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                <title>United States - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रशांत क्षेत्र में पहली बार ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क तैनात, राष्ट्र में अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने में मिलेगी मदद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशांत क्षेत्र में पहली बार ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क तकनीक की राष्ट्रव्यापी तैनाती। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान ने दी 2 करोड़ डॉलर की सहायता। पीएनसीसी (PNCC) ने तीन अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं का किया चयन। 4G और 5G सेवाओं के साथ डिजिटल सुरक्षा होगी मजबूत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/open-radio-access-network-deployed-for-the-first-time-in/article-144453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगंटन। पलाऊ ने प्रशांत क्षेत्र में पहली बार ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क (ओपन आरएएन) तकनीक की राष्ट्रव्यापी तैनाती की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पलाऊ नेशनल कम्युनिकेशंस कॉरपोरेशन (पीएनसीसी) ने इस परियोजना के लिए तीन अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के चयन की घोषणा की है, जिससे यह प्रशांत क्षेत्र में इस तरह की पहली पहल बन गयी है। </p>
<p>यह उपलब्धि पलाऊ को प्रशांत द्वीप देशों में दूरसंचार नवाचार के अगुआ के तौर पर स्थापित करती है और सुरक्षित, विश्वसनीय तथा लचीले डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए एक क्षेत्रीय मानक तय करती है। प्रशांत क्षेत्र के पहले ओपन आरएएन नेटवर्क के रूप में यह पहल भौगोलिक रूप से बिखरे द्वीप राष्ट्रों में अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने में पलाऊ की नेतृत्व भूमिका को दर्शाती है। </p>
<p>नयी नेटवर्क व्यवस्था से सुरक्षित 4जी और 5जी सेवाएं मजबूत होंगी, डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ेगा और अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए व्यावसायिक अवसरों का विस्तार होगा। ओपन आरएएन के जरिए विक्रेताओं में विविधता और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी संभव होगी, जिससे किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता घटेगी और नेटवर्क की लचीलापन एवं सुरक्षा बढ़ेगी।</p>
<p>यह परियोजना चतुर्भुज सुरक्षा संवाद के सहयोग से आगे बढ़ायी जा रही है, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान शामिल हैं। क्वाड ने पलाऊ में सुरक्षित और लचीले दूरसंचार बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग दो करोड़ अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता जतायी है। </p>
<p>यह कदम 2023 में क्वाड द्वारा पलाऊ को प्रशांत क्षेत्र में पहले ओपन आरएएन परिनियोजन स्थल के रूप में नामित किए जाने की घोषणा के अनुरूप है। इसके बाद से क्वाड ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए करीब दो करोड़ डॉलर का समर्थन सुनिश्चित किया है। इस आधार को और मजबूत करते हुए, क्वाड एशिया ओपन आरएएन अकादमी (एओआरए) और फिलीपींस में चल रहे ओपन आरएएन फील्ड परीक्षण के लिए समर्थन का विस्तार करने की योजना बना रहा है। इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका और जापान ने इसके लिए 80 लाख डॉलर देने की घोषणा की थी। </p>
<p>अमेरिका ने एओआरए के वैश्विक विस्तार के लिए 70 लाख डॉलर से अधिक निवेश करने का भी इरादा जताया है, जिसमें भारतीय संस्थानों के साथ साझेदारी में दक्षिण एशिया में बड़े पैमाने पर ओपन आरएएन कार्यबल प्रशिक्षण पहल शामिल होगी। क्वाड साझेदार दक्षिण-पूर्व एशिया में अतिरिक्त ओपन आरएएन पहलों और तुवालु टेलीकम्युनिकेशंस कॉरपोरेशन के साथ संभावित सहयोग की भी संभावनाएं तलाश रहे हैं, ताकि तुवालु को राष्ट्रव्यापी 5जी तैनाती के लिए तैयार किया जा सके। </p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि यह साझेदारी न केवल पलाऊ की डिजिटल क्षमताओं को मजबूत करती है, बल्कि प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित कनेक्टिविटी, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के व्यापक क्षेत्रीय प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 17:59:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का दावा, बोलें-ब्रिक्स, एससीओ आम सहमति से काम करते हैं, नाटो के फैसले अमेरिका की मर्जी पर निर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ब्रिक्स और एससीओ में फैसले सर्वसम्मति से होते हैं, जबकि नाटो अमेरिका पर निर्भर है। उन्होंने ईयू की भी आलोचना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-foreign-minister-sergei-lavrovs-claim-brics-sco-work-with/article-142777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)4.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ज्यादातर मामलों में सर्वसम्मति के आधार पर फैसले करते हैं, जबकि नाटो के फैसले अमेरिका पर निर्भर करते हैं। </p>
<p>विदेश मंत्री लावरोव ने रूस के एक यूट्यूब चैनल एमपाशिया मनुची प्रोजेक्ट के साथ बातचीत में कहा, ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जाता है। जब बात हमारे पश्चिमी साथियों की हो तब नहीं, बल्कि जब उन प्रतिनिधियों की होती है जिन्हें हम वैश्विक बहुमत कहते हैं, जैसे ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत के बाद वाले सीएसटीओ, ईएईयू, और सीआईएस। इन ढांचों में आम सहमति ज्यादातर बनी रहती है। आप नाटो की तरह आसानी से फ़ैसले नहीं ले सकते, जहां अमेरिकी कहते हैं'चुप रहो और हमें दिखता है कि यह सब कैसे काम करता है।</p>
<p>इसके आगे विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, यूरोपीय संघ भी फैसलों पर असर डालता है। यूरोपीय संघ की तरह, जहां ब्रसेल्स में बिना चुने हुए नौकरशाह देश की चुनी हुई सरकारों को बताते हैं कि क्या करना है, कैसे बर्ताव करना है, किसके साथ व्यापार करना है और किसके साथ नहीं करना है। हमारे हंगरी के साथियों ने ब्रसेल्स के हाल के गलत कामों पर साफ और समझने लायक टिप्पणी की है।</p>
<p>हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने दिसंबर 2025 में  कहा था कि यूरोपीय संघ यूक्रेनी संघर्ष को लंबा खींचने के लिए व्यवस्थित तरीके से कानून को रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ में कानून का राज ब्रसेल्स की तानाशाही से बदल गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:44:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूसी विदेश मंंत्री सर्गेई लावरोव का दावा, तनाव बढ़ाने की दिशा में पहला कदम नहीं उठाएंगे हम, न्यू स्टार्ट की अवधि समाप्त</title>
                                    <description><![CDATA[नयी सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) की अवधि समाप्त होने के बाद रूस अमेरिका के कदमों पर कड़ी नजर रखेगा। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि किसी औपचारिक प्रतिबंध के अभाव में अब यह देखना अहम है कि वाशिंगटन कैसे व्यवहार करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-foreign-minister-sergei-lavrov-claims-that-we-will-not/article-142673"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मंगलवार को कहा कि नयी सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) की अवधि समाप्त होने के बाद अब रूस इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि अमेरिका क्या कदम उठाता है। लावरोव ने रूस के राष्ट्रीय टीवी चैनल के एक साक्षात्कार में कहा, किसी भी प्रतिबंध की औपचारिक अनुपस्थिति के बाद अब हम बहुत करीब से देखेंगे कि अमेरिकी पक्ष कैसे कार्य करेगा। साथ ही, हम इस स्थिति को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभालेंगे और तनाव बढ़ाने की दिशा में पहल करने वाले पहले पक्ष नहीं बनेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस तनाव बढ़ाने की दिशा में पहला कदम नहीं उठाएगा।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस की क्षमताओं को ध्यान में रखे बिना भविष्य में किसी बहुपक्षीय हथियार नियंत्रण समझौते की कल्पना करना कठिन है। इसके आगे विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से कहा है कि अब चीनियों के साथ समझौता करना आवश्यक है। चीन ने कई बार अपना रुख स्पष्ट किया है और हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन अगर इस प्रक्रिया का ध्यान इस तरह के त्रिपक्षीय मोड की ओर स्थानांतरित किया जाता है, तो यह केवल मुद्दे के मूल सार को किनारे करने की इच्छा हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:29:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा सिंगापुर, रूस और बेलारूस सहित कई वैश्विक नेताओं को भी भेजा गया प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शांति बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा है, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने संसद में जानकारी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/singapore-is-evaluating-us-president-donald-trumps-proposal-to-join/article-142160"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>सिंगापुर सिटी। सिंगापुर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शांति बोर्ड में शामिल होने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा है। यह जानकारी द स्ट्रेट्स टाइम्स अखबार ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन के हवाले से गुरुवार को दी। </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि संसद के पांच सदस्यों ने बालाकृष्णन से सिंगापुर को शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए अमेरिका द्वारा दिए गए स्थायी निमंत्रण के बारे में सवाल किया था।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, 16 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने शांति बोर्ड के गठन की घोषणा की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और अमेरिकी उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस और बेलारूस सहित कई वैश्विक नेताओं को भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 15:38:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत से संबंध अटूट, कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता, चाबहार पोर्ट पर ईरान की अमेरिका को दो टूक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी छूट खत्म होने की आशंका के बीच ईरान ने कहा, चाबहार पोर्ट भारत-ईरान रिश्तों की मजबूत नींव है, कोई ताकत इसे कमजोर नहीं कर सकती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/relations-with-india-are-unbreakable-no-one-can-cause-any/article-140442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/iran1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और अमेरिका में जारी तनाव के बीच भारत के महत्वपूर्ण निवेश चाबहार पोर्ट को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। दरअसल, चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी पाबंदियों में मिली छूट आने वाली 26 अप्रैल को खत्म हो रही है। ऐसे में अगर अमेरिका अगर छूट को नहीं बढ़ाता है तो भारतीय निवेश के लिए खतरा हो सकता है। हालांकि, भारत ने कहा है कि चाबहार पोर्ट में अपने हितों की रक्षा के लिए वह अमेरिका के संपर्क में है। इस बीच ईरान के एक प्रमुख उच्च स्तरीय अधिकारी ने भारत के साथ संबंधों को अटूट बताया है और कहा है कि ईरान और भारत के रिश्तों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। </p>
<p>ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य सालार वेलायतमदार ने चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान के रिश्तों में एक अहम आधार बताया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दुनिया में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। बातचीत में वेलायतमदार ने कहा, दुनिया की हालत अच्छी नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति की हरकतें कतई गरिमापूर्ण नहीं हैं। उन्होंने हर देश में उथल-पुथल पैदा कर दी है और वे देश अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। इसमें हमारे मित्र देश भारत के महान लोग भी शामिल हैं।</p>
<p>भारत से संबंध ऐतिहासिक</p>
<p>ईरानी अधिकारी ने भारत के साथ ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया और कहा कि दोनों देश भाषा, संस्कृति और परंपरा में गहरी समानता साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी चीज भारत और ईरान के मजबूत बंधनों को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। वेलायदमदार ने कहा कि हमने अपने पारस्परिक हितों को सुरक्षित करने के लिए चाबहार में भारत के निवेश के समझौते को अंतिम रूप दिया था। चाबहार पोर्ट में निवेश को सुरक्षित रखने को लेकर दिए गए भारत के हालिया बयानों को लेकर ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य ने कहा कि भारतीय पक्ष तर्कसंगत है। भारतीय अधिकारी समझते हैं कि दुश्मन और प्रतिद्वंद्वियों की उत्तेजक कार्रवाइयों का इन साझेदारी पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हमारे विचार से इसमें कुछ भी नहीं बदला है। </p>
<p><strong>अमेरिका और ईरान में तनाव</strong></p>
<p>ईरान से यह बयान ऐसे समय में आया है जब हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों ने एक दूसरे पर तीखे हमले किए हैं। तेहरान ने अपनी तरफ बढ़ने वाले हाथ को काटने की धमकी दी है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर उन्हें मारने की कोशिश होती है तो ईरान को धरती से मिटा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका नहीं, मैं हूं दुनिया का असली लीडर, चीन का बड़ा ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड पर ट्रंप की चेतावनी से यूरोपीय सहयोगी असहज हैं। चीन ने बहुपक्षवाद, मुक्त व्यापार और सहयोग की बात कर खुद को नया वैश्विक विकल्प पेश किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/i-am-not-america-i-am-the-real-leader-of/article-140438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trunp-and-china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुश्मनों से ज्यादा दोस्तों पर भारी पड़ रहे हैं। पहले उन्होंने टैरिफ लगाकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया। अब वह ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिका के खास कहे जाने वाले यूरोपीय सहयोगियों को हड़का रहे हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ की धमकी भी दी है। हालांकि, यूरोपीय देशों ने भी न झुकने की कसम खाई है। इस बीच चीन ने खुद को एक वैकल्पिक वैश्विक नेता के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है। बड़ी बात यह है कि अमेरिका के सहयोगी देश भी चीन के साथ अपना भविष्य देख रहे हैं और नजदीकियां बढ़ा रहे हैं।</p>
<p><strong>चीन ने खुद को बताया दुनिया का नया नेता</strong></p>
<p>ट्रंप की ग्रीनलैंड पर चेतावनी के कुछ घंटों बाद, चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने सालाना अल्पाइन बैठक में मंच पर जोर देकर कहा कि बीजिंग लगातार साझा भविष्य वाले समुदाय की सोच पर काम कर रहा है और बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार का समर्थन करने में दृढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सहमति और एकजुटता को बढ़ावा दे रहे हैं, और फूट और टकराव के बजाय सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुनिया की आम समस्याओं के लिए चीन समाधान पेश कर रहा है। यह बयान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के झटके और डर के मुकाबले चीन की खुद को एक शांत, तर्कसंगत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में दिखाने की रणनीति को प्रकट करता है।</p>
<p><strong>बिना कुछ किए चीन की हो रही जय-जयकार</strong></p>
<p>चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सालों से एक ऐसी विश्व व्यवस्था को बदलने की बात कर रहे हैं जिसे वे अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा गलत तरीके से हावी मानते हैं। वे तेजी से अपनी खुद की सोच को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं, भले ही चीन के अपने पड़ोसी देशों से सीमा विवाद हो और उस पर आक्रामकता के आरोप लगते रहे हों। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को वैश्विक शक्ति संतुलन में फायदा उठाने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। उसे बस अपने रास्ते पर चलते रहना है, क्योंकि अमेरिका अपने आप ही सहयोगी और विश्वसनीयता खो रहा है।</p>
<p><strong>चीन से दोस्ती बढ़ा रहे अमेरिका के सहयोगी</strong></p>
<p>चीन की बढ़ते कद का अंदाजा अमेरिका के सबसे करीबी देश कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के हाल के चीन दौरे और भाषण से लगाया जा सकता है। कार्नी ने खुलेआम अमेरिकी वर्चस्व को एक काल्पनिक अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था का हिस्सा बताया। कार्नी ने अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा, हम जानते थे कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था की कहानी आंशिक रूप से झूठी थी - कि सबसे ताकतवर देश सुविधा के अनुसार खुद को छूट देंगे, कि व्यापार नियमों को असमान रूप से लागू किया जाएगा। <br />हालांकि, कार्नी ने रूस की जमकर आलोचना भी की, लेकिन उनको भी ट्रंप को लेकर डर है।</p>
<p><strong>कनाडा-ब्रिटेन-फ्रांस तक ने छोड़ा साथ</strong></p>
<p>कार्नी ने पिछले हफ्ते चीन का दौरा किया। उन्होंने बीजिंग और ओटावा के बीच सहयोग के एक नए दौर की शुरूआत भी की। कनाडा ने चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी पर सहमति जताई है। कार्नी ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर कनाडा के कड़े टैरिफ में ढील दी, जिसे अमेरिका के साथ मिलकर लागू किया गया था। अमेरिका के अन्य करीबी साझेदारों ने भी चीन के साथ संबंध सुधारने या उसके करीब जाने में दिलचस्पी दिखाई है, क्योंकि वे अमेरिका के खिलाफ बचाव कर रहे हैं। ब्रिटेन के कीर स्टारमर ने बीजिंग के साथ अधिक जुड़ाव पर जोर दिया है। मंगलवार को ब्रिटिश सरकार ने लंदन के वित्तीय जिले के पास एक नए चीनी मेगा दूतावास के विवादास्पद निर्माण को मंजूरी दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:28:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने अमेरिका के साथ बातचीत की इच्छा जताई</title>
                                    <description><![CDATA[वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका के साथ 'आपसी सम्मान' के आधार पर बातचीत की इच्छा जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका पिछले 25 वर्षों के हस्तक्षेप और दुष्प्रचार को छोड़कर संप्रभुता का सम्मान करे, तो वे शांति और सहयोग के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/venezuelan-president-expressed-desire-for-talks-with-america/article-137485"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/vanezula-per.png" alt=""></a><br /><p>काराकास। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका के साथ आपसी सम्मान के आधार पर बातचीत करने की इच्छा व्यक्त की है। मादुरो ने हालांकि स्पष्ट किया कि यह संवाद तभी संभव है जब अमेरिका वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद करे। एक टेलीविज़न संबोधन के दौरान मादुरो ने कहा, यदि अमेरिकी पक्ष पिछले 25 वर्षों से वेनेजुएला में हस्तक्षेप की अपनी विफल कोशिशों को छोड़ने और आपसी सम्मान के आधार पर बातचीत करने के लिए तैयार है, तो हम इसका स्वागत करेंगे। हम शांति, सहयोग और समृद्धि के मार्ग की तलाश करने के लिए तैयार हैं। </p>
<p>अपने संबोधन में राष्ट्रपति मादुरो ने अमेरिकी रुख की कड़ी आलोचना भी की। उन्होंने वेनेजुएला सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार, देश को अस्थिर करने के प्रयासों और मौजूदा नेतृत्व को उखाड़ फेंकने की साजिशों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार हराया। उन्होंने अमेरिकी मीडिया से भी अपील की कि वे वेनेजुएला की वास्तविक स्थिति को समझें और फिर उसकी रिपोर्टिंग करें। </p>
<p>ज्ञातव्य है कि, पिछले कई महीनों से अमेरिका ने नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों के आतंकवाद) से लड़ने के बहाने वेनेजुएला के पास कैरिबियन समुद्री क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हवाई और नौसैनिक बल तैनात कर रखे हैं। इस अभियान के दौरान कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी के संदेह में लगभग 30 जहाजों को डुबोया गया है, जिससे अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Dec 2025 11:26:12 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपील दोहराई, यूरोपीय संघ ने जताई आ​पत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग दोहराई है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-reiterates-appeal-to-occupy-greenland-european-union/article-136881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/donald-trump5.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी अपील दोहराई, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय संघ की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है, खनिजों के लिए नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा के पाम बीच में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में संवाददाताओं से कहा, वे कहते हैं कि डेनमार्क इसका मालिक है। </p>
<p>डेनमार्क ने इस पर कोई पैसा खर्च नहीं किया है और न ही कोई सैन्य सुरक्षा प्रदान की है। डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है और द्वीप से संबंधित सैन्य क्षमताएं बनाए रखता है।</p>
<p>रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा, हमें ग्रीनलैंड हासिल करना ही होगा और वह (लैंड्री) इस अभियान का नेतृत्व करना चाहते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:56:49 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन हॉकआई से सीरिया में भगदड़, आईएसआईएस के खिलाफ अमेरिका का जबर्दस्त हमला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने सीरिया में आईएसआईएस के खिलाफ ऑपरेशन हॉकआई शुरू किया। पल्मायरा हमले के जवाब में की गई एयर स्ट्राइक में आतंकी ठिकाने और हथियार डिपो निशाना बने। रक्षा मंत्री ने इसे बदले की कार्रवाई बताया, युद्ध की शुरुआत नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/stampede-in-syria-due-to-operation-hawkeye-americas-powerful-attack/article-136669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/us-attack-on-syria.png" alt=""></a><br /><p>दमिश्क। अमेरिका ने सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया एंड इराक (आईएसआईएस) के खिलाफ शनिवार को ऑपरेशन हॉकआई शुरू किया। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी सेना ने आईएसआईएस के कई ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। ये हवाई हमले इतने जबर्दस्त हैं कि समूचे सीरिया में भगदड़ मच गई है। यह सैन्य अभियान सीरिया के पल्मायरा में 13 दिसंबर को हुए आईएसआईएस के हमले के जवाब में किए गए, इनमें दो अमेरिकी सैनिक और सेना से जुड़ा एक इंटरप्रेटर मारे गए थे।</p>
<p><strong>आतंकियों, हथियार डिपो को नष्ट करना है मकसद</strong></p>
<p>ऑपरेशन हॉकआई का मकसद आईएसआईएस आतंकियों, हथियार डिपो और परिचालन ठिकानों को नष्ट करना है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इन हमलों पर कहा कि यह किसी युद्ध की शुरूआत नहीं है, बल्कि बदले का एलान है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अपने लोगों की रक्षा करने में कभी संकोच नहीं करेगा और कभी पीछे नहीं हटेगा। दिसंबर में अमेरिकी सेना पर हुआ हमला इस साल इस क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक था। पीड़ितों के शव बाद में अमेरिका वापस लाए गए, जहां उनके सम्मान में एक औपचारिक समारोह आयोजित किया गया। </p>
<p><strong>ट्रम्प ने पहले दी थी चेतावनी</strong></p>
<p>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ऑपरेशन शुरू होने के बाद व्हाइट हाउस ने इन हमलों को विदेशों में तैनात अमेरिकी सेनाओं पर भविष्य में होने वाले हमलों को रोकने के लिए एक ठोस जवाब बताया। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर एक संदेश में इन हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों की हत्या के बदले में की गई जवाबी कार्रवाई थी और अमेरिका सीरिया भर में आईएसआईएस के ठिकानों पर हमला कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि सीरिया में वर्षों से चल रहे संघर्ष के बावजूद, अगर आईएसआईएस का पूरी तरह से खात्मा हो जाए तो उसका भविष्य बेहतर हो सकता है।  उन्होंने यह भी कहा कि सीरियाई सरकार इस कार्रवाई से अवगत है और क्षेत्र से इस आतंकी समूह को हटाने के प्रयासों का समर्थन करती है।</p>
<p>ऑपरेशन शुरू होने के बाद अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक कड़ा बयान जारी किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि ये हमले किसी व्यापक युद्ध की शुरुआत नहीं बल्कि जवाबी कार्रवाई का सीधा परिणाम थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों की रक्षा करने में जरा भी संकोच नहीं करेगा और चेतावनी दी कि अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले किसी भी समूह का सफाया कर दिया जाएगा। हेगसेथ के अनुसार, अमेरिकी सेना ने अभियान के शुरुआती चरण में ही कई आईएसआईएस लड़ाकों को मार गिराया था और समूह को निशाना बनाना जारी रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 11:49:30 +0530</pubDate>
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