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                <title>मानसून की मोहलत कह रही सावधान, बारिश तेज हुई तो सड़क से लेकर बिजली तक बढ़ेगा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून में करंट से पहले सुरक्षा का इंतजाम जरूरी, खुले ट्रांसफार्मर बन सकते हैं जानलेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-monsoon-s-delayed-arrival-serves-as-a-warning--if-rainfall-intensifies--risks-ranging-from-road-hazards-to-electrical-dangers-will-escalate/article-160025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मानसून दस्तक दे चुका है। आसमान में बादल छा रहे हैं, बारिश का मौसम भी बन रहा है, लेकिन अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। मौसम की यह मोहलत प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आखिरी अवसर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज हुआ तो शहर की कुछ बदहाल सड़कें, ब्रिजों के नीचे जलभराव और खुले विद्युत ट्रांसफार्मर लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी से सड़क की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की राह मुश्किल कर रहे हैं। फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण इन रास्तों से आवागमन हो रहा है, लेकिन लगातार बारिश शुरू होते ही यही छोटी खामियां बड़ी समस्या में बदल सकती हैं। गड्ढों में पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा नहीं रहता और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बारिश से पहले भरें गड्ढे, वरना पानी छिपा देगा खतरा</strong><br />मोहन टॉकीज रोड, नयापुरा से एरोड्रम जाने वाले मार्ग और छावनी से नयापुरा की ओर आने वाले रास्ते सहित शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर कहीं गिट्टी फैली हुई है तो कहीं सड़क पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन गुजरते हैं। अभी इन स्थानों की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश तेज होने के बाद मरम्मत कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है।</p>
<p><strong>ब्रिज के नीचे पानी भरा तो थमेगी रफ्तार</strong><br />शहर में बने कुछ ब्रिजों के अंडरपास के नीचे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती रही है। तेज बारिश के बाद यदि पानी की निकासी समय पर नहीं हो तो कुछ ही देर में सड़क पर पानी जमा हो जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। । नतीजा यह होता है कि कुछ घंटों की बारिश लोगों के लिए घंटों की परेशानी बन जाती है। यदि बारिश रात के समय हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पंपिंग व्यवस्था, ड्रेनेज की सफाई और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के इंतजाम पहले से तैयार रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा घेरा जरूरी, बारिश में बढ़ सकता है करंट का खतरा</strong><br />सड़कों और जलभराव के साथ शहर में खुले विद्युत ट्रांसफार्मर भी चिंता का विषय हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरण खुले क्षेत्र में लगे हुए हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी भरने या बिजली के तारों और उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर करंट का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों, राहगीरों और पशुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। सड़क के गड्ढे भरना, बिखरी गिट्टी हटाना, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना और खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करना ऐसे काम हैं जिन्हें तेज बारिश से पहले पूरा किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>बारिश से पहले हो काम, बाद में केवल खानापूर्ति नहीं</strong><br />गड्ढे अभी दिखाई दे रहे हैं, बारिश में इनमें पानी भर जाएगा। तब वाहन चालक को पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढा कितना गहरा है। प्रशासन को बारिश से पहले ही सड़कों की मरम्मत करनी चाहिए। सड़क पर फैली गिट्टी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बारिश में सड़क गीली होने पर वाहन फिसलने का डर रहता है। इसे समय रहते हटाया जाना चाहिए। हर साल तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नालियों और ड्रेनेज की सफाई पहले ही हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। खुले ट्रांसफार्मर बारिश के दिनों में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विद्युत विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुरक्षा जाली और अन्य इंतजाम करने चाहिए।”<br /><strong>-राहुल शर्मा, वाहन चालक</strong></p>
<p><strong>बारिश का इंतजार क्यों?</strong><br />मानसून आ चुका है और तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है। विभागों के सामने सवाल साफ हैं—क्या सड़कों के गड्ढे बारिश से पहले भरे जाएंगे? क्या बिखरी गिट्टी हटेगी? क्या ब्रिजों के नीचे जल निकासी की जांच होगी? क्या खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जाएगा? अभी कार्रवाई हुई तो शहर को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है। यदि इंतजार तेज बारिश और शिकायतों का किया गया तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी और विभागों को फिर आपातकालीन मरम्मत में जुटना होगा। बारिश कब होगी, यह मौसम तय करेगा, लेकिन शहर बारिश के लिए कितना तैयार होगा, यह जिम्मेदार विभागों को तय करना है।<br /><strong>-हरपाल सिंह राणा, शहरवासी</strong></p>
<p>बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संभावित जलभराव व आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। निगम व केडीए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-पीयूष समारिया, जिला कलक्टर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:09:13 +0530</pubDate>
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                <title>नाला निर्माण में लापरवाही, नई छत पर पड़ी दरारें</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूली बच्चों सहित आमजन की प्रतिदिन आवागमन में बढ़ी परेशानी ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/negligence-in-drain-construction--cracks-appear-on-the-new-roof-slab/article-158669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/05.gif" alt=""></a><br /><p>कापरेन। कस्बे के शक्ति चौराहा स्थित निर्माणाधीन नाले के कार्य में लापरवाही सामने आने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। निर्माणाधीन व नाले की एक ओर छत डालने के बाद समय पर और निर्धारित मानकों के से अनुरूप तराई (क्योरिंग) नहीं किए  जाने से नई छत पर शुरुआती दरारें  दिखाई देने लगी हैं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर को भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों कार का कहना है कि निर्माण स्थल परं ने कर्मचारी पानी लेकर तो पहुंचते हैं,  लेकिन छत पर पानी रोकने की  समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण  पानी तुरंत बह जाता है। ऐसे में कंक्रीट  की आवश्यक तराई नहीं हो पा रही है, तथा जिससे निर्माण की मजबूती प्रभावित  होने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p>करीब 45 दिनों से चल रहा निर्माण कार्य अब तक अधूरा है। इस बीच विद्यालय खुल जाने से स्कूली बच्चों सहित आमजन को प्रतिदिन आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चे जोखिम उठाकर निर्माण स्थल से गुजरने को विवश हैं। वहीं मानसून की शुरुआत के साथ अधूरे निर्माण को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। कस्बेवासी गजेन्द्र जांगिड़, नर्सिंग राठौर, सुरेश कुमार जैन, सुनील गोयल और मनोज शर्मा ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने तथा कार्य में शीघ्रता लाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते निर्माण पूरा होने से आमजन और स्कूली विद्यार्थियों को राहत मिलेगी तथा बरसात के दौरान संभावित परेशानियों से भी बचाव हो सकेगा।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />ठेकेदार को छत की सही तरीके से तराई कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। निर्माण कार्य में तेजी लाई जा रही है और इसी महीने नाले से आवागमन शुरू करा दिया जाएगा।<br /><strong>- चिराग, एईएन, पीडब्ल्यूडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:11:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बजट होते हुए भी विकास कार्यों में खर्च नहीं कर पा रहे कॉलेज, प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के सरकारी कॉलेजों में लेखाधिकारी नहीं, बजट लेप्स होने का मंडराया खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-having-a-budget--colleges-are-unable-to-spend-on-development-projects/article-144941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(5).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र के अधिकांश सरकारी महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी (डबलएओ) के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिसका असर कॉलेजों की वित्तीय व्यवस्था और शैक्षणिक सुविधाओं पर पड़ रहा है। जरूरी सामान की खरीद से लेकर बिल भुगतान तक के काम अटक रहे हैं, जिससे महाविद्यालय प्रशासन को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि 10 हजार रुपए से अधिक की किसी भी वस्तु की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया जरूरी होती है, जो सहायक लेखाधिकारी के अभाव में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। नतीजन फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां, कंप्यूटर और अन्य आवश्यक उपकरण की बजट होते हुए भी कॉलेज प्रशासन खरीद नहीं कर पा रहे हैं। इससे कॉलेजों की मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p><strong>प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</strong><br />शिक्षकों ने बताया कि कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों के एक दर्जन से अधिक सरकारी कॉलेजों में सहायक लेखाधिकारी का पद भरा नहीं है। जिसकी वजह से सिर्फ वित्तीय संबंधित कार्य ही नहीं बल्कि शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। लेखा संबंधित छोटे मोटे कार्यों का जिम्मा जिन शिक्षकों को दिया जाता है, उनका शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा दैनिक कैशबुक का रख-रखाव, नोटशीट पर टिप्पणियां व ट्रेजरी से जुड़े बिलों का निपटान जैसे कार्यों में तकनीकी और लेखा संबंधी समझ की आवश्यकता होती है, जो सामान्यत: शिक्षकों के कार्यक्षेत्र से अलग है। ऐसे में प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>फर्नीचर का बजट लेप्स होने का खतरा</strong><br />सुकेत कॉलेज के छात्रों का कहना है, महाविद्यालय में फर्नीचर खरीद के लिए 4 लाख का बजट आया हुआ है लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं होने के कारण अब तक खरीद नहीं हो पाई, जबकि अगले माह वित्तीय वर्ष समाप्त होने के साथ बजट भी लेप्स होने का खतरा मंडरा रहा है । जरूरी संसाधनों की समय पर खरीद न होने और वित्तीय प्रक्रियाओं के लंबित रहने का सीधा असर विद्यार्थियों की सुविधाओं और पढ़ाई पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>हाड़ौती के इन कॉलेजों में नहीं डबल एओ</strong><br />कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर हाड़ौती के एक दर्जन से अधिक राजकीय महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी के पद खाली पड़े हैं। जिनमें राजकीय महाविद्यालय इटावा, कनवास, सांगोद, रामगंजमंडी, सुकेत, चेचट, दीगोद, बारां जिले में राजकीय महाविद्यालय छिपाबडौद, अटरु, बूंदी जिले के गवर्नमेंट कॉलेज तालेड़ा, हिंडोली, डाबी सहित कई कॉलेज शामिल हैं। इन कॉलेजों को विकास सामग्री खरीदने के लिए या तो नोडल महाविद्यालय या फिर रे-सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है।</p>
<p><strong>इन समस्याओं से जूझ रहे कॉलेज प्रशासन</strong><br />शिक्षकों का कहना है, महाविद्यालयों में फर्नीचर, कम्यूटर, इनवर्टर, कूलर-पंखें, टेबल-कुर्सियां खरीद व संविदा पर लगे शिक्षकों का वेतन संबंधित, विद्यार्थियों का फीस स्ट्रक्चर, स्टेशनरी क्रय, एडमिशन के दौरान आने वाली फीस को विभिन्न मदों में विभाजित करना, कक्षा-कक्ष मेंटिनेंस, अनुमानित बजट बनाना, लाइब्रेरी का सेटअप तैयार करना व किताबें खरीदने सहित सम्पूर्ण वित्तीय कार्य सहायक लेखाधिकारी द्वारा किए जाते हैं। जिनके अभाव में महाविद्यालय प्रशासन आवश्यक साधन संसाधनों की खरीद नहीं कर पाते। संभाग में कई महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य व प्रोफेसर</strong><br />लाइब्रेरी के लिए अलग-अलग मद में बजट आया हुआ है। लाइब्रेरी सेटअप, कताबें वह अन्य सामानों के लिए 75 - 75 हजार का बजट मिला है। इनमें मात्र 20 हजार रुपए की ही खरीद हो पाई है। जबकि 55 हजाररुपए यूं ही पड़े हैं, क्योंकि एसपीपीपी पोर्टल पर खरीद प्रकिया के लिए टेंडर किए जाने होते हैं, जो वित्त संबंधी नियमों की जानकारी के बगैर नहीं हो सकते। ऐसे में सहायक लेखा अधिकारी नहीं होने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- ललित कुमार, प्रोफेसर राजकीय महाविद्यालय कनवास</strong></p>
<p>सहायक लेखाधिकारी नहीं होने से वित्तीय संबंधी कार्यों के लिए काफी परेशानी हो रही है। वर्तमान में कॉलेज में 600 स्टूडेंट है जिसके मुकाबले टेबल कुर्सियां 300 ही है। ऐसे सहायक लेखाधिकारी के अभाव में आवश्यक सामग्री की खरीद समय पर नहीं हो पाती। टेंडर संबंधित कार्य नियमों के अभाव में शिक्षक नहीं कर पाते हैं। अनावश्यक देरी से बजट लेप्स होने का खतरा बना रहता है।<br /><strong>- रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय इटावा</strong></p>
<p>सुकेत कॉलेज में फर्नीचर के लिए 4 लाख का बजट मिला हुआ है। लेकिन खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं होने से बजट लेप्स का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में आयुक्तालय को भी लिखा है। इस बजट से 200 से टेबल कुर्सी खरीदनी है। हालांकि बजट लेफ्ट ना हो इसके लिए खादी ग्रामोद्योग से फर्नीचर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन हर कॉलेज सहायक लेखाधिकारी होना चाहिए।<br /><strong>- संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी</strong></p>
<p>कॉलेज में डबल एओ का पद रिक्त है। ऐसे में आवश्यक संसाधनों की खरीद के लिए या तो नोडल कॉलेज या फिर रे- सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। पिछले साल भी डबल एओ के अभाव में टेंडर प्रक्रिया समय पर नहीं हो पाने से बजट लैप्स हो गया। वित्तिय संबंधी कार्यों में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>- डॉ. बुद्धिप्रकाश मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय अटरु</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बड़े कॉलेजों में लेखाधिकारी कार्यरत हैं, संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा मांग करने पर दूसरे नोडल महाविद्यालयों या रे- सेंटर से व्यवस्था की जाती है।<br /><strong>- प्रो. विजय पंचोली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                <title>सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला</title>
                                    <description><![CDATA[17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर के सरकारी आवासीय कॉलोनी की बदहाल स्थिति ने स्थानीय निवासियों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा में गंभीर समस्या पैदा कर दी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान न दिए जाने के कारण यह सरकारी आवास खण्डहरों में तब्दील हो चुके है। यहाँ रहने वाले परिवारों ने इन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया  है। एक समय ये आवास चिकित्सकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इनमें रहने की संभावना न के बराबर है। कर्मचारयों के यहां से जाने के बाद इन्हे तुड़वाने का एस्टीमेट बनाने के लिये सार्वजनिक निर्माण विभाग को कहा गया लेकिन तभी से यह खाली घर और भी जानलेवा हो चुके हे।</p>
<p><strong>खण्डहर में तब्दील आवासों की खौफनाक तस्वीर</strong><br />अस्पताल परिसर में 64 सरकारी आवासों में से 35 आवासों की संख्या आवंटित की गई थी। हालांकि, इनमें से 17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं और 7 ही ऐसे हैं जो किसी तरह रहने योग्य माने जा सकते हैं। इन खण्डहरों के अंदर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारें, छतें और अन्य संरचनाएं गिरने का खतरा बनी रहती हैं। अस्पताल प्रशासन ने इन आवासों को पूरी तरह छोड़ दिया है, जिससे न केवल आवासीय कॉलोनी, बल्कि आसपास के लोग भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नशेड़ियों से सुरक्षा को गम्भीर खतरा</strong><br />नशा मुक्ति केन्द्र के पास स्थित खाली आवासीय ढांचे दिन भर दवाई लेने आने वाले लोगों से भरे रहते हैं, लेकिन रात के समय ये खाली मकान नशे के आदि लोगों के आश्रय स्थल में बदल जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्मैक और इंजेक्शन से नशा करने वाले नशेड़ियों की टोलियां यहाँ मंडराती रहती हैं और कभी-कभी अपने साथ महिलाओं को भी लेकर आती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन खंडहरों में नशेड़ी गैंग के जमा होने से कई सुरक्षा खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। खाली मकानों की दीवारें गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, साथ ही इन जगहों पर चोरी और अन्य अपराध की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसके चलते अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खंडहरों को नशेड़ी और स्मैकचियों का अड्डा बनने से न केवल चोरी और अव्यवस्था बढ़ी है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p><strong>झाड़ियां और पेड़ों से बढ़ता जंगली जानवरों का खतरा</strong><br />परिसर में स्थित इस क्षेत्र में काफी घनी झाड़ियाँ उग आई है यहां पुराने पेड़ होने से घना जंगल बन गया है अभाी हाल ही में यहां सांभर नजर आ रहा है ।साथ ही जहरीले सांप, बिच्छू और गिरगिट जैसे खतरनाक जानवरों की उपस्थिति से क्षेत्र के निवासियों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर बरसात के मौसम में इस समस्या में वृद्धि हो जाती है। इन जानवरों के कारण, न केवल अस्पताल परिसर में रहने वाले लोग, बल्कि आसपास के नागरिक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी की टूटी सड़क पर फैला सीवरेज का पानी</strong><br />इन्ही खाली पड़े आवासों के पास नयी मोर्चरी भवन की शुरूआत की गयी थी । ऐसे में यहां आने वाले परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इस सड़क के दोनों और मिट्टी और कंस्ट्रक्शन का मलबा पड़ा हुआ है । साथ ही नयी क्वार्टरर्स के पास सड़क पर ही सीवरेज का पानी जमा हुआ रहता है।</p>
<p><strong>चुप्पी तुड़वाने  में ही लग गये 2 साल</strong><br />अस्पताल प्रशासन भले ही खण्डहर हो चुके आवासों की जगह नये आवास बनाने के लिये प्रक्रिया प्रारम्भ करने की बात कह रहा है लेकिन पिछले ढ़ाई सालों से अव्यवस्थाओं के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अन्य डुप्लेक्स आवासों में रह रहे स्टाफ इस स्थिति से परेशान हैं और उनका कहना है कि अगर प्रशासन जल्द ही इस पर ध्यान नहीं देता, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। खण्डहर आवासों की मरम्मत और रख-रखाव की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई की व्यवस्था, और जहरीले जानवरों से सुरक्षा के लिए यहां की जंगली झाड़ियां कटवाकर सफाई हेतु कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p> साल 2012 से इन क्वार्टरर्स में रह रहा था, करीब 14 पैड़ अमरूद 3 पेड़ आम के लगायें थे । जबसे यहां पर नशामुक्ति केन्द्र चालू हुआ तब से एक एक करके सारे आवास खाली हो गये। सारी रौनक खत्म हो गयी।<br /><strong>-कमलेश, निवासी के आर 221</strong></p>
<p> मै यहां सालों से नौकरी करता हूँ, यहां सबकुछ ठीक ठाक था सुख दु:ख में साथ देते थे। अब केवल दिन में मोर्चरी को आने वाले लोग नजर आते है रात के समय चारो तरफ अनजान नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है ।<br /><strong>-अफजल इलेक्ट्रिशियन पीएचड़ी पम्प हाउस</strong></p>
<p>इन क्वार्टर्स को नये सिरे से तैयार करवाने की और हमारा ध्यान हे इसके लिये पी डब्ल्यूडी से एस्टीमेट के लिये कहा गया है,इसके बाद ही बताया जा सकता है कि इस जगह का क्या उपयोग हो सकता है ।<br /><strong>-डा. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>
<p>इन खण्डहर आवासों जो बिल्कुुल भी रहने योग्य नहीं है इनके ध्वस्तीकरण के लिये हमनें एस्टीमेट बना दिया है, निर्णय पर आने की कार्यवाही हमारे स्तर पर की जायेगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खंड पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>सांसों पर संकट, थर्मल की बूढ़ी इकाइयां शहर को बना रही बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[चिमनियों से उठता धुआँ थर्मल प्लांट के 4-5 किमी क्षेत्र तक शहर की हवा को प्रदूषित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले कोटा की आबो-हवा अब जहरीली होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कोटा थर्मल पावर प्लांट की वे बूढ़ी इकाइयां हैं, जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, लेकिन आज भी धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। 1983 में स्थापित थर्मल की यूनिट1 और यूनिट 2 अपनी निर्धारित अवधि से करीब 10 साल ज्यादा समय निकाल चुकी हैं । इसके बावजूद इनसे निकलने वाला धुआं, राख और गर्म पानी शहरवासियों की सांसों और चंबल नदी दोनों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। चंबल किनारे बसें लोगों का कहना है कि थर्मल से 4 से 5 किलोमीटर की परिधि तक सीधा असर दिख रहा है। हवा में घुले सूक्ष्म कण सांसों के जरिए शरीर में जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों ने सफेद कपड़े पहनना तक बंद कर दिया है,क्योंकि छत पर कपड़े सुखाने पर कुछ ही देर में उन पर राख जम जाती है। चिमनियों से उठता धुआं दिनभर शहर की हवा को दूषित कर रहा है।अवधी पार कर चुकी इकाइयों का असर अब युवाओं पर भी साफ दिखने लगा है।</p>
<p><strong>कम उम्र  सांस, आंख और त्वचा की समस्याएं</strong><br />किशोरपुरा क्षेत्र की 35 वर्षीय रिंकू कंवर बताती हैं, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। डॉक्टर कहते हैं कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां कम उम्र के लोग भी सांस, आंख और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। थर्मल से निकलने वाला प्रदूषण केवल हवा तक सीमित नहीं है। संयंत्र से छोड़ा जा रहा गर्म और दूषित पानी सीधे चंबल नदी में मिलाया जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे नदी का तापमान बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर जलीय जीवों और चंबल की जैव विविधता पर पड़ रहा है। मगर प्रशासन और थर्मल प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) प्लांट नहीं</strong><br />नियमों के अनुसार थर्मल में यह प्लांट लगना चाहिए था, ताकि सल्फर डाइआॅक्साइड जैसे जहरीले गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। लेकिन आज तक यह प्लांट पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि शहर की सांसों में जहर लगातार घुलता जा रहा है। किशोरपुरा, शिवपुरा, पाटनपोल, साबरमती कॉलोनी, केथूनीपोल, शक्ति नगर, दादाबादी, श्रीनाथपुरम से लेकर सकतपुरा और नांता तक राख का फैलाव देखा जा रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में खुले में सोना तो दूर, दिन में घरों की खिड़कियां खोलना भी मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।</p>
<p><strong>प्रभाव जो देखे जा रहे</strong><br />-5 किमी तक राख और धुएं का फैलाव।<br />-सफेद कपड़ों पर जम रही काली परत।<br />-आंख और स्वांस के रोगियों को बढ रही परेशानी।<br />-थर्मल के गर्म पानी को सीधे नदी में मिलाने से चंबल की जैव विविधता पर भी संकट बढ़ रहा है, थर्मल से डिस्चार्ज पानी के साथ आॅयल की मात्रा भी नदी में आती है, कुछ महीने पहले भी किशोरपुरा की तरफ काफी सारी मरी मछिलयां पानी पर पडी़ हुई देखी गई थी ।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />थर्मल से निकलने वाले धुएं में कईं प्रकार के टॉक्सिस औैर पार्टिकल होते है दमा ,फेफड़ों से सम्बन्धित बिमारी वाले रोगियों में यह गम्भीर समस्याएं पैदा कर सकता है।<br /><strong>- डॉ. राजेश ताखर,  श्वास व एलर्जी रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>अवधी पार कर चुकी थर्मल इकाइयों को चलाना बेहद खतरनाक है। बिना ट्रीटमेंन्ट प्लांट के सल्फर और पार्टिकुलेट मैटर सीधे हवा में जा रहे हैं। इससे श्वसन रोगों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। साथ ही गर्म पानी नदी में छोड़ने से पानी में आक्सीजन की कमी हो जाती है। जलीय जीवों के विकास में बाधा तो होती ही साथ ही कई अन्य बुरे प्रभाव भी जन्म लेने लगते है यह पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है। कोटा की आबो-हवा और चंबल की सेहत अब निर्णायक मोड़ पर है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।<br /><strong>-अनिल रावत, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong></p>
<p>हमारे यहां पर जिला प्रदूषण बोर्ड की टीम द्वारा समय समय पर सेम्पलिंग करवायी जाती है, जिसकी रिपोर्ट भी आगे जाती है।<br /><strong>-शिखा अग्रवाल, मुख्य अभियन्ता कोटा थर्मल</strong></p>
<p>चम्बल के पानी और हवा की सेम्पिलंग करने के लिये हमारी टीमें लगातार जाती रहती है। जिसकी अपडेट पोर्टल पर डाल दी जाती है ।<br /><strong>-योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण बोर्ड, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:54:17 +0530</pubDate>
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                <title>स्टेट हाइवे की मिसिंग लिंक सड़क गड्ढों में तब्दील, वाहन चालकों के लिए  खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने मांग मिसिंग लिंक के इस हिस्से का शीघ्र निर्माण हो ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/state-highway-s-missing-link-road-turns-into-a-pothole-ridden-mess--posing-a-danger-to-motorists/article-137424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र में मध्यप्रदेश सहित कोटा और बारां जिलों को एक्सप्रेस वे व दौसा मेगा हाइवे से जोड़ने वाली स्टेट हाइवे एस-1 की मिसिंग लिंक सड़क बदहाली का शिकार हो गई है। माखिदा से होकर चंबल पुलिया तक करीब एक किलोमीटर का हिस्सा जगह-जगह डामर उखड़ने से गड्ढों में तब्दील हो चुका है। गड्ढों में पानी भरने और कीचड़ फैलने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>समाजसेवी रामहेत मीणा गुहाटा, पूर्व सरपंच पवन मीणा और युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष हेमंत पालीवाल ने बताया कि लबान स्टेशन से माखिदा तक सीसी सड़क का निर्माण हो चुका है, लेकिन बजट के अभाव में चंबल पुलिया से करीब एक किलोमीटर पहले सड़क अधूरी छोड़ दी गई। यही हिस्सा आबादी क्षेत्र और माखिदा बस स्टैंड से होकर गुजरता है, जिससे ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों को रोजाना जोखिम उठाना पड़ रहा है।गड्ढों में फिसलकर बाइक सवार आए दिन घायल हो रहे हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। भारी गड्ढों के कारण कई बार चौपहिया वाहन भी फंस जाते हैं। लबान इंटरचेंज से एक्सप्रेस वे की ओर जाने वाले भारी लोडिंग वाहन फंसने पर आसपास की आबादी को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p>ग्रामीणों ने मांग की है कि मिसिंग लिंक के इस हिस्से का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और आवागमन सुरक्षित हो सके।</p>
<p>सड़क के निर्माण के समय बजट खत्म हो जाने से यह टुकड़ा रह गया था अब विभाग द्वारा करीब 2 करोड़ रुपये  राशि स्वीकृत हो चुकी है टेंडर हो गए है ठेकेदार ने सड़क को समतल कर दिया है जल्द ही सड़क का कार्य शुरू हो जाएगा।<br /><strong>- हिमांशु दाधीच सहायक  अभियंता पीडबल्यूडी लाखेरी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 15:30:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुर्गंध के बीच कैसे करें उपचार, डॉक्टर खुद होने लगे बीमार, बदबू के कारण सांस लेना  हो रहा  मुश्किल </title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय पशु चिकित्सालय से नहीं उठ रहे मृत मवेशी  चिकित्सालय सटाफ व पशुपालक हो रहे परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-to-provide-treatment-amidst-the-stench--doctors-themselves-are-falling-ill--breathing-is-becoming-difficult-due-to-the-foul-smell/article-137177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में बीते कई दिनों से मृत मवेशियों को नहीं उठाए जाने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अस्पताल परिसर में पड़े मृत पशुओं से उठ रही दुर्गंध के कारण न सिर्फ उपचार कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि चिकित्सक, स्टाफ और पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। दुर्गंध के कारण कई पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। इसके बावजूद मृत मवेशियों के निस्तारण को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p><strong>कई चिकित्सकों की बिगड़ी तबीयत</strong><br />अस्पताल में कार्यरत पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दुर्गंध के संपर्क में रहने से उन्हें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ चिकित्सकों को तो इलाज के बाद खुद चिकित्सकीय परामर्श लेना पड़ा है। एक चिकित्सक ने बताया कि मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और सड़ांध की गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। लगातार ऐसे माहौल में काम करने से हमारी तबीयत बिगड़ रही है, फिर भी मजबूरी में हमें पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>पशु उपचार कार्य भी प्रभावित</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण में पशुओं का इलाज करना बेहद कठिन हो गया है। संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अन्य बीमार पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। दुर्गंध और असहज वातावरण के चलते कई बार पशुओं का उपचार जल्दी-जल्दी निपटाना पड़ रहा है या फिर पशुपालकों को इंतजार करने को कहा जा रहा है। इससे गंभीर रूप से बीमार पशुओं के इलाज में देरी हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>अब संक्रमण का खतरा बढ़ा</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। दुर्गंध के कारण मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या भी बढ़ गई है, जो बीमारियों को और फैलाने का कारण बन सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तीव्र है कि उपचार कक्षों में लंबे समय तक रुकना मुश्किल हो गया है, जिससे नियमित जांच, इंजेक्शन, ड्रेसिंग और आॅपरेशन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p>-हमारे पशु बीमार हैं, उन्हें आराम और साफ माहौल चाहिए, लेकिन यहां बदबू के कारण पशु भी बेचैन हो जाते हैं। प्रशासन को यहां की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए।<br /><strong>- रमेश गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>-राजकीय पशु चिकित्सालय में मृत मवेशियों को कई दिनों से नहीं उठाए जाने के कारण फैली दुर्गंध अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुकी है। बदबू के चलते पशुओं की उपचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई पशु चिकित्सकर्मियों की तबीयत तक बिगड़ चुकी है।<br /><strong>- डॉ. भंवर सिंह, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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                <title>पंचायत मुख्यालय पर शोपीस बने जनसुविधाघर</title>
                                    <description><![CDATA[पानी की सुविधा नहीं होने से  नियमित सफाई नहीं हो रही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/public-toilets-at-panchayat-headquarters-become-showpieces/article-137179"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(5)7.png" alt=""></a><br /><p>दबलाना। क्षेत्र के धाबाइयों का नया गांव पंचायत मुख्यालय स्थित अटल सेवा केंद्र में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के तहत निर्मित जन सुविधा घर पंचायत की अनदेखी के चलते बदहाली का शिकार हो गए हैं। सुविधाओं के अभाव और जमा गंदगी के कारण ये जनसुविधाघर उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं और महज शोपीस बनकर रह गए हैं।बाथरूम के ऊपर पानी की टंकी का अभाव है, वहीं टंकी से आने वाला पाइप क्षतिग्रस्त है और नल भी गायब है। पानी की सुविधा नहीं होने से महिलाओं एवं पुरुषों के लिए बने सुविधाघरों में नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। जमा गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्राम सभा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान पंचायत मुख्यालय आने वाले ग्रामीणों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। पंचायत परिसर में लगी बोरिंग की मोटर लंबे समय से खराब पड़ी है। बरसात के बाद क्यारियां तो बनाई गईं, लेकिन मोटर खराब होने से अब तक पौधारोपण नहीं हो सका। दीवारों की कालिमा और गंदगी स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत बयां कर रही है।</p>
<p><br />ग्राम विकास अधिकारी परमेश्वर प्रजापत ने बताया कि बोरिंग की मोटर शीघ्र ठीक करवाई जाएगी तथा टूटी टंकी के स्थान पर नई टंकी रखवाई जाएगी।<br /><strong>-परमेश्वर प्रजापत,ग्राम विकास अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 15:20:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 18 : सीवरेज चैंबरों का गलत लेवल, रोड क्षतिग्रस्त, नालों पर ढकान नहीं होने से नालियों में गंदा पानी जमा </title>
                                    <description><![CDATA[कचरा गाड़ी नियमित नहीं आने से  कचरा डालने की समस्या रहती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-18--incorrect-level-of-sewerage-chambers--damaged-roads--and-lack-of-covers-on-drains--leading-to-accumulation-of-dirty-water-in-the-drains/article-134625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(3)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम दक्षिण के वार्ड 18 में पार्षद द्वारा  पार्षद निधि के माध्यम से विभिन्न विकास कार्य करवाए गए । इनमें सीसी नालियों का निर्माण, कॉलोनियों में सीसी सड़कें बनवाना सहित अन्य कई कार्य शामिल हैं। इसके बावजूद वार्ड में कई समस्याएं बनी हुई हैं। वार्डवासी दिनेश कुमार और सी.पी. सिंह ने बताया कि वार्ड में कचरा गाड़ी प्रतिदिन आती है और सफाई भी नियमित होती है। पिछले दिनों डाली गई सीवरेज लाइन के चैंबर अब वार्डवासियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गए हैं। ठेकेदार ने इन चैंबरों का लेवल सड़क के स्तर से नहीं मिलाया, जिससे बाइक सवारों सहित राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश के समय चैंबरों में पानी भर जाता है, जिससे दुर्घटना का डर बना रहता है। वहीं सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, गिट्टियाँ निकल रही हैं और कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।</p>
<p><strong>ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा दीवार नहीं, दुर्घटना का खतरा</strong><br />वार्ड में लगे बिजली के ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा दीवार नहीं है। वार्डवासी बताते हैं कि इस कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा व्यवस्था न होने से बच्चों और राहगीरों के लिए यह हमेशा जोखिमपूर्ण बना रहता है।नाले पर ढकान नहीं, बारिश में दिक्कतों का सामना करना पड़ता वार्ड में स्थित कई नालों पर ढकान नहीं है। बारिश के मौसम में इन नालों से जलीय जानवर बाहर निकलकर घरों की चौखट तक पहुँच जाते हैं, जिससे भय का माहौल बन जाता है। वार्डवासी इस समस्या से लंबे समय से परेशान हैं।</p>
<p><strong>सामुदायिक भवन का अभाव—कार्यक्रमों के लिए दूसरी जगह निर्भरता</strong><br />वार्ड में सामुदायिक भवन नहीं होने की वजह से वार्डवासियों को मांगलिक कार्यों के लिए अन्य जगह महँगे किराए पर भवन लेकर कार्यक्रम करने पड़ते हैं। अंकुश कुमार व शिव कुमार ने बताया कि सामुदायिक भवन की कमी लंबे समय से बनी हुई है, जिससे वार्डवासियों को हर बार अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।</p>
<p><strong>खाली प्लॉट परेशानी का कारण</strong><br />वार्डवासी विपुल कुमार और अनिता बाई ने बताया कि घरों और आबादी के बीच कई खाली प्लॉट पड़े हुए हैं। इनसे जहरीले जानवर निकलकर घरों तक पहुँच जाते हैं, जिससे खतरा बना रहता है। कुछ लोग इन प्लॉटों में रात्रि के समय कचरा भी डालते हैं, जिससे आवारा पशु इन प्लॉटों में मुंह मारते रहते हैं और कचरा चारों ओर फैल जाता है। इसके कारण बदबू और गंदगी का माहौल बना रहता है।</p>
<p><strong>नालियों का ढलान सही नहीं</strong><br />रामप्रताप और रूकमणी बाई ने बताया कि नालियों का ढलान सही नहीं होने से इनमें गंदा पानी जमा रहता है। नालियों की गहराई कम होने से कई बार गंदा पानी बाहर बहने लगता है। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और बदबू की समस्या भी रहती है।</p>
<p><strong>कुछ जगहों पर रोड लाइटें बंद</strong><br />गोपाल विहार द्वितीय के निवासी रघुनंदन ने बताया कि गली में आधे हिस्से में रोड लाइटें जलती हैं, जबकि कुछ जगहों पर बंद रहती हैं। इससे रात्रि के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />गोपाल विहार प्रथम, द्वितीय, केसर बाग, वैभव नगर, सिटी पुलिस लाइन एवं नयागांव इत्यादि क्षेत्र वार्ड में आते हैं।</p>
<p>वार्ड में कचरा गाड़ी आती है। कुछ जगहों पर रोड लाइटें बंद रहती हैं, जिससे परेशानी होती है।<br /><strong>- पंकज कुमार, वार्डवासी</strong></p>
<p>हमारी तरफ तो कचरा गाड़ी आती है, पर नियमित नहीं आती। इसकी वजह से कचरा डालने में परेशानी होती है। फिर दूसरे दिन डाल पाते हैं।<br /><strong>- वी.एस. माथुर, वार्डवासी</strong></p>
<p>विहार प्रथम में नालियों का ढलान नहीं होने से गंदा पानी जमा रहता है। इससे बीमारियों का डर रहता है।<br /><strong>- रामप्रताप, वार्डवासी</strong></p>
<p>सीवरेज लाइन डालने के बाद रोड में गड्ढे हो गए। नालियों की गहराई बढ़नी चाहिए और ढलान भी सही होना चाहिए।<br /><strong>- अनिता बाई, गृहिणी</strong></p>
<p>सीवरेज के चैंबर सही करवाने के लिए प्रयास किया जाएगा। वार्ड में कहीं भी जमीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से सामुदायिक भवन का निर्माण नहीं हो पाया।<br /><strong>- जियाउद्दीन, वार्ड पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 12:43:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 17:  सीवरेज चैंबर, क्षतिग्रस्त सड़कें ,पार्क का अभाव वार्डवासियों की बड़ी समस्या </title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड की गलियों में टिपर रोज नहीं आने कचरा डालना स्थानीय निवासियों की समस्या बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-17--sewerage-chambers--damaged-roads--and-a-lack-of-parks-pose-major-problems-for-residents/article-134348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम दक्षिण के वार्ड 17 में पार्षद द्वारा समय-समय पर विकास कार्य तो करवाए गए, लेकिन वार्ड में पिछले दिनों डाली गई सीवरेज लाइन के चैंबर सही ढंग से नहीं लगाए गए। इसकी वजह से आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही वार्ड में बच्चों के खेलने के लिए पार्क का अभाव वार्डवासियों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। वार्डवासी अख्तर खान और रघु कुमार ने बताया कि पार्क की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। वहीं, वार्ड में सामुदायिक भवन भी नहीं है, जिससे मांगलिक कार्यों के दौरान महंगी दर पर भवन किराए पर लेना पड़ता है और डबल खर्च उठाना पड़ता है। यह समस्या वार्डवासी अभिनव और शिव कुमार ने भी बताई।</p>
<p><strong>ट्रांसफॉर्मर के पास सुरक्षा दीवार का अभाव</strong><br />वार्ड की मेन रोड पर स्थित ट्रांसफॉर्मर के आसपास सुरक्षा दीवार नहीं है। वार्डवासी बताते हैं कि यह स्थिति कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।</p>
<p><strong>घरों के पास से गुजरते बिजली के तार</strong><br /> पास से ही बिजली के तार गुजर रहे हैं। अधिकारियों को कई बार अवगत कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। बारिश के समय हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>नियमित नहीं आते टिपर</strong><br />वार्डवासियों के अनुसार कचरा गाड़ी मेन रोड पर तो प्रतिदिन आती है, लेकिन वार्ड की गलियों में रोज नहीं पहुंचती। इसके कारण कचरा घर में ही जमा रहता है और कई बार लोगों को कचरा इधर-उधर डालकर आना पड़ता है।</p>
<p><strong>खाली प्लॉट बने परेशानी का कारण</strong><br />सघन बस्ती के बीच कई लोगों ने प्लॉट खरीदकर खाली छोड़ रखे हैं। मनीष कुमार बताते हैं कि उनके पास खाली पड़े भूखंड में बारिश के दिनों में पानी भर जाता है, जिससे बदबू फैलती है और जलीय जीव पनप जाते हैं। इससे आसपास रहने वालों में डर बना रहता है।</p>
<p><strong>पार्क और सामुदायिक भवन का अभाव</strong><br />वार्ड के निवासी दिलशाद और हरिओम ने बताया कि कॉलोनी में बच्चों के खेलने और लोगों के बैठने के लिए एक भी पार्क नहीं है। बच्चे मेन रोड पर खेलते हैं, जिससे दुर्घटना का डर बना रहता है। सीनियर सिटीजन्स को मॉर्निंग वॉक के लिए दूर जाना पड़ता है। राहुल, रेखा कुमारी और सुमित्रा बाई ने बताया कि बच्चों के खेलने की जगह नहीं होने के कारण उन्हें घर की छत पर ही ले जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्ड का क्षेत्र</strong><br />थैगड़ा, सूर्य नगर, भारत विहार, देवाशीष सिटी, ग्रामीण पुलिस लाइन, आदित्य नगर, बजरंग विहार आदि इलाके वार्ड में शामिल हैं।</p>
<p>कचरा गाड़ी तो आती है, पर कुछ गलियों में रोड लाइटें बंद होने की वजह से रात में अंधेरा रहता है और आवागमन में परेशानी होती है।<br /><strong>- जावेद, वार्डवासी</strong></p>
<p>मेन रोड पर कचरा गाड़ी प्रतिदिन आती है, लेकिन अंदर गलियों में रोटेशन के आधार पर ही आती है, जिससे असुविधा होती है।<br /><strong>- बिशन सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>पार्षद से संपर्क नहीं हुआ</strong><br />वार्ड पार्षद बबलू सिंह कसाना से बात करने के लिए कॉल किया गया, लेकिन मोबाइल स्विच आॅफ होने के कारण संपर्क नहीं हो पाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 14:06:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वायु प्रदूषण : धुएं-धूल की मार, आंखें हुई लाचार, एलर्जी जैसी समस्याएं, सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/air-pollution--smoke-and-dust--eyes-become-vulnerable--and-problems-like-allergies--air-pollution-particles-in-the-air-during-the-winter-season/article-132514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने आमजन की सेहत पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में विशेष तौर पर आंखों से जुड़े मरीजों की संख्या में 20-30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी नेत्र चिकित्सालयों तक रोजाना ऐसे दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें आंखों में जलन, लालिमा, लगातार पानी बहना, सूखापन और एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही हैं। दिवाली के बाद से ही शहर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में तैरते रहते हैं। जिससे वायु दिनभर प्रदूषित बनी रहती है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों के अनुसार शहर में शुक्रवार को एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 दर्ज किया गया है। यानी यहां की हवा जहरीली हो चुकी है। </p>
<p><strong>प्रदूषण आंखों पर ऐसे डालता है असर</strong><br />नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी के मौसम में हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे छोटे कण बहुत खतरनाक होते हैं। यह कण इतने छोटे होते हैं कि सीधे आंखों की सतह तक पहुंचकर कंजंक्टिवा और कॉर्निया पर जमा हो जाते हैं। इससे सूजन, खुजली, जलन और पानी आने जैसे समस्या शुरू हो जाती है। वहीं लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और यहां तक की आंखों के इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों और बुजुर्गों में यह असर ज्यादा दिखाई देता है, क्योंकि उनकी आंखें ज्यादा संवेदनशील होती है। इन दिनों बुजुर्ग और बच्चे आंखों की समस्या लेकर अस्पतालों में अधिक आ रहे हैं। इनकी संख्या में रोजाना इजाफा होता जा रहा है।</p>
<p><strong>धूल-धुएं की अधिक मात्रा बनी परेशानी</strong><br />शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक दर्ज की जा रही है। ट्रैफिक का बढ़ता दबाव, निर्माण कार्यों की धूल और मौसम में बदलाव के चलते हवा में धूलकणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह महीन कण सीधे आंखों की ऊपरी परत को प्रभावित करते हैं, जिससे संक्रमण और कॉर्निया को नुकसान तक हो सकता है। इस माहौल में जहां लोगों में सांस संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती है, वहीं बड़ी संख्या में लोग आंखों में जलन, चुभन और पानी आने जैसी दिक्कतों से भी जूझने लगते है। इस कारण बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।</p>
<p><strong>आंखों को हेल्दी रखने के लिए अपनाएं यह उपाय</strong><br />- प्रदूषण में जब भी आप बाहर निकले अपनी आंखों को धूल और धुएं से बचाए। इसके लिए सनग्लासेस या बड़े साइज के काले चश्मे यूज करें। जिससे हवा सीधे आंखों में न जाए और एलर्जी और जलन से बचाव हो।<br />- बाहर फैली प्रदूषित हवा आंखों की नमी को कम कर देती है। जिससे आंखों में जलन और खुजली जैसी समस्याएं हो जाती है। इससे बचने के लिए आप दिन में 2 से 3 बार लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप आंखों में डालें।<br />- अगर पॉल्यूशन के समय में आपको भी आंखों में जलन और सूजन महसूस हो तो आपको आंखों को दिन में दो बार ठंडे पानी से धोना चाहिए. इसके अलावा आप आंखों पर आईस पैक सिकाई भी कर सकते हैं। <br />- कई बार ज्यादा धुएं की वजह से आंखों में जलन बढ़ जाती है और चुभन की भी शिकायत रहती है। ऐसे में लोग आंखों को रगड़ने लगते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि आंखों को रगड़े नहीं बल्कि उन्हें पानी से धो लें।</p>
<p><strong>एक्यूआई यह देता है संकेत</strong><br />अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं - 0-50 <br />संतोषजनक  -  51-100<br />बाहर जाने से बचें - 101-200<br />श्वसन के मरीजों को तकलीफ - 201-300<br />लम्बे बीमार रोगियों को दिक्कत - 301-400<br />बाहर बिलकुल नहीं निकलें - 401-500</p>
<p>प्रशासन निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव करवाएं, धूल नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करें और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई करें। तभी शहर की हवा और आंखों की सेहत दोनों सुधर पाएंगी। <br /><strong>- राजू कुमार, पर्यावरणविद</strong></p>
<p>बच्चों और बुजुर्गों में आंखों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। धूल और प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से इन वर्गों में आंखों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बाहर निकलते समय चश्मे का उपयोग करें, आंखों को बार-बार धोएं और संक्रमण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सा लें।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, नेत्र रोग विशेषज्ञ  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 15:21:01 +0530</pubDate>
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                <title>कीचड़ से श्रीरामनगर कॉलोनी का मुख्य मार्ग बना दलदल, दो पहिया वाहन चालक फिसल कर हो रहे चोटिल </title>
                                    <description><![CDATA[रोजाना इस मार्ग से सैंकड़ों ग्रामीणों के साथ पीएमश्री विद्यालय के बच्चे और अध्यापक गुजरते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-main-road-of-shriram-nagar-colony-has-turned-into-a-swamp-due-to-mud--two-wheeler-riders-are-slipping-and-getting-injured/article-132066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(22).png" alt=""></a><br /><p> कनवास। बरसात गए महीनों बीत गए। लेकिन गंदगी और पानी भराव जस का तस बना हुआ है। ग्राम पंचायत कनवास की सीमा में आने वाली श्रीरामनगर कॉलोनी का मुख्य मार्ग इन दिनों दलदल में तब्दील हो चुका है। पंचायत कार्यालय से महज 50 से 60 फीट की दूरी पर स्थित यह सड़क कीचड़ और बदबूदार पानी से लबालब भरी पड़ी है। रोजाना इस मार्ग से सैंकड़ों ग्रामीणों के साथ पीएमश्री विद्यालय के बच्चे और अध्यापक गुजरते हैं। लेकिन गंदे पानी और फिसलन भरे कीचड़ के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। राहगीरों का कहना है कि दोपहिया वाहन अक्सर फिसल जाते हैं और कई लोग घायल भी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात खत्म हुए महीनों बीत चुके हैं। फिर भी न तो पंचायत ने कोई कार्रवाई की और न ही प्रशासन ने क्षेत्र का निरीक्षण किया है। लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। इस मामले में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए कई बार ग्राम विकास अधिकारी से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने ना तो फोन उठाया और ना ही व्हाट्सएप पर कोई जवाब दिया। </p>
<p><strong>आंदोलन की चेतावनी</strong><br />स्थानीय निवासियों का कहना है कि हालिया विधानसभा चुनाव में इसी बूथ पर सबसे अधिक मतदान दर्ज हुआ था। इसके बावजूद क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन केवल चुनाव के समय सक्रिय दिखता है, बाद में समस्याएं अनदेखी की जाती हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। </p>
<p>बरसात खत्म हुए महीनों बीत गए। पर अब तक पंचायत ने सुध नहीं ली। बदबू और गंदगी से रहना मुश्किल हो गया है।<br /><strong>-भूरालाल गुर्जर, निवासी, श्रीरामनगर कॉलोनी</strong></p>
<p>बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं। कई बार बाइक फिसलकर गिर चुके हैं। पंचायत कार्यालय के पास यह हाल देखकर अफसोस होता है। <br /><strong>-पुरुषोत्तम गोचर, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>ग्रामीणों की असुविधा को देखते हुए मार्ग की सफाई करवा दी गई है। सफाई का अभी जारी है।<br /><strong>-मुकेश, एलडीसी, ग्राम पंचायत कनवास </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Nov 2025 16:16:33 +0530</pubDate>
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