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                <title>Greenland - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ग्रीनलैंड के पास फ्रांस ने भेजा राफेल से लैस परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर, जबरन कब्जे की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय एकजुटता दिखाते हुए फ्रांस ने परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को उत्तरी अटलांटिक की ओर तैनात किया, यूरोपीय संप्रभुता को समर्थन जताया और अमेरिका संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-sends-rafale-equipped-nuclear-aircraft-carrier-to-greenland-in-preparation/article-141142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)11.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के देश एकजुट होते दिख रहे हैं। अमेरिका को खुली चेतावनी देने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने एकमात्र परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को भेजा है। यह राफेल फाइटर जेट से लैस है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने इस तैनाती के बारे में ऐलान किया है। माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना के हमले के खतरे को देखते हुए फ्रांसीसी नौसेना ऐक्शन में आई है। यही नहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से पेरिस में मिलने जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि मैक्रों यूरोपीय एकजुटता को एक बार फिर से अपना समर्थन जाहिर करेंगे। साथ ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकजुटता को भी अपना समर्थन देंगे।</p>
<p><strong>फ्रांसीसी स्ट्राइक कैरियर कहां जा रहा?</strong></p>
<p>फ्रांस, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता आर्कटिक में सुरक्षा खतरे, ग्रीनलैंड के आर्थिक तथा सामाजिक विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसको फ्रांस और यूरोपीय संघ दोनों ही सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि चार्ल्स डी गॉल को कहां तैनात किया जा रहा है, लेकिन समाचार एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि यह उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में यह इलाका अमेरिका और यूरोप के बीच भूराजनीतिक तनाव का केंद्र बनकर उभरा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नेवल एयर ग्रुप ओरियन 26 सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए तोउलोन नौसैनिक अड्डे से रवाना हो गया है। </p>
<p><strong>स्ट्राइक कैरियर के साथ पूरा बेड़ा</strong></p>
<p>फ्रांस के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में चार्ल्स डी गॉल और उसके विमान, साथ ही कई एस्कॉर्ट और सपोर्ट जहाज शामिल हैं। इसमें एक डिफेंस फ्रिगेट, एक सप्लाई शिप और एक हमलावर पनडुब्बी है। यह अभ्यास ऐसे समय में होने जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को लगातार अमेरिका में मिलाने की धमकी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>जंग के मूड में यूरोप, टूट सकता है नाटो </strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कमर कस चुके हैं। अमेरिका की सेना इसके लिए लगातार तैयारी भी कर रही है। ट्रंप के इस रुख से 32 देशों की सदस्यता वाले सैन्य संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ यूरोपीय देश एकजुट हो रहे हैं। ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी भी दी है। </p>
<p>इस बीच नाटो चीफ ने चेतावनी दी है कि बिना अमेरिका के नाटो देश अपनी रक्षा नहीं कर सकते हैं। ग्रीनलैंड का प्रशासन डेनमार्क देखता है जो नाटो का सदस्य देश है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। दरअसल, अमेरिका यहां पर अपना गोल्डन डोम डिफेंस सिस्टम लगाना चाहता है ताकि रूस और चीन की मिसाइलों से अमेरिका को बचाया जा सके। </p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को दी टैरिफ की धमकी</strong></p>
<p>यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। नाटो का आर्टिकल 5 कहता है कि अगर एक सदस्य देश पर दुश्मन का हमला होता है तो यह सभी देशों पर अटैक माना जाएगा। यही नहीं इस जंग में नाटो के हर सदस्य देश को सैन्य सहायता देना होगा। </p>
<p>नाटो के महासचिव जनरल मार्क रट ने सोमवार को खुलासा किया कि अमेरिकी सैन्य सहायता के बिना यूरोप अपनी खुद की रक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने यूरोपीय सांसदों से कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है।</p>
<p><strong>जर्मनी-पोलैंड बनाना चाहेंगे परमाणु बम</strong></p>
<p>एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका ठीक इसी समय यूरोप को अपने ऊपर निर्भर बनाए रखेगा और उसे एक विरोधी ब्लॉक के रूप में उभरने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप के शासनकाल में नाटो के आंतरिक नियम बदलने जा रहे हैं। अगर अमेरिका नाटो से निकलता है तो यूरोपीय सुरक्षा ढांचा खंड-खंड हो जाएगा। </p>
<p>यूरोपीय देश सामूहिक सुरक्षा की जगह पर अपनी-अपनी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर देंगे। उन्होंने कहा कि जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देश परमाणु बम हासिल करने पर बहस करने लगेंगे। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस असलियत में अमेरिका की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। ये दोनों देश पूरे यूरोप की उस तरह से सुरक्षा नहीं कर पाएंगे जैसे कि अमेरिका करता है।</p>
<p><strong>अमेरिकी सेना का ग्रीनलैंड में बेस</strong></p>
<p>जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप भू-राजनीतिक दबाव का एक मापक बन गया है। इससे पता चलता है कि पुरानी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था किस तरह कमजोर पड़ने लगी है। इन सभी के केंद्र में पिटुफिक अंतरिक्ष ठिकाना है, जिसे पहले थुले एयरबेस के नाम से जाना जाता था। शीतयुद्ध के दौरान एक चौकी के रूप में इस्तेमाल यह बेस अब अमेरिकी सेना के अंतरिक्ष बल केंद्र का एक अहम हिस्सा है, जो मिसाइल का पता लगाने से लेकर जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने तक हर चीज के लिए आवश्यक है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि उस समय बढ़ रही है, जब युद्ध के बाद की नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शांति और सुरक्षा बनाए रखने में तेजी से निष्प्रभावी साबित हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:26:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा, ग्रीनलैंड में अपने दूतावास के उद्घाटन पर गश्ती पोत भेजेगा कनाडा</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा ग्रीनलैंड के नूक में वाणिज्यिक दूतावास उद्घाटन के दौरान आर्कटिक गश्त हेतु तटरक्षक पोत तैनात करेगा, जिससे क्षेत्र में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/foreign-minister-anita-anand-said-canada-will-send-patrol-vessel/article-140976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>ओटावा। ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अगले हफ्ते अपने वाणिज्यिक दूतावास के उद्घाटन के मौके पर कनाडा एक गश्ती पोत भेजेगा। कनाडाई मीडिया ने विदेश मंत्री अनीता आनंद के हवाले से यह जानकारी दी है।</p>
<p>आनंद ने सोमवार को एक साक्षात्कार में कहा कि तैनात किये जाने वाले पोत को विशेष रूप से आर्कटिक क्षेत्रों में गश्त के लिये तैयार किया गया है। विदेश मंत्री के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यह एक कनाडाई तटरक्षक पोत होगा, न कि शाही कनाडाई नेवी पोत। पिछले हफ्ते आनंद ने कहा था कि कनाडा आर्कटिक में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का इरादा रखता है और इसी सिलसिले में ग्रीनलैंड में अपना वाणिज्यिक दूतावास खोलेगा। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के समय में कई बार उसे खरीदने या 'कब्जा' करने की मंशा जताते हुए कहा है कि यह उनके देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये जरूरी है। </p>
<p>डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने ही अमेरिका को कोई गलत कदम उठाने के खिलाफ चेतावनी दी है और अपनी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिये कहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 17:21:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड खरीदने निकले ट्रंप पर पुतिन का तंज, बताई नई कीमत, यूरोप को दिखाया कूटनीतिक आईना</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में घमासान जारी है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के जख्म कुरेद दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/putin-taunts-trump-who-set-out-to-buy-greenland-shows/article-140490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/greeland-dispute.png" alt=""></a><br /><p>ग्रीनलैंड। ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में घमासान जारी है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के जख्म कुरेद दिए हैं। दरअलस, राष्ट्रपति पुतिन ने डेनमार्क पर ग्रीनलैंड के साथ औपनिवेशिक व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस द्वीप की कीमत आज के समय में महज 200 से 250 मिलियन डॉलर आंकी जा सकती है। राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की ओनरशिप के विवाद से रूस का कोई लेना-देना नहीं है और यह मामला अमेरिका व डेनमार्क को आपस में सुलझाना चाहिए।</p>
<p>इसके अलावा रूसी सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने 1867 में अमेरिका द्वारा रूस से अलास्का की खरीद का उदाहरण दिया और महंगाई के हिसाब से उसकी मौजूदा कीमत का हवाला देकर ग्रीनलैंड का तुलनात्मक मूल्य बताया। पुतिन के इस बयान को यूरोप के लिए तंज माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन यूरोप-अमेरिका के टकराव को यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में राजनीतिक संतुलन के तौर पर देख रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 14:43:20 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका नहीं, मैं हूं दुनिया का असली लीडर, चीन का बड़ा ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड पर ट्रंप की चेतावनी से यूरोपीय सहयोगी असहज हैं। चीन ने बहुपक्षवाद, मुक्त व्यापार और सहयोग की बात कर खुद को नया वैश्विक विकल्प पेश किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/i-am-not-america-i-am-the-real-leader-of/article-140438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trunp-and-china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुश्मनों से ज्यादा दोस्तों पर भारी पड़ रहे हैं। पहले उन्होंने टैरिफ लगाकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया। अब वह ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिका के खास कहे जाने वाले यूरोपीय सहयोगियों को हड़का रहे हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ की धमकी भी दी है। हालांकि, यूरोपीय देशों ने भी न झुकने की कसम खाई है। इस बीच चीन ने खुद को एक वैकल्पिक वैश्विक नेता के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है। बड़ी बात यह है कि अमेरिका के सहयोगी देश भी चीन के साथ अपना भविष्य देख रहे हैं और नजदीकियां बढ़ा रहे हैं।</p>
<p><strong>चीन ने खुद को बताया दुनिया का नया नेता</strong></p>
<p>ट्रंप की ग्रीनलैंड पर चेतावनी के कुछ घंटों बाद, चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने सालाना अल्पाइन बैठक में मंच पर जोर देकर कहा कि बीजिंग लगातार साझा भविष्य वाले समुदाय की सोच पर काम कर रहा है और बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार का समर्थन करने में दृढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सहमति और एकजुटता को बढ़ावा दे रहे हैं, और फूट और टकराव के बजाय सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुनिया की आम समस्याओं के लिए चीन समाधान पेश कर रहा है। यह बयान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के झटके और डर के मुकाबले चीन की खुद को एक शांत, तर्कसंगत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में दिखाने की रणनीति को प्रकट करता है।</p>
<p><strong>बिना कुछ किए चीन की हो रही जय-जयकार</strong></p>
<p>चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सालों से एक ऐसी विश्व व्यवस्था को बदलने की बात कर रहे हैं जिसे वे अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा गलत तरीके से हावी मानते हैं। वे तेजी से अपनी खुद की सोच को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं, भले ही चीन के अपने पड़ोसी देशों से सीमा विवाद हो और उस पर आक्रामकता के आरोप लगते रहे हों। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को वैश्विक शक्ति संतुलन में फायदा उठाने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। उसे बस अपने रास्ते पर चलते रहना है, क्योंकि अमेरिका अपने आप ही सहयोगी और विश्वसनीयता खो रहा है।</p>
<p><strong>चीन से दोस्ती बढ़ा रहे अमेरिका के सहयोगी</strong></p>
<p>चीन की बढ़ते कद का अंदाजा अमेरिका के सबसे करीबी देश कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के हाल के चीन दौरे और भाषण से लगाया जा सकता है। कार्नी ने खुलेआम अमेरिकी वर्चस्व को एक काल्पनिक अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था का हिस्सा बताया। कार्नी ने अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा, हम जानते थे कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था की कहानी आंशिक रूप से झूठी थी - कि सबसे ताकतवर देश सुविधा के अनुसार खुद को छूट देंगे, कि व्यापार नियमों को असमान रूप से लागू किया जाएगा। <br />हालांकि, कार्नी ने रूस की जमकर आलोचना भी की, लेकिन उनको भी ट्रंप को लेकर डर है।</p>
<p><strong>कनाडा-ब्रिटेन-फ्रांस तक ने छोड़ा साथ</strong></p>
<p>कार्नी ने पिछले हफ्ते चीन का दौरा किया। उन्होंने बीजिंग और ओटावा के बीच सहयोग के एक नए दौर की शुरूआत भी की। कनाडा ने चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी पर सहमति जताई है। कार्नी ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर कनाडा के कड़े टैरिफ में ढील दी, जिसे अमेरिका के साथ मिलकर लागू किया गया था। अमेरिका के अन्य करीबी साझेदारों ने भी चीन के साथ संबंध सुधारने या उसके करीब जाने में दिलचस्पी दिखाई है, क्योंकि वे अमेरिका के खिलाफ बचाव कर रहे हैं। ब्रिटेन के कीर स्टारमर ने बीजिंग के साथ अधिक जुड़ाव पर जोर दिया है। मंगलवार को ब्रिटिश सरकार ने लंदन के वित्तीय जिले के पास एक नए चीनी मेगा दूतावास के विवादास्पद निर्माण को मंजूरी दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:28:32 +0530</pubDate>
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                <title>भारत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को दी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी, सामने आई चौकाने वाली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने से इनकार करने पर फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी दी है। उन्होंने मैक्रों का ग्रीनलैंड पर असहमति वाला निजी संदेश भी लीक किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-you-dont-join-the-board-of-peace-trump-threatens/article-140230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ समय सभी देशों पर ट्रेरिफ लगा रहे हैं, इससे पहले उन्होंने भारत को भी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसी बीच अब ट्रंप ने फ्रांस के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। बता दें कि यह चेतावनी फ्रांस द्वारा ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार करने के बाद सामने आई है। </p>
<p>मीडिया से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, अगर फ्रांस ने दुश्मनाना रवैया अपनाया तो भारी टैरिफ लगाया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि इससे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को बोर्ड में शामिल होने पर मजबूर होना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, इस विवाद को और हवा तब मिली जब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर मैक्रों का एक निजी संदेश साझा किया। बता दें कि संदेश में ग्रीनलैंड को लेकर असहमति जताई गई थी और दावोस में G7 नेताओं के साथ मुलाकात का प्रस्ताव भी रखा गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:16:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या वैश्विक राजनीति का अखाड़ा बनेगा ग्रीनलैंड</title>
                                    <description><![CDATA[वेनेजुएला में सैन्य अभियान के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी, उसके तेल भंडारों पर नियंत्रण के बाद क्या अब ग्रीनलैंड का नंबर आने वाला है ? ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/will-greenland-become-an-arena-for-global-politics/article-139425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वेनेजुएला में सैन्य अभियान के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी, उसके तेल भंडारों पर नियंत्रण के बाद क्या अब ग्रीनलैंड का नंबर आने वाला है? यह आशंका इसलिए बलवती हो रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के प्रस्ताव को दोहराया है। यह उनकी अमेरिका प्रथम नीति का हिस्सा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों पर केंद्रित है। चुनाव दौरान उनके ड्रील बेबी ड्रील नारे का मर्म अब दुनिया को समझ में आने लगा है। खरीद का प्रस्ताव भी ट्रंप ने पहली बार वर्ष 2019 में ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव रखा था। पिछले साल कहा था-मुझे लगता है हमें यह मिल जाएगा। किसी न किसी तरह से किसी दूसरे तरीके से ही। पहले खरीद का प्रस्ताव, फिर नकद भुगतान योजना प्रति व्यक्ति दस हजार से एक लाख डॉलर तक का। विदेश मंत्री मार्को रुबियो डेनिश अधिकारियों से बातचीत की योजना बना रहे हैं।</p>
<p><strong>ग्रीनलैंड पर दावा : </strong></p>
<p>इसके पीछे यह सोच भी हो सकती है कि डेनमार्क ने वर्ष 1917 में कैरेबियन क्षेत्र में अपनी कई कॉलोनियों को अमेरिका को बेचा था। ऐतिहासिक रूप से अमेरिका ने वर्ष 1867,1946 और 1950 में भी ग्रीनलैंड पर दावा किया था। लेकिन ट्रंप ने इसे आधुनिक स्वरूप दिया है। ग्रीनलैंड के प्रति रुख आक्रामक और रणनीतिक रूप से प्रेरित रहा है। ताकि चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों के बीच नाटो क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यूरोपीय देशों का विरोध इस पर यूरोपीय देशों में खलबली मची हुई है। उनके नेताओं ने ट्रंप के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जाहिर किया है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम के नेताओं ने इस मामले पर डेनमार्क के साथ खड़ा होने का दावा किया हैं। डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा है कि ग्रीनलैंड अपने लोगों का है और यहां के मामलों पर केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड का अधिकार है।</p>
<p><strong>अमेरिकी उपराष्ट्रपति :</strong></p>
<p>इस पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ट्रंप को यूरोपीय देश हल्के में नहीं लें। कुछ शत्रु देश ग्रीनलैंड में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह जगह सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया को मिसाइली हमलों से बचाने के लिए जरूरी है। दूसरी ओर राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयार्क टाइम्स को दिए अपने साक्षात्कार में कहा है कि उनमें जो आक्रामकता है, सिर्फ और सिर्फ खुद वही रोक सकते हैं। वे किसी अंतरराष्ट्रीय नियम-कानून और संधि को नहीं मानते। यह क्षेत्र डेनमार्क का स्व-शासित क्षेत्र है। डेनमार्क नाटो का सदस्य राष्ट्र है। उन्होंने चेताया कि अमेरिकी कब्जा नाटो का अंत हो सकता है। यानी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी हमारी सुरक्षा व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।</p>
<p><strong>सबसे बड़ा द्वीप है :</strong></p>
<p>डेनमार्क जिसने 300 सालों तक ग्रीनलैंड पर नियंत्रण बनाए रखा, वह आज उतनी बड़ी सैन्य शक्ति नहीं है जितनी 17वीं सदी में था। ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है जो रूस की पनडुब्बियों और चीन के जहाजों पर निगरानी रखने के लिए आदर्श है। ट्रंप के अनुसार यह क्षेत्र चीनी और रूसी नौसेनाओं से घिरा हुआ है, इसलिए अमेरिकी नियंत्रण जरूरी है। ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है जो उत्तरी धु्रव के पास स्थित है और औपचारिक रूप से डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। इसका स्थान उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक समुद्र के बीच में है जिस वजह से यह रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तरी अमेरिका-यूरोप के बीच मुख्य नौसैनिक और वायु मार्गों के नजदीक है। यह रूस की उत्तरी नौसेना और चीन के आर्कटिक में बढ़ते प्रभाव की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण चोक पॉइंट में पड़ता है।</p>
<p><strong>संसाधनों का खजाना :</strong></p>
<p>इसका विशाल क्षेत्र में असंख्य प्राकृतिक संसाधन जैसे दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और खनिज पाए जाते हैं जो आधुनिक तकनीक, रक्षा और ऊर्जा उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। 36 अरब टन दुर्लभ खनिज, 60 लाख टन ग्रैफाइट, 2.35 लाख टन लीथियम, 28 अरब कच्चे तेल का भंडार है। जलवायु परिवर्तन से तेजी से पिघलते आर्कटिक बर्फ की वजह से यह क्षेत्र पहले से अधिक सुलभ हो गया है जिससे नई शिपिंग लाइंस और संसाधन खनन संभावनाएं खुल गई हैं। अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर आक्रामक रुख अपनाता है तो नाटो गठबंधन में भरोसे की कमी पैदा कर सकता है। कुछ ग्रीनलैंड के नेताओं का मानना है कि अमेरिकी दबाव स्वायत्तता और आजादी की आकांक्षा को तेज करेगा जो एक स्वतंत्र देश बनने की दिशा में हो सकता है।</p>
<p><strong>स्वायत्तता मजबूत है :</strong></p>
<p>ग्रीनलैंड के नेता जेन्स फ्रेडरिक नेलसन ने विलय को खारिज करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि हमला नाटो का अंत होगा। ग्रीनलैंड का रक्षा कानून 1952 का है, जो आक्रमण पर गोली चलाने की अनुमति देता हैं। यहां 57 हजार की जनसंख्या है। लेकिन स्वायत्तता मजबूत है। यहां की रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के पास है। रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी है कि कोई विदेशी ताकत यहां हमला करती है, तो उसका जवाब गोली से मिलेगा। उसके संसाधनों पर कब्जा करने से अमेरिका को आर्कटिक क्षेत्र में अपना वर्चस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी। लेकिन असफलता नाटो और यूरोप से संबंधों को बिगाड़ देगी। पनामा और कनाडा जैसे अन्य क्षेत्रों पर भी उनकी नजर, विस्तारवाद के रूप में मानी जाएगी। कुल मिलाकर ट्रंप का रुख दृढ़ है, लेकिन कूटनीतिक बाधाएं बनी हुई हैं। ऐसे में सवाल उठते हैं- क्या शक्तिशाली देशों को कमजोर क्षेत्रों पर नियंत्रण का अधिकार है? क्या स्थानीय समुदायों की सहमति के बिना भू-राजनीतिक निर्णय लेने उचित हैं।</p>
<p><strong>-महेशचंद्र शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 12:42:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका फाइन ग्रीनलैंड विधेयक: अमेरिकी सांसद ने ग्रीनलैंड के विलय और राज्य का दर्जा देने के लिए पेश किया विधेयक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी कांग्रेस में ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने का विधेयक पेश किया गया। रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-fines-greenland-bill-us-mp-introduced-bill-for-the/article-139420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/us-on-greeland.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिगटन। रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के लिए अमरीकी कांग्रेस में एक विधेयक अमेरिकी संसद में पेश किया है। सांसद फाइन के कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, ग्रीनलैंड विलय और राज्य का दर्जा अधिनियम सोमवार को फ्लोरिडा के रिपब्लिकन ने पेश किया। विधेयक के बताए गए लक्ष्यों में ग्रीनलैंड के विलय और उसके बाद उसे राज्य का दर्जा देना शामिल है। </p>
<p>सांसद रैंडी फाइन ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, आज, मुझे ग्रीनलैंड विलय और राज्य का दर्जा अधिनियम पेश करते हुए गर्व हो रहा है, यह एक ऐसा विधेयक है जो राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को संघ में लाने के लिए जरूरी तरीके खोजने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं, हमारे दुश्मन आर्कटिक में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हम ऐसा नहीं होने दे सकते। ग्रीनलैंड को हासिल करके हम अपने दुश्मनों को आर्कटिक क्षेत्र को नियंत्रित करने से रोकेंगे और रूस और चीन से अपने उत्तरी हिस्से को सुरक्षित करेंगे।</p>
<p>सांसद रैंडी फाइन ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ग्रीनलैंड कोई दूर का इलाका नहीं है जिसे हम नजरअंदाज कर सकें, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बहुत जरूरी संपत्ति है। जो भी ग्रीनलैंड को नियंत्रित करेगा, वह आर्कटिक के मुख्य शिङ्क्षपग रास्तों और अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करेगा। अमेरिका उस भविष्य को ऐसे शासनों के हाथों में नहीं छोड़ सकता जो हमारे मूल्यों से नफरत करते हैं और हमारी सुरक्षा को कमजोर करना चाहते हैं।</p>
<p>विधेयक में कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसे कदम उठाने का अधिकार है जो जरूरी हो सकते हैं, जिसमें डेनमार्क के साथ बातचीत करने की कोशिश करना भी शामिल है, ताकि ग्रीनलैंड को अमेरिका के क्षेत्र के रूप में मिलाया जा सके या किसी और तरह से हासिल किया जा सके। ट्रंप को अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को हासिल करने के बाद विधेयक के तहत कांग्रेस के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बाध्य करेगा, जिसमें उन संभावित संघीय क़ानूनों में बदलावों का विवरण होगा, जिन्हें राष्ट्रपति नए अधिग्रहित क्षेत्र को एक राज्य के रूप में शामिल करने के लिए आवश्यक समझें।</p>
<p>व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कल कहा कि अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए कोई खास समय-सीमा तय नहीं की गई है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कोई समय-सीमा तय नहीं की है लेकिन यह निश्चित रूप से उनके लिए एक प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ने कल रात बहुत साफ कर दिया था। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करे क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो आखिरकार इसे चीन या रूस द्वारा हासिल कर लिया जाएगा, या शायद दुश्मनी से कब्जा कर लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/america-fines-greenland-bill-us-mp-introduced-bill-for-the/article-139420</link>
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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 12:27:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमें अमेरिकी होना मंजूर नहीं, हमें आजादी पसंद, खुद भविष्य तय करेंगे, ग्रीनलैंडवासियों ने ट्रम्प को सुनाई खरी-खरी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड के सभी पांच राजनीतिक दलों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अधिग्रहण की धमकी को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहाँ के लोग तय करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/we-do-not-accept-being-americans-we-like-freedom-we/article-139148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगेन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर धमकी भरा लहजा अपनाया हुआ है। इतना ही नहीं अमेरिकी नेता भी ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। इस बीच  ग्रीनलैंड की संसद के सभी पांच प्रमुख राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दो टूक जवाब दिया है। राजनीतिक दलों ने ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की धमकियों को कड़े शब्दों में खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकन नहीं होगा और उसका भविष्य सिर्फ ग्रीनलैंड के लोगों की तरफ से तय किया जाना चाहिए।</p>
<p>बयान में पांचों दलों, जिसमें प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन सहित विपक्षी दल नालेराक के नेता भी शामिल हैं, उन्होंने कहा कि वे किसी भी अमेरिकी अधिग्रहण के गंभीर रूप से असम्मानजनक रुख के खिलाफ हैं। देर रात जारी बयान में नेताओं ने साफ कहा कि हम अमेरिकी नहीं होंगे, हम डेनिश नहीं होंगे, हम ग्रीनलैंडवासी हैं। सभी दलों की यह एकता विशेष रूप से इसलिए अहम है,  क्योंकि इसमें विपक्षी पार्टी नालेराक के नेता पेले ब्रोबर्ग भी शामिल हैं, जो वाशिंगटन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए सबसे अधिक इच्छुक रही हैं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले ब्रोबर्ग ने ग्रीनलैंड से डेनमार्क को दरकिनार करते हुए सीधे अमेरिका के साथ बातचीत करने का आह्वान किया था। अब बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि ग्रीनलैंड का भविष्य खुद ग्रीनलैंड के लोगों द्वारा तय किया जाना चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय कानून और आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।</p>
<p>यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद अपनी बयानबाजी को और तेज कर दिया है। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से जरूरी है। इसी के साथ उन्होंने सैन्य बल के प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस और चीन को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमरिकी कब्जे को जरूरी बता रहे हैं, लेकिन ग्रीनलैंड के लोगों ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया है और उन्हें दोटूक कहा है कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की उनकी कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी। ग्रीनलैंडवासियों ने कहा कि ग्रीनलैंड के लोग स्वतंत्रताप्रिय हैं और उनकी स्वतंत्रता से कोई खिलवाड़ नहीं करे। </p>
<p><strong>डेनमार्क में भी राजनीतिक हलचल तेज </strong></p>
<p>ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर डेनमार्क में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डेनमार्क की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद रासमस जारलोव ने अमेरिका के रुख को न सिर्फ परेशान करने वाला बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। रासमस जारलोव ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे सहयोगी देश द्वारा सैन्य कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा, यह अभूतपूर्व है कि आप अपने ही मित्र देशों को धमकाएं ऐसे देशों को, जिन्होंने कभी आपके खिलाफ कुछ नहीं किया और हमेशा वफादार रहे।</p>
<p><strong>वफादार दोस्तों को धमकाने का हैरतअंगेज रवैया</strong></p>
<p>डेनिश सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर डेनमार्क जैसे देश को इस तरह की आक्रामक भाषा का सामना करना पड़ सकता है, तो यह दुनिया के अन्य देशों के लिए भी खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा अगर डेनमार्क सुरक्षित नहीं है, तो फिर कोई भी देश सुरक्षित नहीं। ग्रीनलैंड के संदर्भ में यारलोव ने ट्रंप के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड की ओर से न तो कोई खतरा है और न ही किसी प्रकार की शत्रुता। उन्होंने जोड़ा ग्रीनलैंड के मामले में किसी भी तरह का बहाना नहीं बनता, न कोई धमकी है, न दुश्मनी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 12:14:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पैसा लो अपना देश दो : डेनमार्क को हड़पने की नई चाल, ट्रंप का हर नागरिक को 90 लाख रुपए का ऑफर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए विचार कर रहे हैं, जिसके तहत ग्रीनलैंडवासियों को प्रति व्यक्ति 10,000 से 1,00,000 डॉलर तक का भुगतान किया जा सकता है। इस प्रस्ताव पर व्हाइट हाउस में चर्चा हो रही है, लेकिन यूरोपीय देशों ने इसका विरोध किया है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने इसे अस्वीकार किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/take-the-money-give-your-country-trumps-new-trick-to/article-139034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर है। ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंडवासियों को डेनमार्क से अलग कर संयुक्त राज्य अमेरिका के करीब आने के लिए राजी करने के प्रयास को लेकर विचार कर रहे हैं। इसके लिए ग्रीनलैंड के निवासियों को प्रति व्यक्ति मोटी रकम देने के बारे में आंतरिक रूप से चर्चा चल रही है। दरअसल, समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि व्हाइट हाउस के अधिकारी ग्रीनलैंड के हर व्यक्ति को 10,000 से 1,00,000 डॉलर ( 90 लाख भारतीय रुपए) तक का एकमुश्त भुगतान देने पर बात कर रहे हैं। हालांकि, यह पैसे कब और कैसे दिए जाएंगे, यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है और इसके विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं।</p>
<p><strong>कब्जा नहीं, खरीदना चाहते ?</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति का ग्रीनलेंड को खरीदने का ये आइडिया नया नहीं है, लेकिन हाल में इस पर ज्यादा गंभीरता से बात हो रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपने देश के सांसदों से कहा है कि प्रेसिडेंट ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करना चाहते बल्कि उसे खरीदना चाहते हैं। हालांकि, ट्रंप के इस कदम का यूरोपीय देश विरोध कर रहे हैं। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच स्थित ग्रीनलैंड द्वीप विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है। जो लगभग 2,166,086 वर्ग किलोमीटर (836,330 वर्ग मील) के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह द्वीप राष्ट्र वर्तमान में डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जिसकी आबादी लगभग 57,000 है और यहाँ प्रचुर मात्रा में उपयोगी प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। बताते चले कि डेनमार्क और संयुक्त राज्य अमेरिका नाटो के सहयोगी हैं, ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन के हालिया बयानों की कड़ी आलोचना हुई है। मंगलवार को फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त घोषणा जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य के बारे में निर्णय पूरी तरह से ग्रीनलैंड और डेनमार्क पर निर्भर करता है और अमेरिकी हस्तक्षेप का अर्थ इसके विपरीत होगा।</p>
<p><strong>बहुत हो गया...</strong></p>
<p>ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा द्वीप के अधिग्रहण का मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रतिक्रिया दी। बहुत हो गया... अब विलय के बारे में कोई कल्पना नहीं चलेगी।</p>
<p><strong>व्हाइट हाउस कर रहा विचार :</strong></p>
<p>व्हाइट हाउस ने भी ग्रीनलैंड के खरीद पहलू पर अपनी राय रखी। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम संभावित खरीद के स्वरूप पर विचार कर रही है। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पुष्टि की कि वे अगले सप्ताह वाशिंगटन में अपने डेनिश समकक्ष से ग्रीनलैंड और उसके भविष्य पर चर्चा करने के लिए मिलेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 11:00:51 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी: डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर कहा कि रूस और चीन के खतरे को देखते हुए अमेरिका को ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। डेनमार्क ने इस दावे को 'तर्कहीन' बताकर सिरे से खारिज कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/greenland-is-strategically-important-for-america-donald-trump/article-138528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फिर दोहराया कि अमेरिका को रणनीतिक दृष्टिकोण के मद्देनजर ग्रीनलैंड की आवश्यकता है। विमान एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी के कारण ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा के लिए अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है, क्योंकि इस समय यह बहुत रणनीतिक जगह है और वहां हर जगह रूस और चीन के जहाज फैले हुए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से उन्हें ग्रीनलैंड की आवश्यकता है और डेनमार्क इसे संभालने में सक्षम नहीं होगा। उन्होंने दावा भी किया कि यूरोपीय संघ भी उनके इस विचार का समर्थन करता है और वह इस बात को जानते हैं।</p>
<p>ट्रंप की यह टिप्पणी वेनेजुएला में वाशिंगटन के सैन्य अभियान के बाद आई है। एक संप्रभु देश के खिलाफ अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई ने ग्रीनलैंड को लेकर उन आशंकाओं को फिर बढ़ा दिया है, जिसके बारे में ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि वह आर्कटिक में इसकी रणनीतिक स्थिति के मद्देनजर इसका विलय करना चाहते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ने पहले भी कई बार कहा है कि वह अटलांटिक महासागर स्थित एक विशाल और संसाधन संपन्न द्वीप ग्रीनलैंड अपने देश में विलय करना चाहते हैं। ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक स्वशासित क्षेत्र है। </p>
<p><strong>किसी का भी विलय करने का कोई अधिकार नहीं  </strong></p>
<p>ट्रंप के इस बयान के बाद डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अमेरिका के राष्ट्रपति से इस क्षेत्र को धमकी देना बंद करने का आग्रह किया है। फ्रेडरिक्सन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने को आवश्यक बताया जाना पूरी तरह से तर्कहीन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका को डेनमार्क साम्राज्य के तीन देशों में से किसी का भी विलय करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने अमेरिका से एक ऐतिहासिक रूप से करीबी सहयोगी और दूसरे देश तथा वहां के लोगों के खिलाफ धमकियां बंद करने का पुरजोर आग्रह करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि वे बिक्री के लिए नहीं हैं। जानकारों का मानना है कि वर्तमान में दुर्लभ खनिज सामग्री की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर चीन का दबदबा है। इसलिए अमेरिका ग्रीनलैंड को अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और इन महत्वपूर्ण संसाधनों पर चीन के नियंत्रण का मुकाबला करने के एक बड़े अवसर के रूप में देखता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:40:56 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपील दोहराई, यूरोपीय संघ ने जताई आ​पत्ति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जे की मांग दोहराई है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा। डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-reiterates-appeal-to-occupy-greenland-european-union/article-136881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/donald-trump5.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी अपील दोहराई, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय संघ की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है, खनिजों के लिए नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्लोरिडा के पाम बीच में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में संवाददाताओं से कहा, वे कहते हैं कि डेनमार्क इसका मालिक है। </p>
<p>डेनमार्क ने इस पर कोई पैसा खर्च नहीं किया है और न ही कोई सैन्य सुरक्षा प्रदान की है। डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है और द्वीप से संबंधित सैन्य क्षमताएं बनाए रखता है।</p>
<p>रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त करने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा, हमें ग्रीनलैंड हासिल करना ही होगा और वह (लैंड्री) इस अभियान का नेतृत्व करना चाहते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 12:56:49 +0530</pubDate>
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