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                <title>मुख्य मार्गों पर गंदगी,  बरसों बाद भी कचरा पाइंट मुक्त नहीं हो रहा शहर</title>
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                        <![CDATA[घर-घर कचरा संग्रहण, फिर भी सड़क पर डल रहा कचरा]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/main-roads-are-littered-with-garbage--the-city-remains-far-from-becoming-garbage-point-free-even-after-years/article-136614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी से पर्यटन नगरी बनने जा रहे कोटा शहर में जहां नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। उसके बाद भी शहर के मुख्य मार्गों पर ही कचरे का ढेर लगा हुआ है। बरसों बाद भी शहर कचरा पॉइंट मुक्त नहीं बन पाया।एक तरफ तो कोटा शहर को सफाई के मामले में इंदौर की तर्ज पर बनाने का दावा व प्रयास किया जाता है। लेकिन वास्तव में उस दिशा में किए जाने वाले प्रयास पर्याप्त नहीं हो पा रहे हैं। नगर निगम की ओर से पूरे शहर में टिपरों के माध्यम से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। वैसे तो सुबह-शाम दो पारियों में टिपरों के संचालन का प्रावधान है लेकिन फिलहाल शहर में सुबह के समय ही टिपर चल रहे हैं। सुबह 7 से 11 बजे के बीच हर वार्ड में दो से तीन टिपर डोर टू डोर जाकर कचरा एकत्र कर रहे हैं। उसके बाद भी शहर में मुख्य मार्गों पर तो कचरा डल ही रहा है। अधिकतर जगहों पर कचरा पॉइंट भी दिनभर कचरे से अटे रहते हैं।</p>
<p><strong>शहर को कचरा पॉइंट मुक्त बनाने की थी योजना</strong><br />नगर निगम अधिकारियों का दावा था कि जिस तरह से इंदौर में सड़क पर कचरा नजर नहीं आता है। उसी तरह से कोटा शहर की सड़कों को भी बनाया जाएगा। इंदौर में ट्रेचिंग ग्राउंड तक पर कचरा नहीं दिखता। वहां हरियाली व गार्डन होने से लोग घूमने के लिए जाते हैं। उसी तरह की योजना कोटा में भी लागू करनी थी। लेकिन अभी तक वह मूर्त रूप नहीं ले सकी है। पिछले कांग्रेस बोर्ड के समय में कोटा उत्तर व दक्षिण निगम में कई कचरा पॉइंट को समाप्त किया गया था। उत्तर निगम क्षेत्र में ही कुछ ही समय में करीब तीन दर्जन कचरा पॉइंट खत्म किए गए थे। उनकी जगह पर हरियाली विकसित की गई। लेकिन उसके बाद यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। जयपुर गोल्डन पर तालाब किनारे का क्षेत्र हो या नयापुरा में बृज टॉकीज, चम्बल की छोटी पुलिया का रास्ता हो या अन्य स्थान। ऐसी कई जगह पर कचरा पॉइंट खत्म कर वहां छतरी व हरियाली विकसित की गई।</p>
<p><strong>जरा-जरा सी दूरी पर कचरा पॉइंट</strong><br />शहर में कोई भी वार्ड या मुख्य मार्ग ऐसा नहीं हैं। जहां कचरा पॉइंट नहीं हो। हालत यह है कि जरा-जरा सी दूरी पर ही कचरा पॉइंट बने हुए हैं। फिर चाहे वह बारां रोड अंटाघर चौराहे से एसपी कार्यालय व पुलिस लाइन तक का क्षेत्र हो या नयापुरा का। बूंदी रोड परत बडगांव का क्षेत्र हो या अन्य कोई क्षेत्र। अभी भी वहां वार्डों से आने वाला कचरा निगम के कर्मचारी ही डाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर क्षेत्र में ही करीब 200 से अधिक कचरा पॉइंट हैं।वहीं लोग सड़क पर कचरा नहीं डालें इसके लिए निगम की ओर से जगह-जगह पर कचरा पात्र भी रखवाए गए हैं। फिर चाहे छावनी में एलआईसी बिल्डिंग के पास हो या गुमानपुरा में मल्टीपरपज स्कूल के पास। इसके अलावा कई अन्य जगह पर कचरा पात्र रखे गए हैं। उसके बाद भी उन जगह पर सड़कों पर ही कचरे के ढेर लगे हुए हैं।</p>
<p><strong>रात में भी हो रही मुख्य मार्गों की सफाई</strong><br />शहर साफ व सुंदर दिखे। इसके लिए अभी नगर निगम की ओर से मुख्य मार्गों पर रात के समय भी सफाई करवाई जा रही है। डीसीएम रोड, सीएडी रोड से लेकर स्टेशन तक के क्षेत्र में रात के समय सफाई कर्मचारी झाडू लगाने से लेकर कचरे को हाथ ट्रॉली व ट्रेक्टर ट्रॉली से तुरंत हटा भी रहे हैं। लेकिन सुबह होते ही फिर से सड़क पर कचरा ही कचरा हो रहा है। विशेष रूप से नई धानमंडी के पास हालत अधिक खराब है।</p>
<p><strong>मजबूरी में बने हैं कचरा पॉइंट</strong><br /> टिपरों से कचरा एकत्र करने का मकसद ही यह है कि सड़क पर कचरा नहीं डले। लेकिन कई लोग टिपरों के समय में कचरा नहीं डालकर बाद में सड़क पर डाल रहे हैं। जिससे सफाई के बाद भी सड़क व शहर साफ नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं अभी भी डेरा प्रथा शहर में बनी हुई है। जिससे वार्डों का कचरा कचरा पॉइंट पर डल रहा है। वहीं जिन वार्डों में टिपर नहीं जाते वहां का कचरा भी सड़क किनारे ही डल रहा है। कई कचरा पॉइंट तो मजबूरी में ही चल रहे हैं। प्रयास है कि इन्हें कम से कम किया जाए।<br /><strong> - मोतीलाल चौधरी,स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 15:30:09 +0530</pubDate>
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                <title>शार्ट कट से निकल रहे दो पहिया वाहन चालक,  सड़क सुरक्षा को बता रहे धत्ता, स्प्रिंग पोस्ट डिवाइडर तक तोड़े</title>
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                        <![CDATA[ ट्रैफिक लाइट सिग्नल फ्री शहर में चौराहों पर भी वाहन बिना रूके तेजी से निकल रहे ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/two-wheeler-drivers-are-taking-shortcuts--ignoring-road-safety--and-even-breaking-spring-post-dividers/article-131602"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में एक तरफ तो सड़क सुरक्षा और शहर को दुर्घटना मुक्त बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कई वाहन चालक ऐसे हैं जो शॉर्ट कट रास्ते अपनाने के लिए स्प्रिंग पोस्ट डिवाइडर तक को तोड़ रहे हैं। शहर को ट्रैफिक लाइट सिग् नल फ्री शहर तो बना दिया है। जिसके तहत शहर के सभी प्रमुख चौराहों से ट्रैफिक लाइटों को हटा दिया है। ऐसे में चौराहों पर भी वाहन बिना रूके तेजी से निकल रहे है। जिससे दुर्घटनाओं का खतरा अधिक बना हुआ है। ऐसे में हादसों को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस की सलाह पर कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से शहर में कई जगह पर ट्रैफिक संकेतक लगाने के साथ ही स्प्रिंग पोस्ट डिवाइडर लगाए हैं। </p>
<p>हालत यह है कि हादसे रोकने के लिए लगाए गए इन डिवाइडरों तक को वाहन चालकों ने तोड़ दिया है। सीएडी चौराहे पर लगाए गए इन डिवाइडर को बीच-बीच से काटकर रास्ता बना लिया है। जिससे वाहन चालक विशेष रूप से दो पहिया वाहन चालक नगर निगम कार्यालय के सामने या डोल्फिन पार्क के पास से घूमकर आने की जगह चौराहे के मोड़ से ही डिवाइडर के बीच से शॉर्ट कट रास्ते से निकल रहे है। इसके लिए महंगे डिवाइडर तक को जमीन से काटकर हटा दिया है। इसी तरह शॉपिंग सेंटर से घोड़ा चौराहे की तरफ  मोड़ पर लगाए गए इन स्प्रिेंग पोस्ट डिवाइडरों को भी बीच से तोड़ दिया है। जिससे दो पहिया वाहन शॉर्ट कट  व रोंग साइड से वाहन निकाल रहे है। इससे दुर्घटनाओें का खतरा अधिक बना हुआ है। यही हालत नयापुरा में नवल सर्किल के पास की है। यहां रोडवेज बसों के खड़े होने से जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में मेन रोड से बसों को अंदर की तरफ खड़ा करने व लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस तरह के डिवाइडर लगाए गए थे। लेकिन बसों की टक्कर से व लोगों ने अपनी सुविधा के लिए उन डिवाइडर तक को बीच-बीच से तोड़ दिया है। जिससे दो पहिया वाहन चालक शॉर्ट रास्ते से निकलकर हादसों का खतरा बने हुए हैं। </p>
<p><strong>वल्लभ नगर चौराहे पर भी लगाए</strong><br />शहर में पहले जहां पत्थरों के व प्लांटर वाले या बेरीकेडिंग से अस्थायी डिवाडिर बनाए जा रहे थे। वहीं अब केडीए की ओर से स्प्रिंग पोस्ट डिवाइडर बनाए जा रहे है। जिससे ये जगह भी कम घेरते हैं और इनके टकराने के बाद वाहन व  वाहन चालक को नुकसान नहीं होता है। वाहन से टकराने के बाद ये नीचे गिरकर वापस स्वत: ही पुरानी स्थिति में आ जाते है। इसे देखते हुए केडीए द्वारा हाल ही में वल्लभ नगर चौराहे से फ्लाई ओवर तक इस तरह के डिवाइडर लगाए हैं। जिससे यातायात सुचारू हो सके और दुर्घटनाओं का खतरा भी कम हो। </p>
<p><strong>वाहन चालकों ने तोड़े</strong><br />केडीए अधिकारियों का कहना है कि हादसों का खतरा कम करने के लिए केडीए ने शहर में जगह-जगह मुख्य मार्गों पर स्प्रिंग पोस्ट डिवाइडर लगाए थे। लेकिन दो पहिया वाहन चालकों ने अपनी सुविधा  के लिए शॉर्ट कट रास्ता अपनाने को देखते हुए रात के अंधेरे में इन डिवाइडरों के ऊपरी हिस्से को काट दिया है। बीच-बीच से एक या दो पोस्ट हटा दी है जिससे दो पहिया वाहन आसानी से निकल सके। ऐसा करने वालों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। उनकी पहचान होने पर कार्रवाई की जाएगी</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Nov 2025 16:03:45 +0530</pubDate>
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                <title>गांव से बदतर हुई शहर की सड़कें</title>
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                        <![CDATA[ई रिक्शा व दो पहिया वाहनों पर मंडरा रहा हादसों का खतरा]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/city-roads-have-become-worse-than-villages/article-125573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । प्रदेश में इस बार हुई भारी बारिश से जहां फसलों व स्कूलों व जर्जर भवनों को तो नुकसान हुआ ही है,वहीं सड़कों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। शहर की सड़कें गांव से भी बदतर हो गई है। छावनी में तो सड़क कम रह गई और गड्ढ़े अधिक हो गए हैं। जिससे यहां से गुजरने वाले ई रिक् खा और दो पहिया वाहन चालकों क पर हादसों का खतरा हमेशा मंडरा रहा है। इस बार जून से ही बरसात का दौर शुरु हो गया था जो अभी भी जारी है। अगले करीब एक सप्ताह तक तो भारी से अति भारी बारिश होने का अनुमान है। बरसात में सबसे अधिक डामर की सड़कों को नुकसान हुआ है। शहर में जहां-जहां भी डामर की सड़कें हैं वे इन दिनों चलने लायक ही नहीं बची है।  शहर में किसी भी मुख्य मार्ग पर हो या गली मौहल्ले की सड़कें। उन से गुजरना मतलब जान जोखिम में डालने से कम नहीं है। स्टेशन से महावीर नगर व रंगबाड़ी से दादाबाड़ी तक। नयापुरा से रामपुरा हो या गुमानपुरा से छावनी की सड़क। सभी जगह एक जैसी स्थिति है। डीसीएम मेन रोड से लेकर सीएडी रोड तक पर इतने बड़े-बड़े और खतरनाक गड्ढ़े हो रहे हैं कि इन रास्तों से गुजरने वाले वाहन चालकों को पता ही नहीं चल रहा है कि वे सड़क पर चल रहे है। ऐसा लग रहा है मानो गड्ढ़ों के बीच सड़क को तलाशते हुए आगे बढ़ रहे हैं। एक गड्ढ़े से बचने का प्रयास करते हैं उतने में दूसरा गड्डा आ जाता है। उससे बचते हैं तो पूरी गाड़ी ही गड्ढ़े में कूद पड़ती  है। ऐसे में पीछे से आने वाले वाहनों से टकराने व हादसों का तो खतरा बना हुआ है। वहीं गड्ढ़ों के कारण हल्के व दो पहिया वाहनों का तो दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा हमेशा मंडरा रहा है।   </p>
<p><strong>सबसे अधिक ई रिक् शा सवारियों को खतरा</strong><br />शहर में इन दिनों सवारी वाहन के रूप में सबसे अधिक इ रिक्शा व आॅटो चल रहे है। छावनी चौराहे से रामचंद्रपुरा तक अधिकतर लोग ई रिक् शा से ही आवागमन कर रहे है। ये हल्के होने से इनके गड्ढ़ों के कारण हादसों का शिकार होने का खतरा हमेशा बना हुआ है।  चौराहे से मुख्य बाजार से होते हुए पुलिस चौकी से लेकर आगे तक पूरी सड़क इतनी जर्जर हो रही है कि उसमें सड़क तलाशने पड़ रही है। </p>
<p><strong>लाखों लोगों का आवागमन</strong><br />छावनी में नगर निगम कोटा दक्षिण के 5 वार्ड है। इन वार्डों में तो करेब एक लाख से अधिक की आबादी रहती है। इनके अलावा सूर सागर, थेगड़ा, कंसुआ, डीसीएम व जयश्री विहार और रायपुरा तक के लोग छावनी बाजार व सब्जीमंडी में खरीदारी करने आ रहे है। ऐसे में लाखों लोगों के  लिए गड्ढ़े परेशानी के साथ ही हादसों का भी कारण बने हुए हैं। </p>
<p><strong>जिम्मेदार बेखबर</strong><br />छावनी निवासी महेश जोशी का कहना है कि चौराहे से रामचंद्रपुरा तक का मुख्य मार्ग इतना अधिक जर्जर हो रहा है कि उससे गुजरना जान जोखिम में डालना है। परिवार के लोग ई रिक्शा से आते-जाते हैं कई बार गड्ढ़ों के कारण रिक् शा पटलते  हुए बचा। सड़क की हालत सही करने के बारे में जिम्मेदार विभागों के अधिकारी बेखबर हैं। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। छावनी फ्लाई ओवर से लेकर स्लीप लेन तक पर इतने अधिक गड्ढ़े हैं कि यह वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। </p>
<p><strong>विरोध प्रदर्शन तक कर चुके</strong><br />छावनी के कांग्रेस पार्षद मोहम्मद इसरार का कहना है कि छावनी मेन रोड की सड़क का काम नगर निगम कोटा दक्षिण को करना है। इस संबंध में अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। कांग्रेस पार्षद तो छावनी में विरोध प्रदर्शन तक कर चुके हैं लेकिन अभी तक भी सड़कों को सही नहीं किया जा रहा है। जिससे लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों को चाहिए कि बड़े गड्ढ़ों को तो सही करवा दिया जाए।</p>
<p>छावनी समेत नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र के वार्डों में बरसात से खराब हुई सड़कों की मरम्मत के लिए टेंडर जारी हो चुका है। लेकिन अभी भी बरसात जारी होने से डामर का पेचवर्क नहीं किया जा सकता। बरसात थमने के बाद ही काम होगा। बरसात रूकते ही सबसे पहले छावनी की सड़कों को सुधारा जाएगा। <br /><strong>-ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:34:16 +0530</pubDate>
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                <title>नहीं थम रहा शहर की सुंदरता पर ग्रहण, निगम ने मुकदमा तक दर्ज कराया था</title>
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                        <![CDATA[शहर में अधिकतर सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर व फ्लैक्स लगाकर शहर की सुंदरता को बिगाड़ा जा रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-eclipse-on-the-beauty-of-the-city-is-not-stopping/article-121693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(3)38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक तरफ तो कोटा शहर को स्मार्ट व स्वच्छ के साथ ही पर्यटन नगरी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ शहर की सुंदरता पर  ग्रहण लगना नहीं थम रहा है।  शहर में सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति किसी भी तरह का विज्ञापन पोस्टर व फ्लेक्स लगाना गैर कानूनी है। ऐसा करना सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत आता है। लेकिन उसके बाद भी शहर में अधिकतर सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर व फ्लैक्स लगाकर शहर की सुंदरता को बिगाड़ा जा रहा है।  शहर में झालावाड़ रोड हाइवे स्थित गोबरिया बावड़ी अंडरपास पर विज्ञापन पोस्टर लगा हुआ है। जिससे एरोड्राम से अनंतपुरा की तरफ जाने वाले मार्ग पर लगे इस पोस्टर को देखकर  बाहर से आने वालों पर इसकी गलत छवि बन रही है।  इसी तरह से छावनी स्थित फ्लाई ओवर के नीचे सभी पिलरों पर विज्ञापन पोस्टर व फ्लैक्स चस्पा कर रखे है।  इतना ही नहीं दादाबाड़ी से केडवपुरा फ्लाई ओवर,  गुमानपुरा फ्लाई ओवर और गुमानपुरा स्थित बुर्ज की दीवार समेत कई जगह पर विज्ञापन पोस्टरों को लगाकर शहर की सुंदरता को बिगाड़ा जा रहा है।  वहीं शहर के मुख्य मार्गों पर लगे गेंट्री बोर्ड पर भी जनप्रतिनिधियों के जन्म दिवस की बधाई के विज्ञापन फ्लैक्स लगे हुए हैं। डीसीएम रोड से लेकर जवाहर नगर तक समेत शहर के अधिकतर क्षेत्रों में इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं।</p>
<p><strong> निगम ने मुकदमा तक दर्ज कराया था</strong><br />शहर की सुंदरता पर ग्रहण लगाने वालों के खिलाफ पूर्व में नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से कार्रवाई भी की गई थी। निजी अस्पताल समेत अन्य संस्थाओं द्वारा बिना अनुमति विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ दादाबाड़ी थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया था। साथ ही कई लोगों के  खिलाफ अदालत में परिवाद भी पेश किया था। वहीं छावनी से कोटड़ी चौराहे तक तो कई बार विज्ञापन हटाए जा चुके है। उसके बाद भी शहर में बिना अनुमति सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाने वाले नहीं मान रहे हैं। </p>
<p><strong>शहर की सुंदरता सभी का दायित्व</strong><br />शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाना सभी का दायित्व है। यह कहना है कि शहर वासियों का। कोटड़ी निवासी तबरेज पठान ने बताया कि शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी केवल सरकारी एजेंसियों की नहीं है। लोगों को भी अपने शहर के प्रति जिम्मेदारी व दायित्व को समझना होगा। निगम द्वारा बार-बार कार्रवाई करने के बाद भी यदि लोग नहीं मान रहे हैं तो ऐसा करने वालों पर जुर्माना व कठोर कार्रवाई की जाए। छावनी निवासी महेन्द्र सिंह का कहना है कि नगर निगम व केडीए की ओर से विज्ञापनों के लिए स्थान  निर्धारित किए हुए हैं।  यूनिपोल पर विज्ञापन लगाने का किराया देना पड़ता है। उससे बचने के लिए विज्ञापन एजेंसियां मनमर्जी से विज्ञापन चस्पा कर शहर की सुंदरता को खराब कर रही है। ऐसा करने वालों पर सख्ती जरूरी है।  इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के राजस्व अनुभाग अधिकारियों का कहना है कि निगम की ओर से समय-समय पर सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। कई बार निगम के स्तर पर भी विज्ञापन हटवाए गए हैं। फिर भी शहर में ऐसा हो रहा है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 17:56:22 +0530</pubDate>
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                <title>सिग्नल फ्री शहर में चौराहों पर नहीं हैं जेबरा क्रॉसिंग, हर शहर वासी को भुगतना पड़ रहा खामियाजा</title>
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                        <![CDATA[आमजन के लिए सुरक्षित ट्रेैफिक व्यवस्था बनाने की जगह उसे बिगाड़ दिया गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-are-no-zebra-crossings-at-the-intersections-in-the-signal-free-city/article-112876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य - 1</strong> सीएडी रोड स्थित घोड़े वाले बाबा चौराहे पर करोड़ों रुपए खर्च कर उसका विकास व सौन्दर्यीकरण तो कर दिया लेकिन वहां ट्रेफिक सिग्नल लाइट नहीं होने से े वाहन  तेज गति से निकल रहे हैं। जेबरा क्रॉसिंग भी नहीं होने से पैदल सड़क पार करने वालों के लिए समस्या बनी हुई है। </p>
<p><strong>दृश्य-2</strong> नयापुरा स्थित विवेकानंद सर्किल पर करीब 50 करोड़ से अधिक की लागत से चौराहे को आकर्षक व विशाल तो बना दिया। लेकिन वहां ट्रैफिक व्यवस्था इतनी बदतर हो गई है कि चारों तरफ से वाहन तेज गति से निकल रहे है। चौराहे पर जेबरा क्रॉसिंग नहीं होने से पैदल सड़क पार करने वालों के लिए हमेशा खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>दृश्य -3</strong> स्टेशन से एरोड्राम और नयापुरा से नए कोटा की तरफ जाने वाला और नए कोटा से स्टेशन व नयापुरा की तरफ आने वाला मुख्य मार्ग है जेडीबी कॉलेज के सामने का रोड। वहां तिराहे को माउंट वाला इतना बड़ा बना दिया लेकिन न तो वहां सिग् नल लाइट है और न ही जेबरा क्रॉसिंग। ऐसे में कॉलेज आने-जाने व स्टेडियम की तरफ आने-जाने वालों के लिए सड़क पर करना किसी खतरे से कम नहीं है। </p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं, शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था बताने के लिए जिसका सामना आमजन को करना पड़ रहा है। इस तरह की हालत पूरे शहर में है।  विकास पर करोड़ों रुपए खर्च करने से शहर सुंदर तो नजर आ रहा है लेकिन आमजन के लिए सुरक्षित ट्रेैफिक व्यवस्था बनाने की जगह उसे बिगाड़ दिया गया। इसका खामियाजा हर शहर वासी को भुगतना पड़ रहा है। फिर चाहे वह चार पहिया वाहन वाला हो या दो पहिया वाहन चालक। वहीं सबसे अधिक पैदल चलने व सड़क पार करने वालों के  लिए समस्या हो गई है। </p>
<p><strong>किसी भी चौराहे पर नहीं ट्रैफिक सिग् नल लाइटें</strong><br />शहर को ट्रैफिक सिग् नल लाइट फ्री बनाने के लिए पूर्व में जिन चौराहों पर लाइटें लगी हुई थी उन्हें हटा दिया गया है। अनंतपुरा चौराहा, एरोड्राम चौराहा, सीएडी चौराहा, अंटाघर चौराहा व कुन्हाड़ी स्थित महाराणा प्रताप चौराहा समेत शहर में कई जगह पर ट्रैफिक सिग् नल लाइटें लगी हुई थी। जो अब देखने को नहीं मिलती है।  ऐसे में जब  ट्रैफिक लाइटें ही नहीं हैं तो वहां वाहन भी नहीं रूक रहे हैं। वरन् वाहन पहले से भी तेज गति से निकल रहे हैं। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तक नहीं</strong><br />स्मार्ट सिटी बनाने के साथ ही पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किए जा रहे कोटा शहर में जहां देशी विदेशी पर्यटकों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक व्यवस्था इतनी बदहाल है कि स्थानीय लोग भी इस बढ़ते ट्रैफिक व वाहनों की स्पीड के बीच पैदल सड़क पार नहीं कर पा रहे हैं। बाहर से आने वालों के  लिए तो यह किसी चुनौती से कम नहीं है।  </p>
<p><strong>सिर्फ एरोड्राम अंडरपास पर व्यवस्था</strong><br />शहर में एक मात्र एरोड्राम चौराहे का अंडरपास ऐसा है जहां अंडर ग्राउंड पैदल सड़क पार करने वालों के  लिए व्यवस्था की हुई है। एक तरफ से दूसरी तरफ आन-जाने के लिए सड़क के साइड से नीचे उतरकर रास्ता बनाया हुआ है। लेकिन उन रास्तों के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। जिससे अधिकतर लोगों को मेन रोड से ही बिना जेबरा क्रॉसिंग के जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ रही है। वहीं विवेकानंद सर्किल पर पैदल चलने वालों के लिए पाथ वे है लेकिन सड़क पार करने की सुविधा नहीं है।  जबकि  न तो रेलवे स्टेशन पर और न ही अदालत चौराहे पर। नयापुरा, जेडीबी, अंटाघर, कोटड़ी, नई धानमंडी, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी,सीएडी, नगर निगम, चम्बल गार्डन, से लेकर नए कोटा तक में कहीं भी जेबरा क्रॉसिंग नहीं होने से पैदल  सड़क पार करने वालों के लिए खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>सड़क सुरक्षा हो पहली प्राथमिकता</strong><br />शहर का विकास होना अच्छा है। लेकिन उसके साथ ही सड़क सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। सड़क पर चलने से लेकर, सड़क पार करने और दुर्घटनाओं को रोकने के  लिए ट्रैुफिक पुलिस का होना भी जरूरी है। ट्रैफिक सिग्नल फ्री शहर बनाने के प्रयास में यातायात व्यवस्था बिगड़ गई। ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर विकास किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं होने का खामियाजा आमजन को आए दिन एक्सीडेंट के रूप में भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>-अरविंद विजय, बसंत विहार</strong></p>
<p><strong>अब भारी वाहनों से नहीं छोटे वाहनों से एक्सीडेंट</strong><br />शहर से पहले ट्रक और भारी वाहन निकलने से उनसे आए दिन हादसे होते थे। लेकिन अब भारी वाहनों का तो शहर में प्रवेश बंद हो गया। लेकिन बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और सिग् नल फ्री शहर के कारण जेबरा क्रॉसिंग तक नहीं होने से सड़क पार करते समय आए दिन छोटे वाहनों से ही एक्सीडेंट हो रहे हैं। जिला प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस को आमजन की सुरक्षा के लिए सिर्फ चालान बनाने पर ही ध्यान नहीं देकर ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार पर फोकस करना चाहिए। <br /><strong>-कमलेश दीक्षित, भीमगंजमंडी</strong></p>
<p><strong>वाहनों पर ब्रेक ही नहीं लगते</strong><br />शहर को ट्रैफिक सिग् नल फ्री तो बना दिया  जिससे अब किसी भी चौराहे पर वाहन रूकते ही नहीं है। ऐसे में वाहन पहले से भी तेज गति से निकल रहे हैं। जिससे हादसों का खतरा पहले से अधिक हो गया। फिर जिस तरह से शहर में चौराहे बनाए गए हैं वहां कौन सा वाहन किधर से और कब आ रहा है पता ही नहीं चलता। ऐसे में हादसों का खतरा अधिक हो गया है। इसमें सुधार किया जाना चाहिए। <br /><strong>-ओम पंजवानी, सिंधी कॉलोनी</strong></p>
<p>शहर में विकास कार्य विशेषज्ञ इंजीनियरों की सलाह से करवाए गए हैं। ऐसे में उस समय ही ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर कार्य किया जाना चाहिए था।  ट्रैफिक पुलिस तो व्यवस्था बनाने व हादसों को रोकने के लिए नियमों की पालना करवाने के लिए संबंधित विभागों को पत्र लिख सकती है। वह समय-समय पर किया जाता है। लेकिन चौराहों पर और जहां भी सड़क के बीच कट है वहां जेबरा क्रॉसिंग होनी चाहिए। जिससे पैदल चलने वाले आसानी से व सुरक्षित तरकी से सड़क पार कर सकें। <br /><strong>-अशोक मीणा, उप अधीक्षक यातायात कोटा शहर</strong></p>
<p>शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के प्रोजेक्ट को केडीए ने टैक आॅफ किया है। इसके लिए प्रयास भी शुरु कर दिए गए हैं। करीब एक माह का समय दिया गया है। उस समयावधि में  जबरा क्रॉसिंग से लेकर चौराहों पर सुरक्षित यातायात की जितनी भी व्यवस्थाएं होनी चाहिए वह करने के प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>-रविन्द्र माथुर, निदेशक  अभियांत्रिकी कोटा विकास प्राधिकरण   </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 15:39:21 +0530</pubDate>
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                <title>चेन स्नेचिंग का पदार्फाश, मुख्य सरगना गिरफ्तार </title>
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                        <![CDATA[आरोपी अपनी  पहचान छुपाकर मनोहरथाना में रह रहा था।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chain-snatching-case-exposed--main-kingpin-arrested/article-95975"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/chain-sneching.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर पुलिस ने कोटा शहर में लगातार हो रही चेन स्नेचिंग की घटनाओं का  पदार्फाश करते हुए मुख्य सरगना को बापर्दा गिरफ्तार किया है। आरोपी आशीष गुप्ता पुत्र लालू अपनी पहचान छुपाकर झालावाड़ जिले के मनोहर थाना में रह रहा था। वह मनोहर थाना से बाइक पर अपने साथी कैलाश के साथ  ग्रामीण रास्तों से होकर कोटा पहुंचता और  चेन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम देकर वापस मनोहर थाना पहुंच कर गायब हो जाता था। आरोपी द्वारा कोटा शहर में कई चेन स्नेचिंग  की वारदातो को अंजाम दिया गया ।</p>
<p>एसपी कोटा सिटी ने बताया कि आरोपी से कोटा शहर के अलावा अन्य जिलों में की गई वारदातों व अन्य आरोपियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 17:26:18 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तर दक्षिण के दो पाटों में पिस रही जनता,धणी धोरी बने महापौर चुप</title>
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                        <![CDATA[निगम के इन चार साल के कार्यकाल पर दैनिक नवज्योति ने आईना दिखाया। जिसमें न तो शहर की सफाई व्यरस्था में सुधार हुआ है और न ही श्वान व मवेशियों का समाधान हुआ। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-are-being-crushed-between-the-two-divisions-of-north-and-south--the-mayor-is-silent/article-95145"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/27rtrer6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पिछली कांग्रेस सरकार के समय में जयपुर व जोधपुर की तरह हीकोटा में भी दो नगर निगम तो बना दिए। लेकिन चार साल के कार्यकाल में भी न तो शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ और न ही जनता को इसका लाभ मिला। बल्कि कोटा उत्तर व दक्षिण निगम के दो पाटों में जनता पिसती ही रही। ऐसे में कोटा में फिर से एक नगर निगम होने पर ही लोगों को राहत मिल सकती है। कोटा में नवम्बर 2019 में नगर निगम के तत्कालीन बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो गया था। उसके बाद सरकार ने वार्डों  का परिसीमन कराया। जिसके बाद कोटा में उत्तर व दक्षिण दो नगर निगम बना दिए। वार्डों की संख्या 150 कर दी गई। उस समय दावा किया जा रहा था कि वार्ड छोटे होंगे तो सफाई व्यवस्था में सुधार होगा और पार्षद जनता की पहुंच में रहेंगे। नवम्बर 2020 में हुए चुनाव में दोनों नगर निगमों में कांग्रेस के बोर्ड बने। दोनों बोर्ड का चार साल का कार्यकाल  इसी सप्ताह पूरा हुआ है। निगम के इन चार साल के कार्यकाल पर दैनिक नवज्योति ने आईना दिखाया। जिसमें न तो शहर की सफाई व्यरस्था में सुधार हुआ है और न ही श्वान व मवेशियों का समाधान हुआ। जानकारों के अनुसार अगले साल जनवरी में पहले एक नगर निगम होने का और उसके बाद वार्डोंका  परिसीमन होने का नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। उसके बाद ही इसकी प्रक्रिया शुरू कीजाएगी।</p>
<p><strong>करोड़ों के संसाधन नहीं हुआ पूरा उपयोग</strong><br />दोनों नगर निगमों में शहर की सफाई व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपए की मशीनरी व संसाधन खरीदे गए। लेकिन उनका पूरा उपयोग तक नहीं हो सका। नतीजा शहर की सफाई व्यवस्था पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी इंदौर कीतर्ज पर सफाई केदावे तोकिए लेकिन हकीकत में कोई बदलाव नहींहुआ है। </p>
<p><strong>भवन  व कर्मचारियों का बंटवारा, नहीं बढ़ाया स्टाफ</strong><br />दो नगर निगम बनने के बाद कागजों में  भवन व कर्मचारियों का बटवारा हो गया लेकिन वास्तव में निगम में स्टाफ व कर्मचारी तक नहीं बढ़ाए।  पहले जिस प्रशासनिक भवन में एक नगर निगम संचालित हो रहा था उसी में लाखों  रुपए खर्च कर नए चैम्बर व फर्नीचर बनाया गया। लेकिन भवन एक ही रहा। साथ ही कर्मचारी सेवानिवृत्त होते रहे लेकिन नई भर्ती नहीं हुई। नगर निगम का नया गैराज तक नहीं बन सका। कोटा उत्तर व दक्षिण मेंएक ही राजनीतिक दल के बोर्ड होने के बाद भी दोनों में अक्सर विवाद की स्थिति बनी रही। चाहे गत वर्ष दशहरा मेला रहा हो या अन्य मामले। </p>
<p><strong>यह उत्तर का नहीं दक्षिण का मामला</strong><br />दो नगर निगम बनने से सबसे अधिक परेशानी शहर की जनता को ही भुगतनी पड़ी। लोग निगम कार्यालय में अपने कामों के जातेहैं तो वहांजाने पर अधिकतर को यहीसुनना पड़ता है कि यह काम कोटा उत्तर का नहीं दक्षिण का है। दक्षिण में  जाने पर मामला उत्तर का बताकर वहां से भी टाल दिया गया। जिससे लोग परेशान होते रहे। विशेष रूप से जन्म मृत्यु व विवाह प्रमाण पत्र हो या  मकान व भूमि के पट्टे बनाने का काम हो। जिन लोगों को उत्तर दक्षिण कीजानकारीनहीं थी उन्हें अधिक परेशान होना पड़ा। सफाई कर्मचारी भी कोटा उत्तर व दक्षिण में पिसते रहे। </p>
<p><strong>थानों की तरह रही व्यवस्था</strong><br />जिस तरह से शहर में एक ही जगह पर दो थाने आने पर पुलिसकर्मी मामले को एक से दूसरे थाने में टलकाते रहतेहै। उसी तरह से कई मामले उत्तर व दक्षिण  में उलझे रहे। गत वर्ष दशहरा मेले के आयोजन को लेकर नगर निगम के पार्षद ही एक नहींहो सके थे। दशहरा मेला दक्षिण में होने पर मेला समिति अध्यक्ष कोटा उत्तर से होने पर हमेशा दक्षिण के अधिकतर पार्षद विरोध मेंही रहे। </p>
<p><strong>निगम कार्यालय में निर्माण के नाम पर लाखों खर्च</strong><br />इधर सरकार बदलने के बाद से ही नव’योति कहता रहा हैकि कोटा में फिर से एक नगर निगम होसकते है। वार्डोंकी संख्या भी 150 से घटकर 100 हो सकती है। दक्षिण निगम विधायक से लेकर स्वायत्त शासन मंत्री तक कोटा में फिर से एकनगर निगम होने कीसंभावना जता चुके है। उसके बाद भी नगर निगम के अधिकारी निगम कार्यालय में कक्ष निर्माण पर लाखों  रुपए अनावश्यक रूप से खर्च कर रहे है।  जबकि कुछ समय बाद एक निगम होने  इस खर्च की गई राशि का सही उपयोग नहीं हो पाएगा। कोटा दक्षिण के कांग्रेस पार्षद इस पर आपत्ती भी जता चुके है। </p>
<p><strong>लोगों का कहना, एक हो निगम</strong><br />इधर शहर वासिया ेंका कहना है कि कोटा अभी इतना बड़ा शहर नहीं है कि यहां दो नगर निगम बनाए जाएं। महाराष्ट्र जैसीजगह पर एक ही मुंसीपल कॉरपोर२शन है। कुन्हाड़ी निवासी कमल जैन ने कहा कि दो नगर निगम बनाने का जो फायदा जनता को होना चाहिए था वह नहींहुआ। न तो सफाई सुधरीऔर न ही जनता के काम हुए। शहर का विकास तो तत्कालीन मंत्री के विजन के कारण हुआ। नगर निगम ने कुछ नहीं किया। ऐसे में कोटा में एक ही नगर निगम बननाा चाहिए। नयापुरा निवासी महेश नागर का कहना है कि दो निगम बनने से वार्ड तो छोटे कर दिए।लेकिन सफाई व्यवस्था में अपेक्षा के अनुरूप सुधार नहींहुआ। स्टाफ की कमी होने से निगम में काम समय पर नहीं हो पाए। ऐसे में एक निगम होने पर सम से कम जनता को पता तो रहेगा कि उनका काम कहां होगा। कैथूनीपोल निवासी महेश जोशी ने बताया कि  वे कोटा उत्तर में आते है। लेकिन उनके परिवार  में बच्चे का जन्म तलवंडी स्थित अस्पताल म ेंहुआ तो वे जन्म प्रमाण पत्र बनवाने निगम गए। वहां जाने पर पता चला कि अस्पताल दक्षिण में होन ेसे जन्म प्रमाण पत्र वहीं बनेगा। इस तरह की कई परेशानिया ंजनता ने भुगती है। एक निगम होने से लोगा ेंको फायदा होगा। </p>
<p><strong>प्रस्तावित जमीन का मामला अटका</strong><br />पिछली सरकार में कोटा उत्तर निगम के नए भवन के लिएपुरानी सब्जीमंडी में जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया था। उसके लिए 50करोड़ का बजट भी तय किया गया थ।लेकिन सरकार बदलने के बाद न बजट मिलाऔर न ही उस जगह का अभी तक कुछ हुआ। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा में एक हीनगर निगम होना चाहिए। राय मेंसरकार आने के बाद सेही उस पर काम भी किया जा रहा है।अगला चुनाव एक हीननगर निगम के हिसाब सेहोगा। दो निगम बनने से लोगोंकोफायदा नहींहुआ। निगम मेंस्टाफ तक तो बढ़ा नहीं। <br /><strong>-विवेक राजवंशी, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>कोटा में फिर से एक हीनगर निगम होना चाहिए। उत्तर दक्षिण निगम के चक्कर में न तो शहर में विकास हो सका और न ही वार्डो में काम।ऐसे में एक निगम होने से ही जनता कोलाभ होगा। पूर्व  में राजनीतिक लाभ के लिए दो निगम बनाए गए थे।<br /><strong>-लव शर्मा, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम कोटाउत्तर </strong></p>
<p><strong> कोटा में नगर निगम एक होगी या दो ही रहेगी। इस बारे में</strong>  निर्णय उच्च स्तर पर हीहोगा। यह मामला राज्य सरकार के स्तर का है।इस बारे में जो भीनिर्णय होगा उसकेअनुसार कार्य किया जाएगा। जब तक कोई निर्णय नहीं होजाता तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।<br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>
<p><strong>अधिकारियों ने नहीं किया सहयोग</strong><br />पिछली कांग्रेस सरकार में अच्छी सोच के साथ दो निगम बनाए गए थे। वार्ड छोटे होने से जनता की पार्षदों तक पहुंच आसान हो गई थी।  तत्कालीन मंत्री शांति धारीवाल ने शहर और वार्डों में विकास कार्य करवाए। लेकिन निगम अधिकारियों का सहयोग नहीं मिलने से जनता के काम जिस तरह से होने चाहिए थे वैसे नहीं हुए। अब एक निगम होने का मामला रा’य स्तर का है। <br /><strong>-देवेश तिवारी, अध्यक्ष, वित्त समिति कोटा दक्षिण</strong><br /> <br />दो नगर निगम  बनाने केपीछे तत्कालीन मंत्री  शांति धारीवाल का विजन था। जनता कोअधिक से अधिक राहत देने का प्रयास किया। सभी वार्डों मेंसमान रूप से काम करवाए। बरसों से  मालिकाना हक का इंतजार करने वालोंको पट्टे दिए। लेकिन सरकार बदलने के बाद न तो सरकार के स्तर पर और न ही निगम अधिकारियोंके स्तर पर जनता के कोईकाम हुए। एक साल से कांग्रेस पार्षदों तक कीसुनवाई नहीं हो रही।एक निगम बनाने का मामला उच्च स्तर  पर और रा’य सरकार का है। इस बारे में अंतिम निर्णय नहींहोने तक कुछ भी नहींकहा जा सकता। <br /><strong>-इसरार मोहम्मद, अध्यक्ष, निर्माण समिति, कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Nov 2024 15:54:30 +0530</pubDate>
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                <title>घरों से निकलने वाले कचरे पर लगेगा शुल्क</title>
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                        <![CDATA[ शहर में साफ सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। गली मोहल्ले, वार्ड, मेन रोड से लेकर नालियों तक की सफाई नगर निगम करवाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fees-will-be-levied-on-the-garbage-coming-out-of-houses/article-88085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6633-copy14.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की ओर से अभी तक नि:शुल्क दी जा रही घर-घर कचरा संग्रहण सुविधा शीघ्र ही बंद होने वाली है। अब निगम इस सुविधा के बदले हर घर से शुल्क वसूल करेगा। यह शुल्क मकान की साइज के हिसाब से लिया जाएगा। इसके लिए नगर निगम कोटा उत्तर से सर्वे भी शुरू कर दिया है। शहर में साफ सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है। गली मोहल्ले, वार्ड, मेन रोड से लेकर नालियों तक की सफाई नगर निगम करवाता है। साथ ही पिछले कई सालों से नगर निगम ने घर-घर कचरा संग्रहण सुविधा शुरू की हुई है। जिसके तहत निगम के टिपर आते हैं और हर घर से कचरा एकत्र कर ले जाते हैं। जिसेस वे ट्रांसफर स्टेशन पर डालते हैं। वहां से निगम द्वारा पविहन कर उस कचरे को नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जाता है। अभी तक निगम द्वारा घरों से कचरा एकत्र करने का कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। लेकिन अब लोगों को इसके लिए शुल्क देना होगा।  दो से तीन  टिपर हर वार्ड में लगे हैं कोटा में वर्तमान  में कोटा उत्तर व दक्षिण दो नगर निगम हैं। जिनमें वार्डों की संख्या 150 है। कोटा उत्तर में 70 व कोटा दक्षिण में 80 वार्ड है। इनमें से हर वार्ड में दो से तीन टिपर लगे हुए हैं। एक निगम में संवेदक के माध्यम से तो दूसरे निगम में गैराज के माध्यम से टिपरों का संचालन कर घर-घर व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से कचरा एकत्र किया जा रहा है। पहले सुबह-शाम दोनों समय टिपर आते थे। लेकिन वर्तमान में एक ही समय सुबह के समय टिपर आ रहे हैं। निगम से प्राप्तब जानकारी के अनुसार शहर से रोजाना 450 से 500 टन कचरा निकल रहा है। जिसे ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। </p>
<p><strong>दो सेक्टर के 21 हजार घरों का हुआ सर्वे</strong><br />घर-घर कचरा संग्रहण के लिए लोगों से शुल्क वसूली की नगर निगम ने तैयारी शुरु कर दी है। कोटा उत्तर निगम ने निजी फर्म के माध्यम से घरों व प्रतिष्ठानों का सर्वे करवाना शुरु कर दिया है। अभी तक कोटा उत्तर के 7 सेक्टर के 70 वार्डों में से दो सेक्टर 2 व 7 का सर्वे हो चुका है। स्टेशन क्षेत्र के 9 और डीसीएम क्षेत्र के 12 वार्डों में सर्वे का काम लगभग पूरा होने वाला है। अब तक स्टेशन क्षेत्र में 6 हजार और डीसीएम क्षेत्र के 15 हजार घरों व दुकानों का सर्वे हो चुका है। </p>
<p><strong>यह जानकारी जुटाई जा रही</strong><br />सर्वे के माध्यम से लोगों से उनके मकान की साइज की जानकारी ली जा रही है। मकान मालिक का नाम और पता व आधार कार्ड की कॉपी ली जा रही है। साथ ही रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर की जानकारी ली जा रही है। जिस पर मैसेज किया जा सकेगा।  </p>
<p><strong>20 रुपए से 150 रुपए प्रतिमाह तक शुल्क</strong><br />नगर निगम कीओर से मकान की साइज के हिसाब से कचरा डालने का शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क 20 रुपए से 150 रुपए महीना होगा।  नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार 50 वर्ग मीटर तक के मकान से 20 रुपए महीना,50 वर्ग मीटर से अधिक व 300 वर्ग मीटर तक के मकान से 80 रुपए महीना, 300 वर्ग मीटर से अधिक के मकान से 150 रुपए महीना शुल्क वसूला जाएगा। </p>
<p><strong>व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से लेंगे 250 से 5 हजार तक</strong><br />मकानों के अलावा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, हॉस्टल, रेस्टोरेंट तक से 250 से 5 हजार रुपए महीना तक शुल्क वसूला जाएगा। जानकारी के अनुसार  दुकान, ढाबा, मिठाई की दुकान व कॉफी हाउस से 250 रुपए महीना,गेस्ट हाउस से 750 रुपए,सरकारी हॉस्टलों से 500 रुपए,प्राइवेट हॉस्टलों से 1 हजार रुपए महीना,रेस्टोरेंट से 750 रुपए, होटल रेस्टोरेंट से 1 हजार रुपए महीना,होटल रेस्टोरेंट(3 स्टार तक) 1500 रुपए,होटल रेस्टोरेंट(3 स्टार से अधिक) 3 हजार रुपए,सरकारी कार्यालय, बैंक, बीमा,निजी के अलावा कोचिंग क्लासेस व शैक्षणिक संस्थानों से 700 रुपए,निजी शैक्षणिक संस्थान से 1 हजार रुपए, व निजी कोचिंग संस्थान से 5 हजार रुपए महीना तक शुल्क वसूल किया जाएगा। </p>
<p><strong>कोचिंग से लेकर शादी हॉल तक से  होगी वसूली</strong><br />इसी तरह से निजी कोचिंग क्लासेस से 1 हजार रुपए,क्लीनिक 1 हजार रुपए,डिस्पेंसरी, लेबेरेटरीज 50 बैड तक 2 हजार रुपए,क् लीनिक डिस्पेंसरी ुलेबोरेटरीज 50 बैड से अधिक 4 हजार रुपए,, लघु व कुटीर उद्योग वर्कशॉप(केवल गैर खतरनाक और 10 किलो प्रतिदिन अपशिष्ट वालों से 750 रुपए,गोदाम, कोल्ड स्टोरेज से 1500 रुपए,शादी हॉल, उत्सव हॉल व मेला 3 हजार वर्ग मीटर तक से 2 हजार रुपए,शादी व उत्सव हॉल 3 हजार वर्ग मीटर से अधिक वालों से 5 हजार रुपए तक शुल्क वसूल किया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर को साफ रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। केवल नगर निगम के भरोसे शहर को साफ रखना संभव नहीं है। सफाई के मामले में तुलना तो इंदौर से की जाती है लेकिन वहां की तरह के न तो लोग हैं और न ही व्यवस्थाएंÞ। नगर निगम को व्यवस्थाएं करने में संसाधन जुटाने के लिए खर्चा करना पड़ता है। सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता कम की जा रही है। शहर में कचरा लोग ही फेला रहे हैं। शहर को गंदा कर रहे हैं। ऐसे में यदि सुविधा चाहिए तो उसके बदले में शुललक तो देना ही होगा। यह नगर निगम अपनी तरफ से नहीं ले रहा पूर्व में ही सरकार ने तय किया हुआ है। मकान व प्रतिष्ठान की साइज व व्यवस्था के हिसाब से कचरे का शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने सर्वे शुरु कर दिया है। अब तक दो सेक्टरों के 21 वार्डों और करीब करीब 21 हजार घरों का सर्वे हो चुका है। सर्वे का काम शहर के सभी 7 सेक्टर व 70 वार्डों में  किया जाना है। यह काम अगले दो माह में पूरा होने की संभावना है। इसी दौरान निगम की ओर से सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। दीपावली के बाद सुविधाएं पूरी होने पर शुल्क वसूल किया जा सकता है। <br /><strong>-तनुज शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Aug 2024 17:36:17 +0530</pubDate>
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                <title>सिटी पैलेस में पारंपरिक भारतीय कलाओं की बारीकियों से रु-ब-रु हो रहे शहर के युवा</title>
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                        <![CDATA[महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय एवं ट्रस्ट के निदेशक वैभव चौहान ने बताया कि यह शिविर पारंपरिक कला व संस्कृति को बढ़ावा देने की जयपुर राज परिवार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि यह गत 26 वर्षों से इस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-youth-of-the-city-are-getting-acquainted-with-the/article-80434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सिटी पैलेस में आयोजित एक माह के सांस्कृतिक विरासत प्रशिक्षण शिविर में शहर के युवा पारंपरिक भारतीय कलाओं की बारीकियों से रु-ब-रु हो रहे हैं। इस शिविर का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत की संस्कृति, समृद्ध कला व शिल्प से परिचित कराना है। शिविर का आयोजन महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय ट्रस्ट द्वारा पारंपरिक कलाओं की प्रतिनिधि संस्था 'रंगरीत' तथा 'सरस्वती कला केन्द्र' के सहयोग से किया जा रहा है।</p>
<p>महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय एवं ट्रस्ट के निदेशक वैभव चौहान ने बताया कि यह शिविर पारंपरिक कला व संस्कृति को बढ़ावा देने की जयपुर राज परिवार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि यह गत 26 वर्षों से इस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष पहली बार प्रतिभागियों को प्रशिक्षक ब्रजमोहन खत्री द्वारा वैदिक ज्योतिष से भी परिचित कराया जा रहा है। प्रशिक्षण शिविर का समन्वय रामू रामदेव कर रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jun 2024 15:29:15 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा को सुंदर बनाने वाले पेड़ गिन रहे अंतिम सांसें</title>
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                        <![CDATA[वहीं यूआईटी की ओर से इतनी भीषण गर्मी होने के बावजू भी इन पौधों में पानी की सिंचाई नहीं की जा रही है। जो समस्या को ओर बढ़ा रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trees-that-make-kota-beautiful-are-counting-their-last-breaths/article-79526"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/kota-ko-sunder-banane-wala-ped-gin-rahe-antim-sansen...kota-news-27.05.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के सौंदर्यकरण के दौरान चौराहों को विकसित करने के साथ ही शहर के लगभग सभी मार्गों पर बने डिवाइडरों पर पौधे लगाए गए थे। जिनका उद्देश्य शहर की हरियाली को बढ़ाने का था। लेकिन दो साल पहले लगाए गए हजारों पौधों में से शहर के अधिकतर पौधे अब सूख चुके हैं, जो बाकि बचे हैं वो भी धीरे धीरे सूख रहे हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कोटा की सड़कों के सभी डिवाइडरों पर हरियाली की गई थी। जिस दौरान देश विदेश से कई प्रकार के पौधे मंगाकर लगाए गए थे। वहीं यूआईटी की ओर से इतनी भीषण गर्मी होने के बावजू भी इन पौधों में पानी की सिंचाई नहीं की जा रही है। जो समस्या को ओर बढ़ा रहा है।</p>
<p><strong>बूंदी रोड से अनंतपुरा चौराहा तक सूखे पौधे</strong><br />शहर में बूंदी रोड से नयापुरा चौराहे तक डिवाइडरों पर लगे लगभग सारे पौधे सूख चुके हैं। जिनमें छोटे से लेकर बड़े पौधे तक शामिल हैं। साल 2022 में यूआईटी की ओर से शहर के सभी डिवाइडरों पर लगे छोटे और पूराने पौधों को हटाकर उनके स्थान पर नए पौधे लगाने की योजना बनाई थी जिसके तहत शहर में अलग अलग किस्म के करीब 2 लाख पौधे लगाए गए थे। लेकिन वर्तमान में इन सभी पौधों की हालत बिल्कुल खराब हो चुकी है। साथ ही कई पौधे तो मर चुके हैं। यही हालात बारां रोड के जहां भी डिवाइडरों में पहले पौधे लग नहीं पाए और अब लगने के बाद उनमें पर्याप्त पानी नहीं डालने से वो भी सूख रहे हैं।</p>
<p><strong>चौराहों पर लगाए पेड़ भी सूखे</strong><br />डिवाइडरों पर पौधे लगाने के साथ यूआईटी की ओर से शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर पाम के पेड़ लगाए गए थे। जिसमें सबसे ज्यादा एयरोड्रॉम चौराहे और अनंतपुरा पुलिस थाने के सामने और अभय कमांड सेंटर के सामने लगाए गए थे। जहां इन स्थानों पर अब पेड़ों का बस सूखा तना नजर आ रहा है, पेड़ बिल्कुल गायब हो चुके हैं। इसी तरह एयरोड्रॉम सर्किल पर भी सारे पेड़ सुख चुके हैं। चौराहे से डीसीएम की ओर जाने वाले मार्ग पर यूआईटी ने पौधों की सुरक्षा के लिए जाली भी लगाई हुई है लेकिन पौधा एक भी नहीं बचा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पौधों के सूखने का मुख्य कारण भीषण गर्मी है, वर्तमान में जल समस्या के कारण पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है। अन्यथा सिंचाई पर्याप्त रूप से होती है वहीं जिन भी इलाकों में समस्या है वहां ठेकेदार को पानी की सिंचाई करने के निर्देशित करेंगे। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव, यूआईटी, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 16:46:08 +0530</pubDate>
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                <title>बूंदी की खूबसूरती को दाग लगा रहे शहर के कचरा डिपो</title>
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                        <![CDATA[जहां स्थित ऐतिहासिक व पर्यटन महत्व के स्थान या तो कचरे से अटे पड़े हैं या फिर अतिक्रमण के शिकार होकर बदरंग हो रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/garbage-depots-of-the-city-are-tarnishing-the-beauty-of-bundi/article-69693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/bundi-ki-khbsurti-ko-daag-laga-rahe-sahar-ke-kachara-dipo....bundi-news-10-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>बून्दी। नवल सागर ,बूंदी पर फ्रेंच पर्यटकों का बड़ा समूह बस से उतरा, तो सुखा नवल सागर भी इतना पसंद आया कि वाउ वाउ करते हुए फोटू उतारने लगे। जैसे ही आगे बढ़े तो नवलवसागर पार्क, नौलखाश्रम के मार्ग और हाटकेश्वर भवन के द्वार पर नगर परिषद के कचरा डिपो और उस पर बैठे सूअर नजर आए तो उनकी फोटो उतारने लगे। मैंने अतीत पर गर्व करना भी शुरू नही किया था कि वर्तमान ने शर्मिंदा कर दिया। ऐसा लिखते हुए स्थानीय निवासी  पीयूष पाचक ने इन फोटोज को जैसे ही अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर शेयर किया। कमोबेश ऐसे हालात रानी जी की बावड़ी, धाबाई जी का कुंड, रावला का चौक, नागर सागर कुंड, मीरा गेट, लंकागेट, खोजागेट सहित कई मुख्य स्थानों पर देखने को मिलते हैं। जहां स्थित ऐतिहासिक व पर्यटन महत्व के स्थान या तो कचरे से अटे पड़े हैं या फिर अतिक्रमण के शिकार होकर बदरंग हो रहे हैं। और अपनी ऐतिहासिकता खोते जा रहे हैं। एक ओर जहां प्रधानमंत्री मोदी स्वच्छता अभियान के द्वारा पूरे देश को स्वच्छता का संदेश दे रहें हैं, वहीं दूसरी ओर अपने पूरे लवाजमे के साथ नगर परिषद शहर को स्वच्छ रखने का दम भर रही हैं। नगर परिषद् द्वारा सफाई के किए जा रहे दावों की पोल जगह जगह खुले में बने कचरा डिपो खोल रहे है, जहां से कचरे का उठाव भी समय पर नहीं हो रहा है। </p>
<p><strong>स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ा बूंदी</strong><br />पूर्व सभापति के समय बूंदी जिले को पहले पायदान पर रहते हुए स्वच्छता का गौरव हासिल हुआ था। उसके बाद से लगातार बूंदी स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ा जा रहा है। इस बार जारी रैंकिंग में बूंदी को प्रदेश में जहां 29 वीं रैंक हासिल हुई है। जिला कलक्टर के बेहतरीन बूंदी अभियान का भी नहीं दिखा असर बूंदी को क्लीन सिटी बनाने को लेकर पूर्व जिला कलेक्टर डॉ रविंद्र गोस्वामी द्वारा शुरू किया गया बेहतरीन बूंदी अभियान भी केवल खानापूर्ति साबित हुआ। </p>
<p><strong>पर्यटन व ऐतिहासिक स्थलों के पास वाले हटवा रहे हैं कचरा डिपो</strong><br />स्थानीय पार्षद मनीष सिसोदिया ने बताया कि स्थानीय लोगों के विरोध के बाद नवल सागर पार्क के पास खुला कचरा डिपो बंद किया जा चुका हैं, फिर भी मना करने के बावजूद सफाई कर्मी जबरन वहां पर कचरा डाल रहे हैं। वहीं मोती महल के दरवाजे पर बना कचरा डिपो भी बंद हो चुका हैं। </p>
<p>कचरा गाड़ी व्यवस्था बहुत खराब है, इसमें लगे लोगों को बदलना या उनकी ट्रैनिंग की आवश्यकता है। आजकल दो तीन दिन में गाड़ी आ रही है। जानकारी मिली है कि डीजल ढ़़लाने के पैसे नहीं है नगरपरिषद के पास। ये गाड़ी वाले मिशन की तरह काम नहीं करते आफत समझकर काम करते हैं। <br /><strong>- अनुराग शर्मा, अधिवक्ता</strong></p>
<p>भारत भ्रमण पर आने वाले पर्यटक के मन में प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत विजन की सोच बनी रहती हैं। लेकिन जब वह पर्यटक स्थल के आस पास व अपने डेस्टिनेशन पर ऐसी हालत देखता है, तो निश्चित ही वह नकारात्मक छवि लेकर जाता हैं। प्रशासन को चाहिए कि वे पर्यटन स्थलों के आसपास खुले कचरा डिपो को हटाने का प्रयास करें।<br /><strong>- वंशवर्धन सिंह, पूर्व राजपरिवार के सदस्य </strong></p>
<p>नगर परिषद प्रशासन द्वारा जिला कलक्टर साहब के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गंदगी अतिक्रमण को लेकर हो रही कार्यवाही में सिर्फ दिखावा और खाना पूर्ति के कारण पूरे शहर की यही दुर्दशा हो रही है।<br /><strong>- कालू कटारा, समाजसेवी</strong></p>
<p>बालचंद पाड़ा व नाहर का चौहट्टा क्षेत्र पर्यटन के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां गढ़ पैलेस सहित, चित्रशाला, मोतीमहल, नवल सागर झील, गजलक्ष्मी मंदिर, आराध्य भगवान रंगनाथ , भगवान लक्ष्मी नाथ के मंदिर के साथ बाबा मीरा साहब का चिल्ला भी स्थित हैं। इस क्षेत्र में खुले कचरा डिपो को बंद करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मोती महल के दरवाजे पर बना कचरा डिपो भी बंद हो चुका हैं।  वहीं नवल सागर पार्क के पास खुला कचरा डिपो बंद किया जा चुका हैं, फिर भी मना करने के बावजूद सफाई कर्मी जबरन वहां पर कचरा डाल रहे हैं।<br /><strong>- मनीष सिसोदिया, स्थानीय पार्षद </strong></p>
<p>पर्यटन स्थलों के पास बने खुले कचरा डिपो के कारण बून्दी के पर्यटन पर गलत प्रभाव पड़ रहा हैं। इससे पर्यटकों के बीच गलत छवि बन रही हैं।<br /><strong>- प्रेम शंकर सैनी, सहायक पर्यटन अधिकारी, बून्दी</strong></p>
<p>शहर की सफाई व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए निरन्तर प्रयासरत हैं। खुले में बने कचरा डिपो के स्थान पर कचरा पात्र रखवाए जाएंगे, जिसके लिए टेंडर का प्रोसेज प्रक्रिया में हैं। वहीं टिपर वाहन में जीपीएस भी लगवाए जा रहे हैं, ताकि कचरे के उठाव व परिवहन की मॉनिटरिंग भी हो सकें।<br /><strong>- डॉ. राकेश मीणा, कार्यवाहक आयुक्त, नगर परिषद, बून्दी</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Feb 2024 17:33:16 +0530</pubDate>
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                <title>जनता की सुविधाओं पर चोरों का प्रहार</title>
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                        <![CDATA[नगर विकास न्यास की ओर से शहर में  सड़क किनारे व फुटपाथ पर लोगों के बैठने के लिए लकड़ी की बैंचें लगाई गई थी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thieves-attack-public-facilities/article-69327"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(4)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम व नगर विकास न्यास शहर में जनता  के लिए सुविधाएं दे रहा है। वहीं चोर और नशा करने वालों के अलावा कुछ असामाजिक तत्व उन सुविधाओं पर प्रहार कर उन्हें नष्ट करने में लगे हैं। नगर विकास न्यास की ओर से शहर में  सड़क किनारे व फुटपाथ पर लोगों के बैठने के लिए लकड़ी की बैंचें लगाई गई थी। जिनमें सहारे का आधा हिस्सा खुला रखा गया था। ऐसे में लोग बैंच पर दोनों तरफ से बैठक सकते हैं। लोहे की एंगल से गाढ़कर मजबूत लकड़ी की बैंचे लगाई गई थी। जिससे वे सुंदर भी लग रही थी। नगर विकास न्यास ने शहर में जगह-जगह पर करीब 100 से अधिक ऐसी बैंचें लगाई थी। जिन पर लाखों रुपए खर्च किए गए थे। लेकिन हालत यह है कि कुछ ही दिन में लोगों ने इनकी दुर्दशा करना शुरू कर दिया है। </p>
<p>सर्किल हाउस रोड पेट्रोल पम्प के पास से होते हुए कृषि विभाग के ऑडिटोरियम के सामने से छात्रावास और राजकीय महाविद्यालय के सामने से अंटाघर चौराहे तक थोड़ी-थोड़ी दूरी पर ये बैंचे लगाई गई थी। जिससे राहत चलते लोगों को जरूरत पड़ने पर वे बैठक सके। अंखाघर के बाद आकाशवाणी कॉलोनी के कोने से लेकर किशोर सागर तालाब के किनारे समेत शहर  में अन्य स्थानों पर इस तरह की बैंचे लगाई गई थी। जिससे सुबह के समय सैर के दौरान भी लोग थक हार कर कुछ समय इन बैंचों पर बैठ सके। इनसे पहले यहां बैठने की कोई सुविधा नहीं थी। लेकिन हालत यह है कि सर्किट हाउस रोड से अंटाघर के बीच करीब आधा दर्जन से अधिक बैंचों को तोड़ं दिया गया। कुछ के पीछे का हिस्सा गायब है तो किसी का बैठने का हिस्सा तोड़ दिया। किसी के लोहे की एंगल गायब कर दी तो किसी का आधा हिस्सा तोड़ दिया। इसी तरह की हालत किशोर सागर तालाब के किनारे लगी बैंचों की हो रही है। जिससे लोग अब इन टूटी बैंचों पर सही ढंग से बैठ तक नहीं पा रहे हैं। </p>
<p><strong>नशेड़ियों का काम</strong><br />जानकारों का कहना है कि यह काम चोरों से ज्यादा नशा करने वालों का है। वे अपनी एक पुडिया के लिए शहर की सुंदरता को बिगाड़ रहे हैं। लेकिन ये रात के समय इतनी सावधानी से इस काम को कर रहे हैं जिससे ये पकड़ में भी नहीं आते।</p>
<p><strong>लोहे का डस्टबीन तक आधा गायब</strong><br />किशोर सागर तालाब के किनारे मेन रोड की तरफ न्यास ने आकर्षक दिखने वाले लोहे के मजबूत डस्टबीन लगाए थे। ऐसे डस्टबीन शहर में करीब 40 से अधिक लगाए गए थे। लेकिन हालत यह है कि चोर व नशा करने वाले उस डस्टबीन तक के आधे हिस्से को काटकर ले गए। जिससे यह किसी का का नहीं रहा। इसमें कचरा डालने पर वह नीचे गिर रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Feb 2024 19:05:53 +0530</pubDate>
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