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                <title>insurance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने से राज्य के नागरिकों को मिलेगा आयुष्मान भारत का लाभ: पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के बाद आयुष्मान भारत योजना लागू होने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि 'डबल-इंजन' सरकार अब बंगाल के लोगों को ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करेगी। सत्ता परिवर्तन के साथ ही केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं का मार्ग प्रशस्त हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/with-the-formation-of-bjp-government-in-west-bengal-the/article-153503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद अब राज्य के लोगों को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि नयी 'डबल-इंजन सरकार' प्रमुख केंद्रीय कल्याणकारी कार्यक्रमों का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "पश्चिम बंगाल के मेरे भाइयों और बहनों का कल्याण सर्वोपरि है। मुझे बहुत खुशी है कि राज्य के लोगों को आयुष्मान भारत तक पहुंच मिलेगी, जो दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य देखभाल योजना है और शीर्ष गुणवत्ता वाली तथा सस्ती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करती है। साथ ही, डबल-इंजन सरकार प्रमुख केंद्रीय योजनाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।"</p>
<p>प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में भाजपा द्वारा औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने के बाद आई है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस का 15 साल का शासन समाप्त हो गया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता से बाहर हो गई। भाजपा ने आयुष्मान भारत के क्रियान्वयन और केंद्र के साथ बेहतर समन्वय को अपने चुनावी अभियान का मुख्य मुद्दा बनाया था और पिछली तृणमूल सरकार पर राजनीतिक कारणों से कई केंद्र प्रायोजित योजनाओं को रोकने का आरोप लगाया था।</p>
<p>आयुष्मान भारत, जिसे आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के रूप में जाना जाता है, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को माध्यमिक और तृतीयक अस्पतालों में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करती है। तृणमूल शासन के दौरान, पश्चिम बंगाल इस योजना से बाहर रहा था और इसके बजाय अपनी स्वास्थ्य बीमा योजना 'स्वास्थ्य साथी' चला रहा था, जिसे बनर्जी सरकार ने एक अधिक समावेशी विकल्प के रूप में पेश किया था।</p>
<p>भाजपा ने बार-बार तर्क दिया था कि आयुष्मान भारत से बाहर रहने से बंगाल के निवासी देश भर के सूचीबद्ध अस्पतालों के विस्तृत नेटवर्क के लाभ से वंचित रह गए। हालांकि, तृणमूल का मानना था कि स्वास्थ्य साथी व्यापक कवरेज प्रदान करती है और उसने केंद्र पर कल्याणकारी योजनाओं के वितरण का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था। सत्ता परिवर्तन के साथ ही, नयी भाजपा सरकार से राज्य में आयुष्मान भारत को तेजी से लागू करने और अन्य कल्याणकारी पहलों को केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप बनाने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:09:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>1 अप्रैल 2026 से नया नियम लागू : बीमा कंपनियों का मुनाफा 3 गुना तक बढ़ सकता है, जानें नए नियम के बारे में </title>
                                    <description><![CDATA[IRDA 1 अप्रैल 2026 से भारतीय बीमा कंपनियों में इंड एएस लागू करने जा रहा। नए अकाउंटिंग मानक से लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का मुनाफा और नेटवर्थ स्पष्ट, खासकर तेजी से बढ़ रही कंपनियों को लाभ। खर्च और कमीशन अब पॉलिसी अवधि में फैले दिखेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/new-rule-applicable-from-april-1-2026-profit-of-insurance/article-147641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय बीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव होने वाला है। बीमा नियामक इरडा ने इंड एएस लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं और इसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है। एमके की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए अकाउंटिंग नियम से लाइफ  इंश्योरेंस कंपनियों की कमाई और नेटवर्थ का आंकड़ा काफी बेहतर दिखेगा, हालांकि असल कारोबार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इंड एएस अंतरराष्ट्रीय मानकों (आईएफआरएस) के अनुरूप तैयार अकाउंटिंग सिस्टम है, जिसका उद्देश्य कंपनियों के वित्तीय नतीजों को ज्यादा पारदर्शी और तुलनात्मक बनाना है। दुनिया के कई देशों में बीमा कंपनियां पहले ही आईएफआरएस17 लागू कर चुकी हैं, जबकि भारत में यह कदम अब उठाया जा रहा है।</p>
<p><strong>मुनाफे की तस्वीर होगी ज्यादा साफ :</strong></p>
<p>एमके की रिपोर्ट के अनुसार, आईएनडी एएस लागू होने के बाद कंपनियां पॉलिसी बेचने में होने वाले खर्च और कमीशन को एक साथ दिखाने के बजाय पूरे पॉलिसी अवधि में फैलाकर दिखाएंगी। अभी तक इन खर्चों को शुरुआत में ही दिखाया जाता था, जिससे शुरुआती सालों में मुनाफा कम नजर आता था। नए सिस्टम में यह दबाव कम हो जाएगा और कंपनियों की असली कमाई बेहतर तरीके से सामने आएगी। खासकर तेजी से बढ़ रही कंपनियों को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा।</p>
<p><strong>पीएटी और नेटवर्थ में बड़ा उछाल संभव :</strong></p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएनडी एएस लागू होने के बाद लाइफ  इंश्योरेंस कंपनियों के मुनाफे पीएटी में 1.5 से 3 गुना तक की बढ़ोतरी दिख सकती है। कुछ छोटी कंपनियों में यह उछाल और ज्यादा हो सकता है। साथ हीए कंपनियों की बैलेंस शीट भी मजबूत नजर आएगी क्योंकि नेटवर्थ और कुल वैल्यू को बेहतर तरीके से दिखाया जाएगा। अभी तक इंश्योरेंस कंपनियों की वैल्यू समझने के लिए इंडियन एंबेडेड वैल्यू (आईईवी) का इस्तेमाल होता है। लेकिन इंड एएस लागू होने के बाद मुनाफा और बैलेंस शीट खुद ज्यादा साफ  तस्वीर दिखाएंगे, जिससे आईईवी की जरूरत कम हो सकती है या उसका फॉर्म बदल सकता है। रिपोर्ट साफ करती है कि इंड एएस लागू होने से कंपनियों की सॉल्वेंसी (पूंजी की मजबूती) या डिविडेंड देने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।</p>
<p><strong>कारोबार नहीं बदलेगा, सिर्फ  दिखाने का तरीका बदलेगा :</strong></p>
<p>एमके का कहना है कि इंड एएस कोई जादू नहीं है जो कंपनियों का असली मुनाफा बदल दे। बीमा कंपनियों की कमाई अभी भी पॉलिसी, लागत, ग्राहक बने रहने और प्राइसिंग जैसे फैक्टर्स पर निर्भर रहेगी। लेकिन यह नया सिस्टम कंपनियों की असली आर्थिक स्थिति को ज्यादा साफ  और सटीक तरीके से दिखाएगा।</p>
<p><strong>मुनाफे की तस्वीर होगी ज्यादा साफ :</strong></p>
<p>एमके की रिपोर्ट के अनुसार, आईएनडी एएस लागू होने के बाद कंपनियां पॉलिसी बेचने में होने वाले खर्च और कमीशन को एक साथ दिखाने के बजाय पूरे पॉलिसी अवधि में फैलाकर दिखाएंगी। अभी तक इन खर्चों को शुरुआत में ही दिखाया जाता था, जिससे शुरुआती सालों में मुनाफा कम नजर आता था। नए सिस्टम में यह दबाव कम हो जाएगा और कंपनियों की असली कमाई बेहतर तरीके से सामने आएगी। खासकर तेजी से बढ़ रही कंपनियों को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा।</p>
<p><strong>पीएटी और नेटवर्थ में बड़ा उछाल संभव :</strong></p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएनडी एएस लागू होने के बाद लाइफ  इंश्योरेंस कंपनियों के मुनाफे पीएटी में 1.5 से 3 गुना तक की बढ़ोतरी दिख सकती है। कुछ छोटी कंपनियों में यह उछाल और ज्यादा हो सकता है। साथ हीए कंपनियों की बैलेंस शीट भी मजबूत नजर आएगी क्योंकि नेटवर्थ और कुल वैल्यू को बेहतर तरीके से दिखाया जाएगा। अभी तक इंश्योरेंस कंपनियों की वैल्यू समझने के लिए इंडियन एंबेडेड वैल्यू (आईईवी) का इस्तेमाल होता है। लेकिन इंड एएस लागू होने के बाद मुनाफा और बैलेंस शीट खुद ज्यादा साफ  तस्वीर दिखाएंगे, जिससे आईईवी की जरूरत कम हो सकती है या उसका फॉर्म बदल सकता है। रिपोर्ट साफ करती है कि इंड एएस लागू होने से कंपनियों की सॉल्वेंसी (पूंजी की मजबूती) या डिविडेंड देने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/new-rule-applicable-from-april-1-2026-profit-of-insurance/article-147641</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:34:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेलंगाना में 3.24 लाख करोड़ रुपये का कर-मुक्त बजट पेश: वर्ष 2047 तक तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य, इन्दिराम्मा परिवार जीवन बीमा योजना की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने तेलंगाना का कर-मुक्त बजट पेश किया। इसमें इन्दिराम्मा बीमा योजना जैसी नई घोषणाओं के साथ मुफ्त बिजली और बस यात्रा जारी रहेगी। सरकार ने 2034 तक $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर भारी आवंटन के साथ यह बजट सामाजिक न्याय और विकास को समर्पित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/telangana-presents-tax-free-budget-of-rs-324-lakh-crore-aims/article-147236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/telengana-budget.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3,24,234 करोड़ रुपये का कर-मुक्त बजट पेश किया। इसी दौरान सिंचाई और नागरिक आपूर्ति मंत्री कैप्टन एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने इसे विधान परिषद में प्रस्तुत किया। </p>
<p>कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद यह उसका चौथा बजट है। इसमें कुल राजस्व व्यय 2,34,406 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय 47,267 करोड़ रुपये अनुमानित है। बजट में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, 500 रुपये में गैस सिलेंडर और 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी कल्याणकारी योजनाओं को भी जारी रखा गया है। बजट में सरकार ने जून 2026 से 1.15 करोड़ परिवारों के लिए पांच लाख रुपये के कवर वाली इन्दिराम्मा परिवार जीवन बीमा योजना की घोषणा की है।</p>
<p>विक्रमार्क ने अपने बजट भाषण में कहा कि विरासत में मिले कर्ज और वित्तीय दबाव के बावजूद सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बहाल किया है और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आदर्शों के अनुरूप संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य की आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि तेलंगाना की जीएसडीपी 17,82,198 करोड़ रुपये है, जिसकी विकास दर 10.7 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वहीं राज्य में प्रति व्यक्ति आय 4,18,931 रुपये तक पहुंच गई है।</p>
<p>सरकार ने वर्ष 2034 तक एक ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट के माध्यम से 5.75 लाख करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित किए गए हैं। इसके अलावा सरकार ने रोजगार को प्राथमिकता देते हुए 67,763 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए हैं। क्षेत्रवार आवंटन के तहत शिक्षा के लिए 26,674 करोड़ रुपये, चिकित्सा और स्वास्थ्य के लिए 13,679 करोड़ रुपये, ऊर्जा के लिए 21,285 करोड़ रुपये और कृषि व किसान कल्याण के लिए 23,179 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।</p>
<p>सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए अनुसूचित जातियों के लिए 11,784 करोड़, अनुसूचित जनजातियों के लिए 7,937 करोड़, पिछड़ा वर्ग के लिए 12,511 करोड़ और अल्पसंख्यकों के लिए 3,769 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पंचायत राज और ग्रामीण विकास को 33,688 करोड़, सिंचाई को 22,615 करोड़ और शहरी विकास को 17,907 करोड़ रुपये दिए गए हैं। तेलंगाना के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया गया है। बजट के तहत आईटी क्षेत्र के लिए 875 करोड़ रुपये, उद्योगों के लिए 3,490 करोड़ रुपये और हथकरघा क्षेत्र के लिए 258 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, श्रम कल्याण के लिए 998 करोड़ रुपये और महिला एवं बाल कल्याण विभाग के लिए 3,143 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।</p>
<p>राज्य की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गृह विभाग को 11,907 करोड़ रुपये और कानून विभाग को 2,367 करोड़ रुपये दिए गए हैं। पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए 1,224 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें से 500 करोड़ रुपये विशेष रूप से गोदावरी पुष्करालु के आयोजन के लिए आवंटित किये गए हैं।</p>
<p>बजट में शहरी परिवर्तन, ग्रीन मोबिलिटी, सिंचाई विस्तार और कौशल विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। औद्योगिक विकास की गति को बढ़ाने के साथ-साथ हैदराबाद के बुनियादी ढांचे और भारत फ्यूचर सिटी परियोजना को प्राथमिकता दी गई है, जिससे राज्य के शहरी और औद्योगिक परिदृश्य को नयी दिशा मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/telangana-presents-tax-free-budget-of-rs-324-lakh-crore-aims/article-147236</link>
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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 16:18:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रेगिस्तानी जहाज की संख्या घटी : कोटा में रह गए 1862, अब बीमा बनेगा संबल, अस्तित्व खतरे में </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में एक ऊंट का बीमा करने का प्रावधान था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-number-of-desert-ship-decreased--1862-left-in-kota--now-insurance-will-be-the-support/article-127006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(3)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रेगिस्तानी जहाज के रूप में पहचाने वाले राज्य पशु ऊंट का खेती व दैनिक कामकाज में कम उपयोग से अब इनका अस्तित्व खतरे में है। प्रतिवर्ष इनकी संख्या में कमी हो रही है। इस पर ऊंट संवर्धन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। योजना में अब प्रत्येक उष्ट्र पालक के 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा किया जाएगा। इससे बीमारी, हादसे, प्राकृतिक आपदा में इनकी मृत्यु पर पशुपालकों को संबल मिल सके। बीते दो दशक में पूरे प्रदेश में खेती कार्य में ट्रैक्टर का प्रयोग बढ़ने, साधन में दुपहिया, चार पहिया वाहनों के अधिक उपयोग से आम आदमी के दैनिक जीवन में अब ऊंट का महत्व बहुत कम रह गया है। इससे इनकी संख्या हर वर्ष कम हो रही है। कोटा जिले की बात की जाए तो यहां पर ऊंट की संख्या घटकर केवल 1862 ही रह गई है। इसी तरह की स्थिति संभाग के अन्य जिलों की है।</p>
<p><strong>पहले एक ही ऊंट का था प्रावधान</strong><br />पशुपालन विभाग मंगला पशु बीमा योजना में अब पशुपालकों के अधिकतम 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा करेगा। पूर्व में एक ऊंट का बीमा करने का प्रावधान था। योजना में बीमारी, हादसे, प्राकृतिक आपदा से बीमित ऊंट के मरने पर अधिकतम 40 हजार रुपए बीमा राशि देने का प्रावधान है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऊंट न केवल राजस्थान की संस्कृति का हिस्सा हैं, बल्कि रेगिस्तानी इलाकों में पर्यावरण संतुलन और जीवनशैली का अहम हिस्सा भी हैं। सरकार द्वारा दिया गया यह बीमा संरक्षण इनकी नस्ल को बचाने में सहायक होगा। ऊंटों का भविष्य सुरक्षित करना राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने जैसा है। मंगला पशु बीमा योजना में यह बदलाव ऊंट पालकों और प्रदेश दोनों के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>पिछले दो दशक में भारी गिरावट</strong><br />खेती और दैनिक जीवन में इनके उपयोग में लगातार कमी के कारण ऊंटों की संख्या प्रतिवर्ष घट रही है। इस पर चिंतित राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना में अहम बदलाव करते हुए प्रत्येक उष्ट्र पालक के 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा करने का निर्णय लिया है। सरकारी फैसले के तहत अब ऊंटों की बीमारी, हादसे या प्राकृतिक आपदा से मृत्यु होने की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक संबल मिलेगा। इससे न केवल ऊंट पालकों को राहत मिलेगी बल्कि इस विलुप्तप्राय पशु के संरक्षण की दिशा में भी यह योजना मददगार साबित होगी। जानकारों के अनुसार, पिछले 20 सालों में खेती में ट्रैक्टर और आधुनिक साधनों का प्रयोग बढ़ा है। वहीं, आम जनजीवन में दुपहिया और चारपहिया वाहनों की उपलब्धता के कारण ऊंट की उपयोगिता बहुत कम रह गई। इसी वजह से ग्रामीण इलाकों में ऊंटों की संख्या हर वर्ष घट रही है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />-1992 की पशुगणना में प्रदेश में थे 7.5 लाख ऊंट <br />- 2012 तक यह घटकर 3.25 लाख ही रह गई <br />- 2019 की गणना में संख्या और घटकर 2.1 लाख हुई<br />- 2019 की गणना में कोटा में 1862 ऊंट की संख्या दर्ज</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />पहले ऊंट खेत जोतने, अनाज ढोने और यात्रा के लिए सबसे जरूरी साथी थे। अब उनकी जरूरत कम हो गई है। सरकार का यह बीमा फैसला हमारे लिए सहारा है। अगर ऊंट की मृत्यु होती है तो हमें नुकसान की भरपाई मिल सकेगी।<br /><strong>-रामलाल, ऊंट पालक</strong><br /> <br /> ऊंट संवर्धन को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने मंगला पशु बीमा योजना में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब प्रत्येक उष्ट्र पालक के 10 ऊंटों का नि:शुल्क बीमा किया जाएगा। इससे पशुपालकों को संबल मिल सकेगा।<br /><strong>-डॉ. अनिल कुमार, वरिष्ठ पशु चिकित्सक </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 15:21:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - कोई नहीं ढूंढ पाया बैल तो हटानी पड़ी शर्त</title>
                                    <description><![CDATA[किसानों को तीस हजार की प्रोत्साहन राशि देने का मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---no-one-could-find-the-bull-so-the-condition-had-to-be-removed/article-123914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  सरकार की ओर से बैलों से खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लघु एवं सीमांत कृषकों को प्रोत्साहन राशि के रूप में प्रतिवर्ष 30 हजार रुपए देने की योजना शुरू की गई है। इसके लिए पोर्टल पर आवेदन करना होगा। इस योजना की घोषणा को पांच माह हो चुके हैं, लेकिन अभी कोटा जिले में एक भी आवेदन नहीं आया है। इसका कारण योजना की एक शर्त है जो किसानों की राहत में बाधा बन रही थी। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान को बैलों का बीमा करवाना होगा। जबकि कोई भी बीमा कम्पनी दुधारू पशु के अलावा अन्य पशुओं का बीमा नहीं करती है। ऐसे में कोटा जिले सहित पूरे प्रदेश में योजना का दम टूट रहा था। अब सरकार ने किसानों की परेशानी का समाधान करते हुए बैलों का बीमा करवाने की शर्त को हटा दिया है। अब पशु बीमा पॉलिसी के बिना भी किसान इस योजना में आवेदन कर सकेंगे।</p>
<p><strong>गांवों में घट रही बैलों की संख्या</strong><br />किसानों के अनुसार पहले हर गांव में बैलों की दर्जनों जोड़ियां देखने को मिलती थी। मगर अब समय बदल चुका है, और अधिकतर किसानों ने बैलों को त्याग दिया है। सिंचाई के साधनों से वंचित किसानों ने भी आधुनिक उपकरणों का सहारा लेकर बैलों की उपयोगिता को भुला दिया है। यही कारण है कि पशुधन की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। पहले कई स्थानों पर बड़े पशु मेले आयोजित किए जाते थे। इन मेलों में लाखों रुपए के बैल खरीदे और बेचे जाते थे, लेकिन जब से खेतों में बैलों का उपयोग कम हुआ, पशु मेलों का अस्तित्व भी संकट में आ गया। ऐसे में सरकार ने बैलों से खेती को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की है।</p>
<p><strong>इस शर्त के लिए काट रहे थे चक्कर</strong><br />राज्य सरकार की ओर से बैलों के सरंक्षण के लिए मुख्यमंत्री बजट घोषणा में नई योजना की घोषणा की गई थी। इसके तहत लघु एवं सीमांत कृषकों को बैलों से खेती किए जाने पर प्रोत्साहन राशि के रूप में 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष उपलब्ध कराने का निर्णय किया गया था। यह योजना पूरे प्रदेश के लिए लागू की गई थी और इसके लिए कृषि आयुक्तालय की ओर से सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। बीमा योजना का लाभ लेने के लिए कई शर्ते रखी गई थी। इनमें बैलों की बीमा पॉलिसी वाली शर्त भी थी, लेकिन बैलों का बीमा कौन और कैसे करेगा इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं था। इस कारण कारण काश्तकार कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के चक्कर काट रहे थे। बीमा पॉलिसी की शर्त के कारण  कोटा जिले में अभी तक इस योजना के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जिले के किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिलने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 28 मई को गले की फांस बना बैलों का बीमा, एक भी नहीं आया आवेदन शीर्षक से प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि इस योजना का लाभ लेने के लिए काश्तकारों को ई-मित्र पर जाकर अथवा स्वयं के स्तर पर राजकिसान साथी पोर्टल पर जनाधार के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसमें पशु बीमा पॉलिसी एवं स्वास्थ्य प्रमाण पत्र भी अपलोड करना आवश्यक होगा, लेकिन इसमें बैंलों का बीमा कौनसी एजेंसी करेगी इसका कोई भी उल्लेख नहीं है। प्राइवेट एजेंसी पशुओं का बीमा करती है, लेकिन वह सिर्फ दुधारू पशुओं का बीमा करती है। एजेसियां भी बैलों का बीमा करने से मना कर रही है। इसके चलते किसानों में असमंजस की स्थिति बन गई है। किसान कभी पशुपालन विभाग तो कभी कृषि विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें कहीं से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।</p>
<p>पशु बीमा पॉलिसी की शर्त के कारण किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसके लिए किसान सरकारी विभागों में चक्कर लगा रहे थे। अब सरकार की ओर पशु बीमा पॉलिसी  की शर्त को हटवाने से किसानों का इसक प्रति रूझान बढ़ेगा।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>सरकार की ओर से बैलों से खेती को प्रोत्साहन देने के लिए योजना में 30 हजार रुपए प्रतिवर्ष दिए जाएंगे। इसमें बैलों का बीमा कराने में परेशानी की बात सामने आई थी। अब इस शर्त को हटा दिया गया है। केवल स्वास्थ्य प्रमाण पत्र देकर भी योजना का लाभ लिया जा सकता है।<br /><strong>-अतिश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 16:11:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंडिया गठबंधन का संसद भवन में प्रदर्शन, बीमा पर GST वापस लेने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[इंडिया गठबंधन के नेता संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्रित हुए और बीमा पर जीएसटी लगाने का विरोध करते हुए नारेबाजी कर जीएसटी वापस लेने की मांग करने लगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-coalitions-protest-in-parliament-house-demands-withdrawal-of-gst/article-86974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन के अन्य दलों ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी लगाने के सरकार के निर्णय के विरोध में यहां संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और जीएसटी को सरकार की मनमानी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। इंडिया गठबंधन के नेता संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले संसद भवन के मकर द्वार पर एकत्रित हुए और बीमा पर जीएसटी लगाने का विरोध करते हुए नारेबाजी कर जीएसटी वापस लेने की मांग करने लगे।</p>
<p>कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा कि मोदी सरकार ने अपने 'वसूली बजट' में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सेवाओं पर जीएसटी बढ़ा दिया है। इससे जनता को इन पर मिलने वाली सुविधाओं के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। मोदी सरकार की इस वसूली के खिलाफ इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।</p>
<p>विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरद पवार, शिवसेना उद्धव गुट के संजय राउत, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप्त वंद्योपाध्याय, डीएमके एम के बालू सहित कई नेता शामिल हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Aug 2024 12:57:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ढांचागत क्षेत्र के लिए गारंटी बॉण्ड बीमा उत्पाद लेकर आएंगे: गडकरी</title>
                                    <description><![CDATA[गारंटी बॉण्ड के तहत किसी बीमित परियोजना को पूरा करने या प्रदर्शन का दायित्व निहित होता है जबकि कॉरपोरेट बांड ऋण चुकाने से संबंधित वित्तीय दायित्व से संबंधित होते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadkari-will-bring-a-guarantee-bond-insurance-product-for-the/article-31860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/q-21.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ढांचागत क्षेत्र में तरलता बढ़ाने के लिए देश का पहला गारंटी बांड बीमा उत्पाद 19 दिसंबर को जारी करेगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को एक कार्यक्रम में देश का पहला गारंटी बॉण्ड बीमा उत्पाद लाने की घोषणा की। गारंटी बॉण्ड कॉरपोरेट बांड और वित्तीय गारंटी से अलग होते हैं। गारंटी बॉण्ड के तहत किसी बीमित परियोजना को पूरा करने या प्रदर्शन का दायित्व निहित होता है जबकि कॉरपोरेट बांड ऋण चुकाने से संबंधित वित्तीय दायित्व से संबंधित होते हैं। </p>
<p><strong>ठेकेदारों को बड़ी राहत मिलेगी</strong></p>
<p>गडकरी ने उद्योग निकाय भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय राजमार्गों का बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित हो रहा है जिसके लिए फंड की जरूरत है। गडकरी ने कहा कि हमारा मंत्रालय 19 दिसंबर को भारत का पहला गारंटी बॉण्ड बीमा उत्पाद उतारने वाला है। इससे ठेकेदारों को बड़ी राहत मिलेगी। </p>
<p><strong>बुनियादी ढांचा क्षेत्र में नकदी बढ़ेगी</strong></p>
<p>गडकरी ने कहा कि गारंटी बॉण्ड ठेकेदारों की बैंक गारंटी के रूप में फंसी कार्यशील पूंजी को मुक्त कराने में मदद करेंगे जिससे बुनियादी ढांचा क्षेत्र में नकदी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ठेकेदार इस धन का इस्तेमाल अपना कारोबार बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। </p>
<p><strong>बिजली आधारित परिवहन प्रणाली शुरू करेंगे</strong></p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह बिजली आधारित एक त्वरित जन परिवहन प्रणाली शुरू करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं लद्दाख और लेह में 30 फ्यूनिकुलर रेलवे प्रणाली परियोजना शुरू करना चाहता हूं। फ्यूनिकुलर रेल प्रणाली के तहत तेज चढ़ाई वाली जगह पर रेल डिब्बे को घूमने वाली केबल की मदद से ऊपर खींचा जाता है। इस केबल का संचालन बिजली मोटर से किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 12:09:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होम इंश्योरेंस में निवेश करना फायदेमंद</title>
                                    <description><![CDATA[एक होम इंश्योरेंस पॉलिसी, घर के मालिकों और उसके किरायेदारों दोनों के लिए जरूरी है कि वह आपको और आपके घर और उसकी वस्तुओं को अप्रत्याशित घटनाओं की स्थिति में सुरक्षित कर सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/benefits-of-investing-in-home-insurance/article-28276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/home-1.jpg" alt=""></a><br /><p>एजेंसी,नवज्योति/नई दिल्ली। अचानक हुई घटनाओं के दौरान, एक संपूर्ण होम इंश्योरेंस पॉलिसी होने से भारी वित्तीय नुकसान से बचने में मदद मिल सकती है, जोकि आपकी सबसे बड़ी संपत्ति के जोखिमों से पैदा हो सकती है। एक संपूर्ण होम इंश्योरेंस प्लान से ना केवल आपके घर को, बल्कि उसकी वस्तुओं को भी सुरक्षा मिलती है। एक बात ध्यान रखने वाली है कि होम इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के दौरान पर्याप्त कवरेज मिले। पंकज वर्मा हैड अंडराइटिंग एसबीआई जनरल इंश्योरेंस का कहना है कि बेशक आपका घर सबसे बहुमूल्य संपत्ति होती है। एक होम इंश्योरेंस पॉलिसी, घर के मालिकों और उसके किरायेदारों दोनों के लिए जरूरी है कि वह आपको और आपके घर और उसकी वस्तुओं को अप्रत्याशित घटनाओं की स्थिति में सुरक्षित कर सके। एक घर को फिर से बनाना या उपकरणों को फिर से ठीक करवाना, भावनात्मक और वित्तीय रूप से मुश्किल और महंगा हो सकता है। </p>
<p>प्रमुख इंश्योरेंस कंपनियां कई सारे फीचर्स और फायदों के साथ होम इंश्योरेंस प्लान प्रदान करती हैं। होम इंश्योरेंस खरीदने के दौरान नए ग्राहकों को ऐसी पॉलिसी लेनी चाहिए जोकि पूरा कवरेज दे ढांचागत नुकसानों के साथ जुड़ी कीमतें संपत्ति का रिप्लेसमेंट और अस्थायी रूप से रहने की व्यवस्था आदि शामिल होनी चाहिए। साथ ही इंश्योरेंस प्रदाता बेहतर क्लेम सेटलमेंट अनुपात वाला हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Nov 2022 10:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब नहीं होगा सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं का बीमा </title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी विद्यालयों में अब छात्र-छात्राओं का हर वर्ष होने वाला बीमा नहीं किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/now-there-will-be-no-insurance-for-the-students-of/article-17984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/student.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। सरकारी विद्यालयों में अब छात्र-छात्राओं का हर वर्ष होने वाला बीमा नहीं किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। असल में मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना बीमित सभी परिवारों पर लागू होने के कारण उक्त परिवारों के सभी विद्यार्थियों को भी दुर्घटना बीमा योजना का कवर उपलब्ध हो गया। अब राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए जारी होने वाली पॉलिसियों का अब नवीनीकरण नहीं होगा। </p>
<p><strong>कक्षा 9 से 12वीं के विद्यार्थी से लेते हैं प्रीमियम </strong></p>
<p>राजकीय विद्यालयों में नवीन प्रवेश के समय एवं कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों से दुर्घटना बीमा प्रीमियम राशि के रूप में प्रति छात्र 10 रुपए तथा प्रति छात्रा 5 रुपए लिए जाते हैं। जिसके आधार पर किसी प्रकार की अनहोनी पर विद्यार्थी के परिजनों को एक लाख रुपए की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती थी। इस सत्र में भी ऐसा ही होना था। लेकिन कार्यालय अतिरिक्त निदेशक, राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग ने शिक्षा विभाग को पत्र जारी किया कि मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना के तहत सभी विद्यार्थियों को भी दुर्घटना बीमा योजना का बीमा कवर उपलब्ध हो चुका है। ऐसे में विद्यार्थियों को जारी होने वाली पॉलिसियों का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। </p>
<p><strong>क्या लौटाएंगे प्रीमियम राशि?</strong></p>
<p>नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हुए करीब एक माह का समय गुजर चुका है। ज्यादातर विद्यार्थियों से प्रीमियम राशि भी ली जा चुकी है। अब ऐसे में इस तरह के आदेश जारी होने से शिक्षक भी असमंजस की स्थिति में हैं। जिन स्कूलों में अब तक विद्यार्थियों से प्रीमियम एकत्र किया जा रहा है, वहां तो उसे लौटाना आसान होगा, लेकिन जिन स्कूलों में प्रीमियम राशि एकत्र कर बैंक में चालान कटवा दिया है। वहां पर बच्चों को प्रीमियम राशि में काफी परेशानी होगी। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Aug 2022 12:30:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उपभोक्ता आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को दिया पीड़िता को 50 लाख देने का आदेश </title>
                                    <description><![CDATA[आयोग के न्यायिक सदस्य सुरेंद्र कुमार जैन एवं सदस्य राम फूल गुर्जर की बेंच की ओर से सुनाए गए निर्णय में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को इस राशि का भुगतान 2 माह में करने और फैसला सुनाने की तारीख से 9 प्रतिशत ब्याज, मानसिक संताप के 2 लाख रुपए एवं अधिवक्ता खर्च 25 हजार रुपए भी मय ब्याज दिए जाने के आदेश किए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/consumer-commission-give-order-the-insurance-company-to-give-50-lakh/article-17965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/46546546516.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उपभोक्ता आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़िता को 50 लाख रुपए का भुगतान करे। आयोग ने यह आदेश अजमेर के मसूदा के सोनिया भील के मामले में सुनवाई के बाद दिए। आयोग के न्यायिक सदस्य सुरेंद्र कुमार जैन एवं सदस्य राम फूल गुर्जर की बेंच की ओर से सुनाए गए निर्णय में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को इस राशि का भुगतान 2 माह में करने और फैसला सुनाने की तारीख से 9 प्रतिशत ब्याज, मानसिक संताप के 2 लाख रुपए एवं अधिवक्ता खर्च 25 हजार रुपए भी मय ब्याज दिए जाने के आदेश किए है।</p>
<p>मामले के अनुसार सोनिया भील के पति महेंद्र भील ने बीमा कंपनी से 50 लाख रुपए का बीमा करवाया और प्रीमियर राशि 9912 रुपए भी जमा करवाए थे। महेंद्र भील की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई, जिसकी पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज  कराई गई, लेकिन विपक्षी बीमा कंपनी ने यह कहकर बीमा दावा अस्वीकार कर दिया कि इस मामले में तथ्य छिपाए गए है। कंपनी का तर्क था कि महेंद्र पहले से बीमार था और बीमा करवाया है। इस संबंध में सोनिया ने 2020 में आयोग के समक्ष परिवाद पेश बताया कि उसके पति महेंद्र भील ने हादसे का बीमा करवाया था। इसके बाद उसके पति की सड़क हादसे में मौत हो गई। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Aug 2022 17:40:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वायु सेना, रक्षा सेवाओं व सेवानिवृत्त पेंशनर्स का  होगा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा</title>
                                    <description><![CDATA[इस योजना में अन्य चीजों के साथ ही सैन्य बलों, केंद्रीय पुलिस सैन्य बलों, राज्य पुलिस बलों, मेट्रो पुलिस में सेवारतए सेवानिवृत्त व प्रशिक्षुओं के साथ ही सेवानिवृत्त पेंशनर रक्षा कर्मियों के लिए वैयक्तिक दुर्घटना बीमा व वायु दुर्घटना बीमा शामिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/air-force-defense-services-and-retired-pensioners-will-have-personal/article-13961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/manodkkekfkdke.gif" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने बैंक की प्रमुख योजना पीएनबी रक्षक प्लस के तहत रक्षा कर्मियों को विशेष तौर पर तैयार किए गए उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए भारतीय वायु सेना (आईएएफ ) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस योजना में अन्य चीजों के साथ ही सैन्य बलों, केंद्रीय पुलिस सैन्य बलों, राज्य पुलिस बलों, मेट्रो पुलिस में सेवारतए सेवानिवृत्त व प्रशिक्षुओं के साथ ही सेवानिवृत्त पेंशनर रक्षा कर्मियों के लिए वैयक्तिक दुर्घटना बीमा व वायु दुर्घटना बीमा शामिल है।</p>
<p>समझौता ज्ञापन का आदान प्रदान पीएनबी के एमडी एवं सीईओ अतुल कुमार गोयल और भारतीय वायु सेना की ओर से चीफ आफ  एयर स्टाफ, एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएम, एडीसी के बीच दिल्ली के भारतीय वायु सेना आडीटोरियम में एक समारोह में किया गया। चीफ  आफ  एयर स्टाफ, एयर चीफ  मार्शल विवेक राम चौधरी पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएम, एडीसी ने पीएनबी के साथ जुड़ने पर कृतज्ञता ज्ञापित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Jul 2022 14:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में औसतन हर 10 में से 4 लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है परन्तु राजस्थान में हर 10 में से 9 लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी के पास स्वास्थ्य बीमा है। देश में औसतन हर 10 में से 4 लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है, लेकिन राजस्थान में हर 10 में से 9 लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-an-average-4-out-of-every-10-people-in--9-people-have-health-insurance--gehlot/article-11294"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/chiranjeevi--yojana-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी के पास स्वास्थ्य बीमा है। देश में औसतन हर 10 में से 4 लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है, लेकिन राजस्थान में हर 10 में से 9 लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है। यह चिरंजीवी योजना की सफलता का परिणाम है। गहलोत ने कहा कि राजस्थान के सभी नागरिकों के लिए चिरंजीवी योजना में 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध है। चिरंजीवी योजना एवं आरजीएसएस से जुड़े हुए परिवार अब महंगे इलाज की चिंता से मुक्त हो चुके हैं। हम प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को निशुल्क इलाज उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत हैं। गहलोत ने प्रधानमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना को सामाजिक, आर्थिक, जातिगत जनगणना  के पात्र परिवारों के साथ राजस्थान की चिरंजीवी योजना की तर्ज पर देश के हर नागरिक के लिए लागू करे, जिससे हर परिवार को 10 लाख रुपये के बीमा का लाभ मिल सके।</p>
<p><strong>देश में क्या स्थिति</strong><br />देश में हर पांच में से 2 लोग स्वास्थ्य बीमा के अंतर्गत आते है। उनमें से 46 प्रतिशत लोग राज्य हेल्थ इंश्योरेंस और तकरीबन 16 प्रतिशत राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के अंतर्गत कवर है और 3-6 प्रतिशत महिलाएं और 4-7 प्रतिशत पुरुष ईएसआईएस और केंद्र सरकार की हेल्थ स्कीम से जुड़े है, लेकिन राज्य स्तर पर स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी आबादी के बीच काफी अंतर है। देश का राजस्थान अकेला ऐसा राज्य है, जहां हर 10 में से करीब 9 लोग यानि 88 प्रतिशत के पास स्वास्थ्य बीमा है या किसी न किसी स्वास्थ्य योजना से जुड़े है, लेकिन अंडमान निकोबार आइलैंड और जम्मू कश्मीर में 15  प्रतिशत से भी कम लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 13:22:31 +0530</pubDate>
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