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                <title>Resilience - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Resilience RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आरपीए में योगोत्सव, 1100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने किया सामूहिक योगाभ्यास </title>
                                    <description><![CDATA[12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) में भव्य योगोत्सव का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि डीजीपी राजीव कुमार शर्मा सहित 1100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने योगासन और ध्यान का अभ्यास किया। डीजीपी ने पुलिस सेवा के तनाव को प्रबंधित करने और शारीरिक-मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए नियमित योग को बेहद आवश्यक बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/yoga-festival-in-rpa-on-international-yoga-day-more-than/article-157619"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/police5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राजस्थान पुलिस अकादमी (आरपीए), जयपुर में राज्य स्तरीय योगोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। सुबह 7 बजे आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राजस्थान पुलिस के 1100 से अधिक अधिकारियों, जवानों और प्रशिक्षणार्थियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा रहे। इस अवसर पर डीजीपी शर्मा ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस सेवा अत्यंत चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण होती है। ऐसे में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए नियमित योग बेहद आवश्यक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि योग एक ऐसी सरल और प्रभावी पद्धति है, जिसे बिना किसी विशेष संसाधन के कहीं भी और कभी भी किया जा सकता है। यदि पुलिसकर्मी योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं तो उनकी कार्यक्षमता, एकाग्रता और तनाव सहने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। योगोत्सव में पुलिस मुख्यालय, राजस्थान पुलिस अकादमी, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री तथा इंटेलिजेंस ट्रेनिंग अकादमी के अधिकारियों और कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेषज्ञ योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासनों, अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी सहित कई प्राणायामों का अभ्यास किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सभी ने मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 13:04:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>माइंडमाइन सम्मेलन 2026 : सीतारमण ने कहा- वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू मांग से मिल रहा अर्थव्यवस्था को समर्थन, वित्त मंत्री ने जताई स्थिरता की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'माइंडमाइन सम्मेलन 2026' में कहा कि वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बावजूद घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। मानसून और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है तथा विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए आरबीआई के साथ रणनीतिक उपाय किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/mindmine-conference-2026-sitharaman-said-domestic-demand-is-supporting-the/article-156999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/nirmala-sitharaman.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि इस समय वैश्विक स्तर पर व्यापार और आपूर्ति को लेकर कई प्रकार की अनिश्चतताएं भारतीय अर्थव्यस्था के लिए चुनौती पेश कर रही हैं, हालांकि घरेलू मांग से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है। सीतारमण ने यहां "माइंडमाइन सम्मेलन 2026" के एक संवाद सत्र के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वर्तमान में वैश्विक व्यापार में काफी अनिश्चितताएं हैं। हमारा निर्यात मजबूत है लेकिन अचानक आयात शुल्क बढ़ा दिया जाता है। हम जिन तीन वस्तुओं का सबसे अधिक आयात करते हैं उनकी कीमत और आपूर्ति दोनों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके लिए विदेशी मुद्रा का भंडार मजबूत होना चाहिये।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन सबके बीच भारत के लिए राहत की बात हमारा घरेलू बाजार है, जो काफी बड़ा है। घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि विनिर्माताओं के समक्ष आयातित कच्चे माल की ऊंची कीमत की चुनौती भी है। घरेलू स्तर पर मानसून की चुनौती को लेकर उन्होंने कहा कि इस बार अल-नीनो प्रभाव के कारण कम बारिश होने का अनुमान है। देश के पास अनाज का काफी बफर भंडार है, इसलिए खाद्यान्न की कमी जैसी स्थिति तो नहीं होगी, लेकिन किसानों की आमदनी पर कम मानसून का असर जरूर होगा। उर्वरकों की कमी के बारे में उन्होंने कहा कि आगामी खरीफ सत्र के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। रबी सत्र को लेकर चिंता थी लेकिन अब चीन से उर्वरक आने से वह चिंता भी दूर हो गयी है।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और उससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ मिलकर विदेशी मुद्रा जुटाने के उपाय किये हैं। बॉन्ड बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कदम उठाये गये हैं। साथ ही बैंकों और सार्वजनिक कंपनियों को विदेशों से पूंजी जुटाने की अनुमति दी गयी है और इसके लिए जोखिम को कम करने की रणनीति की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक उठायेगा। इससे बैंक विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:16:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>हरे निशान में बंद हुआ बाजार : आईटी सेक्टर में गिरावट जारी, इन कंपनियों में दिखा एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद हल्की बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स 13.84 अंक सुधरकर 74,360.01 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23,416.55 पर पहुंचा। आईटी और मेटल सेक्टर में दबाव रहा, लेकिन कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और टाइटन जैसे शेयरों में लिवाली से बाजार संभल गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/the-market-closed-in-the-green-decline-in-it-sector/article-155995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/share-market2.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को लिवाली हावी रही, हालांकि आईटी कंपनियों के दबाव में प्रमुख सूचकांक दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद हल्की बढ़त में बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स 13.84 अंक (0.02 प्रतिशत) की तेजी में 74,360.01 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 10.95 अंक यानी 0,05 प्रतिशत ऊपर 23,416.55 अंक पर पहुंच गया। प्रमुख सूचकांकों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया। दिनभर ये कभी लाल तो कभी हरे निशान में रहे। इस दौरान सेंसेक्स नीचे 73,807.30 अंक तक और ऊपर 74,544.24 अंक तक गया।</p>
<p>वृहत बाजार में शुरू से ही अच्छी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.43 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.49 प्रतिशत टूट गया। धातु, आईटी और रसायन सेक्टरों की कंपनियों में निवेशक बिकवाल रहे। वहीं, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और मीडिया समूहों के सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक चढ़े। बैंकिंग, वित्त, फार्मा, स्वास्थ्य, ऑटो और एफएमसीजी समूहों में भी तेजी देखी गयी। सेंसेक्स की कंपनियों में टाइटन का शेयर साढ़े तीन फीसदी के करीब ऊपर बंद हुआ। इटरनल में भी तीन प्रतिशत के आसपास तेजी रही। आईटीसी का शेयर सवा प्रतिशत मजबूत हुआ।</p>
<p>टेक महिंद्रा, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी के शेयर भी बढ़त में रहे। इंफोसिस का शेयर पौने दो फीसदी टूट गया। बजाज फिनसर्व और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर एक प्रतिशत के आसपास गिरे। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, अडानी पोर्ट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान यूनीलिवर, टाटा स्टील, सन फार्मा, एलएंडटी, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस के शेयर भी लाल निशान में रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:05:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लाल निशान में खुले शेयर बाजार : सूचकांक 123.15 अंक गिरकर 23,282.45 पर खुला, इन शेयरों पर रखें नज़र</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 410 अंक टूटकर खुला, लेकिन बाद में निचले स्तरों से सुधरकर 74,316 के करीब पहुंच गया। आईटी, मेटल और बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली का दबाव है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/open-in-red-stock-market-index-fell-by-12315-points/article-155923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/share-market-fall-down.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट देखी गयी। बीएसई का सेंसेक्स 410.34 अंक की गिरावट के साथ 73,935.83 अंक पर खुला, लेकिन धीरे-धीरे हरे निशान की ओर बढ़ता दिख रहा है। खबर लिखे जाते समय यह 29.39 अंक (0.04 प्रतिशत) नीचे 74,316.78 अंक पर रहा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से दुनिया भर में शेयर बाजारों में बिकवाली हावी रही। इसका असर घरेलू बाजारों में भी निवेश धारणा पर देखा गया।</p>
<p>नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 123.15 अंक नीचे 23,282.45 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 18.75 अंक यानी 0.08 प्रतिशत की हल्की गिरावट में 23,386.85 अंक पर था। वृहत बाजार में फिलहाल लिवाली चल रही है। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक और स्मॉलकैप-100 सूचकांक ऊपर हैं। एफएमसीजी, तेल एवं गैस, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और रसायन समूहों को छोड़कर अन्य सभी समूहों के सूचकांक नीचे हैं। आईटी, धातु, बैंकिंग और वित्त समूहों पर सबसे अधिक दबाव है।</p>
<p>सेंसेक्स की कंपनियों में इटरनल का शेयर लगभग दो प्रतिशत की बढ़त में है। टाइटन, एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा और हिंदुस्तान यूनीलिवर के शेयर भी ऊपर हैं। वहीं, ट्रेंट, इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक, पावरग्रिड और बजाज फिनसर्व के शेयर नीचे चल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 11:26:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि, बताया-भारत की अटूट भावना का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर पर पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे होने पर संपादकीय साझा किया। उन्होंने मंदिर को भारत की अटूट आस्था और बर्बरता पर विजय का शाश्वत प्रतीक बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-completion-of-1000-years-of-somnath-temple-pm-modi/article-138423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/pm-modi-hails-somnath-temple.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पर 1026 ईस्वी में हुए पहले हमले के बाद से 1000 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर सोमवार को एक संपादकीय लेख साझा किया। इस लेख में प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि सदियों से बार-बार हुए हमलों के बावजूद, सोमनाथ मंदिर भारत की अटूट भावना के प्रतीक के रूप में आज भी शान से खड़ा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ की कथा केवल एक मंदिर की नहीं, बल्कि भारत माता के उन अनगिनत सपूतों के अदम्य साहस की कहानी है, जिन्होंने देश की संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की।</p>
<p>पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में लिखा, वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। इसके बाद बार-बार हुए हमलों के बावजूद, सोमनाथ आज भी अडिग है! ऐसा इसलिए है, क्योंकि सोमनाथ मंदिर की कहानी भारत माता के अनगिनत सपूतों के अटूट साहस की कहानी है जिन्होंने हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की। पीएम मोदी के इस संपादकीय लेख को यहां नीचे प्रस्तुत किया है।-सोमनाथ. ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नामक जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है...सौराष्ट्रे सोमनाथं च...यानि ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है। ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है। </p>
<p>शास्त्रों में ये भी कहा गया है:</p>
<p>सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापै: प्रमुच्यते।</p>
<p>लभते फलं मनोवाञ्छितं मृत: स्वर्गं समाश्रयेत्।।</p>
<p>अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है। मन में जो भी पुण्य कामनायें होती हैं, वे पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है। दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था। वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था। </p>
<p>सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गये थे।</p>
<p>1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है। जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है। हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दु:ख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है। हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा। सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था। ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था। ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी। हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे।</p>
<p>सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है। ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है। 1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया। यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था। लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया। और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुन: जीवंत किया।</p>
<p>महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ। उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही। साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है। वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है। ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया। उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें।</p>
<p>1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया। 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा, Þदक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे। ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे।</p>
<p>इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है। ये बार-बार नष्ट किये गये, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए। पहले की तरह सशक्त। पहले की तरह जीवंत। यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है। इसका अनुसरण आपको गौरव से भर देता है। इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु। इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा। ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया। 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। </p>
<p>अंतत: 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये। उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।</p>
<p>सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक 'सोमनाथ, द श्राइन इटरनल', अवश्य पढ़ी जानी चाहिए। जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है, हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है। हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक:। सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही।</p>
<p>इन्हीं विचारों ने हमें हर कालखंड में, हर परिस्थिति में फिर से उठ खड़े होने, मजबूत बनने और आगे बढऩे का सामथ्र्य दिया है। इन्हीं मूल्यों और हमारे लोगों के संकल्प की वजह से आज भारत पर दुनिया की नजर है। दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है। वो हमारे इनोवेटिव युवाओं में निवेश करना चाहती है। हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं। योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं। ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं। आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है।</p>
<p>अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है। सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा, भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्या: क्षयमुपगता यस्य। अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं। जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गये हैं। आज भी दादा सोमनाथ के दर्शन से ऐसी ही अनुभूति होती है। मन में एक ठहराव आ जाता है, आत्मा को अंदर तक कुछ स्पर्श करता है, जो अलौकिक है, अव्यक्त है। 1026 के पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद 2026 में भी सोमनाथ का समुद्र उसी तीव्रता से गर्जना करता है और तट को स्पर्श करती लहरें उसकी पूरी गाथा सुनाती हैं। उन लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठता रहा है।</p>
<p>अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं। उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है। इतिहास के पन्नों में वे केवल फुटनोट हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है। सोमनाथ हमें ये बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ आज भी आशा का अनंत नाद है। ये विश्वास का वो स्वर है, जो टूटने के बाद भी उठने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं। एक नए संकल्प के साथ, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए। एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 14:08:47 +0530</pubDate>
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                <title>ब्राजील की अर्थव्यवस्था में सुधार: राष्ट्रपति लूला ने अमेरिकी टैरिफ को बताया बेअसर</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि 2025 का अंत ब्राजील के लिए आर्थिक रूप से सुखद है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद ब्राजील की अर्थव्यवस्था लचीली बनी रही। खाद्य कीमतों में गिरावट और आम जनता की क्रय शक्ति में सुधार को उन्होंने वर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/impact-of-us-import-tariffs-on-brazilian-economy-negligible-lula/article-137091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/brazil-lula.png" alt=""></a><br /><p>रियो द जेनरो। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज का इनासियो लूला दा सिल्वा ने मंगलवार को कहा कि 2025 का अंत ब्राजील के लिये अच्छा साबित हो रहा है, क्योंकि ब्राजीलियाई वस्तुओं पर अमेरिकी आयात शुल्क में बढ़ोतरी अप्रासंगिक साबित हुई है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि इस साल का अंत अच्छा हो रहा है। खाद्य पदार्थों की कीमतें गिर रही हैं और लोग एक बार फिर उन चीजों को खरीदने में सक्षम हो रहे हैं जो पहले महंगी हो गयी थीं।</p>
<p>राष्ट्रपति लूला ने घरेलू स्थिति और अमरिका के साथ ब्राजील के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा, ब्राजील पर लगाये गये अमेरिकी आयात शुल्क भी अंतत: बेअसर साबित हुए। लूला ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका की नयी व्यापार नीतियों और उनसे उत्पन्न भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनावों के बावजूद ब्राजील की अर्थव्यवस्था ने अनुकूलनशीलता और लचीलापन दिखाया है। घरेलू मोर्चे पर राष्ट्रपति लूला ने आम जनता की क्रय शक्ति में क्रमिक सुधार का उल्लेख किया ,विशेष रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट  निम्न आय वाले परिवारों के लिए बेहतर साबित हुई है।</p>
<p>राष्ट्रपति लूला के अनुसार, यह प्रक्रिया वर्ष के अंत तक ब्राजील की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण बनाने में योगदान दे रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 18:31:40 +0530</pubDate>
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