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                <title>Operation Sindhu - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की प्रतिबद्धता का दिया संदेश, भारत अब सिर्फ़ बयान जारी नहीं करता बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई भी करता है : राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की बदलती मानसिकता का वैश्विक संदेश दिया है। अब भारत कूटनीतिक बयानों के बजाय निर्णायक सैन्य कार्रवाई में विश्वास रखता है। रक्षा निर्यात में 62% की रिकॉर्ड वृद्धि और एआई (AI) आधारित युद्धक प्रणालियाँ नए और सशक्त भारत की पहचान बन चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/operation-sindoor-gave-a-message-to-the-world-about-the/article-152209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने भूभाग पर आतंकवादी हमलों के बाद अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता तक सीमित नहीं है बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां एक राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद का कोई भी कृत्य सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमलों और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "आतंकवाद एक विकृत और विक्षिप्त मानसिकता से उत्पन्न होता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, यह मूल रूप से मानवता के मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ संघर्ष है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश के भीतर और विदेशों में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने कहा, "आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या इसे नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उचित ठहराने के प्रयास किए जाते हैं। यह अत्यंत खतरनाक है और एक प्रकार से आतंकवादियों को आड़ प्रदान करता है ताकि वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकें। आतंकवाद केवल राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, इसके कई आयाम हैं—संचालनात्मक, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों पर काम करें।"</p>
<p>पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने पर श्री सिंह ने कहा, "भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक ही समय पर स्वतंत्रता प्राप्त की थी। हालांकि आज भारत को विश्व स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार के आईटी यानी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' का केंद्र माना जाता है।" रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सशस्त्र बलों की एकजुटता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने एकजुट होकर और एकीकृत योजना के तहत कार्य किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-अलग हिस्सों में काम नहीं करती, बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों पर और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया, और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। उन्होंने कहा, "इस अभियान के दौरान हमने अत्यंत सटीकता के साथ केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हमारे खिलाफ हमला किया था। हमने अभियान इसलिए नहीं रोका कि हमारी क्षमताएं समाप्त हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर समाप्त किया। हम लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता और अचानक संकट के समय अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का सैन्य-औद्योगिक ढांचा लगातार यह साबित करता रहा है कि वह न केवल शांति काल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि युद्ध के समय तेज आपूर्ति और रसद की मांगों को भी पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत ने परमाणु हमले की धमकी या दबाव में आए बिना अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। उन्होंने कहा, "यह नई विश्व व्यवस्था है, यह नए वैश्विक युग का नया भारत है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को रूपांतरित किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोधक क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यद्यपि यह अभियान केवल 72 घंटों के भीतर समाप्त हो गया, लेकिन इसके पहले की तैयारी व्यापक और लंबी थी। उन्होंने बताया कि भारत की अतिरिक्त क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता अब प्रतिरोधक नीति के अभिन्न अंग बन चुके हैं।राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप वैश्विक धारणा में उल्लेखनीय बदलाव और स्वदेशी हथियारों तथा रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा ,"कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। </p>
<p>आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। हम इन मानकों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" जर्मनी की अपनी हाल की यात्रा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यूरोप की प्रमुख कंपनियां हमारे निजी रक्षा उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति केवल उसकी सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता स्थापित करने की योग्यता से भी सुदृढ़ हुई है।</p>
<p>प्रतिरोधक क्षमता के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव को रेखांकित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी इसके महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इस परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया गया है। इससे हमारी सटीकता और प्रहार क्षमता में वृद्धि हुई है। जहां बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, वहीं अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं पहले से सक्रिय होकर खतरों को उत्पन्न होने से पहले ही निष्प्रभावी कर देती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक उपयोग किया जाता है ।"</p>
<p>एआई के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "एआई का एक अर्थ 'ऑगमेंटेड इन्फैंट्री' भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को काफी बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हम अपनी सेना को तकनीक-आधारित, एकीकृत युद्ध मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य से सेना ने 'रुद्र' ब्रिगेड, 'भैरव' बटालियन, 'शक्तिबाण' तोपखाना रेजिमेंट और 'दिव्यास्त्र' बैटरियों जैसे चुस्त और आत्मनिर्भर युद्धक इकाइयों की स्थापना की है, जो आधुनिक मिश्रित खतरों का तुरंत और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।"<br />हालांकि, श्री सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई को केवल सकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नए और गंभीर खतरे उत्पन्न कर रही हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डॉ. समीर वी. कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:43:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए एकजुट मोर्चा समय की जरूरत: राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ बैठक को संबोधित करते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति अडिग है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/united-front-to-deal-with-terrorism-separatism-and-extremism-is/article-151941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताते हुए आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी "बुराइयों" से निपटने के लिए आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने और किसी भी राजनीतिक अपवाद को अस्वीकार करते हुए एकजुट मोर्चा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को किर्गिज़स्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के उस दृढ़ संकल्प का प्रतीक है कि आतंकवाद के गढ़ अब न्यायोचित दंड से अछूते नहीं रहेंगे।</p>
<p>उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी "बुराइयों" से निपटने के लिए सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने और किसी भी राजनीतिक अपवाद को अस्वीकार करते हुए एकजुट मोर्चा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश द्वारा प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद, जो किसी राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करता है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि दोहरे मापदंडों के लिए कोई स्थान नहीं है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि एससीओ को उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए जो आतंकवादियों को सहायता, शरण और सुरक्षित ठिकाने प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, "आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का बिना किसी अपवाद के सामना करके, हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से शांति और समृद्धि के आधार स्तंभ में बदलते हैं।" आतंकवाद-रोधी प्रयासों को एससीओ का एक मूलभूत सिद्धांत बताते हुए, श्री सिंह ने कहा कि संगठन ने इस खतरे के खिलाफ साझा लड़ाई में ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा की है। उन्होंने पिछले वर्ष की तियानजिन घोषणा का उल्लेख किया, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ और सामूहिक रुख को दर्शाया, और इसे आतंकवाद तथा उसके समर्थकों के प्रति उसकी शून्य-सहिष्णुता नीति का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, "सामूहिक विश्वसनीयता की वास्तविक परीक्षा निरंतरता में निहित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता और कोई धर्म नहीं होता। देशों को आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:36:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी रिपोर्ट का दावा: भारत-पाकिस्तान के बीच 2026 में फिर छिड़ सकती है जंग </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी थिंक टैंक CFR की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकी गतिविधियों के कारण सशस्त्र संघर्ष की 'मध्यम' संभावना है। मई 2025 के संक्षिप्त युद्ध और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दोनों देशों ने रक्षा खरीद तेज कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/american-report-claims-war-between-india-and-pakistan-may-break/article-137853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ind-vs-pakistan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी थिंक टैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच का विवाद 2026 में सशस्त्र संघर्ष में बदल सकता है। अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञों का सर्वेक्षण करने वाली काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस ने दोनों देशों के बीच संघर्ष की संभावना को मध्यम बताया है। सीएफआर ने अनुमान लगाया है कि इस संभावित संघर्ष का अमेरिकी हितों पर मध्यम प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>सीएफआर की उङ्मल्लाा Conflicts to Watch in 2026 रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ी हुई आतंकवादी गतिविधियों के कारण फिर से सशस्त्र संघर्ष की मध्यम संभावना है। इसी साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन का छोटा युद्ध हुआ था, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों का भारी इस्तेमाल हुआ था। इसकी शुरूआत पाकिस्तान स्पॉन्सर आतंकियों के पहलगाम हमले से हुई थी। 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम में हमला कर 26 लोगों की जान ले ली थी।</p>
<p><strong>पाकिस्तान ने भी हमले किए</strong></p>
<p>इस हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों और उनके ठिकानों को टार्गेट करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। जवाब में पाकिस्तान ने भी हमले किए थे जिनमें से अधिकतर नाकाम रहे। चार दिनों के युद्ध के बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम का आह्वान किया था लेकिन शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की हाइब्रिड सरकार इस युद्ध को लेकर डींगें हांकती रही है। जम्मू और कश्मीर में तब से कोई बड़ा आतंकवादी हमला नहीं हुआ, लेकिन खुफिया रिपोर्ट के अनुसार इस सर्दी में जम्मू क्षेत्र में 30 से अधिक पाकिस्तानी आतंकवादी सक्रिय हैं।</p>
<p><strong>युद्ध के बाद भारत और पाक ने तेज की हथियारों की खरीद</strong></p>
<p>युद्धविराम के बावजूद, भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपने रक्षा उपकरणों की खरीद को तेज कर दिया है। भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में 79,000 करोड़ रुपए की ड्रोन, एयर-टू-एयर मिसाइल और गाइडेड बमों की खरीद को मंजूरी दी। इसी तरह, पाकिस्तान ने तुर्की और चीन के साथ नई ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद के लिए बातचीत शुरू की है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम बुरी तरह फेल साबित हुआ था जिससे सीख लेकर पाकिस्तान ये कदम उठा रहा है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की संभावना</strong></p>
<p>सीएफआर रिपोर्ट में एक और पाकिस्तानी युद्ध का जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार 2026 में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध की मध्यम संभावना है। हालांकि, इसका अमेरिकी हितों पर कम प्रभाव होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमा पार से बढ़ते चरमपंथी हमलों के कारण अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच फिर से सशस्त्र संघर्ष की मध्यम संभावना है। रिपोर्ट का मकसद अमेरिकी सांसदों को संभावित संघर्षों के हॉटस्पॉट के बारे में जानकारी देना और उनकी कार्रवाई के लिए गाइड करना है। रिपोर्ट में संघर्षों को तीन श्रेणियों- टियर 1, 2 और 3 में बांटा गया है। इसमें यह देखा गया है कि कौन सा संघर्ष सशस्त्र संघर्ष में बदलने की संभावना रखता है और अमेरिकी हितों पर उसका क्या प्रभाव पड़ सकता है। संभावना और प्रभाव को उच्च, मध्यम और कम के रूप में आंका गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 11:32:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Year Endear 2025:  अमेरिका के साथ संबंधों में आई खटास, रूस के साथ दोस्ती हुई और भी मजबूत, जानें चीन और पाकिस्तान के साथ कैसे रहे इस साल भारत के रिश्तें ?</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2025 भारत के लिए कूटनीतिक उतार-चढ़ाव वाला रहा। जहाँ ट्रंप की टैरिफ नीति और एच-1बी वीजा नियमों ने अमेरिका के साथ रिश्तों में दरार डाली, वहीं रूस के साथ दोस्ती और चीन के साथ सीमा गतिरोध का समाधान बड़ी उपलब्धि रही। बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ संबंधों में भारी गिरावट देखी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/year-endear-2025-relations-with-america-soured-friendship-with-russia/article-137050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/year-ender-2025-modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विभिन्न देशों के साथ संबंधों के लिहाज से बीता साल भारत के लिए उतार-चढाव भरा रहा जहां ट्रंप की टैरिफ नीति ने अमेरिका के साथ दो दशक पुराने संबंधों की नींव हिला दी वहीं पुराने दोस्त रूस के साथ संबंधों को नयी मजबूती मिली। पड़ोसी देशों में चीन के साथ पिछले पांच वर्षों से संबंधों में चला आ रहा गतिरोध दूर हुआ और अफगानिस्तान के साथ भी रिश्तों में गरमाहट आयी जबकि पाकिस्तान के साथ संबंध और भी बदतर हो गए तथा बंगलादेश भी पाकिस्तान के साथ पींग बढाते हुए भारत विरोध की राह पर चल पड़ा।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री डा.एस जयशंकर ने विश्व के विभिन्न हिस्सों तक भारत के संबंधों का दायरा बढाने और लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को प्रगाढ बनाने के लिए अनेक देशों की द्विपक्षीय यात्रा की और सभी प्रमुख बहुपक्षीय मंचों, अंतर्राष्ट्रीय समूहों और सम्मेलनों में भागीदारी की। श्री मोदी ने इस वर्ष फ्रांस, अमेरिका, जापान, चीन, ब्रिटेन, ब्राजील, कनाड़ा, मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान जैसे देशों की यात्रा की।  </p>
<p>दुनिया के कई प्रमुख नेताओं ने वर्ष के दौरान भारत की यात्रा की जिनमें रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर , न्यूजीलैंड, श्रीलंका, सिंगापुर, मॉरिशस, भूटान और फिजी के प्रधानमंत्री तथा इंडोनिशया, फिलिपींस , प्राग्वे, अंगोला और चिली के राष्ट्रपति शामिल हैं। सबसे बड़ी वैश्विक शक्ति अमेरिका के साथ पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से चले आ रहे मजबूत तथा सामरिक संबंधों में संबंधों में दरार आना इस वर्ष भारत के लिए सबसे बड़ा झटका रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारत के साथ संबंधों की चूलें हिला दी। </p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने के बार-बार के दावों से भी दोनों देशों के रिश्तों में खटास आयी। पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप भले ही टेलीफोन पर निरंतर संपर्क में हैं लेकिन पिछले दस महीने से संभावनाओं के बावजूद दोनों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई है और टैरिफ मुद्दे का भी समाधान नहीं हो सका है। अमेरिका ने एच 1 बी वीजा से संबंधित नियमों में जो बदलाव किये हैं उसका भी सबसे अधिक प्रभाव भारतीय नागरिकों पर पडऩे की संभावना है।</p>
<p>दूसरी बड़ी शक्ति रूस के साथ संबंधों को लेकर यह साल कहीं बेहतर रहा और पिछले कुछ वर्षों से संबंधों में चली आ रही शिथलता को इस बार गरमाहट मिली और दोनों देशों ने समय की कसौटी पर परखी हुई दोस्ती को अनेक समझौतों से नयी ताकत दी। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा ने साझा प्रतिबद्धताओं की पुष्टि की कि संकट के समय में रूस और भारत एक दूसरे के विश्वसनीय दोस्त के रूप में खड़े रहते हैं।    </p>
<p>पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में पांच वर्ष पूर्व भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पैदा हुए गतिरोध का टूटना इस वर्ष की उपलब्धि रही। पीएम मोदी की चीन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंध धीरे-धीरे पटरी पर आ रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबे समय तक आमने-सामने रहे सैनिक पीछे हटे हैं और सीमा पर शांति तथा स्थिरता बनी है। दोनों देशों के बीच पांच वर्ष के बाद एक बार फिर सीधी उडान सेवा शुरू हुई है और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा का सुगम और छोटा मार्ग खोल दिया है। दोनों देशों के बीच पारंपरिक व्यापार मार्गों को खोलने के बारे में भी बातचीत चल रही है।</p>
<p>अफगानिस्तान में तालिबान शासन के सत्ता पर काबिज होने के चार साल बाद भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में फिर से गरमाहट आयी है। भारत ने दूरगामी प्रभाव वाली नीति के तहत एक बार फिर काबूल में अपने दूतावास को सक्रिय कर दिया है। इस वर्ष अफगानिस्तान के मंत्रियों की भारत यात्रा और अफगानिस्तान के विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता ने दोनों देशों के बीच संबंधों का नया अध्याय शुरू किया है।</p>
<p>वहीं, एक नकारात्मक घटनाक्रम में पड़ोस में एक विश्वसनीय साझेदार बंगलादेश के साथ संबंधों में खटास आना इस वर्ष भारत के लिए बड़ा झटका है। वहां उग्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार का अपदस्थ होना भारत की वर्षों की कवायद और प्रयासों पर पानी फेरने जैसा है। बंगलादेश में जमात ए इस्लामी के फिर से मजबूत होने तथा वहां की अंतरिम सरकार के पाकिस्तान के साथ पींग बढाने से बंगलादेश के भारत विरोध की राह पर चलने का खतरा पैदा हो गया है।</p>
<p>भारत के चिर प्रतिद्धंद्वी पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर भी यह साल अच्छा नहीं रहा और पहलगाम आतंकवादी हमले ने दोनों देशों के बीच संबंधों को रसातल में पहुंचा दिया है। भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान को सैन्य मोर्चें पर दंडित करने के साथ- साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी पटखनी देते हुए 1960 की सिंधू जल संधि को निलंबित कर दिया है। भारत ने अटारी सीमा चौकी को भी बंद कर दिया है। साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकता और भारत आतंकवाद को किसी भी हालत में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत ने कहा है कि वह आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त लोगों तथा उनका समर्थन करने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करेगा।</p>
<p>ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट करने तथा ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए भारत ने कई देशों में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भी भेजे थे। इसे कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा गया और अनेक देशों ने भारत के रूख का समर्थन किया।</p>
<p>अन्य पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और भूटान के साथ भारत के संबंध इस वर्ष पहले की तरह ही मजबूत रहे हैं। इन देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंध द्विपक्षीय संबंधों का आधार रहे हैं। खाड़ी देशों के साथ भी भारत के संबंध इस वर्ष मजबूती की दिशा में आगे बढे हैं। इन देशों के साथ व्यापार में वृद्धि हुई है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढा है। अफ्रीकी देशों के साथ भी भारत के संबंध तेजी से बेहतरी की दिशा में बढ रहे हैं। इन देशों के साथ भारत का व्यापार भी निरंतर बढ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 15:27:08 +0530</pubDate>
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