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                <title>वादे वही, नेता बदलते रहे...अंतिम पांच वार्डों की पड़ताल में भी समस्याओं का अंबार</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कहीं जर्जर सड़कें तो कहीं गंदे नाले, सामुदायिक भवन और सुलभ शौचालय का भी अभाव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/same-old-promises--changing-leaders----a-mountain-of-problems-found-during-the-inspection-of-the-final-five-wards/article-164572"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के नए सौ वार्डों की पड़ताल के अंतिम चरण में दैनिक नवज्योति की टीम मंगलवार को शेष पांच वार्डों में पहुंची और वहां की व्यवस्थाओं का जमीनी जायजा लिया। क्षेत्रवासियों से बातचीत में एक बार फिर मूलभूत सुविधाओं की कमी और विकास कार्यों को लेकर नाराजगी सामने आई। लोगों का कहना था कि चुनाव आते हैं तो विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। क्षेत्रवासियों ने तंज कसते हुए कहा, “नेता जी बदलते रहेंगे, लेकिन वादे वही रहेंगे।”</p>
<p>दैनिक नवज्योति की टीम ने सौ वार्डों में विकास और समस्याओं की पड़ताल के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों की तस्वीर सामने लाई है। अंतिम पांच वार्डों में पहुंचने पर भी हालात बहुत अलग नजर नहीं आए। कहीं जर्जर सड़कें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं तो कहीं नालों की सफाई नहीं होने से गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में सामुदायिक भवन और सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से उन्हें उम्मीद रहती है कि वे क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान करवाएंगे। हालांकि कई इलाकों में वर्षों से चली आ रही समस्याएं आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।</p>
<p><strong>वार्ड 99 में सुविधाओं का अभाव</strong><br />क्षेत्रवासियों ने बताया कि इलाके में आज भी सामुदायिक भवन और सुलभ शौचालय जैसी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। लोगों को सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से भी क्षेत्रवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में कई स्थानों पर नालियां भी नहीं बनी हुई हैं। इसके चलते घरों से निकलने वाले पानी की उचित निकासी नहीं हो पाती और लोगों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ती है। बारिश के दौरान यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि लंबे समय से इन सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>बालाकुंड में विकास की रफ्तार बेहद धीमी</strong><br />वार्ड नंबर 96 के अंतर्गत आने वाले बालाकुंड क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इलाके में विकास कार्य न के बराबर हुए हैं। नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने के कारण कई स्थानों पर गंदगी पसरी रहती है। लोगों ने बताया कि क्षेत्र की कई सड़कों की हालत खराब है और आवश्यक स्थानों पर सीसी रोड का निर्माण भी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़कों से प्रतिदिन आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार वर्षों से घरों के सामने कचरा संग्रहण पॉइंट बने हुए हैं, लेकिन इनका स्थायी और उचित समाधान अब तक नहीं किया गया।</p>
<p><strong>वार्ड 97 में जर्जर सड़कों से परेशान लोग</strong><br />वार्ड नंबर 97 के अंतर्गत आने वाले जवाहर नगर क्षेत्र में भी जर्जर सड़कें लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। टूटी सड़कों और गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>गंदे नाले और दुर्गंध ने बढ़ाई मुश्किलें</strong><br />वार्ड 97 में नालों की नियमित सफाई नहीं होने की शिकायत भी सामने आई। लोगों के अनुसार नालों में कचरा जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित होती है और आसपास दुर्गंध फैलती रहती है। बारिश के दौरान कई बार नाले ओवरफ्लो होने लगते हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सुदर्शन गौतम</strong><br />कार्यकाल से पहले क्षेत्र में नालों के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़कों और आसपास के इलाकों में भर जाता था। क्षेत्रवासियों को राहत दिलाई गई। करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से क्षेत्र में सीसी सड़कों का निर्माण कराया गया। वर्तमान में भी विकास कार्य जारी हैं और पार्कों का निर्माण व विकास कराया जा रहा है। वार्ड में सामुदायिक भवन का निर्माण भी करवाया गया।</p>
<p><strong>पूर्व वार्ड पार्षद नवीन यादव</strong><br />क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या वर्षों से लंबित पट्टों की थी। लोगों को लंबे समय से पट्टे नहीं मिले थे, जिसके लिए प्रयास कर अनेक लोगों को पट्टे दिलवाए गए। वार्ड की गलियों में सीसी रोड और नालियों का निर्माण कराया गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रवासियों के राशन कार्ड भी बनवाए गए। हालांकि वार्ड में आज भी पार्क, सामुदायिक भवन और डिस्पेंसरी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद कुलदीप प्रजापति</strong><br />कार्यकाल से पहले वार्ड में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी, जिसमें सुधार के लिए विशेष प्रयास किए गए। क्षेत्र में सीवेज कार्य करवाने के साथ पार्कों का जीर्णोद्धार भी कराया गया। जहां आवश्यकता और संभावना थी, वहां रोड लाइटें लगवाई गईं। उन्होंने बताया कि वार्ड में सामुदायिक भवन और सुलभ कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाओं का अभी भी अभाव है।</p>
<p><strong>वार्डवासी करतार सिंह</strong><br />सड़कें क्षतिग्रस्त होकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। साफ-सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है और जगह-जगह बने कचरा पॉइंट क्षेत्र की सुंदरता को बिगाड़ने के साथ लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि नियमित सफाई और सड़कों की मरम्मत के लिए जिम्मेदार विभाग को गंभीरता से कार्य करना चाहिए, ताकि क्षेत्रवासियों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।</p>
<p><strong>वार्डवासी संतोष कुमार</strong><br />क्षेत्र में कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, लेकिन उनकी समय पर मरम्मत नहीं होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वार्ड के नालों की नियमित और समयबद्ध सफाई भी नहीं होती। बारिश के दौरान यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है तथा गंदा पानी जमा होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>वार्डवार नंबर व क्षेत्र</strong><br />-वार्ड नंबर 96 में संपूर्ण बालाकुंड एवं अग्रसेन नगर का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 97 में दानबाड़ी, संपूर्ण जवाहर नगर, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, तलवंडी सेक्टर-सी एवं तलवंडी एसएफएस कॉलोनी का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 98 में गणेश तालाब, बसंत विहार सेक्टर-2 एवं 3 का संपूर्ण क्षेत्र तथा बसंत विहार का आंशिक क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 99 में महावीर नगर विस्तार योजना-6 एवं सेक्टर-5 का संपूर्ण क्षेत्र, अग्रसेन नगर, गुर्जर बस्ती एवं गणेश तालाब सेक्टर-1 सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 100 में तीन बत्ती चौराहा मुख्य मार्ग, बसंत विहार का आंशिक क्षेत्र, केशवपुरा मूर्तिधाम सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:26:00 +0530</pubDate>
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                <title>विरासत के वैभव के बीच समस्याओं का चक्रव्यूह,  हवामहल विधानसभा क्षेत्र की जनता मांगे जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[हवामहल विधानसभा क्षेत्र में विरासत और विकास के बीच नागरिक समस्याएं चुनौती बनी हुई। नए परिसीमन में 15 वार्ड शामिल। परकोटे की संकरी गलियों में अतिक्रमण, जाम और पार्किंग संकट के साथ पुरानी सीवरेज लाइनें, जलभराव, पेयजल, कचरा प्रबंधन, अवैध निर्माण, आवारा पशु और खुले बिजली तार प्रमुख समस्याएं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/a-maze-of-problems-amid-the-splendor-of-heritage-people/article-164325"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी की पहचान हवामहल विधानसभा क्षेत्र में एक तरफ विश्व प्रसिद्ध विरासत, मंदिर, बाजार और संस्कृति की चमक है तो दूसरी तरफ नागरिक समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। नए परिसीमन में विधानसभा क्षेत्र के हिस्से में 133 से 147 तक 15 वार्ड  हैं। यहां वार्डों की संख्या भले कम हुई हो, लेकिन आबादी और क्षेत्रफल बढ़ने से जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौतियां कम नहीं हुईं। परकोटे की संकरी गलियों में अतिक्रमण और जाम, पुरानी सीवरेज लाइनें, बरसात में जलभराव, कचरा, आवारा पशु और अवैध निर्माण आज भी प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं।</p>
<p><strong>विरासत के बीच विकास की परीक्षा :</strong></p>
<p>हवामहल, गोविंद देवजी मंदिर, तालकटोरा, पौंड्रिक पार्क, चांदी की टकसाल और काले हनुमानजी मंदिर इस क्षेत्र की पहचान हैं। छोटी और बड़ी चौपड़, सुभाष चौक और आमेर रोड, ब्रह्मपुरी, गणगौरी जैसे बाजार व्यापार की धुरी हैं। वहीं क्षेत्र भौगोलिक और सामाजिक रूप से अलग-अलग हिस्सों में फैला होने के कारण हर इलाके की समस्याएं भी अलग हैं।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल ?</strong></p>
<p>नया परिसीमन अब जनप्रतिनिधियों के सामने बड़ा क्षेत्र और बड़ी जिम्मेदारी लेकर आया है। विधायक विकास कार्यों की लंबी सूची गिना रहे हैं, जबकि नागरिक रोजमर्रा की समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। सवाल यही है—क्या विरासत की इस धरती पर विकास अब कागज से निकलकर गलियों तक पहुंचेगा?</p>
<p><strong>हवामहल विधानसभा क्षेत्र की 10 प्रमुख समस्याएं :</strong></p>
<p>अतिक्रमण - बाजारों और बरामदों में अतिक्रमण से रास्ते संकरे।</p>
<p>यातायात जाम - ब्रह्मपुरी, गणगौरी, चांदी की टकसाल, आमेर रोड, सुभाष चौक सहित प्रमुख मार्गों पर दबाव।</p>
<p>पार्किंग संकट - बाजार क्षेत्र में व्यवस्थित पार्किंग की कमी।</p>
<p>सीवरेज - पुरानी लाइनें चोक होने से परेशानी।</p>
<p>जलभराव - बारिश में कई स्थानों पर पानी जमा होने की समस्या।</p>
<p>पेयजल - पुरानी पाइपलाइनों को बदलने की जरूरत वाले क्षेत्र।</p>
<p>कचरा प्रबंधन - नियमित सफाई और कचरा उठाव चुनौती।</p>
<p>अवैध निर्माण - हेरिटेज स्वरूप से छेड़छाड़ की शिकायतें।</p>
<p>आवारा पशु - मवेशियों और बंदरों से दुर्घटना का खतरा।</p>
<p>बिजली के तार - खुले और लटके तार सुरक्षा के लिए चुनौती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 10:20:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समस्याओं के बीच गुजर रही जिंदगी, चुनावी वादों पर फिर सवाल, वार्डवासी बोले- जब नेताओं ने नहीं सुनी तो किससे कहें अपनी बात</title>
                                    <description><![CDATA[घंटाघर-मकबरा जैसे कंजेस्टेड इलाकों में सफाई, टूटी सड़क और नालियों की परेशानी बनी रोजमर्रा की चुनौती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-amidst-persistent-problems--questions-raised-again-regarding-election-promises--residents-ask%E2%80%94%22when-leaders-don-t-listen--to-whom-can-we-voice-our-grievances-%22/article-164122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy114.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में आगामी पार्षद चुनावों की तैयारियों के बीच जमीनी हकीकत जानने के लिए वार्ड नंबर 44 से 49 तक की ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई। रिपोर्टिंग के दौरान सामने आया कि कई वार्ड क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कहीं सफाई व्यवस्था बदहाल है तो कहीं क्षतिग्रस्त सड़कें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। टूटी नालियां, फैली गंदगी और अतिक्रमण की समस्या ने कई क्षेत्रों की तस्वीर बिगाड़ रखी है। लोगों का कहना है कि हर चुनाव में विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव बीतने के बाद कई वादे कागजों और भाषणों तक ही सीमित रह जाते हैं।</p>
<p><strong>कंजेस्टेड इलाकों में रोज की जद्दोजहद</strong><br />ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान घंटाघर, मकबरा और टिपटा जैसे अत्यधिक कंजेस्टेड क्षेत्रों की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आई। यहां संकरी गलियों, बढ़ते यातायात और अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण आमजन को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी संघर्ष करना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, नालियां टूटी हुई हैं और सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। गंदगी के ढेर और नालियों से उठती बदबू लोगों की परेशानी को और बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कंजेस्टेड इलाकों में सफाई और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जाम और अतिक्रमण की समस्या के कारण पैदल निकलना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। दुकानों के बाहर फैलता सामान और बढ़ते अतिक्रमण से रास्ते संकरे होते जा रहे हैं। इसका सीधा असर व्यापारियों के साथ-साथ राहगीरों और क्षेत्रवासियों पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>‘नेता जी के घर के बाहर की समस्या, फिर भी नहीं हुआ समाधान’</strong><br />चश्मे की बावड़ी क्षेत्र में वर्षों पुरानी नाले की समस्या आज भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। वार्डवासियों का कहना है कि नाले की समस्या का स्थायी समाधान लंबे समय से नहीं हो पाया है। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह समस्या ऐसे स्थान पर है, जहां से जनप्रतिनिधि भी परिचित और उनका घर भी नाले पर बना हुआ हैं। एक वार्डवासी ने दो टूक कहा, “नाले की समस्या तो नेता जी के घर के बाहर की है। जब नेता जी ने ही ध्यान नहीं दिया तो हम आखिर किसके पास जाकर अपनी बात कहें।”</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद जमुना बाई</strong><br />वर्षों से बंद पड़ी टिपटा चौकी को शुरू करवाने के साथ ही पाटनपोल क्षेत्र में स्कूल भवन का निर्माण कराया गया। मंदिरों का जीर्णोद्धार भी करवाया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड में साफ-सफाई की समस्या बनी रहती है, जिसके समाधान के लिए प्रशासन के साथ आमजन को भी जागरूक होकर जिम्मेदारी निभानी होगी।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद नसरीन मिर्ज़ा</strong><br />वार्ड की संकरी गलियों में कचरा संग्रहण एक बड़ी चुनौती था। इस समस्या के समाधान के लिए कई कचरा पॉइंट हटवाए गए और घर-घर से कचरा एकत्रित करने के लिए हाथगाड़ियों की व्यवस्था करवाई गई।इस व्यवस्था से गलियों में फैली गंदगी को कम करने में मदद मिली। नियमित सफाई और बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सोनू कुरेशी</strong><br />कार्यकाल में वार्ड में विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए कई सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं। आधुनिक सुविधाओं से युक्त सुलभ कॉम्प्लेक्स और सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया, वहीं कब्रिस्तान का भी विकास करवाया गया। वार्डवासियों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए घर-घर तक पानी की पाइपलाइन डलवाई गई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य किए गए।</p>
<p><strong>वार्डवासी अब्दुल रहीस</strong><br />क्षेत्र की बदहाल व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वार्ड में जगह-जगह गंदगी फैली रहती है और सड़कें व नालियां टूटी पड़ी हैं। कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लोग इन समस्याओं से परेशान हैं और समाधान नहीं होने के कारण वार्डवासियों की परेशानी जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>वार्डवासी हसीना</strong><br />क्षेत्र में नाले की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। नाले का गंदा पानी कई बार घरों तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्ड में गंदगी भी आम समस्या बनी हुई है। उन्होंने जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नेताओं के घरों के आसपास की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो आम लोग आखिर अपनी शिकायत लेकर किसके पास जाएं।</p>
<p><strong>वार्डवार क्षेत्र का व्यवस्थित विवरण</strong><br />वार्ड नंबर 44: संपूर्ण थर्मल कॉलोनी, कुन्हाडी थाना, संत तुकाराम सामुदायिक भवन, अंबेडकर कॉलोनी, हनुमान गढ़ी, सरकारी स्कूल, धुआंखाल, देवनारायण सामुदायिक भवन, हटाई का चौक, काली टेक हनुमानजी का मंदिर, सुलभ शौचालय, मस्जिद गली, नागर फ्लोर मिल नारायण भवन, इम्मानुएल स्कूल तथा जैन मंदिर का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 45: इमली चौक, शूजाउद्दीन चौक, भिस्तियों की मस्जिद, पुरानी हरिजन बस्ती, कुरेशियों की मस्जिद, गुले-गुलजार, उमर कॉलोनी, मकबरा थाना, एहले हदीस मस्जिद, डॉक्टर जाकिर हुसैन सामुदायिक भवन, भाण्डों की मस्जिद, राज हवेली, मामा करीम चौक, जेदी स्टूडियो, रेमण्ड शोरूम, शनि मंदिर, हम्मलों का चौक, चश्मे की बावड़ी, कुरैशी जमातखाना, देवनारायण मंदिर, हुसैन चौक, बजाजखाना, बंबोला मंदिर, तेलियों की चौकड़ी, मोमिनों की बड़ी मस्जिद, जाकिर नई तथा रघु पान की गली आदि क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 46: आईसीआईसीआई बैंक, मेन रोड पाटनपोल, मथुराधीश जी का मंदिर, भट्जी महाराज का चौक, छोटे मथुराधीश जी, राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय टिपटा, काजीपाड़ा, भूरिया गणेशजी मंदिर, सराय का स्थान, मथुरेश भवन, लालबुर्ज, काली कंकाली मंदिर, नारायण बाल निकेतन, गंधीजी का पुल, लक्ष्मी होटल, चित्तौड़ा स्कूल का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 47: गढ़ पैलेस, पादमनाभ मंदिर, नीलकंठ मंदिर, अफीम गोदाम, पट्टा बुर्ज अखाड़ा, रेतवाली, कैथूनीपोल थाना तथा सत्यनारायण मंदिर का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 48: वफ्फ नगर, गोदावरी धाम, अधरशिला कच्ची बस्ती, अधरशिला कब्रिस्तान, चंबल गार्डन, गांधी उद्यान, नगर निगम गैराज, चंबल रेस्ट हाउस, बजरंग बस्ती, गोविंद धाम तथा किशोरपुरा के आंशिक क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 49: भीतरीय कुंड एवं शिवपुरा का संपूर्ण क्षेत्र शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 13:04:49 +0530</pubDate>
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                <title>विकास के दावों की हकीकत : शहर के बीच बसे गांव जैसे हालात, मूलभूत सुविधाओं को तरसे वार्डवासी</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों ने पूछा—मूलभूत सुविधाएं नहीं तो वोट का क्या मतलब?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-reality-behind-development-claims--village-like-conditions-in-the-heart-of-the-city--residents-deprived-of-basic-amenities/article-163826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)82.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच रविवार को छह वार्डों के किए गए ग्राउंड ऑडिट में कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। शहर का हिस्सा होने के बावजूद कुछ इलाके ऐसे नजर आए, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो शहर के बीचों-बीच कोई गांव बस गया हो। कहीं टूटी सड़कें हैं तो कहीं बदहाल नालियां, कहीं टूटे स्पीड ब्रेकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं तो कहीं बच्चों के खेलने के लिए पार्क तक उपलब्ध नहीं हैं। कई इलाकों में सामुदायिक भवन जैसी सुविधा भी नहीं है, जहां स्थानीय लोग छोटे-मोटे सामाजिक और पारिवारिक आयोजन कर सकें। छह वार्डों के इस ऑडिट में सामने आया कि विकास की रफ्तार हर क्षेत्र तक समान रूप से नहीं पहुंच पाई है। उद्योग नगर, डीसीएम और हनुमत खेड़ाख, रायपुरा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग समस्याएं जरूर हैं, लेकिन आम नागरिकों की मांग एक ही है—सड़क, बिजली, पानी, पार्क और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं हर वार्ड में उपलब्ध होनी चाहिए।</p>
<p><strong>शहर में रहते हुए भी ग्रामीण जैसी सुविधाओं का अभाव</strong><br />वार्डवासियों का कहना है कि शहर के बीच रहने के बावजूद उन्हें कई ऐसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जो एक विकसित वार्ड की पहचान मानी जाती हैं। कई स्थानों पर सड़कें जर्जर हैं और लंबे समय से मरम्मत की मांग की जा रही है। बरसात और समय के साथ सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। रायपुरा के लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण वाहन चलाना मुश्किल होता है, वहीं पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p>ग्राउंड ऑडिट के दौरान कुछ क्षेत्रों में ऐसा माहौल दिखाई दिया, जहां विकास की रफ्तार बेहद धीमी नजर आई। वार्डवासियों ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायतें करने के बाद भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कई क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से ही वंचित रह जाते हैं।</p>
<p><strong>उद्योग नगर की सड़कें बनीं परेशानी, टूटे ब्रेकर बढ़ा रहे खतरा</strong><br />उद्योग नगर क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या क्षतिग्रस्त सड़कों और टूटे हुए स्पीड ब्रेकरों को लेकर सामने आई। सड़कों की बदहाली लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। लोगों की मांग है कि सड़क और ब्रेकरों की समय पर मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। उद्योग नगर और डीसीएम क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां समय-समय पर परेशानी का कारण बनती हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वार्डवासियों का कहना है कि सुरक्षित वातावरण भी किसी क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल सड़क और भवन निर्माण से ही आदर्श वार्ड नहीं बनता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा का भरोसा भी मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>हनुमत खेड़ा में सुविधाओं की कमी से मायूसी</strong><br />हनुमत खेड़ा क्षेत्र की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नजर नहीं आई। यहां कई लोगों ने स्थानीय सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए पर्याप्त पार्क की सुविधा नहीं होना लोगों की प्रमुख शिकायतों में शामिल रहा।</p>
<p><strong>छोटे आयोजनों के लिए भी नहीं मिलती जगह</strong><br />ऑडिट में एक बड़ी समस्या सामुदायिक भवन के अभाव की भी सामने आई। कई वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में ऐसा कोई व्यवस्थित स्थान नहीं है, जहां लोग छोटे सामाजिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक आयोजन करवा सकें।</p>
<p><strong>वार्डवासी बोले—पहले मूलभूत सुविधाएं तो मिलें</strong><br />हम शहर में रहते हैं, लेकिन कई बार सुविधाओं की स्थिति देखकर लगता है जैसे गांव के पिछड़े इलाके में रह रहे हों। सड़कें ठीक नहीं हैं, बच्चों के लिए पार्क नहीं है और कई जगह सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए भी कोई उचित स्थान नहीं मिलता। हमारी मांग कोई बड़ी नहीं है, सिर्फ इतनी है कि हर वार्ड में सड़क, बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों।<br /><strong>- जितेन्द्र चौधरी, वार्डवासी</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लोगों को उम्मीद होती है कि वे क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करेंगे। उद्योग नगर और डीसीएम जैसे क्षेत्रों में सड़क और सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता है। यदि आम आदमी को रोजाना टूटी सड़क, खराब सुविधाओं और असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझना पड़े तो विकास के दावों का क्या मतलब रह जाता है।<br /><strong>- दिपू सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p>कार्यकाल में वार्डवासियों की हर समस्या को प्राथमिकता के साथ दूर कराने का प्रयास किया गया। वार्ड में पार्क जैसी सुविधाओं का अभाव जरूर है, लेकिन जब भी कोई वार्डवासी अपनी समस्या लेकर आता है तो उसका समाधान कराना मेरी पहली प्राथमिकता रहती है। जनसमस्याओं के समाधान के लिए मैं हमेशा तत्पर रहता हू।<br /><strong>- दीपक कुमार, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड के कई क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सफाई व्यवस्था नियमित रूप से कराई जाती है, लेकिन कई बार लोग स्वयं कचरा फैला देते हैं। वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नालियों के ड्रेनेज व्यवस्था की है, जिसका समाधान अब तक नहीं हो सका है।<br /><strong>-सुशील त्रिपाठी, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 29 में वैष्णो कॉलोनी, डालाबाई माताजी , प्रेम नगर द्वितीय आंशिक, मदरसा, सरकारी स्कूल क्षेत्र, राजेंद्र कुशवाहा जागा बस्ती, अफॉर्डेबल आवास योजना के ए, बी, सी, डी और ई, प्रेम नगर तृतीय का आंशिक क्षेत्र तथा गोविंद नगर का आंशिक क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 30 : इंदिरा गांधी नगर का आंशिक क्षेत्र, पावर हाउस क्षेत्र, रामदेव मंदिर तथा प्रेम नगर तृतीय क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 31 : जलेबी चौक, झिरी के हनुमान जी, विजयलक्ष्मी स्कूल क्षेत्र, तिलक स्कूल, फकीरों का मोहल्ला, भेरूजी का चबूतरा, मस्जिद क्षेत्र, राजपूत कॉलोनी, गुर्जरों का मोहल्ला, नाईस स्कूल के पीछे का क्षेत्र, सामुदायिक भवन के पीछे का क्षेत्र, पुलिस चौकी के सामने का क्षेत्र, जागा मोहल्ला और सुभाष स्कूल के पीछे का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 32 : बापू कॉलोनी, कर बाजार, डीसीएम श्मशान, इंदिरा गांधी नगर, तारवाड़ा, पावर हाउस और डीसीएम सेक्टर कार्यालय सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 33 : जय श्री विहार, रायपुर नाका, गुलाबबाड़ी, मालीपुरा, लक्ष्मी आवास, थेकड़ा, मॉडल टाउन, रॉयल सनसिटी, कैरियर पॉइंट टाउनशिप, शिवधाम कॉलोनी, कबीरधाम और शिवसागर का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 34 : देवली अरब ग्राम, नया नोहर, राजनगर का आंशिक भाग, महालक्ष्मीपुरम, बक्शी स्कूल, अरिहंत विद्यालय, मित्तल इंटरनेशनल स्कूल, श्याम नगर, हाथीखेड़ा ग्राम, हनुमतखेड़ा ग्राम, श्रीराम कॉलोनी, जगन विहार, गुरु नानक विहार, अरावली विहार, टैगोर नगर, होली फैमिली क्षेत्र, कृष्णा नगर, मोती नगर, गणेश नगर, बृज विहार, देवली अरब रोड, कौटिल्य नगर और प्रताप नगर द्वितीय सहित कई शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 14:48:39 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में शामिल, फिर भी गांव जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- नगर निगम में शामिल होने के बाद भी नहीं मिलीं शहर जैसी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/included-in-the-city--yet-conditions-resemble-a-village/article-163224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा शहर की सीमा में शामिल होने के बावजूद वार्ड नंबर 1 से 5 तक के कई इलाकों की तस्वीर आज भी गांव जैसी नजर आती है। शहर का हिस्सा होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगह मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी पैदल राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में जनप्रतिनिधि चुने, लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पाया। कई इलाकों में आज भी विकास कार्यों की दरकार है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो शहर और गांव में अंतर ही क्या रह जाता है।</p>
<p><strong>कहीं सड़क बदहाल तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर</strong><br />इन वार्डों के कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों और गलियों का पानी सड़क पर आ जाता है। इससे लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नियमित रूप से नहीं जलतीं। रात के समय अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर का हिस्सा बने इन इलाकों में तेजी से विकास की जरूरत है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उस गति से नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>शहर जैसी सुविधाओं की उम्मीद, विकास अंतिम छोर तक पहुंचे</strong><br />क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी मांग अब शहर जैसी मूलभूत सुविधाओं की है। लोगों का कहना है कि केवल वार्ड सीमा में शामिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि विकास का लाभ भी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों की मरम्मत, नालियों की नियमित सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान और खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ऐसे प्रतिनिधि की उम्मीद है, जो उनके बीच रहकर समस्याएं सुने और अधिकारियों से समन्वय कर समाधान करवाए। लोगों का कहना है कि अब गांव जैसी बदहाली नहीं, बल्कि शहर जैसी सुविधाएं चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर और क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 1-</strong> शंभूपुरा, गिरधरपुरा एवं गोवर्धनपुरा ग्राम<br /><strong>वार्ड नंबर 2-</strong> कबीर आश्रम, विजय राजे सिंधिया चौराहा, ज्ञान सरोवर कॉलोनी, नयागांव उर्फ दौलतगंज, रोझड़ी का आंशिक भाग, पटवार ट्रेनिंग स्कूल, मोदी इंस्टीट्यूट, कौटिल्य कॉलेज आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 3- </strong>ग्राम आमली, रथकांकरा, बंधा, धरमपुरा की समस्त राजस्व सीमा, देवनारायण योजना, रोझड़ी राजस्व ग्राम का आंशिक भाग, धरमपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां<br /><strong>वार्ड नंबर 4- </strong>रानपुर, पुनिया देवरी, रानपुर एजुकेशन एरिया, रेतिया चौकी, लखावा, जगपुरा, खेड़ा जगपुरा, भीमपुरा, उमेदपुरा, भामाशाह मंडी, रानपुर औद्योगिक क्षेत्र, कोयला तलाई आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 5-</strong> कंवरपुरा ग्राम, श्रीराम नगर, कच्ची बस्ती, कहारों की बस्ती, डीसीएम कॉलोनी, डीसीएम श्रीराम फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, उमेदगंज गांव का संपूर्ण क्षेत्र, राजनगर का आंशिक क्षेत्र, मानसरोवर कॉलोनी, कोटा क्लब, गायत्री विहार एवं रायपुरा क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने के साथ सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करवाया गया। वार्डवासियों की सुविधा के लिए पट्टे बनवाने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करवाने का हरसंभव प्रयास किया गया और जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को गति दी गई।<br /><strong>-पवन मीणा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>पार्षद कार्यकाल के दौरान राजनीतिक फेरबदल के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया, जिसके चलते वार्ड में प्रस्तावित कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकता हमेशा वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना रही।<br /><strong>- सोनू भील,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड की स्थिति आज भी गांव जैसी बनी हुई है। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के अधिकारियों ने भी वार्ड की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-कपिल गुर्जर,वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सड़कें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वार्ड में रोड लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन कई जगह रात के समय ये जलती नहीं हैं। इससे अंधेरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।<br /><strong>- भागचंद,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:31:12 +0530</pubDate>
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                <title>वार्डों का नक्शा नया, समस्याएं पुरानी</title>
                                    <description><![CDATA[नए नक्शे में शामिल हुए कई इलाके, अब हर बस्ती तक सुविधाएं पहुंचाना निगम के लिए चुनौती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-ward-map--old-problems/article-162846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(4)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सरकार का नक्शा बदल गया है। डेढ़ सौ वार्डों से अब कोटा शहर 100 वार्डों में सिमट गया है। कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण की अलग-अलग व्यवस्था खत्म होने के बाद वार्डों की सीमाएं भी बदल गई हैं। कई वार्डों का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। ऐसे में एक ही वार्ड में पुरानी कॉलोनियों से लेकर नई बस्तियां, गांव, संस्थान और विकसित हो रहे क्षेत्र तक शामिल हो गए हैं। नवज्योति ने नए वार्डों की जमीनी हकीकत जानने के लिए वार्ड 16 से 20 तक का जायजा लिया तो तस्वीर सामने आई कि वार्ड बदले हैं, सीमाएं बदली हैं, लेकिन नागरिकों की मूलभूत समस्याएं अब भी जस की तस हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-1 : वार्ड 16... कॉलोनियों और पुराने मोहल्लों का मेल</strong><br />यहां सड़क, पानी, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की नियमित व्यवस्था सबसे अहम है। बढ़े हुए क्षेत्र के चलते निगम के सामने हर इलाके तक समान रूप से सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती रहेगी। वार्ड 16 में सुभाष कॉलोनी, नंदा जी की बाड़ी, तेल वाली गली, सरस्वती कॉलोनी, बालाजी टाउन, विधाता कॉलोनी, श्मशान, घूम चक्कर, गणेश चौक, कुम्हारों का मोहल्ला और सरकारी स्कूल क्षेत्र शामिल हैं। वार्ड में पुराने मोहल्लों के साथ नई कॉलोनियां भी हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-2 : वार्ड 17... आवारा कुत्ते और सफाई बनी परेशानी</strong><br />स्थानीय लोगों ने आवारा कुत्तों और साफ-सफाई को लेकर परेशानी बताई। कई जगह नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी नजर आई। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने से खासकर बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी होती है। वहीं सफाई व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। वार्ड 17 में मोहन निवास, खंड गावड़ी, पारिवारिक न्यायालय, सिविल लाइन, सुखधाम, दोस्तपुरा और ऑफिसर क्लब क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-3 : वार्ड 18... टूटी सड़कें और खाली प्लॉटों में पानी</strong><br />इलाके में लोगों की सबसे बड़ी शिकायतों में क्षतिग्रस्त सड़कें, खाली प्लॉटों में भरा पानी और पेयजल की समस्या शामिल है। खाली प्लॉटों में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर और गंदगी की समस्या पैदा होने की बात भी सामने आई। वहीं कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त सड़कें आवाजाही में परेशानी बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि निगम केवल मुख्य सड़कों पर ही नहीं, बल्कि कॉलोनियों की अंदरूनी सड़कों पर भी ध्यान दे। वार्ड 18 में आदर्श नगर, सुमन विहार, बालाजी टाउन प्रथम व द्वितीय, कैलाशपुरी, पार्श्वनाथ एनक्लेव, गिरधर एंक्लेव, पार्वतीपुरम, एग्जॉटिका मैरिज गार्डन, महावीर मिशन हॉस्पिटल, मारडिया बस्ती, रामचंद्रपुर, बालिका ग्राम और स्वीट होम कॉलोनी सहित कई क्षेत्र आते हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-4 : वार्ड 19... खाली प्लॉटों का पानी और टूटे रास्ते</strong><br />यहां भी खाली प्लॉटों में पानी भरने, क्षतिग्रस्त सड़कों और विद्युत पोल की समस्या सामने आई। बारिश के बाद खाली प्लॉटों में पानी जमा होने से आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर सड़कें खराब हैं तो विद्युत पोल से जुड़ी समस्याएं भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। बढ़े हुए वार्ड में इन समस्याओं को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना निगम के लिए चुनौती होगी।<br />वार्ड 19 में मित्तल मैरिज गार्डन, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, पेट्रोल पंप, राधा-कृष्ण मंदिर, लॉरियट पब्लिक स्कूल, रिद्धि-सिद्धि नगर, चंचल विहार, लक्ष्मण विहार, विकास नगर, रिद्धि-सिद्धि प्रथम, कमला उद्यान, एसजीएन मैरिज गार्डन और लैंडमार्क सिटी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>दृश्य-5 : वार्ड 20... सबसे बड़ा दायरा, समस्याओं की भी लंबी फेहरिस्त</strong><br />इतने बड़े क्षेत्र में समस्याओं का स्वरूप भी अलग-अलग है। यहां क्षतिग्रस्त सड़कें, गंदगी, टे्चिंग ग्राउंड की समस्या और जगह-जगह बस्तियों में जलभराव प्रमुख समस्याओं के रूप में सामने आ रही हैं। कई बस्तियों में बारिश का पानी जमा होने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। वहीं सड़कें क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही प्रभावित होती है।वार्ड 20 का दायरा इन पांच वार्डों में सबसे विस्तृत नजर आता है। यहां मेनाल रेजिडेंसी, गणेश पाल, नांता, वीर दुर्गादास स्टेडियम, भैरूजी मंदिर, तेजाजी मंदिर, नांता गढ़, जेटियों का मोहल्ला, नांता रोड, पार्श्वनार्थ मल्टी स्टोरी, ईदगाह, कोली मोहल्ला, नारी निकेतन, क्रेशर बस्ती, मेंढकी पाल धाम, कालबेलिया बस्ती, गुरुद्वारा, पत्थर मंडी, अभेड़ा महल, करणी माता मंदिर, बायोलॉजिकल पार्क, करणी नगर, बड़गांव, देव नगर, सिलिकॉन सिटी, गोकुलधाम सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p>पहले वार्ड छोटे होते थे, इसलिए क्षेत्र सीमित होने के कारण सफाई, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों पर भी तुरंत ध्यान दिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा प्राथमिकता सफाई व्यवस्था को दी। इसके साथ ही वार्ड में जरूरत के अनुसार कई विकास कार्य भी करवाए गए। उनका कहना है कि छोटे वार्ड होने से पार्षद और जनता के बीच सीधा संपर्क बना रहता था और समस्याओं की जानकारी भी समय पर मिल जाती थी।<br /><strong>-हरिओम सुमन, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में करीब 150 वार्ड थे, जबकि अब वार्डों की संख्या 100 हो गई है। उनका मानना है कि इससे कामकाज पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने वार्ड की समस्याओं पर लगातार ध्यान दिया और किसी तरह की बड़ी परेशानी सामने नहीं आई। पार्षद की जिम्मेदारी होती है कि वह उपलब्ध संसाधनों के साथ हर व्यवस्था को बेहतर तरीके से मैनेज करे। उनका कहना है कि इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन से वार्ड की समस्याओं का समाधान संभव है।<br /><strong>- उषा ठाकुर, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>शहर में वार्डों की संख्या बढ़ाकर 100 करना व्यवस्था की दृष्टि से एक अच्छा कदम हो सकता है, लेकिन इसके साथ सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार भी जरूरी है। अब एक नगर निगम होगा और जवाबदेही तय हो सकेगी। पहले वार्ड सीमा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। विकास के कामों को लेकर हम सतर्क हैं।<br /><strong>-लव शर्मा, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>आगामी चुनाव में ऐसे जनप्रतिनिधि का चुनाव होना चाहिए, जो केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे कार्यकाल वार्डवासियों के बीच मौजूद रहे। प्रतिनिधि ऐसा हो, जो वार्ड को अपना घर और यहां रहने वाले लोगों को अपने परिवार की तरह समझे। वार्ड की छोटी-बड़ी समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानकर उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करे। जनता को ऐसे ही सक्रिय और संवेदनशील प्रतिनिधि की जरूरत है।<br /><strong>-शुभम मेहरा, वार्डवासी</strong></p>
<p>परिसीमन के बाद इस बार वार्ड का क्षेत्र काफी बड़ा हो गया है। क्षेत्र बढ़ने के साथ समस्याएं भी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि नया वार्ड किस तरह व्यवस्थित होता है और जनप्रतिनिधि हर इलाके की समस्या तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं। अब देखना होगा कि यह नया परिसीमन वार्डवासियों की उम्मीदों और उनकी जरूरतों पर कितना खरा उतरता है।<br /><strong>-देवेंद्र सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:20:53 +0530</pubDate>
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                <title>मानसून की मोहलत कह रही सावधान, बारिश तेज हुई तो सड़क से लेकर बिजली तक बढ़ेगा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून में करंट से पहले सुरक्षा का इंतजाम जरूरी, खुले ट्रांसफार्मर बन सकते हैं जानलेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-monsoon-s-delayed-arrival-serves-as-a-warning--if-rainfall-intensifies--risks-ranging-from-road-hazards-to-electrical-dangers-will-escalate/article-160025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मानसून दस्तक दे चुका है। आसमान में बादल छा रहे हैं, बारिश का मौसम भी बन रहा है, लेकिन अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। मौसम की यह मोहलत प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आखिरी अवसर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज हुआ तो शहर की कुछ बदहाल सड़कें, ब्रिजों के नीचे जलभराव और खुले विद्युत ट्रांसफार्मर लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी से सड़क की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की राह मुश्किल कर रहे हैं। फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण इन रास्तों से आवागमन हो रहा है, लेकिन लगातार बारिश शुरू होते ही यही छोटी खामियां बड़ी समस्या में बदल सकती हैं। गड्ढों में पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा नहीं रहता और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बारिश से पहले भरें गड्ढे, वरना पानी छिपा देगा खतरा</strong><br />मोहन टॉकीज रोड, नयापुरा से एरोड्रम जाने वाले मार्ग और छावनी से नयापुरा की ओर आने वाले रास्ते सहित शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर कहीं गिट्टी फैली हुई है तो कहीं सड़क पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन गुजरते हैं। अभी इन स्थानों की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश तेज होने के बाद मरम्मत कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है।</p>
<p><strong>ब्रिज के नीचे पानी भरा तो थमेगी रफ्तार</strong><br />शहर में बने कुछ ब्रिजों के अंडरपास के नीचे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती रही है। तेज बारिश के बाद यदि पानी की निकासी समय पर नहीं हो तो कुछ ही देर में सड़क पर पानी जमा हो जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। । नतीजा यह होता है कि कुछ घंटों की बारिश लोगों के लिए घंटों की परेशानी बन जाती है। यदि बारिश रात के समय हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पंपिंग व्यवस्था, ड्रेनेज की सफाई और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के इंतजाम पहले से तैयार रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा घेरा जरूरी, बारिश में बढ़ सकता है करंट का खतरा</strong><br />सड़कों और जलभराव के साथ शहर में खुले विद्युत ट्रांसफार्मर भी चिंता का विषय हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरण खुले क्षेत्र में लगे हुए हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी भरने या बिजली के तारों और उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर करंट का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों, राहगीरों और पशुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। सड़क के गड्ढे भरना, बिखरी गिट्टी हटाना, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना और खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करना ऐसे काम हैं जिन्हें तेज बारिश से पहले पूरा किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>बारिश से पहले हो काम, बाद में केवल खानापूर्ति नहीं</strong><br />गड्ढे अभी दिखाई दे रहे हैं, बारिश में इनमें पानी भर जाएगा। तब वाहन चालक को पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढा कितना गहरा है। प्रशासन को बारिश से पहले ही सड़कों की मरम्मत करनी चाहिए। सड़क पर फैली गिट्टी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बारिश में सड़क गीली होने पर वाहन फिसलने का डर रहता है। इसे समय रहते हटाया जाना चाहिए। हर साल तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नालियों और ड्रेनेज की सफाई पहले ही हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। खुले ट्रांसफार्मर बारिश के दिनों में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विद्युत विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुरक्षा जाली और अन्य इंतजाम करने चाहिए।”<br /><strong>-राहुल शर्मा, वाहन चालक</strong></p>
<p><strong>बारिश का इंतजार क्यों?</strong><br />मानसून आ चुका है और तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है। विभागों के सामने सवाल साफ हैं—क्या सड़कों के गड्ढे बारिश से पहले भरे जाएंगे? क्या बिखरी गिट्टी हटेगी? क्या ब्रिजों के नीचे जल निकासी की जांच होगी? क्या खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जाएगा? अभी कार्रवाई हुई तो शहर को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है। यदि इंतजार तेज बारिश और शिकायतों का किया गया तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी और विभागों को फिर आपातकालीन मरम्मत में जुटना होगा। बारिश कब होगी, यह मौसम तय करेगा, लेकिन शहर बारिश के लिए कितना तैयार होगा, यह जिम्मेदार विभागों को तय करना है।<br /><strong>-हरपाल सिंह राणा, शहरवासी</strong></p>
<p>बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संभावित जलभराव व आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। निगम व केडीए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-पीयूष समारिया, जिला कलक्टर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:09:13 +0530</pubDate>
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                <title>नाला निर्माण में लापरवाही, नई छत पर पड़ी दरारें</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूली बच्चों सहित आमजन की प्रतिदिन आवागमन में बढ़ी परेशानी ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/negligence-in-drain-construction--cracks-appear-on-the-new-roof-slab/article-158669"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/05.gif" alt=""></a><br /><p>कापरेन। कस्बे के शक्ति चौराहा स्थित निर्माणाधीन नाले के कार्य में लापरवाही सामने आने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। निर्माणाधीन व नाले की एक ओर छत डालने के बाद समय पर और निर्धारित मानकों के से अनुरूप तराई (क्योरिंग) नहीं किए  जाने से नई छत पर शुरुआती दरारें  दिखाई देने लगी हैं। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर को भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों कार का कहना है कि निर्माण स्थल परं ने कर्मचारी पानी लेकर तो पहुंचते हैं,  लेकिन छत पर पानी रोकने की  समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण  पानी तुरंत बह जाता है। ऐसे में कंक्रीट  की आवश्यक तराई नहीं हो पा रही है, तथा जिससे निर्माण की मजबूती प्रभावित  होने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p>करीब 45 दिनों से चल रहा निर्माण कार्य अब तक अधूरा है। इस बीच विद्यालय खुल जाने से स्कूली बच्चों सहित आमजन को प्रतिदिन आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चे जोखिम उठाकर निर्माण स्थल से गुजरने को विवश हैं। वहीं मानसून की शुरुआत के साथ अधूरे निर्माण को लेकर लोगों की चिंता और बढ़ गई है। कस्बेवासी गजेन्द्र जांगिड़, नर्सिंग राठौर, सुरेश कुमार जैन, सुनील गोयल और मनोज शर्मा ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने तथा कार्य में शीघ्रता लाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते निर्माण पूरा होने से आमजन और स्कूली विद्यार्थियों को राहत मिलेगी तथा बरसात के दौरान संभावित परेशानियों से भी बचाव हो सकेगा।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />ठेकेदार को छत की सही तरीके से तराई कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। निर्माण कार्य में तेजी लाई जा रही है और इसी महीने नाले से आवागमन शुरू करा दिया जाएगा।<br /><strong>- चिराग, एईएन, पीडब्ल्यूडी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:11:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बजट होते हुए भी विकास कार्यों में खर्च नहीं कर पा रहे कॉलेज, प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के सरकारी कॉलेजों में लेखाधिकारी नहीं, बजट लेप्स होने का मंडराया खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-having-a-budget--colleges-are-unable-to-spend-on-development-projects/article-144941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/200-x-60-px)-(5).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र के अधिकांश सरकारी महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी (डबलएओ) के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिसका असर कॉलेजों की वित्तीय व्यवस्था और शैक्षणिक सुविधाओं पर पड़ रहा है। जरूरी सामान की खरीद से लेकर बिल भुगतान तक के काम अटक रहे हैं, जिससे महाविद्यालय प्रशासन को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि 10 हजार रुपए से अधिक की किसी भी वस्तु की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया जरूरी होती है, जो सहायक लेखाधिकारी के अभाव में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही। नतीजन फर्नीचर, टेबल-कुर्सियां, कंप्यूटर और अन्य आवश्यक उपकरण की बजट होते हुए भी कॉलेज प्रशासन खरीद नहीं कर पा रहे हैं। इससे कॉलेजों की मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p><strong>प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच बिगड़ रहा संतुलन</strong><br />शिक्षकों ने बताया कि कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों के एक दर्जन से अधिक सरकारी कॉलेजों में सहायक लेखाधिकारी का पद भरा नहीं है। जिसकी वजह से सिर्फ वित्तीय संबंधित कार्य ही नहीं बल्कि शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। लेखा संबंधित छोटे मोटे कार्यों का जिम्मा जिन शिक्षकों को दिया जाता है, उनका शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा दैनिक कैशबुक का रख-रखाव, नोटशीट पर टिप्पणियां व ट्रेजरी से जुड़े बिलों का निपटान जैसे कार्यों में तकनीकी और लेखा संबंधी समझ की आवश्यकता होती है, जो सामान्यत: शिक्षकों के कार्यक्षेत्र से अलग है। ऐसे में प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>फर्नीचर का बजट लेप्स होने का खतरा</strong><br />सुकेत कॉलेज के छात्रों का कहना है, महाविद्यालय में फर्नीचर खरीद के लिए 4 लाख का बजट आया हुआ है लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं होने के कारण अब तक खरीद नहीं हो पाई, जबकि अगले माह वित्तीय वर्ष समाप्त होने के साथ बजट भी लेप्स होने का खतरा मंडरा रहा है । जरूरी संसाधनों की समय पर खरीद न होने और वित्तीय प्रक्रियाओं के लंबित रहने का सीधा असर विद्यार्थियों की सुविधाओं और पढ़ाई पर पड़ रहा है।</p>
<p><strong>हाड़ौती के इन कॉलेजों में नहीं डबल एओ</strong><br />कोटा शहर के बड़े कॉलेजों को छोड़कर हाड़ौती के एक दर्जन से अधिक राजकीय महाविद्यालयों में सहायक लेखाधिकारी के पद खाली पड़े हैं। जिनमें राजकीय महाविद्यालय इटावा, कनवास, सांगोद, रामगंजमंडी, सुकेत, चेचट, दीगोद, बारां जिले में राजकीय महाविद्यालय छिपाबडौद, अटरु, बूंदी जिले के गवर्नमेंट कॉलेज तालेड़ा, हिंडोली, डाबी सहित कई कॉलेज शामिल हैं। इन कॉलेजों को विकास सामग्री खरीदने के लिए या तो नोडल महाविद्यालय या फिर रे-सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है।</p>
<p><strong>इन समस्याओं से जूझ रहे कॉलेज प्रशासन</strong><br />शिक्षकों का कहना है, महाविद्यालयों में फर्नीचर, कम्यूटर, इनवर्टर, कूलर-पंखें, टेबल-कुर्सियां खरीद व संविदा पर लगे शिक्षकों का वेतन संबंधित, विद्यार्थियों का फीस स्ट्रक्चर, स्टेशनरी क्रय, एडमिशन के दौरान आने वाली फीस को विभिन्न मदों में विभाजित करना, कक्षा-कक्ष मेंटिनेंस, अनुमानित बजट बनाना, लाइब्रेरी का सेटअप तैयार करना व किताबें खरीदने सहित सम्पूर्ण वित्तीय कार्य सहायक लेखाधिकारी द्वारा किए जाते हैं। जिनके अभाव में महाविद्यालय प्रशासन आवश्यक साधन संसाधनों की खरीद नहीं कर पाते। संभाग में कई महाविद्यालय ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में टेबल-कुर्सियां आधी भी नहीं है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्राचार्य व प्रोफेसर</strong><br />लाइब्रेरी के लिए अलग-अलग मद में बजट आया हुआ है। लाइब्रेरी सेटअप, कताबें वह अन्य सामानों के लिए 75 - 75 हजार का बजट मिला है। इनमें मात्र 20 हजार रुपए की ही खरीद हो पाई है। जबकि 55 हजाररुपए यूं ही पड़े हैं, क्योंकि एसपीपीपी पोर्टल पर खरीद प्रकिया के लिए टेंडर किए जाने होते हैं, जो वित्त संबंधी नियमों की जानकारी के बगैर नहीं हो सकते। ऐसे में सहायक लेखा अधिकारी नहीं होने से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- ललित कुमार, प्रोफेसर राजकीय महाविद्यालय कनवास</strong></p>
<p>सहायक लेखाधिकारी नहीं होने से वित्तीय संबंधी कार्यों के लिए काफी परेशानी हो रही है। वर्तमान में कॉलेज में 600 स्टूडेंट है जिसके मुकाबले टेबल कुर्सियां 300 ही है। ऐसे सहायक लेखाधिकारी के अभाव में आवश्यक सामग्री की खरीद समय पर नहीं हो पाती। टेंडर संबंधित कार्य नियमों के अभाव में शिक्षक नहीं कर पाते हैं। अनावश्यक देरी से बजट लेप्स होने का खतरा बना रहता है।<br /><strong>- रामदेव मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय इटावा</strong></p>
<p>सुकेत कॉलेज में फर्नीचर के लिए 4 लाख का बजट मिला हुआ है। लेकिन खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं होने से बजट लेप्स का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में आयुक्तालय को भी लिखा है। इस बजट से 200 से टेबल कुर्सी खरीदनी है। हालांकि बजट लेफ्ट ना हो इसके लिए खादी ग्रामोद्योग से फर्नीचर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन हर कॉलेज सहायक लेखाधिकारी होना चाहिए।<br /><strong>- संजय गुर्जर, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रामगंजमंडी</strong></p>
<p>कॉलेज में डबल एओ का पद रिक्त है। ऐसे में आवश्यक संसाधनों की खरीद के लिए या तो नोडल कॉलेज या फिर रे- सेंटर के भरोसे रहना पड़ता है। पिछले साल भी डबल एओ के अभाव में टेंडर प्रक्रिया समय पर नहीं हो पाने से बजट लैप्स हो गया। वित्तिय संबंधी कार्यों में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>- डॉ. बुद्धिप्रकाश मीणा, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय अटरु</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बड़े कॉलेजों में लेखाधिकारी कार्यरत हैं, संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा मांग करने पर दूसरे नोडल महाविद्यालयों या रे- सेंटर से व्यवस्था की जाती है।<br /><strong>- प्रो. विजय पंचोली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 15:31:42 +0530</pubDate>
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                <title>सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला</title>
                                    <description><![CDATA[17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर के सरकारी आवासीय कॉलोनी की बदहाल स्थिति ने स्थानीय निवासियों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा में गंभीर समस्या पैदा कर दी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान न दिए जाने के कारण यह सरकारी आवास खण्डहरों में तब्दील हो चुके है। यहाँ रहने वाले परिवारों ने इन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया  है। एक समय ये आवास चिकित्सकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इनमें रहने की संभावना न के बराबर है। कर्मचारयों के यहां से जाने के बाद इन्हे तुड़वाने का एस्टीमेट बनाने के लिये सार्वजनिक निर्माण विभाग को कहा गया लेकिन तभी से यह खाली घर और भी जानलेवा हो चुके हे।</p>
<p><strong>खण्डहर में तब्दील आवासों की खौफनाक तस्वीर</strong><br />अस्पताल परिसर में 64 सरकारी आवासों में से 35 आवासों की संख्या आवंटित की गई थी। हालांकि, इनमें से 17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं और 7 ही ऐसे हैं जो किसी तरह रहने योग्य माने जा सकते हैं। इन खण्डहरों के अंदर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारें, छतें और अन्य संरचनाएं गिरने का खतरा बनी रहती हैं। अस्पताल प्रशासन ने इन आवासों को पूरी तरह छोड़ दिया है, जिससे न केवल आवासीय कॉलोनी, बल्कि आसपास के लोग भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नशेड़ियों से सुरक्षा को गम्भीर खतरा</strong><br />नशा मुक्ति केन्द्र के पास स्थित खाली आवासीय ढांचे दिन भर दवाई लेने आने वाले लोगों से भरे रहते हैं, लेकिन रात के समय ये खाली मकान नशे के आदि लोगों के आश्रय स्थल में बदल जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्मैक और इंजेक्शन से नशा करने वाले नशेड़ियों की टोलियां यहाँ मंडराती रहती हैं और कभी-कभी अपने साथ महिलाओं को भी लेकर आती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन खंडहरों में नशेड़ी गैंग के जमा होने से कई सुरक्षा खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। खाली मकानों की दीवारें गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, साथ ही इन जगहों पर चोरी और अन्य अपराध की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसके चलते अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खंडहरों को नशेड़ी और स्मैकचियों का अड्डा बनने से न केवल चोरी और अव्यवस्था बढ़ी है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p><strong>झाड़ियां और पेड़ों से बढ़ता जंगली जानवरों का खतरा</strong><br />परिसर में स्थित इस क्षेत्र में काफी घनी झाड़ियाँ उग आई है यहां पुराने पेड़ होने से घना जंगल बन गया है अभाी हाल ही में यहां सांभर नजर आ रहा है ।साथ ही जहरीले सांप, बिच्छू और गिरगिट जैसे खतरनाक जानवरों की उपस्थिति से क्षेत्र के निवासियों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर बरसात के मौसम में इस समस्या में वृद्धि हो जाती है। इन जानवरों के कारण, न केवल अस्पताल परिसर में रहने वाले लोग, बल्कि आसपास के नागरिक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी की टूटी सड़क पर फैला सीवरेज का पानी</strong><br />इन्ही खाली पड़े आवासों के पास नयी मोर्चरी भवन की शुरूआत की गयी थी । ऐसे में यहां आने वाले परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इस सड़क के दोनों और मिट्टी और कंस्ट्रक्शन का मलबा पड़ा हुआ है । साथ ही नयी क्वार्टरर्स के पास सड़क पर ही सीवरेज का पानी जमा हुआ रहता है।</p>
<p><strong>चुप्पी तुड़वाने  में ही लग गये 2 साल</strong><br />अस्पताल प्रशासन भले ही खण्डहर हो चुके आवासों की जगह नये आवास बनाने के लिये प्रक्रिया प्रारम्भ करने की बात कह रहा है लेकिन पिछले ढ़ाई सालों से अव्यवस्थाओं के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अन्य डुप्लेक्स आवासों में रह रहे स्टाफ इस स्थिति से परेशान हैं और उनका कहना है कि अगर प्रशासन जल्द ही इस पर ध्यान नहीं देता, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। खण्डहर आवासों की मरम्मत और रख-रखाव की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई की व्यवस्था, और जहरीले जानवरों से सुरक्षा के लिए यहां की जंगली झाड़ियां कटवाकर सफाई हेतु कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p> साल 2012 से इन क्वार्टरर्स में रह रहा था, करीब 14 पैड़ अमरूद 3 पेड़ आम के लगायें थे । जबसे यहां पर नशामुक्ति केन्द्र चालू हुआ तब से एक एक करके सारे आवास खाली हो गये। सारी रौनक खत्म हो गयी।<br /><strong>-कमलेश, निवासी के आर 221</strong></p>
<p> मै यहां सालों से नौकरी करता हूँ, यहां सबकुछ ठीक ठाक था सुख दु:ख में साथ देते थे। अब केवल दिन में मोर्चरी को आने वाले लोग नजर आते है रात के समय चारो तरफ अनजान नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है ।<br /><strong>-अफजल इलेक्ट्रिशियन पीएचड़ी पम्प हाउस</strong></p>
<p>इन क्वार्टर्स को नये सिरे से तैयार करवाने की और हमारा ध्यान हे इसके लिये पी डब्ल्यूडी से एस्टीमेट के लिये कहा गया है,इसके बाद ही बताया जा सकता है कि इस जगह का क्या उपयोग हो सकता है ।<br /><strong>-डा. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>
<p>इन खण्डहर आवासों जो बिल्कुुल भी रहने योग्य नहीं है इनके ध्वस्तीकरण के लिये हमनें एस्टीमेट बना दिया है, निर्णय पर आने की कार्यवाही हमारे स्तर पर की जायेगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खंड पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>सांसों पर संकट, थर्मल की बूढ़ी इकाइयां शहर को बना रही बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[चिमनियों से उठता धुआँ थर्मल प्लांट के 4-5 किमी क्षेत्र तक शहर की हवा को प्रदूषित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/breathing-crisis--the-aging-thermal-power-plant-units-are-making-the-city-sick/article-142152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले कोटा की आबो-हवा अब जहरीली होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कोटा थर्मल पावर प्लांट की वे बूढ़ी इकाइयां हैं, जो अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, लेकिन आज भी धड़ल्ले से चलाई जा रही हैं। 1983 में स्थापित थर्मल की यूनिट1 और यूनिट 2 अपनी निर्धारित अवधि से करीब 10 साल ज्यादा समय निकाल चुकी हैं । इसके बावजूद इनसे निकलने वाला धुआं, राख और गर्म पानी शहरवासियों की सांसों और चंबल नदी दोनों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। चंबल किनारे बसें लोगों का कहना है कि थर्मल से 4 से 5 किलोमीटर की परिधि तक सीधा असर दिख रहा है। हवा में घुले सूक्ष्म कण सांसों के जरिए शरीर में जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों ने सफेद कपड़े पहनना तक बंद कर दिया है,क्योंकि छत पर कपड़े सुखाने पर कुछ ही देर में उन पर राख जम जाती है। चिमनियों से उठता धुआं दिनभर शहर की हवा को दूषित कर रहा है।अवधी पार कर चुकी इकाइयों का असर अब युवाओं पर भी साफ दिखने लगा है।</p>
<p><strong>कम उम्र  सांस, आंख और त्वचा की समस्याएं</strong><br />किशोरपुरा क्षेत्र की 35 वर्षीय रिंकू कंवर बताती हैं, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। डॉक्टर कहते हैं कि हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां कम उम्र के लोग भी सांस, आंख और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। थर्मल से निकलने वाला प्रदूषण केवल हवा तक सीमित नहीं है। संयंत्र से छोड़ा जा रहा गर्म और दूषित पानी सीधे चंबल नदी में मिलाया जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे नदी का तापमान बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर जलीय जीवों और चंबल की जैव विविधता पर पड़ रहा है। मगर प्रशासन और थर्मल प्रबंधन इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><strong>बड़ा सवाल फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) प्लांट नहीं</strong><br />नियमों के अनुसार थर्मल में यह प्लांट लगना चाहिए था, ताकि सल्फर डाइआॅक्साइड जैसे जहरीले गैसों का उत्सर्जन कम हो सके। लेकिन आज तक यह प्लांट पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि शहर की सांसों में जहर लगातार घुलता जा रहा है। किशोरपुरा, शिवपुरा, पाटनपोल, साबरमती कॉलोनी, केथूनीपोल, शक्ति नगर, दादाबादी, श्रीनाथपुरम से लेकर सकतपुरा और नांता तक राख का फैलाव देखा जा रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात में खुले में सोना तो दूर, दिन में घरों की खिड़कियां खोलना भी मुश्किल है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।</p>
<p><strong>प्रभाव जो देखे जा रहे</strong><br />-5 किमी तक राख और धुएं का फैलाव।<br />-सफेद कपड़ों पर जम रही काली परत।<br />-आंख और स्वांस के रोगियों को बढ रही परेशानी।<br />-थर्मल के गर्म पानी को सीधे नदी में मिलाने से चंबल की जैव विविधता पर भी संकट बढ़ रहा है, थर्मल से डिस्चार्ज पानी के साथ आॅयल की मात्रा भी नदी में आती है, कुछ महीने पहले भी किशोरपुरा की तरफ काफी सारी मरी मछिलयां पानी पर पडी़ हुई देखी गई थी ।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />थर्मल से निकलने वाले धुएं में कईं प्रकार के टॉक्सिस औैर पार्टिकल होते है दमा ,फेफड़ों से सम्बन्धित बिमारी वाले रोगियों में यह गम्भीर समस्याएं पैदा कर सकता है।<br /><strong>- डॉ. राजेश ताखर,  श्वास व एलर्जी रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>अवधी पार कर चुकी थर्मल इकाइयों को चलाना बेहद खतरनाक है। बिना ट्रीटमेंन्ट प्लांट के सल्फर और पार्टिकुलेट मैटर सीधे हवा में जा रहे हैं। इससे श्वसन रोगों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। साथ ही गर्म पानी नदी में छोड़ने से पानी में आक्सीजन की कमी हो जाती है। जलीय जीवों के विकास में बाधा तो होती ही साथ ही कई अन्य बुरे प्रभाव भी जन्म लेने लगते है यह पर्यावरणीय अपराध की श्रेणी में आता है। कोटा की आबो-हवा और चंबल की सेहत अब निर्णायक मोड़ पर है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।<br /><strong>-अनिल रावत, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड</strong></p>
<p>हमारे यहां पर जिला प्रदूषण बोर्ड की टीम द्वारा समय समय पर सेम्पलिंग करवायी जाती है, जिसकी रिपोर्ट भी आगे जाती है।<br /><strong>-शिखा अग्रवाल, मुख्य अभियन्ता कोटा थर्मल</strong></p>
<p>चम्बल के पानी और हवा की सेम्पिलंग करने के लिये हमारी टीमें लगातार जाती रहती है। जिसकी अपडेट पोर्टल पर डाल दी जाती है ।<br /><strong>-योग्यता सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी जिला प्रदूषण बोर्ड, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:54:17 +0530</pubDate>
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                <title>स्टेट हाइवे की मिसिंग लिंक सड़क गड्ढों में तब्दील, वाहन चालकों के लिए  खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने मांग मिसिंग लिंक के इस हिस्से का शीघ्र निर्माण हो ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/state-highway-s-missing-link-road-turns-into-a-pothole-ridden-mess--posing-a-danger-to-motorists/article-137424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र में मध्यप्रदेश सहित कोटा और बारां जिलों को एक्सप्रेस वे व दौसा मेगा हाइवे से जोड़ने वाली स्टेट हाइवे एस-1 की मिसिंग लिंक सड़क बदहाली का शिकार हो गई है। माखिदा से होकर चंबल पुलिया तक करीब एक किलोमीटर का हिस्सा जगह-जगह डामर उखड़ने से गड्ढों में तब्दील हो चुका है। गड्ढों में पानी भरने और कीचड़ फैलने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>समाजसेवी रामहेत मीणा गुहाटा, पूर्व सरपंच पवन मीणा और युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष हेमंत पालीवाल ने बताया कि लबान स्टेशन से माखिदा तक सीसी सड़क का निर्माण हो चुका है, लेकिन बजट के अभाव में चंबल पुलिया से करीब एक किलोमीटर पहले सड़क अधूरी छोड़ दी गई। यही हिस्सा आबादी क्षेत्र और माखिदा बस स्टैंड से होकर गुजरता है, जिससे ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों को रोजाना जोखिम उठाना पड़ रहा है।गड्ढों में फिसलकर बाइक सवार आए दिन घायल हो रहे हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। भारी गड्ढों के कारण कई बार चौपहिया वाहन भी फंस जाते हैं। लबान इंटरचेंज से एक्सप्रेस वे की ओर जाने वाले भारी लोडिंग वाहन फंसने पर आसपास की आबादी को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।</p>
<p>ग्रामीणों ने मांग की है कि मिसिंग लिंक के इस हिस्से का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और आवागमन सुरक्षित हो सके।</p>
<p>सड़क के निर्माण के समय बजट खत्म हो जाने से यह टुकड़ा रह गया था अब विभाग द्वारा करीब 2 करोड़ रुपये  राशि स्वीकृत हो चुकी है टेंडर हो गए है ठेकेदार ने सड़क को समतल कर दिया है जल्द ही सड़क का कार्य शुरू हो जाएगा।<br /><strong>- हिमांशु दाधीच सहायक  अभियंता पीडबल्यूडी लाखेरी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Dec 2025 15:30:11 +0530</pubDate>
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