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                            <item>
                <title>राजस्थान के वेटलैंड्स पर हाईकोर्ट सख्त, 46 हजार से अधिक आर्द्रभूमियों की हालत पर लिया स्वत: संज्ञान </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने वेटलैंड्स को 'प्रकृति की किडनी' बताते हुए उनके संरक्षण के लिए ऐतिहासिक स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रदूषण और अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए सरकार से प्रदेश के 46,748 वेटलैंड्स की जीआईएस मैपिंग और जिला-वार वर्तमान स्थिति की पूरी रिपोर्ट तलब की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/high-court-strict-on-rajasthans-wetlands-took-suo-motu-cognizance/article-156234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक पहल करते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वेटलैंड्स केवल जलभराव क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण, जैव विविधता, भूजल संरक्षण और जलवायु संतुलन की आधारशिला हैं। इनकी उपेक्षा आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। हाईकोर्ट की अवकाश खंडपीठ में न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश रेखा बोराणा ने आदेश में कहा , वेटलैंड्स को प्रकृति की किडनी कहा जाता है क्योंकि वे भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण, कार्बन अवशोषण और जैव विविधता संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। </p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में लगभग 46,748 वेटलैंड यूनिट्स मौजूद हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम को ही वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार अनेक वेटलैंड्स प्रदूषण, अतिक्रमण, सीवरेज के पानी, ठोस कचरे के निस्तारण और सिकुड़ते जल क्षेत्र जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाईकोर्ट ने माना कि यह समस्या केवल कुछ जलाशयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में वेटलैंड्स की पहचान, अधिसूचना, संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इससे जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों के आवास, भूजल स्तर और जल सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।  हाईकोर्ट ने सरकार से जिला-वार वेटलैंड्स की सूची, उनकी वर्तमान स्थिति, अधिसूचित और गैर-अधिसूचित वेटलैंड्स का विवरण, जीआईएस मैपिंग, सीमांकन, अतिक्रमण, प्रदूषण, सीवरेज प्रवाह और संरक्षण योजनाओं की जानकारी मांगी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:54:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉकरोच जनता पार्टी को कोर्ट से बड़ा झटका: एक्स अकाउंट बहाल करने से इनकार, केंद्र और X को नोटिस जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके के एक्स (X) अकाउंट ब्लॉक करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने अकाउंट तत्काल बहाल करने से इनकार करते हुए केंद्र सरकार और एक्स को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 6 जुलाई को होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cockroach-janata-party-gets-a-big-blow-from-sc-refuses/article-155454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cockroach2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की टिप्पणी के बाद अचानक चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना एक्स अकाउंट ब्लॉक करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और एक्स को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के एक्स अकाउंट को तत्काल बहाल करने का आदेश देने से मना कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी। कोर्ट ने कहा कि वो कोई भी फैसला सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही देगी।</p>
<p>कोर्ट ने एक्स अकाउंट को ब्लॉक करने की समीक्षा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा करने वाली कमेटी को हर दो महीने के बाद ब्लॉकिंग आदेश के सभी पहलूओं की पड़ताल करने की जरुरत है। कोर्ट ने समीक्षा कमेटी के फैसले को कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 12:04:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी, गठबंधन की गणित पर टिकी नजर, भाजपा कर रही एक सीट पर दावा</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून 2026 को मतदान होगा। जीत के लिए 28 वोटों की जरूरत है। 56 विधायकों के साथ सत्तारूढ़ महागठबंधन का पलड़ा भारी है, जबकि 24 विधायकों वाले एनडीए ने भी प्रत्याशी उतारने का एलान किया है। झामुमो ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) की कोशिश का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jharkhand-rajya-sabha-elections-political-activity-increased-on-two-seats/article-155048"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/tripura-bjp.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के राज्यसभा की दो सीटों को लेकर राजनीतिक तपिश बढ़ गई है। पार्टी मुख्यालयों में बैठकों का दौर चल रहा है। राज्य की दो सीटों में एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हो जाएगा। वहीं चुनाव आयोग के जारी कार्यक्रम के अनुसार 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, 8 जून तक नामांकन और 11 जून तक नाम वापसी की प्रक्रिया चलेगी। 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना होगी।</p>
<p>राज्यसभा के दोनों सीटों का गणित सीधा नहीं बल्कि गठबंधन और समीकरणों पर निर्भर है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं, जहां एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोट जरूरी हैं। मौजूदा स्थिति में सत्तारूढ़ महागठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है। इसमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दल शामिल हैं। ऐसे में अगर महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़ता है तो दोनों सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चुनौती तब पैदा होगी, जब घटक दल अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं। ऐसी स्थिति में वोट बंटने का खतरा बढ़ जाएगा। जीत का समीकरण बिगड़ सकता है।</p>
<p>झामुमो के पास कुल 34 सीट है। जबकि दो सीटों के लिए 56 वोट की जरूरत होगी। ऐसे में अगर झामुमो दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उत्तारता है तो एक सीट पर तो जीत पक्की है। लेकिन दूसरी सीट फंस जाएगी। क्योंकि उसके पास सिर्फ छह वोट ही बचेंगे। उसे और 22 वोटों की जरूरत पड़ेगी, जो जुटाना मुश्किल होगा। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि दोनों सीटों पर गठबंधन का प्रत्याशी होगा। गठबंधन की बैठक में इसका फैसला होगा।</p>
<p>वहीं, कांग्रेस की बात करें तो उनके 16 विधायक हैं। एक सीट के लिए 28 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में अगर कांग्रेस अलग से प्रत्याशी उतारती है तो अकेले दम पर जीतना मुश्किल होगा। क्योंकि उसे 12 और विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे में गठबंधन में दरार आ सकती है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के राजू ने कहा कि कांग्रेस-झामुमो एक-एक सीट पर प्रत्याशी देगा। सीएम से जल्दी बात करेंगे। वहीं एनडीए की बात करें तो उनके पास कुल 24 वोट हैं। वहीं अकेले भाजपा के पास 21 वोट हैं। ऐसे में एनडीए प्रत्याशी को जीत के लिए चार वोट कम पड़ेंगे। वैसे जेएलकेएम फिलहाल किसी पार्टी के साथ नहीं है। ऐसे में अगर भाजपा उसे भी साथ लेती है तो भी तय वोट से तीन वोट पीछे रह जाएगी। इससे चुनाव रोचक हो जाएगा।</p>
<p>सोमवार को भाजपा चुनाव समिति की बैठक भी हुई थी। बैठक बाद प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने साफ कहा कि चुनाव में भाजपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और जीत जरूर होगी। ऐसे में यहां दूसरे सीट पर चुनाव रोचक हो सकता है। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा की दलगत स्थिति सत्तारूढ़ महागठबंधन के पक्ष में साफ बढ़त दिखाती है, जहां 81 सदस्यीय सदन में एक सीट के लिए 28 वोट जरूरी हैं और सत्ता पक्ष के पास कुल 56 विधायक हैं। झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (4) और भाकपा माले (2) के इस संयुक्त आंकड़े के आधार पर दोनों सीटों पर जीत आसान मानी जा रही है, बशर्ते गठबंधन एकजुट रहे।</p>
<p>दूसरी ओर विपक्ष की स्थिति कमजोर है, जहां भाजपा के 21 और सहयोगियों को मिलाकर कुल 24 विधायक ही हैं, जो एक सीट के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। हालांकि जेएलकेएम के एक विधायक का रुख और संभावित क्रॉस वोटिंग मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है। हालांकि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पत्र लिख कर सीधे भारत निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक बेहद संवेदनशील पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वह उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है, जो सीधे तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) और अनैतिक दबाव बनाने की कोशिशों की ओर इशारा करता है।</p>
<p>जिसके बाद भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारना हर राजनीतिक दल का संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि भाजपा उम्मीदवार उतारने की घोषणा करती है तो झामुमो को इसमें “लोकतंत्र पर खतरा” क्यों दिखाई देने लगता है? क्या झामुमो यह मान चुका है कि उसके विधायक स्वेच्छा से भी उसके खिलाफ मतदान कर सकते हैं?उन्होंने कहा कि झामुमो का पूरा पत्र डर, भ्रम और राजनीतिक हताशा से भरा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 15:08:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुर्भाग्यपूर्ण! नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा पिछली गलतियों से नहीं लिया सबक, केंद्र और एनटीए से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनटीए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए मॉनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट पर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्र एजेंसी से दोबारा परीक्षा कराने और डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-is-strict-on-the-unfortunate-neet-paper-leak/article-154939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछली घटनाओं से अब तक कोई सबक नहीं लिया गया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान कोर्ट ने NTA से उस मॉनिटरिंग कमेटी की स्थिति स्पष्ट करने को कहा, जिसे पहले अदालत के निर्देश पर गठित किया गया था। कोर्ट ने पूछा कि समिति की सिफारिशों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और उसकी रिपोर्ट कहां है।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग की है। इसमें NTA को हटाकर नई स्वतंत्र एजेंसी बनाने, परीक्षा को कंप्यूटर आधारित करने और प्रश्नपत्रों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे सुझाव शामिल हैं। साथ ही, न्यायिक निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने और सेंटरवार रिजल्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 14:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्विशा शर्मा का दोबारा होगा पोस्टमार्टम : हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस, समर्थ सिंह की तलाश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत की जांच मध्यप्रदेश सरकार ने सीबीआई (CBI) को सौंप दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली या जम्मू के विशेषज्ञों की निगरानी में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने तथा शव को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। फरार आरोपी पति की तलाश जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/postmortem-of-twisha-sharma-will-be-done-again-high-court/article-154689"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/twisha.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल में हुई एक्ट्रेस एवं मॉडल ट्विशा शर्मा की मृत्यु के प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। इस संबंध में गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा मौत मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि यह प्रक्रिया All India Institute of Medical Sciences दिल्ली या जम्मू की विशेषज्ञ टीम की निगरानी में कराई जाए। इसके लिए दिल्ली से मेडिकल एक्सपर्ट्स को भोपाल भेजने के आदेश भी जारी किए गए हैं। साथ ही ट्विशा के शव को भोपाल एम्स में माइनस 80 डिग्री तापमान पर सुरक्षित रखने को कहा गया है।</p>
<p>सरकारी प्रेसनोट के अनुसार 12 मई 2026 को बाग मुगलिया एक्सटेंशन, कटारा हिल्स भोपाल में हुई कथित दहेज मृत्यु के मामले में थाना कटारा हिल्स में अपराध क्रमांक 133/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 80(2), 85, 3(5) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3/4 में प्रकरण दर्ज किया गया था। राज्य शासन ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस मामले की जांच के लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अर्थात सीबीआई के सदस्यों को मध्यप्रदेश राज्य में अधिकार एवं क्षेत्राधिकार प्रदान करने की सहमति दी है। अधिसूचना में संबंधित अपराध, अपराधों के दुष्प्रेरण तथा षड्यंत्र से जुड़े पहलुओं की जांच की अनुमति भी दी गई है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया था। राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई थी। इधर, ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। दूसरी ओर, मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह अभी तक फरार चल रहा है। उसके वकील ने संकेत दिए हैं कि वह कोर्ट में आत्मसमर्पण कर सकता है। वहीं, राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश भी कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 15:45:45 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की तैयारियां तेज, 18 जून को होगा मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[भारत निर्वाचन आयोग ने राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव कराने की घोषणा की है। अधिसूचना 1 जून को जारी होगी। संख्या बल के अनुसार भाजपा दो सीटों पर मजबूत है और तीसरी सीट के लिए रणनीतिक बिसात बिछा रही है, जबकि कांग्रेस अपनी एक सीट बचाने के संघर्ष में जुटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/preparations-for-rajya-sabha-elections-intensified-in-rajasthan-voting-will/article-154663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसमें राजस्थान की तीन सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। अधिसूचना एक जून को जारी होगी, नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून और मतगणना उसी दिन होगी। इन सीटों पर 21 जून को रिटायर होने वाले सदस्यों के स्थान भरे जाएंगे। राजस्थान विधानसभा की वर्तमान संख्या बल के अनुसार भाजपा दो सीटें आराम से जीत सकती है, जबकि तीसरी सीट पर अंतरात्मा (क्रॉस वोटिंग) का खेल खेलने की रणनीति बना रही है।</p>
<p>भाजपा ने तीनों सीटों के लिए पैनल तैयार कर लिया है, जिसमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़, अलका गुर्जर जैसे नाम चर्चा में हैं। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जल्द दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से अंतिम फैसला लेंगे। कांग्रेस की ओर से भी तैयारियां चल रही हैं। पार्टी अपनी एक सीट बचाने की कोशिश में है, लेकिन संख्या बल के कारण चुनौतीपूर्ण स्थिति है। नीरज डांगी जैसी मौजूदा सदस्यता और आंतरिक चर्चाओं के बीच उम्मीदवार चयन पर मंथन जारी है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों की रणनीति और अनुशासन का भी परीक्षण होगा। क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच पार्टियां अपने विधायकों पर कड़ी नजर रख रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 14:53:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओबीसी आरक्षण पर बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: मौजूदा ओबीसी उप-वर्गीकरण रद्द, 66 समुदाय सूची में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने ओबीसी सूची का उप-वर्गीकरण ढांचा रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट बैठक के बाद जारी अधिसूचना के अनुसार, अब केवल 66 समुदायों को 7% आरक्षण का लाभ मिलेगा। सरकार पिछली तृणमूल सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्रों की नए सिरे से समीक्षा करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-west-bengal-government-existing-obc-sub-categorization-canceled/article-154454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bengal-cm.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बुधवार को राज्य सरकार की नौकरियों और पदों में आरक्षण से जुड़े अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची के मौजूदा उप-वर्गीकरण ढांचे को रद्द कर दिया। इसके साथ ही सरकार ने सात प्रतिशत आरक्षण के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत केवल 66 समुदायों को बनाए रखने का फैसला किया है। यह अधिसूचना मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में नबन्ना (सचिवालय) में हुई दूसरी कैबिनेट बैठक के एक दिन बाद आई है। इस बैठक में राज्य सरकार ने ओबीसी सूची की दोबारा जांच करने और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए प्रमाण पत्रों की समीक्षा करने का निर्णय लिया था।</p>
<p>मंत्रिमंडल की दूसरी बैठक में लिए गए इस फैसले को इसके कानूनी और राजनीतिक निहितार्थों के कारण नए प्रशासन का सबसे बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। सोमवार को हुई बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा था, "मंत्रिमंडल ने ओबीसी श्रेणी के भीतर मौजूदा उप-वर्गीकरण प्रणाली को समाप्त करने, पश्चिम बंगाल सरकार के तहत ओबीसी समुदायों के लिए आरक्षण के प्रतिशत की समीक्षा करने और राज्य की ओबीसी सूची की नए सिरे से जांच करने का निर्णय लिया है।"</p>
<p>पॉल ने कहा था, "इस मामले की नए सिरे से जांच की जाएगी। राज्य सरकार उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) के निर्देशों के अनुसार ही जातियों या समूहों को सूची में शामिल करने के बारे में फैसला करेगी।"राज्यपाल के निर्देश पर मंगलवार को जारी एक अधिसूचना में नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने घोषणा की कि 66 समुदायों को ओबीसी श्रेणी के तहत सात प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा। पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण और उप-वर्गीकरण से जुड़ा यह विवाद वाम मोर्चा सरकार के अंतिम दौर और मार्च 2010 से मई 2012 के बीच तृणमूल कांग्रेस सरकार के पहले कार्यकाल के समय का है। उस अवधि के दौरान, राज्य में 77 समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल किया गया था। इनमें से वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल के दौरान 42 मुस्लिम समुदायों को शामिल किया गया था। इसके बाद आरोप लगे कि आरक्षण का लाभ धर्म के आधार पर दिया जा रहा है, जिससे यह मामला कानूनी विवादों में फंस गया।</p>
<p>ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद ओबीसी सूची में 35 और समुदायों को जोड़ा, जिससे यह संख्या बढ़कर 77 हो गई, जिनमें से 75 मुस्लिम समुदाय से थे। वर्ष 2023 में, ममता सरकार ने एक नया ओबीसी आरक्षण कानून बनाया, जिसके तहत सभी 77 समुदायों को इसके दायरे में ले आया गया। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में ओबीसी समुदायों की कुल संख्या बढ़कर 179 हो गई थी। इस नए आरक्षण कानून को हालांकि अदालत में चुनौती दी गई, जहां याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि धर्म के आधार पर दिए गए आरक्षण को रद्द किया जाना चाहिए।</p>
<p>इसके बाद, 22 मई 2024 को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य की ओबीसी सूची में 113 समुदायों को शामिल करने के फैसले को रद्द कर दिया, जबकि 66 समुदायों को सूची में बने रहने की अनुमति दी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि कई समुदायों को शामिल करने का काम मुख्य रूप से धार्मिक आधार पर किया गया था। इस फैसले के बाद वर्ष 2010 से जारी किए गए लगभग पांच लाख ओबीसी प्रमाणपत्र अमान्य हो गए थे। तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बाद में उच्च न्यायालय के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। मार्च 2025 में, पिछली राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग एक नया सर्वेक्षण करेगा और एक संशोधित ओबीसी सूची तैयार करेगा।</p>
<p>इसी साल जून में, ममता सरकार ने 76 नए समुदायों को शामिल करते हुए एक नई सूची जारी की, जिससे कुल ओबीसी श्रेणियों की संख्या 140 हो गई। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने संशोधित सूची के माध्यम से व्यावहारिक रूप से लगभग सभी पुराने समुदायों को वापस शामिल कर लिया है। पिछले साल 17 जून को, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उस संशोधित अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस रोक के आदेश को चुनौती देते हुए फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। पिछले साल जुलाई में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी थी और वर्तमान में यह मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लंबित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:21:16 +0530</pubDate>
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                <title>शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला : सार्वजनिक जगहों पर पशु वध पर प्रतिबंध, जानें उल्लघंन पर कितनी होगी सजा ?</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अधिसूचना के अनुसार, केवल 14 वर्ष से अधिक आयु के "अनुपयुक्त" पशुओं का वध ही प्रमाणित बूचड़खानों में संभव होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जेल और जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-shubhendu-government-ban-on-slaughter-of-animals/article-153769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/west-bengal-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के चार दिन बाद भारतीय जनता पार्टी सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध लगाने वाली अधिसूचना जारी की। अधिसूचना में राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 को पूरे राज्य में सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि यह कलकत्ता उच्च न्यायालय के 6 अगस्त, 2018 के फैसले और 8 जून, 2022 को जारी संबंधित सरकारी दिशानिर्देश के अनुसार जारी की गई है।</p>
<p>यह अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब आरोप लगे थे कि एक विशेष समुदाय सड़क पर पशुओं का वध कर रहा था, जिससे आस-पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को असुविधा हो रही थी। आठ सूत्रीय निर्देश में, राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के सभी वैध बूचड़खानों को पशु वध संबंधी कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अधिसूचना के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को बैल, बछड़े, गाय, बछड़े, नर और मादा भैंस, भैंस के बच्चे और बधिया भैंस सहित किसी भी पशु का वध करने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि पशु को वध के लिए उपयुक्त घोषित करने वाला प्रमाण पत्र प्राप्त न हो जाए।</p>
<p>अधिसूचना में कहा गया है कि ऐसे प्रमाण पत्र नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष द्वारा सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से जारी किए जा सकते हैं। प्रमाण पत्र तब जारी किया जा सकता है जब अधिकारी लिखित रूप से संतुष्ट हों कि पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का है और प्रजनन या काम के लिए उपयुक्त नहीं है, या आयु, चोट, विकृति या बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है।</p>
<p>इसमें आगे कहा गया है कि यदि ऐसे प्रमाण पत्र के लिए आवेदन अस्वीकृत कर दिया जाता है, तो प्रभावित व्यक्ति अस्वीकृति प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार से संपर्क कर सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन पशुओं के लिए वध प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उनका वध केवल नगर निगम के वधशालाओं या स्थानीय प्रशासन द्वारा नामित वधशालाओं में ही किया जा सकता है। ऐसे पशुओं का खुले सार्वजनिक स्थानों पर वध करना सख्त वर्जित है।</p>
<p>अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि नगर निगम अध्यक्षों, पंचायत समिति अध्यक्षों, सरकारी पशु चिकित्सा अधिकारियों या उनके द्वारा कानून के प्रवर्तन के लिए अधिकृत किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम के तहत किए गए निरीक्षणों में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद या 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि 1950 के अधिनियम के तहत सभी अपराधों को गंभीर प्रकृति का माना जाएगा। अधिसूचना में यह भी बताया गया है कि इस मामले से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के प्रासंगिक निर्णय सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 13:23:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली के स्कूलों में तेज गर्मी को लेकर मानवीय पहल : अब बच्चों को पीने की पानी की याद दिलाने के लिए बजेगी घंटी, हर 45-60 मिनट बाद मिलेगा हाइड्रेशन ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी को देखते हुए दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब स्कूलों में प्रार्थना सभा और आउटडोर गतिविधियों पर रोक रहेगी। बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के लिए हर घंटे "वॉटर बेल" बजेगी। सभी स्कूलों को सुरक्षा मानकों का पालन कर 2 मई 2026 तक रिपोर्ट सौंपनी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/humanitarian-initiative-regarding-extreme-heat-in-delhi-schools-now-bell/article-151805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/delhi-school.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राजधानी में तेज़ होती गर्मी और लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसके तहत स्कूलों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।</p>
<p>नए आदेश के अनुसार, खुले मैदान में होने वाली प्रार्थना सभाओं और कक्षाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यदि सभा आयोजित करना जरूरी हो, तो उसे कम समय के लिए और छायादार या भवन के भीतर ही किया जाएगा। विद्यार्थियों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए “पानी की घंटी” व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत हर 45 से 60 मिनट में घंटी बजाकर बच्चों को पानी पीने की याद दिलाई जाएगी। साथ ही स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।</p>
<p>भीषण गर्मी को देखते हुए सभी आउटडोर खेल और शारीरिक गतिविधियां फिलहाल बंद रहेंगी। बच्चों को हल्के सूती कपड़े पहनने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए भी जागरूक किया जाएगा। स्कूलों में हीटवेव और हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित होंगे। जरूरत पड़ने पर तुरंत प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी। हर स्कूल में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा और 2 मई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 12:59:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका : राज्यसभा सभापति ने दी आप से अलग हुए सात सदस्यों को भाजपा में विलय की मान्यता, राज्यसभा में सांसदों की संख्या 113 हुई</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए राघव चड्ढा अब राज्यसभा में भाजपा के सदस्य बन गए हैं। राज्यसभा सचिवालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे उच्च सदन में भाजपा की सदस्य संख्या 113 पहुंच गई है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने चड्ढा का स्वागत करते हुए इसे एक स्वाभाविक बदलाव बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-aam-aadmi-party-rajya-sabha-chairman-gave/article-151800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/raghav.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है क्योंकि भाजपा में शामिल होने वाले राघव चड्ढा को पार्टी से बड़ा इनाम मिला है। दरअसल, राज्यसभा में उनको भाजपा पार्टी में शामिल होने की मंजूरी मिल चुकी है। इस मौके पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "ये स्वाभाविक था। उनके कुछ सांसद भी आ रहे हैं तो हम उनका स्वागत करते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसको लेकर राज्यसभा सचिवालय से अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। </p>
<p>राज्यसभा सचिवालय द्वारा सोमवार को जारी सदन में विभिन्न दलों की सदस्य सूची में आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने की घोषणा करने वाले सदस्यों के नाम भाजपा की सूची में आ गए हैं और पार्टी की सदस्य संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी से निर्वाचित सदस्य राघव चड्ढा, डॉ संदीप कुमार पाठक और डॉ अशोक कुमार मित्तल ने गत 24 अप्रैल को राजधानी में एक संवाददाता सम्मेलन कर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सात सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी।</p>
<p>इन सदस्यों में उपरोक्त तीन के अलावा क्रिकेटर हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा सचिवालय की ओर से आज जारी सूची के अनुसार इन सदस्यों को 24 अप्रैल से ही भाजपा के सदस्य के रूप में मान्यता दी गई है। इस सूची में आम आदमी पार्टी के सदस्यों की संख्या घटकर तीन हो गई है। सदन में अब आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के अलावा दो सदस्य  नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह के नाम हैं। आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उप नेता पद से हटा दिया था। उसी के बाद से पार्टी में समस्या उत्पन्न हुई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:48:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : मतदान से 48 घंटे पहले बाइक रैलियों पर प्रतिबंध, आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को नहीं करेगा बर्दाश्त </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने बाइक रैलियों पर रोक लगा दी है। मतदान से 48 घंटे पहले रात में मोटरसाइकिलों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी और पिलियन राइडिंग पर भी पाबंदी होगी। इसका उद्देश्य मतदाताओं को डराने-धमकाने की गतिविधियों को रोकना और शांति व्यवस्था बनाए रखना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ban-on-bike-rallies-48-hours-before-west-bengal-assembly/article-151172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने मोटरसाइकिल के उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लगाये हैं। आयोग द्वारा 20 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, मतदान से 48 घंटे पहले किसी भी प्रकार की बाइक रैली की अनुमति नहीं होगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह देखा गया है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक दल बाइक रैलियां निकालते हैं, जिनके जरिए कई मामलों में मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की जाती है। एक चुनाव अधिकारी ने कहा, “आयोग मतदाताओं को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगा, इसलिए बाइक रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।”</p>
<p>इसके अलावा, इस अवधि में शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक मोटरसाइकिलों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी, सिवाय आपात स्थितियों जैसे चिकित्सा या जरूरी पारिवारिक कारणों के। सुबह छह बजे से शाम छह बजे के बीच भी पिलियन राइडिंग (पीछे बैठकर सफर) पर रोक रहेगी, हालांकि चिकित्सा आपात स्थिति या आवश्यक कार्य जैसे स्कूल बच्चों को ले जाने की स्थिति में छूट दी जा सकती है। मतदान के दिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक सीमित छूट दी जाएगी, जिसमें परिवार के सदस्यों को मतदान और आवश्यक कार्यों के लिए दोपहिया वाहन पर यात्रा की अनुमति होगी। अधिकारियों को इन निर्देशों का व्यापक प्रचार करने और जिला पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर सख्ती से लागू करने के निर्देश दिये गये हैं। यह कदम मतदान से पहले के 48 घंटे के मौन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की डराने-धमकाने की गतिविधियों, अवैध जुटान और चुनाव प्रक्रिया में बाधा को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:07:48 +0530</pubDate>
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                <title>एक साल बाद हटा मणिपुर से राष्ट्रपति शासन, केंद्र सरकार ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कब होगा शपथ ग्रहण समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह फैसला चार फरवरी 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/presidents-rule-removed-from-manipur-after-one-year-central-government/article-141950"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(12)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्र ने बुधवार को मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की। यह निर्णय तत्काल प्रभावी हो गया है। मणिपुर में 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। </p>
<p>गृह मंत्रालय की बुधवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला किया है। यह फैसला चार फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 17:35:11 +0530</pubDate>
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