्गों के पद खाली पड़े हैं।</p>
<p><strong>पढ़ाई होती है प्रभावित</strong><br />विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपलब्धता होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिसमें विद्यालयों में विभिन्न विषयों के शिक्षक नहीं होने से उन्हें या तो किसी दूसरे शिक्षक से पढ़ना पढ़ रहा है या उसके लिए कोचिंग लगानी पड़ रही है। वहीं विद्यार्थियों का कहना है कि विद्यालयों में जो शिक्षक कार्यरत हैं वो भी पूरी कक्षाएं नहीं लेते हैं ऐसे में कैसे पढ़ाई करें हमेशा इसकी दुविधा बनी रहती है। </p>
<p><strong>वर्षों से खाली पड़े हैं पद</strong><br />जिले के कई विद्यालयों में तो कई पद सालों से खाली पड़े हैं जिन्हें अभी तक नहीं भरा जा सकता है। विभाग की माने तो कोटा जिले के 1 हजार 56 में से 570 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें व्याख्याताओं, लाइब्रेरीयन, लेब सहायक ओर चतुर्थ श्रेणी के पद करीब तीन सालों से रिक्त हैं। वहीं सरकार की ओर से जो नई भर्तियां निकाली जाती हैं वो रिक्त पदों की तुलना में कम होती हैं। जिससे पूर्व में रिक्त पद भर नहीं पाते और नए फिर खाली हो जाते हैं। </p>
<p><strong>विद्यार्थियों का कहना है</strong><br />सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को ठीक करने के लिए शिक्षकों के पदों का भरा होना आवश्यक है हमारे विद्यालय में एक ही अंग्रेजी के शिक्षक हैं सभी कक्षाओं को उन्हीं से पढ़ना पड़ता है ऐसे में कभी कभी कक्षा ही नहीं लग पाती है।<br /><strong>- देवेंद्र गुर्जर, छात्र, दादाबाड़ी</strong></p>
<p>विद्यालय में प्रयोगशाला है लेकिन लेब असिस्टेंट ही नहीं है जिसकी वजह से प्रयोगशाला होने के बाद भी उसका कोई लाभ नहीं मिल पाता है। सरकार को जहां प्रयोगशाला है कम से कम उन विद्यालयों में तो लेब असिस्टेंट के पद भरने चाहिए।<br /><strong>- मुकेश कुमार, भीमगंजमंडी</strong></p>
<p>विद्यालय में विज्ञान संकाय है लेकिन विज्ञान संकाय के शिक्षक ही नहीं है, एक ही शिक्षक हैं जो रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान दोनों पढ़ाती हैं। दोनों विषयों के अलग अलग शिक्षक हो तो हमें भी नया सीखने को मिले।<strong> -अमन कुमावत, कुंहाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्कूलों में लगभग सभी महत्वपूर्ण पदों पर व्यक्ति नियुक्त है। वहीं शिक्षकों की भर्ती करना राज्य सरकार का काम है। जिसमें कई प्रधानाध्यापक और व्याख्याता सहित कई पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला माध्यमिक शिक्षा अधिकारी कोटा</strong></p>
<p>रिक्त पदों की जानकारी है सरकार के स्तर पर भर्ती प्रकिया प्रोसेस में है उसके बाद देखेंगे कितने कर्मचारी मिलते हैं। मौजूद रिक्त पदों की जानकारी विभाग को भेजी हुई है।<br /><strong>- यतीश विजयवर्गीय, जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Apr 2024 16:09:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा के 5 कॉलेजोें में नहीं लगती 13 विषयों की क्लास</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी लेकिन उनमें शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/classes-of-13-subjects-are-not-held-in-5-colleges-of-kota/article-58867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kota-me-5-collego-me-nhi-lgti-13-vishyo-ki-classes...kota-news-06-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले के पांच राजकीय महाविद्यालयों में एक दर्जन से अधिक  विषयों की कक्षाएं नहीं लगती है। जबकि, इन सब्जेक्ट में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। कॉलेज आयुक्तालय ने इस बार सरकारी कॉलेजों में विद्या संबल पर शिक्षक नहीं लगाए। जबकि, राजसेस सोसायटी द्वारा संचालित नए कॉलेजों में लगा दिए हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में चल रहे गवर्नमेंट कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें राजकीय महाविद्यालय इटावा, सांगोद, कनवास, रामगंजमंडी शामिल हैं। वहीं, संभाग का सबसे बड़ा वाणिज्य महाविद्यालय कोटा में लंबे समय से बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन  विषय का शिक्षक ही नहीं है। कक्षाएं नहीं लगने से विद्यार्थियों का न तो कोर्स पूरा हो पा रहा और न ही परीक्षा की तैयारी हो पा रही। जबकि आगामी जनवरी माह में यूजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा होनी है। </p>
<p><strong>क्वांटिटी बढ़ाई, क्वालिटी घटाई</strong><br />शिक्षाविद् बताते हैं, सरकार ने कॉलेजों की संख्या तो बढ़ा दी लेकिन उनमें शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरे। जिससे महाविद्यालयों का शैक्षणिक स्तर कमजोर हो गया। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यहां शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही। जिसका खामियाजा यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। जिले के सरकारी महाविद्यालयों में सबसे ज्यादा आट्स के विषय अध्यापकों की कमी है। कहीं पोलिटिकल साइंस, ज्योग्राफी, अंग्रेजी तो कहीं इतिहास की क्लासें ही नहीं लगती। ऐसे में 10 से 15 किमी दूर से महाविद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को मायूस लौटना पड़ता है। कोटा जिले के इटावा और हिंडौली राजकीय महाविद्यालयों में करीब ढाई साल से अंग्रेजी की कक्षाएं लगी ही नहीं। जबकि, दोनों कॉलेजों को मिलाकर 1000 से ज्यादा स्टूडेंटस का नमांकन रहता है। इटावा कॉलेज के पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य नरेंद्र मीणा ने बताया कि यहां वर्ष 2021 तक अंग्रेजी के शिक्षक थे। उनका ट्रांसफर होने के बाद अंग्रेजी का दूसरा कोई शिक्षक नहीं लगाया गया। पूर्व में विद्या संबल योजना के तहत विज्ञप्ती भी निकाली थी लेकिन यूजीसी नियमानुसार नेट या सेट योग्यता निर्धारित होने से एक भी शिक्षक का आवेदन नहीं मिला। जिसके कारण क्लासें नहीं लग पाती। यही कहानी हिंडौली कॉलेज की भी है। यहां कार्यवाहक प्राचार्य रमेशचंद मीणा के अलावा वर्तमान में एक भी शिक्षक नहीं है। </p>
<p><strong>ज्योग्राफी से इतिहास तक नहीं पढ़ पा रहे छात्र</strong><br />कार्यवाहक प्राचार्य ललित नामा ने बताया कि कनवास आर्ट्स कॉलेज में वर्ष 2021 के बाद से ही ज्योग्राफी और राजनेतिक विज्ञान की फैकल्टी नहीं है। ऐसे में इन विषयों की कक्षाएं नहीं लग पाती। हालांकि, जिले के रे-सेंटर को पत्र लिखने पर 6 दिन के लिए संबंधित विषय के शिक्षक लगा दिए जाते हैं लेकिन निर्धारित दिन के बाद वापस कक्षाएं खाली रह जाती है। इस बार विद्या संबल पर भी शिक्षक नहीं लगाए गए, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान होता है। प्राचार्य के पद पर रहते हुए मैं संस्कृत पढ़ा रहा हूं, लेकिन विद्यार्थियों को उतना समय नहीं दे पाता, जितना देना चाहिए। इस बीच प्रशासनिक कार्य भी करने पड़ते हैं।  </p>
<p><strong>विद्यार्थियों की पीड़ा-कैसे करें परीक्षा की तैयारी </strong><br />राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी के छात्र चेतन भार्गव का कहना है कि वे बीकॉम प्रथम वर्ष में अध्ययनरत हैं। यहां बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की कक्षाएं नहीं लगती है। तीन माह बाद परीक्षा है, ऐसे में इसकी तैयारी नहीं हो पा रही। रिजल्ट बिगड़ने की आशंका लगी रहती है। वहीं, सांगोद कॉलेज के छात्र मुकेश नागर, कैलाश मीणा ने बताया कि घर से 15 किमी से कॉलेज आते हैं लेकिन यहां राजनेतिक विज्ञान , भूगोल पढ़ने को नहीं मिलती। ऐसे में कॉलेज जाने में समय व्यर्थ होता है। इटावा कॉलेज के भूदेव शर्मा, अखिलेश कुमार ने बताया कि कॉलेज में पिछले तीन सालों से अंगे्रजी के शिक्षक ही नहीं है। गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज कोटा के छात्रसंघ अध्यक्ष अर्पित ने बताया कि यहां हर बार विद्यार्थी बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन का पेपर बिना पढ़े ही देते हैं क्योंकि यह विषय पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं है। पूरे संभाग में इस विषय के बारां व जेडीबी वाणिजय में ही एक-एक शिक्षक हैं। </p>
<p><strong>इन महाविद्यालयों में नहीं लगती इन विषयों की क्लास</strong><br />कोटा जिले के ग्रामीण इलाकों में संचालित हो रहे राजकीय महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई भगवान भरोसे ही चल रही है। कनवास में राजनेतिक विज्ञान, भूगोल के शिक्षक नहीं है। इस तरह इटावा कॉलेज में अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, संस्कृत, सांगोद में ज्योग्राफी, पोलिटिकल साइंस, होमसाइंस, रामगंजमंडी में इंग्लिश, हिन्दी, इतिहास तथा कॉमर्स संकाय में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन व अर्थशास्त्र की शुरू से अब तक कक्षाएं नहीं लग पाई। ऐसे में दिसम्बर के अंत तक प्रस्तावित यूजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं की तैयारी विद्यार्थियों के लिए चुनौति बनी हुई है। </p>
<p><strong>रामगंजमंडी में 7 में से 2 ही विषयों की चलती कक्षा</strong><br />राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. संजय गुर्जर बताते हैं, महाविद्यालय में 7 विषय स्वीकृत हैं, जिनमें से 5 विषयों के अध्यापकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। जिसकी वजह से आर्ट्स में अंग्रेजी, हिन्दी ,इतिहास और कॉमर्स में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन व अर्थशास्त्र की कक्षाएं नहीं लग पाती। जबकि, संस्कृत और ज्योग्राफी की क्लास लगती है लेकिन संस्कृत में बच्चे कम है। ऐसे में मुख्य क्लास ज्योग्राफी की ही संचालित होती है। मैं स्वयं विद्यार्थियों को ज्योग्राफी पढ़ाता हूं। लेकिन, मुख्य पांच विषयों की क्लास नहीं लगने पर दुख होता है। कॉलेज आयुक्तालय को भी इस संबंध में कई बार पत्र लिखे लेकिन समाधान नहीं हुआ। </p>
<p><strong>यह कहते हैं स्टूडेंट</strong><br />कॉलेजों में स्टाफ नहीं होने के चलते विद्यार्थियों को पढ़ाई के अलावा भी अन्य कई कार्याे में परेशान होना पड़ता है।  छात्रवृति से संबंधित कई काम पेंडिंग रह जाते हैं। <br /><strong>- मोहित गुर्जर, छात्र, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>विषयवार शिक्षकोें की कमी से सिलेबस पूरे होना तो दूर की बात परीक्षा का पैटर्न समझाने वाला भी कोई नहीं है। अंगे्रजी, राजनेतिक विज्ञान विषय लिया लेकिन कक्षाएं नहीं लगने से पेपर की तैयारी नहीं हो पा रही।<br /><strong>- मनीष कुमार, छात्र, इटावा </strong></p>
<p>महाविद्यालय में विषय अध्यापकों के पद लंबे समय से खाली हैं, जिसकी वजह से राजनेतिक विज्ञान व ज्योग्राफी का कलांश खाली ही रहता है। हालांकि, रे-सेंटर से 6 दिन के लिए शिक्षक मिल जाते हैं लेकिन यह स्थाई समाधान नहीं है। इसके बाद क्लासें फिर से खाली हो जाती है। कम संसाधनों के बावजूद हमारे स्तर पर व्यवस्थाएं सुचारू  रखने के प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>- प्रो. ललित नामा, कार्यवाहक प्रचार्य, राजकीय कनवास कॉलेज </strong></p>
<p>कॉलेज में शिक्षकों के 9 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 5 पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि, 3 ही पद ही भरे हैं। यहां 2 ही विषय संस्कृत और ज्योग्राफी की ही कक्षाएं लग पाती है बाकि के पीरियड खाली रहते हैं। इस बार आयुक्तालय ने विद्या संबंल पर भी शिक्षक नहीं लगाए। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। परीक्षा की तैयारी कराना चुनौती  बन रही है। <br /><strong>- प्रो. संजय गुर्जर, कार्यवाहक प्रचार्य, राजकीय रामगंजमंडी महाविद्यालय </strong></p>
<p>संभाग में राजसेस सोसायटी के अधीन संचालित कॉलेजों में विद्या सम्बल पर शिक्षक लगा दिए हैं। शीघ्र ही आयुक्तालय द्वारा प्रिंसिपल भी लगाए जाएंगे, इसकी प्रक्रिया जारी है। वहीं, गवर्नमेंट कॉलेजों में सरकार द्वारा आरपीएससी के माध्यम से शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाएंगे। <br /><strong>- डॉ. रघुराज सिंह परिहार, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, कॉलेज आयुक्तालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Oct 2023 16:02:05 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूल में शिक्षकों की कमी से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई चौपट गुरु बिन ज्ञान कहां? </title>
                                    <description><![CDATA[लंबे समय से व्याख्याताओं के पद खाली पड़े होने से पढ़ाई नहीं हो पा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/due-to-lack-of-teachers-in-the-school--the-education-of-the-students-is-ruined--where-is-the-guru-without-knowledge/article-54952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/school-me-shikshako-ki-kami-s-chatra-chatrao-ki-padhayi-chopat-guru-bina-gyan-kaha...hindoli,-bundi-news-19-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। हिंडोली उपखंड क्षेत्र में मेंडी ग्राम पंचायत मुख्यालय की सीनियर हाई सेकेंडरी स्कूल मे शिक्षकों की कमी से स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है। छात्र-छात्राओं को इतिहास, गणित, अंग्रेजी जैसे विषयों के अध्यापक की कमी होने से पढ़ाई ठप पड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार हिंडोली उपखंड के मेंडी ग्राम पंचायत मुख्यालय की सीनियर हाई सेकेंडरी स्कूल में 500 से अधिक विद्यार्थियों की संख्या होने के बावजूद भी शिक्षकों की कमी है। कक्षा 9 और 10 वीं में 151 छात्र और 11वीं 12वीं में 100 विद्यार्थी है। 21 अध्यापकों के पद स्वीकृत है लेकिन प्रमुख विषयों के सात टीचर के पद खाली पड़े है। वहां संस्कृत, इतिहास, गणित, अंग्रेजी के व्याख्याताओं सहित कुल सात शिक्षकों के पद रिक्त है। इसी प्रकार लेवल टू में सामाजिक विज्ञान और राजनीतिक विज्ञान के शिक्षक के पद भी रिक्त पड़े है। कचनारिया गांव के छात्रा के पिता महावीर सिंह का कहना है कि लंबे समय से व्याख्याताओं के पद खाली पड़े होने से पढ़ाई नहीं हो पा रही है।</p>
<p> यहां तक की अहम विषयों के अध्यापकों की कमी होने से बच्चों की पढ़ाई ठप है। सुखपुरा के रमेश मीणा ने बताया कि अगर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नही हुई तो इनका कोर्स कैसे पूरा होगा। पढ़ाई न होने पर परीक्षाओं में क्या लिखेंगे। मेंडी ग्राम पंचायत की सरपंच कैलाश कंवर ने बताया कि यह पद बहुत लंबे अरसे से खाली चल रहे है। व्याख्याता के पद रिक्त होने की जानकारी जनप्रतिनिधिी, प्रशासनिक अधिकारियों को दे रखी है लेकिन शिक्षा के मामले में गंभीर नजर नहीं आ रहा है। इससे ज्यादा में कर भी क्या सकती हूं। सरपंच ने कहा कि अगर सरकार नहीं चेती तो इसके लिए आंदोलन करना होगा तो करेंगे, उन्होंने मांग की है कि प्रशासन चाहे तो वैकल्पिक व्यवस्था जरूर कर सकता है लेकिन उसकी करने की मंशा ही नजर नहीं आ रही है। इसी प्रकार काचोला ग्राम पंचायत के सीनियर हाई सेकंडरी विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापकों के 7 पद रिक्त है सहसपुरीया सीनियर हाई सेकेंडरी में भी 5 पद रिक्त है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हिंडोली ब्लॉक के सभी सीनियर विद्यालयों व्याख्याता और अध्यापकों की कमी से जूझ रहे है। अभी सरकार द्वारा इंटरव्यू लिए जा रहे हैं हो सकता है। इनमें लगभग लगभग पूर्ति हो सके इसी से ही हमारी उम्मीद है फिर सरकार जैसा निर्देश देगी ऐसा किया जाएगा।<br /><strong>- अनीता मीणा,  सीबीईओ हिंडोली</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:39:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>3 पद, तीन हस्ताक्षर, अधिकारी केवल एक</title>
                                    <description><![CDATA[आयुक्त के कक्ष में कुर्सी तो खाली है ही कक्ष के बाहर नाम पट्टी भी नाम का इंतजार कर रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/3-posts--3-signatures--only-one-officer/article-52283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/teen-pad,-teen-hastakshar,-adhikari-keval-ek...kota-news-20-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कहने को तो कोटा संभाग मुख्यालय है। साथ ही जयपुर-जोधपुर के बाद तीसरा सबसे बड़ा शहर भी माना जाता है। लेकिन हालत यह है कि यहां जनता से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण विभाग नगर निगम कोटा दक्षिण में 7 माह से आयुक्त नहीं है। कार्यवाहक अधिकारियों से ही काम चलाया जा रहा है। स्थिति यह है कि एक अधिकारी के पास तीन पद का चार्ज है। सरकारी व्यवस्था ऐसी है कि उन्हें  तीनों पद के लिए खुद ही हस्ताक्षर करने पड़ते हैं। शहर में जनता का सबसे अधिक काम यदि पड़ता है तो वह है नगर निगम और नगर विकास न्यास। नगर विकास न्यास में तो सभी अधिकारी लगे हुए हैं। जबकि दो नगर निगमों में से एक कोटा दक्षिण निगम में आयुक्त की कुर्सी 7 माह से खाली है। हालत यह है कि आयुक्त का कार्य कार्यवाहक अधिकािरयों से ही कराया जा रहा है। जिससे निगम का कामकाज प्रभावित होने के साथ ही अधिकारियों पर भी काम का दबाव अधिक रहने लगा है। आयुक्त के कक्ष में कुर्सी तो खाली है ही कक्ष के बाहर नाम पट्टी भी नाम का इंतजार कर रही है। </p>
<p><strong>16 जनवरी को हुई थी कुर्सी खाली</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में आयुक्त की कुर्सी 7 माह पहले 16 जनवरी को खाली हुई थी। उस समय तत्कालीन आयुक्त राजपाल सिंह का अतिरिक्त संभागीय आयुक्त के पद पर स्थानांतरण हो गया था। वे 18 जनवरी को रिलीव हो गए थे। उसके बाद से अभी तक इस  पद पर किसी भी अधिकारी को नहीं लगाया गया है। </p>
<p><strong>कार्यवाहक अधिकारी कर रहे काम</strong><br />तत्कालीन आयुक्त राजपाल सिंह का स्थानांतरण होने के बाद से इस पद पर कार्यवाहक अधिकारी ही काम कर रहे हैं। जनवरी से अप्रेल तक तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त अम्बालाल मीणा के पास आयुक्त का चार्ज रहा। अप्रैल में उनका स्थानांतरण हो गा। उसके बाद से इस पद की जिम्मेदारी उपायुक्त राजेश डागा संभाल रहे हैं। हालत यह है कि उपायुक्त डागा पहले उपायुक्त के साथ अतिरिक्त आयुक्त व आयुक्त तीन पदों की जिम्मेदारी निभा रहे थे। वर्तमान में वे अतिरिक्त आयुक्त के साथ आयुक्त का काम देख रहे हैं। हाल ही बताते हैं कि  उपायुक्त का कार्य दो उपायुक्तों रिंकल गुप्ता व दयावती सैनी को दिया हुआ है।  कार्यवाहक आयुक्त का काम करने वाले अधिकारी आयुक्त के कक्ष में नहीं बैठकर अपने ही कक्ष से काम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर में सभी पदों पर अधिकारी</strong><br />दूसरी तरफ कोटा उत्तर में उपायुक्त पद पर हर्षित वर्गा, अतिरिक्त आयुक्त के पद पर गजेन्द्र सिंह व आयुक्त के पद पर अनुभाग भार्गव को लगाया हुआ है। </p>
<p><strong>बैठकों से लेकर जनता तक का काम कर रहे</strong><br />कार्यवाहक आयुक्त का काम देख रहे राजेश डागा नगर निगम के अलावा कलक्ट्रेट में होने वाली बैठकों से लेकर पार्षदों और जनता की समस्याओं का भी सामना कर रहे हैं। हर मामले में जवाब भी उन्हें ही देना पड़ रहा है। एक अधिकारी द्वारा दो महत्वपूर्ण पदों का काम करने से उसका असर काम पर तो पड़ ही रहा है। जबकि कोटा उत्तर में अधिकतर काम आयुक्त के अधीनस्थ अधिकारियों को दिया हुआ है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />15 फरवरी को नगर निगम कोटा दक्षिण में उपायुक्त का कार्यभार ग्रहण किया था। अप्रैल में अतिरिक्त आयुक्त अम्बालाल का स्थानांतरण होने से अतिरिक्त आयुक्त के साथ ही आयुक्त का भी कार्य देख रहा हूं। हालांकि उपायुक्त का कार्य दोनों अधिकारियों को दिया हुआ है। फिलहाल अतिरिक्त आयुक्त व आयुक्त का ही काम देख रहा हूं। काम तो सभी कर रहे हैं लेकिन एक साथ कई काम होने व सरकारी बैठकों में आने-जाने से दूसरे काम पर प्रभाव तो पड़ता ही है। अधिकारी की नियुक्ति का मामला सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। आयुक्त के आने से काम का दबाव तो कम होगा ही। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 17:36:38 +0530</pubDate>
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                <title>मेडिकल कॉलेजों में खाली सीटें, छात्रों की जान से खेल रहा एमसीसी और केंद्र : सुप्रीम कोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने सत्र  2021-2022  में मेडिकल कॉलेजो में सीटे खाली होने पर नाराज़गी जताई। कोर्ट ने कहा सत्र के दौरान 1456 सीटें नहीं भरी गयी हैं अदालत ने कहा मेडिकल कॉउन्सिलिंग कमेटी और केंद्र सरकार छात्रों के जीवन के साथ खेल रही है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/vacant--seats--medical-colleges--mcc--centre--playing--students--lives--says--supreme-court/article-11665"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सत्र  2021-2022  में मेडिकल कॉलेजो में सीटे खाली होने पर नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने कहा, ''सत्र के दौरान 1456 सीटें नहीं भरी गई हैं, मेडिकल कॉउन्सिलिंग कमेटी और केंद्र सरकार छात्रों के जीवन के साथ खेल रही है।''</p>
<p>जस्टिस एम आर शाह और अनिरुद्ध बोस ने कहा, "हमे देश में डॉक्टरों और सुपर स्पेशलिस्ट मेडिकल प्रोफेशनल्स की जरुरत हैं , अगर छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाता है और खली सीटे नहीं भरी जाती है तो अदालत एक आदेश पारित करेगी और अनुदान करेगी ।''  अदालत ने केंद्र और एमसीसी को आदेश दिया की वह अपने अधिकारीयों को गुरुवार को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 17:17:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंद्रगढ़ नगर पालिका का पार्षदों ने किया औचक निरीक्षण, खाली मिला दफ्तर</title>
                                    <description><![CDATA[इन्द्रगढ़ नगर पालिका का पार्षदों ने गुरुवार को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई कर्मचारी नदारद मिले।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/indragarh-municipality-councillors-did-surprise-inspection--office-found-vacant/article-8821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/indragarh-palika-offc-inspection.jpg" alt=""></a><br /><p>इन्द्रगढ़। इन्द्रगढ़ नगर पालिका का पार्षदों ने गुरुवार को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई कर्मचारी नदारद मिले।  जिसकी सूचना नगर पालिका चेयरमैन बाबूलाल बैरवा को दी और मौके पर पहुंचे। औचक निरीक्षण के दौरान कहीं कर्मचारी नदारद मिले तो कुछ  नींद निकालते नजर आए। <br /><br />पार्षद अशोक नरबान, नरेंद्र जैन  दोपहर 2:30 बजे करीब नगर पालिका पहुंचे। तो नगर पालिका में 1-2 कर्मचारी ही उपस्थित मिले। वह भी आराम से नींद निकाल रहे थे कर्मचारियों की अनुपस्थिति की जानकारी नगर पालिका चेयरमैन बाबूलाल बेरवा को दी तो चेयरमैन बाबूलाल बैरवा नगर पालिका मौके पर पहुंचे और उपस्थिति रजिस्टर चेक किया। लगभग कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज की लेकिन कहीं कर्मचारी नगर पालिका में मौजूद ही नहीं है। चेयरमैन बाबूलाल बैरवा जानकारी ली तो कोई कर्मचारी सर्वे पर जाना बताया व कोई नमाज  पढ़ने गया हुआ था। और जो कर्मचारी नगर पालिका में थे वह नींद निकाल रहे थे। पार्षदों का कहना है कि इंद्रगढ़ नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र कुमार मीणा भी रोजाना नहीं आने से कर्मचारी मौज मार रहे हैं। अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र मीणा का रोजाना नगर पालिका में नहीं आने पर कहीं लोगों के कार्य रखते हुए हैं। दीपक जैन व पार्षदों का कहना है कि अधिशासी अधिकारी 8 दिन में एक या दो दिन नगर पालिका में नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि कहीं कर्मचारी तो कार्य का बहाना लेकर बाजारों में टहलते रहते हैं। <br /><br />नगर पालिका में पार्षदों ने पालिका में कर्मचारियों के नहीं होने की सूचना दी। सूचना पर नगर पालिका पहुंचा तो दो-चार कर्मचारी ही नगर पालिका में मौजूद से जानकारी लेने पर पाया कि एक कर्मचारी का नमाज पढ़ने गया हुआ है।   2- 3 कर्मचारियों का सर्वे कार्य में लगाए हुए है। बाकी कर्मचारियों के नहीं मिलने की शिकायत अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र कुमार मीना से करूंगा ताकि कर्मचारी पालिका कार्यालय में समय पर मिले कार्यालय में आने वाले लोगों को परेशानियां ना हो। <strong>-बाबूलाल बैरवा, चेयरमैन नगर पालिका इंद्रगढ़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 13:29:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेरिट की कट ऑफ में आने पर भी चयन क्यों नहीं किया, एक पद खाली रखें: हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[रेलवे ने वर्ष 2018 में ग्रुप डी के लेवल वन में अजमेर रीजन में 4755 पदों की भर्ती निकाली थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--why-not-selected-even-after-coming-in-cut-off-of-merit--keep-one-post-vacant--high-court/article-8170"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/hc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उत्तर-पश्चिम रेलवे की ग्रुप -डी की लेवल वन भर्ती- 2018 की अंतिम कट ऑफ में आने के बाद भी अभ्यर्थी को तकनीकी आधार पर चयन से वंचित करने पर उत्तर पश्चिम रेलवे के जीएम रेलवे भर्ती बोर्ड व भर्ती सेल के चेयरमैन सहित अन्य से जवाब देने के लिए कहा है। वहीं याचिका के निर्णय के अधीन अभ्यर्थी के लिए एक पद खाली रखने का निर्देश दिया है। जस्टिस पंकज भंडारी व अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश पप्पू राम बाजिया की याचिका पर दिया।</p>
<p><br />याचिका में कहा गया कि रेलवे ने वर्ष 2018 में ग्रुप डी के लेवल वन में अजमेर रीजन में 4755 पदों की भर्ती निकाली थी। इसमें याचिकाकर्ता ने भाग लिया और वह लिखित, फिजिकल व मेडिकल में पास होने के बाद अंतिम कट ऑफ में भी आ गया। वहीं रेलवे भर्ती बोर्ड ने उसे अंतिम चयन सूची में यह कहते हुए शामिल नहीं किया कि उसने परमिशन लैटर में कैपिटल लेटर भरे हैं, जबकि अंडरटेकिंग के अनुसार उसे स्मॉल लेटर भरने थे। भर्ती बोर्ड की इस कार्रवाई को याचिकाकर्ता ने केट में चुनौती दी, लेकिन केट ने उसका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। इस पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। जिस पर सुनवाई करते है खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए एक पद याचिकाकर्ता के लिए सुरक्षित रखने को कहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 18:44:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोडवेज की दो वीआईपी सीटें: विधायक-सांसदों के लिए बरसों से आरक्षित, मगर रहती हैं खाली</title>
                                    <description><![CDATA[ईटीएम मशीन में एमपी-एमएलए फ्री टिकट का विकल्प]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/two-vip-seats-of-roadways--reserved-for-mlas-mps-for-years--but-remain-vacant--roadways-stopped-writing-mla-mp-names-on-seats--mp-mla-free-ticket-option-in-etm-machine/article-4815"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/roadways.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एक विधायक और सांसद की सीट के लिए व्यक्ति करोड़ों रुपए खर्च कर देता है। वहीं दूसरी ओर सांसद व विधायक के लिए रोडवेज में रिजर्व सीट वर्षों से खाली पड़ी है। हम बात कर रहे हैं रोडवेज की प्रत्येक बस में सांसद-विधायक के नाम से एक-एक रिजर्व सीट की। इन पर वर्षाें से किसी विधायक या सांसद ने सफर नहीं किया। बसों में ईटीएम मशीन में भी विधायक व सांसद की नि:शुल्क टिकट का विकल्प है। <br /><br /><strong>हर बस में सीटें आरक्षित</strong><br />वर्तमान में रोडवेज की 2491 और 811 अनुबंधित बसें चल रही हैं। एक्सप्रेस बस में सीट नंबर 1-2 और डीलक्स बस में सीट नंबर 3-4 विधायक व सांसद के लिए आरक्षित रहती है। इन पर बस संचालन के आधे घंटे पहले तक विधायक या सांसद नहीं आता तो परिचालक इन्हें आम यात्री को रिजर्व कर देता है। लंबे समय से विधायक या सांसद के बसों में सफर नहीं करने के कारण अब रोडवेज प्रशासन ने रिजर्व सीटों पर विधायक व सांसद लिखवाना भी बंद कर दिया है। वहीं बसों में विकलांग व महिलाओं के लिए भी सीटें आरक्षित हैं। <br /><br /><strong>क्या है नियम</strong><br />सरकार ने विधायक, सांसद व पूर्व विधायक व सांसद और उनके एक-एक सहयोगी को रोडवेज की बसों में नि:शुल्क सफर की सुविधा दे रखी है। सफर के दौरान अपना पहचान पत्र दिखाने पर परिचालक उन्हें नि:शुल्क टिकट दे देता है। सूत्रों के अनुसार कभी-कभी पूर्व विधायक जरूर बस में सफर करते हैं। हाल ही में एक सांसद के भी बस में सफर करने की जानकारी सामने आई है, लेकिन रोडवेज प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की। रोडवेज वर्तमान में 43 श्रेणी में नि:शुल्क यात्रा करा रहा है, इनका पैसा राज्य सरकार देती है। इसमें पत्रकार, पदमश्री पुरस्कार, गलेन्ट्री, खिलाड़ी, पुरस्कृत अध्यापक सहित अन्य शामिल हैं।<br /><br />रोडवेज की बसों में विधायक-सांसदों के लिए सीट आरक्षित होती है। इन्हें यात्रा के दौरान जीरो बैलेंस टिकट दिया जाता है। यदि विधायक-सांसद बस संचालन के आधे घंटे पहले तक नहीं पहुंचता है तो सीट आम यात्रियों को दे दी जाती है। <br />- <strong>लोकेश सहल, कार्यकारी निदेशक (यातायात)</strong><br /><br /><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />कुल बस संचालित 3304 (अनुबंधित सहित)<br />प्रतिदिन संचालन <br />13 लाख 3 हजार कि.मी.<br />रेवेन्यू प्रतिदिन<br />4 करोड़ 90 <br />लाख रुपए<br />यात्री प्रतिदिन <br />7 लाख 80 हजार<br />यात्री प्रतिशत <br />88 प्रतिशत</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 13:14:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>JOB Alert : उत्तर प्रदेश के निकायों में 58000 पद रिक्त, से होंगी भर्तियां</title>
                                    <description><![CDATA[निदेशालय इन पदों को भरने के लिए 20 मई तक इसे अधिसूचित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/job-alert---%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-58000-%E0%A4%AA%E0%A4%A6-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4--%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82/article-3245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/job4.jpg" alt=""></a><br /><p>यूपी निकायों में रिक्त होने वाले पदों पर अब हर साल भर्तियां की जाएंगी। निकायों को हर साल 15 मई तक निर्धारित प्रारूप पर रिक्त पदों की सूचना स्थानीय निकाय निदेशालय को देनी होगी। निदेशालय इन पदों को भरने के लिए 20 मई तक इसे अधिसूचित करेगा। इसके आधार पर तय प्रक्रिया के तहत इन पदों पर भर्तियां की जाएंगी। <br /> <br /> मौजूदा समय निकायों में अकेंद्रीयत पदों को भरने के लिए कोई एकीकृत नीति नहीं है। कुछ निकाय तो खाली पदों पर भर्तियां कर लेते हैं और कुछ में सालों-साल पद खाली रहते हैं। इससे काम प्रभावित होता है। नगर विकास विभाग इसीलिए प्रदेश के सभी निकायों के लिए भर्ती की एकीकृत व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे निकायों में अधिक समय तक पद खाली नहीं रहेंगे और भरने में मनमानी नहीं चलेगी।</p>
<p><br /> पदों का ब्यौरा<br /> नगर निगम -28972<br /> पालिका परिषद -21824<br /> नगर पंचायत-5782<br /> कुल रिक्तियां <br /> करीब 58000<br /> इन पदों पर चल रही भर्तियां<br /> एई व जेई -421<br /> पशु चिकित्सा व कल्याण अधिकारी-14<br /> कर निर्धारण अधिकारी-12<br /> अधिशासी अधिकारी -214<br /> लेखाकार-95<br /> सफाई एवं खाद्य निरीक्षक-45<br /> <br /> अंतिम तिथि : 20 मई 2022</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Dec 2021 10:54:27 +0530</pubDate>
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                <title>भर्तियों को लेकर CM गहलोत के दो महत्वपूर्ण निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[शैक्षणिक योग्यता संबंधी विवादों को दूर करने के लिए समिति का गठन : विभागों में रिक्त पदों पर हों नियमित भर्तियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/616e8b61e6203/article-1774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/gehlot_1013.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भर्तियों को लेकर दो महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं। उन्होंने भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता तथा शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में होने वाले विवादों के समाधान की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभागों में रिक्त एवं नवसृजित पदों पर नियमित रूप से भर्तियां करने और इस प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से सम्पन्न कराने के भी उन्होंने निर्देश दिए हैं।<br /> <br /> मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता संबंधी विवादों को दूर करने के लिए विभागों में विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में शैक्षिक अर्हता एवं शैक्षिक समकक्षता समिति के गठन तथा नियमित भर्तियों के संबंध में अलग-अलग परिपत्र जारी किए हैं।</p>
<p><br /> परिपत्र के अनुसार समिति में विभागीय अधिकारियों के साथ ही मनोनीत विषय विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। यह समिति विभिन्न पदों की शैक्षिक अर्हता एवं शैक्षणिक समकक्षता के नियमों को अद्यतन करने के साथ ही उनका स्पष्ट निर्धारण करेगी, जिससे कि ऐसे विवादों को दूर कर भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से सम्पन्न किया जा सके।</p>
<p><br /> उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार में अलग-अलग पदों पर नियुक्ति के लिए बने सेवा नियमों में पद के अनुरूप आवश्यक शैक्षणिक योग्यता का प्रावधान है। साथ ही, इन पदों की वांछित शैक्षणिक योग्यता में डिग्री, डिप्लोमा या पाठ्यक्रम के साथ ही ‘अथवा समकक्ष’ निर्धारित किया जाता है। वर्तमान में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा लगातार नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं, जो इन पदों की शैक्षिक अर्हता से संबंधित डिग्री, डिप्लोमा अथवा पाठ्यक्रम के समान ‘अथवा समकक्ष‘ होते हैं। इन सभी कोर्सेज को पद विशेष की शैक्षणिक योग्यता में शामिल कर पाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में पदों की शैक्षणिक योग्यता को अद्यतन करने तथा भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में होने वाले किसी भी विवाद के समाधान के लिए यह समिति एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में कार्य कर सकेगी।</p>
<p><br /> किसी पद की भर्ती में शैक्षणिक योग्यता की समकक्षता के संबंध में विवाद होने पर प्रकरण निर्णय के लिए इस समिति के समक्ष रखा जाएगा। इस स्थिति में कार्मिक विभाग के प्रतिनिधि को भी बैठक में आमंत्रित किया जाएगा। यह समिति नए पाठ्यक्रमों का अध्ययन एवं परीक्षण कर सेवा नियमों को अद्यतन करने एवं समकक्षता के संबंध में अनुशंसा कर सकेगी।<br /> शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार आदि विभागों में शैक्षणिक डिग्रियों के प्रमाणीकरण, अपडेशन एवं शैक्षिक अर्हताओं के स्पष्टीकरण के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित किए जाएंगे। ये प्रकोष्ठ विश्वविद्यालयों, बोर्ड एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों के नियमित सम्पर्क में रहकर उनके द्वारा जारी की जाने वाली डिग्रियों आदि की वैधता तथा मान्यता की जांच कर उनकी सूची विभागीय वेबसाइट पर प्रदर्शित करेंगे।<br /> <br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने तथा रिक्त पद भरने के लिए कार्मिक विभाग की सहमति आवश्यक नहीं</strong></span></span></span></p>
<p>विभागों में रिक्त एवं नवसृजित पदों पर नियमित भर्तियां करने और इस प्रक्रिया को समयबद्ध सम्पन्न कराने के संबंध में मुख्य सचिव द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने एवं रिक्त पदों को भरने के लिए कार्मिक विभाग की सहमति आवश्यक नहीं होगी। सभी प्रशासनिक विभागों द्वारा सीधी भर्ती के पदांें के संबंध में रिक्तियों की गणना 15 अप्रेल तक आवश्यक रूप से सम्पन्न की जाएगी। गणना के लिए 1 अप्रेल को उपलब्ध रिक्तियों, सेवा-निवृत्ति, नवीन पद सृजन अथवा अन्य किसी कारण से 15 अप्रेल तक प्राप्त होने वाली रिक्तियों को शामिल किया जाएगा।</p>
<p><br /> यह भी निर्देश दिए गए हैं कि कार्मिक विभाग द्वारा प्रति वर्ष 15 मई से पूर्व उन सभी विभागों, जिनमें सीधी भर्ती की जानी है अथवा जिनमें रिक्तियां हैं, के संस्थापन कार्य से जुड़े अधिकारियों एवं कार्मिकों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी। जिसमें कार्मिकों को भर्तियों से संबंधित सेवा नियमों, प्रक्रिया तथा आरक्षण से संबंधित नवीन प्रावधानों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग द्वारा उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त कर 31 मई से पूर्व अर्थना आरपीएसी, अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड अथवा भर्ती संस्था को प्रेषित की जाएगी। विभागाध्यक्ष सुनिश्चित करेंगे कि 31 मई से पूर्व भर्ती की अर्थना इन एजेन्सियों को प्राप्त हो जाए।</p>
<p><br /> भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से संपादित करने के लिए आरपीएससी तथा कर्मचारी चयन बोर्ड आगामी वर्ष की भर्तियों के लिए कैलेण्डर जारी करेंगे। भर्ती के लिए अर्थना प्राप्त होने के बाद आयोग एवं बोर्ड 15 जुलाई से पूर्व अर्थनाओं का परीक्षण सुनिश्चित करेंगे। इसमें कोई कमी पाए जाने पर प्रशासनिक विभाग अविलम्ब रूप से भर्ती संस्था से समन्वय स्थापित कर 31 अगस्त से पहले अर्थना को पूरी करने की कार्यवाही करेंगे। आयोग एवं कर्मचारी बोर्ड, दोनों में अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की एकबारीय पंजीयन व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। किसी भी भर्ती प्रक्रिया के प्रांरभ होने के बाद सेवा नियमों में होने वाले संशोधनों का प्रभाव उस भर्ती पर नहीं होगा।</p>
<p><br /> भर्ती एजेन्सियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में समय की बचत की दृष्टि से रिक्तियों का न्यूनतम दो गुना अभ्यर्थियों को सत्यापन के लिए आमंत्रित किया जाए। सत्यापन का कार्य परिणाम जारी होने के बाद अधिकतम 45 दिवस में पूरा करना होगा। रिक्तियों की संख्या बहुत अधिक होने पर इसे 15 दिवस तक बढ़ाया जा सकेगा। जिन अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का किसी एक परीक्षा के बाद सत्यापन हो चुका है तो उसके पुनः सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। सत्यापन के पश्चात सम्पूर्ण चयन सूची एक बार में ही जारी करनी होगी।</p>
<p><br /> सूची जारी होने के बाद विभागों को एक माह में पदस्थापन आदेश जारी करने होंगे। नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद अभ्यर्थी को 3 सप्ताह में कार्य ग्रहण करना होगा अन्यथा नियुक्ति आदेश स्वतः निरस्त समझा जाएगा। कार्यग्रहण की समय सीमा में वृद्धि के लिए अभ्यर्थी को अन्तिम तिथि से 7 दिन पूर्व सूचित करना होगा। इस पर विभाग को अन्तिम तिथि से पूर्व ही निर्णय करना होगा। भर्ती परीक्षा में ड्यूटी देने वाले अधिकारी-कर्मचारी भर्ती संस्थाओं के अधीन प्रतिनियुक्ति पर माने जाएंगे। उनके द्वारा अनुशासनहीनता या लापरवाही पर भर्ती संस्थाओं द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Oct 2021 15:13:53 +0530</pubDate>
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