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                <title>Technology Transfer - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Technology Transfer RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है रूस, जखारोवा ने कहा-रूस ईरान के आसपास की गंभीर अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को सुलझाने में सहायता के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने भारत के साथ गहरे सैन्य संबंधों की पुष्टि की है। रूस न केवल हथियारों की आपूर्ति, बल्कि संयुक्त विकास और लाइसेंस प्राप्त निर्माण के लिए भी तैयार है। यह सहयोग भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को नई गति देगा। साथ ही, रूस ने पश्चिम एशिया संकट को सुलझाने में सहायता की भी पेशकश की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-is-keen-to-increase-military-technical-cooperation-with-india-zakharova/article-152037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/maria-zakharova.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस ने कहा है कि वह भारत के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग को और बढ़ाने का इच्छुक है और मिल कर काम करने तथा और लाइसेंस प्राप्त हथियार निर्माण के लिए तैयार है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने भारतीय सूचना पोर्टल 'फर्स्टपोस्ट' को दिए एक साक्षात्कार में कहा "रूस, भारत के साथ सैन्य-तकनीकी सहयोग बढ़ाना जारी रखने का इरादा रखता है। भारतीय सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं के लिए विस्तृत श्रृंखला में सैन्य उत्पादों की आपूर्ति परस्पर सहमत समय सीमा पर की जा रही है। इसके अलावा वह संयुक्त रूप से लाइसेंस प्राप्त हथियारों के निर्माण के लिए भी तैयार है।"</p>
<p>राजनयिक ने कहा, "रूस न केवल तैयार सैन्य उत्पादों का निर्यात करने के लिए तैयार है, बल्कि संयुक्त विकास, आधुनिक हथियारों के लाइसेंस युक्त निर्माण और विभिन्न प्रकार के उपकरणों के आधुनिकीकरण एवं अन्य परियोजनाओं को लागू करने के लिए भी तैयार है।" उन्होंने उल्लेख किया कि रूसी सशस्त्र बल अपनी रणनीतिक पहल को लेकर आश्वस्त हैं और विशेष अभियान क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। जखारोवा ने कहा, "वर्तमान में, रूसी सशस्त्र बल अपनी रणनीतिक पहल को लेकर आश्वस्त हैं और आगे बढ़ रहे हैं।" पश्चिम एशिया संकट पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि रूस ईरान के आसपास की गंभीर अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को सुलझाने में सहायता के लिए तैयार है। जखारोवा ने कहा, "हम इस गंभीर अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को सुलझाने में सहायता के लिए हमेशा तैयार हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 12:31:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-बांग्लादेश तनाव के बीच भारतीय सीमा के पास ड्रोन की फैक्ट्री लगाने जा रहा चीन, जानें क्या है चीन और बांग्लादेश के बीच हो रहा ये समझौता?</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश ने चीन के साथ ड्रोन फैक्ट्री समझौता किया। तकनीक ट्रांसफर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास प्लांट से भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-india-bangladesh-tension-china-is-going-to-set-up-a/article-142111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर ड्रोन फैक्ट्री लगाने का बड़ा सौदा किया है। ये सौदा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्ते में तनाव की लकीरें गहरी होती जा रही है। बांग्लादेश और चीन के बीच ये सौदा भारत को असहज करने वाला है। यह समझौता सिर्फ ड्रोन खरीदने का नहीं, बल्कि उन्नत ड्रोन बनाने, असेंबल करने और भविष्य में खुद डिजाइन करने की तकनीक ट्रांसफर का है। यह डील बांग्लादेश एयर फोर्स (बीएएफ) और चीन की स्टेट-ओन्ड कंपनी चीन इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉपोर्रेशन (सीईटीसी) के बीच गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट (जी2जी) आधार पर हुई है।</p>
<p>सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब लगेगा प्लांट: इस डील के तहत, फैक्ट्री बांग्लादेश के बोगरा इलाके में लगेगी। इसमें 2026 के अंत तक काम शुरू हो जाएगा। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि ये ड्रोन मुख्य रूप से मानवीय सहायता, आपदा प्रबंधन और सैन्य जरूरतों के लिए होंगे। लेकिन भारत इसे भूराजनीतिक खतरे के तौर पर देख रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह जगह भारत की संवेदनशील उत्तरी सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत करीब है।</p>
<p>बांग्लादेश और चीन के बीच 27 जनवरी 2026 को ढाका कैंटनमेंट में ड्रोन डील साइन हुआ। इसमें सीईटीसी पूरी तकनीक ट्रांसफर करेगी। ड्रोन बांग्लादेश पहले असेंबल करेगा, फिर खुद ड्रोन बना सकेगा और अंत में स्वदेशी डिजाइन तक पहुंच जाएगा। शुरूआत में फैक्ट्री दो तरह के ड्रोन बनाएगी। पहले मीडियम अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एमएएलई) यूएवी। ये लंबी दूरी की निगरानी और हमले के लिए होते हैं और वर्टिकल टेकआॅफ एंड लैंडिंग (वीटीओएल) यूएवी, जो अलग-अलग इलाकों में जल्दी तैनात हो सकते हैं। बीएएफ का बयान है कि यह सौदा बांग्लादेश को यूएवी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाएगा। प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 608 करोड़ टका (करीब 55 मिलियन डॉलर) है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 11:22:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>रूस ने फिर दोहराया ऑफर, एसयू-57 की पूरी टेक्नोलॉजी और सोर्स कोड देने को तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[रूस ने भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57E के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण और सोर्स कोड साझा करने का प्रस्ताव दिया है। रूसी कंपनी UAC के सीईओ ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' के तहत यह विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-again-reiterated-its-offer-ready-to-give-complete-technology/article-137259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/russia-plane.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस ने एक बार फिर भारत को सुखोई एसयू-57 की टेक्नोलॉजी और सोर्स कोड देने का ऑफर दोहराया है। रूसी विमान निर्माता कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉपोर्रेशन के सीईओ वादिम बडेखा ने कहा है कि रूस एकमात्र ऐसा देश है जो अपने पांचवीं पीढ़ी के मल्टीरोल फाइटर जेट एसयू-57ई के साथ भारतीय वायु सेना की जरूरतों को पूरा कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी भारत के साथ एसयू-57 लड़ाकू विमान की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को नई ऊंचाई तक ले जाने को तैयार है, बल्कि भारत अगर इस विमान को खरीदने का विकल्प चुनता है तो वह इसका सोर्स कोड भी शेयर कर सकता है।</p>
<p><strong>आईएएफ की जरूरतें पूरा करेगा एसयू-57</strong></p>
<p>यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉपोर्रेशन के सीईओ वादिम बडेखा ने कहा कि भारतीय वायुसेना को लंबे समय से आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। भारत ने हाल में ही अपने मिग-21 बाइसन को रिटायर किया है। उन्होंने कहा, दुनिया में कुछ ही ऐसे देश हैं जो न केवल अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का उत्पादन करते हैं, बल्कि उन्हें भारत को उचित शर्तों पर देने के लिए भी तैयार हैं। भारत को अपने खुद के विमानों का डवलपमेंट करने में टाइम लगेगा। इसलिए, हमारी राय में, रूस ही एकमात्र ऐसा साझेदार है जो एसयू-57ई के संबंध में भारत की सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है, चाहे वह उत्पाद की गुणवत्ता हो या मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत संयुक्त उत्पादन का अनुभव।</p>
<p><strong>भारत के एसयू-57 प्रोग्राम छोड़ने पर क्या कहा</strong></p>
<p>2018 में भारत के एसयू-57 प्रोग्राम से बाहर निकलने के सवाल पर वादिम बडेखा ने कहा कि इतनी तकनीकी जटिलता और इतने इनोवेशन से युक्त विमान का डवलपमेंट हमेशा जोखिम भरा होता है। इस जोखिम को कम करने की भारतीय पक्ष की इच्छा स्वाभाविक है। हमने उन चिंताओं का समाधान कर दिया है और यह प्रदर्शित किया है कि विमान का विकास हो चुका है और इसने युद्धक्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर दी है। उन्होंने आगे कहा कि सहयोग करने की हमारी तत्परता में कोई बदलाव नहीं आया है। </p>
<p>अब रूसी वायुसेना को एसयू-57 की आपूर्ति बड़े पैमाने पर की जा रही है। हमने एसयू-57ई की एक्सपोर्ट डिलीवरी के लिए भी समझौते किए हैं। यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉपोर्रेशन के सीईओ वादिम बडेखा ने कहा कि एसयू-57ई एक ऐसा विमान है जिसमें आधुनिकीकरण की अपार संभावनाएं और ओपन एवियोनिक्स मैकेनिज्म है। अगर एसयू-57ई का सोर्स कोड और डिजाइन डॉक्यूमेंट भारत को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं, तो भारतीय इंजीनियर स्वतंत्र रूप से विमान को अपने हिसाब से मोडिफाई और अपग्रेड कर सकेंगे। </p>
<p><strong>एसयू-57 विमान अलग क्यों</strong></p>
<p>उन्होंने दावा किया कि आज का एसयू-57 उस विमान से काफी अलग है जिसने 15 साल पहले पहली बार उड़ान भरी थी। वर्षों से, इस लड़ाकू विमान में महत्वपूर्ण विकास हुआ है और यह लगातार बेहतर होता जा रहा है, विमान की हथियार और प्रणाली क्षमताओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमने एसयू-57 विमान पर एक नए इंजन प्रोडक्ट 177 का फ्लाइट टेस्ट शुरू कर दिया है। यह नया इंजन अधिक थ्रस्ट प्रदान करता है और एसयू-57 की सुपरसोनिक क्रूज क्षमताओं को बढ़ाएगा, इसके समग्र प्रदर्शन में सुधार करेगा और इसकी स्टील्थ क्षमताओं को बेहतर बनाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 11:50:37 +0530</pubDate>
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