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                <title>Ecosystem - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान के वेटलैंड्स पर हाईकोर्ट सख्त, 46 हजार से अधिक आर्द्रभूमियों की हालत पर लिया स्वत: संज्ञान </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने वेटलैंड्स को 'प्रकृति की किडनी' बताते हुए उनके संरक्षण के लिए ऐतिहासिक स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रदूषण और अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए सरकार से प्रदेश के 46,748 वेटलैंड्स की जीआईएस मैपिंग और जिला-वार वर्तमान स्थिति की पूरी रिपोर्ट तलब की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/high-court-strict-on-rajasthans-wetlands-took-suo-motu-cognizance/article-156234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक पहल करते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वेटलैंड्स केवल जलभराव क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण, जैव विविधता, भूजल संरक्षण और जलवायु संतुलन की आधारशिला हैं। इनकी उपेक्षा आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। हाईकोर्ट की अवकाश खंडपीठ में न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश रेखा बोराणा ने आदेश में कहा , वेटलैंड्स को प्रकृति की किडनी कहा जाता है क्योंकि वे भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण, कार्बन अवशोषण और जैव विविधता संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। </p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में लगभग 46,748 वेटलैंड यूनिट्स मौजूद हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम को ही वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार अनेक वेटलैंड्स प्रदूषण, अतिक्रमण, सीवरेज के पानी, ठोस कचरे के निस्तारण और सिकुड़ते जल क्षेत्र जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाईकोर्ट ने माना कि यह समस्या केवल कुछ जलाशयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में वेटलैंड्स की पहचान, अधिसूचना, संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इससे जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों के आवास, भूजल स्तर और जल सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।  हाईकोर्ट ने सरकार से जिला-वार वेटलैंड्स की सूची, उनकी वर्तमान स्थिति, अधिसूचित और गैर-अधिसूचित वेटलैंड्स का विवरण, जीआईएस मैपिंग, सीमांकन, अतिक्रमण, प्रदूषण, सीवरेज प्रवाह और संरक्षण योजनाओं की जानकारी मांगी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/high-court-strict-on-rajasthans-wetlands-took-suo-motu-cognizance/article-156234</link>
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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:54:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मोदी ने भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों पर डाला प्रकाश, कहा- 'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत की समृद्ध जैव विविधता पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयासों से चीता, हिम तेंदुआ और स्लॉथ बीयर जैसी प्रजातियों का पुनरुद्धार हुआ है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रतिवर्ष 1.19 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र जुड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/world-environment-day-prime-minister-modi-threw-light-on-indias/article-156050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की समृद्ध जैविक विविधता का उल्लेख करते हुए वन्यजीव संरक्षण एवं वन विस्तार में देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और कहा कि निरंतर प्रयासों ने देश भर में कमजोर प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में मदद की है। पीएम मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत अपनी विशाल जैव विविधता और विविध पारिस्थितिक तंत्रों पर गर्व करता है जो असंख्य प्रजातियों के साथ-साथ लाखों आजीविका का समर्थन करते हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत में हमें अपनी जैविक विविधता पर बहुत गर्व है। हमारे विविध पारिस्थितिकी तंत्र अनगिनत प्रजातियों और आजीविका का समर्थन करते हैं।" सरकार की संरक्षण पहलों का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने लुप्तप्राय और कमजोर वन्यजीव प्रजातियों की रक्षा के उद्देश्य से विशेष पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों की सफलता की बात की । उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुओं, स्लॉथ बीयर और चीतों के संरक्षण प्रयासों ने प्रदर्शित किया है कि दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वन्यजीव आबादी और पारिस्थितिक आवासों के पुनरुद्धार में कैसे योगदान दे सकती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "विशेष पुनर्प्राप्ति में हमारे प्रयास भी उल्लेखनीय रहे हैं। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, हिम तेंदुए, स्लॉथ बीयर और चीता के संरक्षण प्रयासों ने इस बात की झलक दी है कि निरंतर प्रतिबद्धता वन्यजीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने में कैसे मदद कर सकती है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने पिछले साल शुरू किए गए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के प्रभाव का भी हवाला दिया, जो नागरिकों को अपनी माताओं के सम्मान में पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस पहल ने देश के हरित क्षेत्र को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, "'एक पेड़ मां के नाम' जैसी पहल ने हर साल लगभग 1.19 लाख हेक्टेयर जंगल जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।" यह टिप्पणी तब आई जब भारत ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया है। पिछले एक दशक में, सरकार ने वन क्षेत्र को बढ़ाने, लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा करने और ख़राब पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।</p>
<p>प्रमुख संरक्षण पहलों में से एक प्रोजेक्ट चीता है, जिसके तहत सात दशक से भी अधिक समय पहले देश में प्रजाति विलुप्त होने के बाद अफ्रीकी चीतों को भारत में फिर से लाया गया था। गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की सुरक्षा के प्रयासों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जबकि हिमालयी क्षेत्र में हिम तेंदुओं और मध्य भारत में स्लॉथ बीयर के संरक्षण उपायों को आवास संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से तेज किया गया है। प्रधानमंत्री का संदेश विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करने वाले पोस्ट और पहल की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जो जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 5 जून को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 17:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री आवास पर युवाओं की साइकिल रैली, पीएम मोदी के ईंधन बचत संदेश को दिया समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[ईंधन बचत और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए रविवार को युवाओं ने साइकिल रैली निकाली और मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं से संवाद कर रोजगार, स्टार्टअप और कौशल विकास पर चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ऊर्जा संरक्षण संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cycle-rally-of-youth-at-chief-ministers-residence-supported-pm/article-155557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cycle.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को बड़ी संख्या में युवा साइकिल चलाकर मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। युवाओं ने साइकिल यात्रा के माध्यम से न केवल स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया, बल्कि पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। मुख्यमंत्री आवास पहुंचने पर युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं से संवाद किया और उनकी आकांक्षाओं, सुझावों तथा राज्य के विकास में उनकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने युवाओं से रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास, स्टार्टअप और नवाचार जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।</p>
<p>संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा युवाओं के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए कौशल विकास, उद्यमिता प्रोत्साहन, स्टार्टअप सहायता और विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं को गति देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि साइकिल का उपयोग न केवल ईंधन की बचत करता है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। युवाओं द्वारा साइकिल के माध्यम से दिया गया यह संदेश समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।</p>
<p>युवाओं ने भी राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों के प्रति अपनी जिज्ञासाएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। मुख्यमंत्री ने उनके सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए युवाओं को प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री आवास परिसर में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। युवाओं ने साइकिल रैली के माध्यम से स्वच्छ पर्यावरण, ऊर्जा संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देते हुए प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान को और अधिक मजबूती प्रदान की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 15:32:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्कैपिया ने जनरल कैटलिस्ट के नेतृत्व में जुटाए 63 मिलियन डॉलर, पीक एक्सवी पार्टनर्स और ज़ेड-47 ने भी दोहराया भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रैवल-फिनटेक प्लेटफॉर्म स्कैपिया ने जनरल कैटलिस्ट, पीक एक्सवी और ज़ेड-47 से $63 मिलियन का निवेश हासिल किया है। इस पूंजी का उपयोग भारत भर में ग्राहक आधार बढ़ाने और एआई-फर्स्ट उत्पाद विकास के लिए किया जाएगा। स्कैपिया फेडरल बैंक और बीओबी कार्ड के साथ मिलकर डुअल-नेटवर्क क्रेडिट कार्ड और 'स्कैपिया पे' जैसी सुविधाएं दे रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/scapia-raised-63-million-led-by-general-catalyst-peak-xv/article-154982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-600-px5.png" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। भारत की अग्रणी ट्रैवल-फिनटेक कंपनियों में से एक, स्कैपिया ने जनरल कैटलिस्ट के नेतृत्व में 63 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग हासिल की है। इस निवेश दौर में मौजूदा निवेशकों पीक एक्सवी पार्टनर्स और ज़ेड—47 ने भी अपनी निरंतर भागीदारी बनाए रखी। इस पूंजी के जरिए स्कैपिया देशभर में अपने ग्राहक आधार का विस्तार करेगी और उत्पाद विकास व टीम निर्माण के अपने एआई-फर्स्ट दृष्टिकोण को और मजबूत बनाएगी।</p>
<p>स्कैपिया के फ़ाउंडर और सीईओ, अनिल गोटेटी, ने कहा, “हम जनरल कैटलिस्ट का भागीदार के रूप में स्वागत करते हुए बेहद उत्साहित हैं। साथ ही, पीक एक्सवी और ज़ेड—47 का लगातार समर्थन हमारे विज़न, उत्पाद और अब तक की यात्रा में उनके मजबूत विश्वास को दर्शाता है। आज स्कैपिया केवल एक वित्तीय उत्पाद नहीं, बल्कि एक व्यापक ट्रैवल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हो चुका है, जिसे उस नई भारतीय पीढ़ी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो यात्रा को अपनी जीवनशैली का अहम हिस्सा मानती है। यह निवेश हमें अपने उत्पाद पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने, ग्राहकों को बेहतर अनुभव और अधिक मूल्य देने, ब्रांड की पहुँच बढ़ाने और बेहतरीन प्रतिभाओं को साथ जोड़ने में मदद करेगा। साथ ही, हम एक मजबूत एआई-फर्स्ट संस्कृति और उत्पाद सोच विकसित करने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य ऐसे उत्पाद तैयार करना है, जो लोगों को अधिक यात्रा करने और बेहतर जीवन अनुभव जीने के लिए प्रेरित करें।”</p>
<p>स्कैपिया ने युवा और यात्रा पसंद करने वाले भारतीय उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक ऐसा वित्तीय प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो यात्रा की खोज, योजना, बुकिंग और पूरे अनुभव को अधिक सहज, सरल और एकीकृत बनाता है। कंपनी उन दो प्रमुख रुझानों के केंद्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही है, जिनमें युवाओं के बीच तेजी से बढ़ता यात्रा उत्साह और डिजिटल वित्तीय सेवाओं को बढ़ता अपनाव शामिल है। पिछले वर्ष की तुलना में प्लेटफॉर्म पर फ्लाइट बुकिंग में 5 से 6 गुना और स्टे बुकिंग में 8 गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाली बुकिंग में भी लगातार उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p>इस फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा पूरे भारत में स्कैपिया ब्रांड को मजबूत बनाने और एक विश्वस्तरीय एआई-आधारित संगठन तैयार करने में निवेश किया जाएगा। भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल है, जो स्वाभाविक रूप से एआई तकनीक के साथ सहज और तेजी से जुड़ने वाली पीढ़ी मानी जाती है। यही कारण है कि आज भारतीय उपभोक्ता अधिक स्मार्ट, व्यक्तिगत और सहज अनुभव देने वाले उत्पादों की अपेक्षा कर रहे हैं। साथ ही, देश का प्रतिभाशाली कार्यबल भी ऐसे नवाचारपूर्ण समाधान विकसित करने की मजबूत क्षमता रखता है। यह निवेश स्कैपिया को इंजीनियरिंग, उत्पाद, डेटा साइंस और डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में शीर्ष एआई प्रतिभाओं को आकर्षित करने, विकसित करने और लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखने में मदद करेगा।</p>
<p>जनरल कैटलिस्ट के इंडिया और एमईएनए सीईओ, नीरज अरोड़ा, ने कहा, भारत की अगली बड़ी उपभोक्ता कंपनियाँ केवल पारंपरिक मॉडलों के डिजिटल रूपांतरण से नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली और नए उपभोक्ता व्यवहारों की गहरी समझ के आधार पर उभरेंगी। स्कैपिया ने बहुत शुरुआती चरण में ही यह पहचान लिया था कि नई भारतीय पीढ़ी के लिए यात्रा अब सिर्फ एक आकांक्षा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुकी है। पिछले एक वर्ष में ग्राहकों की संख्या में सात गुना वृद्धि और ट्रैवल इकोसिस्टम में कंपनी की मजबूत पकड़ उसके विज़न और क्रियान्वयन क्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। हम स्कैपिया की इस विकास यात्रा का हिस्सा बनकर बेहद उत्साहित हैं।”</p>
<p>पीक एक्सवी पार्टनर्स साक्षी चोपड़ा ने कहा, “जैसे-जैसे यात्रा युवा भारतीयों की जीवनशैली और खर्च करने की आदतों का अहम हिस्सा बनती जा रही है, वैसे-वैसे उपभोक्ता ऐसे वित्तीय उत्पादों की तलाश कर रहे हैं जो उनकी जरूरतों और व्यवहार के अनुरूप हों। स्कैपिया ने भुगतान, रिवॉर्ड्स, जीरो फॉरेक्स मार्कअप और यात्रा लाभों को जोड़ते हुए एक सहज ट्रैवल-फिनटेक अनुभव तैयार किया है, जो उपभोक्ताओं के साथ गहराई से जुड़ता है। टीम ने मजबूत उत्पाद सोच को उत्कृष्ट क्रियान्वयन के साथ जोड़ा है और हम उनके अगले विकास चरण में भी उनके साथ बने रहने को लेकर उत्साहित हैं।”</p>
<p>ज़ेड47 के मैनेजिंग डायरेक्टर, विक्रम वैद्यनाथन, ने कहा,  “हमने स्कैपिया को उसके शुरुआती निवेश दौर से समर्थन दिया है और हर अगले चरण ने हमारे भरोसे को और मजबूत किया है। डुअल-नेटवर्क कार्ड से लेकर स्कैपिया पे और एयरपोर्ट प्रिविलेज जैसी पेशकशों तक, भारतीय फिनटेक क्षेत्र में बहुत कम टीमें इतनी तेजी और अनुशासन के साथ नवाचार कर रही हैं। जैसे-जैसे उपभोक्ता अनुभव एआई-नेटिव होते जा रहे हैं, हमें विश्वास है कि स्कैपिया आधुनिक भारतीय यात्रियों के बीच एक अग्रणी ब्रांड के रूप में उभरेगा।”</p>
<p>स्कैपिया, फेडरल बैंक और बीओबी कार्ड के साथ साझेदारी में सह-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड प्रदान करती है और भारत की पहली कंपनी बनी, जिसने वीज़ा और रुपे दोनों नेटवर्क पर आधारित डुअल-नेटवर्क सह-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पेश किया। अंतरराष्ट्रीय खर्चों पर जीरो फॉरेक्स मार्कअप की सुविधा के लिए पहचान बना चुकी स्कैपिया ने ‘एयरपोर्ट प्रिविलेज’ की भी शुरुआत की, जो केवल पारंपरिक लाउंज एक्सेस तक सीमित नहीं है, बल्कि डाइनिंग, रिटेल और ड्यूटी-फ्री अनुभवों को भी शामिल करता है। आज स्कैपिया के हर तीन में से एक उपयोगकर्ता पारंपरिक लाउंज एक्सेस की तुलना में शॉपिंग और डाइनिंग अनुभवों को अधिक प्राथमिकता देता है। कंपनी ने ‘एयरपोर्ट प्रिविलेज’ सुविधा को इसी बदलती उपभोक्ता पसंद और आधुनिक यात्रियों की नई अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है।</p>
<p>पिछले छह महीनों में स्कैपिया ने अपने प्लेटफॉर्म पर कई नई सुविधाएँ और उत्पाद जोड़े हैं। इनमें रिवॉर्ड्स-फर्स्ट यूपीआई अनुभव ‘स्कैपिया पे’, एड-ऑन क्रेडिट कार्ड, बीबीपीएस के जरिए सभी बैंकों के क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान, स्कैपिया स्टोर और स्कैपिया एक्सपीरियंस जैसी पेशकशें शामिल हैं। कंपनी अपने उपयोगकर्ताओं को ‘स्कैपिया कॉइन्स’ के रूप में रिवॉर्ड्स देती है, जिन्हें रोजमर्रा के खर्चों पर कमाया जा सकता है और बाद में उड़ानों, ट्रेनों, बसों, होटल बुकिंग, वीज़ा सेवाओं और अन्य यात्रा अनुभवों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सभी सेवाओं के जरिए स्कैपिया ने एक ऐसा संपूर्ण ट्रैवल इकोसिस्टम तैयार किया है, जहाँ यात्रा और वित्तीय सेवाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर सहज तरीके से उपलब्ध होती हैं। नए निवेश के साथ कंपनी अब इस इकोसिस्टम को और बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:26:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नीदरलैंड में पीएम का भव्य स्वागत: भारत अवसरों की भूमि, निवेश और सहयोग का किया आह्वान, भारतीय समुदाय से की मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत को अवसरों की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। प्रवासियों को संबंधों की असली ताकत बताते हुए उन्होंने सूरीनामी हिंदुस्तानी समाज के लिए OCI कार्ड की पात्रता बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक करने की घोषणा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/grand-welcome-for-pm-in-netherlands-india-is-the-land/article-154100"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi-1.png" alt=""></a><br /><p>द हेग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21वीं सदी के भारत को अवसरों की भूमि बताते हुए नीदरलैंड में भारतीय समुदाय से भारत में निवेश तथा सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया और विश्वास जताया कि विकसित भारत की यात्रा में वैश्विक भारतीय समुदाय की बड़ी भूमिका होगी। पांच देशों की यात्रा के दूसरे चरण में दो दिन की यात्रा पर शुक्रवार रात यहां पहुंचे मोदी ने शनिवार को भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने उन लोगों को दोनों देशों के संबंधों की असली ताकत तथा जीवंत सेतु करार दिया और कहा कि सरकार ने सूरीनामी हिंदुस्तानी समाज के लिए ओसीआई कार्ड पात्रता चौथी पीढ़ी से बढ़ाकर छठी पीढ़ी तक कर दी है। </p>
<p><strong>दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ रहा देश</strong></p>
<p>मोदी ने आर्थिक, प्रौद्योगिकी क्षेत्र और लोकतांत्रिक उपलब्धियों को रेखांकित किया तथा उन लोगों से भारत-नीदरलैंड संबंधों को नई ऊंचाई देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत आज असीम आकांक्षाओं और असीम प्रयासों के साथ दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। </p>
<p><strong>भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना</strong></p>
<p>भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उन्होंने बताया कि 2014 में भारत में केवल चार यूनिकॉर्न थे जबकि आज यह संख्या करीब 125 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा, अंतरिक्ष और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 09:44:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भजनलाल सरकार का बड़ा फैसला: बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में विकसित होंगे चंदन वन, अधिकारियों को निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उच्च गुणवत्ता वाले पौधारोपण और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के वन क्षेत्र का विस्तार करना और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-decision-of-bhajanlal-government-instructions-issued-to-sandalwood-forest/article-152555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में वन क्षेत्र के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर वन एवं पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक लेते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में चंदन के पौधों का चयन उच्च गुणवत्ता का हो और उनकी सुरक्षा व उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पौधारोपण अभियान की सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं, ताकि निर्धारित समय पर प्रभावी ढंग से अभियान संचालित किया जा सके।</p>
<p>बैठक में मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण के साथ-साथ हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण और वन विकास अत्यंत आवश्यक है। बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:35:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों ने की राहुल गांधी से मुलाकात: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का जताया कड़ा विरोध, बताया जीवन-यापन के तरीके और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रेट निकोबार के आदिवासी प्रमुखों ने राहुल गांधी से मिलकर प्रस्तावित मेगा प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और जनजातीय अस्तित्व के लिए खतरा बताया। राहुल गांधी ने उनके अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया, जबकि सोनिया गांधी ने इसे आदिवासियों के खिलाफ एक "सुनियोजित दुस्साहस" करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tribal-chiefs-of-great-nicobar-island-met-rahul-gandhi-expressed/article-147069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul-gandhi3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इस मौके पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के साथ ग्रेट निकोबार द्वीप के आदिवासी प्रमुखों ने श्री गांधी से मुलाकात की। आदिवासी प्रमुखों ने प्रस्तावित ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह उनके जीवन-यापन के तरीके और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना की मंजूरी के दौरान उनकी सहमति भी उचित तरीके से नहीं ली गई। </p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए उनकी चिंताओं को उठाएगी। उल्लेखनीय है कि, कांग्रेस संसदीय दल अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को सुनियोजित दुस्साहस बताते हुए इसका विरोध जताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह परियोजना स्थानीय शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों के अस्तित्व को खत्म कर देगी, एक अखबार में लिखे लेख के जरिए सोनिया गांधी ने इसे आदिवासी अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 16:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वन्यजीव संरक्षण के लिए चीन ने तैयार की नयी आद्रभूमि संरक्षण व्यवस्था, इकोलॉजिकल प्रयासों को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग ने तालाबों व दलदलों की सुरक्षा हेतु बहु-स्तरीय व्यवस्था लागू की, जिससे 83 प्रतिशत से अधिक आद्रभूमि संरक्षित होकर वन्यजीव विविधता को सुरक्षित आवास मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-has-prepared-a-new-wetland-conservation-system-for-wildlife/article-141825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(14)2.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन की राजधानी बीजिंग ने अपने तालाब और दलदल स्थलों की सुरक्षा के लिए एक बहु-स्तरित संरक्षण व्यवस्था तैयार की है, जिससे उसकी वन्यजीव आबादी को प्रमुख आवास मिलेगा। बीजिंग नगर पालिका वानिकी और उद्यान ब्यूरो ने सोमवार को बताया कि यह नयी व्यवस्था उसके 83.15 प्रतिशत तालाबों और दलदलों (आद्रभूमि) को संरक्षित करती है। ब्यूरो के अनुसार, यह नयी व्यवस्था वन्यजीव विविधता संरक्षण और दूसरे इकोलॉजिकल प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए बीजिंग के प्राकृतिक रिजर्व, आद्रभूमि पार्क और दूसरे छोटे संरक्षित आद्रभूमि इलाकों का इस्तेमाल करता है। </p>
<p>पिछले पांच वर्षों में बीजिंग ने आद्रभूमि संरक्षण को बेहतर बनाने का काम जारी रखा गया है। अब तक, नगर पालिका की 61,200 हेक्टेयर आद्रभूमि में 50 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पौधों की प्रजातियां और 76 प्रतिशत स्थानीय जंगली जानवरों की प्रजातियां रहती हैं। बीजिंग के ये नये प्रयास आद्रभूमि संरक्षण और बहाली में चीन की बड़ी योजना का हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में, देश ने कानूनी सुरक्षा उपायों को मजबूत किया है और आद्रभूमि संरक्षण के लिए अपनी प्रबंधन व्यवस्था में सुधार किया है। राष्ट्रीय वानिकी एवं चारागाह प्राधिकरण ने कल कहा कि इसका कुल आद्रभूमि क्षेत्र अब एशिया में पहले और दुनिया में चौथे स्थान पर है। </p>
<p>प्राधिकरण ने कहा कि 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2026-2030) के दौरान, चीन आद्रभूमि के लिए अपने कानूनी और नियामक ढांचे में और सुधार करेगा, आद्रभूमि संरक्षण के लिए निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करेगा, और आद्रभूमि पारिस्थितिक उत्पादों के मूल्य को महसूस करने के लिए तंत्र स्थापित करने में तेजी लाएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 17:23:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक साल में बढ़ी 3500 से ज्यादा देसी विदेशी परिंदों की संख्या,ईको सिस्टम में पक्षियों की भूमिका पर बढ़ रहे शोध</title>
                                    <description><![CDATA[गत वर्ष की जनवरी के मुकाबले इस वर्ष सेंसेस में काउंट हुए 300 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-number-of-native-and-migratory-birds-increased-by-more-than-3500-in-one-year--research-on-the-role-of-birds-in-the-ecosystem-is-increasing/article-141087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/3322.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के वेटलैंड्स अब सिर्फ जलस्रोत ही नहीं, बल्कि पक्षी संरक्षण और जैव विविधता की पहचान बन रहे हैं। मिड विंटर वाटर फोल पॉपुलेशन एस्टिमेशन के तहत जनवरी 2025 और जनवरी 2026 के तुलनात्मक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शहर के तीन प्रमुख वेटलैंड (तालाब) पर एक साल में ही 3500 से ज्यादा देसी - विदेशी परिंदों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी न सिर्फ पर्यावरण के लिए शुभ संकेत है, बल्कि कोटा को पक्षी अनुसंधान के नए केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रही है।</p>
<p><strong>एक साल में ही 8000 से 11,500 बढ़ी पक्षियों की संख्या</strong><br />शहर के तीन प्रमुख वेटलैंड उम्मेदगंज पक्षी विहार,अभेड़ा व जोहरा बाई का तालाब पर जनवरी 2025 में हुए मिड विंटर वाटर फोल पापुलेशन ऐस्टमिशन हुआ था। जिसमें यहां 150 प्रजातियों के 8000 देसी विदेशी पक्षी काउंट हुए थे। जबकि, इस वर्ष 17 व 18 जनवरी को हुए सेंसस में 300 से ज्यादा प्रजातियों के 11,500 परिंदे काउंट हुए हैं, जो पिछले वर्ष की अपेक्षा उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। इनमें स्थानीय प्रजातियों के साथ-साथ साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप से आने वाले प्रवासी पक्षी भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।</p>
<p><strong>अनुसंधान का केंद्र बने शहरी वेटलैंड</strong><br />शहर के वेटलैंड अनुसंधान का केंद्र बन रहे हैं। दुनियाभर से हर साल हजारों की तादाद में परिंदे प्रवास पर आ रहे हैं। जिनमें से कई पक्षी तो ऐसे हैं, जो पिछले पांच सालों में पहली बार नजर आ रहे हैं। वन्यजीव विभाग की ओर से शहरी सीमा के वेटलैंड्स को पक्षियों के अनुकूल हैबीटाट के रूप में विकसित किए गए हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले दिनों हुई गणना में विभिन्न 345 प्रजातियों के 11500 पक्षी काउंट किए गए। जबकि, यह संख्या मात्र उम्मेदगंज पक्षी विहार सहित तीन वेटलैंड की है। जबकि, शहरी क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक वेटलैंड हैं। जहां बड़ी संख्या में पक्षियों का प्रवास रहता है।</p>
<p><strong>परिदों की पसंद बना अभेडा तालाब, 7000 पक्षियों का बसेरा</strong><br />वन्यजीव विभाग कोटा के अधीन अभेडा तालाब तालाब पक्षियों की पहली पसंद बना हुआ है। गत 18 जनवरी को हुए मिड विंटर वाटर फोल पापुलेशन सेंसस में यहां 135 प्रजातियों के 7000 पक्षी काउंट हुए हैं। वहीं जोहरा बाई का तालाब में 70 प्रजातियों के 1500 परिंदे काउंट हुए हैं। जबकि वर्ष 2025 में इन दोनों जगहों से लगभग चार हजार से ज्यादा पक्षी नजर आए थे।</p>
<p><strong>इस बार उम्मेदगंज में पक्षियों की 50 प्रजाती ज्यादा बढ़ी</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार में गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष पक्षियों की 50 प्रजाति ज्यादा बढ़ी है। पिछले साल यहां 90 प्रजातियों के 3000 पक्षी काउंट किए गए थे जबकि इस वर्ष 18 जनवरी को 140 प्रजातियों के 3000 से ज्यादा पक्षी मिले हैं । इसकी मुख्य वजह वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की ओर से करवाए डवलपमेंट कार्य हैं। अवैध फिशिंग, अतिक्रमण व संदिग्ध घुसपैठ पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाए जाना है। साथ ही पेड़ों की अवैध कटाई रुकने से पक्षियों का हैबीटाट न केवल सुरक्षित हुआ बल्कि भोजन की भी पर्याप्त उपलब्धता हो गई। पक्षियों के लिए तालाब में पर्याप्त मछलियां होने व अवैध गतिविधियां थमने से परिंदों का कुनबा आबाद हो गया।</p>
<p><strong>यह वेटलैंड बन रहे बर्ड्स वॉचिंग का डेस्टिनेशन</strong><br />डीएफओ अनुराग भटनागर कहते हैं, उम्मेदगंज पक्षी विहार, अभेड़ा तालाब, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, सालकिया व जोहराबाई का तालाब, किशोर सागर, गैपरानाथ, गरड़िया महादेव सहित शहर के विभिन्न वेटलैंड वर्ड वॉचिंग का डेस्टिनेशन बन चुके हैं। यहां की फिजा विभिन्न प्रजातियों के देसी-विदेशी पक्षियों की चहचहाट से गुलजार रहती है। कोटा विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों व कई शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थी और स्कॉलर्स ईको सिस्टम में पक्षियों की भूमिका, उनके व्यवहार, हैबीटाट, विशेषताएं, सिमटते वनों व वेटलैंड से पक्षियों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर पर शोध कर रहे हैं।</p>
<p><strong>यह पक्षी आए नजर</strong><br />वन्य जीव विभाग के सहायक वन संरक्षक पंकज कुमार ने बताया कि मिड विंटर वॉटर फॉल सेंसस के तहत जोहराबाई तालाब पर अच्छी तादाद में बार हेडेड गूज नजर आए है । गणना में लगभग 70 प्रजातियों के 1500 पक्षी देखे गए वही, अभेडा तालाब में 135 प्रजातियों के लगभग 7000 पक्षी देखे गए। पक्षी गणना में बार हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, नॉर्दन सावलर, गेडवेल, वुड सेंड पाइपर, ग्रीन सेंड पाइपर, स्पून बिल, मार्स हैरियर, कॉमन स्टर्लिंग, रोजी स्टर्लिंग, ग्रीन सेंक, रेड सेंक, व्हाइट वेगटेल, कैनरी फ्लाई केचर, लिटिल रिंग फ्लोवर ,कॉटन पिग्मी गीज, व्हाइट आई, बजार्ड, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, इंपीरियल ईगल, ब्लू थ्रोट, स्केली ब्रेस्टड मुनिया, रेड मुनिया, क्रेस्टेड लार्क, कॉमरेंट, ई ग्रेट, सहित अन्य प्रजातियों के पक्षी नजर आए। वहीं उम्मीदगंज में 140 प्रजातियों के लगभग 3000 पक्षी नजर आए । जिसमें कॉमन पोचार्ड, टफ्टेड पोचार्ड, ग्रीन सेंक, रेड सेंक, व्हाइट वेगटेल, कैनरी फ्लाई केचर, लिटिल रिंग फ्लोवर , मार्स हैरियर, बजार्ड, भुटेड़ ईगल सहित अन्य प्रजातियों के पक्षी नजर आए।</p>
<p><strong>यूरोप से कजाकिस्तान से आते हैं पक्षी</strong><br />नेचर प्रमोटर ए एच जेडी ने बताया कि कोटा के विभिन्न इलाकों में स्थित वैटलैंड पर इन दिनों देसी विदेशी पक्षियों का कलरव गूंज रहा है। आलनिया, उम्मेदगंज, अभेड़ा, उद्पुरिया, बरधा डेम, गिरधरपुरा, बोराबांस का तालाब, सोखिया तालाब, किशोर सागर तालाब, उम्मेदगंज, अभेड़ा सहित कई इलाके परिंदों की चहचहाट से गुलजार हो रहे हैं। यह पक्षी यूरोप, सेंट्रल एशिया, साइबेरिया, हिमालय, उत्तरी अमेरिका, यूरोपियन व एशियाई देशों से आते हैं। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में हिमालय पार से विदेशी पक्षी माइग्रेशन में फीडिंग और ब्रीडिंग के लिए यहां आते है तथा सर्दी के बाद यथास्थान के लिए रवाना हो जाते है।</p>
<p>आर्दभूमि (वेटलैंड) पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह जीव जंतुओं के आवास होते हैं। प्रवासी पक्षियों के भी रहने के अनुकूल होते हैं। इनके लुप्त होने से पारिस्थितिकी तंत्र से ईको सिस्टम को नुकसान हो सकता है। इसलिए इसका संरक्षण जरूरी है। इस बार तीनों वेटलैंड पर पिछले पिछले साल के मुकाबले इस साल 3500 से ज्यादा पक्षियों की संख्या में इजाफा हुआ है। हाल ही में हुए सेंसस में कुल 345 प्रजातियों के 11 हजार 500 बर्ड्स काउंट हुए हैं। उम्मीदगंज पक्षी विहार में अतिक्रमण, संदिग्ध घुसपैठ और अवैध फिशिंग रोकी है। जिससे पक्षियों को पर्याप्त भोजन मिलने लगा है।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वाइल्ड लाइफ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 16:30:04 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस का आरोप, अरावली मुद्दे पर गुमराह कर रहे हैं भूपेंद्र यादव </title>
                                    <description><![CDATA[ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पर अरावली की परिभाषा बदलकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की समितियों और विशेषज्ञों के कड़े विरोध के बावजूद सरकार नियमों में बदलाव पर अड़ी है, जिससे पर्यावरण को गंभीर खतरा हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-alleges-that-bhupendra-yadav-is-misleading-on-aravali-issue/article-137005"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/bhupendra-yadav.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने वन और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पर अरावली मुद्दे पर सच छिपाने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है।<br />कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, अब यह बिल्कुल साफ़ हो गया है कि अरावली मुद्दे पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री सच को पूरी तरह नहीं बता रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अरावली की परिभाषा में जो बदलाव केंद्र सरकार कर रही है, उसका इसी सरकार ने विरोध किया है। सरकार को बताना चाहिए कि पहले जो व्यवस्था उच्चतम न्यायालय ने दी थी उसमें किस वजह से बदलाव किया जा रहा है। इसके आगे कांग्रेस नेता ने कहा, यह अभी बताया जाना चाहिए कि इस सम्बन्ध में भारतीय वन सर्वेक्षण, अधिकार प्राप्त वह केंद्रीय समिति, जिसे पहली बार मई 2002 में उच्चतम न्यायालय ने गठित किया गया था और जिसे दिसंबर 2023 में पर्यावरण और वन मामलों में सलाह देने के लिए पुनर्गठित किया गया था, उसने और उच्चतम न्यायालय के अमीकस क्यूरी यानी न्याय मित्र ने जिसका स्पष्ट और जोरदार विरोध किया है। इसके बावजूद सरकार अरावली की परिभाषा में इन सब खामियों में बदलाव को आगे बढ़ाने पर क्यों अड़ी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 13:28:16 +0530</pubDate>
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