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                <title>टाटा के यात्री वाहन हुए महंगे</title>
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                        <![CDATA[नई दिल्ली। वाहन बनाने वाली प्रमुख कंपनी टाटा मोटर्स ने अपने यात्री वाहनों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 0.55 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है।  ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/tata-passenger-vehicles-become-expensive/article-14008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/tata.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वाहन बनाने वाली प्रमुख कंपनी टाटा मोटर्स ने अपने यात्री वाहनों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 0.55 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है।  कंपनी ने यहां जारी बयान में कहा कि यह बढ़ोतरी प्रभावी हो गई है। लागत बढ़ने के मद्देनजर उसने वाहनों की कीमतों में यह बढ़ोतरी की है। उसने कहा कि लागत बढ़ने के बोझ को सहने की कोशिश की गयी है लेकिन कुछ अंश ग्राहकों पर भी कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में डाला गया है।</p>]]>
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                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 11:12:34 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>रेगिस्तान में अद्भुत बर्फिस्तान !, राजसमंद मार्बल स्लरी यार्ड में बर्फिस्तान सा नजारा, वेस्ट अब बन गया बेस्ट</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[50 बीघा क्षेत्र में फैला है मोकमपुरा का डंपिंग यार्ड हाल में 100 से अधिक प्री वेडिंग शूट होते हैं यहां पर अजमेर के किशनगढ़ को भी पीछे छोड़ा राजसमंद ने]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/rajsamand/wonderful-snowfall-in-the-desert-rajsamand-marble-slurry-yard-has-a-snowy-view--west-has-now-become-the-best/article-13166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/210.jpg" alt=""></a><br /><p>राजसमंद। राजसमंद क्षेत्र के डंपिग यार्ड में कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में नजर आने वाले बर्फ के पहाड़ों सा नजारा दिखता है। यहां का दृश्य ऐसा लगता है मानो यहां स्नोफॉल हुआ हो। मार्बल फैक्ट्रियों से निकलने वाली स्लरी के कारण बने यह पहाड़ दूर से बर्फ के पहाड़ के तरह नजर आते है। इन दिनों राजसमंद क्षेत्र डंपिग यार्ड का यह दृश्य प्री वेडिंग शूट करने वाले फिल्म शूटिंग और युवाओं को अपनी ओर खासा आकर्षित कर रहा है। वेस्ट से बेस्ट बनाना पहाड़ क्षेत्र में इनकम की जगह बन गया है। <br /><br />देखने में भले ही ही आपकों यहा बर्फिस्तान से नजारे लगे। लेकिन ज़रा ठहरिये, यह आपकी आंखों का धोखा है.... जी हां, राजसमंद जिले के मोखमपुरा में स्लरी के बर्फिस्तान में आंखों के झरोखे के सहारे सजाई जा रही है नई जिंदगी की खुशनुमा यादें। कभी अपशिष्ट के नाम पर नाक मुंह सिकोड देने को मजबूर करने वाली स्लरी अब न केवल राजसमंद बल्कि गुजरात महाराष्ट्र हरियाणा समेत अन्य राज्यों से प्री वेडिंग शूट के लिए लोगों को भेज कर यहां ला रही है। <br /><br />मार्बल स्लरी से 11-12 साल पहले तक किसान काफी परेशान थे। रात को चोरी-छिपे स्लरी को किसानों की जमीन के आसपास या चरागाह में खाली कर दिया जाता था। इस कारण जमीन का उपजाऊपन खत्म हो रहा था। किसानों की फसल खराब हो रही थी। स्लरी में अक्सर मवेशी फंसकर मर जाते थे। मार्बल वेस्ट डंपिंग यार्ड से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। ऐसे में जिला मार्बल कटर एसोसिएशन ने करीब 50 बीघा क्षेत्र में मार्बल स्लरी का डंपिंग यार्ड बनाया।  इसमें वेस्ट घड़ी डाली गई जवाब बर्फीले पहाड़ और कश्मीर की झील जैसा दिखने लगी है।<br /><br />मोखमपुरा डंपिंग यार्ड के केयरटेकर भंवर सिंह ने बताया कि 1 साल में करीब 100 से अधिक युवा कपल यहां प्री वेडिंग फोटोशूट के लिए आते हैं। जिनसे एक बार का 1100 रुपए किराया लिया जाता है। साथि ही अब फिल्म और टीवी सीरियल की शूटिंग भी होने लगी है। यहां से होने वाली आमदनी को डंपिंग यार्ड मे हीं सुविधाएं बढ़ाने और इसकी देखरेख पर खर्च किया जाता है। आने वाले दिनों में यहाँ सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे कि बड़े लेवल पर यहां पर शूटिंग करने वाले पहुंच सके।<br /><br />छोटे और कम बजट वाली फिल्म निर्माता और टीवी सीरियल निर्माताओं के साथ ही प्री वेडिंग शूट कर नए जीवन के सपनों के सुंदर ख्वाबों को साकार कर रहे हैं। जिला कटर एसोसिएशन का रुझान अब सुविधा बढ़ाने पर है, जिससे बड़े लेवल पर फिल्मों की शूटिंग भी यहां हो। इससे ना सिर्फ यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि देश के मानचित्र पर राजसमंद नई फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में उभरेगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>राजसमंद</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 16:57:45 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावक बनेंगे राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र के 5 विधायक</title>
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                        <![CDATA[जयपुर। राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के नामांकन पत्र में राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र के पांच विधायक भी प्रस्तावक बनेंगे। राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र से जिन विधायकों को इस चुनाव में प्रस्तावक बनने का मौका मिलेगा उनमें उदयपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक फूलसिंह मीणा, सलूम्बर से अमृतलाल मीणा, झाड़ोल से बाबूलाल खराड़ी, पिंडवाड़ा से समाराम गरासिया और बांसवाड़ा जिले में गढ़ी विधानसभा क्षेत्र के कैलाश मीणा शामिल है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/five-mlas-from-the-tribal-area-of-%E2%80%8B%E2%80%8Brajasthan-will-become-the-proposer-of-presidential-candidate-draupadi-murmu/article-12860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/172.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के नामांकन पत्र में राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र के पांच विधायक भी प्रस्तावक बनेंगे। राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र से जिन विधायकों को इस चुनाव में प्रस्तावक बनने का मौका मिलेगा उनमें उदयपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक फूलसिंह मीणा, सलूम्बर से अमृतलाल मीणा, झाड़ोल से बाबूलाल खराड़ी, पिंडवाड़ा से समाराम गरासिया और बांसवाड़ा जिले में गढ़ी विधानसभा क्षेत्र के कैलाश मीणा शामिल है।</p>
<p> जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ये पांचों विधायक गुरूवार सुबह उदयपुर के डबोक हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए रवाना हुए और दिल्ली पहुंच गए। <br />डबोक हवाई अड्डे पर दिल्ली रवाना होने से पहले विधायक फूल सिंह मीणा ने मीडिया से कहा कि बहुत खुशी की लहर है कि देश के प्रथम नागरिक के लिए आदिवासी महिला को चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया है जो बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने आदिवासियों को पूरा सम्मान दिया है और आज मेवाड़ से पांच विधायकों को  दिल्ली बुलाया है जो बहुत ही खुशी की बात है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए राजग ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया हैं। द्रौपदी मुर्मू के चुनाव जीतने पर वह देश की पहली आदिवासी महिला एवं दूसरी महिला राष्ट्रपति होगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 14:26:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वबंधुत्व का आधार बन गया है योग</title>
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                        <![CDATA[ शरीर, मन, विचार, समाज और आपसी मेल-मिलाप के बेहतरीन असर का परिणाम यह हुआ है कि करोड़ों लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है। जीवनशैली में आया बदलाव दुनिया की तमाम समस्याओं को कम करने में मददगार साबित हुआ है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/yoga-has-become-the-basis-of-universal-brotherhood/article-12693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/58.jpg" alt=""></a><br /><p>योग का दुनिया में फैलाव के बाद इसके शरीर, मन, विचार, समाज और आपसी मेल-मिलाप के बेहतरीन असर का परिणाम यह हुआ है कि करोड़ों लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है। जीवनशैली में आया बदलाव दुनिया की तमाम समस्याओं को कम करने में मददगार साबित हुआ है। भारतीय परंपरा में योग के अनगिनत स्वरूप देखने में आते हैं। क्रियायोग, राजयोग, सहजयोग के अलावा मंत्रयोग, हठयोग लययोग योग के ही अलग-अलग स्वरूप हैं। इनमें एक बात कॉमन है-से सभी शरीर, मन, आत्मा, प्रकृति और ईश्वर के साथ एकता स्थापित करने की बात करते हैं।</p>
<p><br />श्व योग दिवस की इस बार की थीम ‘मानवता के लिए योग’ रखा गया है। योग से ऊर्जा, विश्वबंधुत्व की भावना, प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूती और भाईचारे की भावना को मजबूत करने के साथ शारीरिक, मानसिक, आत्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी हैं। 27 दिसंबर 2014 में पहली बार जब भारत द्वारा विश्व योग दिवस मनाने के प्रस्ताव को संयुक्त राष्टÑ संघ द्वारा मंजूरी मिली और 21 जून 2015 से जब पहली बार योग दिवस मनाया गया, तब से लेकर अब तक, दुनिया में योग का विस्तार दो सौ से अधिक देशों में हुआ। भारत की इस प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा को आज दुनिया में पहचान बन चुकी है। लेकिन योग उतना पुराना है जितने कि वेद। वेद में योग के बारे में विस्तार से जिक्र किया गया है। जिसके बारे में ऋषि पातंजलि ने योगदर्शन में उसके शारीरिक, प्राणिक, मानसिक और आत्मिक संबंधों, उपयोगिता और असर को दर्शाया है। वेद के मुताबिक तप के जरिए सिद्धियां हासिल करने की बात हो या साधना के जरिए आत्मा-परमात्मा के मिलन की बात हो, योग ही उसका आधार है। दरअसल, योग दुनिया में आसन, प्राणायाम, व्यायाम, ध्यान, तक सीमित नहीं रह गया है, यह मंथन, विचार-विमर्श, सांस्कृतिक आयोजन और आनंद का उत्सव भी बन गया है। यही वजह है कि इसकी तैयारी चार महीने पहले ही दुनिया के तमाम देशों में होने लगती है। चीन, जापान, अमेरिका, जर्मनी और दूसरे तमाम देशों में इसकी लोकप्रियता घर-घर तक हो चुकी है। यही वजह है तमाम देशों में योग पर अलग से शोध कार्य की शुरुआत हो चुकी है। मेरे जानने वाले अमेरिका में योग प्रशिक्षण देने वाले योग-मित्र ने दावा किया कि तमाम अमेरिकी योगाभ्यास के जरिए अपनी जीवनशैली में बदलाव करते हुए वे धूम्रपान, शराब, मांस और अंडा खाना छोड़ चुके हैं। आज दुनिया में आपसी प्रतिद्वंद्विता का दौर चल रहा है। रूस-यूक्रेन आपस में पिछले सौ दिनों से ज्यादा से आपस में उलझे हुए हैं। इससे दुनिया पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे दौर में योग के विश्वबंधुत्व का मानवता के कल्याण का संदेश, मकसद व महत्व और भी बढ़ जाता है। अंतरराष्टÑीय योग दिवस आयोजन के बाद दुनिया के देशों के नजरिए में कई बदलाव देखने को मिले हैं। दिमाग और शरीर, प्रकृति और इंसान, सेहत और संयम की एकता (योग) कराने का कार्य योग के जरिए आगे बढ़ रहा है। जिस तरह से इंसान ने अपने स्वार्थ में कुदरत को कई तरह से असंतुलित करने का कार्य किए हैं और उससे ग्लोबल वार्मिंग, सुनामी, ग्रीन हाउस गैसों का बढ़ता विनाशकारी असर, तुचक्र में बदलाव और जीव-जंतुओं की गड़बड़ाती सेहत ने मानव सभ्यता के सामने सवाल खड़े किए हैं, ऐसे में योग का अपरिग्रह, संयम, शाकाहार और सुचिता का संदेश व महत्व बढ़ गया है। आज तमाम समस्याओं का समाधान योग के जरिए दुनिया के तमाम देशों में होने लगे हैं। सबसे बड़ी बात यह है लोगों में वैदिक परंपरा के प्रति विश्वास पुख्ता हुआ है। गौरतलब है योग वैदिक परंपरा का ही अभिन्न हिस्सा है। इससे वेद-शास्त्रों के प्रति लोगों के नजरिए में बदलाव आया है। योग का दुनिया में फैलाव के बाद इसके शरीर, मन, विचार, समाज और आपसी मेल-मिलाप के बेहतरीन असर का परिणाम यह हुआ है कि करोड़ों लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है। जीवनशैली में आया बदलाव दुनिया की तमाम समस्याओं को कम करने में मददगार साबित हुआ है। भारतीय परंपरा में योग के अनगिनत स्वरूप देखने में आते हैं। क्रियायोग, राजयोग, सहजयोग के अलावा मंत्रयोग, हठयोग लययोग योग के ही अलग-अलग स्वरूप हैं। इनमें एक बात कॉमन है-से सभी शरीर, मन, आत्मा, प्रकृति और ईश्वर के साथ एकता स्थापित करने की बात करते हैं। इसलिए दुनिया में जो लोग आत्मा, ईश्वर या तप वगैरा में यकीन नहीं करते वे भी अपनी शरीर, मन, इंद्रियों और विचारों को बेहतर बनाने के लिए योगाभ्यास करते हैं। इसी तरह जो लोग हिंदू नहीं हैं वे भी सेहतमंद रहने और जीवनशैली में संतुलन बनाने के लिए योग करते हैं। हालाँकि लोगों ने अपने मुताबिक मनमाने तरीके से योग के नियम के खिलाफ जाकर इसका अभ्यास करना शुरू कर दिया और उसके विपरीत असर से भी उन्हें रू-ब-रू होना पड़ा है। लेकिन जो जानकार योग-गुरुओं की देखरेख में योग का अभ्यास करते हैं, उन्हें बेहतर परिणाम मिले हैं। योग दिवस का महत्व इसलिए है कि यह उन लोगों को भी जोड़ने का कार्य करता है, जो व्यस्तताओं की वजह से सेहतमंद जिंदगी के लिए वक्त नहीं निकाल पाते। योग आतंरिक जीवन में उत्सव का माहौल बनाने का कार्य करता है। दुनिया के प्रत्येक आदमी की जिंदगी में उत्सव का माहौल कायम हो जाए तो जितनी भी शरीर, मन, बुद्धि, इंद्रिय और विचारों के जरिए होने वाली समस्याएं और बीमारियां है वे काफी हद तक खत्म की जा सकती हैं। योग को जो बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हैं और इससे पूरे मन से जुड़ने की कोशिश करते हैं वे जानते हैं, योग जिंदगी तक ही सीमित नहीं है बल्कि मानवता को सुखी बनाने के लिए इससे बेहतर और फायदेमंद दूसरा कोई जरिया नहीं है। कोविड 19 कोरोना काल में जिन लोगों ने योगसाधना के जरिए खुद को सेहतमंद और संतुलित बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया, उन लोगों को किसी तरह की समस्या हुई ही नहीं, यदि हुई भी तो वे दो-चार दिन में ठीक भी हो गए। गौरतलब है 2021 में विश्व योग दिवस की विषयवस्तु (थीम) ‘घर पर योग तथा परिवार के साथ योग’ रखा गया था। दुनिया के करोड़ों लोगों ने घर पर रहकर परिवार के साथ योग ही नहीं किया बल्कि इसके जरिए खुद के साथ परिवार को कोरोना से सुरक्षित भी रखा। भारत में कोरोना का भयावह असर न होने की वजह, घर पर परिवार के साथ रोजाना योगभ्यास करते रहना देखा गया। <br /><br />वैदिक षि परंपरा का यह (योग) वरदान आज दुनिया को सुखी, संतुलित, सेहतमंद, मूल्यपरक और एकता के सूत्र में बाधने का कार्य कर रहा है। पिछले आठ सालों में योग ने लोगों को कई स्तरों पर प्रभावित किया है। लोगों को भीतरी और बाहरी दोनों तरह से सेहतमंद रहने में जितनी मदद योग विद्या ने की है आज तक और किसी के जरिए नहीं मिली है। कोरोना के असर से दूर रहने के लिए डाक्टरों ने लोगों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सलाह दी। इसमें भारतीय शाकाहार जीवनशैली के साथ योग ने बेहतर भूमिका निभाई। दरअसल, भारतीय जीवनशैली में योग जिंदगी का उसी तरह का पार्ट माना जाता है जिस तरह ईश्वर की भक्ति और पूजा करना। देखा जाए तो, भक्ति और भजन दोनों में योग-ध्यान, आधार-भूमि जैसे हैं। इसलिए चाहे खुद से जुड़ना हो, खुद को सेहतमंद बनाए रखने की बात हो या ईश्वर व प्रकृति से जुड़ने की इच्छा हो, योग के बगैर संभव ही नहीं है। पातंजलि ने योग के जिन आठ अंगों के जरिए योग को पूर्णता दी गई है, उसमें वे सभी बातें और कवायदें शामिल हैं, जिनकी जरूरत हमारी जिंदगी में रोजाना होती ही है।</p>
<p><br />  योग का मकसद है ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:ख भाग भवेत् तो है ही, ‘यत्र विश्वं भवति एकनीडम्’ भी है। यानी सभी सुखी हों, सभी निरोग हों, सभी एक दूसरे के प्रति बेहतर व्यवहार करें और किसी को दुख का हिस्सा न बनना पड़े। यह योग के जरिए ही संभव है। वैदिक दृष्टि सारे विश्व को एक परिवार मानने की रही है। यह दृष्टि वेद से दुनिया को मिली। योग इस दृष्टि को मूर्तरूप देने का कार्य करता है। मतलब यह है योग इंसान को ऐसी दृष्टि देता है, जिससे सभी तरह के भेदभाव, अंधविश्वास, पाखंड, मकड़जाल, कुरीतियों और नकारात्मकता को खत्म करने का संकल्प दृढ़ होता है। आज दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में योग का ‘महानाद’ गूंजायमान हो रहा है। और प्रत्येक व्यक्ति को सम्यक्-दृष्टि, सम्यक्-संकल्प और सम्यक्-कर्म करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यही वजह है कि अमेरिका, जर्मनी, जापान, फ्रांस और चीन जैसे तमाम देश योग को अपने देश की शिक्षा के पाठ्यक्रमों में ही नहीं शामिल कर रहे हैं बल्कि एक लोगों को सेहतमंद रहने के लिए अभियान के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। <br /> </p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jun 2022 14:02:27 +0530</pubDate>
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                <title> महिला मुक्केबाजी का बढ़ता क्रेज: मैरीकॉम और निखत बनने की चाहत</title>
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                        <![CDATA[एसएमएस स्टेडियम की बॉक्सिंग रिंग में अभ्यास करती महिला मुक्केबाज।    ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/desire-to-become-mary-kom-and-nikhat/article-10222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/boxing.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला मुक्केबाजी का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। पहली महिला वर्ल्ड मुक्केबाजी 2006 में हुई तो ओलंपिक में इसे बीजिंग में 2008 में शामिल किया। राष्ट्रमंडल खेलों में 2014 से महिला मुक्केबाजी को जगह मिली। वहीं एशियाई खेलों में इसकी शुरुआत 2010 में हुई। लेकिन इस अल्प समय में ही भारत ने महिला मुक्केबाजी में काफी तरक्की की है। मैरीकाम, सरिता देवी और अब निखत जरीन की कामयाबी के दम पर भारत की गिनती रूस और चीन के बाद तीसरे सफल देश के रूप में की जाती है।</p>
<p>चंद वर्षों पहले मुक्केबाजी को सिर्फ पुरुषों का ही खेल माना जाता था लेकिन मणिपुर की एमसी मैरीकाम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता और उसके बाद मैरीकाम पर बनी फिल्म ने देश में मुक्केबाजी का ऐसा माहौल बनाया कि आज युवा लड़कियां भी जोखिम भरे इस खेल में रुचि ले रही हैं। इसकी वानगी सवाई मानसिंह स्टेडियम में ही देखी जा सकती है, जहां लड़कों के बीच दर्जनभर से ज्यादा लड़कियां भी रिंग में अभ्यास करते हुए नजर आती हैं। लड़कियों में 11 साल की दर्शिता और 12 साल की इतिश्री के साथ ही 24 साल की ज्योति कंवर भी हैं, जिनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतना है। स्नेहा चौधरी (15), स्नेहा मीणा (16), वर्दा शर्मा (14), रिशिका वशिष्ठ (18), प्रीति चौधरी (20), अदिति खत्री (16) और कृष्णा सोनी (14) सभी देश के लिए दूसरी मैरीकाम बनने की चाहत लिए हैं। उन्होंने कहा कि मैरीकाम पर बनी फिल्म देखकर मोटीवेशन मिला। देश की एक महिला मुक्केबाज जब दुनिया में नाम कमा सकती है तो हम क्यों नहीं। <br /><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>मैरीकॉम से मिला मोटिवेशन</strong></span><br />छ ह बार की वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता एमसी मैरीकाम की सफलता ने गर्ल्स को भी मुक्केबाजी के प्रति आकर्षित किया है। ताकत के इस खेल में अब लड़कियां भी आगे आ रही हैं। मैं दस साल से यहां कोचिंग कर रहा हूं लेकिन पिछले तीन-चार साल से लड़कियों की मुक्केबाजी के प्रति रुचि बढ़ी है। आज एसएमएस स्टेडियम में ही 15-20 लड़कियां प्रशिक्षण के लिए आ रही हैं, जिनमें दस सेल से लेकर 24-25 साल तक की खिलाड़ी हैं और सभी का सपना मैरीकोम बनने का है।<br />-<strong>विजय प्रताप सिंह, कोच, राजस्थान खेल परिषद </strong><br /><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>महिला मुक्केबाजी में भारत का भविष्य उज्ज्वल</strong></span><br />ब हुत ही कम समय में भारतीय मुक्केबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। अभी दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में चल रहे राष्ट्रीय शिविर में करीब 50 खिलाड़ी ट्रेनिंग कर रही हैं और इसे देखते हुए कॉमनवेल्थ और एशियाड में अच्छे पदकों की उम्मीद की जा सकती है। राजस्थान में भी चूरू की सीमा पूनिया, कोटा की अरुंधती चौधरी, जोधपुर की अर्शी, गंगानगर की लिपाक्षी, उदयपुर की झलक और कोटा की निशा गुर्जर देश की भविष्टय की उम्मीदें हैं।<br />-<strong>सागरमल धायल, द्रोणाचार्य अवार्डी कोच </strong></p>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 May 2022 14:56:57 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में कानून व्यवस्था चुनौती बनी है, कांग्रेस सरकार आते ही आखिर दंगे क्यों होते हैं: पूनिया</title>
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                        <![CDATA[ देश में कांग्रेस समाप्ति की ओर है और इस तरह का तुष्टिकरण इसका मूल कारण बनेगा: पूनिया]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--law-and-order-has-become-a-challenge-in-the-state--why-do-riots-happen-as-soon-as-congress-government-comes--satish-poonia/article-9078"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/rajendra-rathore.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  सतीश पूनिया ने जोधपुर में हुए तनाव को लेकर कहा है कि राजस्थान में कानून व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आखिर कांग्रेस की सरकारें आने के बाद ही इस तरह की घटनाएं क्यों होते हैं। जोधपुर में बिस्सा की मूर्ति से भगवा ध्वज हटाकर दूसरा इस्लाम का ध्वज लगाया गया। जिसके बाद वहां पर तनाव व्याप्त हुआ है। यही नहीं आज दोबारा से वहां पर तोड़फोड़ की गई, गाड़ियां तोड़ी गई। कानून व्यवस्था केवल चुनौती ही नहीं चिंता का विषय भी बनी हुई है। सरकार एक वर्ग विशेष को गलत संरक्षण दे रही है और तुष्टिकरण की राजनीति करती है। करौली की घटना से साफ हो जाता है कि सरकार दंगाइयों को संरक्षण दे रही है। पीएफआई जैसे संगठनों को प्रदेश में खुली छूट दे रखी है। राजस्थान में बहू संख्यक वर्ग पर लगातार हमले हो रहे हैं। बहुसंख्यक वर्ग के रामनवमी जैसे कार्यक्रमों की शोभायात्रा पर रोक लगाई जाती है और लोगों को 107 में पकड़ा जाता है। कांग्रेस के किसी तुष्टिकरण के कारण अराजक तत्वों ने प्रदेश को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। समय रहते सरकार को सोचना चाहिए। देश में कांग्रेस समाप्ति की ओर है और इस तरह का तुष्टिकरण इसका मूल कारण बनेगा। लेकिन कम से कम प्रदेश की शांति सद्भाव के लिए सरकार वोट बैंक की राजनीति छोड़े और प्रदेश की सोचे।</p>
<p><strong>गहलोत सरकार के तुष्टिकरण की वजह से राजस्थान का माहौल बिगड़ रहा है : राठौड़</strong><br />राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने ट्वीट कर कहा कि हिन्दू नववर्ष के दिन करौली में दंगे के बाद अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहजिले जोधपुर के जालोरी गेट में हिंसक झड़प की घटना गहलोत सरकार के माथे पर कलंक है। गहलोत सरकार की तुष्टिकरण की नीति के कारण शांतिप्रिय राजस्थान में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की दर्जनों भर घटनाएं हो गई है। राठौड़ ने कहा कि जोधपुर में हुई यह घटना पुलिस इंटेलीजेंस पर सवालिया निशान है। मुख्यमंत्री जी स्वयं के गृह जिले में कारित हुई इस घटना का दोषारोपण अब किसको देंगे ? क्या अब मुख्यमंत्री भी अपनी आदत के अनुसार खुद की नाकामी का ठीकरा प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर फोड़ेंगे ?<br /><br />राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , जो राज्य के गृहविभाग के मुखिया भी है, उनके राज में मृत प्राय कानून व्यवस्था का ही प्रमाण है कि अब उनके गृहजिले जोधपुर में बेखौफ दंगाई खुलेआम आपसी भाईचारा और सद्भाव बिगाड़ते है और पुलिस प्रशासन हर बार की तरह बेबस व लाचार नजर आता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 14:46:55 +0530</pubDate>
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                <title>रूस पर मोदी सरकार के रुख से खफा अमेरिका, क्वाड में भारत का विकल्प बनेगा दक्षिण कोरिया!</title>
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                        <![CDATA[रूस को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव और नई दिल्ली-मास्को की दोस्ती को देखते हुए अब क्वाड में दक्षिण कोरिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-upset-with-modi-government-s-stand-on-russia--south-korea-will-become-india-s-alternative-in-quad/article-9026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/modi.jpg" alt=""></a><br /><p>मास्को/वॉशिंगटन/नई दिल्ली।  यूक्रेन पर रूस के भीषण हमले के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले दिनों तनाव देखने को मिला। भारत के दौरे पर आए अमेरिकी अधिकारी ने दलीप सिंह ने मोदी सरकार को धमकी तक दे डाली। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी पिछले दिनों भारत को सुना दिया। रूस को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव और नई दिल्ली-मास्को की दोस्ती को देखते हुए अब क्वाड में दक्षिण कोरिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण कोरिया क्वाड में भारत के विकल्प के रूप में उभर रहा है। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोरिया आने वाले समय में चीन पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए क्वाड में ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकता है। दक्षिण कोरिया और चीन के बीच लंबे समय से बहुत अच्छे रहे थे। यूक्रेन में चल रही खूनी जंग के बीच दक्षिण कोरिया में नए राष्ट्रपति यून सुक येओल आ रहे हैं और वह हिंद प्रशांत क्षेत्र में दक्षिण कोरिया के रुख में बदलाव कर सकते हैं। उधर, भारत लगातार रूस के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने पर जोर दे रहा है। इससे क्वाड के अंदर ही दो राय हो गई है। अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने पीएम मोदी, जयशंकर समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात के बाद भारत को रूस के साथ संबंधों को लेकर चेतावनी दी है। उसने कहा कि इससे रूस के खिलाफ अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंध कमजोर हो जाएंगे। वह भी तब जब अमेरिका के विदेश मंत्री और रक्षामंत्री ने अपनी यूक्रेन यात्रा के दौरान साफ कर दिया था कि उनकी वर्तमान रणनीति रूस की पूरी तरह से घेरेबंदी है। भारत ने साफ कह दिया है कि अमेरिका के साथ दोस्ती जरूरी है लेकिन वह रूस को नहीं छोड़ सकता है।<br /><br /><strong>देश विस्तारित क्वाड का सदस्य बनने के लिए तैयार</strong> <br />इससे नाराज बाइडन ने भारत के मानवाधिकार और लोकतंत्र को लेकर निशाना साधा था। रूस को लेकर अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में आई तल्खी से क्वाड के अंदर भारत के विकल्प का रास्ता बनता जा रहा है। दक्षिण कोरिया इस जगह को लेने के लिए आतुर नजर आ रहा है जो एक लोकतंत्र है और बड़े पैमाने पर हथियारों का निर्यात करता है। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था बनाए रखने में अमेरिका का घनिष्ठ सहयोगी है। आने वाले समय में दक्षिण कोरिया क्वाड प्लस और जी-7 प्लस के रूप और ज्यादा प्रभावी भूमिका हासिल करने की कोशिश करेगा। दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति यून ने ऐलान किया है कि उनका देश विस्तारित क्वाड का सदस्य बनने के लिए तैयार है। दक्षिण कोरिया के क्वाड में आने के बाद भी भारत जो दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, पश्चिमी देशों के लिए भविष्य के लिहाज से रणनीतिक केंद्र बना रहेगा। यही वजह है कि पीएम मोदी के साथ हाल ही में बातचीत के दौरान बाइडन ने व्यापक रणनीतिक भागीदारी बनाने का प्रण किया था। <br /><br />इस तरह से उन्होंने दोनों ही देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी को खत्म करने की कोशिश की थी। दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया है कि वह अमेरिका की हवाई रक्षा प्रणाली थाड को भी अपने यहां लगाने के लिए तैयार हैं।इससे नाराज बाइडन ने भारत के मानवाधिकार और लोकतंत्र को लेकर निशाना साधा था। रूस को लेकर अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में आई तल्खी से क्वाड के अंदर भारत के विकल्प का रास्ता बनता जा रहा है। दक्षिण कोरिया इस जगह को लेने के लिए आतुर नजर आ रहा है जो एक लोकतंत्र है और बड़े पैमाने पर हथियारों का निर्यात करता है। इसके अलावा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था बनाए रखने में अमेरिका का घनिष्ठ सहयोगी है। आने वाले समय में दक्षिण कोरिया क्वाड प्लस और जी-7 प्लस के रूप और ज्यादा प्रभावी भूमिका हासिल करने की कोशिश करेगा। दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति यून ने ऐलान किया है कि उनका देश विस्तारित क्वाड का सदस्य बनने के लिए तैयार है। दक्षिण कोरिया के क्वाड में आने के बाद भी भारत जो दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, पश्चिमी देशों के लिए भविष्य के लिहाज से रणनीतिक केंद्र बना रहेगा। यही वजह है कि पीएम मोदी के साथ हाल ही में बातचीत के दौरान बाइडन ने व्यापक रणनीतिक भागीदारी बनाने का प्रण किया था। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 14:37:00 +0530</pubDate>
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                <title> प्रदेश के 1062 गांव में अपराध ‘जीरो’</title>
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                        <![CDATA[जैसलमेर में सबसे ज्यादा 209 गांव अपराध मुक्त, 314 थाना इलाके में स्थित हैं ये 1062 गांव]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--crime-zero-in-1062-villages-of-the-state--village-become-an-example-for-society--from-january-2015-to-january-2022-not-a-single-crime-in-jaisalmer/article-7739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/15.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश में हर रोज कहीं न कहीं जघन्य या सामान्य अपराध होते रहते हैं, लेकिन इन सबके बीच राजस्थान के 1062 गांव ऐसे हैं, जहां सात वर्षों में एक भी अपराध नहीं हुआ है। यह सुनने में आपको अच्छा लगेगा, क्योंकि इसकी वजह यह रह रहे लोग हैं, जो इतने प्रेमभाव से रहते हैं कि हर बात को अपने ही स्तर पर पंच पटेलों की मौजदूगी में निपटा लेते हैं। इन्हीं कारणों से ये गांव आज प्रदेश के लिए नजीर बने हुए हैं। <br /><br /><strong>ये हैं अपराध मुक्त गांव</strong> <br />जिला अजमेर में पांच, भीलवाड़ा में 45, नागौर में 36, टोंक में 37, जयपुर दक्षिण में पांच, जयपुर पश्चिम में 17, जयपुर ग्रामीण में 25, झुंझुनूं में 11, सीकर में 16, दौसा में 17, अलवर में 10, भिवाड़ी में 16, बीकानेर में 12, चूरू में 16, गंगानगर में 56, हनुमानगढ़ में पांच, भरतपुर में आठ, सवाई माधोपुर में 11, धौलपुर में 16, करौली में 25, जोधपुर पश्चिम में दो, जोधपुर ग्रामीण में 13, जालौर में 12, जैसलमेर में 209, बाड़मेर में 59, सिरोही में 11, पाली में 33, कोटा ग्रामीण में चार, बूंदी में आठ, झालावाड़ में 17, बारां में 17, उदयपुर में 77, बांसवाड़ा में 45, चित्तौड़गढ़ में 62, डूंगरपुर में 26, राजसमंद में 27 और प्रतापगढ़ में 51 गांव अपराध मुक्त हैं। <br /><br /><strong>यहां हर जगह हुए अपराध</strong><br />प्रदेश के जयपुर उत्तर, जयपुर पूर्व, जोधपुर पूर्व और कोटा शहर में एक भी गांव ऐसा नहीं है, जहां अपराध नहीं हुआ हो। यहां हर जगह अपराध हुए हैं। <br /><br />प्रदेश के हर व्यक्ति को अपने छोटे-मोटे झगड़ों को बैठकर सुलझा लेना चाहिए। आपसी सद्भाव की भावना बढ़ानी चाहिए। प्रदेश के 1062 गांव में अपराध जीरो है। इन गांवों से हमें सीख लेकर एक अपराध मुक्त समाज की स्थापना करनी चाहिए। <br />-मोहन लाल लाठर, पुलिस महानिदेशक, राजस्थान</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 12:17:26 +0530</pubDate>
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                <title>पहले नब्ज देखकर दवा: अब चिकित्सा का चेहरा बनी अत्याधुनिक मशीनें और जांचें</title>
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                        <![CDATA[अब:  बिन मशीन डॉक्टर अधूरे, जांच से लेकर इलाज तक इनसे ही हो रहे]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health--news--medicine-by-seeing-the-pulse-first--now-state-of-the-art-machines-and-tests-become-the-face-of-medicine/article-7547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/01.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में आजादी के वक्त चिकित्सा सेवाओं के नाम पर इकलौता जयपुर का सवाईमानसिंह अस्पताल ही था। यहां न जांचें ईजाद हुई थी और ना मॉनिटरिंग के लिए मशीनें थी। गिने-चुने डॉक्टर ही इलाज करते थे। नब्ज देखकर बीमारी पकड़ा करते थे। हॉर्ट, किडनी, सिर, फेफड़े आदि अंगों की स्पेशलाइजेइज्ड सेवाएं नहीं थी। केवल मेडिसिन और सर्जरी की दो यूनिट थी। हॉर्ट की बाइपास के लिए विदेश जाना पड़ता था, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदली हैं। अब चिकित्सा का चेहरा अत्याधुनिक मशीनें और जांचे हैं। जांचे भी ऐसी आ चुकी है कि डॉक्टर की जगह मशीनें ही मरीज को सही दवा के बारे में बताती हैं। एमआरआई-सीटी स्कैन शरीर में पिन की नोंक बराबर भी समस्या को तुरंत पकड़ लेती हैं। हॉर्ट की बाइपास रोजाना हो रही है। ऑर्गन ट्रांसप्लाट हो रहे हैं। राजस्थान में अब 16 मेडिकल कॉलेज हैं। 15 और खुलने वाले हैं। 8 हजार से ज्यादा अंगों के हिसाब से एक्सपर्ट डॉक्टर हैं।  <br /><br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>तब:  मरीज देखकर बीमारी पकड़ते थे, हॉर्ट बाइपास या बड़ी सर्जरी के लिए विदेश जाना पड़ता था</strong></span></p>
<p>आजादी के वक्त ना जांचे थीं, ना मशीनें, मरीज को ईथर से बेहोश करते थे<br />    जयपुर में ही था मेडिकल कॉलेज, 1993 में दूरबीन से और फिर 1998 में हॉर्ट बाईपास सर्जरी शुरू हुई<br /><br />राजस्थान में 1947 में गंभीर इलाज के लिए जयपुर में एसएमएस मेडिकल कॉलेज ही था। यहां भी केवल मेडिसिन और जनरल सर्जरी के डॉक्टर थे। एसएमएस से 1970 के दशक में डॉक्टरी करने वाले पूर्व अधीक्षक डॉ. नरपत सिंह शेखावत कहते हैं कि तब सीमित रक्त की जांच और एक्स-रे ही होता था। मरीज की परेशानी देखकर डॉक्टर बीमारी पकड़ते थे। सर्जरी चीर-फाड़ से थी। कोई खास तकनीकी नहीं थी। 1950-60 के दशक में हॉर्ट की बाइपास सर्जरी एक बड़ी चुनौती थी। उसके लिए अमेरिका या यूरोप ही सहारा था। आमजन के लिए यह बीमारी आर्थिक समस्या से जानलेवा ही थी।  एसएमएस के सर्जन रहे डॉ. जगदीश शर्मा बताते हैं कि 1974 में एमबीबीएस कर यहीं काम शुरू किया। आजादी के बाद मलेरिया, टीबी, चिकन पॉक्स बड़ी बीमारियां थी, क्योंकि इनकी एडवांस दवा नहीं थी। टीबी पर दर्जनों गोलियां लेनी होती थी। चीर-फाड़ से सर्जरी करते थे। आॅपरेशन के लिए मरीज को ईथर सुंघा कर बेहोश किया जाता था। कई मरीजों को उल्टियां हो जाती थी। ईसीजी-प्लस-सेचुरेशन नापने की कोई मशीन नहीं थी। 1978 में यूरोलॉजी और पीडियाट्रिक्स सर्जरी शुरू हुई। हॉर्ट बाईपास फिर दिल्ली के एम्स, मुंबई के बोम्बे हॉस्पिटल और जेजे हॉस्पिटल में शुरू हुआ। अब तो जयपुर में काफी बाईपास रोजाना हो रहे हैं। आजादी के वक्त तो हड्डी के लेकर सारे आॅपरेशन एक ही सर्जन करता था। सर्जरी में क्रांति 1993 में लेप्रोस्कोपी यानी दूरबीन से आॅपरेशन से आई। यहां डॉ. दिनेश जिंदल इसके पहले सर्जन थे। एसएमएस में यह 1997-98 में शुरू हुई। 1998 में डॉ. रमाकांत सक्सेना, डॉ. करण सिंह यादव पहले हॉर्ट बाईपास सर्जन बनकर आए। तब यह शुरू हुई।<br /><br />    <br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>अब:  बिन मशीन डॉक्टर अधूरे, जांच से लेकर इलाज तक इनसे ही हो रहे</strong></span><br />    <strong>सीटी स्कैन-एमआरआई व रोबोटिक सर्जरी से क्रांति आई, कैंसर इलाज में कौनसी दवा कारगर यह भी जांच बताती है</strong><br /><strong>    हॉर्ट अटैक का पता ब्लड टेस्ट से होता है।''</strong><br /><br />अब बिन मशीन और जांच के डॉक्टर अधूरे हैं। वे रोग को परेशानी से नहीं मशीनों और टेस्टों से पकड़ते है। इसके बाद ही इलाज शुरू होता है। एसएमएस के रेडियोलॉजी हैड डॉ. कुलदीप मेहंदीरत्ता बताते हैं कि अल्ट्रा साउंड सोनोग्राफी, कलर डॉपलर, मेमोग्राफी से शरीर के हर अंग का मर्ज पकड़ा जाता है। बॉयोप्सी भी मशीन से हो रही है। पेट-स्कैन जांच से शरीर में कैंसर कहां कितना मारक हो रहा है, यह भी पता लग जाता है। इसके बाद सीटी-स्कैन, एमआरआई से चिकित्सा सेवाओं में क्रांति आ गई है। एंजियोग्राफी से हॉर्ट के ब्लॉकेज चंद मिनटों में बिना चीर-फाड़ किए हटा दिए जाते हैं। अब हॉर्ट की जांच को और अत्याधुनिक जांच कार्डिक-एमआरआई आ गई है। हॉर्ट के हर हिस्से, ब्लॉकेज को तुरंत डायग्नोस कर लिया जाता है। रोबोटिक सर्जरी भी प्रदेश में होने लगी है। डॉक्टर का काम मशीनें करने लगी हैं। पैथोलॉजी की प्रोफेसर व हैड डॉ. रंजना सोलंकी बताती हैं कि मोल्यिक्यूलर डायग्नोसिस से कैंसर के ऊतक, गांठ या ब्लड सैंपल से इलाज में कौन सी दवाइयां कारगर होगी, यह तक पता लग जाता है। ब्लड जांच से हॉर्ट अटैक आने का पता लगता है। लीवर, किडनी सहित शरीर के अधिकांश अंगों की बीमारी ब्लड टेस्ट से हो जाती है।</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 14:16:48 +0530</pubDate>
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                <title>नंबर वन वनडे बल्लेबाज बनी एलिसा</title>
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                        <![CDATA[हीली ने चार स्थानों की छलांग के साथ जारी आईसीसी वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर किया कब्जा]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sports--news--australian-opener-alyssa-healy--who-was-the-highest-run-scorer-of-the-2022-icc-women-s-world-cup--has-become-the-world-s-number-one-odi-batsman/article-7456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/healy2.jpg" alt=""></a><br /><p>दुबई। न्यूजीलैंड में रविवार को संपन्न 2022 आईसीसी महिला विश्व कप की सर्वाधिक रन स्कोरर रहीं ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज एलिसा हीली दुनिया की नंबर एक वनडे बल्लेबाज बन गईं हैं। हीली ने रविवार को विश्व कप फाइनल में 170 रन की यादगार पारी की बदौलत चार स्थानों की छलांग के साथ मंगलवार को जारी आईसीसी वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर कब्जा किया है। 32 वर्षीय हीली ने 103.66 के स्ट्राइक रेट से दो शतकों और दो अर्धशतकों समेत कुल 509 रनों के साथ शीर्ष रन स्कोर रहते हुए अपना 2022 महिला विश्व कप अभियान समाप्त किया था। उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ और पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के चलते ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का पुरस्कार दिया गया था।</p>
<p><br />हीली के साथ चार ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी टॉप छह में बरकरार हैं, जिनमें बेथ मूनी, कप्तान मेग लैनिंग और राचेल हेन्स शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि हेन्स 497 रनों के साथ हीली के बाद 2022 महिला विश्व कप की दूसरी सर्वाधिक रन स्कोरर रही थीं। रैंकिंग में मूनी तीसरे, लैनिंग पांचवें और हेन्स छठे स्थान पर मौजूद हैं।<br /><br /> इस बीच इंग्लैंड की स्टार ऑलराउंडर नताली साइवर को भी रैंकिंग में तीन स्थानों का फायदा हुआ है। साइवर 2022 विश्व कप फाइनल में 148 रनों की नाबाद शतकीय पारी की बदौलत वनडे बल्लेबाजी रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गईं हैं। टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन के चलते उन्हें ऑलराउंडर रैंकिंग में भी फायदा हुआ है। वह ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी को पछाड़ कर नंबर एक ऑलराउंडर बन गईं हैं। नताली ने टूर्नामेंट में बल्ले के साथ 436 रन के अलावा गेंदबाजी में चार विकेट भी लिए थे। इंग्लैंड की लेफ्ट आर्म स्पिनर सोफी एक्लेस्टोन गेंदबाजी रैंकिंग में नंबर एक पर बरकरार हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीकी तेज गेंदबाज शबनीम इस्माइल शानदार गेंदबाजी प्रदर्शन के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गईं हैं। इंग्लैंड की अनुभवी स्विंग-गेंदबाज अन्या श्रुबसोल पांच स्थानों की छलांग से आठवें नंबर पर पहुंच गईं हैं।<br /><br />भारतीय कप्तान मिताली राज निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बल्लेबाजी रैंकिंग में एक स्थान नीचे खिसक कर सातवें स्थान पर आ गईं हैं, जबकि उनकी हमवतन स्मृति मंधाना एक स्थान के फायदे से नौवें नंबर पर पहुंच गईं हैं।</p>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 11:45:37 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया के लिए नई चुनौती बन सकता है लासा फीवर</title>
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                        <![CDATA[अब तक 659 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/lassa-fever-can-become-a-new-challenge-for-the-world/article-7079"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/corona3.jpg" alt=""></a><br /><p>कोरोना महामारी के बीच नाइजीरिया में तेजी से पांव पसार रहा लासा फीवर दुनिया के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है। नाइजीरिया सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल  के अनुसार नाइजीरिया में इस वर्ष 88 दिनों में लासा फीवर से 123 लोगों की मौत हो चुकी है। <br /><br />वहीं अब तक 659 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। ब्रिटेन में दो मरीज मिले हैं जबिक एक मौत हुई है। 25 फीसदी रोगी जो लासा फीवर को मात देते हैं उनमें बहरापन होता है। इसमें से आधे मरीजों की एक से तीन महीने में सुनने की क्षमता लौट जाती है।</p>
<p><br /><strong>लासा वायरस</strong> <br />विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लासा फीवर एक्यूट वायरल हैमोरेजिक फीवर होता है जो लासा वायरस के कारण होता है। लासा का संबंध वायरसों के परिवार एरिनावायरस से है। मनुष्य आमतौर पर इसकी चपेट में अफ्रीकी मल्टीमैमेट चूहों से आते हैं। घर का सामान या खाद्य पदार्थ जो चूहों के यूरिन और गंदगी से संक्रमित होता है उससे बीमारी फैलती है।</p>
<p><br /><strong> मरीजों में लक्षण नहीं</strong><br />डब्ल्यूएचओ के अनुसार लासा फीवर की चपेट में आने वाले 80 फीसदी में संक्रमण का कोई लक्षण नहीं दिखता है। पांच में से एक संक्रमित को गंभीर तकलीफ होती है। वायरस से शरीर के प्रमुख अंग लिवर, स्प्लीन और किडनी को बुरी तरह प्रभावित होने का साक्ष्य मिला है।</p>]]>
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                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 14:33:19 +0530</pubDate>
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                <title>चुनावों की तैयारियों में जुटी भाजपा: एक भाजपाई को 25 वोटर को रिझाने का जिम्मा</title>
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                        <![CDATA[वोटर लिस्ट के हर पन्ने पर जितने वोटर्स हैं, उनको पार्टी के पक्ष में वोट देने के लिए रिझाने के लिए पार्टी एक प्रमुख यानी पन्ना प्रमुख बना रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipir--bjp-is-preparing-for-elections--one-bjp-person-has-the-responsibility-to-woo-25-voters--in-the-next-10-days--11-lakh-emeralds-will-become-prominent--will-contact-voters-directly/article-6771"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bjp.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पांच राज्यों के चुनावों की समाप्ति के बाद प्रदेश भाजपा पौने दो साल पहले ही चुनावी जीत की तैयारी में जुट गई है। भाजपा सभी मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाने के लिए पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति करने जा रही है। हर 25 वोटों से सीधा संपर्क रखने के लिए भाजपा प्रदेशभर में 11 लाख पन्ना प्रमुख बनाने जा रही है। इस काम को पार्टी आगामी 12 दिन यानी 4 अप्रैल तक पूरा करेगी। इसकी शुरुआत शनिवार को होगी। श्रीगंगानगर में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पन्ना प्रमुख बनाने का काम शुरू करवाएंगे। राजस्थान में करीब 52 हजार बूथ हैं। इस हिसाब से प्रदेश में हर बूथ पर भाजपा 20-21 पन्ना प्रमुख बना रही है। <br /><br /><strong>यह होगी पन्ना प्रमुख की जिम्मेदारी</strong><br />वोटर लिस्ट के हर पन्ने पर जितने वोटर्स हैं, उनको पार्टी के पक्ष में वोट देने के लिए रिझाने के लिए पार्टी एक प्रमुख यानी पन्ना प्रमुख बना रही है। यह पन्ना प्रमुख अपने वोटर लिस्ट के एक पन्ने के सभी मतदाताओं से मोबाइल, व्यक्तिगत संपर्क करेगा। भाजपा की रीति-नीति, केन्द्र सरकार के काम, प्रदेश कांग्रेस सरकार की विफलता इत्यादि के बारे में बताकर पार्टी के पक्ष में करेगा। वोटिंग के दिन उन्हें मतदान केन्द्र तक लाने का जिम्मा भी उसी का होगा। <br /><br /><strong>इसी रणनीति पर अन्य राज्यों में जीत</strong><br />भाजपा पिछले दिनों यूपी सहित अन्य सभी राज्यों में चुनावों में इसी रणनीति के तहत पन्ना प्रमुख बनाकर चुनाव लड़ी है और इसके पार्टी के पक्ष में परिणाम भी आए हैं। भाजपा की यह रणनीति सबसे पहले गुजरात चुनावों में मोदी-शाह ने क्रियान्वित की थी। फिर लोकसभा चुनावों में भी पन्ना प्रमुख से फायदा मिला था। हालांकि राजस्थान में पिछले 2018 के चुनावों में भी पन्ना प्रमुख बनाए गए थे, लेकिन तब भाजपा को प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा था। <br /><br />संगठन रचना पार्टी को खास ताकत देती है। आखिरी मतदाता तक पहुंच के लिए पन्ना प्रमुख बना रहे हैं। 6 अप्रैल को भाजपा स्थापना दिवस तक हर बूथ पर पन्ना प्रमुख बना दिए जाएंगे।’ <br />- <strong>सतीश पूनिया, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 15:43:21 +0530</pubDate>
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