<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/space-mission/tag-64023" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>space mission - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/64023/rss</link>
                <description>space mission RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इसरो का बड़ा मिशन तैयार! 4 सितंबर तड़के GSLV-F17 से EOS-05 का प्रक्षेपण, अंतरिक्ष निगरानी को मिलेगी नई ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो चार सितंबर को श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 (जीसैट-1ए) का प्रक्षेपण करेगा। भू-समकालिक कक्षा में स्थापित होने वाला यह भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह होगा, जो पर्यावरण निगरानी, आपदा प्रबंधन और देश के भूभाग की रियल-टाइम तस्वीरें उपलब्ध कराने में मदद करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-big-mission-ready-launch-of-eos-05-from-gslv-f17-in/article-164369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/isro11.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारी क्षमता वाले स्वदेशी जीएसएलवी रॉकेट से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-05 का प्रक्षेपण चार सितंबर की तड़के 02:55 बजे श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से किया जाएगा। इसरो ने सोशल मीडिया एक्स पर आधिकारिक तौर पर मंगलवार को इसकी घोषणा की। इसरो ने लिखा, "जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन चार सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार तड़के 02:55 बजे देश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, एसएचएआर, श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण के लिए निर्धारित है।" इससे पहले, मिशन की घोषणा करते समय इसरो ने प्रक्षेपण की तारीख नहीं बतायी थी, जिसकी पुष्टि आज उसने आधिकारिक तौर पर कर दी।</p>
<p>क्रायोजेनिक तीसरे ऊपरी चरण में खराबी के कारण जीएसएलवी-एफ10 के 12 अगस्त 2021 को जीसैट-1 का मिशन विफल रहने के लगभग पांच वर्ष बाद, इसरो ईओएस-05 अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण करेगा, जिसे जीसैट-1ए के नाम से भी जाना जाता है। हैवी लिफ्ट प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-मार्क-2 का उपयोग करते हुए यह सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (सब-जीटीओ) से संचालित होने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह होगा।</p>
<p>दूसरे लॉन्च पैड से यह प्रक्षेपण चार सितंबर की तड़के 02:55 बजे होगा और एक छोटे अंतराल के बाद शुरू किये जा रहे इस मिशन के लिए तैयारियां चल रही हैं। ईओएस-05 को भारत के जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लॉन्च ह्वीकल (जीएसएलवी) की 19वीं उड़ान जीएसएलवी-एफ17 से प्रक्षेपित किया जायेगा और जीएसएलवी-एफ17 पेलोड फेयरिंग का विन्यास चार मीटर व्यास वाला ओजीव (कंपोजिट) संस्करण है। तीन चरणों वाले 51.7 मीटर ऊंचे जीएसएलवी-एफ17 का प्रक्षेपण द्रव्यमान 420.5 टन है। यह रॉकेट ईओएस-05 उपग्रह को उप-भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (उप-जीटीओ) में स्थापित करेगा। प्रक्षेपण के बाद 2,367 किलोग्राम वजनी अंतरिक्ष यान को उप-जीटीओ में स्थापित किया जाएगा। इस कक्षा में इसकी पेरिजी (निकटतम बिंदु) 170 किलोमीटर और एपोजी (दूरस्थ बिंदु) 28,934 किलोमीटर होगी। भूमध्य रेखा के सापेक्ष इसकी कक्षीय झुकाव लगभग 19.28 डिग्री (प्लस या माइनस एक डिग्री) रहेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा, "ईओएस-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन अंतरिक्ष यान है। यह भू-समकालिक कक्षा से भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है।" ईओएस-05 को पृथ्वी की विस्तृत तस्वीरें लेने और निगरानी एवं अन्य अनुप्रयोगों के लिए डेटा प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें भूमि और पर्यावरण के नियमित अवलोकन की आवश्यकता होती है। इसका उद्देश्य मौजूदा रिमोट सेंसिंग क्षमताओं को बेहतर बनाना है। जीसैट को मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में तस्वीरें लेने के लिए तैयार किया गया है, ताकि साफ मौसम (बादल-मुक्त परिस्थितियों) में लगातार अंतराल पर देश के बड़े हिस्से की लगभग रियल-टाइम तस्वीरें मिल सकें। 42 मीटर (138 फुट) स्पैटियल रिजॉल्यूशन के साथ यह हर पांच मिनट में चुने हुए क्षेत्र की और हर 30 मिनट में पूरे भारतीय भूभाग की तस्वीर ले सकता है।"</p>
<p>यह ईओएस-05 जीसैट-1ए का स्थान लेगा, जो 2021 में मिशन विफल हो कर नष्ट हो गया था और 2025 तथा 2026 की शुरुआत में पीएसएलवी मिशन की लगातार दो विफलताओं के बाद इस प्रस्तावित मिशन पर बारीकी से नजर रखी जायेगी। प्रक्षेपण यान से जुड़ी गड़बड़ियों के कारणों की जांच के लिए प्रक्षेपणों को अस्थायी रूप से रोकने के बाद इसरो ने इस मिशन में कदम बढ़ाया है। विफलताओं ने चिंताएं बढ़ा दी थीं, जिससे जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि अंतरिक्ष एजेंसी अपने प्रक्षेपण कार्यक्रम में विश्वास मजबूत करना चाहती है। इस उपग्रह से पृथ्वी की इमेजिंग में भारत की क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>
<p>यह मिशन भारत के विस्तार लेते अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके साथ ही, राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए तेजी से उन्नत होती उपग्रह प्रणालियों को तैनात करने की देश की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-big-mission-ready-launch-of-eos-05-from-gslv-f17-in/article-164369</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-big-mission-ready-launch-of-eos-05-from-gslv-f17-in/article-164369</guid>
                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:29:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-12/isro11.jpg"                         length="94417"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी अंतरिक्ष यात्री के साथ 'क्रू-13' मिशन सितंबर के मध्य से पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिये होगा रवाना : नासा</title>
                                    <description><![CDATA[नासा ने घोषणा की है कि स्पेस-एक्स क्रू-13 मिशन अब सितंबर के मध्य तक प्रक्षेपित किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में अमेरिका, रूस और कनाडा के चार अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक शोध के लिए ISS जाएंगे। यह मिशन नासा और रोस्कोस्मोस के बीच हुए 'क्रॉस-कंट्री' समझौते के तहत अंतरिक्ष स्टेशन पर निरंतर संचालन सुनिश्चित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/crew-13-mission-with-russian-astronaut-will-depart-for-international-space/article-151556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/nasa1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक बयान में कहा कि रूसी अंतरिक्ष यात्री सर्गेई टेटेरयातनिकोव के साथ नासा का 'क्रू-13' मिशन अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिये नवंबर के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही प्रक्षेपित किया जाएगा। बयान के अनुसार, "नासा के स्पेस-एक्स क्रू-13 मिशन के हिस्से के रूप में, तीन अंतरिक्ष एजेंसियों के चार चालक दल सदस्य एक लंबी अवधि के वैज्ञानिक अभियान के लिये सितंबर के मध्य से पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के लिये उड़ान भरेंगे।" नासा के अंतरिक्ष यात्री जेसिका वॉटकिंस और ल्यूक डेलाने क्रमशः अंतरिक्ष यान कमांडर और चालक की भूमिका निभाएंगे, जबकि कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जोशुआ कुट्रिक और रूसी अंतरिक्ष यात्री टेटेरयातनिकोव मिशन विशेषज्ञ के रूप में सेवा देंगे।</p>
<p>वर्ष 2022 में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस और नासा ने क्रॉस-कंट्री उड़ानों (एकीकृत चालक दल मिशनों) पर एक समझौता किया। इस समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी आपात स्थिति या समय-सारणी में बदलाव के बावजूद अंतरिक्ष स्टेशन पर हमेशा कम से कम एक रूसी कॉस्मोनॉट और एक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहे, ताकि वे स्टेशन के रूसी और अमेरिकी दोनों हिस्सों का संचालन संभाल सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/crew-13-mission-with-russian-astronaut-will-depart-for-international-space/article-151556</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/crew-13-mission-with-russian-astronaut-will-depart-for-international-space/article-151556</guid>
                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:57:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/nasa1.png"                         length="1407219"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ISRO के एलवीएम-3 प्रक्षेपण की उलटी गिनती शुरू, बुधवार को होगा लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो का एलवीएम3-एम6 रॉकेट बुधवार सुबह श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित होगा। यह 6.5 टन का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एलईओ में स्थापित करेगा, जो अब तक का सबसे भारी वाणिज्यिक पेलोड है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-lvm3-launch-countdown-begins-today-at-855-am-launch/article-136878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro-harikota.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। नैस्डैक में सूचीबद्ध एएसटी स्पेसमोबाइल इंक के 6.5 टन के ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह को ले जाने वाले भारत के एलवीएम3-एम6 रॉकेट के बुधवार सुबह होने वाले प्रक्षेपण की उलटी गिनती मंगलवार सुबह लगभग 8.55 बजे शुरू होने की उम्मीद है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह मिशन एलवीएम3 की छठी परिचालन उड़ान है।</p>
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ने बताया है कि एलवीएम3 बुधवार को सुबह 8:24 बजे श्रीहरिकोटा के दूसरे प्रक्षेपण पैड से उड़ान भरेगा। मिशन शुरू होने के लगभग 16 मिनट बाद, 43.5 मीटर ऊँचा और 640 टन वजनी यह प्रक्षेपण यान ब्लूबर्ड-6 उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित कर देगा। यह एलईओ में स्थापित किया गया अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह होगा और भारतीय धरती से एलवीएम3 द्वारा प्रक्षेपित किया गया सबसे भारी पेलोड होगा। उलटी गिनती के दौरान, रॉकेट के तरल और क्रायोजेनिक चरणों में प्रणोदक भरे जाएंगे और इसके सिस्टम की अंतिम जांच की जाएगी।</p>
<p>आईएसआरओ द्वारा विकसित एलवीएम3 एक तीन-चरण वाला भारी-भरकम वाहन है, जिसमें दो एस200 सॉलिड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर, एक एल 110 लिक्विड कोर स्टेज और एक सी25 क्रायोजेनिक अपर स्टेज शामिल हैं। इसका लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान 640 टन, ऊंचाई 43.5 मीटर और भूतुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में 4,200 किलोग्राम पेलोड ले जाने की क्षमता है। </p>
<p>अपने पिछले मिशनों में, एलवीएम3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और दो वनवेब मिशनों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है, जबकि सबसे हालिया एलवीएम3 मिशन, एलवीएम3-एम5/सीएमएस-03, 2 नवंबर, 2025 को सफलतापूर्वक पूरा हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-lvm3-launch-countdown-begins-today-at-855-am-launch/article-136878</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isros-lvm3-launch-countdown-begins-today-at-855-am-launch/article-136878</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 11:48:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/isro-harikota.png"                         length="1224386"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        