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                <title>मेडल जीते, फिर भी नौकरी का गोल हो रहा फेल, खेल का सर्टिफिकेट लेने के बाद खिलाड़ी सरकारी नौकरी की तरफ करते  हैं रूख</title>
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                        <![CDATA[प्रशिक्षित कोचों की संख्या बेहद सीमित, नहीं  मिल रहा खिलाड़ियों को सही दिशा में मार्गदर्शन ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-winning-medals--the-goal-of-securing-a-job-remains-elusive--after-obtaining-sports-certificates--players-turn-their-attention-to-government-jobs/article-130521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती अंचल खेलों की प्रतिभाओं से भरा पड़ा है। यहां के युवा और बालिकाएं जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन बड़ी सच्चाई यह है कि कोचों की कमी, मानक अनुरूप ग्राउंड का अभाव और लंबे समय से रुकी भर्ती की वजह से इन खिलाड़ियों का सफर आगे बढ़ ही नहीं पाता। सरकार खेलों को बढ़ावा देने के तमाम प्रयास कर रही है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी खिलाड़ियों की मेहनत पर भारी पड़ रही है। खेलों से सरकारी नौकरी पाने का रास्ता खुला है। यही वजह है कि खिलाड़ी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट लेकर नौकरी की तैयारी में लग जाते हैं। उनके भीतर की खेल प्रतिभा वहीं ठहर जाती है। सरकार अगर सही समय पर प्रशिक्षित कोच और मानक स्तर के मैदान उपलब्ध कराए, तो यही खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चमक सकते हैं।</p>
<p><strong>फुटबॉल और क्रिकेट के लिए नहीं है राष्ट्रीय स्तर का मैदान</strong><br />खेल शिक्षा अधिकारियों और कोचों के मुताबिक, हाड़ौती में फुटबॉल और क्रिकेट जैसे बड़े खेलों के लिए न तो राष्ट्रीय स्तर के मैदान हैं और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं। नतीजा यह है कि खिलाड़ी अपने दम पर मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन आगे बढ़ने के रास्ते उनके लिए बहुत जल्दी बंद हो जाते हैं।</p>
<p><strong>कोटा की गर्ल्स फुटबॉल एकेडमी में सुविधाएं मौजूद</strong><br />राजस्थान में फिलहाल दो सरकारी फुटबॉल एकेडमी संचालित हैं। एक लड़कियों के लिए कोटा में और दूसरी लड़कों के लिए जोधपुर में। कोटा की गर्ल्स एकेडमी में 30 सीटें हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक ही छात्रा कोटा शहर की है। इसका नाम निहारिका मेहरा, जो कुन्हाड़ी कोटा की है। बाकी सभी खिलाड़ी बाहर के जिलों से हैं। यहां हॉस्टल की व्यवस्था है, प्रशिक्षण सुबह-शाम होता है, और सरकार इसकी पूरी लागत उठाती है। बावजूद इसके मैदान का स्तर राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। </p>
<p><strong>निजी कोच अपने स्तर पर कर रहे प्रयास</strong><br />सरकारी कोचों की कमी के बीच निजी क्षेत्र के कोच अपने स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में ये खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन भी कर लेते हैं। लेकिन संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के चलते वे आगे चलकर बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में टिक नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल राज्य या राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र हासिल करके सरकारी नौकरी की तैयारी में लग जाते हैं। उनका हुनर, जो देश का नाम रोशन कर सकता था, वहीं रुक जाता है।</p>
<p><strong>कोचों की भारी कमी, खिलाड़ी भटक रहे</strong><br />हर खेल में प्रशिक्षित कोचों की संख्या बेहद सीमित है। यही कारण है कि खिलाड़ी सही दिशा में मार्गदर्शन नहीं पा रहे। फुटबॉल और क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी यही हाल है। खासकर लड़कियों के लिए प्रशिक्षित कोच उपलब्ध नहीं हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के लिए यह सबसे बड़ी बाधा है।</p>
<p><strong>कागजी खानापूर्ति से नहीं बनेगा खिलाड़ी</strong><br />अधिकांश स्कूल-कॉलेजों में खेल गतिविधियां केवल खानापूर्ति तक सीमित हैं। प्रतियोगिताएं होती हैं, लेकिन इनमें खिलाड़ियों को न तो बेहतर ट्रेनिंग मिलती है और न ही आवश्यक सुविधाएं। इस वजह से प्रतिभाशाली खिलाड़ी शुरूआत में दम तो दिखाते हैं, लेकिन आगे चलकर उनका करियर अधर में रह जाता है।</p>
<p><strong>सरकार के प्रयास अधूरे ही साबित</strong><br />सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बना रही है। स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताएं हो रही हैं। लेकिन कोचों की भर्ती न होना और संसाधनों की कमी इन प्रयासों को अधूरा बना रही है। राजस्थान में दो सरकारी एकेडमियां जरूर चल रही हैं, लेकिन उनमें भी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। जब तक प्रशिक्षित कोच और मानक मैदान नहीं मिलेंगे, तब तक हाड़ौती की खेल प्रतिभाएं केवल शुरूआती स्तर तक ही सिमटकर रह जाएंगी।</p>
<p><strong>2012 के बाद से नहीं हुई कोचों की भर्ती</strong><br />राजस्थान सरकार की नीतियां भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। 1991 के बाद करीब 21 साल तक कोई कोच भर्ती नहीं निकली। 2012 में बड़ी मुश्किल से एक भर्ती निकली, लेकिन उसके बाद से अब तक 13 साल बीत गए। आज भी खेल विभाग में प्रशिक्षित कोचों की भारी कमी है। स्कूलों और कॉलेजों में खेलों को बढ़ावा देने के नाम पर शिक्षकों पर ही खेलों की जिम्मेदारी डाल दी जाती है। ऐसे में खेल आयोजन तो हो जाते हैं, लेकिन खिलाड़ी वास्तविक प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं। खेलो इंडिया खेलो के बाद भी खिलाडियों को नौकरी नहीं मिल रही है।<br /><strong>- एमपी सिंह, पूर्व अध्यक्ष जिला  फुटबॉल संघ कोटा</strong></p>
<p><strong>हाड़ौती में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं</strong><br />कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां हाड़ौती क्षेत्र का हर जिला खेल प्रतिभाओं से लबालब है। फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, कबड्डी, ताइक्वांडो और बास्केटबॉल जैसे खेलों में यहां के खिलाड़ी राज्य स्तर पर लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं। खासकर बालिकाओं ने हाल के वर्षों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और सिल्वर मेडल अपने नाम किए हैं। लेकिन यह तस्वीर अधूरी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए जिन सुविधाओं की दरकार होती है, वे यहां मौजूद ही नहीं हैं।<br /><strong>- मधू बिश्नोई, कोच</strong></p>
<p><strong>बालिकाओं का भविष्य अधर में</strong><br />बालिकाओं के खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कोटा में एकेडमी जरूर खोली है, लेकिन यह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कोचों की कमी, मैदान का स्तर खराब होना और स्थानीय प्रतिभाओं का एकेडमी से दूर रहना इस योजना को अधूरा बना रहा है। आज की बालिकाएं हर खेल में आगे बढ़ रही हैं। ओलंपिक से लेकर एशियन गेम्स तक, भारतीय बालिकाएं देश का नाम ऊंचा कर रही हैं। लेकिन कोटा जैसी जगहों पर, जहां बालिकाएं मेहनत करने को तैयार हैं, उन्हें सही मार्गदर्शन और मंच नहीं मिल पा रहा।<br /><strong>- मीनू सोलंकी, कोच</strong></p>
<p><strong>यह बोलीं एकेडमी की बालिकाएं</strong><br />मैं दो साल से एकेडमी में हू, अभी हॉस्टल में रह रही हूं। सुबह और शाम रोजाना दो घंटे स्टेडियम में मैच की प्रेक्टिस करते हैं। प्रैक्टिस के दौरान रनिंग, फास्ट रनिंग, स्टेचिंग, शूटिंग, कोन तथा व्यायाम करते है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अलवर में हमारी एकेडमी टीम गोल्ड मेडल जीता है। आगे भी राष्टÑीय स्तर खेलने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे है। चार साल से लगातार गोल्ड मेडल ला रहे है।<br /><strong>-अंजलि मेहरा, कुन्हाड़ी कोटा</strong></p>
<p>मैंने इस साल ही एकेडमी ज्वाइनिंग की है। मैं इसके माध्यम आगे बढ़ना चाहती हूं तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के साथ नेशनल व इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में पार्टिसिपेट करना चाहती हूं। इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। हमारे कोच भी अच्छे है, जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है।<br /><strong>-निहारिका मेहरा, हनुमानगढ़</strong></p>
<p>मैंने चार साल रहकर एकेडमी में पढ़ाई की तथा कोटा के रामपुरा की रहने वाली हूं। मैंने 13 बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया तथा 6 बार गोल्ड, 2 बार सिल्वर व एक बार कांस्य पदक हासिल किया। अभी हाल ही में नेशनल प्रतियोगिता में भाग भी लिया है हम प्रतियोगिता पंजाब के अमृतसर में हुई थी जिसमें सभी स्टेट की टीमों ने पार्टिसिपेट किया था। अब हमारे सामने यह दुविधा है कि आगे की प्रतियोगिताओं के लिए कैसे तैयारी करें, अच्छे कोचों का गाइडेंस के साथ राष्टÑीय-अंतरराष्टÑीय मैचों में भाग लेने के लिए प्रशासन से हमें कोई सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। <br /><strong>-  मेधनी सैन, रामपुरा, कोटा</strong></p>
<p><strong>खेलों से नौकरी तक खुल रही राह</strong><br />हाड़ौती के खिलाड़ी अब खेलों के जरिए न सिर्फ अपना हुनर दिखा रहे हैं बल्कि सरकारी नौकरियों तक पहुंच भी बना रहे हैं। राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कोटा के युवा लगातार हिस्सा ले रहे हैं और अपनी मेहनत व लगन से गोल्ड मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार की ओर से खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं ताकि वे खेल के हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। खेल विभाग की ओर से खिलाड़ियों को और अधिक सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है। सुविधाओं का दायरा और बढ़ा रहे है ताकि खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर सकें।<br /><strong>-वाईबी सिंह, खेल विकास अधिकारी, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:30:53 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान के खिलाड़ियों ने एशिया कप में जीते 3 पदक, एक रजत व दो कांस्य पदक जीत प्रदेश और देश का बढाया मान </title>
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                        <![CDATA[राजस्थान की बेटियों ने वुशू फेडरेशन ऑफ एशिया के तत्वाधान में चीन (जिलिन) में आयोजित एशिया कप वुशू में एक रजत व दो कांस्य पदक जीते।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/rajasthan-players-won-3-medals-in-asia-cup-one-silver/article-119814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(1).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की बेटियों ने वुशू फेडरेशन ऑफ एशिया के तत्वाधान में चीन (जिलिन) में आयोजित एशिया कप वुशू में एक रजत व दो कांस्य पदक जीत प्रदेश और देश का मान बढाया।  </p>
<p>राजस्थान वुशू संघ के अध्यक्ष एवं भारतीय वुशू संघ के उपाध्यक्ष हीरानंद कटारिया के अनुसार महक शर्मा ने महिलाओं के 75 किग्रा भार वर्ग में उपविजेता रहते हुए रजत पदक जीता। नीतिका बंसल ने महिलाओं की 65 किग्रा एवं जान्हवी मेहरा ने 56 किग्रा भार वर्ग के कांस्य पदक जीते। कोच राजेश टेलर ने बताया कि महक शर्मा को फाइनल में चीन की बो टैंग से हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा। </p>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Jul 2025 13:10:08 +0530</pubDate>
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                <title>भारत ने तीरंदाजी विश्वकप के पहले चरण में जीते चार पदक</title>
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                        <![CDATA[भारत ने तीरंदाजी विश्व कप 2025 के पहले चरण में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य सहित कुल चार पदकों के साथ अपना अभियान समाप्त किया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/india-won-four-medals-in-the-first-phase-of-the/article-110809"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer69.png" alt=""></a><br /><p>ऑबर्नडेल (अमेरिका)। भारत ने तीरंदाजी विश्व कप 2025 के पहले चरण में एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य सहित कुल चार पदकों के साथ अपना अभियान समाप्त किया। भारत तीरंदाजी विश्वकप में चार पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा। </p>
<p>इसमें पुरुष रिकर्व टीम में एक रजत और पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व में धीरज बोम्मादेवरा का कांस्य शामिल रहा। ओलंपियन धीरज बोम्मादेवरा, तरुणदीप राय और अतानु दास वाली भारतीय पुरुष रिकर्व टीम फाइनल में चीन के वांग यान, ली झोंगयुआन और काओ वेनचाओ से 1-5 से हार गई। तीरंदाजी विश्वकप में मैक्सिको छह पदकों (तीन स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य) के साथ शीर्ष पर रहा। भारत ने सेमीफाइनल में स्पेन को 6-2 से हराने से पहले क्वार्टर फाइनल में चौथी वरीयता प्राप्त इंडोनेशिया को 6-2 से शिकस्त दी और पहले दौर में ब्राजील को 6-2 से हराया था।</p>
<p>धीरज बोम्मादेवरा ने स्पेन के एंड्रेस टेमिनो मेडिएल को 6-4 से हराकर कांस्य पदक जीता। भारत के दो अन्य पदक कंपाउंड तीरंदाजी में आए। ऋषभ यादव और ज्योति सुरेखा वेन्नम ने एलए 2028-बाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। चार बार की ओलंपियन दीपिका कुमारी व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं में पोडियम फिनिश से चूक गईं। </p>
<p> </p>]]>
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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 11:13:34 +0530</pubDate>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस: नोखा की 92 साल की दादी पानी देवी की खेलों में दादागिरी</title>
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                        <![CDATA[छह महीने पहले मैदान देखा और खेलों में ऐसी रमी कि पुणे मास्टर्स मीट में तीन गोल्ड जीत लाई, पर मदद न मिलने से वर्ल्ड चैंपियनशिप में रुके कदम]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-old-age-day-nokhas-92-year-old-grandmother-pani/article-92038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(7).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पोते के साथ पहली बार खेल का मैदान देखा और 92 साल की दादी का मन खेलों में ऐसा रमा कि छह महीने बाद ही पुणे मास्टर्स मीट में एक नहीं तीन गोल्ड मेडल जीत लाई। दादी ने स्वीडन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया लेकिन पैसे की तंगी में कहीं से कोई मदद न मिलने के कारण कदम रुक गए और दादी स्वीडन नहीं जा सकी।</p>
<p>ये कहानी है बीकानेर की नोखा तहसील के गांव अणखीसर की बुजुर्ग महिला एथलीट पानी देवी गोदारा की। पानी देवी वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश का झंडा बुलन्द नहीं कर पाने से निराश तो हैं लेकिन हार मानने वाली नहीं हैं। पानी देवी अब नवम्बर में जयपुर में होने वाली मास्टर्स स्टेट चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं। पानी देवी इस उम्र में खेल के मैदान पर दुनिया के चैंपियन स्प्रिंटर यूसेन बोल्ट की तरह तेजी तो दिखाती हैं लेकिन अपनी उपलब्धि पर बातचीत में उन्हें बड़ा संकोच रहता है। पानी देवी के पोते जयकिशन गोदारा खुद राष्ट्रीय स्तर के एथलीट रहे हैं और अब कोचिंग करते हैं। जयकिशन ने बताया कि खेल में दादी की शुरुआत बड़े अनूठे अन्दाज में हुई। मैं दादी को ग्राउण्ड पर घुमाने ले गया। वहां देखा दादी बच्चों के साथ ट्रेक पर चक्कर लगा रही थी। दादी ने तीन चक्कर लगाए लेकिन कहीं कोई थकान नहीं। बाद में बच्चों के साथ दौड़ लगाई तो आसानी से ट्रेक का चक्कर पूरा कर लिया। और यहीं से दादी की खेलों में शुरुआत हो गई। </p>
<p><strong>बनीं मिसाल</strong> <br />पांच बेटों और तीन बेटियों की मां पानी देवी गांव की महिलाओं और युवा खिलाड़ियों के लिए मिसाल बनी हैं। वे गांव की महिलाओं को भी खेलों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करती हैं और अपने बच्चों और विशेषकर लड़कियों को भी खिलाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।</p>
<p><strong>पुणे मास्टर्स में जीते तीन गोल्ड</strong><br />जयकिशन ने बताया कि दादी को ग्राउण्ड का ऐसा चस्का लगा कि बच्चों के साथ रोज दौड़ने लगी और फिर इसी साल अप्रैल में पुणे में हुई मास्टर्स एथलेटिक्स में पहली बार प्रतिस्पर्धा में उतरी। पानी देवी ने 100 मीटर दौड़ के साथ ही शॉटपुट और डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भी गोल्ड मेडल जीत लिया। </p>
<p><strong>ये है दादी की सेहत का राज</strong><br />92 साल की उम्र में भी दादी की सेहत का राज पूछे जाने पर वे कहती हैं कि सुबह जल्दी उठना, घर का काम खुद करना, अच्छा खाना यही उनकी सेहत का राज है। दादी बताती हैं कि उन्होंने कभी बाहर का खाना (फास्ट फूड) नहीं खाया, ठण्डे पानी से परहेज रखा और अपना काम खुद किया। जयकिशन ने बताया कि दादी घर में मवेशियों की देखभाल के बाद सुबह दो घंटे ग्राउण्ड पर प्रैक्टिस करती हैं। दोपहर खाने के बाद कुछ देर आराम करना और फिर शाम को ग्राउण्ड पर प्रैक्टिस करना, यही उनकी दिनचर्या बनी है। </p>
<p><strong>77 साल की फूल कंवर भी कई सालों से बनी हैं चैंपियन</strong><br />जयपुर की 77 साल की फूल कंवर चौधरी बचपन में कबड्डी की खिलाड़ी रहीं। उम्र बढ़ी लेकिन खेलों से नाता नहीं टूटा। घर गृहस्थी की जिम्मेदारी पूरी कर फूल कंवर फिर से खेलों में लौटीं और पिछले तीन साल से वे एक नहीं चार स्पर्धाओं में स्टेट चैंपियन बनी हैं। फूल कंवर शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जेवेलिन थ्रो के साथ सौ मीटर दौड़ में भी अव्वल बनी हैं। उन्होंने पिछले साल कोलकाता में नेशनल मास्टर्स मीट में भी हिस्सा लिया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Oct 2024 11:21:58 +0530</pubDate>
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                <title>खेलों में प्रोत्साहन ना  ही सुविधाएं, कैसे लाएं मेडल</title>
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                        <![CDATA[कोटा में कई खेलों के खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी कई तरह की सुविधाओं के लिए मोहताज हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-incentives-in-sports--no-facilities--how-to-bring-medals/article-91985"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(3)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । खिलाड़ी अपने शहर राज्य ओर देश का नाम रोशन करने के लिए जी जान लगा देते हैं। एक एक प्रतियोगिता जीतने के लिए ये खिलाड़ी दिन रात एक कर देते हैं। लेकिन इन खिलाड़ियों को इनकी मेहनत का ना बराबर सम्मान मिलता है और ना प्रोत्साहन। कोटा में कई खेलों के खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद भी कई तरह की सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। इसके साथ ही इन खिलाड़ियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी पिछले 6 साल से नहीं दी गई है।</p>
<p><strong>ट्रैक एथेलेटिक्स के खिलाड़ियों के पास नहीं साधन और मैदान</strong><br />कोटा जिले में अन्य खेलों की तरह ही ट्रैक एथेलेटिक्स के खिलाड़ी भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कोटा का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन ट्रैक एथेलेटिक्स में आने वाले भाला फेंक, गोला फेंक, डिस्कस थ्रो और हेमर थ्रो के खिलाड़ियों के पास आज खुद का मैदान तक नहीं है। ट्रैक एथेलेटिक्स के कोच श्याम बिहारी नाहर ने बताया कि वो अपने दम पर ही एथेलीटों को ट्रेनिंग देते हैं। खिलाड़ियों के पास खेलों के पर्याप्त साधन तक नहीं है। इन खिलाड़ियों को अपने खर्चे पर ही सारी व्यवस्थाएं जुटानी होती हैं। हेमर थ्रो के अंडर 20 के नेशनल खिलाड़ी सत्यम ने बताया कि वो नेशनल में ब्रांज मेडल जीत चुके हैं। लेकिन मेडल जीतने के बाद उनका ना किसी ने सम्मान किया ना प्रोत्साहन दिया। साथ ही क्रिड़ा संगम से खेल के सामान मांगने पर वहां से भी मना कर दिया जाता है। इसी तरह भाला फेंक खिलाड़ी कृतिका मीणा ने बताया कि ट्रैक एथेलीटों के लिए कोटा में कोई स्थान नहीं है हम जहां जाते हैं वहीं से कोई ना कोई भगा देता है। श्री नाथपुरम स्टेडियम में भी ट्रैक बनाया लेकिन वहां भी दौड़ लगाने वाले और अन्य खिलाड़ी विरोध करने लग जाते हैं। </p>
<p><strong>तीरंदाजी में भी नहीं मिलता प्रोत्साहन</strong><br />ट्रैक एथेलेटिक्स की तरह ही कोटा में तीरंदाजी के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जो राष्ट्रीय स्तर तक कोटा और प्रदेश का परचम लहरा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद भी ये खिलाड़ी अपने दम पर ही सबकुछ करने को मजबूर हैं। क्योंकि इन्हें न तो प्रशासन और न ही क्रीड़ा परिषद की ओर से किसी प्रकार का प्रोत्साहन मिलता है। तिरंदाज पुष्पेंद्र सिंह बताते हैं कि वो तिरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर तक खेल चुके हैं और तिरंदाजी में 30 से ज्यादा पदक हासिल कर चुके हैं। लेकिन आज भी उन्हें अपने अभ्यास का खर्चा खुद उठाना पड़ता है क्योंकि कोटा में तिरंदाजी का अच्छा कोच तक मौजूद नहीं है। पुष्पेंद्र बताते हैं कि तिरंदाजी के साथ ही कोटा में कई खेल ऐसे हैं जिनके खिलाड़ी अपने दम पर ही सब कुछ कर रहे हैं। आज भी उन्हें प्रशासन और क्रीड़ा परिषद की ओर से कोई प्रोत्साहन नहीं मिलता। अन्य तीरंदाज खिलाड़ी हिमांशी राजावत ने बताया कि स्टेट और राष्ट्रीय स्तर में पदक जीत चुकी हैं लेकिन किसी की ओर से सहायता नहीं मिली साथ ही क्रीड़ा परिषद की ओर से मिलने वाली पुरस्कार राशि भी पिछले 6 साल से अटकी हुई है।</p>
<p><strong>पुरस्कार राशि 2017 से अटकी हुई</strong><br />कोटा के कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनकी प्रोत्साहन राशि साल 2018 से नहीं मिली है। कोटा की वुशू खिलाड़ी ईशा गुर्जर के साल 2018 व 2019 में आयोजित स्टेट वुशू चैंपियनशिप में कांस्य व स्वर्ण पदक व राष्ट्रीय वुशू चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने पर राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक प्राप्त नहीं हुई। ईशा की कुल 3 लाख 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि रुकी हुई है। इसी तरह बॉक्सिंग प्लेयर निशा गुर्जर द्वारा भी साल 2021, 2022 व 2023 में आयोजित राज्य स्तरीय महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक जारी नहीं हुई है। निशा प्रोत्साहन राशि अभी तक जारी नहीं हुई है। वहीं वुशू खिलाड़ी प्रियांशी गौतम के पिता अशोक गौत्तम ने बताया कि प्रियांशी द्वारा साल 2021 में 20वीं व 2022 में 21वीं नेशनल सब जूनियर वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड के साथ साल 2023 में 67वीं स्कूल गेम नेशनल प्रतियोगिता वुशू प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की घोषणा की गई थी जो अभी तक पेंडिग है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए कोच लगाए गए हैं, किसी भी खिलाड़ी के लिए व्यक्तिगत रूप से कोच और संसाधान की व्यवस्था नहीं की जाती है। जिन भी क्षेत्रों में कमी होगी उन्हें दूर करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। प्रोत्साहन राशि के लिए सभी खिलाड़ियों की रिपोर्ट तैयार कर जयपुर फाइल भेजी हुई है।<br /><strong>- मधु चौहान, जिला खेल अधिकारी, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Sep 2024 17:05:29 +0530</pubDate>
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                <title>भारतीय दल के नाम एकल प्रतियोगिता  में 4, युगल और टीम वर्ग में 5 पदक</title>
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                        <![CDATA[खान सचिव आनन्दी व खान विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभाग के माइनिंग इंजीनियर आरिफ मोहम्मद शेख सहित भारतीय दल के सदस्यों को शुभकामनाएं और बधाई दी है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/indian-team-won-4-medals-in-singles-competition-and-5/article-83942"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। थाईलैण्ड की राजधानी बैंकॉक में अंग प्रत्यारोपित प्रतिभागियों की प्रतियोगिता में राजस्थान माइंस विभाग के माइनिंग इंजीनियर आरिफ  मोहम्मद शेख सहित भारतीय दल ने एक स्वर्ण, एकल प्रतियोगिता में दो रजत, 2 कांस्य व 4 युगल जोड़ियों ने कांस्य व एक तिकड़ी ने कांस्य पदक भारत की झोली में डालकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।</p>
<p>प्रतियोगिता में भारतीय दल में 10 खिलाड़ियों में दिल्ली के राहुल कुमार का हार्ट ट्रांसप्लांट और दिल्ली के पराग कमल शर्मा, हरियाणा के सतबीर सिंह, राजस्थान से जयपुर के हर्षवर्धन सिंह, हितेश शर्मा, अमित कुमार, सैय्यद मुजाहिद अली नकवी, उदयपुर से रेहाना बेगम, आरिफ  मोहम्मद शेख और झुंझुनूं के भवानी सिंह का किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है, उदयपुर से रेहाना बेगम ने सपोर्टर केटेगरी में तथा ऑर्गन इंडिया, पाराशर फाउंडेशन संस्थान के पदाधिकारी शंकर अरोड़ा ने टीम मैनेजर के रूप में भाग लिया। खान सचिव आनन्दी व खान विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभाग के माइनिंग इंजीनियर आरिफ मोहम्मद शेख सहित भारतीय दल के सदस्यों को शुभकामनाएं और बधाई दी है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 13:09:33 +0530</pubDate>
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                <title>पहलवानों ने पदक गंगा में नहीं किए विसर्जित टिकैत को सौंपे, 5 दिन का दिया अल्टीमेटम</title>
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                        <![CDATA[इससे पहले पहलवानों ने ट्टवीट किया, इन पदकों को जीतने के लिए हमारी कड़ी मेहनत भी उतनी ही गंभीर थी। ये राष्ट्र के लिए अमूल्य हैं और इन पदकों के लिए सबसे अच्छी जगह इस अशुद्ध व्यवस्था के बजाय शुद्ध गंगा में है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/wrestlers-did-not-immerse-medals-in-ganga-handed-over-5/article-47243"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/630-400-size-(2)2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली/हरिद्वार। कुश्ती संघ के अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ओलंपिक मेडलिस्ट बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और राष्ट्रमंडल खेल मेडलिस्ट विनेश फोगाट ने आत्म-सम्मान के बिना जीवन को व्यर्थ बताते हुए मंगलवार को कहा कि वे अपने-अपने पदक गंगा में विसर्जित कर देंगे। ये पहलवान अपने पदकों को लेकर मंगलवार को हरिद्वार में हर की पौड़ी पर पहुंचे। इस बीच गंगा समिति कहा कि हर की पौड़ी पूजा-पाठ का स्थान है, राजनीति का नहीं। इस बीच किसान नेता नरेश टिकैत पहलवानों को मनाने हर की पौड़ी पहुंचे और उनसे बात की। बातचीत के बाद पहलवानों ने अपने मेडल टिकैत को सौंप दिए। किसान नेता टिकैत ने सरकार को बृजभूषण पर कार्रवाई के लिए पांच दिन का अल्टीमेटम दिया। इससे पहले पहलवानों ने ट्टवीट किया, इन पदकों को जीतने के लिए हमारी कड़ी मेहनत भी उतनी ही गंभीर थी। ये राष्ट्र के लिए अमूल्य हैं और इन पदकों के लिए सबसे अच्छी जगह इस अशुद्ध व्यवस्था के बजाय शुद्ध गंगा में है।</p>
<p>पहलवानों ने संयुक्त बयान में कहा कि आपने देखा कि 28 मई को क्या हुआ, पुलिस ने कैसा व्यवहार किया और कितनी बेरहमी से हमें गिरफ्तार किया। हम शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे लेकिन उन्होंने हमारे विरोध स्थल को छीन लिया और गंभीर अपराधों के तहत हमारे खिलाफ मामला दर्ज किया। क्या महिला पहलवानों ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के लिए न्याय मांगकर गलती की? पुलिस और अधिकारी हमारे साथ अपराधियों की तरह व्यवहार कर रहे हैं जबकि असली अपराधी खुले में घूम रहा है।</p>
<p><strong>अब लगा पदक क्यों जीते</strong><br />पहलवानों ने पदक जीतने की अपनी मेहनत पर कहा कि हमें याद है जब हमने इस देश के लिए ओलंपिक और विश्व स्तर पर पदक जीते थे। अब लग रहा है कि हमने यह पदक क्यों जीते थे? क्या हम इसलिए जीते थे कि अधिकारी हमारे साथ इतना बुरा बर्ताव कर सकें और फिर हमें गलत ठहरा सकें? </p>
<p><strong>पीएम-राष्ट्रपति को नहीं लौटाएंगे</strong><br />उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पदक लौटाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उनकी व्यथा पर दोनों नेताओं की खामोशी के कारण वे ऐसा नहीं करेंगे। <br /> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 09:59:20 +0530</pubDate>
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                <title>किसान नेता नरेश टिकैत ने पहलवानों से मैडल वापस लिए, दिया आश्वासन</title>
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                        <![CDATA[किसान नेता नरेश टिकैत हरिद्वार पहुंचे,  जहां उन्होेने जंतर मंतर से आए प्रदर्शनकारियों पहलवानों से मैडल वापस लिए]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/farmer-leader-naresh-tikait-took-back-medals-from-wrestlers/article-47237"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/wrestlers-protest-jantar-mantar.jpg" alt=""></a><br /><p>हरिद्वार। लंबे समय से चल रहे पहलवानों के प्रदर्शन के बाद निराश पहलवान गंगा नदी में अपने मैडल बहाने के लिए एकत्र हुए थे।  किसान नेता नरेश टिकैत हरिद्वार पहुंचे,  जहां उन्होेने जंतर मंतर से आए प्रदर्शनकारियों पहलवानों से मैडल वापस लिए। डब्ल्यूएफआई प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोपों के विरोध में पहलवान गंगा नदी में अपने पदक विसर्जित करने के लिए एकत्र हुए हैं।</p>
<p>पहलवानों का कहना था कि आत्म सम्मान के बिना इन मैडल का कोई मोल नहीं है।उन्होंने पहलवानों से मेडल लिए और पांच दिन का समय मांगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/farmer-leader-naresh-tikait-took-back-medals-from-wrestlers/article-47237</link>
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                <pubDate>Tue, 30 May 2023 20:11:33 +0530</pubDate>
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                <title>आईआईजीजे ने छात्राओं को मेडल किए वितरित </title>
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                        <![CDATA[संस्था के चेयरमैन ने गत 15 वर्षों से संस्था के कार्यों को विस्तार से अवगत करवाया। संस्थागत 15 वर्षों से जेम्स एंड ज्वेलरी से संबंधित कोर्सेस डिजाइन, उत्पादन, जेमोलॉजी, कंप्यूटर डिजाइन आदि करवारही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/iigj-distributed-medals-of-the-students/article-44878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/666-copy8.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी (आईआईजीजे) की ओर से अवार्ड समारोह का आयोजन हुआ। संस्थान की ओर से उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को उद्योग मंत्री शकुंतला रावत एवं राजीव जैन वाइस चांसलर रिशु के द्वारा मेडल एवं पुरस्कार वितरित किए गए, जिसमें जीजेईपीसी के वाइस चेयरमैन कीरीत भंसाली एवं संस्थान के सभी निदेशक और जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। </p>
<p>संस्था के चेयरमैन ने गत 15 वर्षों से संस्था के कार्यों को विस्तार से अवगत करवाया। संस्थागत 15 वर्षों से जेम्स एंड ज्वेलरी से संबंधित कोर्सेस डिजाइन, उत्पादन, जेमोलॉजी, कंप्यूटर डिजाइन आदि करवा रही है। संस्था को राजस्थान आईएलडी स्किल यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त है जिसमें बी डेस्क ’वेलरी डिजाइन एवम स्रातक कोर्सेज भी करवाये जाते है ।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 May 2023 10:51:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रेलवे की स्पोर्ट्स मीट का आयोजन, विजेताओं को पदक देकर किया सम्मानित </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार महाप्रबंधक विजय शर्मा के निर्देशानुसार अधिकारियों को दिन प्रतिदिन के कार्यों से होने वाले तनाव को दूर करने के उद्देश्य से प्रधान कार्यालय व जयपुर मंडल में कार्यरत अधिकारियों एवं उनके परिजनों के लिए 18 से 20 अगस्त तक स्पोर्ट्स मीट का आयोजन किया गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/railway-sports-meet-winners-honored-medals/article-19838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/46546546591.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रधान कार्यालय व जयपुर मंडल में कार्यरत अधिकारियों एवं उनके परिवार के लोगों के लिए 3 दिवसीय स्पोर्ट्स मीट का आयोजन किया गया। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार महाप्रबंधक विजय शर्मा के निर्देशानुसार अधिकारियों को दिन प्रतिदिन के कार्यों से होने वाले तनाव को दूर करने के उद्देश्य से प्रधान कार्यालय व जयपुर मंडल में कार्यरत अधिकारियों एवं उनके परिजनों के लिए 18 से 20 अगस्त तक स्पोर्ट्स मीट का आयोजन किया गया। इस स्पोर्ट्स मीट में बैडमिंटन व टेबल टेनिस की विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन किया गया। टेबल टेनिस वेटरन वर्ग में विजय शर्मा ने प्रथम व गौतम अरोड़ा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया तथा टेबल टेनिस वेटरन डबल्स में विजय शर्मा एवं नरेंद्र कुमार विजेता रहे। </p>
<p>इसके साथ ही मनीष राजवंशी, विनोद देवड़ा, प्रवीण तिवारी, जितेंद्र पाहवा, राजेश मोहन, हनुमान प्रसाद, रीता मीणा, जीवितेश राजवंशी, रितु राजवंशी, आर्यन सोनी, अश्विन जांगड़ा, शौर्य चौधरी, प्रज्ञा मीणा, प्रियांशी, मानवी चौधरी, हनुमान  प्रसाद, शुभम यादव, अनमोल, चंदा देवड़ा, काशवी सिंह, रक्षिति सिंघवी, खुश तायल, विहान तायल, जयेश चौधरी, शचि सिन्हा, रियांशी राजवंशी, रीमा गुप्ता, मुकुल सैनी, ईशानी गोयल, प्रीति वर्मा, आर्यन सोनी, मानवी स्वरूप ने विभिन्न स्पर्धाओं में पदक प्राप्त किए। महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष नीता शर्मा ने स्पोर्टस् मीट में विजेताओं को पदक देकर सम्मानित किया।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Aug 2022 15:19:32 +0530</pubDate>
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                <title>तैराकी में पदकों की बौछार कर रहे कोटा के खिलाड़ी</title>
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                        <![CDATA[कोटा के खिलाड़ी पानी में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं। तैराकी के खिलाड़ियों के पास भले ही सुविधाओं का आभाव हो, या फिर कोई कोच ना हों लेकिन खिलाड़ी पानी में अपना दम दिखाएं बिना नहीं रहते । ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-players-showering-medals-in-swimming/article-19473"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/tairaki-mei-kota-k-khiladi..kota-news-18.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। खेल तो हजारों की संख्या में खिलाड़ी खेलते हैं लेकिन मुकाम वहीं हासिल करते हैं, जो कड़ी मेहनत और लगन से तैयारी करते हैं। कुछ इसी तरह की कड़ी मेहनत ही कोटा तैराकी के खिलाड़ी कर रहे हैं। कोटा के खिलाड़ी पानी में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं। तैराकी के खिलाड़ियों के पास भले ही सुविधाओं का आभाव हो, या फिर कोई कोच ना हों लेकिन खिलाड़ी पानी में अपना दम दिखाएं बिना नहीं रहते । खिलाड़ियों के इस हौंसले व कड़ी मेहनत की बदौलत ही कोटा ने नेशलन व स्टेट लेवल पर पानी में अपने झंड़ें गाडे हैं। कोटा में अनेक ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। कोटा में तीन तरणताल राजस्थान में तैराकी खिलाड़ियों के लिए कोटा में यूआईटी द्वारा सबसे ज्यादा तरण ताल बनाएं गए है। कोटा में कुल तीन तरण ताल है। जो इंदिरा गांधी अंतरराष्टÑीय तरण ताल 50 मिटर, नयापुरा, विजया राजे सिंधियां तरण ताल 50 मिटर ,श्रीनाथपुरम , श्यामा प्रसाद मुखर्जी तरण ताल 25 मिटर, तलवंड़ी में स्थित है। 50 मिटर के तरण ताल में कोई भी अंतरराष्टÑीय प्रतियोगिता करवाई जा सकती है। नेशनल लेवल के खिलाड़ी कोटा में एक दर्जन से ज्यादा तैराकी के खिलाड़ी है जिन्होनें नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल कर कोटा का मान बढ़ाया है। इन खिलाड़ियों में यशराज यादव, अनिकेत बिड़ला, शुभम खारोल, आरश गौतम, बीओन डिसल्वा, डिवेल डिसल्वा, कनिश्क नागर, रजत गौरी सहित अनेक खिलाड़ी है। साथ ही यशराज को राजस्थान में बेस्ट तैराकी का अवार्ड दो बार मिला हुआ है। राजस्थान में कोटा के पास सबसे ज्यादा तरण ताल है। लेकिन खिलाड़ियों के पास अभ्यास करवाने के लिए कोइ सरकारी कोच नहीं हैं। अगर खिलाड़ियों को पूरी सुविधाएं मिले तो वह तैराकी में नया कीर्तिमान रचकर कोटा का नाम रोशन कर सकते है। पिछले दो वर्षों से कोरोना के प्रभाव के कारण भी तैराकी पर असर पड़ा है। -प्रमोद यादव, सचिव , जिला तैराकी संघ</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Aug 2022 14:38:28 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रेक पर उतरे तो, राजस्थान के लिए थैला भरकर पदक जीते </title>
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                        <![CDATA[प्रदेश के खेल जगत में कुछ ऐसे प्रशिक्षक रहे है, जो अपनी उपलब्धियों के दम पर उस खेल के पर्याय बन गए। क्रिकेट में एनडी मार्शल और फुटबाल में बीपी सूरी ने जयपुर में खूब नाम कमाया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/when-he-landed-on-the-track-he-bagged-medals/article-14247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546570.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के खेल जगत में कुछ ऐसे प्रशिक्षक रहे है, जो अपनी उपलब्धियों के दम पर उस खेल के पर्याय बन गए। क्रिकेट में एनडी मार्शल और फुटबाल में बीपी सूरी ने जयपुर में खूब नाम कमाया। एथलेटिक्स में राजस्थान खेल परिषद के कोच रहे पोकरमल की गिनती प्रदेश के सबसे सफल प्रशिक्षकों में की जाती है। पोकरमल तो जब खिलाड़ी के रूप में ट्रेक पर उतरे, तो राजस्थान के लिए थैला भरकर पदक जीते और जब कोचिंग शुरू की तो उनके शिष्यों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब धूम मचाई। राष्ट्रीय स्तर पर तो पोकरमल का शायद की कोई शिष्य खाली हाथ रहा। पोकरमल ने 1965 से 1972 के बीच सात साल के अपने खेल करियर में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स हों या ऑल इंडिया ओपन इंटर स्टेट मीट, सभी में खूब पदक जीते। डिकेथलान के खिलाड़ी पोकरमल एथलेटिक्स की दस इवेंट में पारंगत रहे। हाई जम्प, लांग जम्प , ट्रिपल जम्प और पोलवॉल्ट में 100 से ज्यादा राष्ट्रीय पदक पोकरमल के नाम रहे।</p>
<p><strong>एक दर्जन अंतरराष्ट्रीय एथलीट तैयार किए</strong><br />अपने कोचिंग करियर में पोकरमल ने गोपाल सैनी, हमीदा बानो, राजकुमार, रामनिवास, हरि सिंह, राजवीर सिंह, बलजीत कौर और राजेन्द्र शर्मा सरीखे दर्जनभर अंतरराष्ट्रीय एथलीट देश को दिए। गोपाल सैनी, हमीदा बानो और राजकुमार ने तो 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में एक साथ पदक जीते। पोकरमल ऐसे गुरु रहे जिनके दो शिष्यों गोपाल सैनी और राजकुमार को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया, वहीं गोपाल सैनी, राजकुमार और रामनिवास के राष्ट्रीय रिकॉर्ड बरसों तक कायम रहे। पोकरमल के राष्ट्रीय स्तर के शिष्यों की गिनती तो सौ के पार रही होगी।</p>
<p><strong>जब पदकों से भरा थैला देख चौंक गए पूनमचंद बिश्नोई</strong> <br />पोकरमल ने राजस्थान खेल परिषद के साथ अपने जुड़ाव के बारे में बताया कि 1974 में परिषद के अध्यक्ष थे स्वर्गीय रामजी काक। सीआरपीएफ में सबइंस्पेक्टर रहते काक साहब के पास कोच की नौकरी के लिए पहुंचे तो आपस में कहा-सुनी हो गई और उन्होंने डांट कर भगा दिया। पोकरमल ने बताया कि कांग्रेस के दिग्गज नेता पूनमचंद बिश्नोई भी साठ के दशक में परिषद के अध्यक्ष रहे। खिलाड़ी के रूप में जब-जब पदक जीते उनसे मुलाकात होती रही। जब पदकों से भरा थैला बिश्नोई को दिखाया, तो वे चौंक गए। मुझे साथ लेकर काक साहब के पास गए और अगले दिन से ही कोच की नौकरी मिल गई।</p>
<p><strong>पोकरमल को ही मिला पहला गुरु वशिष्ठ अवार्ड</strong><br />1982 में जब राजस्थान के खिलाड़ियों ने दिल्ली एशियाई खेलों में पदक जीते तब राज्य सरकार ने अपने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए महाराणा प्रताप और प्रशिक्षकों को सम्मान देने के लिए गुरु वशिष्ठ पुरस्कार की शुरुआत की। एथलेटिक्स के कोच पोकरमल और साइक्लिंग के कोच बीकानेर के रामदेव शर्मा को पहले वशिष्ठ अवार्ड से नवाजा गया। </p>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 11:51:02 +0530</pubDate>
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