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                <title>International Relations - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>International Relations RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने की पुतिन से मुलाकात : एकजुटता और समर्थन का वादा, इन मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की। अराघची ने क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच रूस द्वारा दिए गए कूटनीतिक समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों देशों ने आपसी संबंधों को गहरा करने और चुनौतीपूर्ण समय में एकजुटता बनाए रखने का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-araghchi-met-putin-promised-solidarity-and-diplomatic/article-151911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)23.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात की और एकजुटता दिखाने और कूटनीति समर्थन देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। अराघची ने सोमवार को सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन से यह मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर कहा, "इस इलाके में बड़े उतार-चढ़ाव के बीच रूस के साथ उच्चतम स्तर पर बातचीत करके खुशी हो रही है।</p>
<p>हाल की घटनाओं ने हमारी रणनीतिक साझेदारी की गहराई और मजबूती को दिखाया है। जैसे-जैसे हमारा रिश्ता बढ़ रहा है, हम एकजुटता के लिए शुक्रगुजार हैं और कूटनीति के लिए रूस के समर्थन का स्वागत करते हैं।" उन्होंने पुतिन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ अपनी तस्वीरें भी साझा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 12:34:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल सरकार के फैसलों और नीतिगत बदलावों से बिहार के सीमावर्ती इलाकों में आम नागरिकों की बढीं परेशानियाँ, कस्टम ड्यूटी और भारतीय वाहनों की आवाजाही पर लगाया मोटा टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल की नई सरकार द्वारा भारतीय वाहनों और सामान पर भारी कस्टम ड्यूटी लगाने से सीमावर्ती इलाकों में आक्रोश है। कड़े नियमों के कारण व्यापार ठप है और बीरगंज जैसे क्षेत्रों में विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह नीति सदियों पुराने सामाजिक और आर्थिक संबंधों को कमजोर कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/due-to-the-decisions-and-policy-changes-of-nepal-government/article-151185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/balen-shah1.png" alt=""></a><br /><p>मोतिहारी। नेपाल में बालेन शाह के नेतृत्व में हाल ही में बनी नई सरकार के फैसलों और हालिया नीतिगत बदलावों से बिहार के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की परेशानियाँ बढ़ती दिखाई दे रही हैं। नेपाल सरकार ने भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी और भारतीय वाहनों की आवाजाही पर निर्धारित टैक्स को सख्ती से लागू करना शुरू किया है।</p>
<p>नेपाल सरकार ने सीमा पार आने वाले भारतीय वाहनों यथा दोपहिया वाहनों पर 100 रुपये प्रतिदिन, तीन पहिया वाहनों पर 400 रुपये प्रतिदिन और चार पहिया वाहनों (कार, जीप, वैन) पर 600 रुपये प्रतिदिन भंसार शुल्क निर्धारित किया है। यह शुल्क भंसार कार्यालय में जमा करने के बाद ही वाहन को नेपाल में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, नियमों के अनुसार शुल्क चुकाने के बावजूद कोई भी भारतीय वाहन एक आर्थिक वर्ष में अधिकतम 30 दिनों तक ही नेपाल में संचालित किया जा सकेगा, इससे अधिक अवधि के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं वाहनों खासकर दुपहिया वाहनों के मुक्त प्रवेश पर रोक से दोनों तरफ से होने वाले स्थानीय व्यापार पर भी काफी फर्क नजर आ रहा है।</p>
<p>बिहार-नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में आपसी व्यापार इतना प्रगाढ़ है कि दोनों तरफ के व्यापारी एक दूसरा की मुद्रा को सहज स्वीकार करते है और लोक बेरोकटोक एक दूसरे के इलाके में जा कर खरीदारी करते हैं। इस कड़ाई के बाद लोगों का एक दूसरे के इलाकों में प्रवेश कम हो गया है, जिससे बिहार-नेपाल सीमा के पास कारोबार कर रहे व्यावसायियों के की हालत खस्ता है। भारतीय वाहनों के लिए ऐसे नियम पहले से मौजूद थे, लेकिन इस कानून को पिछली सरकारें सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को देखते हुए प्रभावी रूप से लागू नहीं कर पायी थीं, लेकिन अब सख्ती बढ़ने से सीमावर्ती इलाकों में विरोध तेज हो गया है। विशेष रूप से बीरगंज और मधेश क्षेत्र में लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि रोजमर्रा के सामान जैसे खाद्य सामग्री, कपड़े और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भारत से लाना उनकी जरूरत और परंपरा दोनों रही है, जिसे अब यह नीति बाधित कर रही है।</p>
<p>भारत-नेपाल सीमा पर सख्ती के बाद प्रदर्शनकारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि भारत-नेपाल के बीच “रोटी-बेटी” का रिश्ता केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है। नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने भी इस नीति की आलोचना करते हुए कहा है कि यह सीमावर्ती समुदायों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालता है और पारंपरिक रिश्तों को कमजोर करता है। जबकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक रूप से खुली सीमा, आपसी सामंजस्य भावनात्मक सम्बन्धों को परिभाषित करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:59:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-hosting-peace-talks-change-in-indian-diplomacy-necessary-congress/article-151104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:13:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस का तुर्की से आग्रह : यूक्रेन से गैस पाइपलाइनों पर हमला नहीं करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने तुर्की से 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' पाइपलाइनों पर यूक्रेनी हमलों को रोकने की गारंटी मांगी है। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने इन ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। मॉस्को ने अंकारा से आग्रह किया है कि वह यूक्रेन को सख्त चेतावनी दे ताकि क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-urges-turkey-not-to-attack-ukraines-gas-pipelines/article-150995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को । रूस ने तुर्की से बार-बार यह अपील की है कि वह यूक्रेन से इस बात की गारंटी ले कि 'तुर्कस्ट्रीम' और 'ब्लू स्ट्रीम' गैस पाइपलाइन बुनियादी ढांचे पर कोई हमला नहीं किया जाएगा। रूसी उप विदेश मंत्री अलेक्जेंडर ग्रुश्को ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, "काला सागर के नीचे तुर्की को गैस आपूर्ति करने वाली पाइपलाइनों पर यूक्रेन द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों को देखते हुए, हमने अपने तुर्की भागीदारों से बार-बार आग्रह किया है। हमने उनसे कहा है कि वे यूक्रेनी पक्ष को स्पष्ट और कड़े संकेत भेजें और मांग करें कि वे इस तरह के आक्रामक कृत्यों को तुरंत रोकें तथा भविष्य में भी ऐसा न होने की गारंटी दें।"</p>
<p>इससे पहले, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी स्पष्ट किया था कि रूस इन गैस पाइपलाइनों पर बढ़ते खतरे को लेकर तुर्की के साथ लगातार अपनी चिंताएं साझा कर रहा है। वहीं, तुर्की सरकार के सूत्रों के अनुसार, तुर्की इन पाइपलाइनों पर होने वाले हमलों और खतरों की खबरों पर बारीकी से नजर रख रहा है और इस मामले में रूस के साथ निरंतर समन्वय बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 13:33:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी और ट्रंप ने की पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा : होर्मुज खुला रखने पर जोर, अमेरिका-ईरान में फिर वार्ता संभव</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालातों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखने और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता के लिए अपनी तत्परता भी जाहिर की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pm-modi-and-trump-discussed-the-situation-in-west-asia/article-150454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi8.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ फोन पर द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और विशेष रूप से होर्मुज से समुद्री जहाज़ों के सुरक्षित आवागमन के बारे में चर्चा की। ट्रंप के साथ बातचीत के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी बातचीत हुई।  </p>
<p>मोदी ने कहा कि मुझे मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया। हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति  वार्ता के असफल होने के बाद मोदी और ट्रंप के बीच पहली बार बातचीत हुई है और इसे पश्चिम एशिया की स्थिति के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p><strong>ट्रम्प ने कहा: हम ईरान से बातचीत को तैयार</strong></p>
<p>पश्चिम एशिया में तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की कोशिशें तेज कर दी हैं। पाक ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर की मेजबानी का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि हम ईरान से बातचीत के लिए तैयार हैं। अगले दो दिनों में हमारी मुलाकात पाकिस्तान में हो सकती है।  सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद इस दिशा में पहल कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि 21 अप्रैल को खत्म हो रहे 2 सप्ताह के संघर्ष विराम से पहले ही वार्ता का दूसरा दौर आयोजित किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:25:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम का किया स्वागत : पश्चिम एशिया में स्थाई शांति की जताई उम्मीद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने का आग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का पुरजोर समर्थन किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति का एकमात्र मार्ग है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक सुगमता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की बहाली पर विशेष बल दिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-welcomed-the-ceasefire-between-america-and-iran-expressed-hope/article-149542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुये युद्धविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में स्थाई शांति स्थापित होगी। विदेश मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रम पर बुधवार को एक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि भारत पहले से ही इस विवाद के संवाद और कूटनीति से समाधान पर जोर देता रहा है। मंत्रालय ने कहा है, "हम संघर्ष विराम का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी लगातार कहते रहे हैं, तनाव में कमी, संवाद और कूटनीति ही संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं। इस संघर्ष ने पहले ही लोगों को अत्यधिक कष्ट पहुँचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापारिक नेटवर्क को बाधित किया है। हमें उम्मीद है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से नौवहन की निर्वाध स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार का प्रवाह बना रहेगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने बुधवार तड़के दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका और इजरायल ने गत 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ हमलों की शुरुआत की थी। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में पश्चिम एशियाई देशों में अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर हमले किए थे। इन हमलों में जान और माल का व्यापक नुकसान हुआ है। ईरान ने इन हमलों के विरोध में और होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले तेल और गैस टैंकरों के संचालन को बाधित कर दिया था जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल एवं गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 16:39:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति : निर्णायक शांति समझौते की दिशा में अहम कदम, होर्मुज जलडमरुमध्य खुला</title>
                                    <description><![CDATA[तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ निर्णायक युद्धविराम की घोषणा की है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप की समय-सीमा समाप्त होने से पहले मिली इस सहमति ने वैश्विक युद्ध के खतरे को टाल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agree-on-two-week-ceasefire-important-step-towards-decisive-peace/article-149498"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान एक निर्णायक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा वाशिंगटन समयानुसार 18:32 बजे की जो कि श्री ट्रंप द्वारा तय की गई रात आठ बजे की समय सीमा के अंदर थी।</p>
<p>उन्होंने धमकी दी थी कि अगर ईरान घोषित समयसीमा के भीतर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो ईरानी सभ्यता को खत्म कर दिया जाएगा। ईरान के विदेश मेत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि उनका देश दो सप्ताह के युद्ध विराम पर सहमत हो गया है। इस दौरान होर्मुज जलडमरुमध्य को खोल दिया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, युद्ध विराम पर सहमति पाकिस्तान के मध्य्थता से हुई है और इजरायल भी इसपर सहमत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 15:25:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान युद्ध तनाव : ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने ट्रंप से पूछा–अब और क्या हासिल करना बाकी है? युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही पड़ेगा गहरा प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने ईरान पर बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए युद्ध विराम की अपील की है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि युद्ध लंबा खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन आपूर्ति ठप हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन संकट से निपटने के लिए करों में कटौती और रणनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-war-tension-australian-prime-minister-albanese-asked-trump-%E2%80%93/article-148842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/aust.png" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने गुरुवार को ईरान युद्ध में तनाव कम करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है और यह सवाल उठाया है कि ईरान की नौसेना और वायु सेना को कमजोर करने सहित प्रमुख सैन्य उद्देश्य हासिल कर लिए गए हैं, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि अब और क्या हासिल किया जाना बाकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने यहां एक एक भाषण के दौरान कहा, "अब जब वे उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए हैं, तो यह स्पष्ट नहीं है कि और क्या हासिल करने की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे कहा कि युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही गहरा प्रभाव पड़ेगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका-इजरायल के हमलों ने पहले ही ईरान की वायु सेना, नौसेना और सैन्य औद्योगिक आधार को 'क्षतिग्रस्त' कर दिया है।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ट्रंप के उस 19 मिनट के टेलीविजन संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ "दो से तीन सप्ताह और" तक "अत्यधिक कठोर" हमले जारी रखने का संकल्प लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वाशिंगटन का उद्देश्य ईरान की सेना को कुचलना, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को इस्लामी गणराज्य का समर्थन समाप्त करना और उसे परमाणु बम प्राप्त करने से रोकना है। ट्रंप ने कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूर्ण होने के करीब हैं।"</p>
<p>इस बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया, खुद आयातित ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है और उसके पास पेट्रोल का लगभग 37 दिनों का भंडार है। उसने ईंधन करों में कटौती करके और व्यवसायों को 680 मिलियन डॉलर के ऋण का वादा करके आर्थिक झटके को कम करने के कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने कहा कि कैनबरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने के संभावित प्रयासों पर ब्रिटेन और फ्रांस सहित सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:05:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान का यूरेनियम भूमिगत बंकरों में संग्रहित, जब्त करने की अमेरिकी योजना &quot;मिशन इम्पॉसिबल&quot; जैसी: राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. साइमन त्सिपिस</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. साइमन त्सिपिस ने कहा है कि ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्जा करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। भंडार मजबूत भूमिगत बंकरों में सुरक्षित हैं, जहाँ भारी मशीनरी के बिना पहुँचना कठिन है। किसी भी सैन्य प्रयास से रेडियोधर्मी प्रदूषण का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जो पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-plan-to-seize-irans-uranium-stored-in-underground-bunkers/article-148524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/uraniem.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. साइमन त्सिपिस ने कहा है कि अमेरिका का ईरान के विशाल भंडार को अपने कब्जे में लेने और निकालने का कोई भी प्रयास व्यवहारिक रूप से संभव नहीं लगता है। डॉ. त्सिपिस ने स्पुतनिक को यह जानकारी दी। वह राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के एक प्रमुख विशेषज्ञ हैं, जो मुख्य रूप से इजरायली रक्षा प्रणालियों और लेजर हथियारों (जैसे 'आयरन बीम') पर अपने विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान का यूरेनियम मजबूत भूमिगत बंकरों में संग्रहित है औऱ इन तहखानों तक पहुंचना और उनमें सेंध लगाना बहुत कठिन होगा।</p>
<p>यूरेनियम एक खतरनाक पदार्थ है जिसके लिए सावधानीपूर्वक रखरखाव की आवश्यकता होती है। ईरान के पास कई सौ किलोग्राम यूरेनियम है। जिसे निकालने के लिए बड़ी मात्रा में विशेष मशीनरी और उपकरणों की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का कोई भी ऑपरेशन विरोध के बिना नहीं हो सकता। इसके अलावा, यदि यूरेनियम कंटेनर को निकालते समय कोई नुकसान पहुँचता है, तो इससे आसपास के क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैलने का गंभीर खतरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 14:26:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का दावा: अमेरिका, ईरान के बीच वार्ता की मध्यस्थता करने के लिए तैयार है पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की भी हो सकते हैं शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि उनका देश ईरान और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी करेगा। सऊदी अरब और तुर्की के समर्थन से यह कूटनीतिक प्रयास बढ़ते सैन्य तनाव और तेल संकट के बीच शुरू हुआ है। दोनों देशों के साथ अच्छे संबंधों के कारण पाकिस्तान इस जटिल संघर्ष में मुख्य मध्यस्थ बनकर उभरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistani-foreign-minister-ishaq-dar-claims-america-is-ready-to/article-148465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/isak-dar.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान जल्द ही ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता वार्ता की मेज़बानी करने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने रविवार को इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इसको लेकर मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष राजनयिकों के साथ बातचीत हुई है। ये बातचीत ऐसे समय में हुई जब ईरान ने अमेरिका को ज़मीनी हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी थी और अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी जंग के चलते वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।</p>
<p>इशाक डार ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत सीधी होगी या परोक्ष, या यह कब और कहाँ होगी लेकिन उन्होंने कहा कि यह आने वाले दिनों में होगी। पाकिस्तानी विदेश मंत्री के दावों के बाद अमेरिका या ईरान, किसी ने भी तत्काल कोई टिप्पणी जारी नहीं की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान बहुत खुश है कि ईरान और अमेरिका दोनों ने बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अपना भरोसा जताया है, जो आने वाले दिनों में होगी।</p>
<p>राजनयिकों से मुलाक़ात के बाद इशाक डार ने दावा किया कि उन्होंने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का सक्रिय रूप से समर्थन किया है और पाकिस्तान से अपील की है कि वह शामिल पक्षों के बीच व्यवस्थित बातचीत के लिए माहौल तैयार करे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इशाक डार ने बढ़ते तनाव के बीच शांति तक पहुँचने के एकमात्र व्यावहारिक रास्ते के रूप में कूटनीति की वकालत की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को समाप्त करने के सभी प्रयासों और पहलों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। उन्होंने कहा, "हम स्थिति को शांत करने और संघर्ष का समाधान खोजने के अपने प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।" पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि मंत्री चतुष्पक्षीय बैठक समाप्त होने के बाद पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं।</p>
<p>इशाक डार ने बताया कि इस बैठक के बाद प्रत्येक मंत्री के साथ अलग-अलग बहुत ही सार्थक द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरते हुए, पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ कूटनीतिक रूप से अच्छे संबंध हैं। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि उनके ये सार्वजनिक प्रयास हफ़्तों की खामोश कूटनीति के बाद सामने आए हैं, हालाँकि अब तक न तो ईरान और न ही अमेरिका ने बातचीत करने में बहुत ज़्यादा इच्छा दिखाई है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अब तक कूटनीति और बातचीत करने के प्रयासों को लेकर अमेरिका की गंभीरता के बारे में मिले-जुले संकेत दिए हैं। जहाँ एक ओर उन्होंने इस्लामिक गणराज्य के नेतृत्व के साथ बातचीत करने की सक्रिय रूप से अपील की है, वहीं साथ ही उन्होंने अमेरिकी सेना की तरफ से बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान की तैयारियों को लेकर चेतावनी भी दी है। यहाँ तक कि उन्होंने ज़मीन पर पूरी तरह से हमला करने की धमकी भी दी है। सैन्य शक्ति प्रदर्शन को और बढ़ाते हुए, अमेरिका ने इस क्षेत्र में हज़ारों अतिरिक्त सैनिक और एक पूरा नया नौसैनिक हमला समूह भेजा है, जिसमें एक हमलावर जहाज़ और लड़ाकू विमान शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:24:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>देश की विदेश नीति पर चिंता जताते हुए प्रमोद तिवारी ने साधा केन्द्र सरकार पर निशाना, बोले-पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ के रूप में पेश करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार की विदेश नीति को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान-अमेरिका तनाव में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाने की चर्चा पर चिंता जताई। तिवारी ने 'अब की बार ट्रंप सरकार' नारे पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या देश की सुरक्षा और सम्मान से समझौता किया जा रहा है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/expressing-concern-over-the-countrys-foreign-policy-pramod-tiwari-targeted/article-148375"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pramod-tiwari-1738226239.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद प्रमोद तिवारी ने देश की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। प्रमोद तिवारी ने सोमवार को यहां एक बयान में कहा कि जिस पाकिस्तान ने पहलगाम जैसी घटनाओं में देश की बहनों का सुहाग उजाड़ने का काम किया, उसी पाकिस्तान को आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ के रूप में पेश किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की मध्यस्थता की बात कहना और इस्लामाबाद में संभावित वार्ता को भारत के लिए अत्यंत चिंताजनक बताया।</p>
<p>कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने 'अब की बार ट्रंप सरकार' का नारा दिया था लेकिन आज देश की विदेश नीति को किस दिशा में ले जाया जा रहा है, यह सवाल खड़ा हो रहा है।" उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि, पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए "सार्थक वार्ता" की मध्यस्थता और मेजबानी करने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 12:58:46 +0530</pubDate>
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                <title>क्यूबा ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार राष्ट्रव्यापी विद्युत ठप होने की घोषणा की, ट्रंप ने की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी</title>
                                    <description><![CDATA[ईंधन संकट और ग्रिड फेल होने से क्यूबा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और अमेरिकी प्रतिबंधों ने तनाव बढ़ा दिया है। द्वीप पर पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। क्यूबा सरकार ने मानवीय सहायता के बीच संभावित हमले की आशंका जताते हुए हाई अलर्ट जारी किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cuba-announces-second-nationwide-blackout-in-a-week-trump-predicts/article-147421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cuba.png" alt=""></a><br /><p>हवाना। क्यूबा के ऊर्जा मंत्रालय ने शनिवार शाम को घोषणा किया कि पूरे द्वीप में एक बार फिर विद्युत ठप हो गई है जिससे एक करोड़ से अधिक लोग बिजली के बिना रह गए हैं। यह जानकारी सीएनएन ने रविवार को दी। मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राष्ट्रीय विद्युत प्रणाली पूरी तरह से ठप हो गई है। बिजली बहाल करने के लिए प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं।"</p>
<p>सोमवार को हुए भीषण विद्युत ग्रिड के ठप होने से क्यूबा अभी उबर ही रहा था। यह इस साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला से ईंधन की आपूर्ति पर रोक लगाने के बाद पहली घटना थी। शनिवार को विद्युत ठप होने से ठीक पहले, देश की सरकारी बिजली कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा था कि शनिवार रात को सबसे व्यस्त समय के दौरान उसे 1.704 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल के दिनों में क्यूबा के बारे में अक्सर बातें की है और वहां की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार के जल्द ही गिरने की भविष्यवाणी की है। सोमवार को उन्होंने खुलेआम यह सवाल उठाया था कि क्या उन्हें इस द्वीप पर कब्जा करने का सम्मान प्राप्त होगा।</p>
<p>हालांकि, जब राष्ट्रपति ट्रम्प से पूछा गया कि क्या क्यूबा को अपने कब्जे में लेने के अभियान में उसी तरह का बल का प्रयोग किया जाएगा जैसा कि जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के दौरान किया था, तो उन्होंने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>शनिवार को क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल ने द्वीप पर मानवीय सहायता पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार का मानना है कि क्यूबा पर हमला हो सकता है और तदनुसार वह तैयारी कर रही है। पिछले सप्ताह, राष्ट्रपति डियाज़-कैनेल ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि क्यूबा ईंधन प्रतिबंध समाप्त करने के लिए अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, क्यूबा सरकार ने स्पष्ट किया कि उसका अपनी राजनीतिक व्यवस्था पर बातचीत करने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p>क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में क्रांतिकारियों द्वारा 1959 में फुल्गेन्सियो बतिस्ता की सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से, देश अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। क्यूबा ने पहले भी गंभीर आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना किया है, जैसे कि "विशेष काल", जब 1991 में सोवियत संघ का पतन हुआ तब इसका प्रभाव उस समय के कम्युनिस्ट सरकार के मुख्य बाहरी सहायता स्रोत पर पड़ा।</p>
<p>यह ताजा संकट भी उतना ही निराशाजनक है। मेक्सिको और वेनेजुएला से ईंधन की कमी के कारण द्वीप का पर्यटन लगभग ठप हो गया है, शिक्षा व्यवस्था बाधित हुई है, अस्पतालों में सेवाएं कम हो गई हैं और किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 16:05:10 +0530</pubDate>
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