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                <title>एक जुलाई से देशभर में लागू होगा विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, क्या महात्मा गांधी नरेगा हो जाएगा निरस्त?</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 अधिसूचित किया है, जो 1 जुलाई से मनरेगा का स्थान लेगा। अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। ₹95,692 करोड़ के रिकॉर्ड बजट के साथ, यह मिशन डीबीटी के जरिए समयबद्ध भुगतान और ग्रामीण आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/developed-india-ji-ram-ji-act-will-be-implemented-across-the/article-153436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ramm.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम को सोमवार को अधिसूचित कर दिया है और इसे एक जुलाई से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने आज बताया कि ग्रामीण विकास और रोजगार को नयी दिशा देते हुए सरकार ने आज विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह अधिनियम 1 जुलाई से देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा), 2005 उसी तिथि से निरस्त माना जाएगा। यह भारत के ग्रामीण विकास ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है, जो विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक समेकित (इंटीग्रेटेड), भविष्य उन्मुख एवं उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) आधारित ग्रामीण परिवर्तन के नए युग की शुरुआत करेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नयी व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्राप्त होगी। यह बढ़ी हुई गारंटी आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, ग्रामीण आय में वृद्धि करने तथा ग्राम स्तर पर सतत विकास को समर्थन देने के उद्देश्य से लाई गई है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को उनकी रोजगार मांग के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसा न होने की स्थिति में श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे। यह अधिनियम समयबद्ध और पारदर्शी मजदूरी भुगतान पर विशेष बल देता है। </p>
<p>मजदूरी का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में किया जाता रहेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर अथवा मस्टर रोल बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो श्रमिक विलंब क्षतिपूर्ति (मुआवजा) पाने के पात्र होंगे। सरकार ने विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु व्यापक वित्तीय प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 95,692.31 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए बजट अनुमान चरण में अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। राज्यों के संभावित राज्यांश सहित इस कार्यक्रम का कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यह आवंटन ग्रामीण अवसंरचना विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन तथा ग्रामीण आय में वृद्धि को नई गति प्रदान करेगा।</p>
<p>सरकार के अनुसार विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 से ग्रामीण रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और गांवों में आत्मनिर्भरता को नई गति मिलने की अपेक्षा है। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण परिवर्तन के केंद्रीय स्तंभ के रूप में स्थापित करते हुए यह अधिनियम सशक्त, समृद्ध और विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:29:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आय के स्रोत बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करने पर रहेगा फोकस</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात में आमजन को परेशानी से बचाना पहली प्राथमिकता ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/focus-will-be-on-increasing-the-sources-of-income-and-developing-basic-facilities-in-rural-areas/article-119526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt1124roer.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण नवसृजित संस्था है।  इसमें आय के स्रोत बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही नगर विकास न्यास से केडीए का गठन होने के बाद इसमें शामिल ग्रामीण क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यह कहना है कि केडीए के नवनियुक्त आयुक्त हरफूल सिंह यादव का। भारतीय प्रशासनिक  सेवा के वरिष्ठ अधिकारी व सीएडी कोटा में अतिरिक्त आयुक्त यादव को सरकार ने केडीए आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज दिया है। मूल रूप से सीकर निवासी यादव पाली, जयपुर, धोलपुर, अजमेयर, जालौर, झुंझुनू, राजसमंद, बारां व दौसा में विभिन्न पदों पर पद स्थापित रह चुके हैं।   तत्कालीन केडीए आयुक्त रिषभ मंडल का स्थानांतरण होने के बाद से यह पद रिक्त था।   उनके स्थान पर आईएएस यादव  को केडीए आयुक्त का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। यादव ने शुक्रवार को आयुक्त पद पर कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर यादव ने नवज्योति से विशेष बातचीत की। </p>
<p><strong>सवाल:</strong> केडीए आयुक्त के रूप में आपकी क्या प्राथमिकता रहेगी।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए आयुक्त के रूप में अभी चार्ज संभाला ही है। यहां के बारे में जानकारी कर जितना बेहतर हो सकेगा करने का प्रयास करेंगे। अभी मानसून का सीजन है। इस सीजन में शहर वासियों को किसी तरह की समस्या नहीं हो उसकी व्यवस्था करना पहली प्राथमिकता है। </p>
<p><strong>सवाल:</strong> केडीए बनने के बाद इसकी आर्थिक स्थिति में सुधार के क्या प्रयास रहेंगे।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए नवसृजित संस्था है। पहले नगर विकास न्यास का दायरा शहर तक ही सीमित था। अब केडीए बनने के बाद दायरा बढ़ा है। ऐसे में केडीए की आवासीय व व्यवसायिक योजनाएं लाौंच कर अधिक से अधिक लोगों को उनका लाभ पहुंचाया जाएगा। जिससे केडीए की आय के स्रोत भी विकसित होंगे। आय के स्रोत विकसित होने पर ही इसकी आर्थिक स्थिति सुढृढ़ होगी।<br /> <br /><strong>सवाल:</strong> कैथून समेत कई नगर पालिकाएं निगम में शामिल हो गई हैं। वहीं केडीए में भी कई इलाके शामिल होने के बाद भी वहां विकास नहीं हो पाया है। उनके लिए क्या योजना है।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए बनने के बाद आस-पास के 289 गांवों को इसमें शामिल किया गया है। पहले जहां शहरी क्षेत्र का ही विकास किया जाता था। वहीं अब केडीए द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों का भी विकास किया जा सकेगा। केडीए में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं विकसित करना, सड़क, बिजली, पानी और साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिससे वहां रहने वालों को अहसास हो कि वे भी शहरी क्षेत्र का हिस्सा बन चुके हैं।</p>
<p><strong>सवाल:</strong> शहर का विकास किस तरह से किया जाएगा।<br /><strong>आयुक्त:</strong> केडीए द्वारा शहर में विभिन्न विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। कई योजनाएं व कार्य पूर्व में स्वीकृत हो चुके हैं और प्रगतिरत भी हैं। उन कायोरं को गति देने व समय पर और गुणवत्तापृूर्ण कार्य करवाने का प्रयास रहेगा। फिर चाहे ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का काम हो या अन्य विकास कार्य। उन सभी को समय पर पूरा करवाने का प्रयास किया जाएगा। </p>
<p><strong>सवाल:</strong> केडीए की योजनाओं का आमजन को लाभ दिलाने की क्या योजना है।<br /><strong>आयुक्त: </strong>राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं हैं। उन योजनाओं का आमजन को लाभ दिलाने के लिए उनका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही लोकसभा अध्यक्ष की मंशाअनुसार आवासहीन लोगों को अफोर्डेबल योजनाओं में दस हजार आवास उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा।  निम्न व अल्प आय वर्ग के लोगों के  लिए सस्ती व सुलभ योजनाएं निकाली जाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 15:17:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिनों दिन बढ़ रही इन्द्रदेव की बेरूखी, ग्रामीणों पर मंडराया संकट</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली विभाग द्वारा लगातार कई घंटे तक विद्युत कटौती की जा रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/indradev-s-indifference-is-increasing-day-by-day--crisis-looms-over-the-villagers/article-56362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/dino-din-bdh-rhi-indradev-ki-berukhi...bhawanimandi...jhalawar-news-05-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>भवानीमंडी। भवानीमंडी उपखंड क्षेत्र में बिजली कटौती से ग्रामीण किसान, आमजन, व्यापारी बेहाल हो गए हैं। जहां ग्रामीणों ने बताया कि एक ओर तो बरसात नहीं हो रही है। वहीं बिजली विभाग द्वारा लगातार विद्युत कटौती किए जाने के कारण फसलों की सिंचाई भी नहीं हो पाई है, जिसके चलते फसलें दम तोड़ने की कगार पर है, अधिकांश तो रात के समय बिजली कटौती किए जाने से ग्रामवासी चैन की नींद भी नहीं सो पा रहे है, बिजली कटौती के चलते मच्छरों ने भी आतंक मचाया हुआ है। वहीं स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिजली विभाग द्वारा लगातार कई घंटे तक विद्युत कटौती की जा रही है, जिसकी चलते इस उमस भरी गर्मी में उनके हाल बेहाल हो गए हैं। विगत कहीं दिनों से रोड लाइट भी गायब है, जिसके चलते आए दिन हादसों का अंदेशा भी बना रहता है। व्यापारियों ने बताया कि बिजली विभाग द्वारा बिजली काटने का कोई समय निर्धारित नही किया गया है। जिसके चलते समय किसी भी समय बिजली गुल हों जाती है, जो घंटों नही आती है। जिसकी वजह से इलेक्ट्रॉनिक के समान को ना तो ठीक किया जा सकता है और ना ही इलेक्ट्रॉनिक सामान ग्राहकों को बताया जा सकता है। जिसकी वजह से दुकानों में हाथ पर हाथ रखकर बैठना पड़ता है।</p>
<p>बिजली नहीं होने से फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है फसले बर्बाद होने की कगार पर है।<br /><strong>- दीवान सिंह, ग्रामीण</strong></p>
<p>विभाग द्वारा घंटों तक विद्युत कटौती की जा रही है, एक और तो गर्मी से हाल बेहाल है वही बिजली कटौती से आमजन और भी अधिक परेशान हो गए हैं।<br /><strong>- जगदीश मेहर, ग्रामीण</strong></p>
<p>विद्युत विभाग द्वारा लोड सेटिंग के नाम पर लगातार विद्युत कटौती की जा रही है वहीं विभाग में फोन करने पर कोई संतोष पर जवाब नहीं दिया जा रहा है।<br /><strong>- इरफान, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>बारिश नहीं होने की वजह से किसानों को बिजली दी जा रही है, ताकि वह फसलों को पानी पिला सके। इसकी वजह से आगे से कई बार जीरो लोड आने पर बिजली सप्लाई बाधित रहती है। बारिश अच्छी गिर जाएगी तो हो सकता है सप्लाई भी अच्छी मिल सके। बिजली गुल होने की वजह से उपभोक्ताओं के लगातार फोन आते है, मगर हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। डिमांड अधिक होने के कारण लगातार लोड बना हुआ है। हमारे द्वारा सही विद्युत आपूर्ति के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी एक दो दिनों में व्यवस्था में सुधार होने के आसार हैं।<br /><strong>- हितेश खींची, जेईएन विद्युत विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Sep 2023 16:00:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष :  हर हाथ में मोबाइल लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की 35 फीसदी ही महिलाएं कर रही इंटरनेट का उपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग की कोटा,बून्दी, बारां, झालावाड़ जिले की महिलाओं और लड़कियों से जब बात की तो सुदूर ग्रामीण अंचलों में महिलाएं अभी भी स्मार्टफोन और डिजिटाइजेशन से दूर हैं। ग्रामीण क्षेत्र की करीब 60 प्रतिशत लड़कियां और कामकाजी महिलाएं इंटरनेट  का इस्तेमाल  सीखने, पढ़ने, आॅनलाइन ट्रांजेक्शन आदि में कर रही है। 70 फीसदी महिलाओं के पास स्मार्टफोन है लेकिन 30 से 35 प्रतिशत ही गृहणियां  इंटरनेट का पूरा उपयोग  करती है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/march-8-international-women-s-day-special--mobile-in-every-hand-but-only-35-percent-of-women-in-rural-areas-are-using-internet/article-38850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/8-march-anterrashtriya-mahila-diwas-vishesh--har-haath-mei-mobile-lekin-grami-shetr-ki-35-fisadi-hi-mahilaaye-kar-rahi-internet-ka-upyog..kota-news-3.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कर लो दुनिया मुट्ठी में, हाडौती की लगभग 80 से 85  फीसदी महिलाओं के हाथ की मुट्ठी में  स्मार्ट फोन तो आ गया है लेकिन इन्टरनेट के उपयोग की बात करें तो  अकेले हाडौती में 65 से 70 फीसदी तक महिलाएं इंटरनेट का उपयोग नहीं कर रही हैं। आज जब इंटरनेट के बिना काम करना बहुत मुश्किल है। वर्तमान में सभी काम इंटरनेट पर निर्भर हंै। लेकिन देश की महिलाएं आज भी इंटरनेट का इस्तेमाल करने में पीछे है। ग्रामीण महिलाओं को इंटरनेट का उपयोग करने के कई फायदे होंगे।  डिजिटल रूप से कुशल और जागरूक होंगी तो आत्मनिर्भरता आएगी । आसानी से सूचनाओं तक पहुंच बनाकर  दैनिक जीवन से जुड़े निर्णय लेने में सूचनाओं से मिली जानकारी का इस्तेमाल करके  सशक्त होंगी । वित्तिय लेन देन भी स्वयं कर सकेगी बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी घर बैठे सभी काम हो जाएंगे।  मोबाइल फोन के जरिये  आॅनलाइन जुड़कर महिलाएं घर बैठे रोजगार परक कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगी और इसका लाभ उठा सकेंगी। महिलाओं को घर बैठे आॅनलाइन सरकारी योजनाओं की जानकारी हो सकेगी।  स्वरोजगार कार्यक्रम की जानकारी मिल सकेगी  जिससे वे अपनी रूचि का रोजगार कर पाएंगी। साथ ही सरकार की ओर से महिलाओं के लिए चलाई जा रही लाभकारी योजनाओं व अन्य योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त कर इसका लाभ उठा पाएंगी। उन्हें विभागों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेगे। कोटा संभाग की बात करें तो यहां ग्रामीण क्षेत्र की मात्र 35 फीसदी  महिलाएं ही पुरुषों की तुलना में इंटरनेट का उपयोग कर रही है। इसमें भी बड़ी उम्र की महिलाओं की तुलना में युवा महिलाएं व लड़कियां ही इंटरनेट का अधिक उपयोग कर रही है। स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के मुकाबले में शहरी महिलाओं का प्रतिशत कुछ ज्यादा है। ग्रामीण महिलाओं के पास शहरी महिलाओं की तुलना में इंटरनेट तक उनकी पहुंच अभी भी कम है। </p>
<p>संभाग की कोटा,बून्दी, बारां, झालावाड़ जिले की महिलाओं और लड़कियों से जब बात की तो सुदूर ग्रामीण अंचलों में महिलाएं अभी भी स्मार्टफोन और डिजिटाइजेशन से दूर हैं। ग्रामीण क्षेत्र की करीब 60 प्रतिशत लड़कियां और कामकाजी महिलाएं इंटरनेट  का इस्तेमाल  सीखने, पढ़ने, आॅनलाइन ट्रांजेक्शन आदि में कर रही है। 70 फीसदी महिलाओं के पास स्मार्टफोन है लेकिन 30 से 35 प्रतिशत ही गृहणियां  इंटरनेट का पूरा उपयोग  करती है।  40 से 50 वर्ष की उम्र की महिलाएं स्मार्टफोन व इंटरनेट का उपयोग करती हैं किन्तु सोशल मीडिया के लिए डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए  वह बच्चों पर निर्भर है। गांव में वहीं लड़कियां डिजिटल वित्तीय लेन देन करती हंै जो शहर से जुड़ी हुई हैं या शहर में आकर पढ़ाई कर रही है। पंचायत स्तर पर कई महिलाएं संभाग में ऐसी हैं जो स्मार्टफोन  का इस्तेमाल कॉल आने पर बात करने तक सीमित है। फर्क इतना आया है कि  सीखने की कोशिश कर रही है। दैनिक नवज्योति ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कोटा संभाग की कई महिलाओं, युवतियों और लड़कियों से बात की और ये जाना कि आज जब तकनिकी दृष्टि से दुनिया इतनी आगे बढ़ी चुकी है कि स्मार्टफोन और इंटरनेट सब की आवश्यकता बन चुका है ऐसे में कोटा संभाग में  कितने प्रतिशत महिलाएं इस क्षेत्र में पुरुषों के बराबर है। </p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों मेंअधिकतर बच्चों के पास स्मार्टफोन है। लॉकडाउन के दौरान पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन जरूरी था तो पेरेन्ट्स को दिलवाना पड़ा। लगभग सभी घर में स्मार्टफोन तो है।  ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी कई महिलाएं है जिन्हे स्मार्टफोन चलाने में भी परेशानी आती है। किसी सूचना या किसी इमेज को भेजना हो तो वह नहीं कर पाती।  ये काम वह अपने बच्चों से करवाती है।  फर्क इतना आया कि  सीखने की कोशिश कर रही है। यह सब भी वहीं कर पा रही है जिन्हें ये काम कंपलसरी  करना है। अन्य महिलाएं तो व्हाट्सएप पर इमेज देख ली या कॉल आने पर बात करने तक सीमित है। स्मार्टफोन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के पास है लेकिन उन्हें इंटरनेट का उपयोग करना नहीं आ रहा है। वह सोशल मीडिया तक सीमित है आॅनलाइन ट्रांजेक्शन नहीं कर पाती है। <br /><strong>-अर्पिता शर्मा, केन्द्र प्रबंधक, इन्द्रा महिला शक्ति केन्द्र, बून्दी</strong></p>
<p>मैं स्मार्टफोन बहुत कम इस्तेमाल करती हूं सिर्फ व्हाट्सएप यूज करती हूं। डिजिटल ट्रांजेक्शन बच्चों से करवाती हूं। मैं नहीं करती हूं। मेरी बेटी बिजनैस करती है और आॅनलाइन सब काम करती है। ग्रामीण महिलाओं के पास स्मार्टफोन है लड़कियां  टोटली गांव- शहर की आॅनलाइन सब काम करती है। हालांकि महिलाओं का अनुपात इंटरनेट और डिजिटल लेन-देन करने में पुरुषों के मुकाबले कम है । 50 की उम्र व ऊपर की महिलाएं डिजिटल ट्रांजेक्शन नहीं कर पाती है। बच्चे कर देते हैं। बाकि लड़कियां गांव की भी स्मार्टफोन व इंटरनेट का यूज पूरी तरह कर रही है। 40 से 50 वर्ष की महिलाएं सोशल मीडिया का इस्तेमाल तो करती है पर ट्रांजेक्शन और शॉपिंग में पीछे है। स्वयं नहीं करती है बच्चों के जरिए करती है । शहरों की तुलना में ग्रमीण क्षेत्र की महिलाएं कम इस्तेमाल करती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहले की तुलना में काफी अंतर आ गया है। <br /><strong>-उमा रावत, गृहिणी, बारां </strong></p>
<p>स्मार्टफोन पर इंटरनेट का काफी इस्तेमाल करती हूं। पढ़ाई करने आॅनलाइन शॉपिंग, वित्तीय लेनदेन के सभी काम करती हूं और स्वयं निर्णय लेती हूं। गांव में अभी भी काफी लड़कियां और महिलाएं  आॅनलाइन वित्तीय लेनदेन नहीं कर पाती हैं। कुछ कोशिश कर भी रही है। जो युवा लड़कियां है वह तो स्टडी व शॉपिंग कर रहे है। लेकिन अवेयरनेस अभी भी कम है। डिजिटल ट्रांजेक्शन गांवों में महिलाएं अभी भी नहीं कर पा रही है। यह सब जगह गांवों में भिन्न-भिन्न है। आज भी गांवों में 12 वीं तक स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को मोबाइल नहीं देते है । जब कॉलेज मेें बाहर गांव  पढ़ने जाती हैं तो मोबाइल देते हैं। कीपैड मोबाइल कुछ के पास होते हैं बाकि गांवों-कस्बों में स्मार्टफोन आ चुके है। डिजिटल लिटरेसी व अवेयरनेस 35-45 प्रतिशत अवैयर है। 65 प्रतिशत जागरूक नहीं है । रूरल या रिमोट एरिया में अभी भी महिलाओं को जानकारी नहीं है वह ई-मित्र से जानकारी लेती है। कभी सही गाइडेंस मिलती है कभी नहीं। जो पढ़ गई और  गांव से बाहर निकल गई वह तो इंटरनेट अवेयर हैं ।<br /><strong>-लवीना शर्मा, वर्किंग वुमन, सुल्तानपुर</strong></p>
<p>झालावाड़ जिले में देखे तो लड़कियों व लड़कों का इंटरनेट यूजर्स का 40- 60 प्रतिशत का अनुपात है। आगे के समय में बराबर प्रतिशत हो जाएगा। गृहणियां भी बराबर से स्मार्टफोन के इस्तेमाल में आगे बढ़ चुकी है। आगे बढ़ने की कोशिश महिलाएं व युवतियां कर रही है। वित्तिय लेनदेन भी सब करने लगी है । फर्क वहीं है जहां परिवार रूढ़ीवादी है। झालावाड़ में करीब 70 प्रतिशत डिजिटल लिटरेसी है । कोविड के बाद से तो आॅनलाइन फोन लैपटॉप का इस्तेमाल बढ़ गया है। <br /><strong>-अरसीन मंसूरी, एमबीए स्टूडेंट, झालावाड़</strong></p>
<p>गांव से कोटा जाने में बहुत प्रॉब्लम होती है। मैंने पढ़ाई संबंधी सभी तैयारियांआॅनलाइन क्लासेस के जरिए की है। टाइम की भी बचत होती है। कोटा आने जाने में काफी समय लग जाता है। गांव में भी कोविड के बाद से अधिकतर आॅनलाइन स्ट्डीज के लिए अवेयरनेस हो गई है। कोरोना के बाद से महिलाओं में भी स्मार्टफोन के प्रति क्रेज आया। एक दूसरे को देख उन्हें भी लगता है कि हम भी इसका इस्तेमाल करें।  कोरोना से पहले यहां स्मार्टफोन के प्रति रुझान 5 से 10 प्रतिशत का ही था लेकिन उसके बाद से  बढ़ गया। अब करीब 45 से 50 प्रतिशत लड़कियां व महिलाएं इंटरनेट का यूज कर रही है। फाइनेंशियल निर्भरता की बात है तो मैं खुद का खर्चा चलाने के लिए पढ़ाती भी हूं। आॅनलाइन वित्तीय लेनदेन , आॅनलाइन शॉपिंग भी स्वयं  करती हूं। गांवों में 14 से 15 साल की लड़कियां भी इंडिपेंडेंटहो गई है। 18  साल ऊपर की लड़कियां फाइनेंशियली भी स्मार्ट हो गई है वह स्वयं निर्णय लेने लगी है। घर पर बैठकर आॅनलाइन प्लेटफॉर्म को यूज करने लगे हंै। टाइम की वैल्यू को समझने लगी है। लड़कियों में अवैयरनैस ज्यादा आ रही है। वह एक लड़की को देखती है तो वह काम सीखने में इच्छुक होती है।  मैं मानती हूं कि फीमेल ज्यादा एक्टिव रहती है। लड़कियां और लड़के बराबर ही उपयोग कर रहे है। <br /><strong>-शिवानी, कॉलेज स्टूडेंट, सुल्तानपुर</strong></p>
<p>संगीत और रील्स बनाने का शौक है वह पर्सनली बनाती हूं। दैनिक नवज्योति अखबार पढ़ने का शौक है उसे स्टेटस पर लगाती हूं। फेसबुक का भी इन्हीं चीजों के लिए यूज करती हूं। डिजिटाइजेशन का यूज नहीं करती हूं। मैं आॅनलाइन शॉपिंग और किसी तरह काआॅनलाइन वित्तीय लेनदेन नहीं करती हूं। मोबाइल आजकल लड़कियां और कामकाजी महिलाएं इस्तेमाल करती है। अपने बच्चों को मोबाइल मैंने आज तक नहीं दिया। पढ़ाई संबंधी कोई बात हो तो टीचर से पूछ लेती हूं या स्कूल जाकर ले आती हूं। रामगंजमंडी में तो मोबाइल और नेट इस्तेमाल करने में महिलाएं व पुरूष दोनों में अब भी भारी असमानता है। <br /><strong>- द्रोपदी बाई, गृहिणी, रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Mar 2023 11:46:21 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बिजली संकट: डिमांड से दो हजार मेगावाट बिजली कम, शादियों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती से हल्की राहत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों शादियों का सीजन जारी है। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती  को लेकर डिस्कॉम पर दबाव बनाते जा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--electricity-crisis--two-thousand-mw-less-electricity-than-demand--light-relief-from-cuts-in-rural-areas-due-to-weddings/article-9154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/el.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।प्रदेश में चल रहे बिजली के संकट के बीच एक तरफ डिमांड की तुलना में बिजली उपलब्धता करीब 2000 मेगावाट कम चल रही है वहीं दूसरी तरफ शहरी और ग्रामीण अंचलों में शादियों के सीजन के चलते कटौती समय में कमी कर उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है।</p>
<p><strong>नियमित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को राहत</strong></p>
<p>बिजली की मांग और उपलब्धता में आ रहे अंतर की कमी के चलते अब पूर्व घोषित नियमित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है। जयपुर में पिछले 4 दिनों से कहीं बिजली की कटौती या तो नहीं की गई है, या फिर समय से कम पावर कट हुए हैं।बिजली के संकट के बीच डिस्कॉम ने संभाग मुख्यालयों पर सुबह 7 बजे से 8 बजे तक, जिला मुख्यालयों पर 2 घंटे और नगर पालिका सहित 5000 से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में इससे अधिक बिजली की कटौती करने का एलान किया था, लेकिन पिछले दो दिनों में पवन ऊर्जा के माध्यम से मिली करीब ढाई हजार मेगावाट बिजली से डिस्कॉम को कुछ राहत मिली है। बुधवार को पवन ऊर्जा से मिलने वाली बिजली के जनरेशन में एकाएक कमी आई और यह 250 मेगावाट तक ही रह गई, जिसके बावजूद गुरुवार सुबह जयपुर सहित कुछ संभाग मुख्यालय पर सुबह 7 से 8 के बीच होने वाली बिजली की कटौती नहीं हुई।</p>
<p><br /><strong>एक्सचेंज में मिल रही सस्ती बिजली:</strong><br />ऊर्जा विभाग से जुड़े अधिकारीयों ने बताया कि इस दौरान एक्सचेंज के जरिए राजस्थान को कम रेट पर बिजली उपलब्ध हो गई, जिसके चलते पावर कट नहीं किया गया। प्रदेश में पीक आवर में प्रतिदिन मांग और उपलब्धता के बीच 1000 से 2500 मेगावाट तक का अंतर आ रहा है, जिसे विभिन्न इलाकों में पावर कट कर समायोजित किया जा रहा है।<br /><br /><strong>शादियों का सीजन, जनप्रतिनिधियों का दबाव:</strong><br />प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों शादियों का सीजन जारी है। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती  को लेकर डिस्कॉम पर दबाव बनाते जा रहे हैं। लिहाजा ऊर्जा विभाग ने अधिकांश ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती के समय में कमी कर दी है। जिला और संभाग मुख्यालय स्तर पर भी कटौती नाम मात्र की हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 13:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्रामीण इलाकों में बिजली की होगी कटौती </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में कोयला संकट के बीच बिजली का बड़ा संकट हो गया है। ऐसे में अघोषित कटौती की मार झेल रहे प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब घोषित रूप से भी कई घंटों की बिजली कटौती होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-power-will-be-cut-in-rural-areas/article-8469"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/el-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में कोयला संकट के बीच बिजली का बड़ा संकट हो गया है। ऐसे में अघोषित कटौती की मार झेल रहे प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब घोषित रूप से भी कई घंटों की बिजली कटौती होगी। कटौती से जिला मुख्यालय और संभागीय मुख्यालय अछूते रहेंगे। शहरी इलाकों में भी फिलहाल कटौती नहीं होगी, लेकिन बिजली संकट को देखते हुए लग रहा है कि शहरी इलाकों पर भी कटौती का असर पड़ेगा। ऊर्जा विभाग के शासन सचिव एवं अध्यक्ष डिस्कॉम्स भास्कर ए सावंत ने बताया कि बिजली संकट की स्थिति में आवश्यक सेवाओं अस्पताल, ऑक्सीजन सेंटर, पेयजल आपूर्ति व मिलिट्री इंस्टालेशन आदि को सुचारू निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों (जिला मुख्यालय एवं संभागीय मुख्यालय को छोड़कर) में रोस्टर के अनुसार बिजली कटौती करना जरूरी हो गया है। इसके लिए उपभोक्ताओं को सूचित किया जाएगा। आवश्यक सेवाओं को बिजली कटौती से मुक्त रखा गया है। सावंत ने बताया कि यह कटौती कुछ समय के लिए होगी। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, इसे बंद कर दिया जाएगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो कटौती अधिकतम दो घंटे तक होगी।</p>
<p><strong>बिजली की डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर</strong> <br />प्रमुख शासन सचिव ऊर्जा एवं अध्यक्ष डिस्कॉम्स सावंत ने बताया कि गत वर्ष अप्रेल में बिजली की मांग प्रतिदिन लगभग 2131 लाख यूनिट थी और अधिकतम मांग 11570 मेगावाट थी। वह इस वर्ष लगभग 2800 लाख यूनिट प्रतिदिन और अधिकतम 13700 मेगावाट तक पहुंच गई है। प्रदेश में बिजली की मांग 31 प्रतिशत बढ़ी है। मांग को पूरा करने के लिए एनर्जी एक्सचेंज सहित अन्य स्त्रोतों से भी महंगे दामों में भी बिजली नहीं मिल पा रही है। वहीं तापीय विद्युत गृहों को पर्याप्त कोयले की आपूर्ति नहीं होने से भी उत्पादन इकाइयां पूरी क्षमता से विद्युत उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। प्रदेश के थर्मल पावर स्टेशन की विद्युत उत्पादन क्षमता 10110 मेगावाट है, जिनसे लगभग 6600 मेगावाट विद्युत का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। ऐसे में विद्युत की उपलब्धता में कमी आई है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-power-will-be-cut-in-rural-areas/article-8469</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Apr 2022 10:06:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>12 से 14 आयु वर्ग के बालकों का टीकाकरण शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर में 12 से 14 आयु वर्ग के बालकों का टीकाकरण अभियान बुधवार से शुरू हो गया है। अभियान की शुरूआत पुलिस लाइन स्थित गवर्नमेंट सीनियर सैकंडरी स्कूल से कलक्टर हरिमोहन मीना ने की। उन्होंने बालकों की हौसला अफजाई की। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में टीकाकरण की शुरूआत सीएमएचओ डॉ बीएस तंवर ने कैथून से की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/----vaccination-of-children-in-the-age-group-of-12-to-14-started/article-6265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/vaxin.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में 12 से 14 आयु वर्ग के बालकों का टीकाकरण अभियान बुधवार से शुरू हो गया है। अभियान की शुरूआत पुलिस लाइन स्थित गवर्नमेंट सीनियर सैकंडरी स्कूल से कलक्टर हरिमोहन मीना ने की। उन्होंने बालकों की हौसला अफजाई की। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में टीकाकरण की शुरूआत सीएमएचओ डॉ बीएस तंवर ने कैथून से की। पहले ही दिन बालकों ने टीके के प्रति गजब का उत्साह दिखाया। हालांकि, तकनीकी प्रॉब्लम्स से अभिभावकों को काफी परेशानी हुई। कोविन एप्प क्रेश हो गया। जिसके चलते पंजीयन नही हो सके। ऐसी स्थिति में मैनुअल तरीके से टीका लगा। सीएमएचओ डॉ बीएस तंवर ने बताया कि अभी शुरूआत है। जिसके चलते दिक्कत हो रही है, लेकिन जल्द सही हो जाएगी।</p>
<p><br /><strong>अब घर से निकलने में नहीं लगेगा डर</strong><br />इधर, हेल्थ सेंटर पर पहुंचे बच्चों में वैक्सीन लगवाने को लेकर क्रेज दिखा। कई बच्चे ग्रुप में अपने फ्रेंड्स के साथ वैक्सीन लगवाने सेंटर्स पर पहुंचे। वैक्सीन लगवाने के बाद बात करते हुए बच्चों ने कहा कि उन्हें अब घर से बाहर निकलने या स्कूल में जाने से डर नहीं लगेगा। अभी जहां भी जाते है मास्क लगाना पड़ता है, ध्यान रखना पड़ता है। माता पिता को भी चिंता रहती है, लेकिन ऐसा नही होगा। इससे बॉडी प्रोटेक्ट होगी।<br /><br /><strong>एक वॉयल से 20 बच्चों की डोज</strong><br />बायोलॉजिकल ई लिमिटेड कंपनी की बनाई कोबेर्वैक्स वैक्सीन की एक वॉयल में 10 एमएल इंजेक्शन है, जिससे 20 बच्चों को वैक्सीनेट किया जा सकता है। 12, 13 व 14 साल के बच्चों को ये वैक्सीन लगाई जा रही है। जबकि, 14 साल से बड़े बच्चों को भारत बायोटैक की बनाई कोवैक्सीन लगाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 16:40:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गहलोत मंत्रिमण्डल की बैठक में हुए कई फैसले : ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ श्रृंखला में सीधी भर्ती और पदोन्नति का 50-50 होगा अनुपात</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रिमण्डल ने राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम 2007 में संशोधन को स्वीकृति दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A4%88-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87---%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%83%E0%A4%82%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-50-50-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A4/article-3814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/ashok_gehlot2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई केबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय किए गए।</p>
<p>मंत्रिमण्डल ने राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम 2007 में संशोधन को स्वीकृति दी है। राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला के पदों के कुल 75 प्रतिशत पद वर्तमान में सीधी भर्ती से भरे जाने का प्रावधान है, जिसे केबिनेट के इस निर्णय से संशोधित किया जाकर सीधी भर्ती एवं पदोन्नति का अनुपात 50-50 किया जा सकेगा। इससे राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला के 50 प्रतिशत पदों को अतिरिक्त विकास अधिकारियों की पदोन्नति के माध्यम से भरा जा सकेगा। केबिनेट के इस निर्णय से सहायक एवं अतिरिक्त विकास अधिकारियों की पदोन्नति के लिए अधिक संख्या में पद उपलब्ध होंगे तथा विभाग में विकास अधिकारी के रिक्त पदों को पदोन्नति द्वारा शीघ्रता से भरा जा सकेगा। साथ ही, लंबे समय से विकास अधिकारियों के पदों के रिक्त रहने की समस्या दूर होगी अतिरिक्त विकास अधिकारियों को विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति देने से ग्राम विकास अधिकारियों के मनोबल एवं कार्यकुशलता में भी वृद्धि होगी। कैबिनेट ने सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले कार्मिकों के पदोन्नति पर एक वर्ष के प्रोबेशन पर रखे जाने का प्रावधान हटाने के लिए विविध सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इससे कार्मिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में पदोन्नति द्वारा नियुक्त होने पर एक वर्ष की अवधि के लिए प्रोबेशन पर रखे जाने का प्रावधान हटा दिए जाने के बावजूद विविध सेवा नियमों में यथावत रह गए इस प्रावधान को समाप्त किया जा सकेगा। इससे सभी सेवा नियमों में एकरूपता आएगी।<br /> <br /> मंत्रिमण्डल ने दण्ड प्रक्रिया संहिता ( राजस्थान संशोधन) विधेयक-2021 को विधानसभा के विचारार्थ प्रस्तुत करने की मंजूरी दी है। इस प्रस्तावित विधेयक द्वारा केन्द्र सरकार के समान राज्य सरकार को भी अन्य सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञों को अधिसूचित करने की शक्तियां प्राप्त हो सकेंगी। इससे आपराधिक प्रकरणों के अनुसंधान एवं विचारण में गतिशीलता आ सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jan 2022 14:51:15 +0530</pubDate>
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                <title> मौजूदा सरकार ने दी प्रदेश के 10 लाख ग्रामीण परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन की सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[जेजेएम के आरम्भ से अब तक हर दिन औसतन 1200 परिवारों को मिला 'हर घर जल' कनेक्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%87-10-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B--%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%B2--%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A4/article-3049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/phed-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मौजूदा सरकार ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत अब तक प्रदेश में 10 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन की सौगात दे दी है। प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को घर बैठे नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की यह महत्वाकांक्षी योजना अगस्त 2019 में आरम्भ हुई थी, उस समय राजस्थान के एक करोड़ एक लाख 44 हजार 997 ग्रामीण परिवारों में से केवल 11 लाख 74 हजार 131 परिवारों तक ही 'हर घर जल' कनेक्शन की पहुंच थी, लेकिन अब राजस्थान में जेजेएम के तहत 10 लाख एक हजार 546 ग्रामीण परिवारों को नए नल कनेक्शन दिए जा चुके है, इस प्रकार प्रदेश के 21 लाख 75 हजार से अधिक परिवारों को अपने घर पर नल से पेयजल आपूर्ति की सेवाएं मिल रही हैं।<br /><br /><strong>निर्धारित लक्ष्य के लिए युद्ध स्तर पर कार्य</strong><br />जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन से जोड़ना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश में जेजेएम के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा योजनाबद्ध तरीके से ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं को गति देते हुए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 तक जिन परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन से जोड़ा जाना है, उनकी सभी स्वीकृतियों का कार्य लगभग पूर्ण हो गया है। इनकी तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रियाओं को भी तेजी से पूरा किया जा रहा है।<br /><br /><strong>जेजेएम में अब तक रोजाना 1200 नए परिवारों को कनेक्शन</strong><br />डॉ. जोशी ने बताया कि पेयजल प्रबंधन के लिहाज से राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों, मरूस्थल बाहुल्य क्षेत्र और बहुत कम मात्रा में भूजल की उपलब्धता जैसी चुनौतियों के बीच वर्तमान सरकार ने प्रदेश के गांव-ढ़ाणियों को जेजेएम के तहत 'हर घर जल' कनेक्शन की सुविधा देने के लिए दूरगामी सोच के साथ कार्य किया है। जल जीवन मिशन की घोषणा से लेकर अब तक प्रतिदिन औसतन 1200 नए परिवारों को घर बैठे स्वचछ पेयजल आपूर्ति से जोड़ते हुए राजस्थान में 10 लाख एक हजार 546 परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन की सुविधा मुहैया कराई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आगामी करीब सवा दो साल की अवधि में प्रदेश के शेष ग्रामीण परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन देने पर पूरी तरह फोकस करते हुए 'मिशन मोड' में कार्य किया जाएगा, इसके लिए अधिकारियों को और कड़ी मेहनत करने के निर्देश दिए गए हैं।<br /><strong><br />32 हजार 709 गांवों में करीब 80 लाख 'हर घर जल' कनेक्शन स्वीकृत</strong><br />जलदाय मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2021 में फरवरी माह से अब तक औसतन हर माह राज्य स्तरीय योजना स्वीकृति समिति (एसएलएसएससी) की एक बैठक आयोजित की गई है। इस दौरान आयोजित 11 बैठकों के बाद वर्तमान में प्रदेश के 32 हजार 709 गांवों के लिए 123 वृहद पेयजल और 8361 मल्टी एवं सिंगल विलेज परियोजनाओं सहित कुल 8484 ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं में 80 लाख के करीब 'हर घर जल' कनेक्शन की स्वीकृतियां उपलब्ध है, जिन पर 53 हजार 979 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसी माह एसएलएसएससी की एक और बैठक प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के शेष बचे कार्यों को मंजूरी दी जाएगी।<br /><br /><strong>23 लाख 47 हजार 'हर घर जल' कनेक्शन के कार्यादेश जारी</strong><br />डॉ. जोशी ने बताया कि प्रदेश में इस साल 30 लाख ग्रामीण परिवारों को 'हर घर जल' कनेक्शन देने के लक्ष्य की तुलना में अब तक विभाग द्वारा स्वीकृत ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं में 9523 गांवों में 23 लाख 47 हजार 301 'हर घर जल' कनेक्शन के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 10 Dec 2021 14:09:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>11 दिन में खुलवाएं 3 हजार से ज्यादा पीपीएफ के खाते</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर ग्रामीण डाक अधीक्षक  मोहनसिंह मीणा को डाक विभाग राजस्थान सर्किल की मुखिया मुख्य पोस्टमास्टर जनरल अनुला कुमार और निदेशक डाक सेवाएं मुख्यालय बीएल सोनल ने सर्वोच्य सम्मान डाक सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/11-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-3-%E0%A4%B9%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AB-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%87/article-1880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/ed.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ग्रामीण डाकघरों में मात्र 11 दिनों में तीन हजार से ज्यादा पीपीएफ के खाते खोलने पर जयपुर ग्रामीण डाक अधीक्षक  मोहनसिंह मीणा को डाक विभाग राजस्थान सर्किल की मुखिया मुख्य पोस्टमास्टर जनरल अनुला कुमार और निदेशक डाक सेवाएं मुख्यालय बीएल सोनल ने सर्वोच्य सम्मान डाक सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया हैं। समस्त राजस्थान प्रदेश के डाक विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी डाक सेवा अवार्ड-2021, प्रशस्ति पत्र और प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया। मोहनसिंह मीणा ने कहा कि हमारा प्रयास रहता है कि डाक घर लेन देन के लिए आने वाले ग्राहकों की परेशानियों को तुरंत हल करके देते हैं जिससे की डाकघर में पैसा जमा कराने व निकालने में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नही उठानी पड़े।  कोविड के समय भी दूर-दराज के गाँव में जाकर डाकिये ने आईपीपीबी आदि के माध्यम से लोगों को उनके खाते से पैसा निकालकर, जमा कराकर, पेंशन भुगतान आदि सुविधाएं प्रदान कर राहत पहुंचाई है। अकेले जनवरी माह के अन्दर ग्रामीण डाकघरों ने 900 से ज्यादा रूरल पोस्टल लाईफ इंश्योरेंस पाॅलिसीज करके दी जिससे डाकघरों में पाॅलिसीज की संख्या में इजाफा हुआ है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Oct 2021 16:32:34 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रामीण महिलाओं के लिए CM गहलोत की गहरी सोच</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाना और भेदभाव नहीं होना चाहिए: गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%9A/article-1704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/31.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस पर कहा कि गांवों में रहने वाली महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डालें। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाना और यह सुनिश्चित करना कि उनके साथ कोई भेदभाव न हो और संसाधनों तक उनकी समान पहुंच हो, हमारा ध्यान होना चाहिए।</p>
<p>साथ ही GlobalHandwashingDay पर कहा कि हमें बीमारियों को रोकने और जीवन बचाने के प्रभावी तरीके के रूप में साबुन से हाथ धोने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। हमें इस आदत को कोविड के समय और उसके बाद भी एक आवश्यकता के रूप में अपनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 15 Oct 2021 13:31:07 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली संकट : राहत की खबर : ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिजली कटौती में आएगी कमी</title>
                                    <description><![CDATA[मिलने लगा 20 रेक कोयला, उत्पादन में इजाफा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F---%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0---%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%80/article-1659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/coal_koyla.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। कोयले की कमी के कारण प्रदेश में बढ़े बिजली संकट के बीच थोड़ी राहत भरी खबर आई है। केन्द्र और राज्य के अफसरों की बातचीत के बाद कोल इंडिया के माध्यम से मंगलवार देर रात तक राजस्थान को 20 रैक (80 हजार टन) कोयला रोजाना डिस्पेच होने लगा है, इससे बिजली उत्पादन में इजाफा होगा। अब जल्दी ही शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती के समय में भी कमी आएगी।</p>
<p><br /> प्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए 21 रैक कोयला रोजाना सप्लाई की जरूरत है। संकट के बीच राजस्थान को एक पखवाड़े पहले तक सात से आठ रैक कोयला मिल रहा था। उसके बाद प्रदेश सरकार के दबाव में पिछले दिनों कोयला सप्लाई 14-15 रैक तक पहुंच गई। ऊर्जा एसीएस सुबोध अग्रवाल मंगलवार को दिल्ली पहुंचे और केन्द्र पर दबाव बढ़ाया तो मंगलवार देर रात तक सप्लाई में इजाफा होते हुए 20 रैक तक पहुंच गया। कोयले की ये खेप बढ़ने से 1570 मेगावाट तक बिजली पैदा की जा सकेगी। ऊर्जा विभाग के अनुसार राज्य में अभी 9,317 मेगावाट बिजली उपलब्धता है और औसत मांग 10683 मेगावाट तथा 12,200 मेगावाट अधिकतम औसत मांग रही है। डिमांड और सप्लाई के बीच अंतर को देखें तो कोयला सप्लाई बढ़ने के बाद 1570 मेगावाट बिजली उत्पादन के बावजूद 1313 मेगावाट बिजली की कमी रहेगी। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> भेजे गए अफसर सप्लाई डिस्पेच पर रखेंगे नजर</strong></span></span><br /> एसीएस अग्रवाल की दिल्ली में केन्द्रीय कोयला सचिव अनिल जैन और केन्द्रीय पर्यावरण सचिव आरपी गुप्ता से कोयला आपूर्ति बढ़ाने और संयुक्त उपक्रम में फेज दो की पर्यावरण स्वीकृति जारी करने पर चर्चा हुई। बैठक के बाद अग्रवाल ने बताया कि कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई एनसीएल से चार रैक डिस्पेच हुई हैं, वहीं एसईसीएल से भी एक से बढ़कर अब चार रैक डिस्पेच हुई हैं। विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के संयुक्त उपक्रम से कोयले की 12 रैक डिस्पेच कराई गई हैं। प्रदेश के लिए 20 रैक डिस्पेच हुई हैं,जबकि इससे पहले वाले दिन 16 और उससे पहले एक बार तो दस से 11 तथा इससे कम रैक के हालात बन गए थे। प्रदेश को यह कोयला सप्लाई बरकरार रखने के लिए डिस्पैच पर प्रेशर रखने के लिए कोयला खदानों पर भेजे गए अफसरों को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पर्यावरण सचिव आरपी गुप्ता से हुई बातचीत में राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम और अडानी के संयुक्त उपक्रम परसा ईस्ट और कांता बासन की सैकंड फेज की वनभूमि 1136 हैक्टेयर के हंस्तातरण और परसा कोल ब्लॉक की सैकंड फेज की लम्बित वन स्वीकृति पर सकारात्मक बातचीत हुई। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>660 मेगावाट बिजली बनेगी : सूरतगढ़ सुपर क्रि. यूनिट चालू</strong></span></span><br /> कोयला संकट में राहत मिलने के बाद बुधवार को सूरतगढ़ में सात नम्बर की सुपर क्रिटिकल यूनिट चालू कर दी गई। इसके सिन्क्रोनाइज होने के बाद अब 660 मेगावाट बिजली पैदा होगी। राजस्थान में अब 5,193 मेगावाट बिजली सरकारी उपक्रमों के पावर प्लांट्स से बनने लगेगी।</p>
<p><br /> सूरतगढ़ थर्मल में सात और आठ नम्बर यूनिट शुरू होने के बाद अब 660-660 मेगावाट बिजली बनेगी, इसके साथ ही 250 मेगावाट की एक यूनिट भी चालू है। सूरतगढ़ से कुल 1570 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इससे पहले सूरतगढ़ थर्मल में 910 मेगावाट बिजली बन रही थी। छबड़ा में 660 और 250 मेगावाट की यूनिट्स चालू हैं। कालीसिंध में 1200 मेगावाट और कोटा थर्मल पावर स्टेशन से 1240 मेगावाट बिजली मिल रही है। रामगढ़ गैस थर्मल पावर लंट से भी 273 मेगावाट बिजली बनती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Oct 2021 10:25:14 +0530</pubDate>
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