<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/middle-east-conflict/tag-64517" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Middle East Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/64517/rss</link>
                <description>Middle East Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका तनाव खत्म कराने की कोशिश तेज, कतर समेत मध्यस्थ देश समझौते की शर्तों पर कर रहे काम</title>
                                    <description><![CDATA[कतर और मध्य पूर्व के अन्य मध्यस्थ देश अमेरिका और ईरान के बीच एक नए समझौते की तैयारी कर रहे हैं। कतरी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी के अनुसार, इसका उद्देश्य बातचीत और दबाव बनाने के लिए जरूरी विकल्प तैयार रखना है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी पर चिंता जताते हुए गंभीर परिणामों की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/efforts-to-end-iran-america-tension-intensified-mediator-countries-including-qatar/article-165009"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। कतर और मध्य पूर्व के अन्य मध्यस्थ देश ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौते की तैयारी कर रहे हैं, ताकि "जब भी दबाव बनाने या मोल-भाव की ज़रूरत हो, तो वे तैयार रहें।" कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया, "हम इसी पर काम कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करना कि ज़रूरी तत्व मौजूद हों और हम दबाव बनाने की ज़रूरत पड़ने से पहले ही इन तत्वों को सामने ला सकें।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दबाव बनाने या मोल-भाव की क्षमता का असर आखिरकार समझौते की शर्तों में दिखेगा। अल-अंसारी ने उन लोगों की भी आलोचना की जो मानते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा स्थिति 'नई सामान्य स्थिति' बन सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस जलमार्ग के बंद होने से होने वाले सभी नकारात्मक प्रभाव "बहुत जल्द आपके दरवाज़े तक पहुँचेंगे।" अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिसके जवाब में ईरानी पक्ष ने भी हमले किए। जून के मध्य में तेहरान और वाशिंगटन ने दुश्मनी खत्म करने के मकसद से एक समझौते (मेमोरेंडम) पर हस्ताक्षर किए, लेकिन उसके कुछ ही समय बाद, उन्होंने फिर से एक-दूसरे पर हमले किए।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/efforts-to-end-iran-america-tension-intensified-mediator-countries-including-qatar/article-165009</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/efforts-to-end-iran-america-tension-intensified-mediator-countries-including-qatar/article-165009</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 14:09:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-09/1200-x-60-px%29-%28youtube-thumbnail%29-%282%294.png"                         length="572242"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईआरजीसी का दावा: ईरान ने किया जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला, 10 बैलिस्टिक मिसाइल नष्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे 'कैंप टिटिन' पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है। हालांकि, जॉर्डन के सशस्त्र बलों के अनुसार उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 10 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irgc-claims-iran-attacks-us-military-base-in-jordan-large/article-164433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/russia-drone-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने जॉर्डन में बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के हमलों के जवाब में बैलिस्टिक मिसाइलों से जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया गया है। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, "इन अपराधों के जवाब में, आईआरजीसी वायु सेना के बहादुर सैनिकों ने जॉर्डन में मरीन के गैरीसन, 'कैंप टिटिन' पर भारी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया।"</p>
<p>आईआरजीसी का दावा है कि इस हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक हताहत हुए और साथ ही बुनियादी ढांचे और सैन्य हेलीकॉप्टरों को भी नुकसान पहुंचा। इस बीच, जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने बुधवार को कहा कि जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका, जिनमें से तीन देश की सीमा के भीतर गिरीं। सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा, "जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुईं 13 बैलिस्टिक मिसाइलों के हमले को रोका: इनमें से 10 को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया गया, जबकि तीन रिहायशी इलाकों से दूर गिरीं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/irgc-claims-iran-attacks-us-military-base-in-jordan-large/article-164433</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/irgc-claims-iran-attacks-us-military-base-in-jordan-large/article-164433</guid>
                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 09:26:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/russia-drone-attack.png"                         length="1337162"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान संघर्ष के बीच अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर सवाल, हथियारों की कमी से यूरोप और एशिया के सहयोगी चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों ने उसकी बहु-मोर्चीय सैन्य क्षमता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। मध्य पूर्व में ईरान संघर्ष और अन्य मोर्चों पर पैट्रियट तथा थाड जैसी मिसाइलों के भारी इस्तेमाल से अमेरिका का हथियार भंडार काफी कम हो गया है, जिससे कई मोर्चों पर एक साथ निपटने की उसकी क्षमता पर चिंता जताई जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-security-guarantee-questioned-amid-iran-conflict-europe-and-asias/article-163493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के सहयोगी देश इस बात पर लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या अमेरिका पश्चिम एशिया, यूरोप और एशिया में एक साथ बड़े सैन्य संघर्षों को जारी रखने में सक्षम है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध में महत्वपूर्ण हथियारों के भंडार में कमी आने से अमेरिका की सुरक्षा गारंटी की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान संघर्ष में पैट्रियट और थाड इंटरसेप्टर की बड़ी संख्या इस्तेमाल हो चुकी है, जिसके कारण पेंटागन को यूरोपीय और एशियाई सहयोगियों के लिए पहले से निर्धारित कुछ हथियारों को दूसरी ओर भेजना पड़ा है। सहयोगियों को अब खुले तौर पर संदेह है कि क्या अमेरिका का रक्षा औद्योगिक आधार एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध के लिए हथियारों के भंडार को पर्याप्त तेजी से फिर से भर सकता है।</p>
<p>अमेरिका की सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के अनुमान के अनुसार अमेरिका पहले ही अपने युद्ध-पूर्व भंडार के करीब आधे मिसाइल इंटरसेप्टर (पैट्रियट और थाड) तथा लंबी दूरी की टॉमहॉक और जेएएसएसएम मिसाइलों के करीब एक-तिहाई भंडार का इस्तेमाल कर चुका है। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विशेषज्ञों के इस महीने जारी एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि अमेरिका का हथियार भंडार कम हो चुका है और अब उसमें ताइवान पर चीन के हमले को रोकने की क्षमता नहीं रह गई है। अध्ययन में वाशिंगटन से तत्काल सटीक मारक मिसाइलों के उत्पादन को युद्धकालीन स्तर पर लाने का आग्रह किया गया और चेतावनी दी गई कि संघर्ष शुरू होने तक इंतजार करना बहुत देर हो जाएगी।</p>
<p>किसी भी संकट की स्थिति में अमेरिका अपने सैन्य उत्पादन को तेजी से बढ़ा सकता है, यह पुरानी धारणा दशकों में पहली बार वास्तविक परीक्षा का सामना कर रही है। सहयोगी और प्रतिद्वंद्वी दोनों ही इस पर करीबी नजर रख रहे हैं कि क्या औद्योगिक गिरावट, रणनीतिक असंगति और राजनीतिक अव्यवस्था ने अमेरिका को इस स्थिति में पहुंचा दिया है कि वह कई मोर्चों पर निर्णायक सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं रह जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/americas-security-guarantee-questioned-amid-iran-conflict-europe-and-asias/article-163493</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/americas-security-guarantee-questioned-amid-iran-conflict-europe-and-asias/article-163493</guid>
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 17:53:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/trump-%282%291.png"                         length="653905"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का समझौता बेनतीजा: परमाणु मुद्दे पर गतिरोध कायम, होर्मुज जलडमरूमध्य भी नहीं खुला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को वर्साय में हुए 60-दिन के अस्थायी समझौते की समय सीमा समाप्त हो गई है। दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने, अमेरिकी नाकाबंदी हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक सहमति बनाने में विफल रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/60-day-agreement-between-america-and-iran-remains-deadlocked-on/article-163178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/us1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए 60-दिन के समझौते की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गयी, लेकिन दोनों देश युद्ध समाप्त करने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमति नहीं बना सके। इससे आगे की बातचीत और क्षेत्र में शांति की संभावनाएं अनिश्चित हो गयी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फ्रांस के वर्साय में हुए समझौते का उद्देश्य अस्थायी संघर्ष विराम को स्थायी समझौते में बदलना था। इसके तहत 60 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, संघर्ष की समाप्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर व्यापक समझौता किया जाना था।</p>
<p>इन तीनों प्रमुख उद्देश्यों में से कोई भी पूरा नहीं हो सका। कुछ ही सप्ताह में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्ष बातचीत भी रुक गयी और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रही। होर्मुज जलडमरूमध्य में भी सामान्य आवाजाही बहाल नहीं हो सकी। वर्तमान में केवल पांच मालवाहक जहाजों को इसके रास्ते गुजरने की अनुमति है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन करीब 130 से 140 जहाज इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरते हैं।</p>
<p>समझौते के तहत ईरान को जलडमरूमध्य खोलने में मदद करनी थी और अमेरिका को तेहरान पर दबाव कम करना था। लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो सके कि जलमार्ग पर यातायात किसके नियंत्रण में और किन शर्तों के तहत संचालित होगा। ईरान ने जलडमरूमध्य खोलने के लिए अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की शर्त रखी है, जबकि अमेरिका ने इसे स्वीकार नहीं किया है। तेहरान ने होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण और संभावित शुल्क वसूलने में भूमिका की भी मांग की है।</p>
<p>तनाव आठ जुलाई को और बढ़ गया, जब श्री ट्रंप ने नाटो सम्मेलन के दौरान समझौते को समाप्त घोषित कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य और तटीय ठिकानों पर हमले किए। इनमें मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र, रसद केंद्र, वायु रक्षा एवं निगरानी प्रणालियां तथा नौसैनिक और तटीय ढांचे शामिल थे। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य सैन्य एवं संचार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इसके बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की उम्मीदें लगभग समाप्त हो गयीं।</p>
<p>इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उन प्रतिबंधों में मिली छूट वापस ले ली, जिनके तहत संघर्ष विराम के दौरान ईरान सीमित रूप से तेल बेच सकता था। अमेरिका ने ईरान पर रियायतों के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी भी फिर शुरू कर दी। ईरान ने दूसरी ओर होर्मुज को अपने दबाव के प्रमुख साधन के रूप में इस्तेमाल किया है। उसने जलमार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिकी नाकाबंदी हटाने, ईरान के आसपास से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग की है।</p>
<p>अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका का पहला उद्देश्य देश में तेल और गैस की कीमतों को कम रखना और दूसरा ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु हथियार विकसित करने का कोई इरादा नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि फिलहाल तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के तौर पर ईरान के साथ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, लेकिन इसे बातचीत नहीं माना जा सकता।</p>
<p>पाकिस्तान ने जून के समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभायी थी और दोनों पक्षों को फिर बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास जारी रखने की बात कही है। 60 दिन की समयसीमा समाप्त होने के साथ समझौता युद्धविराम को स्थायी बनाने, होर्मुज को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौता कराने में विफल रहा है। प्रत्यक्ष बातचीत बंद होने, अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहने और सैन्य तनाव बरकरार रहने के बीच अब यह स्पष्ट नहीं है कि इस विफल समझौते की जगह आगे कौन-सा ढांचा सामने आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/60-day-agreement-between-america-and-iran-remains-deadlocked-on/article-163178</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/60-day-agreement-between-america-and-iran-remains-deadlocked-on/article-163178</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 18:05:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/us1.png"                         length="543924"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान ने अमेरिकी मांगों पर जताई सहमति, पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म होने की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सैन्य संघर्ष समाप्त करने की वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति जता दी है। जून 2026 में हुए एक अहम समझौते के तहत हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन बहाल करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की समय सीमा तय की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump-(2).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने को लेकर हुई वार्ता के दौरान ईरान ने अमेरिका के लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति जतायी थी। ट्रंप ने कहा, "हमने उन्हें सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित कर दिया है। उनके पास कुछ मिसाइलें बची हैं, जिन्हें भी हम नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने हमारी लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सहमति दे दी है।"</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून की रात ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान किया गया है। समझौते में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरान द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन बहाल करने की समय सीमा भी निर्धारित की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-claim-that-iran-agreed-to-american-demands-towards/article-158749</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:30:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/trump-%282%29.png"                         length="653905"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान में मिशन अभी पूरा नहीं हुआ : मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने कहा-मिशन तभी समाप्त होगा जब ईरान में राजनीतिक शासन बदल जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने स्पष्ट किया है कि ईरान में उनका अभियान तब तक नहीं रुकेगा जब तक वहां का कट्टरपंथी शासन नहीं बदल जाता। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के बीच, इजरायल ने तेहरान के खिलाफ अपनी गहन सैन्य और खुफिया योजनाएं जारी रखने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-mission-in-iran-has-not-been-completed-yet-mossad/article-150463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/david-barnea.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। इजरायली खुफिया सेवा (मोसाद) के निदेशक डेविड बार्निया ने कहा कि ईरान में एजेंसी का मिशन तभी समाप्त होगा जब ईरान में राजनीतिक शासन बदल जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को बार्निया के हवाले से कहा, "हमारा मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। हमने यह नहीं सोचा था कि लड़ाई खत्म होते ही यह मिशन तुरंत पूरा हो जाएगा। हमने तेहरान में हुए हमलों के बाद भी अपने अभियान को जारी रखने और परिणाम हासिल करने के लिए गहन योजना बनाई थी। यह मिशन तभी पूरा होगा जब इस कट्टरपंथी शासन को हटा दिया जाएगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 11 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते की घोषणा करने के बाद, ईरान और अमेरिका ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में वार्ता शुरू की। 12 अप्रैल को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने घोषणा की कि ईरान और अमेरिका वार्ता के दौरान किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के वापस लौट गया।</p>
<p>इसके बाद 12 अप्रैल को ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या बाहर निकलने का प्रयास करने वाले सभी जहाजों की नाकाबंदी शुरू करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को उन सभी जहाजों पर नज़र रखने और उन्हें रोकने का भी निर्देश दिया जिन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/the-mission-in-iran-has-not-been-completed-yet-mossad/article-150463</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/the-mission-in-iran-has-not-been-completed-yet-mossad/article-150463</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:02:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/david-barnea.png"                         length="1377734"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान को लगभग 270 अरब डॉलर का नुकसान : रिपोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान सरकार की प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी ने खुलासा किया है कि हालिया हमलों से देश को लगभग 270 अरब डॉलर की क्षति हुई है। सरकार वर्तमान में बुनियादी ढांचे, बजट राजस्व और औद्योगिक केंद्रों के बंद होने से हुए नुकसान का आकलन कर रही है। ईरान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य हर्जाने की मांग उठाने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/report-of-loss-of-about-270-billion-dollars-to-iran/article-150331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान सरकार की प्रवक्ता फातेमा मोहाजेरानी ने कहा है कि शुरुआती अनुमानों के अनुसार अमेरिकी-इजरायली हमलों से ईरान को लगभग 270 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। मोहाजेरानी ने कहा, "प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार आज तक 270 अरब डॉलर का नुकसान होने का संकेत मिला है।" उनके अनुसार, नुकसान के अधिक सटीक आंकड़े सरकार के आर्थिक ब्लॉक द्वारा निर्धारित किए जाएंगे, जो कई चरणों में इसका मूल्यांकन कर रहे हैं।</p>
<p>प्रवक्ता ने बताया कि पहले चरण में इमारतों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण में बजट राजस्व के नुकसान और औद्योगिक केंद्रों के बंद होने से संबंधित नुकसान का आकलन किया जाएगा। मोहाजेरानी ने यह भी उल्लेख किया कि ईरान को दिए जाने वाले अमेरिकी सैन्य हर्जाने का मुद्दा ईरानी वार्ता टीम द्वारा उठाए जा रहे विषयों में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/report-of-loss-of-about-270-billion-dollars-to-iran/article-150331</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/report-of-loss-of-about-270-billion-dollars-to-iran/article-150331</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 12:27:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/iran3.png"                         length="477578"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महमूद कोमाती का दावा : हिज़्बुल्लाह को मध्य पूर्व संघर्ष के समाधान में रूस की भूमिका की उम्मीद, ट्रंप पर लगाया बाधाएँ और रुकावटें खड़ा करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[हिज़्बुल्लाह नेता महमूद कोमाती ने मध्य पूर्व संकट में रूस की सक्रिय भूमिका की वकालत की है। उन्होंने कहा कि रूस के ईरान और अरब देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध शांति स्थापित कर सकते हैं, लेकिन अमेरिकी बाधाएं समाधान में रोड़ा अटका रही हैं। कोमाती के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अमेरिका को अंततः रूस के प्रभाव की आवश्यकता होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/mahmoud-komati-claims-hezbollah-expects-russias-role-in-resolving-middle/article-150161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hizbullah1.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। हिज़्बुल्लाह के राजनीतिक परिषद के उप प्रमुख महमूद कोमाती ने बताया कि हिज़्बुल्लाह को उम्मीद है कि रूस, जिसके ईरान सहित मध्य पूर्वी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, इस क्षेत्र में संघर्ष के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कोमाती ने कहा, “आज, रूस, ईरान के साथ अपने संबंधों और क्षेत्रीय स्तर पर कई अरब देशों और लेबनान के साथ अपने निष्ठापूर्ण संबंधों के कारण, एक भूमिका निभा सकता है और हम इसकी उम्मीद करते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से, संयुक्त राज्य अमेरिका रूस की किसी भी भूमिका में बाधाएँ और रुकावटें पैदा कर रहा है।</p>
<p>इस बीच, आज अमेरिका और विशेष रूप से (राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रम्प, ईरान को प्रभावित करने और युद्धविराम हासिल करने के लिए रूस की ओर रुख कर रहे हैं। देर-सवेर, उन्हें रूस की आवश्यकता होगी।” राजनेता के अनुसार, हिज़्बुल्लाह रूस के रुख, क्षेत्र में उसकी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार मानव और राज्य अधिकारों की रक्षा को सकारात्मक रूप से देखता है। उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, दुर्भाग्य से, आज यह क्षेत्र अमेरिकी वर्चस्व, उसकी आक्रामकता, हत्या और विनाश से ग्रस्त है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/mahmoud-komati-claims-hezbollah-expects-russias-role-in-resolving-middle/article-150161</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/mahmoud-komati-claims-hezbollah-expects-russias-role-in-resolving-middle/article-150161</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:08:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/hizbullah1.png"                         length="1186350"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहत की खबर : मुंबई पहुंचा ‘ग्रीन आशा’ एलपीजी जहाज, होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सुरक्षित लाया 15,400 टन गैस</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई के जेएनपीए बंदरगाह पर भारतीय एलपीजी जहाज 'ग्रीन आशा' का शानदार स्वागत हुआ। रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर यह जहाज 15,400 टन एलपीजी लेकर सुरक्षित भारत पहुँचा। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच चालक दल और कार्गो की सुरक्षित वापसी भारत की सामरिक सफलता को दर्शाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/news-of-relief-green-asha-arrived-with-15400-tons-of/article-149808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/green-asha.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। मुंबई के पास स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) ने गुरुवार को ‘ग्रीन आशा’ नाम का एक भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज का स्वागत किया। इस जहाज़ ने रणनीतिक रूप से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया है। यह जहाज़ बीपीसीएल-आईओसीएल द्वारा संचालित लिक्विड बर्थ पर लंगर डाल चुका है। इस जहाज में 15,400 टन एलपीजी लदी हुई थी। जहाज, उसमें लदा माल और चालक दल का प्रत्येक सदस्य पूरी तरह सुरक्षित है।</p>
<p>ऑनलाइन सामने आए दृश्यों में जहाज को बंदरगाह पर लंगर डाले हुए दिखाया गया है, जहां चालक दल के सदस्य हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं। यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में लागू एक नाजुक संघर्षविराम के दौरान सामने आया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/news-of-relief-green-asha-arrived-with-15400-tons-of/article-149808</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/news-of-relief-green-asha-arrived-with-15400-tons-of/article-149808</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:05:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/green-asha.png"                         length="1067952"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप की धमकी के बीच आईआरजीसी का दावा : अमेरिका ने बेइज्जती से बचने के लिए अपने ही विमानों पर की बमबारी, सी-130 सैन्य परिवहन विमान और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर हुए थे नष्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के 'खातम अल-अंबिया' मुख्यालय ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने अपनी 'प्रतिष्ठा' बचाने के लिए अपने ही क्षतिग्रस्त विमानों और सैनिकों पर बमबारी की। इस्फहान के पास आपातकालीन लैंडिंग को मजबूर हुए दो C-130 और ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों को IRGC ने निशाना बनाया। ईरान ने अमेरिका के इस बचाव अभियान को 'पूर्ण विफलता' करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irgc-claims-america-bombed-its-own-planes-to-avoid-humiliation/article-149272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/irgc1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के वायु रक्षा कमान ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने बचाव अभियान के दौरान अपने ही विमानों पर बमबारी कर दी। ईरान के एकीकृत वायु रक्षा कमान 'खातम अल-अंबिया मुख्यालय' के प्रवक्ता ने कहा, "जब ईरान के लड़ाकू विमानों ने घेराबंदी पूरी कर ली, तो ट्रंप की बेइज्जती से बचने और अपनी सेना की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए अपने ही गिराए गए विमानों, साजो-सामान, कमांडरों और सैनिकों पर भारी बमबारी करने को मजबूर होना पड़ा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिका के कई विमानों को निशाना बनाया गया और उन्हें इस्फहान के दक्षिण में आपातकालीन लैंडिंग करने पर मजबूर होना पड़ा। इनमें दो सी-130 सैन्य परिवहन विमान और दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर शामिल थे। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बयान में अमेरिका के इस अभियान को 'विफल' बताया गया और कहा गया कि इसके परिणाम को 'सिर्फ बयानबाजी, मीडिया युद्ध या मनोवैज्ञानिक अभियानों से ठीक नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/irgc-claims-america-bombed-its-own-planes-to-avoid-humiliation/article-149272</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/irgc-claims-america-bombed-its-own-planes-to-avoid-humiliation/article-149272</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 18:38:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/irgc1.png"                         length="1698130"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने इज़रायल पर बरपाया कहर : तेल अवीव में सुनी गई ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें, 15 मिनट के भीतर हुए तीन बार हवाई हमले</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी मिसाइल हमलों के बाद तेल अवीव में जोरदार धमाके सुने गए। 15 मिनट में तीन बार हवाई हमले के सायरन बजे, जिससे पूरे इजरायल में दहशत फैल गई। 28 फरवरी से जारी इस भीषण युद्ध में अब तक 1,300 मौतें हो चुकी हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान लगातार इजरायली और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-wreaks-havoc-on-israel-loud-explosions-heard-in-tel/article-149271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack1.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजरायल के तेल अवीव क्षेत्र में ज़ोरदार धमाके सुने गये हैं। इससे पहले ईरान की ओर से हुए मिसाइल हमले के कारण शहर और मध्य इज़रायल में 15 मिनट के भीतर तीन बार हवाई हमले के सायरन बजे। धमाकों की आवाज़ें भी सुनाई दीं, जो संभवतः हवाई रक्षा प्रणालियों से हुई थीं। अभी तक मिसाइल गिरने या किसी के हताहत होने की कोई रिपोर्ट नहीं है।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल के हमलों की जवाबी कार्रवाई में ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़रायली क्षेत्र पर हमले कर रहा है। संघर्ष के पहले दिन, 28 फरवरी को दक्षिणी ईरान में बालिकाओं के एक स्कूल पर हमला हुआ था। उसी दिन एक अन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गये थे। अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान में 1,300 लोगों की जानें जा चुकी हैं और 20,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/iran-wreaks-havoc-on-israel-loud-explosions-heard-in-tel/article-149271</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/iran-wreaks-havoc-on-israel-loud-explosions-heard-in-tel/article-149271</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 17:21:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/iran-attack1.png"                         length="857891"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका को बड़ा झटका : ईरान ने किया दूसरे F-35 फाइटर जेट गिराने का दावा, ट्रंप के दावे को बताया झूठा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान की IRGC ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को चुनौती देते हुए दो उन्नत अमेरिकी लड़ाकू विमानों, जिनमें एक F-35 स्टील्थ शामिल है, को मार गिराने की पुष्टि की है। तेहरान का दावा है कि उनकी स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली अभी भी पूरी तरह सक्रिय है। इस कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्ष को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-america-iran-claims-to-have-shot-down/article-148968"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/fighter.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली के नष्ट करने के दावों के बावजूद, ईरानी सेना ने शुक्रवार को दो उन्नत अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने की बात कही है। जिनमें दूसरा एफ-35 विमान भी शामिल है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने इन हमलों की "पुष्टि" की है। एक बयान में, आईआरजीसी ने कहा कि उसकी नव विकसित हवाई रक्षा प्रणालियों ने मध्य ईरान में एक स्टील्थ एफ-35 लड़ाकू विमान को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर मार गिराया है।</p>
<p>आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना के लेकनहीथ स्क्वाड्रन से संबंधित यह विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया और पायलट के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। आईआरजीसी ने ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली के पूर्ण विनाश के बारे में ट्रम्प के दावे को "झूठा दावा" बताया है। इस बयान में ईरान के एकीकृत हवाई रक्षा नेटवर्क की निरंतर प्रभावशीलता पर जोर देते हुए कहा गया, " अमेरिकी राष्ट्रपति के झूठे दावे के बाद, कुछ ही क्षण पहले क़ेशम द्वीप के दक्षिण में आईआरजीसी नौसेना की आधुनिक उन्नत हवाई रक्षा प्रणाली ने शत्रु के उन्नत लड़ाकू विमानों को मार गिराया है।"</p>
<p>ईरानी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सेना के लिए हाल ही में बड़ा झटका है। ईरानी मीडिया ने बताया है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से, ईरान ने दो एफ-35, एक एफ-18, दो एफ-16 और चार एफ-15 सहित कई उन्नत अमेरिकी विमानों को मार गिराया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-america-iran-claims-to-have-shot-down/article-148968</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-america-iran-claims-to-have-shot-down/article-148968</guid>
                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:27:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/fighter.png"                         length="491243"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        