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                <title>Truth Social - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता पर साधा निशाना : भारत और चीन को बताया 'नरक', नागरिकता कानूनों की आलोचना की</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता नीति की आलोचना करते हुए भारत और चीन जैसे देशों के लिए विवादास्पद शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर साझा पत्र में प्रवासियों पर संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। ट्रंप ने इस संवैधानिक प्रावधान को बदलने और आप्रवासन कानूनों को और सख्त करने की वकालत की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-targets-birthright-citizenship-calls-india-and-china/article-151453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच भारत और चीन सहित कुछ देशों को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है, जिससे नयी राजनीतिक चर्चा छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पत्र साझा करते हुए इन देशों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया और जन्मसिद्ध नागरिकता सहित कई अमेरिकी नागरिकता कानूनों की आलोचना की।</p>
<p>पत्र में कैलिफ़ोर्निया के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नियुक्तियों को लेकर दावा किया गया है कि वहां भारत और चीन से आए लोगों का वर्चस्व है, हालांकि इसके समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। पत्र का मुख्य विषय जन्मसिद्ध नागरिकता की नीति है, जिसके तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता मिलती है। इसमें आरोप लगाया गया है कि इस प्रावधान का उपयोग कर प्रवासी अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी देश में लाते हैं।</p>
<p>पत्र में कहा गया, "यहां पैदा होने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वे चीन, भारत या दुनिया के किसी अन्य 'नरक' से अपने पूरे परिवार को यहां ले आते हैं।" इस पत्र की भाषा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर निर्णय न्यायालयों या वकीलों के बजाय जनमत से होना चाहिए। इसमें एक सामाजिक माध्यम सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि बहुमत इस नीति में बदलाव के पक्ष में है, साथ ही न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास भी व्यक्त किया गया है। पत्र में अमेरिकी नागरिक स्वतंत्रता संघ (एसीएलयू) की भी आलोचना की गई है और उस पर ऐसी नीतियों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है, जो कथित रूप से अवैध प्रवासियों को लाभ पहुंचाती हैं।</p>
<p>इसके अलावा पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रवासी स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग करते हैं, जिससे करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसमें कैलिफ़ोर्निया जैसे प्रांतो में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही का भी संदर्भ दिया गया है और संवैधानिक व्याख्या को वर्तमान परिस्थितियों से असंगत बताया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:40:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>Donald Trump का बयान : इजरायल को बताया अमेरिका का ‘महान सहयोगी’, कहा-वह जीतना जानता है</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की प्रशंसा करते हुए उसे एक ऐसा सहयोगी बताया जो जीतना जानता है। ट्रूथ सोशल पर उन्होंने कहा कि इजरायल ने अपनी काबिलियत साबित की है। हालांकि, यह बयान उनके उस निर्देश के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने इजरायल को लेबनान पर बमबारी तुरंत बंद करने को कहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-statement-called-israel-a-great-ally-of-america/article-150998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इजरायल ने खुद को अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है जो जीतना जानता है। ट्रंप ने ट्रूथसोशल पर कहा, "चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या न करें, उसने अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है।" उन्होंने कहा कि इजरायल जीतना जानता है, "कुछ लोगों के विपरीत" जिन्होंने संघर्ष और तनाव के दौरान अपना असली रंग दिखाया है। राष्ट्रपति ने इस बारे में और कोई जानकारी नहीं दी। यह टिप्पणी उनके उस बयान के एक दिन बाद आई है जिसमें उन्होंने इजरायल से कहा था कि लेबनान पर बमबारी करना "निषिद्ध" है और "बहुत हो गया"।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 17:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान में अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना : डोनाल्ट ट्रंप ने पोप लियो पर साधा निशाना, बोले-ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं जो उनकी नीतियों का करते हों विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें "राजनीति छोड़ धर्मगुरु बनने" की सलाह दी है। ईरान और वेनेजुएला नीतियों पर पोप के विरोध को ट्रंप ने अस्वीकार्य बताया। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर स्पष्ट किया कि वे केवल वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें जनादेश मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/criticizing-american-action-in-iran-donald-trump-targeted-pope-leo/article-150160"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो चौदहवें पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं है जो उनकी नीतियों का विरोध करते हों। पोप ने ईरान में अमेरिका के कदमों की आलोचना की है। विशेष रूप से, उन्होंने ईरानी लोगों के विरुद्ध अमेरिकी धमकियों को अस्वीकार्य बताया। अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने सैन्य कर्मियों के लिए प्रार्थना के आह्वान किया था, जिसके बाद पोप ने एक प्रवचन में कहा था कि प्रभुत्व जमाने की इच्छा ईसा मसीह के मार्ग के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>अमेरिकी नेता ने 'ट्रुथ सोशल' पर कहा, "मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे लगता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला करना भयानक लगता हो, जबकि वेनेजुएला संयुक्त राज्य अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेज रहा था। इससे भी बुरा यह कि वेनेजुएला अपनी जेलों से हत्यारों और मादक पदार्थों के तस्करों को हमारे देश में भेज रहा था।</p>
<p>मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जो संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे, जबकि मैं तो केवल वही कर रहा हूं, जिसके लिये मुझे भारी बहुमत से चुना गया है।" राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि वह व्हाइट हाउस में न होते, तो "लियो वेटिकन में नहीं होते।" डोनाल्ट ट्रंप ने पोप से "कट्टरपंथी वामपंथियों" को बढ़ावा देना बंद करने और "एक राजनेता के बजाय एक महान धर्मगुरु बनने पर ध्यान केंद्रित करने" का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 15:09:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान नीति की आलोचना : चार पत्रकारों पर डोनाल्ड ट्रंप ने किए तीखे हमले, 'पागल' और 'मूर्ख' दिया करार</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान नीति की आलोचना करने वाले टकर कार्लसन और मेगिन केली जैसे पत्रकारों को 'कम आईक्यू' वाला और 'पागल' करार दिया है। उन्होंने 'मागा' (MAGA) का अर्थ मजबूती और ईरान को परमाणु मुक्त रखना बताया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ये पत्रकार सस्ती लोकप्रियता के लिए देश के हितों के खिलाफ बोल रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trump-launches-sharp-attacks-on-four-journalists-who-criticized/article-149813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ईरान नीति की आलोचना करने वाले चार दिग्गज पत्रकारों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'पागल' और 'मूर्ख' करार दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर साझा किए गए एक पोस्ट में इन पत्रकारों को 'मुसीबत पैदा करने वाला' बताया और कहा कि वे सस्ती लोकप्रियता के लिए कुछ भी कह सकते हैं। उन्होंने मुख्य रूप से पत्रकार टकर कार्लसन, मेगिन केली, कैंडिस ओवेन्स और एलेक्स जोन्स पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग वर्षों से उनके खिलाफ लिख रहे हैं तथा उन्हें (पत्रकारों) लगता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना बहुत अच्छी बात है।</p>
<p>ईरान को 'आतंकवाद का नंबर एक प्रायोजक देश' बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इन तथाकथित जानकारों में एक बात समान है और वह है इनका 'कम आईक्यू'। उन्होंने कहा, "ये मूर्ख लोग हैं, वे खुद यह जानते हैं, उनके परिवार वाले जानते हैं और बाकी दुनिया भी यह जानती है।" ट्रंप ने जोर देकर कहा कि 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (मागा) का मतलब जीत, मजबूती और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने दावा किया कि 'मागा' समर्थक उनके साथ हैं और उन्होंने टकर कार्लसन या मेगिन केली जैसे 'मूर्खों' के बजाय ट्रंप को शत-प्रतिशत 'अप्रूवल रेटिंग' दी है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत हमला करते हुए मेगिन केली के पुराने सवालों, कैंडिस ओवेन्स द्वारा फ्रांस की प्रथम महिला पर की गई टिप्पणियों और एलेक्स जोन्स की बातों को मूर्खतापूर्ण बताया। उन्होंने केबल न्यूज नेटवर्क (सीएनएन) और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों की भी आलोचना की और कहा कि ये संस्थान पहली बार इन लोगों को कवरेज दे रहे हैं क्योंकि वे ट्रंप के खिलाफ बोल रहे हैं। गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब इन पत्रकारों ने ईरान पर सैन्य हमलों के ट्रंप प्रशासन के फैसले की सार्वजनिक आलोचना की। टकर कार्लसन ने ईरान ऑपरेशन को 'घृणित' बताया था, जबकि कैंडिस ओवेन्स ने राष्ट्रपति ट्रंप को हटाने तक की मांग कर दी थी। एलेक्स जोन्स, जो लंबे समय तक श्री ट्रंप के समर्थक रहे, उन्होंने भी इस संघर्ष को लेकर अपना रुख बदल लिया है। यह टकराव 'मागा' आंदोलन के भीतर एक बड़ी दरार को दर्शाता है। अमेरिका फर्स्ट की विदेश नीति, विशेष रूप से ईरान युद्ध और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर उपजे मतभेदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को अपने पुराने सहयोगियों से अलग कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:04:00 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प ने फिर दी चेतावनी : होर्मुज खोलने के लिए ईरान के पास सिर्फ 48 घंटे, फिर कहर बरपेगा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) खोलने के लिए ईरान को दी गई 10 दिन की मोहलत खत्म होने से पहले 48 घंटे का आखिरी अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि समझौता न होने पर ईरान पर 'कहर' टूटेगा। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति ठप हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-again-warns-that-iran-has-only-48-hours-to/article-149151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ईरान को दिया गया 10 दिन का समय खत्म होने में अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। ईरान-अमेरिका के बीच समझौता न होने या होर्मुज न खुलने की स्थिति में ईरान पर कहर टूट पड़ेगा।  उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था। समय निकलता जा रहा है। सिर्फ 48 घंटे बाद ईरान पर कहर टूट पड़ेगा। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका, इजरायल और इनके सहयोगियों के जहाजों को होर्मुज से पार नहीं होने देगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:37:56 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप का सैन्य हुंकार: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, अमेरिका आधुनिक हथियारों से सुसज्जित और बड़ी जीत के लिए तैयार, इतने मजबूत पहले कभी नहीं रहे </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका के पास हथियारों की "असीमित आपूर्ति" है और वह किसी भी लंबे युद्ध को जीतने में सक्षम है। उन्होंने जो बाइडन पर यूक्रेन को हथियार देकर भंडार खाली करने का आरोप लगाया। ट्रंप ने सैन्य पुनर्निर्माण का संकल्प दोहराते हुए कहा कि अमेरिकी शक्ति अब अभूतपूर्व स्तर पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-donald-trump-said-america-has-enough-arms-stockpile-we/article-145175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका के पास मध्यम और उच्च-मध्यम श्रेणी के हथियार का पर्याप्त भंडार है। राष्ट्रपति ने कहा कि हथियारों के भंडारण के मामले में वह "इतने मजबूत पहले कभी नहीं रहे" और देश के पास हथियारों की "लगभग असीमित आपूर्ति" है।</p>
<p>डोनाल्ट ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि इन भंडारों के सहारे युद्ध "लंबे समय तक" और "सफलतापूर्वक" लड़े जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि ये हथियार अन्य देशों के श्रेष्ठ हथियारों से भी बेहतर हैं।</p>
<p>उन्होंने स्वीकार किया कि अत्याधुनिक श्रेणी के हथियारों के मामले में अमेरिका के पास पर्याप्त भंडार है लेकिन "जहां होना चाहिए वहां अभी नहीं है।" उन्होंने कहा कि अतिरिक्त उच्च-स्तरीय हथियार विदेशों में सुरक्षित रखे गये हैं।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर आरोप लगाया कि उन्होंने यूक्रेन को सैकड़ों अरब डॉलर मूल्य के अत्याधुनिक हथियार और संसाधन दिए लेकिन उनकी भरपाई नहीं की। उन्होंने कहा कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने अमेरिकी सेना का पुनर्निर्माण किया था और इसे आगे भी जारी रखेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "अमेरिका आधुनिक हथियारों से सुसज्जित है और बड़ी जीत के लिए तैयार है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 11:54:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इराक को चेतावनी, कहा-अल मलिकी बने प्रधानमंत्री तो मदद नहीं करेगा अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नूरी अल-मलिकी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर अमेरिका इराक की मदद नहीं करेगा। उन्होंने उनके पिछले कार्यकाल को अराजक और असफल बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-donald-trump-warns-iraq-that-america-will-not-help/article-141103"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(13)3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर इराक के पूर्व प्रधानमंत्री नूरी कमाल अल-मलिकी सत्ता में वापस आते हैं, तो अमेरिका अब इराक की मदद नहीं करेगा। ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, मुझे पता चला है कि इराक नूरी अल-मलिकी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की भूल करने जा रहा है। पिछली बार मलिकी सत्ता में थे तो उनका देश गरीबी और अराजकता में डूब गया था। ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहिए।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, अल-मलिकी की नीतियों और विचारधाराओं के कारण, अगर वह चुने जाते हैं, तो अमेरिका अब इराक की मदद नहीं करेगा। हमारी मदद के बिना इराक के सफल, समृद्ध और स्वतंत्र होने की संभावनाएं शून्य प्रतिशत हैं। उल्लेखनीय है कि 2006 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में काम करने वाले अल-मलिकी को शनिवार को इराक की संसद में मुख्य शिया गुट ने सरकार बनाने के लिये मनोनीत किया था। अगले चरण में इराक के राष्ट्रपति अल-मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिये मनोनीत करेंगे, हालांकि देश में अभी कोई राष्ट्रपति नहीं है। </p>
<p>इराक की संसद मंगलवार को एक राष्ट्रपति चुनने वाली थी, लेकिन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर सहमति न बनने के कारण यह प्रक्रिया स्थगित हो गयी। इराक में राष्ट्रपति का पद महज एक औपचारिकता होता है, इसलिए अल-मलिकी का चुना जाना लगभग तय है। इराक की संसद का शिया गुट पड़ोसी ईरान का करीबी है। ऐसे में अल-मलिकी के सत्ता में आने से इराक-ईरान संबंध सुधरने की संभावना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 17:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस को दी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी, सामने आई चौकाने वाली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने से इनकार करने पर फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी दी है। उन्होंने मैक्रों का ग्रीनलैंड पर असहमति वाला निजी संदेश भी लीक किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-you-dont-join-the-board-of-peace-trump-threatens/article-140230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/donald-trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ समय सभी देशों पर ट्रेरिफ लगा रहे हैं, इससे पहले उन्होंने भारत को भी 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसी बीच अब ट्रंप ने फ्रांस के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। बता दें कि यह चेतावनी फ्रांस द्वारा ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से इनकार करने के बाद सामने आई है। </p>
<p>मीडिया से रूबरू होते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, अगर फ्रांस ने दुश्मनाना रवैया अपनाया तो भारी टैरिफ लगाया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि इससे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को बोर्ड में शामिल होने पर मजबूर होना पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार, इस विवाद को और हवा तब मिली जब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर मैक्रों का एक निजी संदेश साझा किया। बता दें कि संदेश में ग्रीनलैंड को लेकर असहमति जताई गई थी और दावोस में G7 नेताओं के साथ मुलाकात का प्रस्ताव भी रखा गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:16:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों के बाद ग्रीनलैंड, डेनमार्क में भड़का विरोध प्रदर्शन, ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड की संप्रभुता के समर्थन में कोपेनहेगन और नूक में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रधानमंत्री निल्सन ने ट्रंप की आयात शुल्क और अधिग्रहण की धमकी को सिरे से खारिज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/protests-broke-out-in-denmark-after-us-president-trumps-statements/article-140011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/hands-off-greenland-demonstration-in-copenhagen.webp" alt=""></a><br /><p>कोपेनहेगन। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने के अमेरिकी प्रयासों और बयानों के विरोध में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के कई शहरों में विशाल विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। </p>
<p>डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के 'सिटी हॉल स्क्वायर' पर शनिवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 12 बजे (भारतीय समयानुसार अपराह्न 4:30 बजे) भारी भीड़ जमा हुई, जिसने अमेरिकी दूतावास तक मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों देशों के नागरिक शामिल हुए, जो अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे हुए थे। </p>
<p>इस बीच ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में भी दोपहर से ही लोग जुटना शुरू हो गए और ग्रीनलैंडवासियों का है ग्रीनलैंड के नारे लगाए। इस प्रदर्शन में ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक इनुइट गीत गाए और कई लोग मेक अमेरिका गो अवे (अमेरिका को वापस भेजो) लिखी हुई टोपियां पहने नजर आये। </p>
<p>प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अमेरिका एक फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड की खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं होता है, तो एक जून से इस शुल्क को बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एक स्वशासी क्षेत्र है, जिसकी रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क सरकार के नियंत्रण में है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी इस द्वीप को खरीदने की इच्छा जतायी थी, लेकिन अब वे इसे हासिल करने के लिए अमेरिकी सेना के उपयोग सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। </p>
<p>इससे पहले बुधवार को वॉशिगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई थी, जिसमें ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर मौलिक असहमति बनी रही। इस बीच, ट्रंप की आयात शुल्क लगाने की धमकियों पर नॉर्डिक देशों और यूरोपीय संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देशों ने ब्लैकमेल और अस्वीकार्य करार देते हुए एकजुट होकर जवाब देने की चेतावनी दी है। </p>
<p>डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने इस धमकी पर हैरानी जताते हुए कहा कि वे यूरोपीय आयोग के संपर्क में हैं। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने स्पष्ट किया कि सहयोगियों के बीच विवादों का समाधान दबाव के बजाय बातचीत से होना चाहिए। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इसे सीधे तौर पर ब्लैकमेल बताते हुए कहा कि स्वीडन ऐसी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। </p>
<p>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी ट्रंप के कदम की आलोचना की है। मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय देश इस पर समन्वित प्रतिक्रिया देंगे, जबकि स्टार्मर ने ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला डेनमार्क और वहां के लोगों द्वारा किए जाने की वकालत की। </p>
<p>यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने चेतावनी दी कि ऐसे कदम से ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में गिरावट आएगी। इस बीच, यूरोपीय संसद में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों को स्थगित करने और दबाव विरोधी रणनीति जैसे सख्त व्यापारिक हथियारों के इस्तेमाल की मांग तेज हो गयी है। साइप्रस की अध्यक्षता में रविवार को यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के राजदूतों की आपात बैठक बुलाई गयी है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 18:54:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड विवाद:  बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर लगाई रोक</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड न बेचने पर आयात शुल्क लगाने की धमकी के बाद ईयू ने प्रस्तावित व्यापार समझौते पर रोक लगा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/eu-bans-proposed-trade-deal-with-us-amid-rising-tension/article-139976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। ग्रीनलैंड मामले में अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईयू ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी है। ईयू ने यह कदम डेनमार्क और संघ के कई देशों पर अमेरिका द्वारा आयात शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद उठाया है। ईयू के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ये आयात शुल्क संघ और अमेरिका के संबंधों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। साथ ही, उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता ऐसे सिद्धांत हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।</p>
<p>गौरतलब है कि, जुलाई 2025 में प्रस्तावित समझौते को आयात शुल्क कम करने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया था। हालांकि ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख और और आयात शुल्क लगाने की उनकी चेतावनी के बाद संघ ने इस प्रस्तावित समझौते के अनुमोदन को रोकने का आह्वान किया है। </p>
<p>ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में धमकी दी है कि यदि ग्रीनलैंड को'पूरी तरह' से अमेरिका को नहीं बेच दिया जाता, तो एक फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो 1 जून से बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा।</p>
<p>ट्रंप ने ग्रीनलैंड के'रणनीतिक स्थान और खनिज संसाधनों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी, एक फरवरी 2026 से, उपर्युक्त सभी देशों द्वारा अमेरिका को भेजे जाने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। एक जून 2026 को यह शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। यह तब तक लागू रहेगा, जब तक ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए कोई समझौता नहीं हो जाता।</p>
<p>यूरोपियन पीपल्स पार्टी के उपाध्यक्ष सिगफ्राइड मूरसन और अन्य यूरोपीय अधिकारियों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घोषणा उस स्थिरता को कमजोर करती है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए यह व्यापार समझौता किया गया था। मूरसन ने कहा, पिछले साल अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते से स्थिरता ही एकमात्र लाभ होता। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कई ईयू सदस्य देशों पर नए आयात लगाने की आज की घोषणा उस स्थिरता को छीन लेती है। यही कारण है कि उस व्यापार समझौते के अनुसमर्थन को स्थगित करना उचित है।</p>
<p>मूरसन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, हमें पिछले जुलाई के ईयू-यूएस व्यापार समझौते को बहुत जल्द अनुमोदित करना था, जिससे अमेरिका से यूरोपीय संघ में होने वाले आयात पर आयात शुल्क शून्य हो जाता। हालांकि, हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए इस मंजूरी के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को हासिल करने पर आमादा हैं। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपने 'आत्मनिर्णय के अधिकार' पर जोर देते हुए इस विचार को खारिज कर दिया है। बढ़ते तनाव के जवाब में, डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है, जबकि जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस, नॉर्वे और नीदरलैंड ने भी छोटी सैन्य टुकड़यिाँ भेजी हैं। यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के किसी भी अमेरिकी प्रयास का नाटो और अटलांटिक के दोनों ओर की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 13:35:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने की शांति बोर्ड की घोषणा, गाजा योजना के दूसरे चरण की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण और विसैन्यीकरण हेतु 'पीस बोर्ड' का गठन किया, जो नई तकनीकी फिलिस्तीनी सरकार की निगरानी करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-announces-peace-board-launch-of-second-phase/article-139779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गाजा की निगरानी के लिए शांति बोर्ड के गठन की घोषणा की है। यह घोषणा इजरायल और हमास के बीच दो साल के संघर्ष के पश्चात हुए संघर्ष विराम के कुछ महीने बाद की गई है। गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपनी 20 सूत्री शांति योजना के दूसरे चरण के रूप में राष्ट्रपति ने संघर्ष विराम से अपना ध्यान हटाकर विसैन्यीकरण, तकनीकी शासन एवं पुनर्निर्माण पर केंद्रित किया है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका ने आधिकारिक रूप से गाजा शांति योजना के अगले चरण में प्रवेश कर लिया है जिसका मुख्य कारण संघर्ष विराम के दौरान वितरित की गई मानवीय सहायता का रिकॉर्ड स्तर है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, संघर्ष विराम के बाद से लगातार मेरी टीम ने गाजा में रिकॉर्ड स्तर की मानवीय सहायता पहुंचाने में मदद की है जिससे ऐतिहासिक गति से बड़ी संख्या में नागरिकों तक सहायता पहुंची है। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे अभूतपूर्व उपलब्धि बताया है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, मुझे घोषणा करते हुए अत्यंत गर्व महसूस हो रहा है कि शांति बोर्ड का गठन हो चुका है। बोर्ड के सदस्यों की घोषणा शीघ्र ही की जाएगी, लेकिन मैं विश्वासपूर्वक कह सकता हूं कि यह अब तक किसी भी समय, किसी भी स्थान पर गठित किया गया सबसे महान एवं प्रतिष्ठित बोर्ड है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ का हवाला देते हुए घोषणा किया कि हमने आधिकारिक रूप से गाजा की 20 सूत्री शांति योजना के अगले चरण में प्रवेश कर लिया है। राष्ट्रपति ने अपने पोस्ट में लिखा, शांति बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में, मैं बोर्ड के उच्च प्रतिनिधि द्वारा समर्थित नवगठित फिलस्तीनी तकनीकी सरकार, नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा का समर्थन करता हूं ताकि गाजा में संत्ता हस्तांतरण काल के दौरान उसका शासन संभाला जा सके। फिलिस्तीनी नेता शांतिपूर्ण भविष्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। </p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिस्र, तुर्की और कतर के समर्थन से अमेरिका हमास के साथ एक व्यापक विसैन्यीकरण समझौता सुरक्षित करेगा जिसमें सभी हथियारों का आत्मसमर्पण और सभी सुरंगों को नष्ट करना शामिल है। उन्होंने आगे कहा, हमास को तुरंत अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए जिसमें इजरायल को अंतिम शव लौटाना भी शामिल है और बिना किसी देरी के पूर्ण रूप से सैन्य निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है वे इसे आसान या कठिन तरीके से कर सकते हैं। गाजा के लोग बहुत लंबे समय से पीड़ा झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि शक्ति के बल पर शांति की स्थापना हो।</p>
<p>अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प की योजना के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत की घोषणा की और पुष्टि की है कि क्षेत्र में एक तकनीकी-प्रधान फिलिस्तीनी सरकार की स्थापना की जा रही है। विटकॉफ ने कहा कि पहले चरण के अंतर्गत, हमास और इजरायल अक्टूबर में युद्धविराम, बंधकों की अदला-बदली, इजरायल की आंशिक वापसी और मानवीय सहायता में वृद्धि पर सहमत हुए। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में गाजा का पुनर्निर्माण एवं पूर्ण विसैन्यीकरण शामिल है जिसमें हमास और अन्य फिलिस्तीनी समूहों का निरस्त्रीकरण भी शामिल है।</p>
<p>विटकॉफ ने कहा कि अमेरिका हमास से अपने दायित्वों का पूर्ण निर्वहन करने की उम्मीद करता है। उन्होंने आगे कहा कि इनमें अंतिम मृत इजरायली बंधक के शव की वापसी भी शामिल है और ऐसा करने में विफल रहने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद, जेरेड कुशनर ने इस घोषणा की सराहना की, जो मध्य पूर्व पर विशेष सलाहकार के रूप में विटकॉफ के साथ काम कर चुके हैं। दूसरे चरण के दो प्रमुख तत्व हालांकि समस्या उत्पन्न करने वाला साबित हो सकते हैं। हमास ने पहले एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के निर्माण के बिना अपने हथियार छोडऩे से इनकार कर दिया था जबकि इजरायल ने गाजा से पूर्ण रूप से पीछे हटने की कोई प्रतिबद्धता व्यक्त नहीं की है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 13:10:30 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप-पेट्रो वार्ता: राष्ट्रपति ट्रंप ने दिया कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो को अमेरिका आने का न्यौता, इन मुद्दों पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के बीच फोन पर सकारात्मक बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने नशीली दवाओं की तस्करी और आपसी मतभेदों पर चर्चा की और जल्द व्हाइट हाउस में मिलने पर सहमति जताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-trump-invited-colombias-president-gustavo-petro-to-come-to/article-138853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump-and-petro.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोलंबिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की बात करने के कुछ ही दिनों बाद, बुधवार को दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच टेलीफोन पर बात हुई। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में बताया कि कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने नशीली दवाओं की तस्करी और दोनों देशों के बीच जारी अन्य विवादों पर चर्चा करने के लिए उन्हें फोन किया था। इस बातचीत के बाद ट्रंप ने घोषणा की है कि पेट्रो के साथ राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस में (एजेंसी) की तैयारी की जा रही है।</p>
<p>गौरतलब है कि, जनवरी 2025 में ट्रंप के कार्यभार संभालने और वेनेजुएला में हालिया सैन्य अभियान के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहला सीधा संवाद है। ट्रंप ने लिखा, कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के साथ बात करना सम्मान की बात थी। उन्होंने नशीली दवाओं की स्थिति और हमारे बीच रहे मतभेदों को समझाने के लिए फोन किया था। मैं उनके कॉल और बात करने के लहजे की सराहना करता हूं और निकट भविष्य में उनसे मिलने के लिए उत्सुक हूं।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और कोलंबिया के विदेश मंत्री के बीच बैठक की तैयारियां की जा रही हैं। यह बैठक व्हाइट हाउस में होगी, हालांकि अभी इसकी तारीख की घोषणा नहीं की गयी है। पेट्रो ने भी इस बातचीत की पुष्टि करते हुए इसे 'सौहार्दपूर्ण' बताया और कहा कि उन्होंने दोनों सरकारों के बीच सीधे संवाद की बहाली का अनुरोध किया है। पेट्रो ने राजधानी बोगोटा में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह बातचीत एक घंटे से अधिक समय तक चली।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, राष्ट्रपति ट्रम्प की सत्ता में वापसी के बाद से अमेरिका और कोलंबिया के बीच संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। ट्रंप ने बार-बार कोलंबिया पर अमेरिका में कोकीन की तस्करी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। कोलंबिया ने इन आरोपों को झूठा बताया और स्पष्ट किया है कि वह संवाद, सहयोग और आपसी सम्मान पर आधारित संबंधों के लिए प्रतिबद्ध है और राज्यों के बीच बल प्रयोग या धमकी की बात अस्वीकार्य है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 14:08:41 +0530</pubDate>
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