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                <title>बिजली संकट: डिमांड से दो हजार मेगावाट बिजली कम, शादियों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती से हल्की राहत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों शादियों का सीजन जारी है। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती  को लेकर डिस्कॉम पर दबाव बनाते जा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--electricity-crisis--two-thousand-mw-less-electricity-than-demand--light-relief-from-cuts-in-rural-areas-due-to-weddings/article-9154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/el.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।प्रदेश में चल रहे बिजली के संकट के बीच एक तरफ डिमांड की तुलना में बिजली उपलब्धता करीब 2000 मेगावाट कम चल रही है वहीं दूसरी तरफ शहरी और ग्रामीण अंचलों में शादियों के सीजन के चलते कटौती समय में कमी कर उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है।</p>
<p><strong>नियमित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को राहत</strong></p>
<p>बिजली की मांग और उपलब्धता में आ रहे अंतर की कमी के चलते अब पूर्व घोषित नियमित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है। जयपुर में पिछले 4 दिनों से कहीं बिजली की कटौती या तो नहीं की गई है, या फिर समय से कम पावर कट हुए हैं।बिजली के संकट के बीच डिस्कॉम ने संभाग मुख्यालयों पर सुबह 7 बजे से 8 बजे तक, जिला मुख्यालयों पर 2 घंटे और नगर पालिका सहित 5000 से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में इससे अधिक बिजली की कटौती करने का एलान किया था, लेकिन पिछले दो दिनों में पवन ऊर्जा के माध्यम से मिली करीब ढाई हजार मेगावाट बिजली से डिस्कॉम को कुछ राहत मिली है। बुधवार को पवन ऊर्जा से मिलने वाली बिजली के जनरेशन में एकाएक कमी आई और यह 250 मेगावाट तक ही रह गई, जिसके बावजूद गुरुवार सुबह जयपुर सहित कुछ संभाग मुख्यालय पर सुबह 7 से 8 के बीच होने वाली बिजली की कटौती नहीं हुई।</p>
<p><br /><strong>एक्सचेंज में मिल रही सस्ती बिजली:</strong><br />ऊर्जा विभाग से जुड़े अधिकारीयों ने बताया कि इस दौरान एक्सचेंज के जरिए राजस्थान को कम रेट पर बिजली उपलब्ध हो गई, जिसके चलते पावर कट नहीं किया गया। प्रदेश में पीक आवर में प्रतिदिन मांग और उपलब्धता के बीच 1000 से 2500 मेगावाट तक का अंतर आ रहा है, जिसे विभिन्न इलाकों में पावर कट कर समायोजित किया जा रहा है।<br /><br /><strong>शादियों का सीजन, जनप्रतिनिधियों का दबाव:</strong><br />प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों शादियों का सीजन जारी है। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती  को लेकर डिस्कॉम पर दबाव बनाते जा रहे हैं। लिहाजा ऊर्जा विभाग ने अधिकांश ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती के समय में कमी कर दी है। जिला और संभाग मुख्यालय स्तर पर भी कटौती नाम मात्र की हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 13:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बिजली संकट : राहत की खबर : ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिजली कटौती में आएगी कमी</title>
                                    <description><![CDATA[मिलने लगा 20 रेक कोयला, उत्पादन में इजाफा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0---%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%80/article-1659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/coal_koyla.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। कोयले की कमी के कारण प्रदेश में बढ़े बिजली संकट के बीच थोड़ी राहत भरी खबर आई है। केन्द्र और राज्य के अफसरों की बातचीत के बाद कोल इंडिया के माध्यम से मंगलवार देर रात तक राजस्थान को 20 रैक (80 हजार टन) कोयला रोजाना डिस्पेच होने लगा है, इससे बिजली उत्पादन में इजाफा होगा। अब जल्दी ही शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती के समय में भी कमी आएगी।</p>
<p><br /> प्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए 21 रैक कोयला रोजाना सप्लाई की जरूरत है। संकट के बीच राजस्थान को एक पखवाड़े पहले तक सात से आठ रैक कोयला मिल रहा था। उसके बाद प्रदेश सरकार के दबाव में पिछले दिनों कोयला सप्लाई 14-15 रैक तक पहुंच गई। ऊर्जा एसीएस सुबोध अग्रवाल मंगलवार को दिल्ली पहुंचे और केन्द्र पर दबाव बढ़ाया तो मंगलवार देर रात तक सप्लाई में इजाफा होते हुए 20 रैक तक पहुंच गया। कोयले की ये खेप बढ़ने से 1570 मेगावाट तक बिजली पैदा की जा सकेगी। ऊर्जा विभाग के अनुसार राज्य में अभी 9,317 मेगावाट बिजली उपलब्धता है और औसत मांग 10683 मेगावाट तथा 12,200 मेगावाट अधिकतम औसत मांग रही है। डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर को देखें तो कोयला सप्लाई बढ़ने के बाद 1570 मेगावाट बिजली उत्पादन के बावजूद 1313 मेगावाट बिजली की कमी रहेगी। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> भेजे गए अफसर सप्लाई डिस्पेच पर रखेंगे नजर</strong></span></span><br /> एसीएस अग्रवाल की दिल्ली में केन्द्रीय कोयला सचिव अनिल जैन और केन्द्रीय पर्यावरण सचिव आरपी गुप्ता से कोयला आपूर्ति बढ़ाने और संयुक्त उपक्रम में फेज दो की पर्यावरण स्वीकृति जारी करने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद अग्रवाल ने बताया कि कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई एनसीएल से चार रैक डिस्पेच हुई हैं, वहीं एसईसीएल से भी एक से बढ़कर अब चार रैक डिस्पेच हुई हैं। विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के संयुक्त उपक्रम से कोयले की 12 रैक डिस्पेच कराई गई हैं। प्रदेश के लिए 20 रैक डिस्पेच हुई हैं,जबकि इससे पहले वाले दिन 16 और उससे पहले एक बार तो दस से 11 तथा इससे कम रैक के हालात बन गए थे। प्रदेश को यह कोयला सप्लाई बरकरार रखने के लिए डिस्पैच पर प्रेशर रखने के लिए कोयला खदानों पर भेजे गए अफसरों को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पर्यावरण सचिव आरपी गुप्ता से हुई बातचीत में राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के संयुक्त उपक्रम परसा ईस्ट और कांता बासन की सैकंड फेज की वनभूमि 1136 हैक्टेयर के हंस्तातरण और परसा कोल ब्लॉक की सैकंड फेज की लम्बित वन स्वीकृति पर सकारात्मक बातचीत हुई। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>660 मेगावाट बिजली बनेगी : सूरतगढ़ सुपर क्रि. यूनिट चालू</strong></span></span><br /> कोयला संकट में राहत मिलने के बाद बुधवार को सूरतगढ़ में सात नम्बर की सुपर क्रिटिकल यूनिट चालू कर दी गई। इसके सिन्क्रोनाइज होने के बाद अब 660 मेगावाट बिजली पैदा होगी। राजस्थान में अब 5,193 मेगावाट बिजली सरकारी उपक्रमों के पावर प्लांट्स से बनने लगेगी।</p>
<p><br /> सूरतगढ़ थर्मल में सात और आठ नम्बर यूनिट शुरू होने के बाद अब 660-660 मेगावाट बिजली बनेगी, इसके साथ ही 250 मेगावाट की एक यूनिट भी चालू है। सूरतगढ़ से कुल 1570 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इससे पहले सूरतगढ़ थर्मल में 910 मेगावाट बिजली बन रही थी। छबड़ा में 660 और 250 मेगावाट की यूनिट्स चालू हैं। कालीसिंध में 1200 मेगावाट और कोटा थर्मल पावर स्टेशन से 1240 मेगावाट बिजली मिल रही है। रामगढ़ गैस थर्मल पावर लंट से भी 273 मेगावाट बिजली बनती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Oct 2021 10:25:14 +0530</pubDate>
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