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                <title>शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला : सार्वजनिक जगहों पर पशु वध पर प्रतिबंध, जानें उल्लघंन पर कितनी होगी सजा ?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अधिसूचना के अनुसार, केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के "अनुपयुक्त" पशुओं का वध ही प्रमाणित बूचड़खानों में संभव होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-shubhendu-government-ban-on-slaughter-of-animals/article-153769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/west-bengal-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के चार दिन बाद भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 को पूरे राज्य में सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह कलकत्ता उच्च न्यायालय के 6 अगस्त, 2018 के फैसले और 8 जून, 2022 को जारी संबंधित सरकारी दिशानिर्देश के अनुसार जारी की गई है।</p>
<p>यह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब आरोप लगे थे कि एक विशेष समुदाय सड़क पर पशुओं का वध कर रहा था, जिससे आस-पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को असुविधा हो रही थी। आठ सूत्रीय निर्देश में, राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के सभी वैध बूचड़खानों को पशु वध संबंधी कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बैल, बछड़े, गाय, बछड़े, नर और मादा भैंस, भैंस के बच्चे और बधिया भैंस सहित किसी भी पशु का वध करने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि पशु को वध के लिए उपयुक्त घोषित करने वाला प्रमाण पत्र प्राप्त न हो जाए।</p>
<p>अधिसूचना में कहा गया है कि ऐसे प्रमाण पत्र नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष द्वारा सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से जारी किए जा सकते हैं। प्रमाण पत्र तब जारी किया जा सकता है जब अधिकारी लिखित रूप से संतुष्ट हों कि पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का है और प्रजनन या काम के लिए उपयुक्त नहीं है, या आयु, चोट, विकृति या बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है।</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है कि यदि ऐसे प्रमाण पत्र के लिए आवेदन अस्वीकृत कर दिया जाता है, तो प्रभावित व्यक्ति अस्वीकृति प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पशुओं के लिए वध प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उनका वध केवल नगर निगम के वधशालाओं या स्थानीय प्रशासन द्वारा नामित वधशालाओं में ही किया जा सकता है। ऐसे पशुओं का खुले सार्वजनिक स्थानों पर वध करना सख्त वर्जित है।</p>
<p>अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि नगर निगम अध्यक्षों, पंचायत समिति अध्यक्षों, सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारियों या उनके द्वारा कानून के प्रवर्तन के लिए अधिकृत किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम के तहत किए गए निरीक्षणों में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 1950 के अधिनियम के तहत सभी अपराधों को गंभीर प्रकृति का माना जाएगा। अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि इस मामले से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णय सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 13:23:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में पार्किंग ठेकेदार को चिकित्सालय अधीक्षक अरविंद खरे ने जारी किया नोटिस, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने अधिक वसूली की शिकायतों पर पार्किंग ठेकेदार को नोटिस जारी कर जुर्माना लगाया। ठेकेदार द्वारा निर्धारित दर से अधिक पैसे वसूलने पर प्रशासन ने यह सख्त कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/hospital-superintendent-arvind-khare-issued-notice-to-the-parking-contractor/article-143961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ajer.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। अजमेर के राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में स्थित पार्किंग ठेकेदार को चिकित्सालय अधीक्षक डॉक्टर अरविंद खरे ने नोटिस देकर वहां पार्किंग के बदले निर्धारित किराए से अधिक वसूली करने के मामले में 10000 का जुर्माना ठोका है। </p>
<p>डॉक्टर खरे ने बताया कि इस संबंध में उन्हें पार्किंग ठेकेदार के विरुद्ध काफी समय से शिकायतें मिल रही थी कि वह चिकित्सालय प्रशासन द्वारा किए गए टेंडर में निर्धारित की गई दो पहिया में चार पहिया वाहनों की किराया राशि से अधिक राशि वाहन मालिकों से वसूल करके अनैतिक रूप से रकम ले रहा है। इसीलिए उसे पर जुर्माना राशि निर्धारित की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:27:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईसीआईसीआई बैंक को GST विभाग से 16 करोड़ रुपये का नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग से 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के लिए नोटिस जारी किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/icici-bank-gets-notice-of-rs-16-crore-from-gst/article-137944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/icici-bank.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग से 16 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के लिए नोटिस जारी किया गया है। बैंक ने बुधवार को शेयर बाजार को बताया कि उसे 30 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के राजस्व उपायुक्त से 16,03,30,178 करोड़ रुपये का नोटिस मिला है। इसमें 8,67,57,468 रुपये के कर, 6,48,96,963 रुपये के ब्याज और 86,75,747 रुपये के जुर्माने की मांग की गयी है। </p>
<p>यह मामला ग्राहकों से बैंक खाते में न्यूनतम जमा राशि न रखने के लिए वसूले गये शुल्क पर जीएसटी की राशि सरकार को जमा न कराने से संबंधित है। इससे पहले, राजस्व उपायुक्त ने सितंबर 2025 में इसी मुद्दे पर बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बैंक ने कहा है कि वह कर नोटिस के खिलाफ अपील दायर करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 17:57:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आमेर-कुण्डा में पकड़े बिजली चोरी के 11 मामले, 7 लाख 9 हजार का लगाया जुर्माना </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर डिस्कॉम की सतर्कता शाखा ने आमेर-कुंडा की ढाणी क्षेत्र में जांच कर बिजली चोरी के 11 मामले पकड़े। आरा मशीन, पानी सप्लाई की बोरिंग और आवासीय परिसरों में चोरी पाई गई। कुल 7.09 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतर्कता व अधीक्षण अभियंता की मौजूदगी में हुई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/11-cases-of-electricity-theft-caught-in-amer-kunda-fine-of/article-135786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर डिस्कॉम की सतर्कता शाखा ने जयपुर के आमेर-कुण्डा की ढाणी क्षेत्र में सतर्कता जांच कार्रवाई की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतर्कता महेन्द्र कुमार शर्मा एवं अधीक्षण अभियंता बीएल शर्मा ने बताया कि इस दौरान आरा मशीन के कारखाने, टैंकर से पानी सप्लाई के लिए स्थापित बोरिंग और आवासीय परिसरों में 11 जगहों पर बिजली चोरी के मामले पकडेÞ, जिनमें 7 लाख 9 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।</p>
<p>भानपुरकलां स्थित आरा मशीन के कारखाने में बिजली चोरी पाए जाने पर करीब 22 हजार का जुर्माना लगाया। इसी तरह हरवर ढण्ड में टैंकर से पानी की सप्लाई के लिए स्थापित दो बोरिंग में बिजली चोरी पाए जाने पर 2 लाख 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। ग्राम खोरामीना, भानपुरकलां, हरवर, टीकमपुरा में स्थित आठ आवासीय परिसरों में विद्युत चोरी पाए जाने पर करीब 4 लाख 67 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 11:00:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर लगाया 1.50 लाख का हर्जाना, याचिका को स्वार्थ प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के एक रिटायर मुख्य अभियंता पर 1.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए उसकी जनहित याचिका खारिज कर दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-high-court-described-a-compensation-petition-of-150-lakh/article-112269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के एक रिटायर मुख्य अभियंता पर 1.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए उसकी जनहित याचिका खारिज कर दी। जनहित याचिका में उन्होंने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के संयुक्त उद्यम को रद्द करने की मांग की थी। सीजे एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस आनंद शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश अजय चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर दिए। अदालत ने  इस याचिका को स्वार्थ प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में उनके अनुभव के आधार पर यह संयुक्त उद्यम भविष्य में बिजली की महंगी दरों की ओर ले जाएगा, जो जनहित के खिलाफ है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने देखा कि यह संयुक्त उद्यम छबड़ा थर्मल पावर प्लांट के आसपास कई परियोजनाओं को लागू करने के उद्देश्य से किया गया, जिससे अतिरिक्त उत्पादन इकाइयां स्थापित की जा सकें और उत्पादन लागत घटे। अदालत ने कहा कि मामले में सिर्फ इस आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता बिजली विभाग में अभियंता रहे हैं। याचिकाकर्ता ने केवल अपनी कल्पना के आधार पर यह दावा किया है कि इस तरह की व्यवस्था से उत्पादन लागत बढ़ सकती है। दर निर्धारण कई कारकों पर निर्भर करता है। जिनकी जांच इस न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि यह जनहित याचिका कुछ कर्मचारी संघों के हित को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रेरित लगती है, जो इस संयुक्त उद्यम का विरोध कर रहे हैं, जैसा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध अभ्यावेदनों से स्पष्ट है। न्यायालय ने कहा कि यह जनहित याचिका न्यायालय के समय और संसाधनों की बर्बादी है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग। इसलिए इसे हर्जाने के साथ खारिज किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने जनहित याचिका खारिज कर याचिकाकर्ता पर 1.50 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-high-court-described-a-compensation-petition-of-150-lakh/article-112269</link>
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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 14:27:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - बकाया यूडी टैक्स एक मुश्त जमा करवाने पर ब्याज-पैनल्टी में शत प्रतिशत की मिली छूट</title>
                                    <description><![CDATA[नगरीय विकास कर में अभी तक छूट नहीं मिलने का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने उठाया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---100--exemption-in-interest-and-penalty-on-depositing-the-outstanding-ud-tax-in-lump-sum/article-100379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से गृह कर व नगरीय विकास कर की बकााय राशि एक मुश्त जमा करवाने पर छूट की घोषणा की है। इस संबंध में शुक्ववार को अधिसूचना जारी की गई।  स्वायत्त शासन विभाग के आयुक्त एवं शासन सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 107(4) के तहत यह छूट प्रदान की गई है। अधिसूचना के अनुसार वर्ष 2023-24 तक का  एक मुश्त नगरीय विकास कर की राशि जमा करवाने पर ब्याज एवं पेनल्टी में शत प्रतिशत की छूट होगी। जिन प्रकरणों में वर्ष 2011-12 से पहले का नगरीय विकास कर बकाया है उन प्रकरणों में एक मुश्त राशि जमा करवाने पर उस अवधि के नगरीय विकास कर में  पेनल्टी की छूट के साथ  मूल बकाया में भी 50  फीसदी की छूट मिलेगी। इसी तरह से सम्पूर्ण बकाया गृहकर आवासीय/ व्यवसायिक भूखंड व भवनों का एक मुश्त जमा करवाने पर  मूल गृहकर की राशि पर 50 फीसदीकी छूट और पेनल्टी  में शत प्रतिशत की छूट दी जाएगी। </p>
<p><strong>करोड़ों रुपए जमा होगा पुराना बकाया</strong><br />नगर निगम अधिकारियों  का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा हर साल पुराने बकाया यूडी टैक्स पर सितम्बर से मार्च के बीच छूट देती रही है। लेकिन इस बार इसमें देरी हुई है। लेकिन अब सरकार ने बकाया पर छूट की घोषणा कर दी है।जिससे अभी तक छूट के इंतजार मेंबकाया जमा नहीं करवा पा रहे थे वे जमा करवा देंगे। जिससे लोगों को तो लाभ होगा ही। साथ ही नगर निगम में भी करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होगा।  निगम अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में भी इसी तरह की छूट का प्रावधान किया गया था। यह छूट 31 मार्च तक प्रभावी रहेगी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />नगरीय विकास कर में अभी तक छूट नहीं मिलने का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 9 जनवरी के अंक में पेज 6 पर‘ अंतिम तिमाही शुरु, नहीं मिली बकाया पर छूट’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।  जिसमें बताया था कि  छूट के इंतजार में बकाया यूडी टैक्स जमा नहीं हो रहा है। समाचार प्रकाशित होने के बाद स्वायत्त शासन विभाग हरकत में आया और अगले ही दिन शुक्रवार को यूडी टैक्स की बकाया राशि एक मुश्त जमा करवाने पर ब्याज पेनल्टी में छूट की अधिसूचना जारी कर दी है। इससे कोटा के भी हजारों कर दाताओं को लाभ होगा और निगम में राजस्व आएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jan 2025 18:05:45 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का -  लौट आया पुराना कानून, अब सभी को देना होगा शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि मंडी यार्ड से बाहर कारोबार पर भी लगेगा शुल्क। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---old-law-returned--now-everyone-will-have-to-pay-fee/article-89031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । सरकार ने राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम में फिर से संशोधन कर दिया। यानी अब वर्ष 2020 से पहले के नियम-कायदे वापस लागू होंगे। कृषि उपज मंडी यार्ड से बाहर दलहन-तिलहन जैसी जिंसों पर व्यापार करने पर भी मंडी शुल्क लगेगा। इससे मंडी के अंदर व बाहर व्यापार में समानता आएगी। बिना मंडी शुल्क दिए व्यापार करने पर दो-तीन गुना अधिक पेनल्टी लगाई जाएगी। इस अधिनियम से मंडी के बाहर भी कारोबार पारदर्शी होगा और इससे सीधा मंडी समितियों का राजस्व भी बढ़ेगा। राज्यपाल की अनुमति पर राजस्थान कृषि उपज मंडी (संशोधन) अधिनियम (2024 का अधिनियम संख्याक 4) लागू किया है। जिसके तहत मंडी यार्ड से बाहर भी दलहन, तिलहन सहित कृषि जिंसों सहित उपज की खरीद करने वाले व्यापारियों पर मंडी शुल्क लगेगा। अब यह देना होगा शुल्क: दरअसल, अभी कृषि उपज मंडी समितियों को मंडी यार्ड के अंदर होने वाले कारोबार से ही राजस्व मिल रहा था, लेकिन अब इन अधिनियमों में संशोधन के बाद मंडी के बाहर होने वाले गुड़-शक्कर, सब्जियां, लकड़ी, कपास, जीरा, दलहन-तिलहन जैसे छोटे-बड़े व्यापार पर भी मंडी टैक्स लगने से इसका राजस्व भी कृषि उपज मंडी समिति को मिलेगा। जिससे मंडी समिति व सरकार का राजस्व बढ़ेगा। कृषि विपणन निदेशालय के अनुसार गेहूं व अन्य जिंसों पर 1.60 फीसदी शुल्क लिया जाएगा। तेलीय फसलों सरसों, मंूगफली आदि पर 0.1 फीसदी और मक्का, ज्वार, बाजरा आदि मोटा अनाज पर 0.50 फीसदी शुल्क लगेगा।  </p>
<p><strong>जानिए...कैसे होगी मॉनिटरिंग</strong><br />राजस्थान कृषि उपज मंडी संशोधन अधिनियम के तहत मंडी के बाहर खरीद करने वाले व्यापारी को बिल कटवाना होगा। अगर किसी व्यापारी के राज्य से बाहर का भी माल आया तो मंडी एक्ट के 17-7 का आवेदन भरकर सूचना देगा। ऐसा नहीं करने पर अगर व्यापारी जांच में पकड़ा जाता है तो उसके दोगुनी या तीन गुनी पेनल्टी लगेगी। इसको लेकर संबंधित मंडी सचिव जांच करेंगे। वहीं, जीएसटी विभाग के साथ समय-समय पर होने वाली बैठकों में समन्वय से समीक्षा कर होने वाले व्यापार की व्यापक पड़ताल होगी।</p>
<p><strong>सरकार को लग रही थी राजस्व की चपत</strong><br />देश में जब तीन नए कृषि कानून लागू हुए थे तो इसमें एक कानून यह भी था। जिसके तहत मंडी क्षेत्र से बाहर पैन होल्डर व्यापारी माल खरीद सकता है और उसके लिए मंडी फीस भी नहीं लगेगी। इन कानूनों को तब भारत सरकार ने तो वापस ले लिया, लेकिन राज्य सरकार ने उस समय राजस्थान में लागू कर दिया। उस समय केंद्र से कानून हट गया था लेकिन राज्य में राज्यपाल ने इसे अनुमति नहीं दी। इसलिए यह कानून तब से पिछले दिनों तक लागू ही रहा। इसकी आड़ में राज्य के बाहर माल जा रहा था। राजस्थान में कृषि उपज मंडी प्रांगण की व्यवस्था किसानों को खुली नीलामी, नकद भुगतान, सही तौल की धारणा से की गई थी। इस कानून के चलते सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />संभाग की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी के बाहर अवैध रूप से कृषि जिंसों की खरीद फरोख्त का कार्य धड़ल्ले से होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति के 12 जून के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि मडी के बाहर बिना लाइसेंस के व्यापारियों द्वारा कृषि जिंसों की खरीद करने के कारण मंडी में फसलों की आवक घट रहा है। किसानों को मंडी तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में ही रोक कर उनकी फसल खरीद के सौदे हो रहे हैं। जिससे प्रतिदिन लाखों रुपए राजस्व का सरकार को नुकसान हो रहा है। </p>
<p>अभी तक केवल मंडी परिसर में काम करने वाले व्यापारियों से ही मंडी शुल्क लिया जा रहा था। इससे मंडी के बाहर जिंसों की खरीद-फरोख्त ज्यादा होने लगी थी। इससे मंडी समिति को राजस्व का नुकसान हो रहा था। अब मंडी के बाहर कारोबार करने पर व्यापारियों को शुल्क देना होगा।<br /><strong>- शशिशेखर शर्मा, सचिव, भामाशाह कृषि उपजमंडी समिति</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2024 14:31:09 +0530</pubDate>
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                <title>लापरवाहों की चांदी, ईमानदारी पर भारी </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार द्वारा दी गई छूट का लाभ देते हुए जैन के यूडी टैक्स में पुराने बकाया पेनल्टी को शत प्रतिशत यानि करीब 27 हजार रुपए से अधिक की छूट दी गई। लेकिन उनके द्वारा उसके बाद भी टैक्स जमा नहीं कराया गया। हालत यह है कि जैन के हॉस्टल का अभी भी 1 लाख 9 हजार रुपए  यूडी टैक्स बकाया है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/silver-of-careless--heavy-on-honesty/article-42329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/beparavahon-kee-chandi,-emanadari-par-bhari...kota-news-10-04-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम द्वारा शहरी सीमा में निर्धारित मापदंड के अनुसार आवासीय व व्यवसायिक भूखंडों से नगरीय विकास कर(यूडी टैक्स) वसूल किया जा रहा है। लेकिन हालत यह है कि जो व्यक्ति व प्रतिष्ठान ईमानदारी से समय पर और लगातार टैक्स जमा कर रहा है  उसे तो सरकार की ओर से कोई राहत नहीं दीजा रही है। जबकि लापरवाह से जा जान बूझकर पिछले कई सालों से टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं उन्हें सरकार हर साल पेनल्टी में छूट पर छूट दे रही है। नगर निगम द्वारा वर्ष 2007 से नगरीय विकास कर लिया जा रहा है। आवासीय व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से निर्धारित सीमा वाले भूखंडों पर उसके हिसाब से टैक्स की वसूली की जा रही है। हालत यह है कि निगम में मात्र 10 से 15 फीसदी लोग ही ऐसे हैं जो नियमित रूप से व ईमानदारी से यूडी टैक्स जमा करवा रहे हैं। जबकि 85 से 90 फीसदी लोग ऐसे हैं जो कई-कई साल तक टैक्स ही जमा नहीं करवा रहे। लेकिन उसके बाद भी सरकार की ओर से उन्हें दंडित करने की जगह राहत दी जा रही है। </p>
<p><strong>पुराने बकाया पर पेनल्टी शत प्रतिशत तक छूट</strong><br />वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से शुरु होकर 31 मार्च तक रहता है। इस अवधि में ही टैक्स के दायरे में आने वाले लोगों को टैक्स नगर निगम में जमा करवाना होता है। अपनी जिम्मेदारी को समझने वाले व ईमानदार लोग तो हर साल समय से पहले यूडी टैक्स जमा करवा भी रहे हैं। उन्हें हर साल हजारों रुपए टैक्स देना पड़ रहा है। जबकि लापरवाह कहो या सरकार की योजनाओं का लाभ लेने की लालसा में अधिकतर लोग एक साल ही नहीं कई-कई साल तक टैक्स जमा नहीं करवाते। ऐसे में सरकार के नियम के अनुसार उन पर हर साल ब्याज व पेनल्टी लगाई तो जा रही है। लेकिन उसकी वसूली नहीं हो पा रही है। जिससे ऐसे लोगों की पौ बारह हो रही है।  ऐसे एक दो नहीं हजारों लोग हैं जो ईमानदारों पर भारी पड़ रहे हैं और जमकर चांदी कूट रहे हैं। सरकार की ओर से ऐसे लापरवाह लोगों को दंडित करने की जगह उन्हें वित्तीय वर्ष के अंत तक  बकाया टैक्स जमा करवाने पर ब्याज पेनल्टी में छूट का लाभ और दिया जा रहा है। वह भी  50 फीसदी से लेकर 100 फीसदी तक की। इस बार भी सरकार ने पहले तो यह छूट 31 मार्च तक दी। लेकिन उसे बढ़ाकर अब 30 सितम्बर तक  कर दिया है। </p>
<p><strong>35 हजार में से 15 हजार ने ही कराया टैक्स जमा</strong><br />निगम के राजस्व अनुभाग द्वारा हर साल यूडी टैक्स का लक्ष्य तो निर्धारित किया जा रहा है लेकिन वह कभी पूरा वसूल नहीं हो पा रहा था। इसे देखते हुए पहले नगर निगम कोटा दक्षिण ने और कोटा उत्तर निगम ने भी यूडी टैक्स वसूली का काम निजी कम्पनी को दिया है। हालांकि कम्पनी ने भी पूरे साल प्रयास किए तो निगम के गत वित्तीय वर्ष के लक्ष्य 7 करोड़ के आंकड़े को तो पार कर लिया। करीब 8.65 करोड़ से अधिक का टैक्स वसूल भी किया। लेकिन टैक्स के दायरे  में आने वाले करीब 35 हजार से अधिक लोगों में से अभी भी मात्र 15 हजार ने ही टैक्स जमा करवाया है। जबकि कोटा उत्तर में तो स्थिति और भी खतरनाक है। यहां तो कम्पनी के प्रयास से लक्ष्य के कुछ करीब तो पहुंचा जा सका लेकिन वह भी उस आंकड़े को नहीं छू सके। कोटा उत्तर निगम के 6 करों के लक्ष्य के मुकाबले करीब 4.50 करोड़ रुपए तक टैक्स वसूल हो सका है। </p>
<p><strong>छूट के बाद भी नहीं जमा करवा रहे टैक्स</strong><br />इतना ही नहीं शहर में हजारों लोग ऐसे भी हैं जिन्हें सरकार की ओर से बकाया यूृडी टैक्स जमा करवाने पर पेनल्टी में शत प्रतिशत की छूट दी जा रही है। वे उसके बाद भी टैक्स जमा नहीं करवा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला न्यू राजीव गांधी नगर स्थित भाजपा नेता राकेश जैन के हॉस्टल का है। जैन के घर में ही चार मंजिला हॉस्टल सचालित हो रहा है। जिसका वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक का यूडी टैक्स बकाया है। उस पर हर साल पेनल्टी जुड़ती गई। लेकिन जैन पर उसका कोई असर नहीं हुआ। सरकार द्वारा दी गई छूट का लाभ देते हुए जैन के यूडी टैक्स में पुराने बकाया पेनल्टी को शत प्रतिशत यानि करीब 27 हजार रुपए से अधिक की छूट दी गई। लेकिन उनके द्वारा उसके बाद भी टैक्स जमा नहीं कराया गया। हालत यह है कि जैन के हॉस्टल का अभी भी 1 लाख 9 हजार रुपए  यूडी टैक्स बकाया है।  </p>
<p><strong>15 साल बाद हो रहा दोबारा से सर्वे</strong><br />यूडी टैक्स वसूलने वाली निजी कम्पनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि निगम ने वर्ष 2007 से यूडी टैक्स लेना शुरू किया है। उसके बाद दोबारा से सम्पति का सर्वे नहीं किया गया था। ऐसे में पुराने हिसाब से ही टैक्स वसल किया जा रहा था। लेकिन निजी कम्पनी को यह काम मिलने के बाद सभी का नए सिरे से सर्वे किया गया है। ऐसे में करीब 15 साल बाद सर्वे होने से बहुत कुछ बदलाव हुआ है। कई जगह पर आवासीय की जगह व्यवसायिक प्रतिष्ठान बन चुके है।  कम्पनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि हॉस्टल, हॉस्पिटल और शिक्षण सस्थानों के व्यवसायिक होने के बावजूद उनसे इंस्टीट्यूशनल का टैक्स वसूल किया जा रहा है। आवासीय में सिर्फ जमीन  के हिसाब से जबकि इंस्टीट्यूशनल में टैक्स तो आवासीय लिया जा रहा है लेकिन उसमें मंजिल  निर्माण के हिसाब से टैक्स वसूल किया जा रहा है।</p>
<p><strong>सरकार ही दे रही लापरवाहों को बढ़ावा</strong><br />समय पर टैक्स जमा नहीं करवाने वालों पर पेनल्टी का प्रावधान भी सरकार ने किया है और बाद में उन्हें छूट भी सरकार ही दे रही है। ऐसे में लापरवाहों को बढावा तो सरकार ही दे रही है। <br /><strong>- राकेश माखीजा, जवाहर नगर </strong></p>
<p><strong>ईमानदारों को भी प्रोत्साहित करे सरकार </strong><br />समय पर टैक्स जमा करवाने लोगों को भी सरकार की ओर से राहत व छूट देनी चाहिए। जिससे ऐसे लोग प्रोत्साहित हों। वरना वे भी दूसरों को  देखकर लापरवाह बरतने लगेंगे। उसी से तो ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। <br /><strong>- विजय गोयल, तलवंडी</strong></p>
<p>समय पर और  ईमानदारी से टैक्स जमा करने वालों को वैसे तो सरकार की ओर से कोई छूट का प्रावधान नहीं है। लेकिन  उनके लिए यही सबसे बड़ी राहत है कि उन पर न तो ब्याज पेनल्टी लगती है और न ही किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। फायर एनओसी लेने समेत किसी तरह की कोई अड़चन भी नहीं आती है। फायर एनओसी के लिए यूडी टैक्स जमा होना अनिवार्य कर दिया है। इतना जरूर है कि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में पूरा टैक्स जमा करवाने पर 10 फीसदी की छूट दी जाती है। जबकि लापरवाह लोगों पर ब्याज व पेनल्टी का आर्थिक बोझ तो पड़ता ही है। उन्हें फायर एनओसी नहीं मिल सकती। सरकार की ओर से छूट का प्रावधान किया भी जाता है तो वह सिर्फ पेनल्टी माफ की जाती है। जबकि टैक्स तो उन्हें फिर भी जमा करवाना होता है। समय पर टैक्स जमा करवाने से निश्चिंतता रहती है। अब निजी कम्पनी टैक्स वसूली का काम कर रही है तो अधिकतर को टैक्स जमा करवाना ही होगा। हालांकि पूर्व में समय पर टैक्स जमा नहीं करवाने वालों के प्रतिष्ठानों को नगर निगम ने सीज भी किया है।  <br /><strong>- विजय अग्निहोत्री, राजस्व अधिकारी, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Apr 2023 14:44:58 +0530</pubDate>
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                <title>दरिन्दगी : वृद्धा की हत्या, शव के साथ दुष्कर्म करने वाले को फांसी की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने सात दिन में किया चालान पेश, 74 दिन में मिली सजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80---%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE--%E0%A4%B6%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A4%BE/article-2838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/justice1.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। हनुमानगढ़ के पीलाबंगा थाना इलाके में गत 16 नवम्बर की रात को 60 वर्षीय वृद्ध महिला की गला दबाकर हत्या करने के बाद उसके शव के साथ दुष्कर्म करने के आरोपी सुरेन्द्र कुमार माण्डिया को फांसी की सजा सुनाई गई है।</p>
<p><br /> हनुमानगढ़ पुलिस अधीक्षक प्रीती जैन ने बताया कि पीलीबंगा इलाके में एक 19 वर्षीय युवक ने 60 वर्षीय विधवा महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया, जिसमें वह सफल नहीं हुआ तो उसने वृद्धा की गला घोंटकर हत्या कर दी। उसके बाद दुष्कर्म किया। इस प्रकरण की जांच के लिए पुलिस ने तुरंत जब्त पदार्थों का परीक्षण एफएसएल से करवाकर मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त सुरेन्द्र उर्फ मांडिया (19) निवासी दुलमाना को गिरफ्तार कर केवल सात दिन में उसके खिलाफ चालान पेश कर दिया गया। प्रकरण को केस ऑफिसर स्कीम में लेकर पैरवी कराई गई और सोमवार को मात्र 74 दिन में आरोपी को फांसी की सजा सुना दी गई। <br /> <br /> <strong>सैंपलों की जांच कर 7 दिन में सौंपी रिपोर्ट </strong><br /> हनुमानगढ़ में वृद्धा की हत्या कर दुष्कर्म के मामले में एसपी की ओर से तुंरत रिपोर्ट मांगी गई थी। हमारी क्यूआरटी टीम ने तुरंत सभी सैम्पलों की जांच की और सात दिन में रिपोर्ट सौंप दी। -<strong>डॉ. अजय कुमार शर्मा, एफएसएल निदेशक राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Nov 2021 12:23:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>रिटायरमेंट से पहले देना होगा शपथ पत्र आयोग का नहीं कोई जुर्माना बकाया</title>
                                    <description><![CDATA[15 नवंबर तक वेतन या पेंशन से कटौती कर जुर्माना राशि वसूलने के निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A4%AA%E0%A4%A5-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-1670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/21.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। विभिन्न विभागों के राज्य सूचना अधिकारियों पर सूचना आयोग से लगाई गई जुर्माना राशि वसूली नहीं होने के बाद अब राज्य सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है। अर्थात अब रिटायरमेंट से पहले अधिकारी व कर्मचारी को एक शपथ पत्र देना होगा, जिसमें बताना होगा कि सूचना आयोग का जुर्माना बकाया नहीं है। साथ ही 15 नवंबर तक सभी विभागों को वेतन व पेंशन से बकाया  जुर्माना राशि वसूलने के निर्देश दिए है।</p>
<p><br /> दैनिक नवज्योति ने नौ अक्टूबर के अंक में  ‘11 साल से 1723 अफसरों से नहीं हो सकी 2.15 करोड़ की वसूली’ शीर्षक से खबर प्रकाशित करते हुए इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। अब मुख्य सचिव निरंजन आर्य की ओर से इस संबंध में सभी विभागों के एचओडी व उनके अधीनस्थ पोस्टेड सभी अधिकारियों को परिपत्र जारी कर निर्देश प्रदान किए गए है। इसमें तय किया गया है कि सरकार के विभिन्न विभागों से रिटायरर होने वाले कर्मचारियों को अब पेंशन लाभ पाने से पहले यह शपथ पत्र देना होगा कि उस पर सूचना आयोग की ओर से लगाए गए किसी जुर्माने का भुगतान बकाया नहीं है। सभी विभागों और निगम-बोर्डों को बकाया जुर्माना राशि दो करोड़ 15 लाख का 15 नवंबर तक आयोग में जमा कराना होगा।<br /> <br /> <strong>मृतक कार्मिकों के बकाया की रिपोर्ट मांगी</strong><br /> सरकार ने सभी विभागों से उन मृतक कार्मिकों की भी सूची मांगी है, जिन पर जुर्माना लगाया गया था, लेकिन वे जमा नहीं करा पाए। सभी विभाग एक सप्ताह में इसकी जानकारी देंगे, तब सरकार इस राशि को लेकर निर्णय लेगी। अर्थात इसे माफ भी कर सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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